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                <title>घाटी में शांति के लिए सख्त कदम उठाए सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[तारकेश्वर मिश्र जम्मू कश्मीर में भाजपा-पीडीपी सरकार के गिरने के बाद से कश्मीर घाटी का दृश्य बदला हुआ दिखाई दे रहा है। रमजान के महीने में सीजफायर के दौरान आंतकी घटनाओं में एकाएक बढ़ोत्तरी ने प्रदेश व केंद्र सरकार की जमकर किरकिरी करवाई थी, लेकिन अब कश्मीर घाटी में राज्यपाल शासन लागू होते ही प्रशासन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/government-takes-tough-steps-for-peace-in-the-valley/article-4502"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/artical-01.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>तारकेश्वर मिश्र</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जम्मू कश्मीर में भाजपा-पीडीपी सरकार के गिरने के बाद से कश्मीर घाटी का दृश्य बदला हुआ दिखाई दे रहा है। रमजान के महीने में सीजफायर के दौरान आंतकी घटनाओं में एकाएक बढ़ोत्तरी ने प्रदेश व केंद्र सरकार की जमकर किरकिरी करवाई थी, लेकिन अब कश्मीर घाटी में राज्यपाल शासन लागू होते ही प्रशासन का नजरिया बदलने लगा। यासीन मलिक और मीर वाइज उमर फारुख को गिरफ्तार और सैयद अहमद शाह जिलानी को घर में नजरबंद करने जैसी कार्रवाई के साथ ये खबर भी आ गई कि अब घाटी में ब्लैक कैट कमांडो तैनात किए जा रहे हैं जो आतंकवादियों के सफाये के साथ ही अमरनाथ यात्रा के दौरान आने वाले लाखों यात्रियों की सुरक्षा का काम भी देखेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यपाल ने सभी दलों की बैठक बुलाकर राजनीतिक प्रक्रिया जारी रखने के संकेत भी दिए हैं। राज्यपाल शासन का अनुभव जम्मू कश्मीर को पहले भी हो चुका है लेकिन इस मर्तबा परिस्थितियां काफी अलग हैं क्योंकि पीडीपी-भाजपा गठबंधन टूटने की वजह वैचारिक मतभेद न होकर मुख्यमंत्री रहीं महबूबा मुफ्ती का पत्थरबाजों और अलगाववादियों के प्रति नरम रवैया बना।</p>
<p style="text-align:justify;">रमजान के उपरांत भी युद्धविराम जारी रखने की महबूबा की जिद के चलते भाजपा को गठबंधन तोडने का अवसर मिल गया। युद्धविराम के दौरान पत्थरबाजी और आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि के कारण उसे आगे जारी रखने का कोई औचित्य नहीं था। पीडीपी अपने रुख में बदलाव के लिए तैयार नहीं थी। सही बात ये है कि पीडीपी और भाजपा दोनों साथ रहते हुए असहज अनुभव कर रही थीं। यदि भाजपा ने गठबंधन नहीं तोड़ा होता तो महबूबा भी किसी दिन पत्रकार वार्ता बुलाकर भाजपा से दूर होने का ऐलान कर देतीं।</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी भनक लगते ही भाजपा ने कमांडो एक्शन जैसी कार्रवाई करते हुए सरकार गिरवा दी। राज्यपाल शासन के बाद अब राज्य पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन आने से भाजपा को अपनी नीतियां लागू करने का अवसर मिल गया। यही वजह है कि ब्लैक कैट कमांडो तैनात करने जैसा फैसला लिया गया। इस फैसले से ये भी आभास होता है कि केंद्र सरकार अलगाववादियों से निबटने के लिए पूरी तैयारी कर रही है।<br />
कश्मीर के मामले में पाकिस्तान अंग्रेजों की भूमिका निभा रहा है जिसे चीन का खुला समर्थन है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल राज्यपाल शासन लगते ही घाटी का माहौल बदलने के संकेत मिलने लगे हैं। शुरूवात होते ही सुरक्षा बलों ने कुछ आतंकवादियों को मार गिराया। हुर्रियत नेताओं द्वारा विरोध किये जाने पर उनकी गिरफ्तारी और नजरबंदी से लगने लगा है कि केंद्र उन सभी आरोपों को धो डालने के लिए तत्पर है जो महबूबा सरकार के रहते उसके दामन पर लगते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">खबर है सेना एवं अन्य सुरक्षा बलों ने घाटी में पनाह लिए आतंकवादियों की पूरी सूची बना ली है। शीघ्र ही उनके विरुद्ध अभियान छेड़ा जाएगा। चूंकि ब्लैक कैट कमांडो विषम स्थितियों में भी अपने कार्य को सफलतापूर्वक करने हेतु