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                <title>Potato - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Potato RSS Feed</description>
                
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                <title>History and origin of Potato: कैसे इंडिया में आया सब्जियों का राजा &amp;#8216;आलू&amp;#8217;? बड़ी रोचक है कहानी, 8000 साल पहले इस देश में उगाया गया था</title>
                                    <description><![CDATA[संजय कुमार मेहरा: History and origin of Potato: आलू… नाम सुनते ही हर किसी के मन में ढेरों स्वादिष्ट व्यंजन घूमने लगते हैं। चाहे पराठा हो या पकौड़ा, समोसा हो या फ्रेंच फ्राई, आलू हर भारतीय की थाली में सबसे पसंदीदा सब्जी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सब्जियों का राजा माने जाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/history-and-origin-of-potato/article-71587"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-05/history-and-origin-of-potato.jpg" alt=""></a><br /><p class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;"><strong>संजय कुमार मेहरा: </strong>History and origin of Potato<strong>: </strong>आलू… नाम सुनते ही हर किसी के मन में ढेरों स्वादिष्ट व्यंजन घूमने लगते हैं। चाहे पराठा हो या पकौड़ा, समोसा हो या फ्रेंच फ्राई, आलू हर भारतीय की थाली में सबसे पसंदीदा सब्जी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सब्जियों का राजा माने जाने वाला आलू भारत का मूल निवासी नहीं है? इसकी शुरूआत करीब 8000 साल पहले दक्षिण अमेरिका की एंडीज पर्वत श्रृंखला से हुई थी। वहां के इंका समुदाय ने सबसे पहले इसकी खेती की।</p>
<p class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">भारत में आलू का आगमन और विकास: भारत में आलू की एंट्री 17वीं शताब्दी में पुर्तगाली नाविकों के जरिए हुई थी। दक्षिण भारत की नीलगिरी पहाड़ियों में इसकी पहली फसल उगाई गई। ब्रिटिश शासन के समय यह पूरे उत्तर भारत में फैल गया और देखते ही देखते सब्जियों की रानी बन गया। आलू की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत में जब कोई सब्जी न मिले, तो आलू को सबसे पहले प्राथमिकता दी जाती है।</p>
<p class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">विश्व में आलू का महत्व: आज दुनिया की दो तिहाई जनसंख्या आलू को मुख्य आहार के रूप में उपयोग करती है। विश्वभर में आलू की 5000 से अधिक किस्में पाई जाती हैं और 159 से ज्यादा देशों में इसकी खेती की जाती है। चीन और रूस के बाद भारत आलू उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। आलू को ‘सफेद सोना’ भी कहा जाता है क्योंकि यह कम लागत, कम मेहनत में अधिक उत्पादन देने वाली फसल है। यह पोषण के लिहाज से बेहद उपयोगी है।</p>
<p class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय आलू दिवस की शुरूआत: संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2024 से हर साल 30 मई को अंतरराष्ट्रीय आलू दिवस मनाने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य आलू के पोषण, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व को वैश्विक स्तर पर रेखांकित करना है। इस वर्ष की थीम है—”इतिहास को आकार देना, भविष्य को पोषण देना”, जो आलू के ऐतिहासिक योगदान और भविष्य में इसके संभावित महत्व को दशार्ती है। History and origin of Potato</p>
<p class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">पोषण का खजाना है आलू: आलू केवल स्वाद नहीं देता, बल्कि यह स्वास्थ्य का खजाना भी है। इसमें विटामिन सी, बी कॉम्प्लेक्स, आयरन, कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर में आयरन की कमी दूर कर आॅक्सीजन की आपूर्ति में मदद करता है। साथ ही, विटामिन-उ रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। गठिया, जलन और त्वचा संबंधी समस्याओं में भी कच्चा आलू कारगर माना गया है।</p>
