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                <title>Riots - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>झूठे आरोप लगाने वाले मोदी और देश से माफी मांगे: शाह</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि गुजरात दंगों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीतिक षड्यंत्र के तहत आरोप लगाए गए थे और यह आरोप लगाने वाले लोगों को अब मोदी, देश और भारतीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि गुजरात दंगों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीतिक षड्यंत्र के तहत आरोप लगाए गए थे और यह आरोप लगाने वाले लोगों को अब मोदी, देश और भारतीय जनता पार्टी से माफी मांगनी चाहिए। शाह ने आज अपने एक साक्षात्कार के अंशों को सिलसिलेवार ट्वीट में सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि न्यायालय के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि यह सभी आरोप राजनीतिक षड्यंत्र के तहत लगाए गए थे और अब आरोप लगाने वाले लोगों को मोदी से माफी मांगनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से ये फिर एक बार सिद्ध हुआ है कि नरेंद्र मोदी जी पर लगाए गये आरोप एक राजनीतिक षड्यंत्र था। मोदी जी बिना एक शब्द बोले, सभी दुखों को भगवान शंकर के विषपान की तरह 18-19 साल तक सहन करके लड़ते रहे। अब सत्य सोने की तरह चमकता हुआ बाहर आया है, यह गर्व की बात है। हाल ही में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी से प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई पूछताछ के दौरान कांग्रेस कार्यकतार्ओं द्वारा दिए गए धरने और विरोध प्रदर्शनों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘लोकतंत्र में संविधान का सम्मान कैसे हो सकता है इसका आदर्श उदाहरण नरेंद्र मोदी जी ने प्रस्तुत किया है।</p>
<h3><strong> इतने साल से देश की जनता दिल से मोदी जी के साथ खड़ी है</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मोदी जी से घंटों पूछताछ हुई लेकिन हमने कोई धरना-प्रदर्शन नहीं किया। झूठे आरोप लगाने वाले लोगों की अगर अंतरात्मा है तो उन्हें मोदी जी, भाजपा और देश से माफी मांगनी चाहिए। एक अन्य ट्वीट में शाह ने कहा, ‘ मैंने मोदी जी को इन सभी झूठे आरोपों के दर्द को सहन करते हुए बहुत करीब से देखा है। न्यायिक प्रक्रिया चल रही है इसलिए झूठे आरोपों पर भी कुछ ना बोलना ये स्टैंड देश की न्याय प्रणाली में विश्वास रखने वाला नरेंद्र मोदी जी जैसा कोई मजबूत मन वाला व्यक्ति ही ले सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;">शाह ने कहा कि देश की जनता ने इन आरोपों को कभी स्वीकार नहीं किया और वह आज भी मोदी के साथ खड़ी है। उन्होंने ट्वीट किया,‘ कुछ पत्रकारों, एनजीओ और भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों ने मोदी जी पर झूठे आरोप लगाकर एक संगठित गिरोह की तरह उन्हें प्रचारित किया। लेकिन देश की जनता ने इन आरोपों को कभी स्वीकार नहीं किया। लोकतंत्र में जनादेश का बड़ा महत्व है और इतने साल से देश की जनता दिल से मोदी जी के साथ खड़ी है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jun 2022 16:39:51 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>दंगों की साजिश</title>
                                    <description><![CDATA[देश लम्बे समय से शांत था, एकाएक एक वर्ग-विशेष एवं कतिपय राजनीतिक दलों को यह शांति, साम्प्रदायिक सौहार्द एवं अमन-चैन की स्थितियां रास नहीं आई और उन्होंने साम्प्रदायिक भाईचारे एवं सौहार्द को खंडित करने का सफल षड्यंत्र रच दिया। जहांगीरपुरी मामले में में टकराव और गिरफ्तारियां हो रही हैं। इसके अलावा अयोध्या की मस्जिदों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/conspiracy-of-riots/article-32858"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/patiala-violence-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश लम्बे समय