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                <title>राजस्थान: अब काले रंग की साइकिलें चलाएंगी छात्राएं</title>
                                    <description><![CDATA[पौने तीन लाख छात्राओं को साइकिल वितरित की प्रक्रिया शुरू | Black Cycle जयपुर (एजेंसी)। राजस्थान में सरकार बदलने के नौ माह बाद छात्राओं को वितरित की जाने वाली साइकिल (Black Cycle) का रंग एक बार फिर बदल गया है। प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली नौवीं से बारहवीं कक्षा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajasthan-now-girls-will-ride-black-cycles/article-10894"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/cycles.jpg" alt=""></a><br /><h2>पौने तीन लाख छात्राओं को साइकिल वितरित की प्रक्रिया शुरू | Black Cycle</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (एजेंसी)</strong>। राजस्थान में सरकार बदलने के नौ माह बाद छात्राओं को वितरित की जाने वाली साइकिल<strong> (Black Cycle)</strong> का रंग एक बार फिर बदल गया है। प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली नौवीं से बारहवीं कक्षा तक की करीब पौने तीन लाख छात्राओं को काले रंग की साइकिल वितरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बारे में निर्णय तो पहले ही हो गया था, लेकिन अब जिला शिक्षा अधिकारियों के पास काले रंग की साइकिलें पहुंच गई है। फिलहाल इन साइकिलों की फिटनेस जांची जा रही है, अगले सप्ताह से वितरण का काम शुरू हो जाएगा।</p>
<h2>प्रत्येक साइकिल की कीमत 3346 रुपये है| Black Cycle</h2>
<p style="text-align:justify;">पिछली वसुंधरा राजे सरकार ने सत्ता में रहते हुए छात्राओं को भगवा रंग की साइकिल वितरित की थीं, जिसका कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक पार्टियों ने विरोध किया था। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाते हुए शिक्षा में भगवाकरण का आरोप लगाया था। शिक्षा विभाग के अनुसार, प्रत्येक साइकिल की कीमत 3346 रुपये है। वसुंधरा राजे सरकार ने भगवा रंग की साइकिल 3255 रुपये में खरीदी थी अर्थात अब 91 रुपये महंगी साइकिल खरीदी गई है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि छात्राओं को अच्छी क्वालिटी की शिक्षा के साथ साइकिल भी दी जाएगी</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> जिससे इन्हें बार-बार परेशान नहीं होना पड़े। सरकार ने तीन लाख साइकिल खरीदने के लिए 117 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> साइकिल का रंग और कीमत दोनों बदल चुकी है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>अब इंतजार इन साइकिलों के सड़क पर उतरने का किया जा रहा है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>साइकिलों के सड़क पर उतरते ही एक बार फिर सत्तारूढ़ दल और भाजपा के बीच सियासी संग्राम शुरू हो सकता है। </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">उधर, शैक्षिक संगठन शिक्षामंत्री के उस आदेश के विरोध में उतर आए हैं, जिसमें उन्होंने बालिका स्कूलों में 50 वर्ष से कम उम्र के शिक्षकों को हटाने की बात कही है। शिक्षामंत्री चाहते हैं कि बालिका स्कूलों में अधिकांश महिला शिक्षक ही लगें और फिर भी यदि आवश्यकता हो तो 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष शिक्षक लगाए जाएं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Oct 2019 17:53:12 +0530</pubDate>
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                <title>कालाधन के उत्सर्जन से नहीं मिला छुटकारा</title>
