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                <title>Shah Satnam Singh Ji Maharaj - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Shah Satnam Singh Ji Maharaj RSS Feed</description>
                
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                <title>MSG Bhandara Month: ‘‘कोई बात नहीं भाई! इसे अपनी कसर निकाल लेने दो।’’</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: एक बार राजस्थान में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज एक सत्संगी के घर में पधारे हुए थे। बाहर बैठे सेवादारों के पास करीब 80 वर्षीय बुजुर्ग अपनी 14-15 साल की पोती के साथ दूध लेकर आ गया। पूछने पर पता चला कि उस बुजुर्ग ने पूज्य बाबा सावण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/this-is-how-the-words-of-true-saints-come-true/article-80090"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-shah-satnam-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: एक बार राजस्थान में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज एक सत्संगी के घर में पधारे हुए थे। बाहर बैठे सेवादारों के पास करीब 80 वर्षीय बुजुर्ग अपनी 14-15 साल की पोती के साथ दूध लेकर आ गया। पूछने पर पता चला कि उस बुजुर्ग ने पूज्य बाबा सावण सिंह जी महाराज से नाम शब्द लिया हुआ था व उसकी पोती ने पूज्य परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से नाम दान लिया हुआ था। वह बुजुर्ग कहने लगा कि हमें पूज्य परम पिता जी से मिलना है। सेवादार कहने लगा कि परम पिता जी अभी बाहर घूमने जाएंगे व जब वापिस आएं तो आप पिता जी से मिल लेना। बुजुर्ग कहने लगा,‘‘नहीं जी! हमें तो अभी मिलना है’’ MSG Bhandara Month</p>
<p style="text-align:justify;">बातों-बातों में उन्होंने बताया, ‘‘एक बार पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज ने मुझे कहा था कि आपको फिर कभी मिलेंगे। फिर मैं शराब पीने लग गया था। अब मुझे मेरी पोती लेकर आई है। मैंने पूजनीय परम पिता जी से माफी भी लेनी है।’’वह मिन्नतें करने लगा कि मुझे पूजनीय परम पिता जी से तुरंत मिला दो। मैं पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के लिए घर से हलवा बनाकर लाया हूं। इतने में पूजनीय परम पिता जी ने एक सेवादार को अंदर बुलाया व पूछने लगे, ‘‘क्या बात है?’’ उस सेवादार ने सारी बात पूजनीय परम पिता जी को बताई। पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया,</p>
<h3>मन का बोझ दर्शन करने से हलका हो गया</h3>
<p style="text-align:justify;">‘‘उनको अंदर भेज दो।’’ वे अंदर चले गए व बैठते ही उस बुजुर्ग ने अपना सिर पूजनीय परम पिता जी के पवित्र चरणों में रख दिया। जब पास खड़े सेवादार ने उसे थोड़ा पीछे करना चाहा तो पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया,‘‘कोई बात नहीं भाई! इसे अपनी कसर निकाल लेने दो।’’ फिर वह बुजुर्ग पूरे वैराग्य में आ गया व रो-रो कर उसके मन का बोझ पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के दर्शन करने से हलका हो गया। पूजनीय परम पिता जी ने उसे अपनी रहमत से निहाल करते फरमाया,‘‘हां भाई! ठीक है, खुश है अब।’’ उसने कहा, ‘‘हां पिता जी!’’ मैं तो काफी समय से शराब पीता रहा हूं, मुझे माफ कर दो जी।</p>
<p style="text-align:justify;">‘‘परम पिता जी ने फरमाया, कोई बात नहीं बेटा, माफ है, माफी के लिए ही तुझे यहां बुलाया है।’’ फिर परम पिता जी उस बर्तन की तरफ इशारा कर फरमाने लगे, ‘‘यह क्या है भाई? लगता है हलवा है।’’ फिर पूजनीय परम जी ने हलवा खुद भी ग्रहण किया व सेवादारों को भी खिलाया। इस तरह पूजनीय परम पिता जी ने पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज के वचनों को पूरा किया। MSG Bhandara Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 10:13:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जब परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज जींद में सत्संग करने पधारे&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[बहन शकुन्तला इन्सां पत्नी कर्मजीत सिंह इन्सां पुत्र अजमेर सिंह, निवासी संगरूर शहर जिला संगरूर से अपनी सास शीला देवी पर हुई पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की रहमत का वर्णन इस प्रकार करती है:- मेरे मायके जींद में हैं। सन् 1977 में मैं तब पांच वर्ष की थी। जब परमपिता शाह सतनाम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/when-the-supreme-father-shah-satnam-singh-ji-maharaj-came-to-jind-for-a-discourse/article-68172"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/shah-satnam-singh-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बहन शकुन्तला इन्सां पत्नी कर्मजीत सिंह इन्सां पुत्र अजमेर सिंह, निवासी संगरूर शहर जिला संगरूर से अपनी सास शीला देवी पर हुई पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की रहमत का वर्णन इस प्रकार करती है:- मेरे मायके जींद में हैं। सन् 1977 में मैं तब पांच वर्ष की थी। जब परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज जींद में सत्संग करने पधारे। तब आपजी की गाड़ी हमारे घर के पास आकर रुकी। जब पूजनीय परमपिता जी गाड़ी से उतरकर उतारे वाले घर जा रहे थे, तो उस समय हम भी (कुछ बच्चे) परमपिता जी के पीछे-पीछे संगत के साथ चल रहे थे। उस दिन परमपिता जी का उतारा नम्बरदार रामधारी के घर पर था। जब परमपिता जी ने घर के अंदर जाने के लिए दहलीज पर पांव रखा, तभी वापिस उठा लिया। परमपिता जी कहने लगे कि गलत है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोबारा फिर पांव रखने लगे, तो फिर से उठा लिया। कहने लगे कि गलत है। इस तरह तीन बार कहकर पीछे लौट पड़े। फिर पूजनीय परमपिता जी प्रेमी नानूं के घर चले गए। कहा जाता है कि नम्बरदार रामधारी के घर उस दिन जो पेटी में शराब की बोतल रखी हुई थी, वह उन्होंने किसी पूजा में चढ़ावा चढ़ाने के लिए रखी थी। उस दिन जींद में धूमधाम से सत्संग हुआ। सत्संग उपरांत जब परमपिता जी नामाभिलाषी जीवों को नाम देने लगे तो मैं तथा मेरे माता-पिता भी नाम लेने वालों में बैठे थे। परमपिता जी ने नाम देते समय कपड़ा अपने मुख पर लिया और फिर हटा दिया। परमपिता जी ने दो आदमियों की तरफ इशारा करते हुए फरमाया, ‘खड़े हो जाओ, तुमने शराब पी रखी है। बाहर चले जाओ।’ उनके बाहर जाने के बाद ही पूजनीय परमपिता जी ने नामाभिलाषी जीवों को नाम की दात बख्श दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उसके बाद मेरी शादी संगरूर (पंजाब) में हो गई। सन् 1994 की बात है। मैं तब गर्भवती थी। उस समय मुझे नौवां महीना लगा हुआ था। मेरी सास पिछले एक साल से बीमार चल रही थी। उन दिनों में तो वह और भी अधिक बीमार हो गई थी। वह न तो कुछ खा रही थी और न ही कुछ चाय-पानी आदि पी रही थी। वह बोलती भी नहीं थी। उस समय मेरी सास और मुझे संभालने के लिए मेरी नानी सास को बुला लिया गया था। सुबह के समय मेरी नानी सास अपने सतगुरु पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज से अरदास करने लगी कि पिता जी, मैं दोनों को कैसे संभालूंगी! आप जी ही अपनी रहमत बरसाओं तथा मुझे शक्ति दो जी। मैं उस समय रसोई में खाना बना रही थी। मेरी सास एकदम ऊंची आवाज में बोली, पिता जी आ गए! पिता जी आ गए! मैं, मेरा पति और नानी सास जल्दी से उनके पास अंदर गए। वह अपने दोनों हाथ जोड़कर बैठी हुई थी। वह कई दिनों से कुछ नहीं बोल रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वह एकदम साफ बोलने लगी। हमें अहसास हुआ कि इन्हें पूज्य पिता जी ही दर्शन देने आए हैं। फिर हमने उसे चाय और मेथी की रोटी दी, जो उसने खा ली, जबकि वह कई दिनों से कुछ भी खा-पी नहीं रही थी। बाद में भी उनको पूजनीय परमपिता जी के दर्शन होते रहते थे। जब पूजनीय पिता जी सामने आते तो वह हंसने लगती, जब पिता जी अदृश्य हो जाते तो वह रोने लगती। सांतवें दिन मुझे प्रसव-पीड़ा शुरू हो गई। उधर मेरी सास की हालत भी ज्यादा खराब हो गई। मेरी नानी सास परेशान हो गई कि दोनों को कैसे संभालूंगी! फिर नानी सास ने पूजनीय परमपिता जी के स्वरूप आगे अरदास की कि हे पिता जी, इसको (मेरी सास को) आठ दिन का समय और बख्श दो, ताकि मैं जच्चा को अच्छी तरह संभाल सकूं। फिर मेरी सास को आराम आ गया। वह आराम से लेटी रहती। उसी रात मुझे बेटे की दात प्राप्त हुई। फिर पूरे आठ दिन बाद रात के एक बजे मेरी सास माता जी मालिक-सतगुरु के चरणों में जा समाए। इस तरह पूजनीय परमपिता जी ने अपने जीवों की स्वयं संभाल की। सतगुरु प्यारे का देन दिया ही नहीं जा सकता। अब पूजनीय सतगुरु जी के मौजूदा स्वरूप पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां अपनी हर खुशी बख्श रहे हैं जी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 12:32:26 +0530</pubDate>
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                <title>रूहानियत के शहनशाह शाह सतनाम जी दातार</title>
                                    <description><![CDATA[सतगुरु मुर्शिद-ए-कामिल पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने मानवता के प्रति जो महान परोपकार किए हैं उसका वर्णन किया ही नहीं जा सकता। आपजी ने दुनिया को परमपिता परमात्मा से मिलने का राम-नाम का बहुत ही सरल रास्ता बताया। आपजी की पावन शिक्षाओं का प्रसार आज पूरे विश्व में हो रहा है। संत प्रकृति की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/special-on-holy-memorial-day/article-65285"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/shah-satnam-singh-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सतगुरु मुर्शिद-ए-कामिल पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने मानवता के प्रति जो महान परोपकार किए हैं उसका वर्णन किया ही नहीं जा सकता। आपजी ने दुनिया को परमपिता परमात्मा से मिलने का राम-नाम का बहुत ही सरल रास्ता बताया। आपजी की पावन शिक्षाओं का प्रसार आज पूरे विश्व में हो रहा है। संत प्रकृति की मर्यादा के अनुसार अपना पंच भौतिक चोला बदलते हैं, लेकिन उनकी आध्यात्मिक ताकत हमेशा अतीत, वर्तमान और भविष्य में कायम रहती है। यह अनोखी मिसाल एमएसजी के रूप में सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल सतगुरु पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने कायम की है। आप जी ने चोला बदलने से पहले ही पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के सीने पर कई बार अपने कर-कमलों से स्पर्श करके यह वचन फरमाए कि, ‘‘हम कहीं नहीं जाएंगे, हम यहीं (सीने पर स्पर्श करते हुए) रहेंगे, यहीं रहेंगे।’’ पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने 13 दिसंबर 1991 को अपना पंच भौतिक चोला बदला। आप जी ने डेरे में उपस्थित जीएसएम सेवादारों को भावुक होते देख वचन किए, हम कहीं नहीं जा रहे, बल्कि जवान होकर आएंगे और दरबार के काम पहले से कई गुना बढ़कर होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने सृष्टि पर अनंत परोपकार किए, जिनका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। आप जी ने लाखों लोगों को नाम-शब्द, गुरु-मंत्र की दात बख्श कर उनकी आत्मा को सच्चा मोक्ष प्रदान किया। आप जी ने केवल सृष्टि के आत्मिक कल्याण का ही बीड़ा नहीं उठाया, बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास, भयानक नशों, धार्मिक भेदभाव, जातिवाद, क्षेत्रवाद, स्वार्थीपन जैसी बुराइयों को दूर करके आपसी भाईचारे और नि:स्वार्थ प्रेम का संदेश दिया। आप जी ने जहां अति जरूरतमंदों, गरीबों व दुखियों की खुद मदद की वहीं समस्त मानव समाज को भी जनसेवा का यह रास्ता दिखाया। आपजी का पावन संदेश है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी का पावन संदेश है, ‘‘परमात्मा एक है और सभी जीव उसकी संतान हैं, कोई बड़ा-छोटा नहीं। परमात्मा को पाने के लिए पैसे, कर्म-काण्ड, दान-‘‘परमात्मा एक है और सभी जीव उसकी संतान हैं, कोई बड़ा-छोटा नहीं। परमात्मा को पाने के लिए पैसे, कर्म-काण्ड, दान-चढ़ावे आदि लोक दिखावे की आवश्यकता नहीं, केवल सच्ची भावना से की गई भक्ति से ही रब्ब को पाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने 25 जनवरी 1919 को पावन धरा श्री जलालआणा साहिब, जिला सरसा में अवतार धारण किया। आपजी के पूजनीय पिता का शुभ नाम सरदार वरियाम सिंह जी सिद्धू और पूजनीय माता का शुभ नाम आस कौर जी था। आप जी अपने माता-पिता की एकलौती संतान थे। जन्म के समय से ही आप जी के नूर से रब्बी जलाल झलकता था, जो एक बार देख लेता बस देखता ही रह जाता। पूजनीय माता जी के उच्च पवित्र संस्कारों द्वारा बचपन से ही आपजी का हृदय रब्बी गुणों (ईश्वरीय भक्ति)और समाज सेवा से भरपूर था।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी परमात्मा की खोज में कई संत-महात्माओं से मिले, उनसे गोष्ठियां भी की परन्तु कहीं से भी आपजी को संतुष्टि नहीं मिली। अंतत: आप जी डेरा सच्चा सौदा में आए तो पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन दर्शन कर व पवित्र अखण्ड वचन सुनकर अंदर-बाहर से निहाल हो गए और आपजी को पूर्ण संतुष्टि मिली। उसी दिन से ही आपजी पूजनीय सार्इं जी को अपना तन-मन आदि सब कुछ सौंपकर दिन-रात सेवा में जुट गए। पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने आप जी पर अपार रहमतें बरसार्इं और आपजी को अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना। गुरगद्दी की बख्शिश से पहले सार्इं जी ने आपजी की कठिन से कठिन अनेक परीक्षाएं ली, जिसमें आप जी ने अपनी दृढ़ निष्ठा से दुनिया को दर्शाया कि गुरु और शिष्य का रिश्ता क्या होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी ने अपने सतगुरु जी के हुक्म अनुसार गिराई गई अपनी बड़ी हवेली और घर का सारा सामान ट्रकों, ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर डेरा सच्चा सौदा