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                <title>जनता ने इमरान को स्वीकारा, हाफिज को नकारा</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में नई सरकार बनाने की कवायद प्रारंभ हो गई है। चुनाव परिणामों ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के मुखिया इमरान खान को सबसे ज्यादा सीटें देकर मजबूत बनाया है। इमरान खान के चुनाव प्रचार का अध्ययन किया जाए तो यही दिखाई देता है कि उनका पूरा चुनाव प्रचार भारत केन्द्रित रहा। पाकिस्तान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/people-accept-imran-reject-hafeez/article-5036"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/emrane.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में नई सरकार बनाने की कवायद प्रारंभ हो गई है। चुनाव परिणामों ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के मुखिया इमरान खान को सबसे ज्यादा सीटें देकर मजबूत बनाया है। इमरान खान के चुनाव प्रचार का अध्ययन किया जाए तो यही दिखाई देता है कि उनका पूरा चुनाव प्रचार भारत केन्द्रित रहा। पाकिस्तान में हुए चुनाव परिणामों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही जा सकती है कि वहां की जनता ने आतंकियों को पूरी तरह से ठुकरा दिया है। इसका मतलब भी साफ है कि पाकिस्तान की जनता अब आतंकवाद से मुक्ति चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
पाकिस्तान के चुनाव परिणाम ने दिखा दिया है कि आम चुनावों में क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की लहर चली। इस लहर में पाकिस्तान के कई दिग्गज परास्त हो गए। यहां तक कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज की ओर से प्रधानमंत्री पद का सपना देखने वाले नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ चुनाव हार गए हैं। वहीं, इस चुनाव में प्रधानमंत्री पद के दावेदार पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष बिलावल भुट्टो भी चुनाव हार चुके हैं। दिग्गजों के हारने के बाद यह साबित हो गया है कि जनता ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सामने नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल नवाज और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी सहित हाफिज सईद की पार्टी अल्लाह-हो-अकबर को पूरी तरह से धराशाई कर दिया है। हालांकि पूरे चुनाव प्रचार के दौरान जहां नवाज शरीफ को भ्रष्टाचारी नेता के रुप में प्रचारित किया गया, वहीं भारत विरोधी स्वरों का भी बोलबाला रहा। यह सही है कि पाकिस्तान में ज्यादातर सेना ने अपनी मनमानी की है। वहां सेना ने कई बार जबरदस्ती सत्ता को अपने हाथ में लिया है। इसे लोकतंत्र का गला घोंटने की संज्ञा दी जाए तो भी ठीक ही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
पाकिस्तान में अगर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के मुखिया इमरान खान प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होते हैं, तो यह भारत के लिए काफी मुश्किल खड़ी कर सकता है, क्योंकि इमरान खान के बारे में हमेशा यही कहा जाता है कि वे पाकिस्तान की सेना के साथ मिलकर अपनी रणनीति बनाते हैं। यह हम जानते हैं कि पाकिस्तान की सेना भारत के विरोध में आतंकियों जैसे कदम उठाती रही है, यहां तक कि भारतीय सीमा में आतंकियों की घुसपैठ कराने में पूरा सहयोग करती है। ऐसे में यह स्वाभाविक ही है कि इमरान खान पाकिस्तान की सेना के साथ ही अपनी सरकार चलाते हुए दिखाई देंगे। वैसे इमरान