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                <title>Introduction - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>काशी की अतुल्य विरासत का परिचय दुनिया को उनकी भाषा में करायें : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी (वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा नवाचारियों से अपील की है कि वे ऐसा एप्लीकेशन (एप) तैयार करें जो दुनिया के विभिन्न देशों को उन्ही की मातृभाषा में काशी (वाराणसी) की 5000 साल पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से रूबरू करा सके। “स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन-2018” (सॉफ्टवेयर संस्करण) के ग्रैंड फिनाले के देशभर के 28 केंद्रों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/kashi-atuly-viraasat-introduction-world-language-modi/article-3681"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/modii.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी (वार्ता)। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा नवाचारियों से अपील की है कि वे ऐसा एप्लीकेशन (एप) तैयार करें जो दुनिया के विभिन्न देशों को उन्ही की मातृभाषा में काशी (वाराणसी) की 5000 साल पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से रूबरू करा सके। “स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन-2018” (सॉफ्टवेयर संस्करण) के ग्रैंड फिनाले के देशभर के 28 केंद्रों में शामिल काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में युवा नवाचारियों से श्री मोदी ने कल रात संवाद करते हुए ये अपील की। विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अपने संक्षिप्त संबोधन में उन्होंने कहा कि काशी ज्ञान के लिए दुनिया भर में मशहूर है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति के बारे में जानने-समझने।</p>
<p style="text-align:justify;">के लिए यहां आते हैं। ऐसे में हमें देखना होगा कि तकनीक के माध्यम से काशी की प्राचीन विरासत को सहज तरीके से उन तक कैसे पहुंचा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने नवचारियों से अपील की कि वाराणसी से लौटने के बाद वे कोई ऐसा ‘एप’ तैयार करने का प्रयास करें, जिससे यहां आने वाले पर्यटक चलते-चलते मोबाइल पर ही काशी की तमाम जानकारियां सहज तरीके से हासिल कर सकें। उन्होंने विद्याथियों को काशी की 5000 साल पुरानी सभ्यता की महत्ता समझाने हुए कहा कि बोस्टन की एक गली का नाम काशी है और वहां के निवासियों को ‘गुरु’ कहा जाता है, क्योंकि काशी में ज्ञानी बसते हैं और यहां ज्ञान और गुरु की प्राचीन परंपरा है। उन्होंने बीएचयू के महाराजा विभूति नारायण सिंह इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आये 344 प्रतिभागियों की हौसला अफजाई की।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Mar 2018 00:57:29 +0530</pubDate>
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