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                <title>water crisis - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>water crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जल संकट झेल रहे चंदाना गेट के लोग, फूटा गुस्सा, नारेबाजी</title>
                                    <description><![CDATA[जेठ की भीषण गर्मी में चंदाना गेट क्षेत्र के लोग पिछले तीन महीनों से पानी की भारी किल्लत झेल रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/people-of-chandana-gate-facing-water-crisis-got-angry-and/article-85235"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/kaithal-news1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैथल (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Kaithal News: जेठ की भीषण गर्मी में चंदाना गेट क्षेत्र के लोग पिछले तीन महीनों से पानी की भारी किल्लत झेल रहे हैं। शहर के चंदाना गेट क्षेत्र में पिछले लगभग तीन महीनों से गहराए पेयजल संकट को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। पानी की गंभीर समस्या से परेशान मोहल्लावासियों ने बुधवार को पब्लिक हेल्थ विभाग कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।  लोगों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन उनकी समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इलाके में पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ी है।</p><p style="text-align:justify;"> गर्मी के इस मौसम में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबमर्सिबल और ट्यूबवेल भी बंद पड़े हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी कार्यालयों में बैठकर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि यदि किसी पॉश इलाके में ऐसी समस्या होती तो प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता, लेकिन गरीब बस्तियों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। यह भी कहा कि क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की निगरानी नहीं हो रही और कई जगह ट्यूबवेल घंटों बंद पड़े रहते हैं।</p><p style="text-align:justify;">स्थिति को गंभीर होता देख विभाग के एसडीओ मौके पर पहुंचे और लोगों से बातचीत की। इस दौरान क्षेत्र में नया ट्यूबवेल लगाने और मशीन मंगवाने पर सहमति बनी। अधिकारियों ने स्थानीय प्रतिनिधियों से जगह दिखाने और आवश्यक अनुमति प्रक्रिया पूरी करने को कहा।</p><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/kaithal-news1.jpg" alt="Kaithal News" width="1280" height="720"></img>Kaithal News: पब्लिक हेल्थ विभाग में पहुंचकर नारेबाजी करते हुए चंदाना गेट निवासी। <p style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:14:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Water Crisis: बूंद बूंद पानी को तरसेगा सरसा</title>
                                    <description><![CDATA[आज से फिर बंद हो जाएंगी नहरें, 20 दिन बाद आएगा पानी पेयजल की किल्लत से लोग, सिंचाई न होने से किसान परेशान सरसा (सच कहूँ न्यूज)। Water Crisis: जिले की सभी नहरें शुक्रवार शाम को बंद हो जाएगी और उसके 20 दिन बाद फिर नहरों में पानी आएगा जिससे जिले में एक बार फिर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/all-the-canals-of-sirsa-district-will-be-closed-on-friday-evening/article-70339"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-05/canals-of-bhakra.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">आज से फिर बंद हो जाएंगी नहरें, 20 दिन बाद आएगा पानी</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>पेयजल की किल्लत से लोग, सिंचाई न होने से किसान परेशान</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Water Crisis: जिले की सभी नहरें शुक्रवार शाम को बंद हो जाएगी और उसके 20 दिन बाद फिर नहरों में पानी आएगा जिससे जिले में एक बार फिर पेयजल संकट गहराएगा। उल्लेखनीय है कि इस बार नहरों में पानी बहुत कम आया है। इस कारण गांव या शहरों में जलघर ही नहीं भरे हैं। गांव में पेयजल सप्लाई भी आपूर्ति नहीं हो पाई है। अहम बात है कि किसानों के लिए सबसे अधिक परेशानी बनेगी। इस बार नहरों में पानी पहले ही कम आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरा नहरबंदी का असर भी लंबा रहेगा। ऐसे में कपास फसल की बुवाई कर पाना मुश्किल हो रहा है। अगर नहरों में पानी देरी से आएगा तो फसल की बुवाई नहीं हो पाएगी। सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार भाखड़ा से आने वाला पानी 2 मई की शाम को ही बंद हो जाएगी। इसके साथ ही सरसा के चारों हेड पर पानी बंद हो जाएगा। इसके बाद नहरों में पानी का प्रवाह नहरों में रातभर तक चलेगा। अगले दिन 3 मई को वह पानी भी खत्म हो जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पेयजल की किल्लत से आमजन की बढ़ी परेशानी | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">इस समय सरसा में न खेतों की सिंचाई हो पाई है तो न ही जलघर भर पाए। 21 मई के बाद ही नहरों में पानी आएगा। ऐसे में पेयजल संकट बनेगा और आमजन को काफी परेशानी उठानी पडगी। नहरों में पानी छोड़े जाने के साथ ही लोगों ने टैंकरों के माध्यम से पानी एकत्र करना शुरू कर दिया, जिससे नहर के किनारे ट्रैक्टर-टैंकरों की लंबी कतारें लग गई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन नहरों व माइनर से होती है जलापूर्ति</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसा में रोड़ी ब्रांच, कालूवालां डिस्ट्रीब्यूटर, ममड़ नहर, मिठड़ी डिस्ट्रीब्यूटर, डबवाली डिस्ट्रीब्यूटर, मोजगढ़ माइनर, चौटाला माइनर, केएलसी माइनर के जरिए सिंचाई एवं पेयजल की आपूर्ति होती है। अभी इन नहरों में 1800 क्यूसेक पानी मिल रहा है। जबकि 2800 क्यूसेक मिलना चाहिए। एक हजार क्यूसेक पानी पंजाब से कम हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लोग पानी के टैंकर मंगवाने को मजबूर</h3>
<p style="text-align:justify;">जिले के गांव तीन से चार दिन में पानी सप्लाई होती है। शहर में एक दिन छोड़कर सप्लाई आती है। लोग टैंकर मंगवाकर अपना काम चला रहे हैं। जिसके लिए उन्हें 700 से 800 रूपए प्रति टैंकर कीमत चुकानी पड़ रही है। सबसे अधिक मुश्किल है कि टैंकरों द्वारा स्पलाई किया जा रहा जल भी खारा होता है जिसका प्रयोग पेयजल के लिए करना स्वास्थ्य की दृष्टि के ाघातक हो सकता है। कुछ गांव में जलघर खाली पड़े हैं। वहां ज्यादा दिक्कत है। सरसा में करीब 149 नहरें है, जिनमें से 119 नहर या माइनर में भाखड़ा का पानी आता है। Sirsa News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Jharkhand ATS: झारखंड में एटीएस की बड़ी कार्रवाई, इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा आतंकी गिरफ्तार" href="http://10.0.0.122:1245/ats-takes-major-action-in-jharkhand-terrorist-linked-to-indian-mujahideen-arrested/">Jharkhand ATS: झारखंड में एटीएस की बड़ी कार्रवाई, इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा आतंकी गिरफ्तार</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 May 2025 17:09:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Water Crisis: करोड़ों भारतीयों पर गंभीर जल संकट, होने वाली है पानी की कमी</title>
