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                <title>Corona virus :  चीन में बिगड़े हालात, 106 की मौत, 1300 नए मामले</title>
                                    <description><![CDATA[चीन में कोरोना वायरस  का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। वायरस की चपेट में आकर जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 106 हो गई है। जबकि इसके 1300 नए मामले सामने आए हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/corona-virus-things-deteriorate-in-china-106-deaths-1300-new-cases/article-12767"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/corona-virus-2.jpg" alt=""></a><br /><h2>डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस को विश्व के लिए गंभीर खतरा बताया | Corona virus</h2>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p><strong>बीजिंग,(एजेंसी)।</strong> चीन में कोरोना वायरस <strong>( Corona virus)</strong> का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। वायरस की चपेट में आकर जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 106 हो गई है। जबकि इसके 1300 नए मामले सामने आए हैं। चीन के प्रधानमंत्री ली कछ्यांग सोमवार को वुहान पहुंचे और वायरस के प्रकोप से निपटने के उपायों का जायजा लिया। डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस को विश्व के लिए गंभीर खतरा बताया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस हालात का जायजा लेने के लिए चीन पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को हर जरूरी मदद देने की पेशकश की है। कई बड़ी कंपनियों ने अपने दफ्तर बंद कर दिए या स्टाफ को घर से ही काम करने को कह दिया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दूसरे देशों में भी कोरोना वायरस के कई मामले सामने आए हैं। <strong>Corona virus</strong></h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>थाईलैंड  7</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> जापान  3</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> दक्षिण कोरिया  3</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> संयुक्त राज्य अमेरिका 3</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> वियतनाम    2</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> सिंगापुर 4</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मलेशिया  3</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> नेपाल   1</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> फ्रांस 3</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> ऑस्ट्रेलिया 4</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> श्रीलंका 1 </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कनाडा 1</strong></li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">वुहान से संक्रमण की शुरुआत</h2>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, रहस्यमय कोरोना वायरस के संक्रमण के करीब आधे मामले मध्य चीन के हुबेई प्रांत में सामने आए हैं। इसी प्रांत की राजधानी वुहान से संक्रमण की शुरुआत हुई थी। अकेले हुबेई में 76 मौतें हुई हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमित लोगों की संख्या सरकार द्वारा बताए जा रहे आंकड़े से ज्यादा हो सकती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">वुहान से ही दुनिया में फैल रहा वायरस |<strong>Corona virus</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">कोरोना वायरस वुहान से दुनिया के कई देशों में पहुंच चुका है। इस शहर की यात्रा से अपने देशों में पहुंचने वाले कई लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। यह वायरस थाईलैंड, फ्रांस, जापान, अमेरिका, ताइवान, नेपाल, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और ब्रिटेन में दस्तक दे चुका है। चीन के अलावा अभी किसी देश में इस वायरस से मौत की खबर नहीं है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हांगकांग में भी आठ मामले</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>वायरस के प्रसार को रोकने के लिए एक करोड़ से ज्यादा आबादी वाले वुहान समेत लगभग पूरे प्रांत में आवाजाही रोक दी गई है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>चीन नियंत्रित हांगकांग में भी आठ मामले पाए गए हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> हांगकांग ने हुबेई से लोगों के आने पर 14 दिन के लिए रोक लगा दी है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> मकाउ ने भी इसी तरह का प्रतिबंध लगा दिया है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका समेत कई देश वुहान में फंसे अपने नागरिकों को निकालने में जुट गए हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> शहर से ऑस्ट्रेलिया के करीब 100 बच्चों और वयस्कों को निकालने की तैयारी चल रही है।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2020 11:46:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नये शिखर पर शेयर बाजार</title>
                                    <description><![CDATA[इंडसइंड बैंक में सवा तीन फीसदी, भारती एयरटेल में ढाई और हिंदुस्तान यूनिलिवर में दो प्रतिशत की तेजी रही।
 टीसीएस में सर्वाधिक एक फीसदी की गिरावट रही।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/stock-market-to-new-peak/article-12459"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/stock-market-to-new-peak.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मझौली और छोटी कंपनियों में भी तेजी रही (Share Market)</h1>
<ul>
<li>
<h3>विदेशों में लगभग सभी प्रमुख शेयर बाजार हरे निशान में रहे</h3>
</li>
</ul>
<h3></h3>