<p class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">हरियाणा में आलू की खेती का केंद्र: हरियाणा में कुरुक्षेत्र और यमुनानगर जिले आलू की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं। कुरुक्षेत्र जिले में लगभग 5645 टन आलू का उत्पादन होता है। पीपली, शाहाबाद, रादौर और साढौरा जैसे क्षेत्र राज्य के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2030 तक आलू का उत्पादन 750 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका इसके उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। यह फसल किसानों के लिए भी समृद्धि का माध्यम बन चुकी है। चाइलो द्वीप के आदिवासी समुदाय आज भी इसकी 91 देसी किस्मों की खेती कर रहे हैं।</p>
<p class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">पर्यावरण संकट में आलू की भूमिका: प्रसिद्ध पर्यावरण जीव विज्ञानी प्रो. राम सिंह के अनुसार, आलू भविष्य में खाद्य सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बनेगा। इसके विभिन्न रूपों जैसे चिप्स, फ्राई, हलवा आदि से इसकी खपत और बाजार मूल्य दोनों बढ़े हैं। वर्ष 1845-51 के आयरलैंड के अकाल में आलू की कमी ने बड़ी मानवीय त्रासदी को जन्म दिया था। इसलिए इसे संरक्षित रखना और उसकी विविधता को बचाना आज की जरूरत है।</p>
<p class="ai-optimize-7 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">आलू आज सिर्फ सब्जी नहीं, बल्कि वैश्विक पोषण और खाद्य सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है। भारत के लिए यह चौथी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। आने वाले वर्षों में इसके उत्पादन, उपयोग और वैज्ञानिक शोध के माध्यम से यह फसल जलवायु परिवर्तन और कुपोषण से लड़ाई में अहम भूमिका निभाएगी। History and origin of Potato</p>
<p class="ai-optimize-8"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Electricity blackout: हरियाणा-पंजाब समेत देश के इन राज्यों में इस तारीख को होगा ब्लैकआउट" href="http://10.0.0.122:1245/there-will-be-a-blackout-on-this-date-in-these-states-of-the-country-including-haryana-punjab/">Electricity blackout: हरियाणा-पंजाब समेत देश के इन राज्यों में इस तारीख को होगा ब्लैकआउट</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 May 2025 14:34:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Potato: आलू की नई किस्मों से स्वाद के साथ किसानों को हो रहा अधिक लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[आलू उत्पादन में विश्व में भारत का है अग्रणी स्थान: डॉ. सीबी सिंह कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Aalu: आलू की नई किस्मों से थाली के स्वाद में जहां परिवर्तन हुआ है वहीं इसके साथ साथ किसानों को फसलों में अधिक लाभ भी हुआ है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह ने कहा कि आलू की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmers-are-getting-more-profit-with-the-taste-of-new-potato-varieties/article-64180"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/potato.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">आलू उत्पादन में विश्व में भारत का है अग्रणी स्थान: डॉ. सीबी सिंह</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)।</strong> Aalu: आलू की नई किस्मों से थाली के स्वाद में जहां परिवर्तन हुआ है वहीं इसके साथ साथ किसानों को फसलों में अधिक लाभ भी हुआ है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह ने कहा कि आलू की नई उन्नत किस्में आने के बाद इन्हें लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और स्वाद में भी परिवर्तन नहीं होता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों में कई परिवर्तन हुए हैं। किसान कृषि विशेषज्ञों एवं कृषि वैज्ञानिकों के सही परामर्श से अधिक उत्पादन ले सकते हैं। Potato</p>
<h3 style="text-align:justify;">सब्जी उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. सीबी सिंह ने आलू की नई एवं उन्नत किस्मों पर चर्चा करते हुए कहा कि कृषि वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों एवं विशेषज्ञों द्वारा आलू की नई किस्मों और बीजों का गहन अनुसंधान के उपरांत किसानों को जानकारियां उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सब्जी उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। यह कृषि वैज्ञानिकों एवं किसानों की मेहनत से संभव हुआ है। डॉ. सिंह के अनुसार आलू का उत्पादन अन्य फसलों के मुकाबले कई गुणा है। आज किसान नई किस्म के आलू के बीजों के लिए हर समय प्रयत्नरत रहते हैं और विभिन्न कृषि संस्थाओं से बीजों के लिए संपर्क करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अभी नई किस्म का बीज उपलब्ध करवाने की आवश्यकता | Potato</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. सिंह का कहना है कि अभी भी देश की आबादी के अनुसार अच्छी किस्म के बीज उपलब्ध करवाने की आवश्यकता है। इसके लिए कृषि वैज्ञानिक अधिक से अधिक अनुसंधान में जुटे रहते हैं। उन्होंने अधिक उत्पादन के लिए वर्तमान में नई किस्म के आलू के बीजों पर चर्चा की। डा. सिंह ने कहा कि आलू के उन्नत बीज किस्मों के साथ उपचार भी बहुत जरूरी है। देश के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के लिए अब तक अनेकों आलू की प्रजातियां विकसित की हैं। इन प्रजातियों को देश के अलग-अलग क्षेत्रों में लगाया जाता है। देश की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां के अनुसार पूरे साल भर कहीं न कहीं आलू की खेती होती रहती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विभिन्न क्षेत्रों मे होती आलू की बंपर पैदावार</h3>
<p style="text-align:justify;">देश के कई प्रदेशों में आलू का काफी उत्पादन किया जाता है। इनमें हरियाणा, यूपी, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और हिमाचल आलू के उत्पादन में अग्रणी राज्य माने जाते हैं। बता दें कि हरियाणा के कई इलाकों में आलू की बंपर पैदावार की जाती है। कुरुक्षेत्र जिला में काफी आलू का उत्पादन होता है। यहां के शाहाबाद क्षेत्र में तो सारे खेत ही आलू की फसल से ढ़के मिलते हैं। इसके अलावा थानेसर व रादौर में भी ज्यादातर किसान आलू का उत्पादन करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हर परिवार में किसी न किसी रूप में होता है उपयोग | Potato</h3>
<p style="text-align:justify;">आलू एक प्रमुख फसल है जोकि हर परिवार में यह किसी न किसी रूप में उपयोग किया जाता है। इसमें स्टार्च, प्रोटीन, विटामिन-सी और खनिज लवण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। अधिक उपज देने वाली किस्मों की समय से बुआई, संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग, समुचित कीटनाशक, उचित जल प्रबंधन के जरिये आलू का अधिक उत्पादन कर अपनी आय बढ़ाई जा सकती है। आलू की खेती के लिए दोमट व बलुई दोमट भूमि जिसमें जीवांश की प्रचुर मात्रा हो, उपयुक्त रहता है। मध्य समय की किस्में- कुफरी पुखराज, कुफरी अरुण, कुफरी लालिमा, कुफरी बहार आदि को नवंबर के प्रथम सप्ताह में बुआई करने से अच्छा उत्पादन होता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Dengue: कैथल में डेंगू का जोरदार डंक, सीजन में पहली बार एक साथ सात डेंगू पॉजिटिव केस मिले" href="http://10.0.0.122:1245/seven-dengue-positive-cases-found-simultaneously-in-kaithal/">Dengue: कैथल में डेंगू का जोरदार डंक, सीजन में पहली बार एक साथ सात डेंगू पॉजिटिव केस मिले</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmers-are-getting-more-profit-with-the-taste-of-new-potato-varieties/article-64180</link>
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                <pubDate>Fri, 08 Nov 2024 17:31:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>झुलसा रोग से बचाने के लिए आलू की फसल में सिंचाई जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि आलू की फसल को झुलसा रोग और कीट से बचाने के लिए जरूरत के अनुुसार सिंचाई करते रहें। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक एस.बी. शर्मा ने बताया कि जब मौसम में 85 प्रतिशत से अधिक नमी आ जाए और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/irrigation-in-potato-crop-is-necessary-to-avoid-scorching-disease/article-21056"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/potato.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि आलू की फसल को झुलसा रोग और कीट से बचाने के लिए जरूरत के अनुुसार सिंचाई करते रहें। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक एस.