                                    <description><![CDATA[अगले 7 सालों में जीडीपी को बड़ा नुकसान होने के आसार Water Crisis In India: पानी की कमी और सूखे से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए पानी बचाना और इसका सकुशल उपयोग करना ही समय की जरूरत बन गया है। ऐसे में विश्व स्तर पर, जनसंख्या वृद्धि के साथ स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना भारत सरकार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/water-crisis-in-india/article-49512"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/water-crisis-in-india.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">अगले 7 सालों में जीडीपी को बड़ा नुकसान होने के आसार</h3>
<p style="text-align:justify;">Water Crisis In India: पानी की कमी और सूखे से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए पानी बचाना और इसका सकुशल उपयोग करना ही समय की जरूरत बन गया है। ऐसे में विश्व स्तर पर, जनसंख्या वृद्धि के साथ स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना भारत सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। आजकल जलवायु परिवर्तन के दौर में मॉनसून और उस पर निर्भर जल संसाधनों पर बुरा असर पड़ा है। हैदराबाद में 30 झीलों का सूख जाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट की मानें तो अगस्त में शहर की 185 झीलों में से 30 झीलों के सूखने की सूचना मिली थी, कुछ झीलों पर अतिक्रमण भी कर लिया गया है। Water Crisis</p>
<p style="text-align:justify;">पीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार शेखपेट, कुकटपल्ली, मेडचल-मल्काजगिरी और कुतुबुल्लापुर की झीलें सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, लेकिन ये संकट इससे भी कहीं ज्यादा बड़ा है। इस चुनौती से बचने के लिए, भारत सरकार ने 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन (जेजेएम) शुरू किया हुआ है। जेजेएम 256 जिलों में 1592 जल-तनावग्रस्त ब्लॉकों पर केंद्रित है। कार्यक्रम का उद्देश्य स्रोतों को अनिवार्य रूप से लागू करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे भारत की बात करें तो कई बड़ी नदियों के सूखने के साथ भारत को जल संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस तरह का गंभीर जल संकट भारत में कभी देखने को नहीं मिला था। भारत में दुनिया की आबादी का 18 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि देश के पास सिर्फ 4 प्रतिशत जल संसाधन हैं। ये भारत को दुनिया में सबसे ज्यादा पानी की कमी वाले देशों में से एक बनाता है। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में गर्मियों के आते ही पानी भारत में सोने की तरह कीमती चीज बनती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि ब्रह्मांड में पृथ्वी एकमात्र ऐसा ग्रह है जिस पर पानी और जीवन संभव है। लेकिन भले ही ग्रह का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है, केवल 1 प्रतिशत तक ही लोगों के पास आसानी से पहुंच सकता है। यह देखते हुए कि सभी प्रकार का जीवन जल पर निर्भर हैं। घरेलू और कृषि उपयोग के लिए इसके महत्व को कम नहीं आंका जा सकता। इसके अलावा, पानी का उपयोग बिजली उत्पादन और प्रक्रिया उद्योग में किया जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं तथ्य और आंकड़े | Water Crisis</h3>
<p style="text-align:justify;">अगस्त 2021 में नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (नीति) आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार के अनुसार, भारत में वाष्पीकरण के बाद वार्षिक उपलब्ध पानी 1999 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है, जिसमें से उपयोग योग्य जल क्षमता 1122 अनुमानित है। बीसीएम, भारत दुनिया में भूजल का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है, जिसका अनुमानित उपयोग प्रति वर्ष लगभग 251 बीसीएम है, जो वैश्विक कुल के एक चौथाई से अधिक है। 60 प्रतिशत से अधिक सिंचित कृषि और 85 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति इस पर निर्भर है, और बढ़ते औद्योगिक/शहरी उपयोग के साथ, भूजल एक महत्वपूर्ण संसाधन है। यह अनुमान लगाया गया है कि प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 2025 में लगभग 1400 घन मीटर तक कम हो जाएगी, और 2050 तक 1250 घन मीटर तक कम हो जाएगी। Water Crisis In India</p>
<p style="text-align:justify;">जून 2018 में नीति आयोग द्वारा प्रकाशित ‘समग्र जल प्रबंधन सूचकांक (सीडब्ल्यूएमआई)’ नामक एक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत अपने इतिहास में सबसे खराब जल संकट के दौर से गुजर रहा है (लगभग 600 मिलियन लोग अत्यधिक जल संकट का सामना कर रहे थे और सुरक्षित पानी की अपर्याप्त पहुंच के कारण हर साल लगभग 200,000 लोग मर रहे थे। रिपोर्ट में आगे उल्लेख किया गया है कि जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत को 122 देशों में से 120वें स्थान पर रखा गया है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत पानी दूषित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक देश की पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी हो जाएगी, जिससे लाखों लोगों के लिए गंभीर कमी होगी और देश की जीडीपी में अंतत: नुकसान होगा। सीडब्ल्यूएमआई की अवधारणा राज्यों के बीच सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद की भावना पैदा करने के लिए एक उपकरण के रूप में की गई थी। यह मेट्रिक्स का एक अखिल भारतीय सेट बनाने का पहला प्रयास था जिसने जल प्रबंधन के विभिन्न आयामों और पानी के जीवनचक्र में उपयोग को मापा। जल डेटा संग्रह अभ्यास जल शक्ति मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के साथ साझेदारी में किया गया था। रिपोर्ट को व्यापक रूप से स्वीकार किया गया और राज्यों को उनके सफलता क्षेत्रों पर, पूर्णत: और अपेक्षाकृत रूप से, और उनके जल भविष्य को सुरक्षित करने की सिफारिशों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। Water Crisis In India</p>
<p style="text-align:justify;">अगस्त 2019 में जारी सीडब्ल्यूएमआई 2.0 ने आधार वर्ष 2016-17 के मुकाबले संदर्भ वर्ष 2017-18 के लिए विभिन्न राज्यों की रैंकिंग की। 2017-18 में गुजरात पहले स्थान पर रहा था, उसके बाद आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गोवा, कर्नाटक और तमिलनाडु रहे थे। उत्तर पूर्वी और हिमालयी राज्यों में, हिमाचल प्रदेश को शीर्ष पर आंका गया। केंद्रशासित प्रदेशों ने पहली बार अपना डेटा प्रस्तुत किया, जिसमें पुडुचेरी को शीर्ष स्थान पर घोषित किया गया। सूचकांक में वृद्धिशील परिवर्तन (2016-17 से अधिक) के मामले में, हरियाणा सामान्य राज्यों में पहले स्थान पर रहा और उत्तराखंड उत्तर पूर्वी और हिमालयी राज्यों में पहले स्थान पर रहा। पिछले तीन वर्षों में सूचकांक पर मूल्यांकन किए गए राज्यों में से औसतन 80 प्रतिशत ने +5.2 अंकों के औसत सुधार के साथ अपने जल प्रबंधन स्कोर में सुधार किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन चिंता की बात यह है कि 27 में से 16 राज्य अभी भी सूचकांक पर 50 से कम अंक (100 में से) प्राप्त करते हैं, और कम प्रदर्शन वाली श्रेणी में आते हैं। ये राज्य सामूहिक रूप से प्त48 प्रतिशत जनसंख्या, प्त40 प्रतिशत कृषि उपज और प्त35 प्रतिशत भारत के आर्थिक उत्पादन का योगदान करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश, राजस्थान, केरल और दिल्ली, भारत के आर्थिक उत्पादन में शीर्ष 10 योगदानकतार्ओं में से 4 और भारत की एक चौथाई से अधिक आबादी के लिए जिम्मेदार, सीडब्ल्यूएमआई पर 20 अंक से 47 अंक तक के स्कोर हैं। खाद्य सुरक्षा भी खतरे में है, यह देखते हुए कि बड़े कृषि उत्पादक (राज्य) अपने जल संसाधनों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह परेशान करने वाली बात है क्योंकि सूचकांक के लगभग आधे अंकों का मूल्यांकन सीधे तौर पर कृषि में जल प्रबंधन से जुड़ा है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/monsoon-session/">Monsoon Session: मानसून सत्र को लेकर आई बड़ी खबर, कुछ बड़ा होने वाला है?</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/water-crisis-in-india/article-49512</link>