                                    <description><![CDATA[देश और राजग सरकार को स्विस नेशनल बैंक की ताजा आई रिपोर्ट के आंकड़ों ने हैरान कर दिया है।(Do, Not, Get, Rid, Black, Powder, Emissions) रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में जमा धन करीब 7000 करोड़ रुपए हो गया है। यह राशि 2016 की तुलना में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/do-not-get-rid-of-black-powder-emissions/article-4612"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/do-not-get-rid-black-powder-emissions.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश और राजग सरकार को स्विस नेशनल बैंक की ताजा आई रिपोर्ट के आंकड़ों ने हैरान कर दिया है।<strong>(Do, Not, Get, Rid, Black, Powder, Emissions)</strong> रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में जमा धन करीब 7000 करोड़ रुपए हो गया है। यह राशि 2016 की तुलना में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा है। एक साल में इस राशि का दोगुना हो जाना देष की आजादी के बाद दूसरी मर्तबा संभव हुआ है। इसके पहले 2004 में स्विस बैंकों में एक साल के भीतर भारतीयों की जमा राशि का आंकड़ा 56 फीसदी पहुंच गया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली और कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूश गोयल ने इन आंकड़ों को तार्किक ढंग से झुठलाने की कोशिश जरूर की है, लेकिन ये तर्क किसी के गले नहीं बैठ रहे। हालांकि पिछले चार साल में राजग सरकार ने कालाधन पर अंकुष लगे, इस दृष्टि से ऐसे कानूनी उपाय जरूर किए हैं, लेकिन स्विस बैंक द्वारा जारी आंकड़ों से साफ हुआ है कि ये उपाय महज हाथी के दांत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अरुण जेटली और पीयुष गोयाल ने कालाधन में 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी संबंधी रिपोर्ट और खबरों को भ्रामक करार दिया है। जेटली ने अपने ब्लॉग में सीबीडीटी की जांच का हवाला देते हुए बताया है कि स्विस बैंकों में जमा करने वाले ज्यादातर भारतीय मूल के वे लोग है, जिन्होंने किसी अन्य देष की नागरिकता ली हुई है या फिर वे अनिवासी भारतीयों की श्रेणी में आते है। इसके अलावा मूल भारतीय नागरिक भी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए स्विस बैंकों में धन जमा कर सकते है। इसलिए इसे कालाधन नहीं कहा जा सकता है। दूसरे वैसे भी अब स्विट्जरलैंड पहले की तरह टैक्स हैवन देश नहीं रहा है। वह दुनिया के दबाव में खाताधारकों का डाटा साझा करने लगा है। जनवरी 2019 से भारत को भी भारतीयों के खातों की रियल टाइम जानकारी मिलनी शुरू हो जाएगी। दूसरी तरफ सरकार का बचाव करते हुए पीयूष गोयल ने कहा है कि लिबरललाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत करीब 40 प्रतिषत राशि बाहर भेजने की सुविधा पहले से ही लागू है। इस योजना को संप्रग सरकार के कार्यकाल में पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंरबरम ने लागू किया था। इसके तहत कोई भी व्यक्ति प्रतिवर्श 2.50 लाख डॉलर तक की राशि भारत से बाहर भेज सकता है। यहां सवाल उठता है कि भारतीय धन को बाहर भेजने की ऐसी उदार सुविधाओं पर 4 साल के भीतर अंकुश क्यों नहीं लगाया गया? यही नहीं मोदी सरकार के कार्यकाल में नीरव मोदी, मेहुल चैकसी, विजय माल्या और ललित मोदी भी करोड़ों-अरबों का चूना लगाकर आसानी से निकल भागे। इन सब हालातों से परिचित होकर साफ होता है कि विदेशों से कालेधन की वापसी का वादा तो पूरा हुआ नहीं, इसके उलट भगोड़े देश की जनता की पसीने की कमाई लेकर चंपत हो गए। 2016 में हुई नोटबंदी भी कालेधन के निर्माण पर कोई अंकुश नहीं लगा पाई।