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                <title>कांग्रेस के कदावर नेता नवीन जिंदल नहीं लड़ेंगें चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[-कुरुक्षेत्र से नए चेहरे की तलाश, आज हो सकती है घोषणा सच कहूँ, देवीलाल बारना कुरुक्षेत्र। पिछले काफी दिनों से चल रही अटकलों के बाद मंगलवार को यह साफ हो गया कि कांग्रेस के कदावर नेता नवीन जिंदल अब कुरुक्षेत्र से चुनाव नहीं लडेंगें। इस बात की पुष्टि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने फोन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/naveen-jindal-will-not-contest-elections/article-8572"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/naveen-jindal.jpg" alt=""></a><br /><h2>-कुरुक्षेत्र से नए चेहरे की तलाश, आज हो सकती है घोषणा</h2>
<p><strong>सच कहूँ, देवीलाल बारना</strong><br />
<strong>कुरुक्षेत्र।</strong> पिछले काफी दिनों से चल रही अटकलों के बाद मंगलवार को यह साफ हो गया कि कांग्रेस के कदावर नेता नवीन जिंदल अब कुरुक्षेत्र से चुनाव नहीं लडेंगें। इस बात की पुष्टि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने फोन पर हुई बातचीत में भी की है। बताया जा रहा है कि अब कांग्रेस कुरुक्षेत्र से किसी अन्य कदावर नेता की तलाश मे है जो इस सीट को कांग्रेस की झोली में डाल सके। ऐसा माना जा रहा है कि नवीन जिंदल के चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद कांग्रेस किसी जाट चेहरे को इस सीट से चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में है। ऐसा भी हो सकता है कि नवीन जिंदल के स्थान पर किसी वैश्य समाज के उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारा जाए।</p>
<h2>आखिर क्या है नवीन जिंदल के चुनाव न लड़ने के कारण?</h2>
<p>दो बार कुरुक्षेत्र लोकसभा से चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवीन जिंदल चुनाव लड़ना नहीं चाहते। आम लोगों में चर्चा है कि आखिर ऐसे क्या कारण हैं कि नवीन जिंदल चुनाव ही नहीं लड़ना चाहते? ऐसा भी माना जा रहा है कि इस बार कुरुक्षेत्र लोकसभा से नवीन जिंदल भारी नजर आ रहे थे, इसके बावजूद चुनाव न लड़ने का फैसला कई सवाल खडेÞ कर गया है। हालांकि पिछले दिनों कुरुक्षेत्र लोकसभा में जनसभाओं के दौरान नवीन जिंदल ने माना था कि युवा उद्यमी के लिए राजनीति करना कोई आसान कार्य नही है।</p>
<p>वे यह भी कह गए थे कि रणदीप यदि चुनाव लड़ना चाहें तो उनका साथ देंगें। ऐसे में नवीन जिंदल कहीं न कहीं पहले ही मन बना चुके थे कि वे चुनाव नहीं लडेंगे। इसके बाद कई बार उनके चुनाव न लड़ने की बातें आई। इस दौरान नवीन जिंदल ने अपनी स्टेटमैंट में भी कहा कि वे चुनाव लडने के लिए तैयार हैं। लेकिन अंदरखाते उनकी चुनाव न लड़ने की ही बातें सामने आ रही थी।</p>
<h2>कांग्रेस किस नेता पर खेलेगी कुरुक्षेत्र से दांव</h2>
<p>नवीन जिंदल के चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद कांग्रेस किसी कदावर व पहचान वाले नेता को ही चुनाव मैदान में उतारना पसंद करेगी। रणदीप सुरजेवाला भी कह चुके हैं कि वे लोकसभा का चुनाव नही लडेंगें। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कलायत से आजाद विधायक जयप्रकाश का नाम टिकट के लिए सबसे उपर की लिस्ट में चल रहा है। जयप्रकाश की कुरुक्षेत्र लोकसभा में अच्छी पकड होने व एक जाट नेता होने के नाते पार्टी इन पर दांव खेल सकती है। इसके अलावा पूर्व मंत्री निर्मल सिंह भी कुरुक्षेत्र लोकसभा से उम्मीदवार हो सकते हैं। वहीं लाडवा से विधानसभा की तैयारी कर रहे संदीप गर्ग भी टिकट की दौड़ में हैं।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Apr 2019 19:56:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिड-डे-मील योजना: सात खंडों के 271 स्कूल मुखिया नहीं अपलोड कर रहे डाटा</title>