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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2023 14:06:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Water Crisis In Haryana: सावधान! हरियाणा पर मंडरा रहे जल संकट के बादल, आने वाला समय बहुत बुरा</title>
                                    <description><![CDATA[1700 से अधिक गांव रेड जोन में शामिल Haryana News: हरियाणा वासियों के लिए एक बुरी खबर है। यहां के लोगों की पानी को लेकर चिंताएं बढ़ने वाली है। राज्य में जल संकट गहरा सकता है। सरकार की ओर से सिंचाई विभाग और जन स्वास्थ्य विभाग को इसके लिए सचेत कर दिया है। हरियाणा सरकार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/attention-clouds-of-water-crisis-hovering-over-haryana-bad-times-to-come/article-49242"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/save-water.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">1700 से अधिक गांव रेड जोन में शामिल</h3>
<p style="text-align:justify;">Haryana News: हरियाणा वासियों के लिए एक बुरी खबर है। यहां के लोगों की पानी को लेकर चिंताएं बढ़ने वाली है। राज्य में जल संकट गहरा सकता है। सरकार की ओर से सिंचाई विभाग और जन स्वास्थ्य विभाग को इसके लिए सचेत कर दिया है। हरियाणा सरकार द्वारा पहले ही 2022 में प्रदेश के 1780 गांवों को रेड जोन में शामिल किया जा चुका है। वहीं अब लगातार गिरते जल स्तर को देखते हुए अलग-अलग श्रेणियां और बनाई गई है जिनमें गुलाबी, बैंगनी और नीली श्रेणियां शामिल है। Haryana News</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि जून 2010 से लेकर जून 2020 तक के, 10 वर्षों के आंकड़ों से पता चला है कि जिन 957 गावों को रेड जोन घोषित किया गया है, वहां भू-जल स्तर की गिरावट दर 0.00-1.00 मीटर प्रति वर्ष के बीच है। 79 गांवों में गिरावट दर जहां 2.0 मीटर प्रति वर्ष है तो वहीं 7.07 गांवों में गिरावट दर 1.01-2.00 मीटर प्रति वर्ष के मध्य दर्ज की गई है। वहीं 37 गांव ऐसे हैं जिनमें भूजल स्तर में कोई गिरावट दर्ज नहीं की गई। साल 2020 के जून माह तक 1041 गांव इस श्रेणी में आ गए है। वहीं पिछले 10 सालों में 874 गांवों में उतार-चढ़ाव के साथ भू-जल स्तर की गिरावट दर 0.00-1.00 मीटर प्रति वर्ष रही है। Haryana News</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि 10 वर्षों के आंकड़ों के मुताबिक 203 ऐसे गांव हैं, जो हाई ट्रेंड पर हैं, जो 0.01 मीटर प्रति वर्ष से अधिक या बराबर है, जबकि 13 गांवों में हाई ट्रेंड दर्ज नहीं किया गया है। हरियाणा सरकार द्वारा पहले भी भूजल स्तर गहराई के आधार पर प्रदेश के गांवों को सात जोन में बांटने का प्रस्ताव रखा गया है। खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी ऌहफअके इस प्रस्ताव के पक्ष में है। वहीं इस बार इन गांवों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/earth-tilted-towards-east-who-is-responsible-what-will-be-the-effect-know-what-is-the-matter/">Earth: पूर्व की ओर झुकी पृथ्वी, जिम्मेदार कौन, क्या होगा असर! जानें क्या है मामला</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jun 2023 13:33:00 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने किया मटका फोड़ प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजधानी के मुंडका क्षेत्र में पानी की कमी से जूझ रहे लोगों के साथ रविवार को मटका फोड़ प्रदर्शन किया और दिल्ली सरकार से भीषण गर्मी से परेशान लोगों को तत्काल पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराने की मांग की। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/congress-demonstration-against-water-crisis/article-32875"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/protest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजधानी के मुंडका क्षेत्र में पानी की कमी से जूझ रहे लोगों के साथ रविवार को मटका फोड़ प्रदर्शन किया और दिल्ली सरकार से भीषण गर्मी से परेशान लोगों को तत्काल पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराने की मांग की। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नरेश कुमार ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राजधानी के ग्रामीण इलाकों के लोग बिजली-पानी के संकट से जूझ रहे हैं और केजरीवाल सरकार मुफ्त बिजली और पानी उपलब्ध कराने की बात करके दिल्ली की जनता को गुमराह कर रही है। डॉ़ कुमार ने कहा कि आज सुबह पार्टी कार्यकर्ताओं ने पानी की किल्लत से परेशान मुंडका इलाके में सावदा क्षेत्र की जेजे कॉलोनी के लोगों के साथ प्रदर्शन किया और दिल्ली सरकार से पानी का संकट दूर करने का आग्रह किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उनका कहना था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुफ्त पानी और बिजली देने के नाम पर गुमराह कर रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि केजरीवाल साफ पानी देने के झूठे वादे करते हैं लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। उनका कहना था कि लोगों को दो दिन के अंतराल पर पानी मिल रहा है और इसमे भी जो पानी उनको दिया जा रहा है वह गंदा होता है जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रहने वाले लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनको लेकर सरकार की अनदेखी का फायदा पानी माफिया उठा रहे हैं। लोगों को मजबूरन इन माफियाओं से 20-20 रुपए में पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही हैं।</p>
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                <pubDate>Sun, 01 May 2022 14:36:55 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर इस गर्मी में कैसे बुझेगी गाँव वालों की प्यास?</title>
                                    <description><![CDATA[जुलाना ब्लॉक में 38 गांव, आबादी दो लाख, जलघर सिर्फ 30 व बुस्टर 15 एक भी पूरे गांव को नहीं मिलता पीने योग्य पानी सच कहूँ/कर्मवीर जुलाना। गर्मी तो दूर सर्दियों में भी जुलाना क्षेत्र में पानी का संकट रहता है। जुलाना ब्लॉक में 38 गांव आते हैं, जिनकी आबादी लगभग दो लाख के करीब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/after-all-how-will-the-thirst-of-the-villagers-be-quenched-in-this-summer/article-25233"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/water.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>जुलाना ब्लॉक में 38 गांव, आबादी दो लाख, जलघर सिर्फ 30 व बुस्टर 15</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>एक भी पूरे गांव को नहीं मिलता पीने योग्य पानी</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/कर्मवीर जुलाना।