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि मोदी सरकार ने कालेधन पर अंकुष के लिए ‘कालाधन अघोषित विदेशी आय एवं जायदाद और आस्ति विधेयक-2015’ और कालाधन उत्सर्जित ही न हो, इस हेतु ‘बेनामी लेनदेन,निषेधद्ध विधेयक अस्तित्व में ला दिए हैं। ये दोनों विधेयक इसलिए एक दूसरे के पूरक माने जा रहे थे, क्योंकि एक तो आय से अधिक काली कमाई देश में पैदा करने के स्रोत उपलब्ध हैं, दूसरे इस कमाई को सुरक्षित रखने की सुविधा विदेशी बैंकों में हासिल है। लिहाजा कालाधन फल फूल रहा है। दोनों कानून एक साथ वजूद में आने से यह उम्मीद जगी थी कि कालेधन पर कालांतर में लगाम लगेगी, लेकिन नतीजा ढांक के तीन पात रहा। सरकार ने कालाधन अघोषित विदेशी आय एवं जायदाद और कर आरोपण-2015 कानून बनाकर कालाधन रखने के प्रति उदारता दिखाई थी। इसमें विदेशों में जमा अघोषित संपत्ति को सार्वजानिक करने और उसे देश में वापस लाने के कानूनी प्रावधान हैं। दरअसल कालेधन के जो कुबेर राष्ट्र की संपत्ति राष्ट्र में लाकर बेदाग बचे रहना चाहते हैं, उनके लिए अघोशित संपत्ति देश में लाने के दो उपाय सुझाए गए हैं। वे संपत्ति की घोशणा करें और फिर 30 फीसदी कर व 30 फीसदी जुर्माना भर कर शेष राशि का वैध धन के रूप में इस्तेमाल करें। इस कानून में प्रावधान है कि विदेशी आय में कर चोरी प्रमाणित हाती है तो 3 से 10 साल की सजा के साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसी प्रकृति का अपराध दोबारा करने पर तीन से 10 साल की कैद के साथ 25 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक का अर्थदण्ड लगाया जा सकता है। जाहिर है, कालाधन घोषित करने की यह कोई सरकारी योजना नहीं थी। अलबत्ता अज्ञात विदेशी धन पर कर व जुर्माना लगाने की ऐसी सुविधा थी, जिसे चुका कर व्यक्ति सफेदपोश बना रह सकता है। ऐसा ही उपाय प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने देशी कालेधन पर 30 प्रतिशत जुर्माना लगाकर सफैद करने की सुविधा दी थी। इस कारण सरकार को करोड़ों रुपए बतौर जुर्माना मिल गए थे, और अरबों रुपए सफेद धन के रूप में तब्दील होकर देश की अर्थव्यस्था मजबूत करने के काम आए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">कालाधन उत्सर्जित न हो, इस हेतु दूसरा कानून बेनामी लेनदेन पर लगाम लगाने के लिए लाया गया था। यह विधेयक 1988 से लंबित था। इस संशोधित विधेयक में बेनामी संपत्ति की जब्ती और जुर्माने से लेकर जेल की हवा खाने तक का प्रावधान है। साफ है,यह कानून देश में हो रहे कालेधन के सृजन और संग्रह पर अंकुश लगाने के लिए था। यह कानून मूल रूप से 1988 में बना था। लेकिन अंतर्निहित दोशों के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। इससे संबंधित नियम पिछले 27 साल के दौरान नहीं बनाए जा सके। नतीजतन यह अधिनियम धूल खाता रहा। जबकि इस दौरान जनता दल, भाजपा और कांग्रेस सभी को काम करने का अवसर मिला। इससे पता चलता है कि हमारी सरकारें कालाधन पैदा न हो, इस पर अंकुश लगाने के नजरिये से कितनी लापरवाह रही हैं। सबकुछ मिलाकर मोदी सरकार यह जताने में तो सफल रही कि वह कालेधन की वापसी के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन ला नहीं पाई।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारत के निवेदन पर स्विट्जरलैंड सरकार से जो समझौते हुए हैं, उनके तहत स्विस बैंकों में भारतीयों के खातों की जानकारी मिलना शुरू हो जाएगी। यदि इस जानकारी के मिलने के बाद भी कालेधन की वापसी शुरू नहीं हुई तो सरकार के लिए कालांतर में समस्या खड़ी हो सकती है? हालांकि ये जानकारियां स्विट्जरलैंड के यूबीए बैंक के सेवानिवृत कर्मचारी ऐल्मर ने एक सीडी बनाकर जग जाहिर कर दी हैं। इस सूची में 17 हजार अमेरिकियों और 2000 भारतीयों के नाम दर्ज हैं। अमेरिका तो इस सूची के आधार पर स्विस सरकार से 78 करोड़ डॉलर अपने देष का कालाधन वसूल करने में सफल हो गया है। ऐसी ही एक सूची 2008 में फ्रांस के लिष्टेंस्टीन बैंक के कर्मचारी हर्व फेल्सियानी