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                <title>Delhi Govt - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Delhi Govt RSS Feed</description>
                
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                <title>Delhi Pollution: दिल्ली में लगाई गईं सख्त पाबंदियां! इन वाहनों की एंट्री पर लगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[Delhi Pollution: नई दिल्ली। जैसे-जैसे राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, दिल्ली सरकार ने हवा में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को कंट्रोल करने के लिए सख्त पाबंदियां लगाने का फैसला किया है। पर्यावरण मंत्री ने मंगलवार, 16 दिसंबर को एक बयान में कहा कि दिल्ली के बाहर से सिर्फ़ BS-VI गाड़ियों को ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/strict-restrictions-imposed-in-delhi-entry-of-these-vehicles-has-been-banned/article-79269"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/delhi-vhicle-banned.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Delhi Pollution: नई दिल्ली। जैसे-जैसे राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, दिल्ली सरकार ने हवा में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को कंट्रोल करने के लिए सख्त पाबंदियां लगाने का फैसला किया है। पर्यावरण मंत्री ने मंगलवार, 16 दिसंबर को एक बयान में कहा कि दिल्ली के बाहर से सिर्फ़ BS-VI गाड़ियों को ही शहर में आने की इजाज़त होगी। यह भी बताया कि ये नियम मंगलवार से नहीं, बल्कि गुरुवार, 18 दिसंबर से लागू होंगे। Delhi News</p>
<h3 style="text-align:justify;">18 दिसंबर से मना है एंट्री</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि 18 दिसंबर से, जिन गाड़ियों के पास वैलिड पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें गुरुवार से राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल पंपों पर फ्यूल नहीं मिलेगा। मंगलवार को, पर्यावरण मंत्री ने कहा कि मालिकों को नियम का पालन करने के लिए एक दिन का समय दिया गया है। उन्होंने कहा, “कल के बाद, जिन गाड़ियों के पास वैलिड PUC सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें फ्यूल नहीं दिया जाएगा।”</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 16:44:59 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली सरकार लगा सकती है नाइट कर्फ्यू</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। दिल्ली सरकार कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के मद्देनजर नाइट कर्फ्यू लागू कर सकती है। राष्ट्रीय राजधानी कोरोना ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के येलो ग्रेड में प्रवेश करने के करीब है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि नाइट कर्फ्यू पर फैसला लेने पर विचार चल रहा है। अगले दो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-government-may-impose-night-curfew/article-29444"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/arvind-kejriwal2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> दिल्ली सरकार कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के मद्देनजर नाइट कर्फ्यू लागू कर सकती है। राष्ट्रीय राजधानी कोरोना ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के येलो ग्रेड में प्रवेश करने के करीब है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि नाइट कर्फ्यू पर फैसला लेने पर विचार चल रहा है। अगले दो दिनों में इस संबंध में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि जीआरएपी के तहत कोविड -19 स्थिति के संबंध में चार प्रकार के अलर्ट स्तर निर्देशित किए गए हैं। इसी के आधार पर संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए कुछ कदम उठाए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जीआरएपी के अनुसार, <strong>लेवल -1</strong> (येलो) तब जारी किया जाता है, जब लगातार दो दिनों तक सकारात्मकता