से शांत था, एकाएक एक वर्ग-विशेष एवं कतिपय राजनीतिक दलों को यह शांति, साम्प्रदायिक सौहार्द एवं अमन-चैन की स्थितियां रास नहीं आई और उन्होंने साम्प्रदायिक भाईचारे एवं सौहार्द को खंडित करने का सफल षड्यंत्र रच दिया। जहांगीरपुरी मामले में में टकराव और गिरफ्तारियां हो रही हैं। इसके अलावा अयोध्या की मस्जिदों में आपत्तिजनक वस्तुएं फेंक कर दंगे भड़काने की कोशिश की गई। ताजा मामला पंजाब के शहर पटियाला का है जहां दो विभिन्न संगठन हथियारों से लैस होकर आमने-सामने हो गए। यहां तक की पटियाला में कर्फ्यू लगाने की नौबत आ गई। उपरोक्त घटनाएं एक गंभीर संकेत दे रही हैं, जिन पर विचार करने के बाद ऐसा लगता है जैसे देश में कोई बड़ी साजिश काम कर रही है, जिसे हर हाल में नाकाम करना होगा। विदेशों में पनाह लेकर बैठे आतंकी भारत के नेताओं पर हमले करने की खुलकर धमकियां दे रहे हैं। कई संगठन तो मुख्यमंत्रियों के नाम तक लेकर धमकियां दे चुके हैं। इन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क होने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पटियाला में भी हालात काबू में किए जा सकते थे, क्योंकि तनाव बढ़ने का कारण एक मार्च बना। मार्च निकालने की चर्चा शहर में कई दिनों से हो रही थी, लेकिन जब तक पुलिस के उच्च अधिकारी जागे, तब तक दोनों संगठनों के लोगों में टकराव काफी बढ़ चुका था। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के हालातों से सबक लेकर पटियाला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई कर मामले को निपटा सकते थे लेकिन बात पटियाला के टकराव तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पंजाब के साथ-साथ देश के सभी राज्य सरकारों, पुलिस और प्रशासन को रणनीति बनानी चाहिए। अब 2024 में लोक सभा चुनाव होंगे और कई राज्यों में भी विधान सभा चुनाव हैं। देश पहले ही दंगों की आग में झुलस चुका है। दंगों के मामलों में कहीं बड़ी पार्टियों के नेता अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बताने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि सामाजिक उथल-पुथल देश की आर्थिक तरक्की को प्रभावित करती है। उत्तर भारतीय राज्यों के पिछड़ेपन का एक बड़ा कारण सांप्रदायिक तनाव रहा है। इसलिए सरकारों को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए। राष्ट्रीय एकता-अखण्डता, साम्प्रदायिक सौहार्द एवं शांति-व्यवस्था को किसी भी जाति एवं धर्म का व्यक्ति आहत करे, उसकी निन्दा ही नहीं, कठोर कार्रवाई भी होनी चाहिए। ऐसी घटनाओं के प्रति न्यायालय जागरूक हो, उससे पहले समाज को जागरूक होना चाहिए। व्यक्तिगत, सामुदायिक व राष्ट्रीय उत्कर्ष में सहायक धार्मिक आयोजनों से भला किसी को क्यों गुरेज होगा, पर उन्हें सामाजिक भाईचारे और देश के विकास में बाधक बनने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट से पहले तो समाज को ही खड़ा होना चाहिए।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 May 2022 09:53:17 +0530</pubDate>
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                <title>इक्वाडोर की जेलों में हुए दंगों में 50 से अधिक कैदियों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[मैक्सिको सिटी (स्पूतनिक)। इक्वाडोर की जेलों में हाल ही में हुए दंगों के दौरान 50 से अधिक कैदी मारे गए हैं। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी है। इससे पहले दिन में देश के प्रमुख शहरों गुआयाकिल, कुएनका, और लाटाकुंगा की जेलों में दंगे हुए। इस दौरान कैदियों द्वारा जेल के प्रहरियों को बंधक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/more-than-50-prisoners-died-in-riots-in-ecuador-jails/article-21984"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/ecuador-jails-riots.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मैक्सिको सिटी (स्पूतनिक)।</strong> इक्वाडोर की जेलों में हाल ही में हुए दंगों के दौरान 50 से अधिक कैदी मारे गए हैं। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी है। इससे पहले दिन में देश के प्रमुख शहरों गुआयाकिल, कुएनका, और लाटाकुंगा की जेलों में दंगे हुए। इस दौरान कैदियों द्वारा जेल के प्रहरियों को बंधक बनाए जाने के कई मामले सामने आए लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। पुलिस ने ट्विटर पर कहा, “ग्वायस, अज़ुय और कोटोपेक्सी के सामाजिक पुनर्वास केंद्रों में आज हुई घटनाओं के बाद स्थिति नियंत्रण में है। अब तक, फोरेंसिक विशेषज्ञों ने 50 मृत कैदियों की रिपोर्ट दी है।” पुलिस के अनुसार जेल में गिरोहों के बीच संघर्ष के कारण दंगे हुए।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Feb 2021 09:52:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सिख विरोधी दंगे 1984: सुप्रीम कोर्ट ने SIT को दिया जांच पूरी करने के लिए दो महीने का वक्त</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)।  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों पर सुनवाई करते हुए एसआईटी को 186 मामलों में अपनी जांच पूरी करने के लिए दो महीने का वक्त और दिया है। दरअसल, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एसआईटी जांच की मांग करने वाली याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong> सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों पर सुनवाई करते हुए एसआईटी को 186 मामलों में अपनी जांच पूरी करने के लिए दो महीने का वक्त और दिया है। दरअसल, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एसआईटी जांच की मांग करने वाली याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस दिया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया था।</p>
<h2>जानें पूरा मामला</h2>
<p>31 अक्टूबर 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख बॉडीगार्डों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़की और लोगों ने सिखों को निशाना बनाना शुरु कर दिया था। दिल्ली में हुआ कत्लेआम के बाद कानपूर में भी सबसे ज्यादा सिखों को मारा गया था।</p>
<p>कानपुर में 300 से अधिक सिखों के मारे जाने और सैकड़ों घर तबाह होने के आरोप लगे थे। हालांकि इस मामले की जांच करने वाले रंगनाथ मिश्रा आयोग ने महज 127 सिखों की मौत को दर्ज किया था। सिखों का आरोप है कि कानपुर में सिखों का कत्लेआम किया गया था, लेकिन इस मामले में बहुत दिनों तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। बाद में जब एफआईआर दर्ज की गई तो स्टेटस रिपोर्ट में कोई पुख्ता सबूत नहीं होने की बात कहकर केस को खत्म कर दिया गया था।</p>
<h2>सज्जन कुमार दोषी</h2>
<p>गुरुवार को भी सुल्तानपुरी क्षेत्र में हुए सिख विरोधी दंगे के एक मामले की सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट में गवाह जोगिद्र सिंह ने मामले में आरोपित सज्जन कुमार की पहचान की थी। सिंह ने कहा कि दंगे में उनके भाई की हत्या कर दी गई थी और सज्जन कुमार भीड़ का नेतृत्व कर रहा था। सज्जन उस भीड़ को दिशा-निर्देश दे रहा था, जो सिख समुदाय के लोगों को मार रही थी। दिल्ली सिख दंगों को लेकर सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुए पिछले साल 17 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Mar 2019 12:54:12 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>थाईलैंड में कोहराम मचाने के बाद अंडमान की ओर मुड़ा तूफान</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्‍ली (सच कहूँ)।  पाबुक चक्रवाती तूफान थाईलैंड में कोहराम मचाने के बाद अंडमान की ओर मुड़ गया है। थाईलैंड के नखोन सी थम्मारात प्रांत में पाबुक ने काफी नुकसान किया है। अब यह पश्चिम उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ बढ़ चुका है। इसकी पोर्ट ब्लेयर से दूरी तकरीबन 800 किलोमीटर बताई जा रही है। मौसम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>नई दिल्‍ली (सच कहूँ)।