ने भी बनाई थी। इस सीडी में भी भारतीय कालाधन के जमाखोरों के नाम हैं। ये दोनों सीडियां संप्रग सरकार के कार्यकाल के दौरान ही भारत सरकार के पास आ गई थीं। इन्हीं सीडियों के आधार पर राजग सरकार कालाधन वसूलने की कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है। लेकिन बीते चार सालों में सरकार एसआईटी के गठन और दो नए कानून बना देने के बावजूद इस दिशा में कोई कारगर पहल नहीं कर पाई और न ही सूची में दर्ज नाम सार्वजनिक किए। इससे यह संशय बना हुआ है कि जनवरी 2019 के बाद भी कालेधन की वापसी स्विस बैंकों से हो पाएगी ?</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jul 2018 11:59:32 +0530</pubDate>
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                <title>स्विस बैंकों में जमा सारा पैसा कालाधन नहीं: जेटली</title>
                                    <description><![CDATA[बैंकों में राशि जमा करने वाले च्यादातर भारतीय मूल के लोग Swiss banks deposit all money do not black money: Arun Jaitley नई दिल्ली (एजेंसी)। स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष के हमलों का वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तर्को के साथ जवाब दिया है Swiss banks deposit all […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/swiss-banks-deposit-all-money-do-not-black-money-arun-jaitley/article-4568"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/jatly.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">बैंकों में राशि जमा करने वाले च्यादातर भारतीय मूल के लोग</h2>
<h3 style="text-align:justify;">Swiss banks deposit all money do not black money: Arun Jaitley</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष के हमलों का वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तर्को के साथ जवाब दिया है Swiss banks deposit all money do not black money: Arun Jaitley। उन्होंने इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया। कहा, जरूरी नहीं है कि स्विस बैंकों में जमा सारा पैसा कालाधन ही हो। फिर भी अगर कोई दोषी पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।स्विस बैंकों में चार साल में भारतीयों के जमा धन में 50 फीसद की बढ़ोतरी को कालेधन से जोड़ने संबंधी खबरों को जेटली ने भ्रामक करार दिया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">40 फीसद रकम तो एलआरएस से गई</h2>
<h3 style="text-align:justify;">Swiss banks deposit all money do not black money: Arun Jaitley</h3>
<p style="text-align:justify;">कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने इस बीच मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि इसमें से करीब 40 फीसद राशि रुपये बाहर भेजने की उदार योजना (लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम-एलआरएस) की वजह से वहां पहुंची है। एलआरएस पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के कार्यकाल में लागू हुई थी। इसमें कोई भी व्यक्ति प्रतिवर्ष 2.50 लाख डॉलर तक बाहर भेज सकता है। उन्होंने भी कहा कि यदि कोई दोषी पाया गया तो उस पर  कार्रवाई होगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कांग्रेस ने सरकार को घेरा</h2>
<h3 style="text-align:justify;">Swiss banks deposit all money do not black money: Arun Jaitley</h3>
<p style="text-align:justify;">रुपये के मूल्य में रिकॉर्ड गिरावट के साथ स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा रकम में एक साल में 50 फीसद उछाल पर कांग्रेस ने राजग सरकार पर जमकर निशाना साधा। पार्टी प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने कहा कि 70 साल में केवल दूसरी बार एक साल में रिकॉर्ड 50 फीसद से ज्यादा उछाल आया।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Jun 2018 08:24:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>काले धन पर हवाई वायदे हो रहे फुस्स</title>