बी. शर्मा ने बताया कि जब मौसम में 85 प्रतिशत से अधिक नमी आ जाए और लगातार तीन दिन तक कोहरा बना रहे और तापमन पांच डिग्री सेन्टीग्रेड से कम हो। ऐसी स्थिति में पिछेता झुलसा के अनुकूल होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इस मौसम में पाला भी पड़ने की सम्भावना है</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि मौसम की अनुकूलता के आधार पर आलू की फसल में पिछेता-झुलसा बीमारी निकट भविष्य में आने की सम्भावना है तथा इस मौसम में पाला भी पड़ने की सम्भावना है, जिससे आलू की फसल को नुकसान हो सकता है। निदेशक ने कहा कि जिन किसानों ने किसान आलू की फसल में अभी तक फफूँदनाशक दवा का पर्णीय छिड़काव नहीं किया है, वे आलू की फसल में अभी पिछेता-झुलासा के बचाव के लिए मैन्कोजेब, प्रोपीनेब और क्लोरोथेलोनील युक्त फफूँदनाशक 2.0-2.5 किग्रा. प्रति 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही यह भी सलाह दी है कि जिन खेतों में बीमारी प्रकट हो चुकी हो, उनमें किसी भी फफूँद नाशक साईमोक्सेनिल के साथ मैन्कोजेब का तीन किग्रा. प्रति हेक्टेयर एक हजार लीटर पानी की दर से अथवा फेनोमिडान के साथ मैन्कोजेब का तीन किग्रा. प्रति हेक्टेयर एक हजार लीटर पानी की दर से अथवा डाईमेथोमार्फ एक किग्रा. एवं मेन्कोजेब 2.0 किग्रा. के साथ कुल मिश्रण तीन किग्रा. प्रति हेक्टेयर एक हजार लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि फफूँदनाशक को दस दिन के अन्तराल पर दोहराया जा सकता है अथवा रोग की तीव्रता के आधार पर इस अन्तराल को घटाया या बढ़ाया जा सकता है। किसान को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि एक ही फफूँदनाशक का बार-बार छिड़काव न करें। शर्मा ने बताया कि किसान भाई पाले से फसल के बचाव के लिए अपने आलू के खेतों में पर्याप्त नमी रखें, इसके लिए आवश्यक है कि आलू की फसल की आवश्यकतानुसार ंिसचाई करते रहें तथा बचाव के लिए खेत के नजदीक धुंए के लिए अलावा जलायें।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jan 2021 16:43:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब ‘आलू’ तेवर दिखाने की तैयारी में</title>
                                    <description><![CDATA[महंगाई की मार: लहसुन 200, प्याज 100 और आलू 25 रुपये किलो बिक रहा कोहरा बढ़ने से आलू के दामों में होगी बढोतरी अबोहर (सच कहूँ/सुधीर अरोड़ा)। प्याज और लहसुन के बाद अब आलू (Potato) के भाव भी आसमान छुने लगे हैं। आम आदमी की रसोई का स्वाद बढ़ाने वाला आलू, प्याज व लहसुन सहित […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/increase-potato-rates-due-to-fog/article-11975"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/potato.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">महंगाई की मार: लहसुन 200, प्याज 100 और आलू 25 रुपये किलो बिक रहा</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>कोहरा बढ़ने से आलू के दामों में होगी बढोतरी</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर (सच कहूँ/सुधीर अरोड़ा)।</strong> प्याज और लहसुन के बाद अब आलू <strong>(Potato)</strong> के भाव भी आसमान छुने लगे हैं। आम आदमी की रसोई का स्वाद बढ़ाने वाला आलू, प्याज व लहसुन सहित सभी सब्जियां महंगी होने से आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं। पिछले एक माह में लहसुन, प्याज, आलू, अरबी के भाव लगभग दोगुने हो गए हैं तो वहीं गोभी, गाजर , खीरा, लोकी, पत्ता गोभी, भिंडी व टमाटर के भाव वहीं के वहीं हैं जबकि मटर के भाव कम हा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>एक माह में सबसे ज्यादा प्याज, भिंडी, अरबी, करेला, आलू और लहसुन के भाव में उतार-चढ़ाव आया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सब्जी विक्रेता गौरव अरोड़ा ने बताया कि प्याज समय पहले 30 रुपए किलो था जोकि आज 100 रुपए किलो हो गया है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>लहसुन के भाव कुछ समय पहले 120 रुपए प्रति किलो था, जो बढ़कर 200 रुपए प्रति किलो हो गया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पिछले 3 माह से लगातार प्याज और लहसुन के भाव में उतार चढ़ाव आ रहा है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आलू व प्याज की नई फसल आने के बाद भी भावों में तेजी जारी है। </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में समझ में नहीं आ रहा है कि भावों में कमी कब आएगी। आलू की फसल वाले क्षेत्र में 10-12 दिन पहले ओलावृष्टि होने के कारण फसल खराब हो गई । ऐसे में आलू के भावों में कमी आना सम्भव नहीं है। इसी प्रकार से प्याज बुवाई क्षेत्र जोधपुर और झालावाड़ में भी ओलावृष्टि होने के कारण फसल खराब हो गई जबकि अन्य कई जगहों से आने वाले प्याज में अभी समय लगेगा। इसके कारण प्याज के भावों में भी अभी तेजी जारी रहेगी।</p>
