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                <title>हमेशा अच्छे लोगों का संग करें</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/always-association-with-good-people/article-3575"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/saint-dr.-msg-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)। </strong>पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव सत्संग में चलकर आता है, उसके जन्मों-जन्मों के पार्प-कर्म खत्म हो जाया करते हैं। सच वो अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब है और संग उसका मालिक की भक्ति-इबादत करके उस सच का साथ करना है। इन्सान जैसा संग करता है, उस पर वैसा रंग चढ़ता जरूर है परंतु यह बहुत जरूरी है कि इन्सान बुरा संग न करे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि कहीं भी, कोई किसी को बुरा कहता हो, चुगली, निंदा, बुराई गाता हो, जहां तक संभव हो किनारा कर जाओ।</p>
<p style="text-align:justify;">मजबूरीवश कहीं पर सुनना पड़ता है तो पांच-सात मिनट सुमिरन करो। मालिक से दुआ करो कि मालिक मुझे इस पाप-कर्म से बचाओ। फिर जो करेगा वो ही भरेगा, आपको कुछ नहीं होता। जहां तक हो इन्सान को अच्छे लोगों का संग करना चाहिए। जितना भी आप अच्छाई, भले पुरुषों का संग करोगे, आपके दिलो-दिमाग में मालिक के प्यार-मोहब्बत की लगन लगेगी। उसकी कृपा-दृष्टि के आप काबिल बनेंगे। उसकी दया-मेहर, रहमत बरसेगी और आप तमाम उन खुशियों के हकदार बनते जाएंगे, जो आपके भाग्य में हैं और जो आपके भाग्य में नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि सत्संग में आकर वचनों पर अमल करने वाले जीवों के भाग्य बदल जाया करते हैं। सत्संग सुनो और अमल करो। बिना अमल के इन्सान को कोई खुशी हासिल नहीं होती। आप अगर अमल करते हैं, वचन सुनकर उनको मानते हैं तो ही खुशियों के हकदार बनते हैं। यदि आप सत्संग सुनकर अमल नहीं करते तो आप भाग्यशाली तो क्या बनोगे जन्मों-जन्मों के पाप-कर्मों को भी नहीं काट सकते। सत्संग में सच सुनाया जाता है। सत्संग में उस अल्लाह, राम के साथ जोड़ा जाता है। जो सुना करते हैं, विचार किया करते हैं उन्हीं का बेड़ा पार होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि जो मन की तकरार में आ जाता है वो संतों के वचनों की परवाह नहीं करता। संतों के वचन संतों के लिए नहीं होते बल्कि सारी सृष्टि के लिए होते हैं। उनका खुद का कोई वचन नहीं होता। जैसा भगवान ख्याल देते हैं उसी के अनुसार संत, पीर-फकीर कहते रहते हैं। तो सुनो और अमल करो। सुनकर अमल करने से ही बेड़ा पार होता है। संत, पीर-फकीर कहें कि इस रास्त मत चलो तो उस रास्ते पर कभी न चलो। एक बार कहना काफी होता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर आपका मन उत्तेजित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गुमराह करता है तो अपने मन से लड़ो क्योंकि जिस रास्ते से संत रोक दें वो रास्ता सुखमय हो ही नहीं सकता। चाहे मन कितने ही सब्जबाग दिखाए, कितने ही कल्पनाओं के घोड़े दौड़ाए। यकीन मानो, आने वाला समय आपके लिए भयानक हो सकता है। इसलिए वचन सुनो और अमल करो। गलत रास्ता अपनाने की तो सोचो भी मत, चलना तो दूर की बात। जो सुनकर अमल किया करते हैं, मान लेते हैं कि मैंने इस रास्ते पर नहीं जाना वही खुशियों के हकदार बनते हैं। उनके ऊपर ही मालिक की दया-मेहर मुसलाधार बरसेगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Mar 2018 03:26:03 +0530</pubDate>
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