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                <title>सर्फिंग में एशियाई खेलों का कोटा हासिल कर भारत ने रच दिया इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[थुलुस्धू, मालदीव, (एजेंसी)। भारतीय सर्फिंग के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन रहा जब एशियाई सर्फिंग चैंपियनशिप 2024 में भाग लेने वाली टीम ने एशियाई खेल 2026 के लिए अपना पहला कोटा हासिल कर लिया। ये कोटा चैंपियनशिप में भारतीय सर्फ़रों द्वारा अर्जित रैंकिंग अंकों के आधार पर अर्जित किए गए हैं। कल चैंपियनशिप के सेमीफाइनल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/india-created-history-by-securing-asian-games-quota-in-surfing/article-61471"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/maldives.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>थुलुस्धू, मालदीव, (एजेंसी)।</strong> भारतीय सर्फिंग के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन रहा जब एशियाई सर्फिंग चैंपियनशिप 2024 में भाग लेने वाली टीम ने एशियाई खेल 2026 के लिए अपना पहला कोटा हासिल कर लिया। ये कोटा चैंपियनशिप में भारतीय सर्फ़रों द्वारा अर्जित रैंकिंग अंकों के आधार पर अर्जित किए गए हैं। कल चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले किशोर कुमार कड़ी प्रतिस्पर्धा में मामूली अंतर से चूक गए, लेकिन पूरे टूनार्मेंट में उनके शानदार प्रदर्शन ने सुनिश्चित किया कि उनके देश ने एशियाई खेलों के लिए कोटा अर्जित किया। एशियन सर्फिंग चैंपियनशिप 2024, जो एशियन गेम्स 2026 के लिए क्वालीफायर भी है, में आठ भारतीय सर्फर्स ने चार अलग-अलग श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा की।</p>
<p style="text-align:justify;">कई राष्ट्रीय चैंपियनशिप खिताब अपने नाम करने के बाद किशोर कुमार ने आज अंडर-18 लड़कों की श्रेणी में एशिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ सर्फ़रों के खिलाफ प्रतियोगिता में प्रवेश किया। वह हीट 2 सेमीफाइनल में 8.26 के स्कोर के साथ चीन के चेंगझेंग वांग के ठीक पीछे तीसरे स्थान पर रहे, जिन्होंने 10.00 का स्कोर करके दूसरा स्थान हासिल किया। जापानी सर्फर तारो ताकाई ने 14.50 के स्कोर के साथ उसी हीट में पहला स्थान हासिल किया। किशोर कुमार, जो पहले राउंड 1, राउंड 3 और क्वार्टरफाइनल में पहले स्थान पर रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">टूनार्मेंट में किशोर के बाद एक और सफल सर्फर हरीश मुथु ने भी अपनी छाप छोड़ी क्योंकि वह एशियाई सर्फिंग चैंपियनशिप क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय बने। हालाँकि कड़े मुकाबले में वह पिछड़ गये।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Aug 2024 11:11:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मालदीव में वेकेशन मना रहे हैं रजनीकांत</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। दक्षिण भारतीय सिनेमा के महानायक रजनीकांत इन दिनों मालदीव (Maldives) में वेकेशन मना रहे हैं। रजनीकांत अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने के बाद कुछ दिनों के लिए आराम करने के लिए मालदीव चले गये हैं। मालदीव के एक समुद्र तट से रजनीकांत की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/rajinikanth-is-celebrating-vacation-in-maldives/article-50244"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/rajinikanth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> दक्षिण भारतीय सिनेमा के महानायक रजनीकांत इन दिनों मालदीव (Maldives) में वेकेशन मना रहे हैं। रजनीकांत अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने के बाद कुछ दिनों के लिए आराम करने के लिए मालदीव चले गये हैं। मालदीव के एक समुद्र तट से रजनीकांत की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वह एक फैनी बैग के साथ कैजुअल टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने नजर आ रहे हैं। रजनीकांत पिछले हफ्ते मालदीव गए थे।