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                <title>export - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>निर्यात से पहले देश की जरूरत हो पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक संकट के दौर में भारत की खेती और किसानी रिकार्ड दर्ज कराने की ओर अग्रसर हैं। देश के किसानों की मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन और केंद्र सरकार की नीतियों के चलते ऐसा संभव हो रहा है। खाद्यान्नों से लेकर तिलहन, दलहन, गन्ना आदि के उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि होने का अनुमान हैं। भारत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/the-countrys-need-should-be-met-before-export/article-33456"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/indian-exports.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वैश्विक संकट के दौर में भारत की खेती और किसानी रिकार्ड दर्ज कराने की ओर अग्रसर हैं। देश के किसानों की मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन और केंद्र सरकार की नीतियों के चलते ऐसा संभव हो रहा है। खाद्यान्नों से लेकर तिलहन, दलहन, गन्ना आदि के उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि होने का अनुमान हैं। भारत में खाद्यान्नों के भंडार और रिकार्ड उत्पादन को देखते हुए वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न निर्यात बढ़ाने का भी अच्छा मौका है। भारत इस अवसर का लाभ उठाकर गेहूं की अच्छी कीमतों का लाभ किसानों को दे सकता है। वैश्विक स्तर पर कोरोना के साथ ही रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते खाद्यान्न की मांग में बढ़ोतरी हुई है। वहीं दूसरी तरफ विश्व के कई स्थानों पर सूखे ने वैश्विक उत्पादन को कम कर दिया है, जिससे मांग में तेजी से वृद्धि हुई है। यही वजह है कि विश्व खाद्य लागत रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, दुनिया के दो बड़े गेहूं उत्पादक रूस व यूक्रेन करीब तीस फीसदी गेहूं आपूर्ति विश्व बाजार में करते रहे हैं, दोनों के युद्ध में उलझने से आपूर्ति शृंखला में बाधा उत्पन्न हुई है। फलत: अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की मांग बढ़ी है। एमएसपी से अधिक दाम मिलने से किसानों के चेहरों पर तो मुस्कान है लेकिन आम उपभोक्ताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं। निस्संदेह महंगाई के दौर में लंबे समय तक इस स्थिति का बना रहना चिंता की बात होगी। खुदरा बाजार में आटे की कीमत तैंतीस रुपये पहुंचना लोगों की मुश्किल बढ़ाने वाला है क्योंकि एक साल की अवधि में यह वृद्धि करीब तेरह प्रतिशत के करीब है। इतना ही नहीं महंगे गेहूं से बेकरी उत्पादों की कीमतें भी बढ़ रही हैं। निस्संदेह, गेहूं निर्यात में वृद्धि के अल्पकालिक लाभ तो हो सकते हैं लेकिन सरकार को अपनी घरेलू प्राथमिकताओं का फिर से मूल्यांकन करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा न हो कि देश में खाद्यान्न कीमतें अनियंत्रित हो जायें। वह स्थिति बेहद खराब होगी कि हमें फिर से महंगे दामों पर गेहूं का आयात करना पड़े। इस स्थिति को हर हालत में टालने के प्रयास जरूरी हैं। सवा अरब से ज्यादा लोगों की खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करना आसान काम नहीं है। यूक्रेन संकट के पहले ग्लोबल मार्केट में भारतीय गेहूं का रेट 300-310 डॉलर प्रति टन था जो कुछ दिन में ही बढ़कर 360 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है। अगर यही हालात रहे तो अगले कुछ दिनों में ये 400 डॉलर प्रति टन पहुंच जाएगा। ये किसान और भारत दोनों के लिए अच्छा है। ध्यान रहे कि भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी रहती है, जिसकी खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करना हर सरकार का प्राथमिक दायित्व है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के बाद ही हमें निर्यात को अपनी प्राथमिकता बनाना होगा। सरकार को याद रखना होगा कि देश में कोरोना संकट के चलते सरकारी स्टॉक में पहले के मुकाबले कम गेहूं है, इस बार पैदावार में गिरावट आई है और सरकारी खरीद में भी परिस्थितिवश कमी आई है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 09:53:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सिरिंज के निर्यात पर तीन महीने तक रोक</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र सरकार ने कोविड टीकाकरण अभियान के दौरान घरेलू स्तर पर सिरिंज की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इसके निर्यात पर अगले तीन महीने तक रोक लगा दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को यहां बताया कि भारतीय सिरिंज की कुछ निर्धारित श्रेणियों के निर्यात पर रोक लगाई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/export-of-syringes-banned-for-three-months/article-27515"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/export-of-syringes.