                                    <description><![CDATA[निदेशालय ने जताई आपत्ति, मांगा स्पष्टीकरण सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा। मिड-डे-मील योजना का डाटा आॅटोमेटिक मॉनिटरिंग सिस्टम पोर्टल (एएमएसपी) पर जिले के सात खंडों के 271 सरकारी स्कूलों के मुखिया, इन्चार्ज द्वारा अपलोड नहीं किया गया हैं। वर्किंग डे में विभाग द्वारा दिए गए नम्बर 15544 पर रजिस्टर्ड मोबाईल से मिड-डे-मील संबंधी जानकारी उपलब्ध न […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">निदेशालय ने जताई आपत्ति, मांगा स्पष्टीकरण</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> मिड-डे-मील योजना का डाटा आॅटोमेटिक मॉनिटरिंग सिस्टम पोर्टल (एएमएसपी) पर जिले के सात खंडों के 271 सरकारी स्कूलों के मुखिया, इन्चार्ज द्वारा अपलोड नहीं किया गया हैं। वर्किंग डे में विभाग द्वारा दिए गए नम्बर 15544 पर रजिस्टर्ड मोबाईल से मिड-डे-मील संबंधी जानकारी उपलब्ध न करवाने पर निदेशालय ने कड़ी आपत्ति जताते हुए जिला के सभी खंडों के स्कूल मुखिया व इंचार्ज से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिला के सात खंडों में कुल 829 स्कूल है। जिनमें से 558 स्कूल मुखिया अपना डाटा रोजाना अपलोड कर रहे है।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि 271 स्कूल ऐेसे है जहां के मुखिया मिड-डे-मील का डाटा एसएमएस नहीं कर रहे हैं। इनमें सरसा के सबसे अधिक 53 स्कूल है जो मिड-डे-मील की रिपोर्ट नहीं भेज रहे हैं। बता दें कि मिड-डे मील को लेकर लगातार शिकायतें आ रही थी। जिनमें समय पर मील नहीं दिए जाने, तो कहीं गुणवत्तापरक भोजन दिए जाने के मामले सामने रहे हैं। इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से पोर्टल शुरू किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">पोर्टल पर रोज मील की डिटेल स्कूल मुखियाओं को देनी होती है। इस रिपोर्ट में स्कूल मुखिया या इंचार्ज को राशन कितने बच्चों ने खाया और कितना बचा इसकी पूर्ण डिटेल पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। अब जब जिला के विद्यालयों के मुखिया, इन्चार्ज द्वारा प्रतिदिन एसएमएस क्यों नहीं भेजा जा रहा है, इस बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है और साथ ही जल्द से जल्द सभी खंडों का डाटा 100 प्रतिशत पूरा करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">रोजाना 15544 पर एसएमएस कर भेजनी होती है डिटेल</h2>
<p style="text-align:justify;">मिड-डे- मील को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से एसएमएस की सेवा भी शुरू की गई। इसमें स्कूल मुखियाओं को सभी मील की रोजाना की डिटेल 15544 पर एसएमएस करनी है। जिसके बाद यह आॅटोमेटिक पोर्टल पर पहुंच जाएगी। जबकि पोर्टल पर अपलोड के लिए पहले स्कूल मुखिया को रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। इसके बाद बीईओज को यह डाटा भेजना होगा। वहां से फिर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किस ब्लॉक में कितने स्कूल नहीं भेज रहे रिपोर्ट</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ब्लॉक का नाम,   कुल स्कूल,     रिपोर्ट करने वाले स्कूल,      रिपोर्ट न भेजने वाले स्कूल</strong><br />
बड़ागुढ़ा,             107,                  69,                                 38<br />
डबवाली,             133,                  92,                                41<br />
ऐलनाबाद,          97,                    66,                                31<br />
नाथूसरी ,           136,                  94,                                 42<br />