<p><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> विदेशों से मिले सकारात्मक संकेतों और घरेलू कंपनियों के (Share Market) अच्छे तिमाही परिणामों से उत्साहित निवेशकों की लिवाली से बीएसई का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सोमवार को लगातार दूसरे दिन बढ़त बनाते हुए रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुये। कारोबार की समाप्ति पर सेंसेक्स 259.97 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की तेजी के साथ 41,859.69 अंक और निफ्टी 72.75 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की तेजी के साथ 12,329.55 अंक के पर रहा। अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनैतिक तनाव कम होने से विदेशों में लगभग सभी प्रमुख शेयर बाजार हरे निशान में रहे।</p>
<h3>हिंदुस्तान यूनिलिवर में दो प्रतिशत की तेजी रही</h3>
<p style="text-align:justify;">साथ ही इंफोसिस तथा अन्य घरेलू कंपनियों के बेहतर तिमाही परिणाम आने से घरेलू बाजार में भी निवेशकों की धारणा मजबूत रही। रियलिटी, आईटी, टेक और दूरसंचार समूहों में सर्वाधिक तेजी रही। सेंसेक्स की कंपनियों में इंफोसिस के शेयर पौने पाँच प्रतिशत चढ़े। इंडसइंड बैंक में सवा तीन फीसदी, भारती एयरटेल में ढाई और हिंदुस्तान यूनिलिवर में दो प्रतिशत की तेजी रही। टीसीएस में सर्वाधिक एक फीसदी की गिरावट रही। अन्य एशियाई बाजारों में रही तेजी के बीच सेंसेक्स 188.49 अंक चढ़कर 41,788.21 अंक पर खुला और पूरे दिन हरे निशान में रहा।पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ता हुआ शुरूआती कारोबार में ही यह गत दिवस के मुकाबले करीब तीन सौ अंक की बढ़त बनाता हुआ 41,899.63 अंक पर पहुँच गया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अंत में यह 259.97 अंक की तेजी के साथ 41,859.69 अंक पर बंद हुआ।</li>
<li style="text-align:justify;">यह सेंसेक्स का उच्चतम बंद भाव है।</li>
<li style="text-align:justify;">कारोबार के दौरान इसका दिवस का निचला स्तर 41,720.76 अंक रहा।</li>
<li style="text-align:justify;">मझौली और छोटी कंपनियों में भी तेजी रही।</li>
</ul>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/business/stock-market-to-new-peak/article-12459</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2020 16:41:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नए साल पर आतिशबाजी से दूर रहेगा आस्ट्रेलिया</title>
                                    <description><![CDATA[एसीटी आपातकालीन सेवा एजेंसी की आयुक्त की सलाह पर लिया निर्णय |  Fireworks कैनबरा (एजेंसी)। आस्ट्रेलिया में जंगलों की आग के कारण राजधानी कैनबरा में नये साल की पूर्व संध्या पर आतिशबाजी (fireworks) का प्रदर्शन रद्द कर दिया है। इवेंट्स एसीटी ने नये साल का जश्न मनाने के लिए मंगलवार रात 9 बजे और 12 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/australia-will-stay-away-from-fireworks-on-new-year/article-12098"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/fireworks-in-australia.jpg" alt=""></a><br /><h3>एसीटी आपातकालीन सेवा एजेंसी की आयुक्त की सलाह पर लिया निर्णय |  Fireworks</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैनबरा (एजेंसी)।</strong> आस्ट्रेलिया में जंगलों की आग के कारण राजधानी कैनबरा में नये साल की पूर्व संध्या पर आतिशबाजी <strong>(<span lang="en" xml:lang="en">fireworks</span>)</strong> का प्रदर्शन रद्द कर दिया है। इवेंट्स एसीटी ने नये साल का जश्न मनाने के लिए मंगलवार रात 9 बजे और 12 बजे कैनबरा में आतिशबाजी के प्रदर्शन की योजना बनाई थी। लेकिन एसीटी आपातकालीन सेवा एजेंसी की आयुक्त जॉर्जिना व्हेलन द्वारा ऐसा नहीं करने की सलाह दिये जाने के बाद इसे रद्द कर दिया गया। सुश्री व्हेलन ने संवाददाताओं से कहा, ‘यह हमारे लिए समझदारी भरा निर्णय होगा कि हम एसीटी में आतिशबाजी न करें। हजारों लोगों के आतिशबाजी देखने के लिए कैनबरा के केंद्रीय व्यापारिक जिले में पहुंचने की उम्मीद थी। लेकिन सुश्री व्हेलन ने कहा कि इसमें बहुत बड़ा जोखिम था।</p>
<ul>
<li><strong>आस्ट्रेलिया में पिछले 10 दिन में जंगलों में लगी आग ने भीषण रूप अख्तियार कर लिया है। </strong></li>
<li><strong>आग के कारण दो लोगों की मौत हो गई, बड़ी संख्या में लोगों को घरबार छोड़ना पड़ा है। </strong></li>
<li><strong>पूर्वी गिप्सलैंड क्षेत्र से 30,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। </strong></li>
<li><strong>बढ़ते तापमान और तेज हवाओं के कारण भीषण दावानल की लपटें फैलने की आशंका </strong></li>
<li><strong>130,000 हेक्टेयर जंगलों को लील चुकी है आग</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">जंगलों में आग के प्रमुख कारण</h3>
<p style="text-align:justify;">आग लगने के लिए तीन चीजों की जरूरत होती है, इंधन, आक्सीजन और गर्मी। गर्मियों के मौसम में जब सूखा चरम पर होता है तो एक छोटी सी चिंगारी भी उग्र रूप धारण कर सकती है। आग प्राकृतिक रूप से आग लग सकती है। जैसे अधिक गर्मी की वजह से या फिर बिजली कड़कने से। हालांकि, जंगलों में आग लगने की अधिकतर घटनाएं इंसानों की वजह से होती हैं, जैसे आगजनी, कैम्पफायर, बिना बुझी सिगरेट फेंकना, जलता हुआ कचरा छोड़ना, माचिस या ज्वनशील चीजों से खेलना।</p>
<div class="QmZWSe">
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</div>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Dec 2019 14:39:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नये आरक्षण कोटे से क्या प्राप्त होगा?