सरसा में पहुँचा दिया। परीक्षा अभी भी बाकी थी। सार्इं जी ने सारा सामान आधी रात को ही डेरे से बाहर निकालने और खुद ही रखवाली करने के आदेश दिए। पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज ने अपने सतगुरु प्यारे के वचनों को सिरौधार्य करते हुए कड़ाके की ठंड के बीच स्वयं खुले आसमान के नीचे पूरी रात सामान की रखवाली की। अगले दिन सारा सामान आई हुई साध-संगत में बाँट दिया और आपजी ने अपने मुर्शिद प्यारे के दर्शनों का आनंद लिया। आखिर, बेपरवाह जी ने अपने खेल का राज़ प्रकट करते हुए आपजी को सरदार हरबंस सिंह जी (बचपन का शुभ नाम) से सतनाम सिंह जी महाराज ‘सतनाम’ का खिताब बख्शकर गुरगद्दी पर अपने साथ विराजमान किया। पूजनीय बेपरवाह जी ने साध-संगत में फरमाया कि ‘‘ये (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज) हमारा ही स्वरूप हैं। ये वोही सतनाम है जिसके सहारे ये सब खण्ड-ब्रह्मण्ड खड़े हैं, जो इनकी पीठ के भी दर्शन करेगा वह भी नरकों में नहीं जाएगा। उसका भी उद्धार ये अपनी रहमत से करेंगे।’’</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने 30 वर्षों तक दिन-रात रूहानियत का खूब डंका बजाया और लगभग 12 लाख लोगों को नशे आदि बुराइयां छुड़वाकर नाम-शब्द की बख्शिश की। 23 सितंबर 1990 को आपजी ने साध-संगत की उपस्थिति में पूज्य मौजूदा गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को डेरा सच्चा सौदा में बतौर तीसरे गुरु के रूप में विराजमान करके रूहानियत का इतिहास रचा। आप जी ने उसी दिन से पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को दरबार की तमाम जिम्मेवारियां सौंप दी। आप जी सवा साल तक पूज्य गुरु जी के साथ साध-सगत में ही विराजमान रहे। आपजी 13 दिसंबर 1991 को पंच भौतिक शरीर बदल लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां विगत 34 वर्षों से आपजी का रूहानियत का संदेश पूरे विश्व में फैला रहे हैं। पूज्य गुरु जी की प्रेरणा व अथक प्रयासों से आज सात करोड़ से अधिक लोग नशे आदि सामाजिक बुराइयों को त्याग कर डेरा सच्चा सौदा के साथ जुड़कर आत्मिक व सामाजिक कल्याण का लाभ ले रहे हैं। आज पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज अपने नौजवान स्वरूप पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के रूप में साध-संगत की पल-पल संभाल कर रहे हैं। पूज्य गुरु जी के पावन मार्गदर्शन में सच्चे मुर्शिदे-कामिल की पवित्र याद में सन् 1992 से हर साल 12 से 15 दिसंबर तक ‘याद-ए-मुर्शिद शाह सतनाम जी फ्री आई कैंप’ लगाया जा रहा है, जिससे हजारों लोगों ने अपनी अंधेरी जिंदगी में उजाला पाया है और ये सिलसिला लगातार जारी है जी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Dec 2024 10:30:35 +0530</pubDate>
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                <title>Source of inspiration: &amp;#8221;चौधरी बस पर नहीं जाना। भैंस के साथ जाना है।’’</title>
                                    <description><![CDATA[Source of inspiration: हंसराज पुत्र श्री जीवन राम गांव कोटली, जिला सरसा ने बताया कि मेरे बापू श्री जीवन राम जी अक्सर ही डेरा सच्चा सौदा सरसा में जाया करते थे। सन् 1959 की बात है कि वह पूजनीय शहनशाह मस्ताना जी महाराज के दर्शन करने के लिए डेरा सच्चा सौदा सरसा में आ गए। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/precious-words-of-shah-satnam-singh-ji-maharaj/article-57798"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/shah-satnam-ji1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of inspiration: हंसराज पुत्र श्री जीवन राम गांव कोटली, जिला सरसा ने बताया कि मेरे बापू श्री जीवन राम जी अक्सर ही डेरा सच्चा सौदा सरसा में जाया करते थे। सन् 1959 की बात है कि वह पूजनीय शहनशाह मस्ताना जी महाराज के दर्शन करने के लिए डेरा सच्चा सौदा सरसा में आ गए। उन्होंने अगले दिन ही अपने घर वापिस लौटना था। उस दिन, रात के समय मजलिस थी। जब आप जी मजलिस की समाप्ति के बाद तेरावास में जाने लगे तो मेरे बापू जी ने आप जी के चरणों में अर्ज कर दी कि सांई जी! मैने पहली बस से घर जाना है। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">मुझे जरूरी काम है। आप जी कुछ पल रूककर बोले, ‘‘पुट्टर बस पर नहीं जाना। तूने भैंस लेकर जाना है। एक सेवादार को साथ ले जा। वह तेरे साथ भैंस तेरे घर पहुुंचा देगा।’’ शहनशाह जी ने आगे फरमाया, ‘‘भैंस तुम्हें तंग न करे। इसलिए दो आदमी साथ ले जाना।’’ दो आदमी साथ जाने के लिए तैयार हो गए। मेरे बापू जी के मन में ख्याल आया कि जब दो आदमी भैंस के साथ जा रहे हैं तो मैंने साथ जाकर क्या करना है। Shah Satnam Ji</p>
<h3>फिर मेरा बापू भैंस लेकर उन दोनों के साथ चल पड़ा | Shah Satnam Ji</h3>
<p style="text-align:justify;">मेरे बापू ने सेवादार को यह कह दिया कि तुम भैंस लेकर आ जाना और खुद बस पकड़ने के लिए बस स्टैंड की तरफ चल पड़े। जब पूजनीय शहनशाह मस्ताना जी महाराज को इस बात को पता चला तो उन्होंने मेरे बापू के पीछे एक आदमी भेजकर उन्हें वापिस बुला लिया। सतगुरू जी ने मेरे बापू जी को हुक्म फरमाया,‘‘हमनें तुम्हें बोला है, चौधरी बस पर नहीं जाना। भैंस के साथ जाना है।’’ फिर मेरा बापू भैंस लेकर उन दोनों के साथ चल पड़ा। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">वे तीनों भैंस लेकर जब सिकंदरपुर के बराबर पहुंचे तो वही हिसार जाने वाली बस हमसे थोड़ा पीछे दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बस का बजरी से भरे ट्रक के साथ भयानक हादसा हो गया। कई लोग मौके पर ही मर गए। जानमाल का अत्यंत नुक्सान हुआ। इस प्रकार सच्चे सतगुरू जी ने अपने वचनों के द्वारा मेरे बापू को बस पर चढ़ने से रोका तथा उनकी जान बचाई। Shah Satnam Ji</p>
<p><a title="Shah Mastana Ji: अपने भक्त की सुनीं पुकार, बख्शी ‘खुशियाँ बेशुमार’!" href="http://10.0.0.122:1245/precious-words-of-shah-mastana-ji-listened-to-the-call-of-the-devotee-gave-immense-happiness/">Shah Mastana Ji: अपने भक्त की सुनीं पुकार, बख्शी ‘खुशियाँ बेशुमार’!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 May 2024 10:31:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सच्चे सतगुरू जी ने बच्चे को बख्शी नई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[जीवित ही लेकर जाऊंगी सन् 1975 में पूजनीय परम पिता जी ने गांव जैतो मंडी (पंजाब) में सत्संग किया। मैं गुरू जी के रात्रि-विश्राम वाले घर पर दर्शन करने गई हुई थी। तब एक बहन पूजनीय परम पिता जी के पास आई। आते ही उसने अपना चार-पांच दिन का बच्चा जो मर गया था पूजनीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-true-satguru-lent-a-new-life-to-the-child/article-87083"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/shah-satnam-singh-ji-mahara1.