खान का यह कदम राजनीतिक मायनों में बहुत ही महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि अभी तक पाकिस्तान में यही देखने में आया है कि वहां की सरकार को सबसे ज्यादा खतरा सेना से ही होता है। सेना ने पाकिस्तान में कई बार तख्तापलट जैसे कार्य करके खुद ही सत्ता का संचालन किया है। अब इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनेंगे तो यह तय है कि इमरान को तख्तापलट जैसी स्थितियों का सामना नहीं करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
पाकिस्तान में इमरान खान को लेकर एक बात जगजाहिर है कि उनके संबंध सेना और आतंकियों के सरगनाओं से काफी मधुर हैं। यही सरकार के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। यह इमरान खान की रणनीति का ही हिस्सा है कि उन्होंने एक तीर से कई निशानों को पहले ही साध लिया है। आतंकियों पर पाकिस्तान की ओर से की गई सैन्य कार्यवाहियों पर इमरान खान ने कई बार सवालिया निशान लगाए हैं। यह एक प्रकार से आतंकियों के पक्ष में उठाई गई आवाज को ही रेखांकित करता है। इसलिए कहा यह भी जा रहा है कि इन मुख्य चुनावों में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को सेना और आतंकियों का भी समर्थन मिला है। इमरान खान की यही बात इस बात को बल दे रही है कि वह भारत के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
यह बात सच है कि पाकिस्तान आतंकी देश है। पाकिस्तान सरकार द्वारा संरक्षण प्राप्त करने वाले वैश्विक आतंकियों के इरादों के चलते पूरे देश की बदनामी हुई। देश की बदनामी का मतलब वहां की जनता की बदनामी ही कही जाएगी। अब संभवत: पाकिस्तान की जनता ने इस बदनामी के दायरे से निकलने का मन बनाया है, आतंकी संगठनों के उम्मीदवारों को हरा दिया है। चुनावों में वैश्विक आतंकी हाफिज सईद ने जबरदस्ती चुनावों में भाग लिया, जबरदस्ती इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने हाफिज सईद के राजनीतिक मंसूबों को फलीभूत करने वाले इस कदम को रोक लगाकर उनकी पार्टी को मान्यता देने से साफ मना कर दिया। इसके बाद हाफिज सईद ने दूसरी पार्टी बनाकर 265 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। पाकिस्तान चुनाव के परिणामों ने एक प्रकार से हाफिज सईद को गहरा झटका दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के चुनाव परिणामों ने जिस प्रकार से परिणाम दिए हैं, वह हालांकि संदेहों को जन्म दे रहे हैं। चुनाव को संदेहास्पद मानने की आवाजें बाहर ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान में भी उठने लगी हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और नवाज शरीफ की पीएमएल एन ने तो चुनाव के परिणामों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि ऐसे डरावने चुनाव हमने कभी नहीं देखे। इसी प्रकार अमेरिका ने भी पाकिस्तान के चुनाव परिणाम पर संदेह व्यक्त किया है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को सबसे बड़ी पार्टी के रुप में स्थापित करना पाकिस्तानी राजनीतिक जगत में किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यह सही है कि पाकिस्तान में चुनाव प्रक्रिया के दौरान बड़े स्तर पर हिंसा हुई।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jul 2018 05:12:02 +0530</pubDate>
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                <title>सहजता से स्वीकारें हर बदलाव को</title>