</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार द्वारा हाल ही में अगड़ी जातियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए शैक्षिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत का आरक्षण देने का निर्णय वास्तव में एक दिखावा है। इस संबंध में विधेयक का कांग्रेस ने राज्य सभा और लोक सभा में विरोध नहीं किया जिससे यह पारित हो गया। विश्लेषकों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">सरकार द्वारा हाल ही में अगड़ी जातियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए शैक्षिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत का आरक्षण देने का निर्णय वास्तव में एक दिखावा है। इस संबंध में विधेयक का कांग्रेस ने राज्य सभा और लोक सभा में विरोध नहीं किया जिससे यह पारित हो गया। विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने यह कदम तीन हिन्दी भाषी क्षेत्रों में विधान सभा चुनावों में हार के मद्देनजर उठाया कि कहीं उसका अगड़ी जातियों का मुख्य वोट बैंक नाराज न हो जाए। इस आरक्षण के लिए शर्त रखी गयी है कि परिवार की आय 8 लाख रूपए तक हो या परिवार के पास पांच एकड़ से कम कृषि भूमि हो। वास्तव में यह विधेयक मध्यम आय वर्ग के लिए लाया गया न कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए। आय के नए मानदंड से 90 प्रतिशत भारतीय इस नए आरक्षण के पात्र हो जाएंगे। अन्य पिछड़े वर्गों में क्रीमीलेयर के लिए 8 लाख की आय की सीमा रखी गयी है। तीसरा मानदंड एक हजार वर्ग फुट तक का घर रखा गया है। जबकि राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 20 धनी लोगों के पास भी 45.99 वर्ग मीटर औसत फ्लोर एरिया है जो लगभग 500 वर्ग फुट बैठता है। इसका तात्पर्य है कि देश की 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या नया आरक्षण कोटा के लिए पात्र हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसा कि सभी जानते हैं कि भारत में नियोजन में शहरी क्षेत्रों तथा मध्य और उच्च आय वर्ग पर बल दिया गया है। सरकार समाज के किसी भी वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान कर सकती है किंतु उसके लिए उसे ठोस प्रमाण देनें होंगे कि उस वर्ग का सरकारी नौकरी या शिक्षा में उचित प्रतिनिधित्व नहीं है। 1991 में इंदिरा साहनी मामले से लेकर अनेक मामलों में न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी वर्ग को आरक्षण देने के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में उस वर्ग के संबंध में विशिष्ट आंकडे होने चाहिए। इसलिए यह नया आरक्षण कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध जाता है और इस बात की संभावना है कि न्यायालय इसके पक्ष में निर्णय न दे। नरसिम्हा सरकार ने 1991 में कार्यकारी आदेश के माध्यम से उच्च जातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था किंतु उच्चतम न्यायालय ने इसे अवैध घोषित कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए मोदी सरकार अब संविधान संशोधन लेकर आयी और इस तत्थ को ध्यान में रखते हुए संविधान के बुनियादी ढांचे में सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण देने की गुंजाइश है किंतु लगता है न्यायालय इसे भी स्वीकार नहीं करेगा। इस संविधान संशोधन के बाद आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो गयी है जबकि न्यायालय ने आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित कर रखी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि संविधान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अलग वर्ग नहीं माना गया है और इसीलिए सरकार को अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन करना पड़ा और जब उच्चतम न्यायालय इसकी जांच करेगा तो शायद यह कानूनी कसौटी पर खरा न उतरे क्योंकि न्यायालय ने बार बार कहा है कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि तमिलनाडू और महाराष्ट्र में क्रमश: 69 ओर 68 प्रतिशत आरक्षण है। कुछ अन्य राज्यों जैसे हरियाणा ने 67 प्रतिशत, तेलंगाना ने 62 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश ने 55 प्रतिशत और राजस्थान ने 54 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रस्ताव किया है। अब तक आरक्षण सामाजिक और शैक्षिक पिछडेÞपन के आधार पर दिया जाता रहा है और संविधान के अनुचछेद 16 ;4द्ध में सामाजिक पिछडेÞपन का उल्लेख है। शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ापन सामाजिक पिछड़ेपन को बढ़ावा दे सकता है किंतु यह अलग है। अगड़ी जातियों के लिए आरक्षण देने की यह नीति वह भी विशेषकर मध्यम आय वर्ग को आरक्षण देने का यह प्रावधान वास्तव में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को समान अवसर देने के उद्देश्य को पूरा नहीं करता है। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों तथा बाद में अन्य पिछडेÞ वर्गों को आरक्षण देने का मूल उद्देश्य उनकी दशा में सुधार करना था। कुछ लोगों का मानना है कि ब्राहमण, क्षत्रिय, खत्री, कायस्थ और बनिया आदि वर्गों को ऐसा लाभ देना सामाजिक न्याय की दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। तथापि अगड़ी जातियों में मराठा, जाट, गुज्जर, और पटेल जैसी अन्य जातियों को आरक्षण के लाभों के लिए चुना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान आरक्षण से कुछ सामाजिक समूहों को लाभ मिलेगा। जो आरक्षण प्रणाली का एक वोट बैंक की राजनीति के रूप में उपहास करता है। विडंबना यह है कि तथाकथित आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों द्वारा आरक्षण के पात्र होने के लिए दावे प्रतिदावे करने का मंच तैयार हो गया है और इससे सामाजिक और राजनीतिक तनाव पैदा हो सकता है। वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह घोषणा चुनावों से मात्र 100 दिन पूर्व की गयी है। अत: यह राजनीति प्रेरित है। यह राजग सरकार की उस हताशा को भी दशार्ता है कि वह रोजगार के अवसर सृजित नहीं कर पायी तथा बेरोजगारी और अर्ध बेरोजगारी बढ़ी है। अब पिछड़ी जातियां मांग कर सकती हैं कि उनके आरक्षण कोटे को उनकी जनसंख्या के अनुसार बढ़ाया जाए। कैथोलिक बिशप कांफ्रेस आॅफ इंडिया ने इस बात पर खेद व्यक्त किया है कि शिक्षा और रोजगार में अनुसूचित जाति मूल के ईसाइयों और मुसलमानों को आरक्षण नहीं दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उसने संविधान 124वां संशोधन विधेयक 2019 को जल्दबाजी में पारित करने पर चिंता व्यक्त की और प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि अनुसूचित जातियों ओर जनजातियों के लिए आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में बढ़ाया जाए। समाजशास्त्रियों के एक वर्ग का कहना है कि आरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिए और इसका लक्ष्य गरीब तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की दशा में सुधार करना होना चाहिए। वर्तमान प्रावधान के संबंध में बेहतर होता कि आय की सीमा दो या ढ़ाई लाख रखी जाती जिससे आरक्षण का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों या निम्न आय वर्गों को मिलता। वर्तमान प्रावधान का कोई आर्थिक औचित्य नहीं है और शायद उच्चतम न्यायालय इसे स्वीकार न करे। इससे स्पष्ट होता है कि हमारे देश के नेता और योजनाकार वास्तव में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की कोई चिंता नहीं करते जो वास्तव में अपनी दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कृषि तथा ग्रामीण संकट बताता है कि इन लोगों की आय को रोजगार अवसर सृजित कर और ग्रामीण क्षेत्र की दशाओं में सुधार कर बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>धुर्जति मुखर्जी</strong></p>