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><strong>जीवित ही लेकर जाऊंगी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सन् 1975 में पूजनीय परम पिता जी ने गांव जैतो मंडी (पंजाब) में सत्संग किया। मैं गुरू जी के रात्रि-विश्राम वाले घर पर दर्शन करने गई हुई थी। तब एक बहन पूजनीय परम पिता जी के पास आई। आते ही उसने अपना चार-पांच दिन का बच्चा जो मर गया था पूजनीय परम पिता जी के सामने रख दिया। पूजनीय परम पिता ने पूछा, ‘‘बेटा, क्या बात हो गई?’’ तब उस बहन ने बताया कि पिता जी, शादी के तेरह साल बाद आपने मुझे एक लड़के की दात बख्शी थी, जो जन्म लेने के पांच दिन बाद ही मर गया है। प्यारे सतगुरू जी, या तो आप जी मुझे लड़का देते ही न, अगर दे ही दिया है तो वापिस न लेते। इस को जीवनदान देकर मेरी लाज रखो।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं तो इसे जीवित ही लेकर जाऊंगी। उसकी करूणामयी आवाज सुनकर शहनशाह जी को दया आ गई और उसे प्यार भरे शब्दों द्वारा हौसला देते हुए फरमाया, ‘‘बेटा, जन्म-मरण तो मालिक के हाथ में है। बच्चे को ध्यान से देखो और ये प्रसाद उसके मुंह में डाल दो।’’ प्रसाद मुंह में डालते ही बच्चे ने धीरे-धीरे आंखें खोल दीं और हाथ पैर हिलाने लगा। अपने बच्चे को जीवित देख उस बहन की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उसकी आंखों से प्रेम की अश्रु धारा बहने लगी। उसने पूजनीय परम पिता जी का लाख-लाख धन्यवाद किया। पूजनीय परम पिताजी ने कहा, ‘‘बेटा, लगता है तुम्हें गलतफहमी हो गई थी, इसमें हमनें कुछ नहीं किया है। ’’ इस प्रकार पूजनीय परम पिता जी ने उस बच्चे के मौत जैसे भयानक कर्म को जिंदगी में बदलकर तथा अपने आपको छुपाते हुए उस परिवार को खुशियां से मालामाल कर दिया।<br />
श्रीमति हाकमो देवी, जैतो मंडी (पंजाब)</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सच्चे सतगुरू जी के वचन, कोई कमी नहीं रहेगी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मार्च, 1958 रामपुरिया बागड़ियां, सरसा (हरियाणा) आप जी ज्ञानपुरा धाम, रामपुरिया बागड़ियां आश्रम में पधारे। उस आश्रम की देखरेख की सेवा दादू बागड़ी करता था। सेवादार सख्त मेहनत द्वारा प्राप्त कमाई करके ही खाते और कल के भोजन की चिंता नहीं करते थे। सतगुरू पर दृढ़ विश्वास रखते हुए सेवा-सुमिरन में लगे रहते। अचानक आप जी के डेरे में पधारने पर सेवादार विचार करने लगे कि सतगुरू जी के साथ कुछ संगत भी है, और भी संगत दर्शनों के लिए व सत्संग सुनने के लिए आएगी पर आश्रम में तो इस समय मात्र एक पाव गुड़ ही है। सभी भगत लंगर पानी के प्रबंध के बारे में सोचने लगे तो भोलेपन में सत् ब्रह्मचारी सेवादार दादू ने अपने दिल की बात मुर्शिद के सामने प्रकट कर दी। शहनशाह जी ने फरमाया, ‘‘देखो, पहले इधर एक शमशान भूमि थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अब डेरा बन गया है, बहुत से लोग सत्संग पर आएंगे और देखेंगे। जो तू कहता है कि राशन किधर से आएगा तो पुट्टर, फिक्र न करो, यहां तो सतगुरू के माल का ढ़ेर लग जाएगा। कोई कमी नहीं रहेगी।’’ शहनशाह जी वहां ग्यारह दिन तक ठहरे। हर रोज सत्संग होती व कमाल के नजारे मिलते। दूर-दराज से बहुत साध-सत्संग आती, रोज खूब मिठाईयां तथा देसी घी का हलवा बनता और साध-संगत को खिलाया जाता। नाम-दान लेने वाले नए लोगों की लाईनें लग जाती। कई-कई बार तो इस आश्रम में एक दिन में एक से ज्यादा बार भी आप जी ने नामदान की दात बख्शी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>वह सब जरूरतों को समझता है</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की सतगुरू के प्रति असीम श्रद्धा भक्ति को देखते हुए पूज्य शाह मस्ताना जी महाराज गांव श्री जलालआणा साहिब में कई बार पधारे। एक बार बेपरवाह जी इस पवित्र गांव में सत्संग के बाद नाम-शब्द की युक्ति प्राप्त करने आए नए जीवों को बुराईयां त्यागने के बारे में समझा रहे थे। किसी-किसी नाम अभिलाषी से परिचय प्राप्त कर रहे थे। किसी-किसी से पूछ भी रहे थे कि तुम नाम-रास्ता क्यों लेना चाहते हो? सभी अपने-अपने तरीके से उत्तर दे रहे थे। इस प्रकार भान सिंह नामक भक्त से बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने पूछा, ‘‘वरी! तू नाम क्यों लेना चाहता है?’’ उसने बताया कि सांई जी, मेरे यहां संतान नहीं है। संतान प्राप्त करने के लिए नाम लेना चाहता हूं। सांई जी ने भान सिंह को बताया, ‘‘अंसी बच्चे थोड़े ही वंडदे हां’’ यह कहकर उसे बाहर भिजवा दिया। भान सिंह भक्त ने संगत की सेवा में तन्मयता से जुट शाह सतनाम जी महाराज जी के पास जाकर उन्हें सारी बात बताई।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘अब तूने जाकर पूज्य शाह मस्ताना जी महाराज के चरणों में अरदास करनी है कि मैंने अपनी आत्मा के कल्याण के लिए नाम लेना है।’’ फिर उस भक्त ने वैसा ही किया। भक्त मान सिंह को नाम लेने वालों में बैठने का इशारा करते हुए बेपरवाह जी ने फरमाया, ‘‘वरी! हमारी बात सुन। एक आदमी की कारीगर (लड़की का मिस्त्री) से यारी है। कारीगर रोज शाम को उस आदमी के पास आता है। उस आदमी के पास मंजी (चारपाई) नहीं है। उस आदमी को क्या जरूरत है कि वह कारीगर को कहे कि मुझे एक मंजी बनाकर दे। कारीगर खुद ही देखता है कि मेरा यार नीचे जमीन पर सोता है क्यों ने इसे मंजी बनाकर दूं। इसी प्रकार जब तुमने नाम शब्द ले लिया है तो उसे जपो। वह मालिक तुम्हारी सभी जरूरतों को समझता है और वह बिन मांगें ही जायज मांगें पूरी करेगा। ’’</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 May 2023 21:00:19 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारत और पाकिस्तान युद्ध में कैसे हुआ चमत्कार, जानें एक फौजी की जुबानी</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपार रहमत सतगुरु ने अपने शिष्य की रक्षा की प्रेमी सुखदेव सिंह फौजी इन्सां पुत्र सचखंड वासी स.बंत सिंह गांव घुम्मण कलां जिला बठिंडा (Bathinda) से अपने सतगुरु पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपने पर हुई रहमतों का वर्णन करता है:- मैं तब […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/how-miracle-happened-in-india-and-pakistan-war/article-45737"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/shah-satnam-singh-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपार रहमत</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;"><strong>सतगुरु ने अपने शिष्य की रक्षा की</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">प्रेमी सुखदेव सिंह फौजी इन्सां पुत्र सचखंड वासी स.बंत सिंह गांव घुम्मण कलां जिला बठिंडा (Bathinda) से अपने सतगुरु पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपने पर हुई रहमतों का वर्णन करता है:-</p>