                                    <description><![CDATA[जड़ता, जीवन्तता को खा जाती है और जो इसके सम्पर्क में आता है, जो अंगीकार करता है उसका खात्मा कर दिया करती है। इसलिए जीवन का हर क्षण और प्रत्येक व्यवहार जीवन्त होना चाहिए, तभी यह शाश्वत आनंद और चरम सुख प्रदान कर सकता है। परिवर्तन को सहज भाव से सहर्ष स्वीकार करने की आदत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/accept-all-changes-easily/article-442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/change-plant.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जड़ता, जीवन्तता को खा जाती है और जो इसके सम्पर्क में आता है, जो अंगीकार करता है उसका खात्मा कर दिया करती है। इसलिए जीवन का हर क्षण और प्रत्येक व्यवहार जीवन्त होना चाहिए, तभी यह शाश्वत आनंद और चरम सुख प्रदान कर सकता है। परिवर्तन को सहज भाव से सहर्ष स्वीकार करने की आदत डाल ली जाए, तो फिर हर बदलाव अपने आप में नवीन अनुभवों के साथ सुन्दर और सकारात्मक हो सकता है। हमेशा हर बदलाव अपने पूर्ण अनुकूल हो यह संभव नहीं है, लेकिन यदि परिवर्तन को जीवन की रोजमर्रा की सामान्य क्रियाओं की तरह मान लिया जाए तो यह उतना अनमना भी नहीं लगता जैसा कि औसत इंसान सोचता है।<br />
जो एक जगह बैठने और स्थिर रहकर कुछ फीट की परिधि को ही संसार मान लिया करता है, वह जिन्दगी भर बिना किसी रस्सी से खूंटे की तरह बंधा होकर रह जाता है। जीवन में आज हम जो कुछ हैं, उससे अधिक पा सकते हैं यदि हर परिवर्तन को अंगीकार कर लें।<br />
परिवर्तन के संदर्भ में यह स्पष्ट मान्यता है कि या तो खुद अपने आपको बदलें और सम सामयिक परिस्थितियों के अनुरूप अपने भीतर अनुकूलताएं पैदा करें। और यह नहीं कर पाएं तो हर प्रकार के परिवर्तन को सहजता एवं आनंदपूर्वक स्वीकार करने का माद्दा विकसित कर लें।<br />
सबसे सुन्दर और जीवट वाला इंसान वह है जो हर प्रकार के प्रवाह के अनुकूल होकर बहना सीख जाता है। उसे किसी से कोई शिकायत नहीं होती। किसी वस्तु या व्यक्ति से मोह नहीं होता। जो हो रहा है वह ठीक हो रहा है, यह मानकर ईश्वर की हर इच्छा को सहजतापूर्वक स्वीकार कर लिया करता है। ऐसे व्यक्ति के लिए चाहे कैसी भी परिस्थितियां सामने क्यों न आ जाएं, वह हमेशा मस्त रहता है और उसका जीवन आनंद से भरपूर रहता है।<br />
जो लोग परिवर्तन को सहजतापूर्वक स्वीकार करने के आदी नहीं होते, झिझकते रहते हैं, जब भी बदलाव की बयार आती है, अन्यमनस्क बने रहते हैं उन लोगों को भले ही कुछ समय के लिए परिवर्तन से राहत मिल जाए, लेकिन अन्ततोगत्वा अनचाहे परिवर्तन को भी विवश होकर स्वीकार करना ही पड़ता है। विवशता से स्वीकारा गया हर प्रकार का परिवर्तन दु:खद और अवसादी चरित्र वाला होता है और इससे आनंद पाने की कल्पना नहीं की जा सकती।<br />
कुछ लोग जिन्दगी भर यह चाहते हैं कि हम उन्हीं के होकर बने रहें, उन्हीं की गुलामी करते हुए नौकर-चाकरों और दास की तरह काम करते रहें, इसके सिवाय हमारी कोई जिन्दगी हो ही नहीं। बहुत बड़ी संख्या में हुनरमंद और बौद्धिक सम्पदा के धनी हुए हैं जो इन्हीं चन्द लोगों के मोहपाशों में जकड़े रहकर अपना सब कुछ गँवा बैठे और कइयों के लिए बुढ़ापा अभिशाप हो गया।<br />
बहुत सारे लोग प्रेम और मोह में फंस कर एक-दूजे के लिए जिन्दगी भर जीने के वायदों और दावों की बलि चढ़ गए और खूब सारे एक-दूसरे से किसी न किसी जमीन-जायदाद या तरह-तरह के संबंधों की वजह से जिन्दगी को रसहीन, गंधहीन और तत्वहीन कर बैठे।<br />
व्यक्तियों के घेरे में पड़कर मोहग्रस्त रहने वाले लोगों के सामने भी वर्तमान से अच्छे और श्रेष्ठ लोगों का आवागमन बना रहता है, किन्तु ये लोग पुरानों के मोह में इतने अधिक जकड़े हुए होते हैं कि कुछ नहीं कर पाते। कोई बंधक बना फिरता है और कोई नजरबंद होकर पड़ा रहता है।<br />