</strong> गर्मी तो दूर सर्दियों में भी जुलाना क्षेत्र में पानी का संकट रहता है। जुलाना ब्लॉक में 38 गांव आते हैं, जिनकी आबादी लगभग दो लाख के करीब है, इनमें जलघर सिर्फ 30 व बुस्टर 15 हैं। ऐसे में भला लोगों की प्यास कैसे बुझ सकती है। दो माह में एक सप्ताह नहरों का पानी जलघर में पहुंचना, भूमिगत पानी खारा होना व कर्मचारियों की कमी के कारण पानी का संकट और गहरा हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">तपती गर्मी में लगभग सभी जगह पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। कहीं रोड जाम किए जाते हैं और कही जलघर पर ताला जड़ा जाता है। सरकार की प्रति व्यक्ति प्रति दिन 135 लीटर पानी मुहैया करवाने की योजना जमीनी स्तर पर फ्लॉप साबित हो रही है। जुलाना ब्लॉक में 38 गांव आते हैं, जिनकी आबादी दो लाख के करीब है, इनमें सिर्फ 30 ही जलघर हैं। जलघरों में पानी का स्टोर नहरों के पानी से किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरों में पानी कम छोड़ने के कारण स्टोर किया गया पानी कुछ दिनों में ही सप्लाई हो जाता है। इसके बाद जलघर के टैंक खाली हो जाते हैं और पानी का संकट गहरा जाता है। हालांकि जलघरों में पानी की कमी को पूरा करने के लिए ट्यूबवेल भी लगाएं गए हैं, लेकिन भूमिगत पानी खारा होने के कारण ट्यूबवेलों का पानी चर्म रोग जैसे अनेक रोगों को दावत देता है। गांव में घर-घर पानी की सप्लाई के लिए जमीनी लाइन लीक होने, लोगों द्वारा व्यर्थ में पानी बहाने से व कर्मचारियों की कमी पानी के इस संकट को और गहरा कर देती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हैंडपंपों का पीते हैं पानी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जलघर का पानी पीने योग्य नहीं होने के कारण ज्यादातर ग्रामीण हैंडपंपों का पानी ही पीते हैं। पानी की किल्लत के चलते महिलाओं का दूर-दराज के खेतों से पेयजल लाना पड़ रहा है। हैंडपंप ही लोगों की प्यास बुझा रहे हैं। हालांकि इन हैडपंपों के पानी में भी टीडीएस की मात्रा ज्यादा होती है फिर भी लोग पिए जा रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ट्यूबवेलों के पानी में टीडीएस की मात्रा ज्यादा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जलघर में स्टोर किया गया नहरों का पानी समाप्त होने के बाद पानी की सप्लाई ट्यूबवेलों के पानी से की जाती है। भूमिगत पानी पीने योग्य नहीं होने के कारण इसमें टीडीएस की मात्रा ज्यादा होती है। टीडीएस की ज्यादा मात्रा वाला पानी किसी भी लिहाज से प्रयोग करने योग्य नहीं होता है। मजबूरन लोग यह पानी प्रयोग करते हैं, जो अनेक प्रकार के रोगों को न्यौता देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जुलाना ब्लॉक में 30 जलघर हैं। जलघरों में पानी जमा करवाने के लिए ट्यूबवेलों का प्रबंध भी किया गया है। विभाग द्वारा लोगों को साफ व स्वस्थ पानी मुहैया करवाने का प्रयास रहता है।<br />
<strong>– विनोद कुमार जेई जनस्वास्थ्य विभाग जुलाना।</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/after-all-how-will-the-thirst-of-the-villagers-be-quenched-in-this-summer/article-25233</link>
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                <pubDate>Sat, 17 Jul 2021 09:01:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>10 दिनों से पेयजल आपूर्ति बंद, 200 से लेकर 300 देकर खरीद रहे टैंकर</title>
                                    <description><![CDATA[टैंकर में भी नहीं है शुद्ध पानी (Water Crisis) सादुलशहर (सच कहूँ न्यूज)। चक सात एसडीएस स्थित पीएचईडी की जल योजना में पानी खत्म हो जाने के कारण चार हजार आबादी वाले गांव तख्तहजारा बावरियान में करीब 10 दिनों से पेयजल आपूर्ति बंद पड़ी है। पानी भंडारण डिग्गी एवं दोनों फिल्टर प्लांट्स सूख चुके हैं। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/discontinued-drinking-water-supply-for-10-days-tanker-is-being-given-by-purchasing-200-to-300/article-23172"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/water-crisis.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>टैंकर में भी नहीं है शुद्ध पानी (Water Crisis)</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सादुलशहर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> चक सात एसडीएस स्थित पीएचईडी की जल योजना में पानी खत्म हो जाने के कारण चार हजार आबादी वाले गांव तख्तहजारा बावरियान में करीब 10 दिनों से पेयजल आपूर्ति बंद पड़ी है। पानी भंडारण डिग्गी एवं दोनों फिल्टर प्लांट्स सूख चुके हैं। संपन्न लोग जहां 200 से लेकर 300 रुपए प्रति टैंकर पानी खरीद रहे हैं, वहीं जरूरतमंद सामान्य एवं गरीब परिवारों की महिलाएं, बच्चे एवं युवक वाटरवर्क्स की टंकी से मटकों, टंकियों, यहां तक कि पिपों में पानी भर-भरकर ढोने को मजबूर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण दलीप कड़वासरा ने बताया कि डिग्गी में 15 दिनों से पानी खत्म है परंतु डिग्गी के पास लगते चक 6 एसडीएस में सरपंच सुरेश बिश्नोई के खेत में बनी सिंचाई पानी की डिग्गी से पांच दिन तक पानी सप्लाई किया गया। अब दस दिन पूर्व इस डिग्गी में भी पानी खत्म हो चुका है। पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>दोनों हैंड पंप करवा दिए दुरुस्त, ट्यूबवेल लगाने का कार्य शुरू, रविवार को ट्यूबवेल से होगी सप्लाई। पीएचईडी के सहायक अभियंता जितेंद्र झाम ने बताया कि चक सात एसडीएस जल योजनांतर्गत गांव तख्तहजारा बावरियान में लगे दोनों हैडपंप दुरुस्त करवा दिए गए हैं। इसके अलावा मशीन के माध्यम से ट्यूबवेल लगाने का कार्य तुरंत शुरू करवाया गया है। रविवार को भी ट्यूबवेल से पेयजल सप्लाई शुरू की जाएग। सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने भी 25 अप्रेल शाम से केएसडी नहर में पानी छोडन का आश्वासन दिया है।</strong><br />
<strong>– जितेंद्र झाम, पीएचईडी के सहायक अभियंता</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Apr 2021 21:09:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जल संकट की आहट को समझें</title>
                                    <description><![CDATA[एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया की ग्रामीण आबादी के 82 फीसदी हिस्से को साफ पानी मयस्सर नहीं होता है, जबकि 18 फीसदी शहरी आबादी साफ पानी से महरुम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में 86 फीसदी से अधिक बीमारियों का कारण असुरक्षित व दूषित पेयजल का सेवन है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/understand-the-sound-of-water-crisis/article-14081"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/understand-the-sound-of-water-crisis.jpeg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>मौजूदा समय में हमारा पर्यावरण जिन प्रमुख समस्याओं से जूझ रहा है, उसमें अथाह रुप से विद्यमान जल संपदा की मात्रा तथा गुणवत्ता में निरंतर ह्रास का होना भी प्रमुखता से शामिल है। दरअसल, जलवायु परिवर्तन, नगरीकरण-औद्योगीकरण की तीव्र रफ्तार, तालाबों-झीलों का अतिक्रमण, बढ़ता प्रदूषण, बढ़ती आबादी तथा जल संरक्षण के प्रति जागरुकता के अभाव ने पूरी दुनिया में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता को गहरे तौर पर प्रभावित किया है।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा, जारी की गई विश्व जल विकास रिपोर्ट-2018 के मुताबिक, दुनिया के 3.6 अरब लोग हर साल कम से कम एक महीने पानी के लिए तरस जाते हैं। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि पानी की किल्लत झेल रहे लोगों की संख्या 2050 तक 5.7 अरब तक पहुंच सकती है। गौरतलब है कि वर्तमान समय में विश्व की कुल आबादी लगभग 8 अरब है, जिसके वर्ष 2050 तक 9.8 अरब पहुंचने का अनुमान है। वहीं, चीन के बाद सर्वाधिक जनसंख्या वाले तथा विश्व जनसंख्या में 17.5 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले भारत की स्थिति यह है कि यहां की एक चौथाई आबादी पेयजल संबंधी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में, संयुक्त राष्ट्र की उक्त रिपोर्ट वैश्विक मानव समाज के लिए चेतावनी के साथ संभलने का अवसर भी लेकर आई है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">जल किल्लत से निपटने के लिए जल संरक्षण के अल्पकालीन और दीर्घकालीन उपायों पर ध्यान देकर सूखा व अकाल जैसी आपदाओं को रोकना एक अवसर है, जबकि निष्क्रिय समाज के लिए यह रिपोर्ट किसी चेतावनी से कम नहीं है। दरअसल, जल संरक्षण के प्रति लापरवाही और सततपोषणीय उपभोग के अभाव में भारत सहित दुनिया का एक बड़ा हिस्सा जल से जुड़ी विभिन्न संकटों का सामना कर रही है। मौजूदा जल संकट उस मानव समाज का लिए चेतावनी है, जो ना तो जल संरक्षण पर जोर देता है और ना ही भूजल पुनर्भरण का ख्याल ही रखता है। पानी की समस्या की वजह से आए दिन भारत में भी भयावह हालात दिखाई देते हैं। दरअसल पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकता का मानवीय पहुंच से दूर होना, प्राकृतिक कारकों के साथ-साथ जल की निर्ममतापूर्वक बबार्दी की तरफ ध्यान आकर्षित करती हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि शहरों में जहां फर्श चमकाने, गाड़ी धोने और गैर-जरुरी कार्यों में पानी को निर्ममतापूर्वक बहाया जाता है, वहीं गांवों में सिंचाई की स्प्रिंकलर तथा ड्रिप विधियों के नहीं अपनाने तथा जागरुकता की कमी की वजह से लोग पानी का मोल नहीं समझ रहे हैं। जल जीवन की प्राथमिक जरुरत है। जल के बिना बेहतर कल की कल्पना नहीं की जा सकती। हालांकि, दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 28 जुलाई, 2010 को पानी को ‘मानवाधिकार’ घोषित किया था, लेकिन विडंबना यह है कि स्वच्छ पेयजल के अभाव तथा दूषित जल के सेवन से दुनियाभर में रोजाना 2300 लोगों की मृत्यु हो रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया की ग्रामीण आबादी के 82 फीसदी हिस्से को साफ पानी मयस्सर नहीं होता है, जबकि 18 फीसदी शहरी आबादी साफ पानी से महरुम है। प्रदूषित जल में आर्सेनिक, लौहांस, फ्लूराइड आदि की मात्रा अधिक होती है, जिसे पीने से तमाम तरह की स्वास्थ्य संबंधी व्याधियां उत्पन्न हो जाती हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में 86 फीसदी से अधिक बीमारियों का कारण असुरक्षित व दूषित पेयजल का सेवन है। दुनियाभर में गहराते जल संकट को देखते हुए, वैज्ञानिकों का एक तबका अभी से ही मान रहा है कि अगला विश्व युद्ध जल के लिए ही होगा, क्योंकि वर्तमान समय में विश्व के अनेक देश पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। संकट की यही स्थिति, दो देशों, दो राज्यों या दो पक्षों के बीच एक-दूसरे से टकराव का कारण बन रही हैं। इधर, सर्वोच्च न्यायालय ने कावेरी जल-विवाद पर फैसला देते हुए कहा है कि दो राज्यों से होकर गुजरने वाली नदी ‘राष्ट्रीय संपत्ति’ होती है और कोई भी एक राज्य नदी पर अपना मालिकाना दावा नहीं कर सकता। अदालत की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में कावेरी, नर्मदा, यमुना, सोन, कृष्णा, गोदावरी, सतलज रावी, बराक और व्यास जैसी नदियां दो या उससे अधिक राज्यों के बीच विवाद की विषय रही हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">स्वच्छ पेयजल की प्राप्ति हमारा संवैधानिक अधिकार है। ‘सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य'(1991) मामले में अहम सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन के अधिकार में प्रदूषण मुक्त पानी और हवा का अधिकार शामिल है। ‘लेकिन यह तभी संभव है, जब हर स्तर पर जल संरक्षण के सार्थक प्रयास हों। जल संरक्षण के वो तमाम तरीके जो केवल कागजों पर ही सिमट कर रह गए हैं, उन्हें धरातल पर उतारने की दरकार है। तमिलनाडु पहला भारतीय राज्य है, जहां वर्षाजल संचयन को अनिवार्य बनाया गया है, लेकिन अन्य राज्य इसके प्रति गंभीर नहीं हैं। राजस्थान में आज भी परंपरागत तरीके से नाड़ी, तालाब, जोहड़, बन्धा, सागर, समंद एवं सरोवर बनाकर जल संग्रहण किया जाता है, लेकिन कई राज्यों में जल संरक्षण व संग्रहण के पुरानी किंतु नायाब विधियां समय के साथ भूला दी गई हैं। जहां, लोगों को मुश्किल से पानी मिलता है, वहां लोग जल की महत्ता को समझ रहे हैं, लेकिन जिसे अबाध व बिना किसी परेशानी के जल मिल रहा है, वे ही इसके प्रति बेपरवाह नजर आते हैं। गर्मी के दिनों में जल संकट की खबरें लोगों को काफी पीड़ा प्रदान करती हैं और हालात यह हो जाता है कि जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहा होता है। सिर्फ यही नहीं, मानव के साथ-साथ पशु-पक्षियों के लिए भी वैसा समय काफी कष्टकर हो जाता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दुख तो इस बात का भी है कि पानी का महत्व हम तभी समझते हैं, जब लंबे समय तक पानी की सप्लाई नहीं होती या 15 से 20 रुपये देकर एक बोतल पानी लेने की जरुरत पड़ती है। पैसा खर्च कर पानी पीते समय, उसकी एक-एक बूंद कीमती लगती है, लेकिन फिर यह वैचारिकी तब धूमिल पड़ने लगती है, जब पुन: हमें बड़ी मात्रा में पानी मिलने लगता है। सवाल यह है कि जल संरक्षण के प्रति हम गंभीर क्यों नहीं हैं?हालांकि, देश में गर्मी के आगमन के साथ ही जल संरक्षण पर विमर्श का दौर भी शुरू हो जाता है लेकिन, जिस रफ्तार से सूरज की तपिश खत्म होती है, उसी रफ्तार में लोग बहुमूल्य जल के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भूलना भी शुरू कर देते हैं। दुनिया को जल संकट से उबारने के लिए, संरक्षण के आसान तरीकों को अपनाना जरुरी है, ताकि पेयजल किल्लत, सूखा और अकाल जैसी आपदाओं से मानवता की रक्षा हो सके।</h6>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2020 21:32:48 +0530</pubDate>
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                <title>जल की शुद्धता और उपलब्धता का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[आंकड़ों के मुताबिक 200 मीटर की गहराई पर मौजूद भूजल का बड़ा हिस्सा दूषित हो चुका है वहीं 23 प्रतिशत भूजल अत्यधिक खारा है। जिस तेज गति से भूजल दूषित हो रहा है उसी का नतीजा है कि डायरिया, उल्टी, खून वाली उल्टियां, पेशाब में खून आना, बाल गिरना, फेफड़े, त्वचा, किडनी और लिवर और पेट दर्द से जुड़़ी बीमारियां बढ़ रही है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/water-purity-and-availability-crisis/article-13842"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/water-purity-and-availability-crisis.jpeg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>दूषित भूजल में सिर्फ आर्सेनिक की ही मात्रा नहीं बढ़ रही है बल्कि कैडमियम, लेड, मरकरी, निकल तथा सिल्वर की मात्रा भी बढ़ रही है। एक आंकड़े के मुताबिक दूषित भूजल से हर आठ सेकेंड में एक बच्चा काल का ग्रास बन रहा है। हर साल पचास लाख से अधिक लोग दूषित भूजल के सेवन से मौत के मुंह में जा रहे हैं। गौर करें तो समस्या सिर्फ भूजल के दूषित होने तक सीमित नहीं है। विडंबना यह भी है कि भूजल के स्तर में लगातार गिरावट भी हो रही है।