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                <pubDate>Wed, 16 Jan 2019 19:29:32 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा को नये रास्ते बनाने होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[जबसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की कमजोर स्थिति सामने आयी है, एक शीर्ष वर्ग पार्टी के भीतर थोड़ा ठहरकर अपने बीते दिनों के आकलन और आने वाले दिनों के लिये नये धरातल को तैयार करने की वकालत करने लगा है। इन पांच राज्यों के चुनाव के परिणाम एवं लोकसभा चुनाव की दस्तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">जबसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की कमजोर स्थिति सामने आयी है, एक शीर्ष वर्ग पार्टी के भीतर थोड़ा ठहरकर अपने बीते दिनों के आकलन और आने वाले दिनों के लिये नये धरातल को तैयार करने की वकालत करने लगा है। इन पांच राज्यों के चुनाव के परिणाम एवं लोकसभा चुनाव की दस्तक जहां भाजपा को समीक्षा के लिए तत्पर कर रही है, वही एक नया धरातल तैयार करने का सन्देश भी दे रही है। इस दौरान संघ के वरिष्ठ अधिकारी किशोर तिवारी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर मांग की है कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पार्टी की बागडोर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सौंपी जानी चाहिए। वरिष्ठ भाजपा नेता संघप्रिय गौतम ने भी मांग की है कि मौजूदा पार्टी नेतृत्व को तीन राज्यों में हार की जिम्मेदारी लेकर पद छोड़ देना चाहिए। लेकिन यह तो भविष्य की रचनात्मक समृद्धि का सूचक नहीं है। वर्तमान को सही शैली में, सही सोच के साथ सब मिलजुलकर जी लें तो विभक्तियां विराम पा जाएंगी। मोहरे फेंकना ही नहीं, खेलना भी सिखाना होगा। एक महासंग्राम की तैयारी पर ऐसा कुछ सोच सकते हैं जिसे परम्परा मानी जा सके। ऐसा कुछ कर सकते हैं जिसे इतिहास बनाया जा सके और ऐसा कुछ जीकर दिखाया जा सकता है जो औरो के लिये उदाहरण बन सके। गडकरी प्रवाह में आदमी भागता अवश्य है मगर सही रास्ता नहीं खोज पाता। भाजपा को सही रास्ता खोजना है, प्रतिकूल हवाओं को अनुकूल करना है तो नये रास्ते बनाने ही होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">संघ के नेताओं की मांग हो या केन्द्रीय मंत्री श्री नितीन गडकरी के स्वर हो या अन्य नेताओं के बयान- भाजपा में लोकसभा चुनाव से पूर्व व्यापक बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है। पार्टी में संगठन मंत्री रहे संजय जोशी को सक्रिय करने की कोशिशें भी जोर पकड़ रही है। इन बढ़ती चचार्ओं एवं स्वरों का अर्थ पार्टी में अन्तर्कलह या विद्रोह की स्थिति को कत्तई नहीं दर्शा रहा है, बल्कि आने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति सुदृढ़ बने, इसकी जद्दोजहद ही दिख रही है। उद्देश्यों को सुरक्षा देने वाली उन दीवारों से भाजपा को सुदृढ़ बनाने का प्रयत्न करना होगा जो हर आघात को झेलने की शक्ति दे। इन दिनों नितिन गडकरी चचार्ओं में हैं। वे मोदी सरकार के महज एक मंत्री भर नहीं हैं। वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं और उस परिवार से आते हैं, जिसकी जड़ें आरएसएस से जुड़ी रही हैं। एक वक्त वे अपने निजी व्यवसाय की वजह से मीडिया की सुर्खियों में रहे और उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद गंवाना तक पड़ा था। इस वक्त वे अपने बयानों की वजह से चर्चा में हैं। उन्हें अपने हर बयान पर सफाई देनी पड़ रही है। लेकिन उनके बयान भाजपा के लिये अतीत को खंगालने का एवं भविष्य के लिए नये संकल्प बुनने की आवश्यकता को उजागर कर रहे हैं। देखना यह है कि उनके बयान क्या संदेश देकर जा रहा है और उस संदेश का क्या सबब है।</p>
<p style="text-align:justify;">गडकरी ने पंडित नेहरू की तारीफ करते हुए कहा कि सिस्टम को सुधारने के लिए दूसरों की बजाए पहले खुद को सुधारना चाहिए। खुद को सुधारने का अर्थ है कि पार्टी एवं सरकार में नया धरातल एवं सोच तैयार हो। गडकरी ने असहिष्णुता को लेकर भी अपने विचार रखे और कहा कि सहनशीलता और विविधता में एकता भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पहलू है। जवाहर लाल नेहरू कहते थे- इंडिया इज नॉट नेशन, इट इज ए पॉपुलेशन। उनका यह भाषण गडकरी को बहुत पसंद है। उनका मानना है कि अगर कोई सोचता है कि उसे सब पता है तो वह गलत है। विश्वास और अहंकार में फर्क होता है। आपको खुद पर विश्वास रखना चाहिए, लेकिन अहंकार से दूर रहना चाहिए। गडकरी ने यह भी कहा कि राजनीति सामाजिक आर्थिक बदलाव का कारक है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है, लेकिन अगर सामाजिक आर्थिक बदलाव नहीं होता है, देश और समाज की प्रगति नहीं होती है तो आपके सत्ता में आने और सत्ता से जाने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए। आप बहुत अच्छे और बहुत प्रभावशाली हो सकते हैं, लेकिन अगर आपके साथ लोगों का समर्थन नहीं है तो आपके अच्छे या प्रभावशाली होने का कोई मतलब नहीं है। दिशाहीनता और मूल्यहीनता बढ़ती रही है, प्रशासन चरमरा रहा था। भ्रष्टाचार के जबड़े खुले थें, साम्प्रदायिकता की जीभ लपलपा रही थी और दलाली करती हुई कुर्सियां भ्रष्ट व्यवस्था की आरतियां गा रही थीं। उजाले की एक किरण के लिए आदमी की आंख तरस रही थी और हर तरफ से केवल आश्वासन बरस रहे थे। सच्चाई, ईमानदारी, भरोसा और भाईचारा जैसे शब्द शब्दकोषों में जाकर दुबक गये थे। व्यावहारिक जीवन में उनका कोई अस्तित्व नहीं रह गया था। इस विसंगतिपूर्ण दौर में भाजपा पर लोगों ने विश्वास किया, इस विश्वास का खंडित होना आज भाजपा को गंभीर मंथन के लिये विवश कर रहा है। आखिर ऐसे क्या कारण बने? उन कारणों को खोजकर उन्हें दूर करना होगा। भाजपा को अपनी हैसियत को नहीं भूलना है। उसे भूलने का अर्थ होगा अपने कतृत्व के कद को छोटा करना, स्वयं की क्षमताओं से बेपरवाह रहकर औरों के हाथों का खिलौना बनना।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-ललित गर्ग-</strong></p>