रजनीकांत ने अपनी आने वाली फिल्में जेलर और लाल सलाम की शूटिंग पूरी कर ली है। Rajinikanth</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="धामी ने चमोली दुर्घटना में जान गंवाने वाले होमगार्ड जवानों को दी श्रद्धांजलि" href="http://10.0.0.122:1245/dhami-pays-tribute-to-home-guard-jawans-who-lost-their-lives-in-chamoli-accident/">धामी ने चमोली दुर्घटना में जान गंवाने वाले होमगार्ड जवानों को दी श्रद्धांजलि</a></p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2023 18:14:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मालदीव को दस करोड़ डॉलर का ऋण, सुरक्षा ढांचे में मदद देगा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। भारत ने मालदीव को ग्रेटर माले कनेक्टिविटी परियोजना सहित विभिन्न परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए दस करोड़ डॉलर के अतिरिक्त ऋण देने के साथ ही देश की रक्षा एवं सुरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए एक नौसैनिक पोत एवं 24 वाहन देने के साथ 61 द्वीपों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-to-provide-100-million-dollar-loan-to-maldives-help-in-security-infrastructure/article-36206"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/maldives.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> भारत ने मालदीव को ग्रेटर माले कनेक्टिविटी परियोजना सहित विभिन्न परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए दस करोड़ डॉलर के अतिरिक्त ऋण देने के साथ ही देश की रक्षा एवं सुरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए एक नौसैनिक पोत एवं 24 वाहन देने के साथ 61 द्वीपों में पुलिस ढांचा मजबूत बनाने में सहयोग देने आज घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की यात्रा पर आये मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के बीच हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय बैठक में ये निर्णय लिये गये। सोलिह कल नयी दिल्ली आये हैं। पहले दोनों नेताओं के बीच एकांत में बातचीत हुई और फिर प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में भारत ने मालदीव को 2030 तक उसके शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करने का आश्वासन दिया। बैठक के बाद श्री मोदी ने अपने प्रेस वक्तव्य में राष्ट्रपति सोलिह का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और मालदीव के मित्रतापूर्ण संबंधों में नया जोश आया है, हमारी नजदीकियां बढ़ी हैं। महामारी से पैदा हुई चुनौतियों के बावजूद हमारा सहयोग एक व्यापक भागीदारी का रूप लेता जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी आज राष्ट्रपति सोलिह के साथ कई विषयों पर व्यापक चर्चा हुई है। उन्होंने हमारे द्विपक्षीय सहयोग के सभी आयामों का आकलन किया और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत मालदीव सुरक्षा बल के लिए 24 वाहन और एक नौसैनिक पोत प्रदान करेगा</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘अभी कुछ देर पहले हमने ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्टस की शुरूआत का स्वागत किया। यह मालदीव की सबसे बड़ी अवसंरचना परियोजना होगी। हमने आज ग्रेटर माले में 4000 सोशल आवासों के निर्माण के परियोजना की समीक्षा की है। मुझे यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता है कि हम इसके अतिरिक्त 2000 सोशल आवासों के लिए भी वित्तीय सहायता देंगे। उन्होंने कहा, ‘हमने 10 करोड़ डॉलर के अतिरिक्त ऋण देने का निर्णय भी किया है, ताकि सभी परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरे हो सकें। मोदी ने कहा कि हिन्द महासागर में पारदेशीय अपराध, आतंकवाद तथा ड्रग्स तस्करी का खतरा गंभीर है और इसलिए रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भारत और मालदीव के बीच करीबी संपर्क और समन्वय पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। इन सभी साझा चुनौतियों के खिलाफ हमने अपना सहयोग बढ़ाया है। इसमें मालदीव के सुरक्षा अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सहयोग भी शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने घोषणा की कि भारत मालदीव सुरक्षा बल के लिए 24 वाहन और एक नौसैनिक पोत प्रदान करेगा। हम मालदीव के 61 द्वीपों में पुलिस सुविधाओं के निर्माण में भी सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा, ‘मालदीव सरकार ने 2030 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य के स्तर पर लाने का लक्ष्य रखा है। मैं इस संकल्प के लिए राष्ट्रपति सोलिह को बधाई देता हूं और यह आश्वासन भी देता हूँ कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारत मालदीव को हर संभव सहयोग देगा। भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विश्व, एक सूर्य, एक ग्रिड, इसकी पहल उठाई है, और इसके तहत हम मालदीव के साथ प्रभावी कदम ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत-मालदीव साझीदारी न सिर्फ दोनों देशों के नागरिकों के हित में काम कर रही है, बल्कि क्षेत्र के लिए भी शांति, स्थिरता और समृद्धि का स्रोत बन रही है। प्रधानमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि मालदीव की किसी भी जरूरत या संकट में भारत सबसे पहले मदद करने वाला रहा है और आगे भी रहेगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 02 Aug 2022 16:47:21 +0530</pubDate>
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                <title>चिंता बढ़ाते पाक-मालदीव संबंध</title>
                                    <description><![CDATA[सार्क के सदस्य देश मालदीव ने भारत के पारम्परिक शत्रु पाकिस्तान के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में समझौता कर भारत के लिए चिंता का नया द्वार खोल दिया हैं। मालदीव की सरकारी विद्युत कंपनी स्टेलको ने पिछले दिनों देश की ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के साथ यह समझौता किया है। मालदीव में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/pak-maldives-relations-increasing-anxiety-2/article-4830"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/pak.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सार्क के सदस्य देश मालदीव ने भारत के पारम्परिक शत्रु पाकिस्तान के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में समझौता कर भारत के लिए चिंता का नया द्वार खोल दिया हैं। मालदीव की सरकारी विद्युत कंपनी स्टेलको ने पिछले दिनों देश की ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के साथ यह समझौता किया है। मालदीव में चीन के निरंतर बढ़ रहे प्रभाव से भारत पहले ही चिंतित है, ऐसे में पाक-मालदीव की जुगलबंदी से नई दिल्ली की परेशानी और बढ़ेगी। हेलीकॉप्टर और वर्क परमिट के मुद्दे पर जारी तनाव के बीच मालदीव ने पाकिस्तान के साथ ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में समझौता कर यह साफ कर दिया है कि मालदीव भारत के हितों से कोई सरोकार नहीं रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
विशिष्ट भौगोलिक एवं सामरिक संरचना के चलते मालदीव भारत के लिए खासा महत्वपूर्ण है। तटीय प्रदेश केरल से केवल तीन सौ किमी की दूरी पर स्थित होने के कारण मालदीव जैसे देश में पाकिस्तान की पैठ बढ़ती है तो भारत को उत्तरी-पूर्वी राज्यों के साथ-साथ दक्षिण से नई सामरिक चुनौतियों का सामना करना पडेÞगा। हिन्द महासागार के रास्ते पश्चिम एशिया से चीन और पूर्वी एशिया की ओर जाने वाला मार्ग इसी द्वीप क्षेत्र से होकर निकलता हैं। इस क्षेत्र का उपयोग भारत व्यापारिक यात्राओं के लिए भी करता है, ऐसे में हिन्द महासागर में अपनी स्थिति मजबूत करने और दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए मालदीव के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना भारत के लिए जरूरी भी है। साल 2000 में चीन द्वारा यहां सैन्यबेस बनाए जाने का मुद्दा भी उठा था। बीच में ऐसी खबर भी आई थी कि चीन ने तत्कालीक राष्ट्रपति अब्दुल गयूम के सामने पनडुब्बियों के सैनिक अड्डे के निर्माण हेतू कुछ द्वीपों के खरीद किए जाने का प्रस्ताव रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन भारत की कड़ी आपत्ति के चलते मालदीव चीन के प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ा। देखा जाए तो मालदीव में भारत की नीति हमेशा से ही ढुलमुल रवैये वाली रही है । पड़ोसी पहले की नीति पर चलने वाली मोदी सरकार ने भी अपने चार साल के कार्यकाल में मालदीव की लगभग उपेक्षा ही की है। साल 2012 में भारत समर्थक मोहम्मद नशीद की लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार के विरूद्ध जब प्रदर्शनों और विरोध का सिलसिला शुरू हुआ तब नशीद भारत से सहयोग की उम्मीद लगाए हुए थे उस वक्त भारत ने नशीद का सहयोग करने के बजाए इसे मालदीव का आंतरिक मामला कहकर चुप्पी साध ली।