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">विज्ञान पत्रिका नेचर जियोसाइंस की मानें तो सिंधु और गंगा नदी के मैदानी क्षेत्र का 60 प्रतिशत भूजल पूरी तरह दूषित हो चुका है। कहीं यह सीमा से अधिक खारा है तो कहीं उसमें आर्सेनिक की मात्रा बहुत अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक 200 मीटर की गहराई पर मौजूद भूजल का बड़ा हिस्सा दूषित हो चुका है वहीं 23 प्रतिशत भूजल अत्यधिक खारा है। जिस तेज गति से भूजल दूषित हो रहा है उसी का नतीजा है कि डायरिया, उल्टी, खून वाली उल्टियां, पेशाब में खून आना, बाल गिरना, फेफड़े, त्वचा, किडनी और लिवर और पेट दर्द से जुड़़ी बीमारियां बढ़ रही है। दूषित भूजल में खतरनाक रोग उत्पन करने वाले जीव पाए जाते हैं, जो पीलिया, पोलियो, गैस्ट्रो इंटराइटिस और चेचक जैसे रोगों को जन्म देते हैं। इससे अतिसार, पेचिस, मियादी बुखार, हैजा, सूजाक व क्षय रोग उत्पन होते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">ध्यान देना होगा कि दूषित भूजल में सिर्फ आर्सेनिक की ही मात्रा नहीं बढ़ रही है बल्कि कैडमियम, लेड, मरकरी, निकल तथा सिल्वर की मात्रा भी बढ़ रही है। एक आंकड़े के मुताबिक दूषित भूजल से हर आठ सेकेंड में एक बच्चा काल का ग्रास बन रहा है। हर साल पचास लाख से अधिक लोग दूषित भूजल के सेवन से मौत के मुंह में जा रहे हैं। गौर करें तो समस्या सिर्फ भूजल के दूषित होने तक सीमित नहीं है। विडंबना यह भी है कि भूजल के स्तर में लगातार गिरावट भी हो रही है। वैसे भी भारत में भूजल का वितरण सर्वत्र एक समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों में तो भूजल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है तो अन्य क्षेत्रों में इसकी कमी है। भूजल संबंधी ऐसी वितरण व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए ताकि जल हानि न हो और जल प्रदूषित होने से बच जाए। यहां समझना होगा कि भूजल जल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत है जिसका उचित उपयोग और संरक्षण होना चाहिए। इसलिए और भी कि भारतीय उपमहाद्वीप में भूजल का व्यवहार अत्यधिक जटिल है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि जीईसी 1997 के दिशा निर्देशों एवं संस्तुतियों के आधार पर देश में स्वच्छ जल के लिए भूजल संसाधनों का आकलन किया गया। देश में कुल वार्षिक पुन: पूरणयोग्य भूजल संसाधनों का मान 433 घन किमी है। प्राकृतिक निस्सरण के लिए 34 बीसीएम जल स्वीकार करते हुए नेट वार्षिक भूजल उपलब्धता का मान संपूर्ण देश के लिए 399 बीसीएम है। वार्षिक भूजल का मान 231 बीसीएम है जिसमें सिंचाई उपयोग के लिए 213 बीसीएम तथा घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग के लिए जल का मान 18 बीसीएम है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">भारत के जल संसाधन पर नजर दौडाएं तो भारत में विश्व के जल संसाधनों का 4 प्रतिशत भाग पाया जाता है। इसका लगभग एक तिहाई भाग वाष्पीकृत हो जाता है। तथा 45 प्रतिशत भाग ढाल के अनुरुप बहकर तालाबों, झीलों और नदियों में चला जाता है। वर्षण से जल की जो थोड़ी-सी मात्रा यानी तकरीबन 22 प्रतिशत मृदा में प्रवेश कर भूमिगत हो जाती है उसे भौम जल या भू-जल कहा जाता है। धरातलीय जल तथा पुनर्भरण योग्य भूमिगत जल से 1,869 घन किमी जल उपलब्ध है और इनमें से केवल 60 प्रतिशत यानी 1,121 घन किमी जल का लाभदायक उपयोग किया जाता है। भूजल पीने के पानी के अलावा पृथ्वी में नमी बनाए रखने में भी मददगार साबित होता है। पृथ्वी पर उगने वाली वनस्पति तथा फसलों का पोषण भी इसी जल से होता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">यहां यह भी जानना जरुरी है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में सालाना मीठे व स्वच्छ पानी की खपत अधिक होती है। विश्व बैंक के विगत चार साल के आंकड़ों के अनुसार घरेलू, कृषि एवं औद्योगिक उपयोग के लिए प्रतिवर्ष 761 बिलियन घन मीटर जल का इस्तेमाल होता है। मौजूदा समय में पानी की कमी बढ़ गयी है और उसका मूल कारण भूजल का दूषित होना है। भौगोलिक परिदृश्य पर नजर दौड़ाएं तो भारत के पठारी भाग भूजल की उपलब्धता के मामले में कमजोर हैं। यहां भूजल कुछ खास भूगर्भिक संरचनाओं में पाया जाता है जैसे भ्रंश घाटियों और दरारों के सहारे। वहीं दूसरी ओर उत्तरी भारत के जलोढ़ मैदान हमेशा से भूजल में संपन्न रहे हैं। लेकिन अब उत्तरी व पश्चिमी भागों में भूजल के तेजी से दोहन से अभूतपूर्व कमी देखने को मिल रही है। गिरता भूजल सिर्फ महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड या बिहार के सीतामढ़ी तक ही सीमित नहीं है। पंजाब व हरियाणा जैसे राज्यों में भूजल स्तर 70 प्रतिशत तक नीचे पहुंच चुका है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान समय में भारत के 29 प्रतिशत विकास खंड भूजल के दयनीय स्तर पर हैं। ऐसा माना जा रहा है कि 2025 तक लगभग 60 प्रतिशत विकास खंड चिंतनीय स्थिति में आ जाएंगे। हालांकि देश में जल संरक्षण तथा प्रबंधन कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए समय-समय पर अनेक उपाय किए गए हैं। मसलन 1945 में केंद्रीय जल आयोग का गठन किया गया जो राज्यों के सहयोग से देश भर में जल संसाधनों के विकास, नियंत्रण, संरक्षण तथा समन्वय को आगे बढ़ाता है। 1970 में केंद्रीय भू-जल बोर्ड का गठन किया गया। बोर्ड का मुख्य कार्य भू-जल संसाधनों के प्रबंधन, स्थायी एवं वैज्ञानिक विकास के लिए प्रौद्योगिकियों को विकसित करना तथा राष्ट्रीय नीति की निगरानी में उन्हें वितरित करना है। इसी तरह 1980 में राष्ट्रीय जल बोर्ड तथा 2006 में भू-जल के कृत्रिम पुनर्भरण के लिए सलाहकार परिषद का गठन किया गया। 2012 में राष्ट्रीय जल नीति तैयार किया गया जिसके तहत सुनिश्चित किया गया कि जल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए वर्षा का प्रत्यक्ष उपयोग एवं अपरिहार्य वाष्पोत्सर्जन को कम करने का प्रयास होगा। देश में भूजल संसाधन की मात्रा एवं गुणवत्ता की स्थिति का पता लगाया जाएगा।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">हैरान करने वाला यह कि इस गहराते संकट का असर दिखने के बाद भी इसके बचाव के लिए लिए कोई कारगर पहल नहीं हो रही है। नतीजा हर वर्ष अरबों घन मीटर भूजल दूषित हो रहा है। यह समझना होगा कि भारत सालाना जल की उपलब्धता के मामले में चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से बहुत पीछे है। घटते भूजल संसाधनों के संवर्धन के लिए समुद्र में प्रवाहित होने वाले अतिरिक्त वर्षा अपवाह का संरक्षण करे और फिर उसकी सहायता से पुन: पूरण द्वारा भूजल संसाधनों में वृद्धि करे। जलाशयों के जल का समय-समय पर परीक्षण करा नियमित सफाई सुनिश्चित करे। जनसाधारण में जल प्रदूषण के प्रति जागरुकता फैलाए। तटवर्ती भागों में समुद्री जल का निर्लवणीकरण करके जल का विभिन्न कार्यों में प्रयोग करे। राष्ट्रीय स्तर पर दूषित भूजल की रोकथाम के लिए योजना बनाकर उसका प्रभावी क्रियान्वयन करने की भी जरुरत है। यह समझना होगा कि भूजल समस्त वनस्पतियों, पशुओं तथा मानव जीवन का आधार है। उसे प्रदुषण से बचाने के लिए व्यवहारिक पहल की आवश्यकता है। सिर्फ कागजों पर योजनाओं को उकेरने मात्र से नतीजे अनुकूल नहीं होंगे।</h6>
<h6 style="text-align:right;"><em>अरविंद जयतिलक</em></h6>
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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2020 21:32:47 +0530</pubDate>
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                <title>उम्मीद है सरकार जल संरक्षण को एक क्रांति का रूप देगी</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु जैसे राज्य नदियों के पानी के लिए कानूनी लड़ाई तो लड़ रहे हैं लेकिन इन राज्यों में पानी की बचत को लेकर जागरूकता मुहिम नाम की कोई चीज ही नहीं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/hopefully-the-government-will-make-water-conservation-a-revolution/article-11998"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/hopefully-the-government-w.