<p style="text-align:justify;">मैं तब फौज में था जब सन् 1971 का युद्ध पाकिस्तान के साथ हुआ। हम अपनी पल्टन के साथ राजस्थान की बाड़मेर साईड से खोखरापार बार्डर तोड़ कर पाकिस्तान के एरिया में काफी आगे बढ़ गए थे। मैंने अपने सतगुरु परम पिता जी के चरणों में अरदास की कि अब तो आप ही रक्षक हो। क्योंकि युद्ध में कुछ भी हो सकता है। एक दिन मेरी पल्टन के कर्नल साहिब ने मुझे कहा कि तू भक्ति करता है, मेरी पल्टन पर भी मेहर भरा हाथ रखना। तो मैंने कहा कि वह तो सभी का खैर खवाह है। वो सब का ख्याल रखेगा। एक दिन मेरे साथ बघेल सिंह सुबह अंधेरे में पानी की बोतल लेकर बाहर लैटरीन जाने लगा तो उसी समय दुश्मन के ग्यारह जहाजों ने हम पर हमला कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">छ: जहाज रेकी तथा बाकी बम्बबारी कर रहे थे। हमारे सामने बघेल सिंह पर जहाज ने दो बम्ब गिराए। हमने समझा कि बघेल सिंह तो शहीद हो गया। परन्तु जब जहाज बम्बबारी करके चले गए तो मालिक सतगुरु की रहमत से वह उठ कर कपड़े झाड़ने लगा। तो मालिक की रहमत से वह बच गया। हम मालिक की रहमत को देखकर हैरान रह गए। हमारे पास ही एक सूबेदार के ऊपर से जहाज द्वारा गोली लगी जो उसकी छाती में लगने की बजाए उसके पिन्न में अटक कर रूक गई। देखने वाले हैरान रह गए कि यह कैसे हो सकता है। वह पिन्न रखता नहीं था, परन्तु दिखाने के लिए रखने लगा कि इस तरह गोली मेरे पिन्न में अटक गई तो मैं बच गया। यह दोनों बंदे मेरे आस-पास थे। इस तरह सतगुरु परम पिता जी ने मेरी राखी तो की ही की, मेरे आस-पास पल्टन के किसी बंदे को कोई नुक्सान नहीं होने दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जो फौजी सन् 1971 के युद्ध में शहीद हो गए थे, परम पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने उनके लिए दुआ की तथा साध-संगत से उनके लिए सुमिरन करवाया और उनका पार उतारा किया। इस तरह पूजनीय परमपिता जी ने कितनी ही रूहों का उद्धार किया। फौज से रिटायर होकर मैं भारतीय सेना की आॅर्डनेन्स सेवाओं के अधीन बठिंडा छावनी में नौकरी करता था। इस विभाग की तरफ से सेना को असला, वर्दी तथा अन्य सारा सामान सप्लाई किया जाता था। मैं अपने लिए स्पैशल सामान लेने बठिंडा शहर में साईकिल पर आया हुआ था। एक तेज रफ्तार जीप मेरे पीछे से टकराई तो मेरी साईकिल टूट-फूट गई और मैं जीप के नीचे आ गया तथा जीप मुझे करीब दो सौ मीटर तक घसीटती हुई ले गई। लोगों ने शोर मचा दिया कि बंदा मर गया। जीप बड़ी मुश्किल से रुकी। लोगों ने जीप के ड्राईवर को बुरा-भला कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में ड्राईवर बिल्कुल अनजान था। जो जीप को नहीं रोक पाया। मौड़ मंडी के वकील का बेटा जीप चला रहा था तथा वकील साथ बैठा हुआ था। लोगों ने मुझे उठाया और जीप में लम्बा लिटा दिया। मैं पूरी तरह होश में था। वकील का बेटा उलटा मुझे गाली देकर कहने लगा कि आगे आ गया। बाद में वकील ने अपने बेटे को वहां से भगा दिया। मुझे सिविल हस्पताल में दाखिल करवाया गया। जब मेरा चैक-अप किया गया तो मालिक की रहमत से मेरे शरीर के सभी अंग सही थे। मेरे शरीर पर केवल झरीटें थी। उसी दिन मुझे हस्पताल से छुट्टी मिल गई।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ दिनों के बाद मैं अपने सतगुरु परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज (Shah Satnam Singh Ji Maharaj) का धन्यवाद करने के लिए डेरा सच्चा सौदा सरसा आया। जब मुझे परम पिता जी से मिलने की आज्ञा मिली तो मैं पास जाकर वैराग्य में आ गया तथा मेरी आंखों मेें आंसू आ गए। पूजनीय परम पिता जी ने वचन फरमाया, ‘भाई! तेरा टुटिआ तां कुझ नहीं। ’ तो मैंने अर्ज की कि पिता जी, आप हमारे राखे हो। हमारा क्या टूट सकता है। पिता जी, आप जी ने कुछ टूटने दिया ही नहीं। परम पिता जी ने मुझे आशीर्वाद दिया तथा अन्नत खुशियां बख्शी।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं अपने सतगुरु की रहमतों का वर्णन लिख बोल कर नहीं कर सकता। बस धन्य-धन्य ही कर सकता हूं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Apr 2023 20:55:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सच्चे सतगुरु जी ने कुएं का खारा पानी वचनों से किया मीठा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी भूरा सिंह सेवादार गांव मलकाणा, तह. तलवंडी साबो, जिला बठिंडा (पंजाब) से लिखता है कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने किस प्रकार उनके गांव के कुएं का खारा पानी मीठा किया। उस अनोखे खेल का वर्णन इस प्रकार है :- दिसंबर 1965 की बात है कि शहनशाह पूजनीय परम पिता जी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/param-pita-shah-satnam-singh-ji-maharaj-5/article-41360"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/shah-satnam-singh-ji-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रेमी भूरा सिंह सेवादार गांव मलकाणा, तह. तलवंडी साबो, जिला बठिंडा (पंजाब) से लिखता है कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने किस प्रकार उनके गांव के कुएं का खारा पानी मीठा किया। उस अनोखे खेल का वर्णन इस प्रकार है :-</p>
<p style="text-align:justify;">दिसंबर 1965 की बात है कि शहनशाह पूजनीय परम पिता जी ने मलकाणा गांव में सत्संग मंजूर किया। प्रेमी भूरा सिंह तथा उनके गांव की साध-संगत मिल-जुलकर सत्संग की तैयारी कर रही थी। उन्हीं दिनों गांव के कुछ शंकावादी जीवों ने प्रश्न उठाया कि यदि सच्चे सौदे वाले पूर्ण संत-महात्मा हैं तो हमारे गांव के कुएं का खारा पानी मीठा कर दें। सत्संग का दिन आ गया। पूजनीय परम पिता जी वाली दो जहान सच्चे पातशाह जी सत्संग फरमाने के लिए गांव मलकाणा पधारे। शहनशाह जी के वहां पहुंचने पर साध-संगत व प्रेमी भूरा सिंह सेवा-समिति वाले के परिवार ने बहुत ही खुशी मनाई क्योंकि उनका रहबर स्वयं चलकर आज उनके घर आ पहुंचा था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="नजला, जुकाम का गुरु जी ने बताया अचूक इलाज" href="http://10.0.0.122:1245/saint-dr-msg-health-tips-for-cough-cold/">नजला, जुकाम का गुरु जी ने बताया अचूक इलाज</a></p>
<p style="text-align:justify;">साध-संगत को उतारे वाले घर दर्शन देने के बाद सत्संग का प्रोग्राम शुरू करवा दिया। शहनशाह जी थोड़ी देर बाद सत्संग में विराजमान हुए। सत्संग में नाम देकर जब पूजनीय परम पिता जी वापिस अपने उतारे वाले घर आ रहे थे तो रास्ते में प्र्रेमी हाकम सिंह ने सच्चे पातशाह कुल मालिक के पास प्रार्थना की कि शहनशाह जी आप जी जाते-जाते अपने इस नादान बच्चे के घर भी जरूर पावन चरण-कमल डालकर जाएं जी। आप जी के घर पधारने से हमारे परिवार को आत्मिक शांति व आप जी का सच्चा प्यार मिलेगा। हाकम सिंह की अरदास परवान हो गई। शहनशाह जी साध-संगत के साथ जा रहे थे। रास्ते में एक वीरान कुआं था। अन्तर्यामी दाता जी एकदम उस कुएं के पास जाकर रूक गए।</p>