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                <pubDate>Fri, 04 Jan 2019 10:25:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देशभर में नए साल का जश्न, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली(सच कहूँ)। घडी की सुईयों ने जैसे ही बारह बजाए वैसे ही पूरा देश नए साल के आगमन की खुशी में जश्न मनाने में डूब गया। वर्ष 2018 को अलविदा कर वर्ष 2019 का स्वागत करने की खुशी का इजहार लोगों ने अपने-अपने अंदाज में किया। नेताओं से लेकर अभिनेताओं तक नववर्ष की बधाईयां […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-year-celebration-across-the-country/article-7151"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-01/happy-new-year.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(सच कहूँ)।</strong> घडी की सुईयों ने जैसे ही बारह बजाए वैसे ही पूरा देश नए साल के आगमन की खुशी में जश्न मनाने में डूब गया। वर्ष 2018 को अलविदा कर वर्ष 2019 का स्वागत करने की खुशी का इजहार लोगों ने अपने-अपने अंदाज में किया। नेताओं से लेकर अभिनेताओं तक नववर्ष की बधाईयां दे रहे हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने इस मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।नए साल का आगाज हो गया है।भारत में नए साल का जोरदार स्वागत किया गया। दिल्ली से लेकर शिमला और गोवा में जबरदस्त अंदाज में लोगों ने नववर्ष का स्वागत किया। न्यूजीलैंड में सबसे पहले 2019 की शुरुआत हुई और इस मौके पर जमकर जश्न मनाया गया। न्यूजीलैंड के बाद ऑस्ट्रेलिया में नए साल की शुरुआत हुई।</p>
<h2>पीएम मोदी ने सोमवार को ट्वीट कर न्यू ईयर की शुभकामनाएं दीं</h2>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने सोमवार को ट्वीट कर न्यू ईयर की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘सभी को 2019 की शुभकामनाएं। मैं कामना करता हूं कि ये साल सभी के जीवन में खुशियां, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लेकर आए।’राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने न्यू ईयर की बधाई दी। उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! वर्ष 2019 में सभी देशवासियों और पूरे विश्व समुदाय के जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और उल्लास का संचार होता रहे।’</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jan 2019 09:34:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक अप्रैल से नए मानकों पर तय होंगी होम लोन और ऑटो लोन की ब्याज दरें</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई ने प्रस्तावित किया है कि (April  new  interest rates of home loans and auto loans.) अगले साल एक अप्रैल से पर्सनल, होम, ऑटो और सूक्ष्म एवं छोटे उद्यमों (एमएसई) के कर्जों पर फ्लोटिंग ब्याज दरें रेपो दर या ट्रेजरी यील्ड जैसे बाहरी मानकों से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/april-new-interest-rates-of-home-loans-and-auto-loans/article-6844"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/home-lone.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)।</strong> अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई ने प्रस्तावित किया है कि<strong> (April  new  interest rates of home loans and auto loans.)</strong> अगले साल एक अप्रैल से पर्सनल, होम, ऑटो और सूक्ष्म एवं छोटे उद्यमों (एमएसई) के कर्जों पर फ्लोटिंग ब्याज दरें रेपो दर या ट्रेजरी यील्ड जैसे बाहरी मानकों से जोड़ी जाएंगी। गौरतलब है कि आरबीआई ने बीते दिन हुई अपनी समीक्षा बैठक में नीतिगत ब्याज दरों को यथावत रखा है।जानकारी के लिए आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ने एमसीएलआर प्रणाली की समीक्षा के लिए एक आंतरिक अध्ययन समूह का गठन किया था और इसी समूह ने फ्लोटिंग ब्याज दरों को बाह्य मानकों से जोड़ने का सुझाव दिया है।</p>
<h3>अंतिम दिशानिर्देश को इस महीने के अंत में जारी किया जाएगा</h3>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान समय में बैंक अपने कर्ज पर दरों को प्राइम लेंडिंग रेट (पीएलआर), बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (बीपीएलआर), बेस रेट तथा अपने कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) जैसे आंतरिक मानकों के आधार पर तय करते हैं। केंद्रीय बैंक के ‘विकासात्मक और नियामकीय नीतियों पर बयान’ में कहा गया है कि बाहरी मानकों से ब्याज दर को जोड़े जाने को लेकर अंतिम दिशानिर्देश को इस महीने के अंत में जारी किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया, “यह प्रस्तावित किया जाता है कि पर्सनल या होम एवं ऑटो लोन तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए सभी नई फ्लोटिंग ब्याज दरें एक अप्रैल से (रिजर्व बैंक की ओर से तय) रेपो दर या 91/182 (91 दिन/182 दिन) के ट्रेजरी बिल (सरकारी बॉण्डों) पर यील्ड (निवेश-प्रतिफल) या फाइनेंशियल बेंचमार्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एफबीआईएल) की ओर से तय की जाने वाली किसी अन्य मानक बाजार ब्याज दर से संबद्ध होंगी।”</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Dec 2018 10:25:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टैक्स चोरी रोकने की नई तैयारी, E-way बिल को FASTag से जोड़ेगा राजस्व विभाग</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। राजस्व विभाग ई-वे बिल को एनएचएआई (NHAI) के फास्टैग (FASTag) सिस्टम से लिंक करने की योजना बना रहा है। ई-वे बिल को दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMICDC) के FASTag और लॉजिस्टक्स डेटा बैंक (LDB) के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि सामानों की आवाजाही में तेजी लाई जा सके और टैक्स चोरी पर लगाम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-preparation-to-stop-tax-evasion/article-6664"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/tax-01.