ओढां,                 83,                   52,                                  31<br />
रानियां,              126,                 91,                                  35<br />
सरसा,                145,                 94,                                  53</p>
<p style="text-align:justify;">‘‘जिला के उपजिला शिक्षा अधिकारी पवन सुथार ने बताया कि जिन स्कूलों के मुखिया द्वारा मिड-डे-मील संबंधी डाटा नहीं भेजा जा रहा, उनसे विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा है। जल्द से जल्द 100 प्रतिशत डाटा अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Feb 2019 18:54:26 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट महज खानापूर्ति न हो</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र की एनडीए सरकार अंतिम वर्ष का अंतरिम बजट पेश करेगी। किसान, शहरी व मध्यम वर्ग से लेकर मजदूर तक सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बढ़ रही महंगाई, घट रहा रोजगार, धीमी गति से चल रहे उद्योग इत्यादि ऐसे मुद्दे हैं जिससे देश की आर्थिकता में बाधा उत्पन्न हुई है। दरअसल सरकारों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">केंद्र की एनडीए सरकार अंतिम वर्ष का अंतरिम बजट पेश करेगी। किसान, शहरी व मध्यम वर्ग से लेकर मजदूर तक सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बढ़ रही महंगाई, घट रहा रोजगार, धीमी गति से चल रहे उद्योग इत्यादि ऐसे मुद्दे हैं जिससे देश की आर्थिकता में बाधा उत्पन्न हुई है। दरअसल सरकारों का बजट पेश करने का एक फैशन बन गया कि न कोई नया टैक्स लगाओ और न ही पुराने टैक्स बढ़ाओ। सरकार अपनी पूरी ऊर्जा टैक्स वृद्धि के बाद विरोध से बचने पर लगा देती है, जिस कारण सरकार आंकड़ों के हेरफेर से जनता व विपक्ष को उलझाना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले चार वर्षों में किसानों, मजदूर व गरीबों के लिए कोई राहत नहीं मिली, जिससे सीधा जनता को लाभ हो दूसरी तरफ बजट से आगे-पीछे ऐसे फैसले लिए जाते, जो सरकार की अपनी नीतियों के खिलाफ होते हैं। ताजा निर्णय उच्च वर्ग के पिछड़ों को आरक्षण का है, जिसमें 8 लाख से कम वार्षिक आमदन वाले व्यक्ति को पिछड़ा माना गया है। इस हिसाब से 5-7 लाख की आमदन वाले कर्मचारी को आमदन कर के दायरे से बाहर करना चाहिए। सरकार का अपना निर्णय ही इस बार मुश्किल बन सकता है। एक देश में दो नियम नहीं चल सकते। कर्मचारी वर्ग को बढ़ रही महंगाई के बावजूद आमदन कर में कोई राहत नहीं मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार मामूली सी राहत घुमा-फिरा कर देती है। तीन लाख के करीब प्रति माह वेतन और भत्ते लेने वाले सांसदों द्वारा वेतन में वृद्धि की मांग की जा रही है, तो 40-50 हजार रुपए लेने वाले कर्मचारी के वेतन में टैक्स कटौती क्यों? जहां तक कृषि का संबंध है, सरकार ही यह बात कहती है कि कृषि लागत खर्च बढ़ रहे हैं। कृषि मामलों पर मंथन करने के लिए बनाई गई समितियों पर अरबों रुपए खर्च होते हैं और यह खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद किसानों को कोई राहत नहीं मिली। सरकार अपने ही चुनावी मैनीफैस्टो में स्वामीनाथन आयोग की सिफारशें लागू करने का वायदा करती है फिर खुद ही हल्फिया बयान देकर असमर्थता व्यक्त करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जनता पिस रही है। राजनैतिक नेताओं की जायदाद दिनों दिन बढ़ रही हैं। उद्योग संबंधी नीतियां भी खत्म होने की कगार पर हैं। रोजगार के नाम पर अमीर वर्ग के लोग कर्जे ले रहे हैं, दूसरी तरफ बैंकों का एनपीए बढ़ता जा रहा है। कर्ज लेकर विदेश फरार होने का सिलसिला जारी है, जिससे देश में आर्थिक संकट गहरा गया है। बजट महज खानापूर्ति बनकर न रह जाए, इसीलिए लोग हितैषी, अर्थ शास्त्रीय व स्पष्ट नजरिए की जरूरत है। सरकार बजट से देश के विकास की तस्वीर खींच सकती है। देश का पैसा लूटने वालों पर लगाम कसी जाए और किसानों, मजदूरों, गरीबों को भीख की नहीं, बल्कि सहायता की जरूरत है। बजट में सरकार को जिम्मेवारी का एहसास होना चाहिए।