</strong>  पाबुक चक्रवाती तूफान थाईलैंड में कोहराम मचाने के बाद अंडमान की ओर मुड़ गया है। थाईलैंड के नखोन सी थम्मारात प्रांत में पाबुक ने काफी नुकसान किया है। अब यह पश्चिम उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ बढ़ चुका है। इसकी पोर्ट ब्लेयर से दूरी तकरीबन 800 किलोमीटर बताई जा रही है। मौसम विभाग ने इस बात की आशंका जताई है कि यह तूफान 5 जनवरी को अंडमान सागर में पहुंच जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार, अंडमान सागर में पहुंचते ही तूफान अपनी दिशा बदलेगा और उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ चलकर अंडमान द्वीप समूह की ओर मुड़ जाएगा।</p>
<p>चक्रवाती तूफान के खतरे को देखते हुए मौसम विभाग ने अंडमान दीप समूह के लिए यलो वॉर्निंग जारी कर दी है। येलो अलर्ट में लोगों को सचेत किया जाता है कि कोई दिक्‍कत हो सकती है। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने को कहा गया है। फिल्हाल थाईलैंड के नखोन सी थम्मारात प्रांत में पाबुक कोहराम मचा रहा है। तूफान के मद्देनजर पहले ही लगभग 7,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। लेकिन अभी भी 80000 से अधिक लोगों को बचाने का अभियान जारी है।</p>
<p>आपदा रोकथाम एवं शमन विभाग के मंत्री उधोमपोर्न कान ने मीडिया को बताया कि इस तूफान से देश में पर्यटकों के साथ कुछ लोकप्रिय द्वीप प्रभावित हुए हैं, जहां उड़ानें और नौका सेवाएं रद कर दी गई हैं। मौसम विभाग के साइक्लोन सेंटर के मुताबिक, चक्रवाती तूफान पाबुक 6 जनवरी की शाम या रात में अंडमान दीप समूह को पार करेगा। जब यह चक्रवाती तूफान अंडमान द्वीप समूह को पार कर रहा होगा तो इसमें चलने वाली हवाओं की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे होगी।मौसम विभाग का ऐसा अनुमान है कि अंडमान द्वीप समूह को पार करने के बाद यह तूफान उत्तर उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ बढ़ेगा और फिर उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ मुड़कर म्यांमार कोस्ट की तरफ रुख कर लेगा, लेकिन ऐसा अनुमान है कि 7 या 8 जनवरी को यह तूफान बंगाल की खाड़ी में ही कमजोर पड़ जाएगा।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Jan 2019 11:16:33 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>दंगों पर न हो राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[आखिर 34 वर्ष के बाद 1984 के दंगा पीड़ितों को न्याय मिल गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने दंगों के लिए दोषी सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा सुनाई है। दंगा इंसानियत के नाम पर कलंक है। पुलिस प्रबंधों की खामियां, सांप्रदायिकता व कई अन्य कारणों के चलते पीड़ितों को देरी से न्याय मिला, फिर भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/politics-on-the-riots/article-7028"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/riots.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आखिर 34 वर्ष के बाद 1984 के दंगा पीड़ितों को न्याय मिल गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने दंगों के लिए दोषी सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा सुनाई है। दंगा इंसानियत के नाम पर कलंक है। पुलिस प्रबंधों की खामियां, सांप्रदायिकता व कई अन्य कारणों के चलते पीड़ितों को देरी से न्याय मिला, फिर भी इस फैसले से पीड़ितों के घावों पर मरहम लगेगी। दूसरी तरफ इस फैसले का जितनी तेजी से राजनीतिकरण हुआ है वह हमारे नेताओं की सत्ता स्वार्थ की तरफ संकेत करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अकाली-भाजपा इस मामले में कांग्रेस पर हमलावर है। हालांकि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। दंगों को लेकर फैसले से कोई राजनैतिक लाभ लेने की बजाय इसे इंसानियत के खिलाफ बड़े गुनाह के रूप में देखने की आवश्यकता है। अदालत ने फैसले में यह बात कही है कि सज्जन कुमार राजनैतिक संरक्षण होने के