                                    <description><![CDATA[स्विटजरलैंड के बैंकों में काले धन में 50 फीसदी वृद्धि हो जाना हमारे देश के सरकारी तंत्र की नाकामी के साथ सत्ताधारी पार्टी के वादों और दावों पर सवालिया निशान लगाता है। पहले आम नागरिक की यह आशा थी कि मोदी सरकार काला धन भले ही वापस नहीं ला सकती परंतु इसके अलावा धन बाहर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/air-futures-fusible-on-black-money/article-4567"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/black-money1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्विटजरलैंड के बैंकों में काले धन में 50 फीसदी वृद्धि हो जाना हमारे देश के सरकारी तंत्र की नाकामी के साथ सत्ताधारी पार्टी के वादों और दावों पर सवालिया निशान लगाता है। पहले आम नागरिक की यह आशा थी कि मोदी सरकार काला धन भले ही वापस नहीं ला सकती परंतु इसके अलावा धन बाहर भी नहीं जाने देगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ताजा रिपोर्ट ने इस आशा पर भी पानी फेर दिया तथा काला धन छलांग लगाता हुआ स्विटजरलैंड पहुंच रहा है। 2014 के लोक सभा चुनावों से पहले आम भारतीयो को लग रहा था कि ‘कालाधन’ वापस आया कि आया, ‘अच्छे दिन आए कि आए।’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार के हर मंच पर जनता को आकर्षित करने के लिए यह नारा बड़े जोरदार तरीके से लगाया था कि ‘अच्छे दिन आएंगे’ पर सरकार बनने के बाद सरकार या पार्टी के किसी प्रोग्राम में यह नारा नहीं दोहराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जिन तेल कीमतों में वृद्धि व मँहगाई को मुद्दा बनाकर भाजपा सत्ता में आई वह मँहगाई व तेल कीमतों ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए। काला धन ना तो देश में पैदा होना बंद हुआ तथा ना ही बाहर जाने से रुका। काले धन के खिलाफ सात वर्षों की सजा का कानून बनाने के बावजूद जिनकी पहुंच है उन व्यापारियों का काला धंधा अभी भी चालू है। आम आदमी के दिल में यह धारणा बन चुकी है कि सरकार बदली लेकिन व्यवस्था नहीं बदली।</p>
<p style="text-align:justify;">और तो और कुछ ठग हमारे देश के बैंकों को ही दिन दिहाड़े लूटकर ले गए, सरकार चुपचाप इस तमाशे को देखती रही। होना तो यह चाहिए था कि विजय माल्या लूटकर भागा उसके बाद ना कोई भागता लेकिन नीरव मोदी भाग गया। कानून पटरी पर नहीं आया जबकि इनसे दूर दोनों के भागने के बीच में काफी समय अंतराल है। ठग्गों को इस बात का पता है कि भारतीय शासन तंत्र में भागना बड़ा आसान है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्षों से चल रही जांचों में कुछ भी हाथ नहीं आया। शासन प्रबंध में ऐसा चल रहा है लेकिन आम जन दुखी है राजनेताओं के भाषणों व सच्चाई में अंतर बहुत चौड़ा है। वैसे आम आदमी को यह समझना चाहिए कि चुनावी वायदे किसी नीति का हिस्सा नहीं, यह सब चुनावों की रणनीति है। राजनीति में ईमानदारी की चर्चा लोगों को भरमाने का काम करती है। आम आदमी को मिलने वाली सब्सिडी में कटौती करने वाली सरकार के लिए टैक्स चोरी रोकने के लिए जागने का वक्त है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Jun 2018 08:02:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्विस बैंकों में फिर बढऩे लगा भारतीयों का काला धन</title>