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jan 2019 20:02:57 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर: सरकार कानून बनाए, कोर्ट के फैसले का और इंतजार नहीं कर सकते: विहिप</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व हिंदू परिषद ने कहा- हिंदू समाज सालों तक कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकता नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक इंटरव्यू में कहा कि राम मंदिर के मामले में न्याय प्रक्रिया (Ram Temple Government Can Not Make Law VHP) पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने पर विचार किया जाएगा। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">विश्व हिंदू परिषद ने कहा- हिंदू समाज सालों तक कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकता</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक इंटरव्यू में कहा कि राम मंदिर के मामले में न्याय प्रक्रिया (Ram Temple Government Can Not Make Law VHP) पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने पर विचार किया जाएगा। इसके बाद भाजपा के समर्थक दलों और संगठनों ने इस पर नाराजगी जताई। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इस मुद्दे को लेकर बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसने सरकार से मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की। इससे पहले मोदी ने कहा था कि सरकार संविधान के तहत ही काम करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, “हमने राम जन्मभूमि पर (Ram Temple Government Can Not Make Law VHP) प्रधानमंत्री का बयान देखा है। यह मामला 69 साल से कोर्ट में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है। अब यह सुनवाई 4 जनवरी को हो रही है, लेकिन जिस बेंच को सुनवाई करनी थी, उसका गठन नहीं हुआ है। अब यह फिर से सीजेआई की कोर्ट में आ गया है।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘संत तय करेंगे कि आगे क्या करना है’</h2>
<p style="text-align:justify;">आलोक कुमार ने कहा, “हमें लग रहा है कि सुनवाई अभी कोसों मील दूर है। ऐसे में विहिप का फैसला है कि हिंदू समाज सालों तक कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकता। हम चाहते हैं कि सरकार अध्यादेश लाकर भव्य मंदिर बनाए। इस मामले में आगे की बातचीत प्रयागराज में धर्म संसद होगी। वहां संत तय करेंगे कि हमें आगे क्या करना है।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘सांसदों ने मंदिर निर्माण का समर्थन किया’</h2>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ”हम देश के ज्यादातर सांसदों से मिले। उन्होंने संसद में कानून लाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने का समर्थन किया है। हिंदू समाज लंबे समय से लोकतंत्र की लड़ाई लड़ रहा है। संत समाज हमारे साथ खड़ा है। 31 जनवरी को धर्म संसद में संत जो निर्णय लेंगे, हम उसी पर आगे बढ़ेंगे।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘कांग्रेस के वकीलों ने मामले को लटकाया’</h2>