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> केंद्र सरकार ने कोविड टीकाकरण अभियान के दौरान घरेलू स्तर पर सिरिंज की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इसके निर्यात पर अगले तीन महीने तक रोक लगा दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को यहां बताया कि भारतीय सिरिंज की कुछ निर्धारित श्रेणियों के निर्यात पर रोक लगाई जाती है। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को कोविड टीका लगाना सुनिश्चित करना है। सरकार ने कहा है कि घरेलू वैक्सीन निमार्ताओं और अन्य निमार्ताओं ने भारत में विश्व के सबसे बड़े कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में अब तक लगभग 94 करोड़ टीके दिये गये है और 100 करोड़ टीके की आंकडा जल्द हासिल होगा। देश के अंतिम नागरिक का टीकाकरण करने के लिए दृढ़ राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ सरकार ने सिरिंजों की घरेलू उपलब्धता और आपूर्ति बढ़ाने के लिए उनके निर्यात पर रोक लगायी है। कम से कम समय में सभी पात्र नागरिकों को टीका लगाने के कार्यक्रम की गति को बनाए रखने के लिए सीरिंज महत्वपूर्ण हैं। टीका देने के लिए उपयोग की जाने वाली सीरिंज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की दृष्टि से सरकार ने केवल 0.5 मि.ली.- (आॅटो-डिसेबल) सीरिंज, 0.5 मि.ली.,एक मि.ली., दो मि.ली., तीन मि.ली.डिस्पोजेबल सीरिंज तथा पुन: प्रयोग होने वाली सिरिंज के निर्यात को तीन महीने तक रोक दिया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Oct 2021 14:58:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>मई में निर्यात में 67.39 प्रतिशत की छलांग</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। देश में औद्योगिक गतिविधियां शुरू होने और विदेशी बाजारों से मांग आने से मई 2021 में भारतीय निर्यात 67. 39 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 32.21 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी । मई 2020 में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/exports-jump-67-39-percent-in-may/article-24105"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/indian-exports.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> देश में औद्योगिक गतिविधियां शुरू होने और विदेशी बाजारों से मांग आने से मई 2021 में भारतीय निर्यात 67. 39 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 32.21 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी । मई 2020 में भारतीय निर्यात 19.24 अरब डालर रहा था। चालू वित्त वर्ष में मई तक कुल निर्यात 112.29 प्रतिशत बढ़कर 62. 84 अरब डॉलर रहा है। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 29.6 अरब डॉलर था।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों के अनुसार मई 2021 में कुल आयात 68.54 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 38.5 अरब डालर दर्ज किया गया है। मई 2020 में कुल आयात 22.86अरब डालर था। अप्रैल से मई 2021 की अवधि में कुल आयात 110.73 प्रतिशत बढ़कर 84.25 अरब डालर हो गया है। पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा 39.98 अरब डालर रहा था। मई 2021 में व्यापार घाटा 6.32 अरब डालर रहा है। इसमें 74.69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।</p>
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                <pubDate>Wed, 02 Jun 2021 17:43:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनवरी 2021 में निर्यात में 5.37 प्रतिशत की वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[जनवरी 2021 में आयात 2.05 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 41.99 अरब डालर रहा है जबकि इससे जनवरी 2020 में कुल आयात 41.15 अरब डालर रहा था।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/5-37-increase-in-export-in-january-2021/article-21437"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/export.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य अनाज, खल और लौह अयस्क की मांग आने से जनवरी 2021 में भारतीय निर्यात 5.37 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 27.24 अरब डालर दर्ज किया गया है जबकि जनवरी 2020 में यह आंकड़ा 25.85 अरब डालर रहा था। सरकार के मंगलवार को यहां जारी आंकड़ों में बताया कि चालू वित्त वर्ष में जनवरी तक कुल निर्यात 228.04 अरब डालर रहा है जिसमें 13.66 प्रतिशत की गिरावट आयी है। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कुल निर्यात 264.13 प्रतिशत रहा था।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/jhoom-bazaar-from-budget-sensex-rises-1728-94-points/"><strong>यह भी पढ़े – बजट से झूमा बाजार, सेंसेक्स 1,728.94 अंकों की उछाल</strong></a></p>