<p style="text-align:justify;">शहनशाह जी ने कुएं की तरफ से हाथ से इशारा करते हुए फरमाया, ‘‘भाई! यह कुआं उदास क्यों है?’’ इस पर प्रेमियों ने बताया, ‘पूजनीय परम पिता जी! इसका पानी इतना खारा है कि इसे पीने से दस्त लग जाते हैं। इसलिए गांव वाले इसका पानी नहीं पीते।’ उस समय प्रेमियों ने दयालु पूजनीय परम पिता जी के पावन चरण कमलों में अर्ज कर दी, ‘शहनशाह जी इस कुएं का पानी मीठा हो जाए। सारे गांव वालों की बस यही इच्छा है।’ लेकिन मालिक तो बिना कहे ही वह कार्य करना चाहते थे। इसलिए पूजनीय परम पिता जी ने कुएं के बारे में बात चलाई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">दयालु दाता सच्चे पातशाह जी ने अपने नूरी मुखड़े से अपने आप को छुपाते हुए फरमाया, ‘‘भाई! हम तुम्हारे लिए बेपरवाह सार्इं शहनशाह मस्ताना जी महाराज के पास अरदास करते हैं, शायद तुम्हारी यह अरदास मंजूर हो जाए, इसका पानी तो जरूर मीठा हो जाएगा, परंतु तुम तो हाथों पर सरसों उगाने वाली बात करते हो।’’ शहनशाह सच्चे पातशाह जी सर्वशक्तिमान के पावन वचन तो हो ही गए थे, वह टल नहीं सकते थे। शहनशाह जी की मेहर से उस कुएं का पानी मीठा हो गया। गांव के शंकावादी लोग यह देखकर हैरान रह गए। कई वर्षों से वीरान से पड़े उस कुएं का पानी मीठा होने से गांववासियों के भाग्य जाग गए। घट-घट के जानणहार कुल मालिक जी ने गांव के लोगों की इच्छा को पूरा कर दिया। पूजनीय परम पिता जी के इस परोपकार के लिए सारे गांव वाले शहनशाह जी का लाख-लाख शुक्राना करने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सारा गांव अब भी उसी कुएं से पानी भरता है। यह कुल मालिक की दया मेहर का प्रत्यक्ष प्रमाण है। कोई भी जीव अब भी कुएं को आंखों से देख सकता है और गांववासियों से उसका इतिहास सुन सकता है। गांव वाले अब भी पूजनीय परम पिता जी की उस दया मेहर का अहसान मानते हैं। पूजनीय परम पिता जी ने गांव मलकाणा के लोगों के प्रबल प्रेम को देखते हुए वहां कई सत्संग फरमाए और बहुत से जीवों को नाम की अनमोल दात बख्शकर संसार सागर से पार किया। इस साखी से स्पष्ट होता है कि पूर्ण संत-महात्माओं के वचन अटल होते हैं। बेशक सारा ब्रह्मण्ड पलट जाए, परंतु संतों के वचन कभी भी नहीं पलटते।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Dec 2022 20:56:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>‘‘बेटा, धरती को बुरा नहीं कहते। देखना, कुछ समय लगेगा यह जमीन एक दिन तुम्हें हीरे-मोती देगी’’</title>
                                    <description><![CDATA[सन् 1985 की बात है। उस समय पंजाब में आतंकवाद का बोलबाला था। हम पूजनीय परम पिता जी के पास आए और अपने काम-धन्धे के बारे में बताया। पूजनीय परम पिता जी फरमाने लगे, ‘‘बेटा, पंजाब के हालात अभी ठीक नहीं है। हम एक सलाह देते हैं कि अपने आभूषण आदि सब बेचकर जमीन खरीद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">सन् 1985 की बात है। उस समय पंजाब में आतंकवाद का बोलबाला था। हम पूजनीय परम पिता जी के पास आए और अपने काम-धन्धे के बारे में बताया। पूजनीय परम पिता जी फरमाने लगे, ‘‘बेटा, पंजाब के हालात अभी ठीक नहीं है। हम एक सलाह देते हैं कि अपने आभूषण आदि सब बेचकर जमीन खरीद लो क्योंकि ये जानलेवा होते हैं, जमीन न तो चोरी हो सकती है और न ही खोने का डर।’’ इसके बाद हम समालसर वापिस आ गये और शहनशाह जी के वचन मानकर सारे आभूषण बेच दिये और जमीन देखने लगे। हमें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि जमीन कहाँ पर लें। काफी मेहनत के बाद हमें किसी ने गाँव अरनियां वाली (सिरसा) के मोड़ पर जमीन दिखाई।</p>
<p style="text-align:justify;">यहाँ पर 10-10 फुट के टीले थे लेकिन जमीन बहुत सस्ती मिल रही थी इसलिए हमें जमीन पसन्द आ गई। फिर हम पूजनीय परम पिता जी के पास आशीर्वाद लेने गये और बताया कि पिता जी जमीन तो खरीद ली है, लेकिन टीले ही टीले हैं पैदावार की दृष्टि से अच्छी नहीं है। इस पर पूजनीय परम पिता जी फरमाने लगे, ‘‘बेटा, धरती को बुरा नहीं कहते। देखना, कुछ समय लगेगा यह जमीन एक दिन तुम्हें हीरे-मोती देगी।’’ यह सुनकर मैंने पूजनीय परम पिता जी से माफी माँगी। समय आने पर शहनशाह जी के उपरोक्त वचन सौ प्रतिशत सच हुए। आज इस जमीन की कीमत पहले से कई गुणा बढ़ चुकी है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong><em>-श्रीमती शशि बाला, शाहपुर बेगू, सरसा</em></strong></p>
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                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Sep 2021 05:48:21 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्लॉकस्तरीय नामचर्चा आयोजित कर मनाया महारहमोकर्म माह</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के पावन गुरगद्दीनशीनी माह को समर्पित ब्लॉक पक्कासहारणा की ब्लॉकस्तरीय नामचर्चा पक्कासहारणा में डॉ. चरणजीत सिंह इन्सां के निवास पर आज रविवार को बड़े ही धूमधाम से आयोजित की गई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/maha-rehmokaram-month/article-12893"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/gurugaddineshini-month.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">(Maha RehmoKaram month)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>गोलूवाला, सच कहूँ न्यूज।</strong> परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के पावन गुरगद्दीनशीनी माह को समर्पित शाही ब्लॉक श्रीगुरूसर मोडिया की ब्लॉकस्तरीय मासिक नामचर्चा पावन पिस्तानगरी श्रीगुरूसर मोडिया में स्थित पूज्य बापू नम्बरदार मग्घर सिंह जी गुरूसर धाम में आज रविवार को बड़े ही धूमधाम से आयोजित की गई। ब्लॉक भंगीदास अमरजीत इन्सां ने नारा लगाकर पवित्र गुरगद्दीनशीनी माह की बधाई देते हुए नामचर्चा का आगाज किया। प्रेमी रणजीत सिंह इन्सां ने विनती का शब्द बोला। वहीं कविराजों हरप्रीत सिंह इन्सां, चन्दसिंह इन्सां, परवेश इन्सां, जसमेल सिंह इन्सां, राजेश इन्सां, संदीप इन्सां, योगेश इन्सां,भागाराम इन्सां, नरजीत इन्सां, अंकित इन्सां, बख्शीश इन्सां आदि कविराजों ने पवित्र ग्रंथों में से रामनाम गाया। नामचर्चा में 45 मैम्बर कमेटी, 15 मैम्बर कमेटी, ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग, सुजान बहनों सहित पूरे ब्लॉक से काफी साध-संगत ने शिरकत की।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पक्कासहारणा।</strong> पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के पावन गुरगद्दीनशीनी माह को समर्पित ब्लॉक पक्कासहारणा की ब्लॉकस्तरीय नामचर्चा पक्कासहारणा में डॉ. चरणजीत सिंह इन्सां के निवास पर आज रविवार को बड़े ही धूमधाम से आयोजित की गई। इसी दौरान ब्लॉक पक्कासहारणा में सबसे ज्यादा सिमरन करने वाले तीन सेवादारों मानाराम इन्सां, सुखनाम इन्सां, जसविन्द्र सिंह इन्सां को ब्लॉक की ओर से प्रेमनिशानी देकर सम्मानित किया गया। इससे पूर्व ब्लॉक भंगीदास सुखनाम इन्सां ने पावन अवतार माह की बधाई देते हुए नारा लगाकर नामचर्चा का आगाज किया। प्रेमी सुखमन्द्र सिंह इन्सां ने विनती का शब्द बोला। वहीं कविराजों जग्गा सिंह इन्सां, अभिषेक इन्सां, आशीष इन्सां, सुनील इन्सां, गुरदर्शन सिंह इन्सां, चरणजीत इन्सां आदि कविराजों ने पवित्र ग्रन्थों में से गुरूयश गाया। प्रेमी दर्शन सिंह इन्सां ने पवित्र ग्रंथ में से व्याख्या पढ़कर सुनायी। तत्पश्चात दस मिनट का सिमरन कर कुल मालिक के चरणों में अरदास की गई।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>खाजूवाला।</strong> ब्लॉक की मासिक नामचर्चा रविवार को प्रेमी लालसिंह इन्सां के निवास स्थान 1 पावली पर धूमधाम से सम्पन्न हुई। नामचर्चा दौरान प्रेमी जगदीश इन्सां, बलदेव इन्सां, रामकुमार इन्सां, मंगलचंद इन्सां, कौर सिंह इन्सां, सुखचरण इन्सां, श्योपत इन्सां, दिनेश इन्सां, किशन इन्सां, तेज सिंह इन्सां, विनय इन्सां इत्यादि साध-संगत मौजूद थी। नामचर्चा दौरान 1 जरूरतमंद परिवार को राशन वितरण किया गया।</p>