<p style="text-align:justify;">आलोक कुमार ने कहा- ”कांग्रेस के वकीलों की कोशिश है कि यह मामला कोर्ट में लटकता रहे। हमारे पास दोनों मामले खुले हैं कि संसद में कानून बने या सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई करे। प्रधानमंत्री ने भले ही हमारा समर्थन नहीं किया है, लेकिन हमें उन्हीं से उम्मीद है। हमने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">मोदी ने कहा था- तीन तलाक पर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हम अध्यादेश लाए</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा था कि राम मंदिर मुद्दे पर अध्यादेश लाने के बारे में न्याय प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही विचार किया जाएगा। तीन तलाक पर भी हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अध्यादेश लाए थे। कांग्रेस के वकील खलल पैदा कर रहे हैं, इसलिए अदालती कार्यवाही धीमी हो गई है। न्याय प्रक्रिया खत्म होने के बाद सरकार के तौर पर हमारी जो भी जिम्मेदारी होगी, हम वह करेंगे।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ram-temple-government-can-not-make-law-can-not-wait-for-court-verdict-vhp/article-7170</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Jan 2019 13:54:46 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>चीन में नया नियम: टैक्स नहीं चुकाया तो नहीं छोड़ पाएंगे देश</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग (एजेंसी)। नए साल से चीन की टैक्स कलेक्शन अथॉरिटी ने नया नियम बनाया है। इस नियम के तहत ऐसा कोई भी बिजनेसमैन, कंपनी या व्यक्ति जिस पर किसी भी तरह का टैक्स बकाया हो, वह देश छोड़कर नहीं जा सकेगा। इस डेटाबेस को पुलिस, बैंक, इमिग्रेशन, पासपोर्ट, एयपोर्ट और सी-पोर्ट जैसे विभागों के साथ भी साझा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/china-major-tax-evaders-can-not-leave-country/article-7152"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-01/tax.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग (एजेंसी)।</strong> नए साल से चीन की टैक्स कलेक्शन अथॉरिटी ने नया नियम बनाया है। इस नियम के तहत ऐसा कोई भी बिजनेसमैन, कंपनी या व्यक्ति जिस पर किसी भी तरह का टैक्स बकाया हो, वह देश छोड़कर नहीं जा सकेगा। इस डेटाबेस को पुलिस, बैंक, इमिग्रेशन, पासपोर्ट, एयपोर्ट और सी-पोर्ट जैसे विभागों के साथ भी साझा किया जाएगा। ये सभी विभाग इन बकायदारों पर नजर रखेंगे। ऐसे लोगों को देश छोड़ने की इजाजत भी नहीं होगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">शुरू में 10 लाख से ज्यादा टैक्स के बकाएदारों पर होगी कार्रवाई</h2>
<p style="text-align:justify;">नए नियम के दायरे में शुरुआत में ऐसे कारोबारी, कंपनियां और नौकरीपेशा लोग आएंगे, जिन पर 1 लाख युआन (10.26 लाख भारतीय रुपये) का टैक्स बाकी है। ऐसे बकायदारों की सभी जानकारी मसलन आई कार्ड, बैंक अकाउंट नंबर और पासपोर्ट डिटेल्स को टैक्स अथॉरिटी अपने ब्लैकलिस्ट डेटाबेस में डाल देगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विदेशी कर्मचारियों और विदेश में काम कर रहे चीनी नागरिक भी दायरे में</h3>
<p style="text-align:justify;">नए कानून के तहत अगर कोई विदेशी नागरिक अपने कारोबार या फिर नौकरी के सिलसिले में चीन में 183 दिन से ज्यादा ठहरता है तो वो उसकी पूरी कमाई टैक्स के दायरे में होगी। हालांकि इस प्रावधान पर अमेरिका और हॉन्गकॉन्ग ने विरोध जताया है। इनके अलावा विदेश में नौकरी कर रहे चीनी नागरिकों को भी चीन में इनकम टैक्स देना होगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">चीन में सिर्फ 2 फीसदी लोग देते हैं टैक्स</h2>
<p style="text-align:justify;">चीन की आबादी 138 करोड़ है। इनमें से 2.8 करोड़ लोग ही टैक्स देते हैं। अब टैक्स डिपार्टमेंट सरकारी आय बढ़ाने के लिए टैक्स दरें बढ़ाने की बजाय टैक्स कलेक्शन बढ़ाने पर ज्यादा जोर दे रहा है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jan 2019 09:41:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकतंत्र सिर्फ बड़ों का खेल नहीं है</title>
