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                <title>भारत का सबसे ऊंचा मंदिर बना तो पर्यावरण खतरा, एनजीटी का नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[मंदिर निर्माण को रोकने की मांग । Environmental Danger नई दिल्‍ली (एजेंसी)। एनजीटी की दाखिल की गई एक याचिका में इस्‍कॉन के नेतृत्‍व में मथुरा में बनने वाले चंद्रोदय मंदिर का निर्माण रोकने की मांग की गई है। इसके लिए धार्मिक सोसाइटी और केंद्रीय ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्‍लूए) को नोटिस जारी किया गया है।याचिका में आरोप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/indias-highest-temple-built-environmental-danger-ngt-notice/article-4812"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/environmental-danger.jpg" alt=""></a><br /><h2>मंदिर निर्माण को रोकने की मांग <strong>।</strong> Environmental Danger</h2>
<p><strong>नई दिल्‍ली (एजेंसी)।</strong> एनजीटी की दाखिल की गई एक याचिका में इस्‍कॉन के नेतृत्‍व में मथुरा में बनने वाले चंद्रोदय मंदिर का निर्माण रोकने की मांग की गई है। इसके लिए धार्मिक सोसाइटी और केंद्रीय ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्‍लूए) को नोटिस जारी किया गया है।याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस्‍कॉन द्वारा बनाए जाने वाले वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के निर्माण से यमुना के आसपास का पर्यावरण प्रभावित <strong>(  Environmental Danger )</strong> होगा और क्षेत्र का भूजल स्‍तर पर भी असर पड़ेगा।</p>
<p>एनजीटी के जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने इंटरनेशनल सोसाइटी फार कंससनेस (इस्‍कॉन) और सीजीडब्‍लूए से 31 जुलाई से पहले जवाब मांगा है।</p>
<h2>इस्‍कॉन बेंगलुरु द्वारा  मथुरा में किया जाएगा निर्माण <strong>।</strong> Environmental Danger</h2>
<p>पर्यावरण कार्यकर्ता मणिकेश चतुर्वेदी ने दुनिया के सबसे बड़े मंदिर के निर्माण को रोकने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि प्रस्‍तावित मंदिर की बाउंड्री के चारों ओर कृत्रिम तालाब होगा। इसके लिए जमीन से बड़े पैमाने का पानी का दोहन किया जाएगा। इससे यमुना नदी की अस्तित्‍व की सीमा तक पानी में कमी आ सकती है।</p>
<h2>सबसे बड़े मंदिर की क्‍या है खासियत<strong>।</strong>  Environmental Danger</h2>
<ul>
<li>मंदिर के निर्माण पर 300 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा।</li>
<li> इस्‍कॉन बेंगलुरु द्वारा दुनिया के सबसे महंगे मंदिर का निर्माण मथुरा में किया जाएगा।</li>
<li> मंदिर की ऊंचाई 7 सौ फीट होगी और इसका निर्माण 5,40,000 वर्ग फीट में किया जाएगा।</li>
<li> शानदार मंदिर के लिए सशक्‍त जंगल का पुनर्निर्माण किया जाएगा।</li>
<li>यह मंदिर 26 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा।  इसमें ब्रज के 12 जंगलाेें का निर्माण होगा, जिसमें सुंदर वनस्‍पतियां, झीलें और झरने शामिल होंगे।</li>
<li>मंदिर का कुल क्षेत्रफल 62 एकड़ होगा, जिसमें 12 एकड़ पार्किंग और हेलीपैड के लिए होगा।</li>
</ul>
<h2> मंदिर की नींव होगी बुर्ज खलीफा से भी गहरी <strong>।</strong>  Environmental Danger</h2>
<p>चंद्रोदय मंदिर दो सौ मीटर से अधिक ऊंचा होगा। साढ़े पांच एकड़ के इलाक़े में बनने वाले इस मंदिर में 70 मंजिलें होंगी। अभी दुनिया की सबसे ऊंची धार्मिक इमारत मिस्र के पिरामिड हैं, जो कि 128.8 मीटर ऊंचा है। वहीं वेटिकन का सेंट पीटर बैसेलिका 128.6 मीटर ऊंचा है। रॉकेट के आकार का चंद्रोदय मंदिर भूकंप प्रतिरोधी होगा।इसके निर्माण में 45 लाख घन फीट कंक्रीट और करीब साढ़े 25 हज़ार टन लोहे का इस्तेमाल होगा।