                                    <description><![CDATA[ डेढ़ साल में 50 प्रतिशत  की वृद्धि Indians in Swiss banks get black money again नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीयों का स्विस बैंकों में जमा धन चार साल में पहली बार बढ़ कर पिछले साल एक अरब स्विस फैंक (7,000 करोड़ रुपए) के दायरे में पहुंच गया(Indians in Swiss banks get black money again)जो एक साल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/indians-in-swiss-banks-get-black-money-again/article-4556"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/ubs.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;"> डेढ़ साल में 50 प्रतिशत  की वृद्धि</h2>
<h2 style="text-align:justify;">Indians in Swiss banks get black money again</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारतीयों का स्विस बैंकों में जमा धन चार साल में पहली बार बढ़ कर पिछले साल एक अरब स्विस फैंक (7,000 करोड़ रुपए) के दायरे में पहुंच गया(Indians in Swiss banks get black money again)जो एक साल पहले की तुलना में 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। स्विटजरलैंड के केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों में यह बात सामने आई है। इसके अनुसार भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में रखा गया धन 2017 में 50 फीसदी से अधिक बढ़कर 7000 करोड़ रुपए (1.01 अरब फ्रेंक) हो गया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पहले तीन सालों में लगातार आई थी गिरावट</h2>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले तीन साल यहां के बैंकों में भारतीयों के जमा धन में लगातार गिरावट आई थी। अपनी बैंकिंग गोपनीयता के लिए पहचान बनाने वाले इस देश में भारतीयों के जमाधन में ऐसे समय दिखी बढ़ोतरी हैरान करने वाली है जबकि भारत सरकार विदेशों में कालाधन रखने वालों के खिलाफ अभियान चलाए हुए है। स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के सालाना आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंक खातों में जमा भारतीय धन 2016 में 45 प्रतिशत घटकर 67.6 करोड़ फ्रेंक (लगभग 4500 करोड़ रुपए) रह गया। यह राशि 1987 से इस आंकड़े के प्रकाशन की शुरुआत के बाद से सबसे कम थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">2017 में भारतीयों के धन में 50 फीसदी की हुई वृद्धि</h2>
<p style="text-align:justify;">ताजा आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंक खातों में जमा भारतीयों के धन में ग्राहक जमाओं के रूप में 3200 करोड़ रुपए , अन्य बैंको के जरिए 1050 करोड़ रुपए शामिल है। इन सभी मदों में भारतीयों के धन में आलोच्य साल में बढ़ोतरी हुई। स्विस बैंक खातों में रखे भारतीयों के धन में 2011 में इसमें 12 फीसदी , 2013 में 43 फीसदी , 2017 में इसमें 50.2 फीसदी की वृद्धि हुई। इससे पहले 2004 में यह धन 56 फीसदी बढ़ा था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भारत स्विटजरलैंड में सूचना आदान प्रदान की नई व्यवस्था शुरू</h2>
<p style="text-align:justify;">एसएनबी के ये आंकड़े ऐसे समय में जारी किए गए हैं जबकि कुछ महीने पहले ही भारत व स्विटजरलैंड के बीच सूचनाओं के स्वत : आदान प्रदान की एक नई व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य काले धन की समस्या से निजात पाना है। इस बीच स्विटजरलैंड के बैंकों का मुनाफा 2017 में 25 फीसदी बढ़कर 9.8 अरब फ्रेंक हो गया। हालांकि इस दौरान इन बैंकों के विदेशी ग्राहकों की जमाओं में गिरावट आई। इससे पहले 2016 में यह मुनाफा घटकर लगभग आधा 7.9 अरब फ्रेंक रह गया था।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Jun 2018 09:33:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विरोध के बीच आज रिलीज हुई रजनीकांत की &amp;#8216;काला&amp;#8217;, रात 3 बजे से थियेटर के बाहर जुटे फैंस</title>