<h3>ब्लॉक भंगीदास श्रृंगार इन्सां ने पवित्र नारा लगाकर नामचर्चा की शुरूआत की</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैरी।</strong> डेरा सच्चा सौदा के ब्लॉक कैरी की स्पेशल नामचर्चा खाटलबाना के प्रेमी ओमप्रकाश के निवास पर आयोजित की गई। इस दौरान पूरे पंडाल को गुब्बारें व लड़कियों के साथ सजाया गया। ब्लॉक भंगीदास श्रृंगार इन्सां ने पवित्र नारा लगाकर नामचर्चा की शुरूआत की। विनती का शब्द भाई ज्ञान इन्सां ने बोला। कविराज अवतार इन्सां, गुरदास इन्सां, सुरेन्द्र इन्सां, बनवारी इन्सां ने ग्रंथों में से मधुर शब्दों का गुणगान किया। इस नामचर्चा में शामिल हुए 15 मैंबर भाई मक्खन इन्सां, काला सिंह इन्सां, शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैलफेयर फोर्स विंग के जिम्मेवार भाई कमल इन्सां, आईटी विंग के सेवादार विकी इन्सां, हैप्पी इन्सां, भूषण इन्सां, नौजवान समिति के सेवादार, बुजुर्ग समिति के सेवादार, सुजान बहनें व सैकड़ों की तादात में साध-संगत पहुंची।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>रायसिंहनगर।</strong> महा रहमोकर्म माह की खुशी में ब्लॉक की नामचर्चा हुई। नामचर्चा की शुरूआत विनती का शब्द बोलकर की गई। इस मौके पर मौजूद कविराज करण, विशाल, मुकेश, अजीत, बुधराम, अजय, सुभाष इन्सां ने गुरु का यशोगान कर साध-संगत को निहाल किया। नामचर्चा दौरान भारी संख्या में साध-संगत मौजूद थी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पीलीबंगा।</strong> गद्दीनशीन माह के उपलक्ष्य में स्थानीय नामचर्चा घर में रविवार को ब्लॉकस्तरीय नामचर्चा में महारहमोकरम दिवस मनाया गया। ब्लॉक भंगीदास सतीश मित्तल के अनुसार डबलीराठान के डेरा अनुयायी हरिकृष्ण इन्सां ने महापरोपकार दिवस पर साध-संगत को जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का संदेश दिया गया। उन्होंने ग्रन्थ में से व्याख्या सुनाते हुए सत्संग की महत्ता पर प्रकाश डाला कार्यक्रम में घनश्यामदास इन्सां, मोमनचंद, भीमसैन, अर्शप्रीतसिंह, दूधनाथ, आशीष, दौलतराम, रामस्वरूप, नरेश कुमार, मनोज कुमार, मेघराज इन्सां, अशोक कुमार, टहलसिंह, रूघाराम इन्सां आदि ने भजनों के माध्यम से गुरू का यशोगान किया।</p>
<h3>आईटी विंग के सेवादारों ने साध-संगत को सोशल मीडिया के बारे में जानकारी दी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सिलवाला खुर्द।</strong> पावन गुरुगद्दीनशीनी माह के उपलक्ष्य में स्थानीय ब्लॉक की नामचर्चा 15 मैंबर मेजर सिंह के घर सम्पन्न हुई। इस दौरान ब्लॉक भंगीदास राजेंद्र इन्सां ने पवित्र नारा लगाकर नामचर्चा की शुरूआत की। इस अवसर पर आईटी विंग के सेवादारों ने साध-संगत को सोशल मीडिया के बारे ेमें जानकारी दी। इस अवसर पर सौरभ इन्सां, जगजीत इन्सां, गुरमुख व जिम्मेवार गुरसेवक, गुरतेज, सुखनायब, सुखचैन, गगनदीप, कविराज जग्गा सिंह, मनप्रीत प्रहलाद, बलदेव, सोहन लाल, संदीप काला व साध-संगत मौजूद थी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सादुलशहर/बुधरवाली।</strong> पूज्य परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के पावन गुरगद्दीनशीनी (महारहमोकर्म) माह को समर्पित डेरा सच्चा सौदा की राजस्थान की शाखा मौजपुर धाम बुधरवाली आश्रम मे जिला फाजिल्का, श्रीगंगानगर हनुमानगढ़, संगरिया, सादुलशहर, चकमहाराजका आदि ब्लॉकों के शहरों, गांवों की सामुहिक ब्लॉक स्तरीय नामचर्चा रविवार को बड़े ही धूमधाम से आयोजित की गई। जिसमें गुरगद्दीनशीनी माह को बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। ब्लॉक भंगीदास साजन इन्सां ने साध-संगत को पावन माह की बधाई देते हुए पवित्र नारा लगाकर नामचर्चा का आगाज किया। तत्पश्चात कविराजों ने पवित्र ग्रंथों में से गुरुयश गाया। नामचर्चा के बाद समस्त सृष्टि के भले के लिए सुमिरन कर कुल मालिक के चरणों में अरदास की गई ओर दरबार की ओर से बनाये गए लंगर को साध-संगत द्वारा बड़ी श्रद्धा के साथ ग्रहण किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व मौके पर स्टेट मेंबर मदन इन्सां, रणजीत सिंह, आशा चुघ इन्सां द्वारा महारहमोकर्म माह की साध-संगत को बधाई देते हुए अखंड सुमरिन करने का आह्वान किया गया व कहा कि इस घोर कलियुग में परमात्मा को पाने के लिए संत महात्माओं की वाणी के अनुसार सुमिरन बेहद जरूरी है। इस मौके पर पहुंची विभिन्न ब्लॉकों की साध-संगत द्वारा दरबार के खेत खलिहान इत्यादि जगहों पर नि:स्वार्थ भावना से श्रमदान कर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं का अनुसरण किया गया। सतब्रह्मचारी गुरजंट सिंह इन्सां द्वारा बुधरवाली दरबार में प्रतिदिन चल रहे सेवा कार्यो में इलाके की साध-संगत को शिफ्ट अनुसार अपनी सेवाएं बढ़-चढ़कर देने की अपील की। इस मौके ओर अन्य स्टेट मेंबर्स, जिला समिति सदस्य, ब्लॉक समिति सदस्य विभिन्न समितियों के सेवादार बड़ी तादाद में उपस्थित हुए।</p>
<p> </p>
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                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Feb 2020 19:36:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पावन गुरगद्दीनशीनी दिवस आज</title>
                                    <description><![CDATA[शाह सतनाम जी धाम में दोपहर 12 से 2 बजे तक आयोजित होगी नामचर्चा रक्तदान व जन कल्याण परमार्थी कैंप का भी होगा आयोजन जन कल्याण परमार्थी कैंप में करवा सकेंगे नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच सरसा(सच कहूँ न्यूज)। डेरा सच्चा सौदा की साध संगत आज पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/pious-benevolence-day-to-be-celebrated-in-dera-sach-sauda-today/article-6026"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/gurugaddi-diwas.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">शाह सतनाम जी धाम में दोपहर 12 से 2 बजे तक<br />
<strong>आयोजित होगी नामचर्चा</strong></h1>
<ul>
<li><strong>रक्तदान व जन कल्याण परमार्थी कैंप का भी होगा आयोजन</strong></li>