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Jul 2018 03:56:49 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्व विभाग में पकड़े गए सबसे ज्यादा घूसखोर, दूसरे नम्बर पर पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए प्रदेश सरकार भले ही लाख कोशिश करती रहे लेकिन घूसखोर अधिकारी व कर्मचारी इस कदर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं कि उन्हें जहां भी मौका मिलता है, चपत लगाने से बाज नहीं आते। वर्तमान में प्रदेश में अगर सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए हैं तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/highest-in-revenue-department-corruption/article-3697"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/guss.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए प्रदेश सरकार भले ही लाख कोशिश करती रहे लेकिन घूसखोर अधिकारी व कर्मचारी इस कदर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं कि उन्हें जहां भी मौका मिलता है, चपत लगाने से बाज नहीं आते। वर्तमान में प्रदेश में अगर सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए हैं तो वो राजस्व महकमा है जबकि पुलिस दूसरे नंबर है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि हरियाणा राज्य चौकसी ब्यूरो के आंकड़े कह रहे हैं। ब्यूरो द्वारा भाजपा सरकार के कार्यकाल में की गई कार्यवाही के तहत 128 अपराधिक मुकद्दमों में सजा सुनाई गई, जिनमें ब्यूरो द्वारा पकड़े गए 139 अधिकारियों व कर्मचारियों तथा 47 अन्य व्यक्तियों को भ्रष्टाचार उन्नमूलन अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं में कठोर करावास की सजा हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्यूरो के एक प्रवक्ता ने बताया कि पकड़े गए अधिकारियों व कर्मचारियों में राजस्व विभाग के 30, पुलिस विभाग के 25, शिक्षा विभाग के 16, विद्युत विभाग के 11, सहकारिता विभाग के 9, स्वास्थ्य विभाग के 8, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के 7, पशुपालन विभाग के 3, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के 3, जनस्वास्थ्य विभाग के 3, कृषि विभाग के 3, सिंचाई विभाग के 3, पंचायती राज विभाग के 2, श्रम विभाग के 2, वक्फ बोर्ड के 2,खजाना विभाग के 2, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का एक, औद्योगिक विभाग का एक, न्याय एवं अधिकारिता विभाग का एक, आबकारी व कराधान विभाग का एक, खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग का एक, विकास एवं पंचायत विभाग का एक तथा न्याय प्रशासन विभाग का एक कर्मचारी शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि सजा पाने वाले कर्मचारियों में सबसे अधिक राजस्व, पुलिस और शिक्षा विभाग के कर्मचारी हैं और इन सभी मामलों में आरोपियो को अदालत द्वारा पांच साल तक के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान अब तक 482 अपराधिक मुकद्दमें विभिन्न अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्ध दर्ज किये गए हैं, जिनमें 389 छापे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 389 छापों के मामलों में 39 राजपत्रित, 374 अराजपत्रित कर्मचारियों एवं 49 अन्य लोगों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इनके विरूद्ध भ्रष्टाचार उन्नमूलन अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकद्दमें दर्ज किये गए हैं। प्रवक्ता ने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान अब तक कुल 455 नई जांचे दर्ज की गई है, जिनमें पांच आईएएस, एक आईपीएस, चार एचसीएस, एक एचपीएस, छह मुख्य अभियंता, छह अधीक्षक अभियन्ता, 45 कार्यकारी अभियन्ता, आठ तहसीलदार, सात नायब-तहसीलदार व 47 उप-मण्डल अधिकारी, उप-मण्डल अभियन्ता, नगर अभियन्ता तथा अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें विरूद्ध पड़ताल जारी है। उन्होंने बताया कि इनके विरूद्ध भ्रष्टाचार, सरकारी धन के गबन तथा आय से अधिक सम्पति बनाने के आरोप हैं।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 May 2018 22:02:59 +0530</pubDate>
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