भारत ने नाशीद की बर्खास्तगी की आलोचना करने के बजाए मोहम्मद वहीद हसन की सरकार को बधाई देकर न केवल नाशीद के जख्मों पर नमक छिड़का बल्कि मालदीव में हुए अलोकतांत्रिक सत्ता परिर्वतन पर भी अपनी मुहर लगा दी। इसी प्रकार जब मालदीव में कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू संग्राहलय को तोड़ा गया तब भी भारतीय नेतृत्व चुप्पी साधे रहा। भारत की चुप्पी का परिणाम यह हुआ कि मालदीव ने भारत की नराजगी की परवाह किये बिना माले स्थित इब्राहिम नासीर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को विकसित किए जाने संबंधित समझौता बिना किसी कारण के रद्द कर दिया। पिछले दिनों भी मालदीव के एक अखबार ने भारत को सबसे बड़ा दुश्मन बताया और कहा कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
देखा जाए तो साल 2012 में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही मालदीव में भारत विरोधी भावनाओं का विस्तार होने लगा है। मौजूदा राष्ट्रपति अबदुल्ला यामीन की कार्यशैली पूरी तरह भारत विरोधी रही है। यामीन के बारे में यहां तक कहा जा रहा है कि वह अपने देश में भारत की किसी तरह की भागीदारी पंसद नहीं करते हैं। पिछले दिनों उन्होंने भारतीयों के लिए वर्क परमिट जारी करना बंद कर दिया था जिसकी वजह से वहां उन परियोजनाओं का काम प्रभावित हो रहा है, जिसमें भारत की भागीदारी है। वर्क परमिट, डॉर्नियर सर्विलांस एयरक्राफ्ट और नौसेना के हेलीकॉपटर से जुड़े मुद्दों को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। डार्नियर सर्विलांस एयरक्राफ्ट की तैनाती के भारत के प्रस्ताव को यामीन सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने के पीछे एक वजह पाकिस्तान को भी बताया जा रहा है। पाकिस्तान ने उसे इसी तरह के एयरक्राफ्ट मुहैया कराने का प्रस्ताव किया है। साल 2013 में भारत की ओर से उपहार में दिए गए दो धु्रव एडवांस लाईट हेलिकॉप्टर को रखने की समय सीमा बढाने से इंकार कर दिया था। यामीन ने इस साल के आंरभ में ही साफ कह दिया था कि भारत अपने हेलिकॉप्टर और पायलटों को वापस बुला ले।</p>
<p style="text-align:justify;">
पाक-मालदीव का ताजा ऊर्जा समझौता ऐसे वक्त में हुआ है, जबकि सटेलको की बहुत सी परियोजनाओं का संचालन चीनी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि मालदीव को पाकिस्तान के साथ समझौता करने की जरूरत क्यों आन पड़ी। दूसरा, पाकिस्तान वित्तीय रूप से भी मालदीव को किसी तरह की मदद पहुंचाने की स्थिति में नहीं है। उसके खुद की अर्थव्यवस्था अब तक के सबसे खराब दौर से गुजर रही है। ऐसे में मालदीव भारत की शर्त पर पाकिस्तान से संबंध बढ़ा कर वहां से क्या हासिल करना चाहता है? तृतीय, सबसे बड़ा प्रश्न समझौते के वक्त को लेकर उठ रहा है। मालदीव ने पाकिस्तान के साथ समझौता ऐसे वक्त में किया है जबकि भारत के न केवल पाकिस्तान के साथ बल्कि मालदीव के साथ भी संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गए है। पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा उरी में किए गए आतंकी हमले के बाद जब भारत ने पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन को रद्द करने की मांग की थी तो केवल मालदीव ही ऐसा देश था जिसने भारत के निर्णय का विरोध किया था। ऐसे विपरीत वक्त में पाकिस्तान के साथ मालदीव का बिजली समझौता भारत के लिए चिंता का सबब बन सकता है। भारत की चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि मालदीव का उपयोग पाकिस्तान भारत के खिलाफ जासूसी के लिए कर सकता है, जिससे इस क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और भी जटील हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
उक्त हालात इस लिए भी चिंताजनक है क्यों कि संकट के समय भारत ने मालदीव की मदद की। साल 1988 में जब पिपुल्स लिबरेशन आगेर्नाइजेशन आॅफ तमिल इल्म से जुडे आतंकवादियों ने मालदीव पर हमला किया तो तात्कालिक राष्ट्रपति अब्दुल गयूम ने भारत सरकार से सहायता की याचना की। इस पर भारत सरकार ने ‘आॅपरेशन कैक्टस’ के तहत सेना भेजकर आतंकवादियों को खदेड़ने में मालदीव की मदद की है।उसके समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भारत वहां नेशनल पुलिस एकेडमी के निर्माण में सहयोग कर रहा है। इसके अलावा समुद्री डाकुओं से सुरक्षा के लिए भारत ने वहां अपने युु़द्ध पोत तैनात कर रखे हैं।  