<li><strong>जन कल्याण परमार्थी कैंप में करवा सकेंगे नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा(सच कहूँ न्यूज)।</strong> डेरा सच्चा सौदा की साध संगत आज पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का 28वां पावन गुरगद्दी दिवस (महापरोपकार दिवस) परमार्थी कार्य कर मनाएगी। इस पावन अवसर पर शाह सतनाम जी धाम, सरसा में आज दोपहर 12 से 2 बजे तक नामचर्चा का आयोजन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पवित्र अवसर पर रक्तदान व जन कल्याण परमार्थी शिविरों का भी आयोजन किया जाएगा जिनके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रक्तदान कैंप का आयोजन शाह सतनाम जी धाम स्थित सचखंड हाल में होगा वहीं जन कल्याण परमार्थी कैंप का आयोजन शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल में किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जन कल्याण परमार्थी कैंप में विभिन्न रोगों के माहिर विशेषज्ञ चिकित्सक मरीजों की नि:शुल्क जांच कर नि:शुल्क परामर्श देंगे साथ ही मरीजों को दवाएं भी नि:शुल्क प्रदान की जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्णननीय है कि 23 सितंबर 1990 को डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही पूज्य परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने पूज्य गरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को डेरा सच्चा सौदा की पवित्र गुरगद्दी की बख्शिश की थी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Sep 2018 10:43:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>‘इंसानियत को जिंदा रखता है मालिक का नाम’</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चा सौदा सुख दा राह, सब बंधनां तों पा छुटकारा मिलदा सुख दा साह… संतों के फरमाए हुए वचन जीवन के हर मोड़ पर काम आते हैं। संतों के प्यारे और मीठे संदेश रूपी वचनों को इस श्रृंखला में आप पढ़ रहे हैं। सामने स्टेशन बनवाएंगे अक्तूबर 1957, बुधवाली (राजस्थान) बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/pious-sermons-of-saint-gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan/article-3610"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/dera-sacha-sauda-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:left;">सच्चा सौदा सुख दा राह, सब बंधनां तों पा छुटकारा मिलदा सुख दा साह…</h2>
<p>संतों के फरमाए हुए वचन जीवन के हर मोड़ पर काम आते हैं। संतों के प्यारे और मीठे संदेश रूपी वचनों को इस श्रृंखला में आप पढ़ रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:left;">सामने स्टेशन बनवाएंगे</h3>
<p style="text-align:justify;">अक्तूबर 1957, बुधवाली (राजस्थान) बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज जीवोद्वार यात्रा के दौरान बुधरवाली में सत्संग फरमाने पहुंचे। रात के समय सत्संग के दौरान बूंदी का प्रसाद बंटवाया गया। करीब तीन सौ लोगों ने सत्संग सुना। सत्संग के उपरांत शहनशाह जी ने वचन फरमाया, ‘‘जो नाम लेने वाले जीव हैं उनको अलग कर लो।’’ जो संगत थी वह सारी की सारी चली गई। कोई भी जीव नाम के लिए नहीं रुका। रात के ग्यारह बजे थे। शहनशाह जी ने अपने सेवादारों में से भक्त माला राम तथा बीरू राम को अपने पास बुलाया और आदेश दिया कि एक जीव को नाम दिलवाओ तो हजार गऊओं को कत्ल होने से बचाने का फल मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जब सुबह हुई तो बेपरवाह मस्ताना जी महाराज बाहर घूमने के लिए भक्त माला राम को अपने साथ ले गए तथा रेलवे लाइन के साथ-साथ पूर्वी दिशा की ओर दो मुरब्बे तक आए। जब लौटे और आश्रम के पास गए तो शहनशाह जी रेलवे लाइन पर बैठ गए और वचन फरमाए, ‘‘बेटा, यहां से स्टेशन दूर है। अपनी संगत को तीन मील पैदल चलकर आना पड़ता है।’’ बेपरवाह जी ने आश्रम की जगह की ओर इशारा करते हुए वचन फरमाए, ‘‘बेटा, वहां तो बनाएंगे गुफा और गुफा के सामने बनाएंगे स्टेशन।’’ बेपरवाह जी ने आगे फरमाया, ‘‘बेटा, जब हम तीसरी बॉडी में आएंगे तो दूर-दूर जाकर नाम जपाएंगे। जैसे मास्टर पढ़ाता है। बच्चों को मास्टर का डर होता है। ऐसे काम चलाएंगे।’’ आज बेपरवाह जी के वचन ज्यों के त्यों पूरे हुए हैं।</p>
<h3 style="text-align:left;">सिरे वाली बात…</h3>
<p style="text-align:justify;">15 सितंबर 1969: पूज्य परम पिता जी गांव त्योणा पुजारियां जिला बठिंडा में सत्संग फरमाने के उपरांत भाई चंद सिंह तथा नंद सिंह के घर गांव तंगराली में पधारे। इस घर में परम पिता जी की धर्मपत्नी पूज्य माता गुरदेव कौर जी के ननिहाल है। वहां पर परमपिता जी परिवार के सभी सदस्यों से मिले और सभी की कुशलता पूछी। इस घर के पास ही बरगद के पेड़ लगे हुए थे। परम पिता जी ने उन पेड़ों को देखते हुए वचन फरमाया, ‘‘अपने आश्रम में भी बरगद के पौधे लगाने हैं।’’</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर परिवार के सदस्यों ने कहा कि हम बरगद के पौधे दरबार में ले आएंगे। जब परमपिता जी वहां से चलने लगे तो चंद सिंह (परम पिता जी के रिश्तेदार) परम पिता जी को सम्मान के तौर पर कंबल देने लगे तो परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘चंद सिंह, अब हम संत हैं। इसलिए हम किसी से कुछ नहीं लेते।’’ भाई चंद सिंह ने विनती की कि पिता जी, हम आपको संत के तौर पर नहीं दे रहे बल्कि हम तो रिश्तेदारी के रूप में दे रहे हैं। परम पिता जी ने सेवादार से कहा, ‘‘ले लो भाई, अब तो इन्होंने सिरे वाली बात कह दी है।’’</p>
<h4 style="text-align:left;">इस जलते-बलते भट्ठ कलियुग में संजीवनी है मालिक का नाम</h4>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का नाम इस जलते-बलते भट्ठ, इस कलियुग में आत्मा के लिए मृतसंजीवनी है। मर रही इन्सानियत, तड़प रही इन्सानियत को अगर कोई जिंदा रख सकता है तो वो है ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु का नाम। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संतों के वचनों को भी तरोड़-मरोड़ कर अपने हिसाब से लोग इस्तेमाल करते हैं जोकि बिल्कुल गलत है। ऐसा नहीं करना चाहिए। ये शैतान दिमाग का काम होता है। संतों के वचनों को जो कोई तरोड़-मरोड़ कर पेश करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वो दु:खी रहता है, गमगीन रहता है, रोगों का घर बन जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर के वचन नहीं होते वो तो अल्लाह, वाहेगुरु, राम की चर्चा करते हैं, वचन तो परम पिता परमात्मा के होते हैं। इसलिए पीर, फकीर की बात सुनो, अमल करो, उसके अनुसार चलो तो जिंदगी के आदर्श की प्राप्ति का बीमा हो जाता है। दुनिया में बीमा पॉलिसी बहुत हैं लेकिन राम नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की भक्ति इबादत की बीमा पॉलिसी ऐसी है, जिसको अगर आदमी अपने जीवन में अपना ले, तो यहां व अगले जहान में भी उस आत्मा का बीमा पक्का हो जाता है, कि वो गम, दु:ख, दर्द, चिंताओं से बचेगी और मालिक की गोद में बैठकर निजधाम जरूर जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Mar 2018 08:06:47 +0530</pubDate>
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