                                    <description><![CDATA[लोकतंत्र (Democracy is not just a game of elders) का मतलब केवल चुनाव सरकार के गठन या शासन से नहीं है लोकतंत्र की परिभाषा इससे व्यापक है जिसमें राज्य समाज और परिवार सहित हर प्रकार के समूह पर सामूहिक निर्णय का सिद्धांत लागू होता है। केवल राज्य के स्तर पर लोकतंत्र के लागू होने से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/democracy-is-not-just-a-game-of-elders/article-6861"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/vote-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लोकतंत्र<strong> (Democracy is not just a game of elders)</strong> का मतलब केवल चुनाव सरकार के गठन या शासन से नहीं है लोकतंत्र की परिभाषा इससे व्यापक है जिसमें राज्य समाज और परिवार सहित हर प्रकार के समूह पर सामूहिक निर्णय का सिद्धांत लागू होता है। केवल राज्य के स्तर पर लोकतंत्र के लागू होने से हम लोकतान्त्रिक नहीं हो जायेंगें इसे सामाज के अन्य संगठनों पर लागू करना भी उतना ही जरूरी है। इस सम्बन्ध में डॉ भीमराव अंबेडकर ने भी चेताया था कि भारत सिर्फ राजनीतिक लोकतंत्र न रहे बल्कि यह सामाजिक लोकतंत्र का भी विकास करे। सहभागिता लोकतंत्र का मूल तत्त्व है लेकिन हमारे यहां इसे मतदान तक ही सीमित कर दिया गया है, चुनाव के दौरान हम अपने प्रतिनिधियों को चुनते तो हैं लेकिन इसके बाद अपना नियंत्रण खो देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे यहां चुनाव और मतदान का आधार भी लोगों के वास्तविक जीवन से जुड़े मुद्दे नहीं होते हैं बल्कि यहां मुख्य रूप से ऐसे भावनात्मक और प्रतिगामी मुद्दे हावी होते हैं जिनका लोकतान्त्रिक मूल्यों से कोई मेल नहीं होता अलबत्ता कई मामलों में तो ये न्याय समानता और बंधुत्व जैसे हमारे संविधान के बुनियादी मूल्यों की धजियां उड़ाते दिखाई पड़ते हैं। शायद लोकतंत्र कि अपनी इसी समझ के कारण हम इसे बच्चों का खेल नहीं समझते हैं। भारतीय संविधान सभी बच्चों को कुछ खास अधिकार प्रदान करता है जिसके तहत बच्चों को सही ढंग से पालन पोषण आजादी इज्जत के साथ बराबरी अवसर व सुविधाएं पाने का अधिकार है। हालांकि 18 साल की उम्र से पहले वे वोट नहीं डाल सकते हैं लेकिन इससे एक नागरिक के तौर पर उनकी महत्वता कम नहीं हो जाती है हमारा संविधान बच्चों को वे सारे अधिकार भी देता है जो भारत का नागरिक होने के नाते किसी भी बालिग स्त्री पुरुष को दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक समाज के तौर पर हमारे बीच यह समझ जरूरी है कि हम बच्चों को भी एक ऐसी स्वंतंत्र इकाई के तौर पर स्वीकार करें जिनकी खुद सोच सकते हैं उनकी अपनी एक राय हो सकती है वे निर्णय भी ले सकते हैं और किसी भी विषय पर अपनी उम्र के हिसाब से उनका अपना स्वतंत्र मूल्यांकन भी हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कनवेंशन सीआरसी में भी बच्चे की सोच का सम्मान करने और उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देने की बात की गयी है। लेकिन दुर्भाग्य से हम बच्चों के सोचने विचारने और उनकी खुद को अभिव्यक्त करने कि उनकी क्षमता को लेकर हम जागरूक नहीं हैं इसके बदले हम इस बात पर यकीन करते हैं कि बच्चों में इतनी क्षमता नहीं होती है कि वे अपने बारे में सोच सकें या खुद की राय बना सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">हम चाहते हैं कि बच्चे हमारे द्वारा निर्धारित किये गये सांचे के अनुसार ढल जायें, परिवार और समाज में उनकी अभियक्ति को लेकर हम निरंकुश हैं और कभी कभी इससे असुरक्षित भी महसूस करते हैं। जबकि हकीकत ये है कि हर बच्चे का अपना एक खास व्यक्तित्व होता है और कई बार उनकी मौलिकता हमें एक नयी दिशा दे सकती है। यदि हम बच्चों के विचरों नजरिये और मैलिकता पर यकीन करेंगें तो इससे हमारी दुनिया ज्यादा बेहतर होगी। बच्चे को हमेशा से ही बड़ों का आदर करने कि सीख दी जाती है लेकिन इस सीख को रिवर्स करके बड़ों को इसे खुद पर भी लागू करने कि जरूरत है बड़ो को भी बच्चों के साथ उतने ही आदर सम्मानपूर्ण व्यवहार करना चाहिये जितना कि वे खुद के लिये बच्चों से उम्मीद करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बाल सहभागिता का अर्थ है बच्चों से सम्बंधित मसलों और निर्।