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> राजस्व विभाग ई-वे बिल को एनएचएआई (NHAI) के फास्टैग (FASTag) सिस्टम से लिंक करने की योजना बना रहा है। ई-वे बिल को दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMICDC) के FASTag और लॉजिस्टक्स डेटा बैंक (LDB) के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि सामानों की आवाजाही में तेजी लाई जा सके और टैक्स चोरी पर लगाम लगाई जा सके।</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक यह प्रस्ताव देशभर के भीतर लॉजिस्टिक लैंडस्केप में संचालन दक्षता में और सुधार लाने का काम करेगा। वर्तमान समय में विभिन्न एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने के संदर्भ में ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ तंत्र के तहत सामंजस्य की कमी देश में व्यवसाय को और आसान करने की स्थिति को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा ये देश की लॉजिस्टिक कंपनियों की लागत को भी प्रभावित कर रही है।</p>
<p>जिस प्रस्ताव पर राजस्व विभाग काम कर रहा है की मदद से उन बेईमान व्यापारियों की ओर से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की चोरी को रोकने में भी मदद मिलेगी, जो कि सप्लाई चेन में लूप होल का फायदा उठाते हैं। गौरतलब है कि ई-वे बिल को देशभर में 1 अप्रैल 2018 को लागू कर दिया गया था।</p>
<h2>क्या है ई-वे बिल</h2>
<p>अगर किसी वस्तु का एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर राज्य के भीतर मूवमेंट होता है तो सप्लायर को ई-वे बिल जनरेट करना होगा। अहम बात यह है कि सप्लायर के लिए यह बिल उन वस्तुओं के पारगमन (ट्रांजिट) के लिए भी बनाना जरूरी होगा जो जीएसटी के दायरे में नहीं आती हैं।</p>
<h2>क्या होता है ई-वे बिल में:</h2>
<p>इस बिल में सप्लायर, ट्रांसपोर्ट और ग्राही (Recipients) की डिटेल दी जाती है। अगर जिस गुड्स का मूवमेंट एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर एक ही राज्य के भीतर हो रहा है और उसकी कीमत 50,000 रुपए से ज्यादा है तो सप्लायर (आपूर्तिकर्ता) को इसकी जानकरी जीएसटीएन पोर्टल में दर्ज करानी होगी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Nov 2018 08:44:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट की नई पीठ आज से करेगी अयोध्या मामले में सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली(सच कहूँ)। सुप्रीम कोर्ट की नई पीठ अयोध्या मामले की सोमवार को सुनवाई कर सकती है। शीर्ष कोर्ट के समक्ष 2010 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं लंबित हैं। हाई कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन बराबर हिस्सों में तीनों पक्षकारों-भगवान रामलला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ayodhya-case-supreme-courts-new-bench-to-hear-today/article-6499"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/sc.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली(सच कहूँ)।</strong> सुप्रीम कोर्ट की नई पीठ अयोध्या मामले की सोमवार को सुनवाई कर सकती है। शीर्ष कोर्ट के समक्ष 2010 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं लंबित हैं। हाई कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन बराबर हिस्सों में तीनों पक्षकारों-भगवान रामलला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को बांटने का सुझाव दिया था।27 सितंबर को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुआई वाली पीठ ने दो-एक के बहुमत से आदेश दिया था कि विवादित भूमि के मालिकाना हक वाले दीवानी मुकदमे की सुनवाई तीन जजों की नई पीठ 29 अक्टूबर को करेगी।</p>
<p>पीठ ने नमाज के लिए मस्जिद को इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं मानने वाले इस्माइल फारूकी मामले में 1994 के फैसले के अंश को पुनर्विचार के लिए सात जजों की पीठ को भेजने से मना कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि विवादित जमीन पर मालिकाना हक का निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। इसलिए पिछले फैसले का मौजूदा मामले से कोई संबंध नहीं है।</p>
<p>अपना और मुख्य न्यायाधीश की ओर से फैसला लिखने वाले जस्टिस अशोक भूषण ने कहा था कि हमें वह संदर्भ देखना है, जिसमें पांच जजों की पीठ ने वह फैसला सुनाया था। हालांकि, पीठ में शामिल जस्टिस एस. अब्दुल नजीर ने अलग फैसला देकर कहा था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है या नहीं, इस पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विस्तृत विचार की जरूरत है।</p>
<h2>नई पीठ में कौन-कौन</h2>
<ul>
<li>– प्रधान न्यायाधीश : रंजन गोगोई</li>
<li>– जस्टिस : संजय किशन कौल और केएम जोसेफ</li>
</ul>
<h2>पिछली पीठ में कौन थे</h2>
<ul>
<li>– रिटायर्ड सीजेआइ : दीपक मिश्रा</li>
<li>– जस्टिस : अशोक भूषण और अब्दुल नजीर</li>
<li>ये हैं पक्षकार : रामलला विराजमान, हिंदू महासभा, वक्फ बोर्ड और अन्य।</li>
</ul>
<h2>अयोध्या मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं</h2>
<p>राम जन्मभूमि को लेकर संघ के विचारक इंद्रेश कुमार का कहना है कि जैसे काबा को बदला नहीं जा सकता, हरमंदिर साहब को बदला नहीं जा सकता, वेटिकन और स्वर्णमंदिर नहीं बदला जा सकता वैसे ही अयोध्या में रामजन्मभूमि का स्थान नहीं बदल सकता है। यह एक सत्य है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Oct 2018 08:20:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा में नई चेतना लाएगा ‘आनंदवार’</title>