दर 0.5 प्रतिशत को पार करती है। एक सप्ताह में 1500 नए मामले दर्ज होते हैं और 500 रोगियों को ऑक्सीजन बेड की आवश्यकता होती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेवल -2</strong> (अंबर) तब जारी किया जाता है, जब सकारात्मकता दर लगातार दो दिनों तक 1 प्रतिशत से अधिक हो जाती है। एक सप्ताह के भीतर 3500 नए कोविड -19 मामले दर्ज किए जाते हैं और 700 ऑक्सीजन बेड भर जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेवल-3</strong> (ऑरेंज) लगातार दो दिनों तक सकारात्मकता दर 2 फीसदी से ज्यादा होने पर जारी किया जाता है। साथ ही एक हफ्ते में नए मामलों की संख्या 9000 होनी चाहिए, जिसमें 1000 मरीजों को ऑक्सीजन बेड की जरूरत होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेवर -4</strong> (रेड ) तब जारी किया जाता है कि जब लगातार दो दिनों तक सकारात्मकता दर 5 प्रतिशत से अधिक हो, 16000 से अधिक नए कोविड-19 मामले एक सप्ताह में आते हैं और 3000 रोगी ऑक्सीजन बेड पर भर्ती होते हैं। दिल्ली में रात का कर्फ्यू लेवल-1 के अलर्ट में रहेगा। लेवल-2 और 3 में रात्रि कर्फ्यू के अलावा सप्ताहांत का कर्फ्यू भी लगाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेवल -4</strong> अलर्ट शहर के पूर्ण तालाबंदी का आह्वान किया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को कोरोना के 249 नए मामले दर्ज किए और इसके कारण एक मौत हुई। यहां पर सकारात्मकता दर 0.43 प्रतिशत दर्ज की गई।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Dec 2021 11:15:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>एनएचआरसी ने डीजी जेल, दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने यहां के तिहाड़ जेल में कैदियों के बीच हिंसा की बढ़ती घटनाओं को लेकर महानिदेशक(जेल) और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। एनएचआरसी ने तिहाड़ जेल में कैदियों के बीच हिंसा की बढ़ती घटनाओं के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nhrc-issues-notice-to-dg-jail-delhi-govt/article-27296"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/nhrc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने यहां के तिहाड़ जेल में कैदियों के बीच हिंसा की बढ़ती घटनाओं को लेकर महानिदेशक(जेल) और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। एनएचआरसी ने तिहाड़ जेल में कैदियों के बीच हिंसा की बढ़ती घटनाओं के संबंध में मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया है। ।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 22 सितम्बर को तिहाड़ जेल के एक कैदी ने दूसरे कैदी की बुरी तरह पिटाई की। कैदी के साथ हाथापाई के दौरान एक हेड मैट्रॉन भी घायल हो गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि सितम्बर महीने में जेल के भीतर हुई झड़पों में करीब 30 कैदी घायल हुए हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Sep 2021 10:07:20 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली की हवा पर एनजीटी की तलवार</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण की जानलेवा भयानकता को देखते हुए एक बार फिर सम-विशम कारें सड़कों पर उतारने का फैसला लिया है। इसके मुताबिक सम और विशम नंबर वाले निजी वाहन एक-एक दिन के अंतराल से पांच दिन चलाए जाएंगे, लेकिन इस घोषणा के होते ही राश्ट्रीय हरित अधिकरण ने इस फैसले पर अजीबो-गरीब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ngt-swords-on-delhi-air/article-3512"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/ngt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण की जानलेवा भयानकता को देखते हुए एक बार फिर सम-विशम कारें सड़कों पर उतारने का फैसला लिया है। इसके मुताबिक सम और विशम नंबर वाले निजी वाहन एक-एक दिन के अंतराल से पांच दिन चलाए जाएंगे, लेकिन इस घोषणा के होते ही राश्ट्रीय हरित अधिकरण ने इस फैसले पर अजीबो-गरीब ढंग से रोक लगा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">एनजीटी ने कहा है कि दिल्ली सरकार के इस आदेश पर वह प्रतिबंध तो