इससे पहले साल 2015 में भी मालदीव की संसद ने विदेशी नागरिकों को अपने देश में भूमि खरीदने संबंधी अधिकार देकर भारत के सामने एक तरह का खतरा पैदा कर दिया है। इस अधिकार के तहत कोई भी विदेशी नागरिक मालदीव की अर्थव्यवस्था में एक अरब डॉलर का निवेश करके भूमि का स्थाई मालिक बन सकता है। प्रर्यटन पर आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण मालदीव ने आयात-निर्यात नियमों में कई प्रकार की ढील दे रखी हैं। इसकी आड़ में जिहादी तत्व बेनामी व फर्जी कंपनियों के मार्फत मालदीव में धन एकत्रित करते हैं। बाद में इसी धन का प्रयोग श्रीलंका, केरल और तमिलनाडू में विध्वसंक गतिविधियों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसे अलावा मालदीव में एक हजार से अधिक ऐसे द्वीप हंै, जो पूरी तरह निर्जन और विरान है। जिनकी निगरानी और सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम मालदीव सरकार ने नहीं कर रखा है। ऐसी स्थिति में भारत का चिंतित होना लाजमी है। कोई संदेह नहीं कि मालदीव से भारत के लिए सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ रही हैं। पाक-मालदीव के बीच बढ़ते संबंध भारत के सामने नई मुश्किल पैदा करेगे इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी, इस तथ्य को नहीं भुलना चाहिए कि मालदीव सार्क का महत्वपूर्ण सदस्य है, दक्षिण एशिया में अगर भारत को अपना प्रभुत्व बनाए रखना है तो उसे हर हाल में मालदीव को साथ रखना ही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>एन.के. सोमानी</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Jul 2018 06:00:44 +0530</pubDate>
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                <title>मालदीव में भारत के लिए चुनौती</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/challenge-for-india-in-maldives/article-3571"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/maldiv.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">संवैधानिक संकट में घिरा मालदीव कूटनीतिक मोर्चे पर भारत के लिए नई चुनौती बन गया है। मालदीव ने क्षेत्रीय देशों की समुद्री सेना के अभ्यास में शामिल होने के लिए भारत के न्यौता को ठुकरा दिया है। चाहे मालदीव ने स्पष्ट तौर पर न्यौता न ठुकराने का कोई कारण नहीं बताया, लेकिन हालातों से स्पष्ट है कि मालदीव ने चीन को खुश करने और भारत को चिढ़ाने के लिए ही ऐसा किया है। यामीन सरकार द्वारा आपातकाल का घोषणा करने और इसे एक महीने के लिए आगे बढ़ाने के खिलाफ भारत ने सख्त टिप्पणी की थी। भारत की इस टिप्पणी से मालदीव सहित चीन भी सकते में था।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन द्वारा कहा गया था कि भारत मालदीव के आतंरिक मामलों में दखल न दे और मालदीव सरकार भी संकट से उभरने के लिए समर्थ है। दरअसल चीन और मालदीव की गिटमिट भारत के लिए चुनौती बन गई है। चीन पाकिस्तान और नेपाल में पहले ही अपनी जड़ें मजबूत कर चुका है। श्रीलंका और बांग्लादेश में उसकी कोशिशें अवश्य नाकाम हो रही हैं लेकिन इन देशों में चीन ने अपनी मुहिम जारी रखी हुई है। डोकलाम विवाद का कुछ हद तक समाधान होने के बावजूद चीन भूटान में अपने पैर पसारने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन का सरकारी मीडिया निरंतर भारत के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहा है। दूसरे तरफ अरूणाचल प्रदेश में भारतीय शासन-प्रशासन की सरगर्मियों पर चीन किंतु-परंतु करने से गुरेज नहीं कर रहा। भारत के लिए इन हालातों से निपटने और शक्ति संतुलन कायम रखने में बड़ी रुकावट दो विरोधी ताकतें अमेरिका और रूस के साथ बराबर दोस्ती वाली कूटनीति है। इस असमंजस्य के कारण ही कभी अमेरिका भारत के प्रभाव में पाक की खिंचाई करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कभी रूस-भारत की मित्रता के मद्देनजर पाकिस्तान से नरमी ईस्तेमाल करता है। नि:संदेह हमारी गुट निर्पेक्षता कमजोर पड़ी है, इसके बावजूद हम अमेरिका से अपेक्षित समर्थन प्राप्त करने में समर्थ नहीं हुए। अब मालदीव में चीन का बढ़ रहा प्रभाव काफी मुश्किल भरा है। मालदीव का बाद में हमदर्द बना चीन उसका सबसे बड़ा घनिष्ठ मित्र होने का दावा कर रहा है। छोटे व गरीब देशों में चीन के पैसे और तकनीक की ताकत का मुकाबला करने के लिए भारत को मजबूत ठोस कूटनीति बनाने की जरूरत है, ताकि नेपाल की तरह कहीं भूटान और मालदीव भी हमारे हाथों से न निकल जाएं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Mar 2018 03:09:29 +0530</pubDate>
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