कारण बचता आया है। सजा दिलवाने के लिए मौजूदा प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई का माहौल बनाया जाए। इस जिम्मेदारी को सांप्रदायिक रंग देने वालों से बचाने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दंगा करने वालों का कोई धर्म या पार्टी नहीं होनी चाहिए लेकिन जब कोई पार्टी दंगों के मुद्दे पर अपनी, राजनैतिक रोटियां सेंकने लग जाती है तब यह अपने आप में एक ओर गुनाह बन जाता है। आवश्यकता इस बात की है कि धर्म आधारित दंगों के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाए, जिसका उद्देश्य सामाजिक व सांस्कृतिक ही हो। यह जिम्मेदारी पार्टियों की बनती है कि ऐसे नेताओं को पार्टी से निकाला जाए, जो समाज के लिए खतरा बनते हैं जहां तक देश में आए दिन हो रहे दंगों की बात है अभी तक शासन-प्रशासन व पुलिस अदालत के कटघरे में खड़ा है। दंगे होते हैं व दंगा पीड़ितों के साथ हमदर्दी कम और दंगों से राजनैतिक लाभ लेने के प्रयास ज्यादा किए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेशों की तर्ज पर न्याय व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए ताकि अपराधी भले ही कितना ही रूसूख वाला क्यों न हो कानून के सामने उसके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। सज्जन कुमार वाले फैसले से यह नसीहत लेने की आवश्यकता है। अत्याचार के हजारों मामलों के दोषियों को भी बिना किसी देरी के सख्त सजा मिले लेकिन यह बात नेताओं को अभी हजम नहीं हो रही, वह तो केवल वही बात करेंगे जिससे उन्हें चुनावों में लाभ हो, यही बात संवेदनहीन हो रही व्यवस्था का कुरूप चेहरा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो।</p>
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                <pubDate>Tue, 18 Dec 2018 08:38:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>यूपी: दंगे की आग में झुलसने से बचा लखनऊ</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ (Varta) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ कल रात दंगे की आग में झुलसने से बाल बाल बच गई। लखनऊ के कैसरबाग इलाके में एक मामूली सी बात पर दो समुदाय आमने सामने आ गए। लेकिन पुलिस ने फौरन एक्शन लेते हुए हालात काबू में कर लिए। पूरे इलाके में तैनात हुई पुलिस फोर्स डीएम कौशल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/up-lucknow-riots/article-3698"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/up-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (Varta) </strong>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ कल रात दंगे की आग में झुलसने से बाल बाल बच गई। लखनऊ के कैसरबाग इलाके में एक मामूली सी बात पर दो समुदाय आमने सामने आ गए। लेकिन पुलिस ने फौरन एक्शन लेते हुए हालात काबू में कर लिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पूरे इलाके में तैनात हुई पुलिस फोर्स</h3>
<p style="text-align:justify;">डीएम कौशल राज शर्मा और एसएसपी दीपक कुमार की अगुवाई में पुलिस फोर्स पूरे इलाके में तैनात कर दी गई और हिंसा होने से बच गई। इस दौरान लखनऊ के डीएम कौशल शर्मा और एसएसपी दीपक कुमार ने इलाके में पैदल गश्त कर के लाऊड स्पीकर पर स्थानीय लोगों को समझाया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला?</h4>
<p style="text-align:justify;">दरअसल कैसरबाग के नजीराबाद में धार्मिक आयोजन को लेकर एक युवक पानी का स्टॉल लगा रहा था। तभी वहां पर साइकिल स्टैंड चलाने वाले वाले मुन्ना नाम के शख्स ने उसकी लाठी डंडे से पिटाई कर दी। जिसके बाद देखते ही देखते दो समुदायों के लोग आमने सामने आ गए और पत्थर बाज़ी शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर भी अफवाहें भी तेजी से फैली कि दो समुदायों में हिंसा हो गई है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 May 2018 22:38:24 +0530</pubDate>
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