                                    <description><![CDATA[एजेंसी। जबरदस्त विवादों और विरोध के बाद आखिरकार रजनीकांत की ‘काला’ आज रिलीज हो ही गई, और जैसी रजनीकांत के फैंस से उम्मीद की जा रही थी, ठीक वैसी ही दीवानगी उनके फैंस में उनकी फिल्म को लेकर देखने को मिली। अपने इस फेवरेट स्टार की फिल्म का फर्स्ट डे फर्स्ट शो में देखने की चाहत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/rajinikanths-black-released-protest-today-from-3pm/article-4013"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kook-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>एजेंसी। </strong>जबरदस्त विवादों और विरोध के बाद आखिरकार रजनीकांत की ‘काला’ आज रिलीज हो ही गई, और जैसी रजनीकांत के फैंस से उम्मीद की जा रही थी, ठीक वैसी ही दीवानगी उनके फैंस में उनकी फिल्म को लेकर देखने को मिली। अपने इस फेवरेट स्टार की फिल्म का फर्स्ट डे फर्स्ट शो में देखने की चाहत रखने वाले रात 3 बजे से ही थियेटर के बाहर नजर आये। चेन्नई में फिल्म का पहला शो सुबह 4 बजे का था। जिसके चलते स्टार रजनीकांत के फैंस सुबह 3 बजे से थियेटर के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ फैंस फिल्म रिलीज को किसी त्यौहार की तरह सेलिब्रेट करते नजर आए। तमिलनाडु में फैंस ने उनके पोस्टर का दूध से अभिषेक किया तो कई फैंस ने सड़कों पर आतिशबाजी की। कुछ फैंस ने तो सड़कों को ऐसे सजाया जैसे कि दिवाली का त्यौहार हो। रजनीकांत के दामाद धनुष की कंपनी वण्डरबार फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड ने फिल्म का निर्माण किया है, वहीं फिल्म में डायरेक्शन पा रंजीत का है। कॉपीराइट मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कल ही फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या रहा विवाद— बता दें कि रिलीज से पहले ही रजनीकांत की फिल्म ‘काला’ जबरदस्त विवादों में रही है। एक तरफ तो फिल्म पर कॉपीराइट के आरोप लगे तो दूसरी तरफ कावेरी विवाद पर रजनीकांत की टिप्पणी के बाद कर्नाटक में फिल्म का विरोध हो रहा है। दरअसल मुंबई के एक जर्नलिस्ट ने फिल्म प्रोड्यसर्स पर 101 करोड़ की मानहानि का केस किया है। जर्नलिस्ट जवाहर का आरोप है कि फिल्म में रजनीकांत तो किरदार निभा रहे हैं, वो रियल लाइफ में उनके पिता शिरावियम नडार का है, जवाहर ने उनके पिता की इमेज नेगेटिव पेश किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज कराई है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं दूसरी तरफ रजनीकांत ने कावेरी जल विवाद पर बयान दिया था कि- ‘केंद्र सरकार को जल्द से जल्द कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड का गठन करना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो उसे पूरे तमिलनाडु की जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।’ दरअसल कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। उनके इस बयान के बाद से कर्नाटक में उनके खिलाफ माहौल बन गया और अब वहां काला की रिलीज का विरोध किया जा रहा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jun 2018 13:22:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हिसार: कॉल डिटेल से काले कुबेरों की तलाश</title>
                                    <description><![CDATA[जांच दीमापुर में पकड़ा गया था 3.5 करोड़ काला धन, संदिग्धों की मोबाइल कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस हरियाणा पुलिस ने एविएशन अथॉरिटी को लिखा पत्र 22 नवंबर को चार्टर्ड विमान से बरामद हुए थे करोड़ों के पुराने नोट Hisar, Sandeep Singhmar: हिसार फ्लाइंग क्लब से 22 नवंबर को साढ़े तीन करोड़ के 500 व 1000 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hisar-call-detail-for-black-kuber/article-416"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/call-detail.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li>जांच दीमापुर में पकड़ा गया था 3.5 करोड़ काला धन, संदिग्धों की मोबाइल कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस</li>