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एनआरसी, सीएए के विरोध के बीच एक अच्छी खबर आई है। केंद्र सरकार ने अटल भूमी-जल योजना की शुरूआत की है, जिसके लिए 6000 करोड़ रूपये मंजूर किए हैं। योजना का उद्देश्य देश में भू-जल के संकट को दूर करना है। यह योजना बढ़ रही जनसंख्या और कृषि जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी। यह तथ्य हैं कि देश में भू-जल का संकट निरंतर बढ़ता जा रहा है। इसके साथ कृषि लागत खर्च भी बढ़े हैं और लोगों को पीने वाले पानी के लिए भी कड़ी मशक्कत के साथ-साथ भारी कीमत भी चुकानी पड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मूसलाधार बारिश और बाढ़ के बावजूद देश के कई राज्यों में गर्मियों के समय जीवित रहने के लिए पानी प्राप्त करना भी चुनौती बन जाता है। गत वर्षों में महाराष्टÑ के लातूर क्षेत्र और उतर प्रदेश के बुंदेलखंड में ट्रेनों पर पानी पहुंचाया जाता रहा है। पंजाब जैसे राज्यों में भू-जल लगातार गहरा होता जा रहा है। यह योजना भले ही जल संकट से निजात दिलवाने के लिए है लेकिन इसका लाभ अनाज की आवश्यकताओं व आर्थिकता से जुड़ा हुआ है। जल संकट गंभीर समस्या है, जिन क्षेत्रों में यह संकट बढ़ रहा है वहां पानी का दुरुपयोग भी होता रहा है। पानी के प्रयोग संबंधी हमारे देश में कोई पैमाना ही नहीं। एक साइकिल धोने के लिए एक ट्रक धोने जितना पानी बहा दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक व्यक्ति नहाते वक्त मोटर चलाकर 20 व्यक्तियों के बराबर पानी का इस्तेमाल करता है। इसी तरह इस्तेमाल किए गए पानी की पुन:प्रयोग की तकनीक पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु जैसे राज्य नदियों के पानी के लिए कानूनी लड़ाई तो लड़ रहे हैं लेकिन इन राज्यों में पानी की बचत को लेकर जागरूकता मुहिम नाम की कोई चीज ही नहीं। जल ही जीवन जैसे नारे तो बोले जाते हैं लेकिन अमल नहीं हो रहा। पाकिस्तान को जा रहे पानी को रोकने से ज्यादा जरूरी है मौजूद पानी की संभाल की जाए। उम्मीद करनी चाहिए कि केंद्र सरकार जल संकट के समाधान के लिए काम करेगी और इसे एक क्रांति का रूप देगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2019 20:49:19 +0530</pubDate>
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                <title>जल संकट पर प्रधानमंत्री की खरी खरी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना लागलपेट अपनी खरी बातों के लिए जाने जाते है। मोदी ने देश की विभिन्न जवलंत जनसमस्याओं से देशवासियों को रूबरू कराते हुए साफ साफ कहा कि जनता को हर समस्या के निवारण के लिए सरकार की और देखना बंद कर अपने स्तर पर कदम उठाने होंगे तभी हम नए भारत के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/prime-ministers-frank-words-on-water-crisis/article-10254"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-08/water-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना लागलपेट अपनी खरी बातों के लिए जाने जाते है। मोदी ने देश की विभिन्न जवलंत जनसमस्याओं से देशवासियों को रूबरू कराते हुए साफ साफ कहा कि जनता को हर समस्या के निवारण के लिए सरकार की और देखना बंद कर अपने स्तर पर कदम उठाने होंगे तभी हम नए भारत के निर्माण की तरफ आगे बढ़ पाएंगे। स्वाधीनता दिवस पर लाल किले से दिए प्रधानमंत्री के भाषण में चिंता और चेतावनी दोनों का मिश्रण था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने देशवासियों को जनसँख्या विस्फोट, जल संकट और प्लास्टिक के दुष्परिणामों से अवगत कराया। मोदी ने कहा इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के साथ जनता को आगे आना होगा तभी मिलजुलकर आगे बढ़ पाएंगे। प्रधानमंत्री ने घोषणा कि हम आने वाले दिनों में जल जीवन मिशन को लेकर आगे बढ़ेंगे। इसके लिए केंद्र और राज्य साथ मिलकर काम करेंगे और इसके लिए साढ़े 3 लाख रुपये से ज्यादा रकम खर्च करने का संकल्प है। मोदी ने बूँद बूँद पानी के संचय पर जोर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री की चिंता जायज है क्योंकि देश इस समय भीषण जल संकट से गुजर रहा है और इस आसन्न संकट पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो हालत बदतर होने की सम्भावना है। नीति आयोग द्वारा जारी जल प्रबंधन सूचकांक के अनुसार भारत अब तक के सबसे बड़े जल संकट से जूझ रहा है। आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के करीब 60 करोड़ लोग पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। करीब 75 प्रतिशत घरों में पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। साथ ही, देश में करीब 70 प्रतिशत पानी पीने लायक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोग का कहना है कि इस संकट के चलते लाखों लोगों की आजीविका और जिंदगी खतरे में है। आयोग ने चेतावनी भी दी है कि हालात और बदतर होने वाले हैं। उसके मुताबिक साल 2030 तक देश में पानी की मांग मौजूदा आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है। साफ और सुरक्षित पानी नहीं मिलने की वजह से हर साल करीब दो लाख लोगों की मौत होती है। रिपोर्ट में कहा गया है प्रदूषण के मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने के लिए जिस तरह मीडिया कैंपेन चलाए गए हैं, समय आ गया है कि पानी के मुद्दे पर भी उसी तरह कैंपेन चलाए जाएं । गौरतलब है जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत दुनिया के 122 देशों में 120वें स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान मंत्री ने जनसँख्या विस्फोट पर देशवासियों को आइना दिखाया और कहा हमारे यहां बेतहासा जनसंख्या विस्फोट हो रहा है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अनेक संकट पैदा करता है। प्रधानमंत्री की चेतावनी जाहिर करती है कि जनसँख्या विस्फोट ने हमारा जीना दूभर कर दिया है। हमारी आबादी में अभी भी हर दिन पचास हजार की वृद्धि हो रही है। 137 करोड़ की आबादी को भोजन मुहैया कराने के लिए यह आवश्यक है कि हमारा खाद्यान्न उत्पादन प्रतिवर्ष 54 लाख टन से बढे जबकि वह औसतन केवल 40 लाख टन प्रतिवर्ष की दर से ही बढ़ पाता है। जनसंख्या वृद्धि के दो मूल कारण अशिक्षा एवं गरीबी है। लगातार बढ़ती आबादी के चलते बड़े पैमाने पर बेरोजगारी तो पैदा हो ही रही है, कई तरह की अन्य आर्थिक और सामाजिक समस्याएं भी पैदा हो रही हैं। एक अरब भारतियों के पास धरती, खनिज, साधन आज भी वही हैं जो 50 साल पहले थे परिणामस्वरूप लोगों के पास जमीन कम, आय कम और समस्याएँ अधिक बढ़ती जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मानव द्वारा निर्मित चीजों में प्लास्टिक थैली एक ऐसी वस्तु है जो जमीन से आसमान तक हर जगह मिल जाती है। पर्यटन स्थलों, समुद्री तटो, नदी नालों, खेतों खलिहानों, भूमि के अंदर बाहर सब जगहों पर आज प्लास्टिक के कैरी बैग्स अटे पड़े है। घर में रसोई से लेकर पूजा स्थलों तक हर जगह प्लास्टिक थेलिया रंग बिरंगे रूप में देखने को मिल जाएगी। चावल, दाल, तेल, मसाले, दूध, घी, नमक, चीनी आदि सभी आवश्यकता के सामान आजकल प्लास्टिक-पैक में मिलने लगे हैं। आज प्रत्येक उत्पाद प्लास्टिक की थैलियो में मिलता है जो घर आते आते कचरे में तब्दील होकर पर्यावरण को हानि पंहुचा रहा है। अरबों प्लास्टिक के बैग हर साल फेंके जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि प्लास्टिक स्वाभाविक रूप से विघटित नहीं होता है इसलिए  यह प्रतिकूल तरीके से नदियों, महासागरों आदि के जीवन और पर्यावरण को प्रभावित करता है। जहां कहीं प्लास्टिक पाए जाते हैं वहां पृथ्वी की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और जमीन के नीचे दबे दाने वाले बीज अंकुरित नहीं होते हैं तो भूमि बंजर हो जाती है। प्लास्टिक नालियों को रोकता है और पॉलीथीन का ढेर वातावरण को प्रदूषित करता है। चूंकि हम बचे खाद्य पदार्थों को पॉलीथीन में लपेट कर फेंकते हैं तो पशु उन्हें ऐसे ही खा लेते हैं जिससे जानवरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यहां तक कि उनकी मौत का कारण भी पॉलीथीन है।<br />
<strong><em>बाल मुकुन्द ओझा</em></strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Aug 2019 21:31:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बढ़ता जल संकट और असहाय तंत्र</title>