नहीं लगा रहा है, लेकिन इस फॉर्मूेले को उसकी अनुमति के बाद ही लागू किया जाए। अब इस द्विअर्थी इबारत का क्या अर्थ निकाला जाए ? एनजीटी की स्थापना बिगड़ते पर्यावरण को सुधारने के लिए की गई थी, बावजूद उसने यह विरोधाभासी आदेश क्यों दिया यह समझ से परे है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनजीटी ने दिल्ली में हेलीकॉप्टर से पानी छिड़काव की सलाह भी दी है। लेकिन यह सुझाव खर्चीला होने के कारण अप्रासंगिक है। हालांकि दिल्ली सरकार ने फायर बिग्रेडों के जरिए पेड़ों की धुलाई शुरू कर दी है। जिससे पेड़ों की वायु प्रदूषण सोखने की क्षमता बढ़ जाए। लेकिन यह उपाय कितना कारगर साबित होगा, यह कालांतर में पता चलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल भी दिल्ली में सम-विशम फॉर्मूला लागू किया गया था। तब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण वोट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ऐसे कोई आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, जो यह साबित करे कि सम-विशम योजना लागू करने से वायु प्रदूषण नियंत्रित हुआ हो ? दिल्ली सरकार के साथ संकट यह भी है कि जब भी वह प्रदूषण नियंत्रण के परिप्रेक्ष्य में पहल करती है तो दिल्ली के उपराज्यपाल आदेश में रोड़ा अटका देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर सर्वोच्च न्यायालय भी यह दलील देता है कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के संवैधानिक प्रमुख हैं। लिहाजा दिल्ली सरकार के लिए उनकी सहमति अनिवार्य है। अब सवाल उठता है कि क्यों नहीं कि जब दिल्ली में वायु प्रदूषण की भयानकता के चलते जब 20 प्रतिशत रोगियों की वृद्घि एकाएक हो गई हो, तब उपराज्यपाल पर भी क्यों नहीं यह जिम्मेवारी डाली जाती कि वे इस समस्या के निदान की दिशा में पहल करें।</p>
<p style="text-align:justify;">यह तब और जरूरी हो जाता है। जब किसी महानगर के नागरिकों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाए। सारे विद्यालय बंद करना पड़ें। ऐसा अकसर सांप्रदायिक तनाव या युद्घ की स्थिति बनने पर होता है। लेकिन देश की राजधानी धुंआ-धुंआ हुई दिल्ली को प्रदूशित वायु के कहर बरप जाने के कारण झेलना पड़ रहा है। इसके फौरी कारण हरियाणा, पंजाब व उत्तर प्रदेश के खेत में फसलों के जलाए जा रहे अवशेष बताए जा रहे हैं। डंठल जलाने कोई नई बात नहीं है, ये हजारों साल से चली आ रही परंपराए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए सारा दोष इन पर मढ़ना, मूल समस्या से ध्यान भटकाना है। असली वजह बेतरतीब होता शहरीकरण और दिल्ली में बढ़ते वाहन हैं। इन वाहनों से निकले धुंए की वजह से पहली बार पता चला है कि हम अपने पेड़-पौधों में कार्बन डाईआॅक्साइड सोखने की क्षमता खो रहे हैं। संयुक्त राष्टÑ के एक ताजा शोध से भी पता चला है कि वायु प्रदूशण के चलते दुनिया में 30 करोड़ बच्चों को जहरीली हवा में सांस लेनी पड़ रही है। इस स्थिति के चलते भारत में प्रति वर्श 25 लाख लोगों की मौतें हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही स्थिती बनी रही तो दिल्ली से लोग पलायन को मजबूर हो जाएंगे।जाड़ों के शुरू होने से पहले और दीवाली के आसपास पिछले कई सालों से यही हालात पैदा हो रहे हैं। जागरूकता के तमाम विज्ञापन छपने के बावजूद न तो आतिशबाजी का इस्तेमाल कम हुआ और न ही पराली जलाने पर अंकुश लगा। पराली जलाने पर तो जुर्माना वसूलने तक की बात कही गई थी। लेकिन ठोस हकीकत तो यह है कि किसानों के पास पलारी को जलाकर नश्ट करने के अलावा कोई दूसरा उपाय है ही नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि केंद्र व राज्य सरकारें विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च करने की बजाय पराली से आधुनिक ईंधन, जैविक खाद और मवेशियों का आहार बनाने वाली मशीनें धान की ज्यादा पैदावार वाले क्षेत्रों में लगवा देतीं, तो कहीं ज्यादा बेहतर था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने मन की बात कार्यक्रम में ठूंठ व कचरा नहीं जलाने की अपील की थी, लेकिन इस अव्यावहारिक नसीहत का कोई असर नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के नजरिये से