<h2 style="text-align:center;">होटलों और ढाबों में भी सलाद में से प्याज गायब | Potato</h2>
<p style="text-align:justify;">बाजार में भाव में तेजी को देखते हुए और आने वाली नई फसल में भी देरी के चलते स्टॉकिस्ट भी अपना स्टॉक बाजार में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बेचने के लिए निकाल रहे हैं। इसके कारण भी बाजार में तेजी बनी हुई है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>भावों में तेजी के कारण होटलों और ढाबों में भी सलाद में से प्याज गायब हो गया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>एक कहावत है कि गरीब प्याज रोटी खाकर ही काम चला लेगा। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>परंतु अब कारण जो भी हो गरीब की प्याज रोटी नहीं रही है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>अब प्याज शाही घरानों की थाली की शोभा बढ़ाने के लिए ही रह गया है और अमीरों की शान बन गया।</strong></li>
</ul>
<h2 style="text-align:center;">रसोई का बजट बिगड़ा | Potato</h2>
<p style="text-align:justify;">गृहणियों पूजा, सुमन, रमन, नीरू, राजरानी, ममता, पिंकी, कैलाश, कशिश, प्रेमलता, सिमरन, ज्योति आदि ने कहा कि सब्जियों के दिनों-दिन बढ़ते दामों ने रसोई का बजट बिगाड़ रखा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>पहले प्याज, लहसुन और अब आलू के दामों में बढ़ौतरी होने से रसोई की महक पर विराम लगेगा। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>आलू तो हर सब्जी के साथ बनता है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>गोभी, मटर, पालक, मैथी आदि सब्जी के साथ ओर आलू तो वैसे भी ब्च्चों की पहली पसंद होती है। </strong></li>
</ul>
<h2 style="text-align:center;">मोबाइलों में छाया प्याज | Potato</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>खाने की थाली से बेशक प्याज गायब हो गई हो, लेकिन सोशल मीडिया पर रोजाना देखने को मिल रही है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>नौबत यहां तक आ गई है कि लोग अपने प्रॉडक्ट को प्याज के रेट कंपेयर करके बेच रहे हैं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>फेसबुक पोस्ट हो या गुड मॉर्निंग मेसेज सभी में प्याज छाया हुआ है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्याज की बढ़ती कीमतों को लोगों द्वारा बड़े मजाकिया तरीके से पेश किया जा रहा है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>वहीं बढ़ती कीमतों के प्रति रोष भी प्रकट कर रहे है।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
<p><em>Edited By Mandeep Singh</em></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Dec 2019 20:37:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कम पैदावार से आलू के दाम बढ़े, किसानों को राहत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रति क्विंटल चार सौ रूपए हुई दामों में वृद्धि जालंधर (एजेंसी)। पंजाब में आलू के दाम बढ़ने से पिछले तीन वर्षों से आर्थिक नुकसान उठा रहे किसानों को इस बार राहत मिली है। देश में आलू की कम पैदावार के चलते पंजाब से आलू की मांग बढ़ी है जिसके कारण आलुओं के दाम में चार सौ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/increase-the-prices-of-potato-with-low-yield-relief-to-farmers/article-3641"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/patote.