                                    <description><![CDATA[हमारे देश में जल को मुफ्त की चीज समझ के बर्बाद किया जाता है। जिसके कारण पानी के स्रोत निरंतर खाली हो रहे हैं और देश जल की कंगाली की ओर बढ़ रहा है। जल को स्वच्छ रखने का सामाजिक संस्कार हमारे समाज से गायब होता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increasing-water-crisis-and-helpless-system/article-3954"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/water.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमारे देश में जल को मुफ्त की चीज समझ के बर्बाद किया जाता है। जिसके कारण पानी के स्रोत निरंतर खाली हो रहे हैं और देश जल की कंगाली की ओर बढ़ रहा है। जल को स्वच्छ रखने का सामाजिक संस्कार हमारे समाज से गायब होता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के लगभग 180 करोड़ लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं और इस दूषित पानी के कारण दुनिया भर में हर साल लगभग 8 लाख 42 हजार लोगों की मौत होती है। वहीं, जल आपूर्ति करने वाली नदियों में प्रदूषण भी चिंताजनक स्तर पर है। जब नदियां सूखने लगती हैं तो इनसे जुड़े जलापूर्ति वाले क्षेत्रों को संकटमय स्थितियों का सामना करना पड़ता है। कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के जलाशय इस हद तक सूख चुके हैं कि आने वाले दिनों में इन राज्यों में पीने के पानी की कमी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सेंट्रल वाटर कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार देश के इकयानवे बड़े जलाशयों में क्षमता के मुकाबले सिर्फ 41 फीसदी पानी मौजूद है। इसी रिपोर्ट के अनुसार तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के इकतीस जलाशयों में सिर्फ 20 फीसदी पानी बचा है। अंतरराष्ट्रीय संस्था वाटर ऐड के अनुसार ग्रामीण भारत में करीब 6 करोड़ 50 लाख लोगों तक स्वच्छ पानी की पहुंच नहीं है। वर्ष 2050 तक दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में निवास करने वाली चालीस फीसद आबादी ऐसी होगी, जहां पानी की उपलब्धता बहुत कम होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसकी सबसे बड़ी वजह जनसंख्या है। वर्तमान में दुनिया की जनसंख्या 750 करोड़ है और वर्ष 2030 तक यह 830 करोड़ तक पहुंच जाएगी। ऐसी स्थिति में पीने के पानी की मांग भी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के मुताबिक 2022 तक भारत की जनसंख्या दुनियां में सबसे ज्यादा हो जाएगी। भारत के किसान चीन के मुकाबले दुगने भूमिगत जल का इस्तेमाल करते हैं। इस कारण जनसंख्या बढने से आने वाले समय में देश के कृषि क्षेत्र में पानी की मांग में भी इजाफा होगा। इस समय पूरे देश में भीषण गर्मी पड़ रही है और इस गर्मी में पानी की किल्लत लोगों की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश की राजधानी से लेकर दूरदराज गांव तक बुरा हाल है। यह भारत के महाशक्ति बनने के सपने पर पानी फेरने वाली स्थितियां हैं। अगर परिस्थितियां यही रहीं तो आने वाले समय में महाशक्ति बनने के सपने देखने वाला भारत बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाएगा। पानी के क्षेत्र में कार्य करने वाली बड़ी कंसल्टिंग फर्म ई ए वाटर के अध्ययन के अनुसार 2025 तक देश पानी की भयानक कमी वाला देश बन जाएगा। इसी अध्ययन के अनुसार देश का सतही जल तेजी से कम हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, दुनिया के जल संकटग्रस्त 20 बड़े शहरों में भी 5 भारतीय शहर शामिल हैं। लोकसभा में सरकार ने माना है कि देश के लगभग तीन लाख गांवों में पीने के पानी की सप्लाई नहीं है और 66 हजार गांव ऐसे हैं। जहां उपलब्ध पानी बहुत दूषित है। पानी का यह संकट सिर्फ भारत के लिए ही नहीं है। पूरी दुनियां आने वाले इस संकट से परेशान है। दुनियां के हर छह में से एक व्यक्ति को इस संकट का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में जल संकट को दस बड़े खतरों में जगह दी है। दुनियां की छियासी फीसद से अधिक बीमारियों की वजह भी दूषित जल ही है। देश में जल स्तर हर वर्ष दो से छह मीटर तक नीचे जा रहा है। जिसकी बड़ी वजह कंट्रक्शन कंपनियां हैं। सूखा और पानी की कमी की वजह से महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विधर्व पलायन की बड़ी वजह बन गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों से पिछले चार वर्षों में पच्चीस लाख से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं। मराठवाड़ा इलाके को पानी उपलब्ध कराने वाले ग्यारह छोटे बांध भी पूरी तरह से सूख चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार अगर दुनियां के देशों ने पानी बचाने पर कार्य नहीं किया तो अगले पन्द्रह वर्षों में दुनिया को चालीस फीसद पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीने के पानी के अभाव में डायरिया जैसे रोगों से रोज लगभग 2300 लोगों की मौत होती है। पिछले 50 वर्षों में दुनियां की आबादी में तीन गुना वृद्धि हुई है, जबकि पानी की खपत 800 गुना तक बढ़ चुकी है। इसी कारण पानी का संकट आज दुनियां का सबसे बड़ा संकट बन गया है। फिलहाल देश में औसतन एक नागरिक को 150 लीटर पानी उपलब्ध है। आने वाले समय में पानी की यह उपलब्धता 70 से 75 ली तक रह सकती है। यह एक खतरे की स्थिति है। ऐसे में सवाल यह है कि जल संकट को हराने के लिए सरकार और तंत्र के पास कितनी इच्छाशक्ति है? यह वह समस्याएं हैं जिनके बारे में कोई बात करना नहीं चाहता लेकिन, देश की असली समस्या यही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार को जल संकट की समस्या के समाधान के लिए दूरदर्शी और दीर्घकालिक उपाय करने होंगे। कोई भी सरकार जल संकट का अपने स्तर पर तब तक समाधान नहीं कर सकती, जब तक कि समाज की उस में भागीदारी ना हो। खेती में जल संकट की समस्या के समाधान के लिए सरकार को कम पानी से पैदा होने वाली फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देकर, उन्हें उचित दाम में खरीदना चाहिए। ताकि किसान कम पानी वाली फसलें उगाने को प्रोत्साहित हों। कई फसलों को साथ उगाने से भी पानी की खपत घटती है। इन बातों का ध्यान करके कृषि विकास के तरीकों में मौलिक बदलाव की जरूरत है। विज्ञान और पर्यावरण के ज्ञान से मानव ने जो प्रगति की है। उसे प्रकृति संरक्षण में लगाना जरूरी है। तमिलनाडु ने वर्षा के पानी का संरक्षण पर जो मिसाल कायम की है। उसे सारे देश में विकसित करने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि सरकार के पास जल संरक्षण की कोई समेकित नीति नहीं है। अगर कोई योजना कहीं सफल हो जाती है तो सरकार उसी के पीछे पड़ जाती है। मसलन पिछले वर्षों तालाब निर्माण का फैशन चल पड़ा लेकिन, भारत में केवल तालाब निर्माण से समस्या हल नहीं हो सकती है। इसके साथ ही साथ हमें जंगल बचाने, नहर बनाने, बांध बनाने जैसे उपाय भी करने होंगे। बेहतर होगा अगर विभिन्न जल संरक्षण योजनाओं का पैसा परंपरागत स्रोतों को फिर से जिंदा करने में खर्च किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जल संरक्षण में वृक्ष भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए वृक्षारोपण को बढ़ावा देना होगा। कई राज्यों में प्राकृतिक जल स्रोतों की देखरेख के लिए अलग से विभाग है। जलाशयों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए योजनाएं बनाते हैं, मगर यह योजनाएं कागजों पर ही रह जाती हैं। उपरोक्त सभी विषयों को जलवायु परिवर्तन जितनी ही गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि पानी प्रत्येक व्यक्ति के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है और इसकी कमी मानवीय स्वास्थ्य एवं वैश्विक राजनीति दोनों को ही प्रभावित करेगी। अत: पानी को एक समस्या के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए तथा इसके निराकरण को वैश्विक एवं राष्ट्रीय एजेंडे में सर्वोच्च स्थान मिलना चाहिए।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Jun 2018 15:43:08 +0530</pubDate>
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