<p style="text-align:justify;">जनवरी 2021 में आयात 2.05 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 41.99 अरब डालर रहा है जबकि इससे जनवरी 2020 में कुल आयात 41.15 अरब डालर रहा था। अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 की अवधि में कुल आयात 25.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 300़26 अरब डालर दर्ज किया गया है। अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 की अवधि में यह आंकड़ा 405.33 प्रतिशत था। जनवरी 2021 में शुद्ध व्यापार घाटा 3.57 प्रतिशत गिरकर 14.75 अरब डालर रहा है जबकि जनवरी 2020 में व्यापार घाटा 15.30 अरब डालर रहा था।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 02 Feb 2021 16:07:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जैविक बासमती चावल के निर्यात को दिया जाएगा प्रोत्साहन</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। सरकार ने जैविक बासमती चावल का मूल्यवर्धन करने और इसके निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यातकों को प्रोत्साहन देने का फैसला किया है। केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने यहां बताया कि बासमती निर्यात विकास संगठन-बीईडीएफ ने उत्तर प्रदेश के मोदीपुरम में बासमती चावल की विविधता की पहचान और कीटनाशक अवशेषों, एफ्लाटॉक्सिन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/export-of-organic-basmati-rice-will-be-encouraged/article-20196"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/rice.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सरकार ने जैविक बासमती चावल का मूल्यवर्धन करने और इसके निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यातकों को प्रोत्साहन देने का फैसला किया है। केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने यहां बताया कि बासमती निर्यात विकास संगठन-बीईडीएफ ने उत्तर प्रदेश के मोदीपुरम में बासमती चावल की विविधता की पहचान और कीटनाशक अवशेषों, एफ्लाटॉक्सिन और भारी धातुओं के परीक्षण के लिए डीएनए फिंगर प्रिंटिंग की सुविधाओं के साथ अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की है। प्रयोगशाला और प्रदर्शन तथा प्रशिक्षण फार्म, एसवीपी कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में स्थापित किया गया है। संगठन की गतिविधियां बासमती चावल के निर्यात के लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर केंद्रित हैं। बीईडीएफ की 8वीं वार्षिक आम बैठक पिछले सप्ताह ही आयोजित की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के दौरान, जैविक बासमती चावल की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सभी पक्षों के साथ एक कार्यशाला आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। निर्यातकों को मूल्य संवर्धन और उत्पाद में विविधता के लिए प्रोत्साहित करने का भी निर्णय लिया गया। भारत से निर्यात के मामले में बासमती चावल सबसे बड़ा कृषि उत्पाद है। वर्ष 2019-20 के दौरान चार अरब 33 करोड़ 10 लाख डॉलर के 44 लाख टन से ज्यादा बासमती चावल का निर्यात किया गया। पिछले 10 वर्षों में, बासमती चावल के निर्यात में दोगुनी से अधिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2009-10 के दौरान बासमती चावल का निर्यात लगभग 22 लाख टन था। बासमती चावल के प्रमुख बाजार सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात , ईरान, यूरोपीय संघ और अमेरिका हैं। बासमती चावल एक पंजीकृत भौगोलिक संकेत (जीआई) है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Nov 2020 14:39:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रतिरोधक क्षमता संबंधी दवाओं का निर्यात खुला</title>