पिछले साल राष्ट्रीय हरित पंचाट ने कई कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए थे। उनमें से बाहरी ट्रकों के शहर में प्रवेश पर रोक लगाने की कोशिश की थी। निजी वाहनों के लिए प्रायोगिक तौर पर एक दिन सम और दूसरे दिन विशम कारें चलाने की योजना लागू की गई। ज्यादा डीजल खाने वाली नई कारों के पंजीयन पर आंशिक रोक लगाई गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों के खिलाफ भी सख्ती बरतने की बात कही गई थी। दस साल पुरानी कारों को सड़कों से हटाने के निर्देश दिए गए। लेकिन परिणाम शून्य रहा। यहां तक की वाहनों के बेवजाह इस्तेमाल की आदत पर भी अंकुश लगाना संभव नहीं हो सका। मसलन बीमारी को जान लेने के बाद भी हम उसका इलाज नहीं कर पा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने की यही सबसे बड़ी विडंबना है। लिहाजा ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन लगातार वायुमंडल में बढ़ रहा है।अब तक तो यह माना जाता रहा था कि वाहनों और फसलों के अवशेषों को जलाने से उत्पन्न होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में पेड़-पौधों की अहम् भूमिका रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेड़ अपना भोजन ग्रहण करने की प्रक्रिया में कार्बन डाइआॅक्साइड सोखते हैं और आॅक्सीजन छोड़ते हैं। यह बात सच भी है, मगर अब पहली बार देश और दुनिया में यह तथ्य सामने आया है कि बढ़ता प्रदूषण पेड़-पौधों में कार्बन सोखने की क्षमता घटा रहा है। बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के लिए जिस तरह से पेड़ों को काटा जा रहा है, इस कारण भी पेड़ों की प्रकृति में बदलाव आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">शहरों को हाईटैक एवं स्मार्ट बनाने की पहल भी कहर ढाने वाली है।वाहनों की अधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों में पेड़ों में कार्बन सोखने की क्षमता 36़75 फीसदी कम पाई गई है। यह तथ्य देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान के ताजा शोध से सामने आया है। संस्थान की जलवायु परिवर्तन व वन आकलन प्रभाव विभाग के वैज्ञानिक डॉ हुकूम सिंह ने ‘फोटो सिंथेसिस एनालाइजर‘ से कर्बन सोखने की स्थिति का पता लगाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">लैगेस्ट्रोमिया स्पेसियोसा नाम के पौधे पर यह अध्ययन किया गया। इसके लिए हरियाली से घिरे वन अनुसंधान संस्थान और वाहनों की अधिक आवाजाही वाली देहरादून की चकराता रोड का चयन किया गया है। बाद में इन नतीजों का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद उपरोक्त स्थिति सामने आई।संस्थान के परिसर में पौधों में कार्बन सोखने की क्षमता 9़96 माइक्रो प्रति वर्गमीटर प्रति सेकेण्ड पाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि चकराता मार्ग पर पौधों में यह दर महज 6़3 रही। इसके कारणों की पड़ताल करने पर ज्ञात हुआ कि पौधों की पत्तियां प्रदूषण से ढंक गईं। इस हालत में पत्तियों के वह छिद्र अत्याधिक बंद पाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">जिनके माध्यम से पेड़-पौधे प्रकाश संश्लेशण (फोटो सिंथेसिस) की क्रिया कर कार्बन डाइआॅक्साइड सोखते हैं। छिद्रो को खोलने के लिए पौधे से भीतर से दबाव भी डालते हैं। दबाव का यह उल्लघंन का ग्राफ भी वन परिसर के पौधों की तुलना में चकराता मार्ग के पौधों में तीन गुना अधिक रिकोर्ड किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह अध्यन संकेत दे रहा है कि इंसान ही नहीं प्रदूशित वायु से पेड़-पौधे भी बीमार होने लग गए हैं। इसलिए जिस तरह पर्यावरण पर चौतरफा मार पड़ रही है, उसे सुधारने के लिए भी चहुंमुखी प्रयास करने होंगे। हर समस्या को लेकर व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने या फिर जनहित याचिका न्यायालय के दिशा निर्देशों से भी कोई कारगार परिणाम निकलने वाले नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-प्रमोद भार्गव</strong></p>
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                <pubDate>Sun, 12 Nov 2017 03:30:44 +0530</pubDate>
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