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">प्रति क्विंटल चार सौ रूपए हुई दामों में वृद्धि</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>जालंधर (एजेंसी)। </strong>पंजाब में आलू के दाम बढ़ने से पिछले तीन वर्षों से आर्थिक नुकसान उठा रहे किसानों को इस बार राहत मिली है। देश में आलू की कम पैदावार के चलते पंजाब से आलू की मांग बढ़ी है जिसके कारण आलुओं के दाम में चार सौ रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। कृषि विभाग के उप-निदेशक डॉ सतबीर सिंह ने बताया कि गत वर्ष के मुकाबले इस साल एक हजार हेक्टेयर ज्यादा रकबे में आलू बोया गया था। उन्होंने बताया कि इस बार रकबा तो बढ़ा लेकिन फसल की कम पैदावार होने तथा देश के अन्य राज्यों से मांग बढ़ने के कारण।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य में आलू की कीमतों में उछाल आया है। राज्य में इस समय आलू छह सौ रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। डॉ सतवीर सिंह ने बताया कि पश्चिम बंगाल तथा देश के अन्य राज्यों में आलू की फसल कम होने के कारण आने वाले समय में कीमतों में और वृद्धि होने की संभावना है।उन्होंने बताया कि इस बार किसानों ने अपने पिछले अनुभव को देखते हुए कम क्षेत्र में आलू की फसल बोयी थी और मौसम के जल्दी गर्म होने के कारण आलू की फसल की पैदावार कम हुई है। आलू उत्पादक किसान उजागर सिंह ने कहा कि इस बार आलू के दाम बढ़ने से उन्हें काफी राहत मिली है। उन्होंने बताया कि इस समय वह आठ से 10 रुपए प्रति किलोग्राम आलू बेच रहा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Mar 2018 07:25:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>यूपी, बंगाल में मिल रही है आलू की दोगुनी कीमत</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में किसानों को आलू की दोगुनी कीमत मिल रही है। इससे दोनों राज्यों की सरकारों को भी काफी राहत मिली है। अभी आलू की नई फसल के लिए किसानों को 9-10 प्रति किलो का भाव मिल रहा है। पिछले साल कीमत 4.5-5 रुपये किलो थी। पश्चिम बंगाल में आलू […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/farmers-getting-double-price-for-potato-in-up-and-west-bengal/article-3636"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/aalu.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलकाता (एजेंसी)। </strong>उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में किसानों को आलू की दोगुनी कीमत मिल रही है। इससे दोनों राज्यों की सरकारों को भी काफी राहत मिली है। अभी आलू की नई फसल के लिए किसानों को 9-10 प्रति किलो का भाव मिल रहा है। पिछले साल कीमत 4.5-5 रुपये किलो थी। पश्चिम बंगाल में आलू की कीमतों में तेजी ममता बनर्जी सरकार को आगामी पंचायत चुनाव में फायदा पहुंचा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका फायदा उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को भी होगा। पिछले साल आलू की कीमतों में कमी की वजह से प्रदेश सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा था। इस साल आलू की पैदावार कम रहने के आसार हैं। इसकी खेती इस साल कम एरिया में हुई है और प्रति एकड़ पैदावार में भी कमी आई है। उत्तर प्रदेश के किसानों और ट्रेडर्स का अनुमान है कि इस साल आलू की पैदावार में 30 पर्सेंट की कमी आएगी। पिछले साल बंपर पैदावार हुई थी और आलू की पैदावार 160 लाख टन पहुंच गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">2017 में बंगाल में 110 लाख टन आलू हुआ था। पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज असोसिएशन के अध्यक्ष पतित पबन डे ने कहा, ‘इस साल आलू की पैदावार लगभग 95 लाख टन हुई है। कोल्ड स्टोरेज आलू से भर गए हैं। इनकी 90 पर्सेंट स्टोरेज कपैसिटी का इस्तेमाल हो रहा है। आलू किसानों को इस बार अच्छी कीमत मिली है। आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ में यहां के आलू की ज्यादा मांग है।’</p>
<p style="text-align:justify;">बंगाल के ट्रेडर्स का मानना है कि मई में आलू की कीमत खुदरा बाजार में 40 पर्सेंट तक बढ़ सकती है। अभी खुदरा बाजार में यह 14 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है। मई में यह 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है। बंगाल सरकार ने अभी तक पंचायत चुनावों की तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन इनके अप्रैल के आखिर और मई की शुरूआत में होने की उम्मीद है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Mar 2018 06:54:59 +0530</pubDate>
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