                                    <description><![CDATA[Export of Immunity Drugs | दर्द निवारण दवाइयों की भारी मांग नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग को देखते हुए प्रतिरोधक क्षमता और दर्द निवारक संबंधी कुछ दवाओं का निर्यात खोल दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को यहां बताया कि विदेश व्यापार महानिदेशालय ने इस आशय की अधिसूचना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h3 style="text-align:center;">Export of Immunity Drugs | दर्द निवारण दवाइयों की भारी मांग</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग को देखते हुए प्रतिरोधक क्षमता और दर्द निवारक संबंधी कुछ दवाओं का निर्यात खोल दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को यहां बताया कि विदेश व्यापार महानिदेशालय ने इस आशय की अधिसूचना कल देर शाम जारी कर दी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अधिसूचना के अनुसार लगभग 25 दवाएं निर्यात के लिए खोल दी गई हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ये दवाएं प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और दर्द निवारण से संबंधित हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इन दवाओं में विटामिन संबंधी दवाएं हैं</li>
<li style="text-align:justify;">अधिसूचना के जरिए सरकार ने तीन मार्च को जारी अधिसूचना में बदलाव किया है।</li>
<li style="text-align:justify;">सरकार का निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोरोना महामारी को देखते हुए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और दर्द निवारण दवाइयों की भारी मांग है। सूत्रों ने बताया कि देश में इस आशय की दवाइयों की कोई कमी नहीं है सरकार ने लॉकडाउन के दौरान विशेष आर्थिक क्षेत्रों में दवा और चिकित्सा उपकरण बनाने वाली इकाईयां चालू रखने का निर्देश दिया था। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के दौरान कई देशों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने चिकित्सा और दवाइयों की मदद मांगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2020 12:22:50 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निर्यात बढ़ाने के लिए वैश्विक बाजार का अध्ययन जरुरी: फियो</title>
                                    <description><![CDATA[जबकि भारतीय निर्यात में इनकी हिस्सेदारी 33 प्रतिशत से कम है। डॉ़ सहाय ने कहा कि इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, पेट्रोलियम उत्?पाद, मशीनरी, आॅटोमोबाइल और प्लास्टिक उत्पादों में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी कुल मिलाकर सिर्फ लगभग एक प्रतिशत ही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/study-of-global-market-is-necessary-to-increase-exports-fio/article-11911"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/exportation.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक में कहा (<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Export</span></span>)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारतीय निर्यातक संघ (फियो) ने निर्यात बढ़ाने के लिए (<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Export</span></span>)  वैश्विक बाजार का अध्ययन करने पर जोर देते हुए शनिवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपड़ा, चमड़ा, हस्तशिल्प, कालीन, समुद्री और कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी घट रही है। फियो के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ.अजय सहाय ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ एक बैठक में कहा कि नयी विदेश व्यापार नीति के तहत भारतीय निर्यात के साथ-साथ वैश्विक आयात के रुझानों का भी अध्ययन किया जाना चाहिए क्योंकि भारत मुख्?यत: कपड़ा, चमड़ा, हस्तशिल्?प, कालीन, समुद्री और कृषि उत्पादों का निर्यात कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ये रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण तो हैं, लेकिन वैश्विक निर्यात में इनकी हिस्सेदारी घट रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक निर्यात में शीर्ष पांच उत्पादों इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, पेट्रोलियम उत्?पाद, मशीनरी, आटोमोबाइल और प्लास्टिक की वस्तुओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है जबकि भारतीय निर्यात में इनकी हिस्सेदारी 33 प्रतिशत से कम है। डॉ़ सहाय ने कहा कि इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, पेट्रोलियम उत्?