दुनिया हमारे देखने और जानने के लिए है और अरबों लोगों में हमारे लायक तथा हमारी मानसिकता वालों की भी कोई कमी नहीं है। एक बार परिवर्तन को स्वीकारने का मानस तो बनाएं। परिवर्तन खुश होकर स्वीकार कर लें तो अच्छी बात है अन्यथा मर-मर के भी इसे स्वीकार करना ही पड़ेगा, और यही हमारे लिए दु:ख का महान कारण बन सकता है।<br />
<em>डॉ. दीपक आचार्य</em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Dec 2016 09:06:50 +0530</pubDate>
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                <title>भिवानी: शिक्षा बोर्ड भी नेट बेकिंग से स्वीकार करेगा शुल्क</title>
                                    <description><![CDATA[10वीं,12वीं की आॅनलाईन पंजीकरण की तिथियां बढ़ाई Bhiwani, SachKahoon, News:  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा सैकेण्डरी एवं सीनियर सैकेण्डरी वार्षिक परीक्षा मार्च-2017 के विद्यालयी परीक्षार्थियों के लिए आॅनलाईन पंजीकरण की तिथियों में बढ़ोतरी कर दी है। पंजीकरण केवल आॅन-लाईन प्रक्रिया द्वारा ही होगा। परीक्षार्थी अपना परीक्षा शुल्क भी ई-चालान, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड व नेट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/education-board-also-accept-transaction-by-net-banking/article-417"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/haryan-board.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>10वीं,12वीं की आॅनलाईन पंजीकरण की तिथियां बढ़ाई</strong></p>
<p><strong>Bhiwani, SachKahoon, News:</strong>  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा सैकेण्डरी एवं सीनियर सैकेण्डरी वार्षिक परीक्षा मार्च-2017 के विद्यालयी परीक्षार्थियों के लिए आॅनलाईन पंजीकरण की तिथियों में बढ़ोतरी कर दी है। पंजीकरण केवल आॅन-लाईन प्रक्रिया द्वारा ही होगा। परीक्षार्थी अपना परीक्षा शुल्क भी ई-चालान, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड व नेट बैंकिग के द्वारा ही जमा करवा सकेंगे। सफल पंजीकरण/ शुल्क जमा करवाने पर, प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न हुई पंजीकरण व शुल्क की प्राप्ति की हार्ड प्रति निकलवाकर विद्यालय/संस्था अपने पास सम्भाल कर रखेंगे।<br />
बोर्ड अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिंह ने बताया कि 12वीं के परीक्षार्थियों के लिए बिना विलम्ब शुल्क समय अवधि 06 दिसम्बर से 08 दिसम्बर तथा 300 रू० विलम्ब शुल्क सहित समयावधि 09 दिसम्बर से 15 दिसम्बर तथा 1000रू० विलम्ब शुल्क सहित समयावधि 16 दिसम्बर से 22 दिसम्बर निर्धारित की गई है। 10वीं के परीक्षार्थियों के लिए बिना विलम्ब शुल्क समय अवधि 06 से 10 दिसम्बर तथा 100 रू० विलम्ब शुल्क सहित समयावधि 11 से 12 दिसम्बर तथा 300 विलम्ब शुल्क सहित समयावधि 13 से 19 दिसम्बर व 1000 रू० विलम्ब शुल्क सहित समयावधि 20 दिसम्बर से 26 दिसम्बर निर्धारित की गई है। बोर्ड अध्यक्ष ने आगे बताया कि पंजीकरण के लिए शिक्षा बोर्ड की वेबसाईट पर लॉग-आॅन करें। पंजीकरण की उक्त तिथियों से अभिप्राय सफल पंजीकरण के साथ-साथ निर्धारित परीक्षा शुल्क का बोर्ड के द्वारा नामित बैंक खातों में जमा होना है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Dec 2016 05:43:13 +0530</pubDate>
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