                                    <description><![CDATA[कंधे पर भारी भरकम बस्ते का बोझ, एक हाथ में पानी की बोतल दूसरे हाथ में लंच बॉक्स के लिए धीमी गति से..थके थके से चलते पांव एवं मासूम चेहरों को देखते ही मन में पीड़ा होती है। हम उसे सभ्य, सुसंस्कृत, सुयोग्य नागरिक बनने की शिक्षा दे रहे हैं अथवा केवल कुशल भारवाहक बनने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/education-will-bring-new-consciousness-happiness/article-6009"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कंधे पर भारी भरकम बस्ते का बोझ, एक हाथ में पानी की बोतल दूसरे हाथ में लंच बॉक्स के लिए धीमी गति से..थके थके से चलते पांव एवं मासूम चेहरों को देखते ही मन में पीड़ा होती है। हम उसे सभ्य, सुसंस्कृत, सुयोग्य नागरिक बनने की शिक्षा दे रहे हैं अथवा केवल कुशल भारवाहक बनने का प्रशिक्षण? बचपन की मस्तियां, शैतानियां, नादानियां, किलकारियां, निश्छल हँसी, उन्मुक्तता, जिज्ञासा आदि अनेक बालसुलभ क्रियाओं को बस्ते के बोझ ने अपने वजन तले दबा दिया है। बचपन का सावन, कागज की कश्ती और बारिश के पानी के बालक केवल बातें ही सुनता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के बस्ते का लगातार बढ़ता हुआ बोझ एक समस्या के रूप में समाज के सामने है। आजादी के बाद से ही इस पर लगातार चिंतन मनन होता रहा है और लगभग सभी शिक्षा आयोगों, समितियों ने इसकी चर्चा की है। शिक्षा बालक के सर्वांगीण विकास का आधार है। ‘सा विद्या या विमुक्तये हो या विद्या ददाति विनयम’ मन बुद्धि और आत्मा के विकास की बात हो अथवा बालक की अंतर्निहित शक्तियों के प्रकटीकरण की बात। शिक्षा मूल रूप से जीवन का आधार है, शिक्षा के बारे में मूल भारतीय चिंतन यही है।<br />
एक शिक्षक के रूप में मैंने इस समस्या को निकट से अनुभव किया हैं ।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं पिछले 10 वर्षों से बस्ते के बोझ की समस्या को हल करने के लिए प्रयासरत हूं और इस अवधि में समाधान के रूप में दो विकल्प देश भर के शिक्षा प्रेमियों शिक्षाविदों , शिक्षकों और अभिभावकों के सामने रखे हैं। इन प्रयासों को एक बड़ा मुकाम मिला जब पिछले वर्ष दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं एनसीईआरटी के तत्वावधान में बस्ते की बोझ की समस्या के समाधान के लिए एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस कार्यशाला में मुझे देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों और अधिकारियों के सामने अपने सुझाव रखने का अवसर मिला</p>
<p style="text-align:justify;">।समस्या ही नहीं समाधान की भी चर्चा होनी चाहिए इस बात का अनुसरण करते हुए मैंने अपने दो सुझाव प्रस्तुत किये। ये सुझाव देश भर में चर्चा का विषय बने। एक सुझाव को देश के विभिन्न राज्यो द्वारा लागू किया है। साथ ही केंद्रीय विद्यालय संगठन ने देश भर में प्राथमिक कक्षाओं के लिए भी इस सुझाव को लागू किया है। अभी हाल ही में राजस्थान सरकार ने भी इस सुझाव को राज्य की स्कूल शिक्षा के लिए लागू किया है। यहां प्रस्तुत कर रहा हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">मेरा सुझाव है कि सप्ताह में एक दिन बस्ते की छुट्टी कर दी जाए। देश के विभिन्न भागों में कर्मचारियों के लिए “फाइव डे वीक” की योजना चलती है जिसमें सरकारी कार्यालय सप्ताह में 5 दिन ही खुलते हैं। यहां विद्यालय में शनिवार की छुट्टी भले न करें पर शनिवार को बस्ते की छुट्टी अवश्य कर देनी चाहिए अर्थात बच्चे एवं स्टाफ विद्यालय तो आएँ किंतु बस्ते के बोझ से मुक्त होकर व होमवर्क के दबाव के बिना। सहज प्रश्न खड़ा होता है कि यदि बच्चे बस्ता नहीं लाएँगे तो विद्यालय में करेंगे क्या? समाधान है सप्ताह में एक दिन बच्चे शरीर, मन, आत्मा का विकास करने वाली शिक्षा ग्रहण करेंगे। अपनी प्रतिभा का विकास करेंगे। शिक्षा शब्द को सार्थकता देंगे। और इस शनिवार को नाम दिया “आनंदवार” अर्थात शनिवार की शिक्षा बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ आनंद उल्लास और उमंग देने वाली भी हो। यह सुझाव एक प्रयास हैं बालक को तनाव मुक्त, आनंददायी, सृजनात्मक/ प्रयोगात्मक शिक्षा देने का।</p>
<p style="text-align:justify;">सुझाव स्वरूप यह कालांश योजना प्रस्तुत है जिनके आधार पर दिनभर की गतिविधिया सम्पन्न होगीं। प्रथम कालांश – योग, आसन, प्राणायाम – व्यायाम प्रार्थना सत्र के पश्चात पहला कालांश योग-आसन, प्राणायाम, व्यायाम का रहे। बालक का शरीर स्वस्थ रहेगा, मजबूत बनेगा तो निश्चित रूप से अधिगम भी प्रभावी होगा। जीवन-पर्यंत प्राणायाम-व्यायाम के संस्कार काम आएँगे। विश्व योग दिवस का जो प्रोटोकॉल है, वह भी लगभग 40 मिनिट का है, उसका अभ्यास हो सकता है। दूसरा कालांश – श्रमदान /स्वच्छता/ पर्यावरण संरक्षण इस कालांश में विद्यालय परिसर की स्वच्छता का कार्य, श्रमदान एवं पर्यावरण संबंधित कार्यों का निष्पादन होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विद्यालय में वृक्षारोपण, उनकी सार संभाल, सुरक्षा, पानी पिलाना, आवश्यकता होने पर कटाई-छंटाई, कचरा निष्पादन आदि कार्य। तीसरा कालांश – संगीत अभ्यास इस कालांश में गीत अभ्यास, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, प्रतिज्ञा, प्रार्थना का अभ्यास हो। उपलब्ध हो तो वाद्ययंत्र का अभ्यास और डांस क्लास (नृत्य अभ्यास) भी हम कालांश में करवाया जा सकता है। चतुर्थ कालांश- खेलकूद कुछ खेल इनडोर हो सकते है कुछ आउटडोर हो सकते है। अत्यधिक धूप की स्थिति में कक्षा कक्ष में ही बौद्धिक खेल, छोटे समूह के खेल इत्यादि हो सकते है। आनदं वार बच्चों के बस्ते के बोझ को कम करके शिक्षा को बहुआयामी बना सकता है। पांच दिन बिना भारी भरकम बस्ते के जमकर पढाई और छठे दिन शनिवार को व्यक्तित्व विकास, सजृनात्मकता अभिव्यक्ति। मौजूदा शिक्षा प्रणाली में बिना बदलाव के, बिना किसी वित्तीय भार के इस उपाय से शिक्षा को आनंददायी और विद्यालय परिसर को जीवन निर्माण केन्द्र बनाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>संदीप जोशी</strong></p>