<li>हरियाणा पुलिस ने एविएशन अथॉरिटी को लिखा पत्र</li>
<li>22 नवंबर को चार्टर्ड विमान से बरामद हुए थे करोड़ों के पुराने नोट</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Hisar, Sandeep Singhmar: </strong>हिसार फ्लाइंग क्लब से 22 नवंबर को साढ़े तीन करोड़ के 500 व 1000 के नोटों के साथ उड़ान भरने वाले चार्टर्ड विमान को नागालैंड में पकड़े जाने के बाद हिसार पुलिस ने नोटबंदी के बाद हुई सभी उड़ानों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इस मामले में पुलिस अनेक संदिग्ध लोगों की कॉल डिटेल भी खंगाल रही है। पुलिस एविएशन अथॉरिटी को इस बारे में पत्र लिख चुकी है। अब तक सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि आखिर नागालैंड के दीमापुर में पकड़ी गई इतनी बड़ी राशि किसकी थी?<br />
प्रारंभिक जांच में पुलिस ने जांच अधिकारी ने फ्लाइंग क्लब के अधिकारी कै΄टन शैलेन्द्र हुड्डा की स्टेटमेंट से भी संतुष्ट नहीं हैं। पुलिस के मुताबिक कै΄टन शैलेन्द्र हुड्डा ने कहा कि उनके पास चैकिंग करने का कोई अधिकार नहीं है। यह बात गले नहीं उतर रही है। एविशन अधिकारी के इस जवाब से जांच अधिकारी डीएसपी जयभगवान ने कहा कि जब वे जांच नहंी कर सकते तो अब स्थानीय पुलिस को भविष्य में उड़ानों की जांच के लिए क्यों लिख रहे हैं? पुलिस अब इस मामले में एविएशन अथॉरिटी से एक्ट की पूरी जानकारी मांग रही है, ताकि इस मामले की तह में जाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सभी उड़ानों की जुटाई जाएगी जानकारी</strong><br />
दूसरी तरफ इस मामले में पुलिस अब नोटबंदी के ऐलान से लेकर चार्टर्ड विमान के नागालैंड के दीमापुर में पकड़े जाने तक की सभी उड़ानों के बारे में भी जानकारी जुटाएगी। इतना ही नहीं, पुलिस ने इस मामले में अनेक संदिग्ध लोगों की कॉल डिटेल भी कलैक्ट करने का फैसला लिया है। डीएसपी भगवान दास ने कहा कि इस मामले में हर पहलू की बारिकी से जांच की जा रही है। अभी तक की जांच प्रक्रिया में पुलिस ने हिसार स्थित फ्लाइंग क्लब के प्रमुख कै΄टन शैलेन्द्र हुड्डा, टाटा सूमो के चालक से स्टेटमेंट ले ली है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><br />
इन तीन को भेजे गए हैं नोटिस</strong><br />
इस मामले में पुलिस ने सौर्य एयरोनॉटिक्स के प्रमुख संदीप सर्राफ, अमरजीत और एयरकार एयरलाइन्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमुख केसी दत्ता को इस मामले में नोटिस जारी किया हुआ है। उन्हें मंगलवार को जांच के लिए बुलाया गया है। लेकिन खास बात यह है कि अभी तक तीनों की तरफ से पुलिस को कोई रिसीविंग नहीं मिली है। यदि ये जांच में शामिल नहीं होते हैं तो इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। ज्ञात रहे कि चार्टर्ड विमाान के जरिए साढ़े तीन करोड़ की नकदी ले जाए जाने के संगीन मामले का खुलासा आईबी की टीम के जरिए 22 नवंबर की देर रात बेहद गोपनीय तरीके से हुआ था। इसी मामले में आईबी के अधिकारी हिसार भी आए थे, जिसके बाद एयरपोर्ट के अधिकारियों में सनसनी फैल गई थी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hisar-call-detail-for-black-kuber/article-416</link>
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                <pubDate>Tue, 06 Dec 2016 05:37:22 +0530</pubDate>
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