प्रशिक्षित और अभ्यस्त रहते हैं इसलिए उनको मोर्चे पर उतारकर आतंकवादियों को ईंट का जवाब पत्थर से देने की रणनीति बनाली गई है। ऐसा करने से सुरक्षा बलों का हौसला भी बढ़ेगा जो राज्य सरकार के हस्तक्षेप और असहयोग की वजह से खुलकर अपने हाथ नहीं दिखा पा रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अमरनाथ यात्रा के पहले सुरक्षा प्रबंध चाक-चौबंद करने की बेहद जरूरत है क्योंकि यात्रा के दौरान आतंकवादी वारदात से यात्रियों का ही नहीं पूरे देश का मनोबल गिरता है। ब्लैक कैट कमांडो को यदि आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई में लगा दिया जावे तो निश्चत रूप से ठोस नतीजे निकल सकते हैं। कड़वा सच ये है कि कश्मीर घाटी में तैनात राज्य के अधिकतर पुलिसकर्मी भी महबूबा मुफ्ती की तरह से ही अलगाववादियों के प्रति हमदर्दी रखते हैं। इसकी वजह डर भी हो सकता है किन्तु घाटी के भीतर भारत विरोधी भावनाएं काफी गहराई तक फैल चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नई पीढ़ी के नौजवानों के मन में अलगाववाद को मजहब के नाम पर इस तरह भर दिया गया जैसे आजादी के पहले पाकिस्तान बनाने का माहौल मुसलमानों में अंग्रेजों की मदद से पैदा किया गया था। वास्तव में कश्मीर को लेकर पूरा देश उद्वेलित है। वहां जिस तरह से अलगाववाद का फैलाव हुआ और सुरक्षा बलों के लोगों की जानें सस्ते में जाती गईं उससे देश में केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही थी। लोग इस बात को लेकर हैरान थे कि प्रधानमंत्री अपने पहले वाले बयानों को कैसे भूल गए।</p>
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                <pubDate>Tue, 26 Jun 2018 07:42:37 +0530</pubDate>
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                <title>घाटी में आतंकी हमलों के बाद एक्शन में सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। गृहमंत्री राजनाथ सिंह सात जून को दो दिन के जम्मू-कश्मीर दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वह प्रदेश में सुरक्षा बलों की कार्रवाई रोके जाने के फैसले से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा करेंगे। संभावना तलाशेंगे कि कार्रवाई रोके रखने का फैसला क्या और आगे बढ़ाया जा सकता है। दौरे में वह सीमापार गोलाबारी से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/government-in-action-after-terrorist-attacks-in-the-valley-2/article-3691"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/rajnath-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>गृहमंत्री राजनाथ सिंह सात जून को दो दिन के जम्मू-कश्मीर दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वह प्रदेश में सुरक्षा बलों की कार्रवाई रोके जाने के फैसले से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा करेंगे। संभावना तलाशेंगे कि कार्रवाई रोके रखने का फैसला क्या और आगे बढ़ाया जा सकता है। दौरे में वह सीमापार गोलाबारी से प्रभावित इलाकों में भी जाएंगे और पीडि़त लोगों से मुलाकात करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि रमजान के महीने में सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में कार्रवाई को रोक रखा है। 16 मई को केंद्र सरकार की ओर से कार्रवाई रोकने की एकतरफा घोषणा के बाद यह केंद्र के किसी शीर्ष नेता का दूसरा जम्मू-कश्मीर दौरा होगा। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख, श्रीनगर और जम्मू का दौरा किया था। अपने दौरे में गृह मंत्री सीमावर्ती जिले कुपवाड़ा भी जाएंगे, वहां पर वह सीमा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वह पुलिस, अर्ध सैन्य बलों और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर रमजान के महीने में कार्रवाई रोके जाने से पैदा हुए हालात की समीक्षा करेंगे।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 May 2018 07:44:29 +0530</pubDate>
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