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<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Sep 2018 09:05:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पुराने वायदों पर नई पॉलिश</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सन् 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने का वायदा फिर दोहराया है। यह वायदा पुराने वायदे पूरे करने की बजाय उसे चमकाकर नया रूप देना है। एनडीए ने अपने चुनाव मनोरथ पत्र में स्वामी नाथन कमिशन की सिफारिशों को लागू करने का वायदा किया था जो देश भर के किसान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/new-polish-on-old-futures/article-4352"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kisan-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सन् 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने का वायदा फिर दोहराया है। यह वायदा पुराने वायदे पूरे करने की बजाय उसे चमकाकर नया रूप देना है। एनडीए ने अपने चुनाव मनोरथ पत्र में स्वामी नाथन कमिशन की सिफारिशों को लागू करने का वायदा किया था जो देश भर के किसान संगठनों की मांग भी थी। यह वायदा इसी सरकार से पूरा होना चाहिए था। यदि स्वामीनाथन कमिशन की सिफारिशें लागू हो जातीं तो खेती संकट काफी हद तक दूर हो सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;">मौजूदा समय किसानों को आमदनी दोगुना होने के फिकर से ज्यादा फिकर खर्चे पूरे करने और थोड़ी बहुत आमदनी बढ़ाने का है। दोगुनी-तिगुनी आमदनी के वायदे प्रशासन में शगूफे बन गए हैं। आज किसान खुदकुशी कर रहे हैं। केन्द्र सरकार ही एक राज्य में वही फसल अन्य राज्यों के मुकाबले एक हजार रुपये मंहगी खरीद रही है। सारे देश के लिए एक खेती नीति क्यों नहीं बन रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर भी यदि सरकार की इच्छा किसानों की आमदनी दोगुना करने की है तो इसके लिए सन् 2022 तक पूरे पांच वर्षों का इंतजार क्यूं? कर्मचारियों का डीए तथा अन्य भत्ते हर साल बढ़ाये जाते हैं फिर किसान को लंबे समय इंतजार करने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए। कहने को किसानों को ‘अन्नदाता’ जैसे विशेषण से नवाजा जाता है पर किसान की हालत की तरफ गौर नहीं कि या जा रहा। यदि 2022 के राजनीति मायने देखे जाएं तो यह मौखिक चुनाव घोषणा पत्र ही है क्योंकि आमदनी दोगुना करने के वायदे से लोकसभा चुनाव 2019 के लिए वोट मांगने का मकसद स्पष्ट है।</p>
<p style="text-align:justify;">नि:संदेह किसानों को कर्ज माफी ही खेती संकट का एकमात्र हल नहीं। इसके लिए खेती के ढांचे को मजबूत करना जरूरी है, जिस में जमीन की सेहत को लेकर सस्ते बीज, खाद के साथ-साथ कीटनाशकों का जरूरत अनुसार उपयोग तथा मार्केटिंग पर जोर देना जरूरी है पर स्वामीनाथन कमिशन रिपोर्ट पर सरकार का स्पष्टीकरण नहीं आना हैरानीजनक है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान की जरूरतों को सरकारी कर्मचारियों की तरह देखने की आवश्यकता है। खेती फसलों के भाव से ना तो किसान संतुष्ट हैं तथा ना ही वो खेती विशेषज्ञ जिनसे सरकार सलाह लेती है। खेती संबंधी फै सले राजनीति नुक्तों की बजाय अर्थ शास्त्री नुक्ते से लिए जाएं तो खेती संकट का हल निकल सकता है। किसानों को दोगुना या तिगुनी आमदनी की जरूरत नहीं बल्कि खेती फसलों को थोक भाव कीमत सूचक से जोड़ने की है। खेती संकट के हल के लिए पांच वर्ष मोंने किसी भी तरह जायज नहीं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">HINDI NEWS </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">FACEBOOK</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">TWITTER</a> पर फॉलो करें।</strong></h4>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/editorial/new-polish-on-old-futures/article-4352</link>
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                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 09:23:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप ने चीनी उत्पादों पर नये शुल्क लगाने की दी धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की थी घोषणा वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका ने चीन के साथ व्यापारिक युद्ध में ‘जैसे को तैसा’ की नीति पर अमल करते हुए उसके 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाने की धमकी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बयान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/trump-threatens-new-charges-on-chinese-products/article-4320"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/tramp-2.jpg" alt=""></a><br /><h1>चीन ने 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की थी घोषणा</h1>
<p><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने चीन के साथ व्यापारिक युद्ध में ‘जैसे को तैसा’ की नीति पर अमल करते हुए उसके 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाने की धमकी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को उन चीनी उत्पादों को चिह्नित करने को कहा है जिन पर नये शुल्क लगाये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम चीन द्वारा 50 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा के जवाब में उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘अगर चीन अपना रवैया बदलने और अमेरिकी उत्पादों पर लगाये गये शुल्क को वापस लेने को राजी नहीं हुआ तो कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चीन के उत्पादों पर ये शुल्क लागू किये जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन ने शनिवार को 50 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इससे पहले अमेरिका ने शुक्रवार को ही 50 अरब डॉलर के चीनी उत्पादों पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी जिसके जवाब में चीन ने यह कदम उठाया था। श्री ट्रंप ने बौद्धिक संपदा की चोरी तथा अनैतिक व्यापारिक गतिविधियों का हवाला देकर चीन से आयातित उत्पादों पर आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। चीन ने जवाबी कदम की चेतावनी दी थी। अब अमेरिका ने एक बार फिर चीन के उत्पादों पर आयात शुल्क लगाने की धमकी दी है।</p>
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<p>Trump, Threatens, New, Charges, Chinese, Products</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jun 2018 11:12:43 +0530</pubDate>
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