पाद, मशीनरी, आटोमोबाइल और प्लास्टिक उत्पादों में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी कुल मिलाकर सिर्फ लगभग एक प्रतिशत ही है। उन्होंने कहा कि नयी विदेश व्यापार नीति के तहत इन उत्पादों के निर्यात को सुविधाजनक बनाया जाना चाहिए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/study-of-global-market-is-necessary-to-increase-exports-fio/article-11911</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Dec 2019 17:33:19 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>छोटे उद्योगों के उत्पादों का निर्यात बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान छोटे उद्योगों के उत्पादों का निर्यात (Products Export) 7.5 प्रतिशत बढ़ा है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार को बताया कि वित्त वर्ष 2016-17 में छोटे उद्योगों के उत्पादों के निर्यात में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी जबकि वित्त […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/small-industries-products-export-increased/article-7020"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/export.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान छोटे उद्योगों के उत्पादों का निर्यात (Products Export) 7.5 प्रतिशत बढ़ा है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार को बताया कि वित्त वर्ष 2016-17 में छोटे उद्योगों के उत्पादों के निर्यात में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा 5.9 प्रतिशत की गिरावट में था।</p>
<p>सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में सितंबर तक छोटे उद्योगों के उत्पादों का निर्यात 78 अरब 51 करोड़ 99 लाख 10 हजार डॉलर रहा है। वित्त वर्ष 2015-16 में इन उत्पादों का निर्यात 130 अरब 76 करोड़ 87 लाख डॉलर, वित्त वर्ष में 2016-17 में 137 अरब छह करोड़ 88 लाख डॉलर और वित्त वर्ष 2017-18 में 147 अरब 39 करोड़ डॉलर दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने छोटे उद्योगों को बढावा देने और निर्यात को प्रोत्साहित करने के कई कदम उठाये हैं।</p>
<p>यह सभी कदम राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धी कार्यक्रम, मेक इन इंडिया और ईज आॅफ डूइंग बिजनेस के तहत उठाये गये हैं और संबंधित बुनियादी ढ़ांचे को मजबूत किया गया है। इसके अलावा छोटे उद्योगों के लिये पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है और निर्यात के लिये कई सुविधायें दी गयी है। छोटे निर्यातकों को प्रक्रियागत मदद देने के लिए निर्यात बंधु योजना चलायी जा रही है।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Dec 2018 17:23:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चीनी का निर्यात शुल्क हटा</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली (वार्ता) घरेलू बाजार में चीनी की घटती कीमत और गन्ना बकाये के बढ़ते बोझ को देखते हुए सरकार ने चीनी का निर्यात शुल्क हटाने की घोषणा की है। सरकारी सूत्रों ने आज बताया कि चीनी पर से 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क हटा दिया गया है। चीनी के निर्यात शुल्क को हटाने की मांग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/export-duty-of-sugar-removed/article-3616"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/suger.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (वार्ता) </strong>घरेलू बाजार में चीनी की घटती कीमत और गन्ना बकाये के बढ़ते बोझ को देखते हुए सरकार ने चीनी का निर्यात शुल्क हटाने की घोषणा की है। सरकारी सूत्रों ने आज बताया कि चीनी पर से 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क हटा दिया गया है। चीनी के निर्यात शुल्क को हटाने की मांग को लेकर खाद्य मंत्रालय ने दो बार अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी थी। चीनी मिल संगठनों ने भी सरकार से निर्यात शुल्क हटाने का आग्रह किया था। केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कुछ दिन पहले कहा था कि बंपर घरेलू उत्पादन को देखते हुए उन्होंने फरवरी में चीनी का निर्यात शुल्क घटाने की अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक देश में इस साल चीनी का उत्पादन 2.95 करोड़ टन होने की उम्मीद है, जो गत साल से 92 लाख टन ज्यादा है। चीनी के तीन शीर्ष उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ने क्रमश: 93.8 लाख टन, 84.3 लाख टन और 35.1 लाख टन चीनी का योगदान किया है। पिछले चीनी वर्ष 2016-17 (अक्टूबर-सितंबर) में देश में 2.03 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस्मा का कहना है कि चीनी का स्टॉक बढ़ने से घरेलू बाजार में इसकी कीमत घटकर लागत मूल्य से भी कम हो गयी है जिससे मिलों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। संगठन के अनुसार,जनवरी तक गन्ने की बकाया राशि बढ़कर 14,000 करोड़ रुपये थी जो इस माह के अंत तक बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Mar 2018 05:11:35 +0530</pubDate>
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