ायों में बच्चों को शामिल करना यह एक प्रक्रिया है जिसमें बच्चों को जरूरी जानकारी देनाए उनके विचारों को अहमियत देना उन्हें इसे व्यक्त करने का मौका देनाए उनके विचारों को ध्यानपूर्वक सुननाए और उन्हें प्रभावित करने वाले निर्णयों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल करना है। दुर्भाग्य से हमारे समाज में बच्चों की सोच के लिये कोई मूल्य है इसलिये हमारे जैसे देशों में बाल सहभागिता को लेकर लोगों की सोच में बदलाव से करने की जरूरत है जिससे यह कवायद महज महज दिखावटी और कागजी बनकर ना रह जाये।</p>
<p style="text-align:justify;">हमें यह समझना होगा कि अगर बच्चों को मौका मिले तो वे खुद को अपनी पूरी स्वाभिकता और सरलता के साथ अभिव्यक्त करते हैं। उनकी यह मौलाकिता बहुमूल्य है जो हमारी इस दुनिया को और खूबसरत बना सकती है। बच्चे भले ही वोटर ना हों लेकिन वे इस मुल्क के वर्तमान बाशिंदे जरूर हैं उन्हें इसी नजरिये से देखने की जरूरत है। लोकतंत्र को लेकर हम बड़ों की समझ भले ही ही सीमित हो लेकिन वास्तव में इसका दायरा इतना व्यापक है कि इसमें इसमें परिवार स्कूल बच्चे और समाज के सभी संगठन शामिल है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>जावेद अनीस</strong></p>
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                <pubDate>Sat, 08 Dec 2018 08:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आधी रात के बाद किसानों ने खत्म किया आंदोलन, मांगें नहीं हुईं पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ)। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे देश भर के किसानों के प्रति रुख में नरमी लाते हुए केंद्र सरकार ने मंगलवार रात 12.40 बजे किसानों के जत्थे को दिल्ली में किसान घाट जाने की इजाजत दे दी। इसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच किया। इसके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/farmers-stopped-the-movement-demands-were-not-met/article-6103"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/kishan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ)। </strong>स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे देश भर के किसानों के प्रति रुख में नरमी लाते हुए केंद्र सरकार ने मंगलवार रात 12.40 बजे किसानों के जत्थे को दिल्ली में किसान घाट जाने की इजाजत दे दी। इसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच किया। इसके लिए गाजियाबाद एसएसपी ने बसों का इंतजाम भी किया। कुछ मांगों पर सहमति नहीं बनने के बावजूद किसानों ने आंदोलन खत्म कर अपने-अपने घर लौट जाने का फैसला किया।</p>
<h2>हमारा लक्ष्य यात्रा को पूरा करना था: नरेश</h2>
<p style="text-align:justify;">भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि, ‘फिलहाल किसान राजघाट और किसान घाट पहुंचकर लौट जाएंगे। बाकी बची मांगों के लिए सरकार को मांग पत्र दिया गया है, जिसके लिए सरकार ने समय मांगा है। लाठीचार्ज के लिए दिल्ली पुलिस ने माफी मांगी है।’ भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैट ने कहा कि, किसान घाट पर फूल चढ़ाकर हम अपना आंदोलन खत्म कर रहे हैं। 23 सितंबर को शुरू हुई ‘किसान क्रांति पदयात्रा’ को दिल्ली के किसान घाट में समाप्त करना पड़ा। चूंकि दिल्ली पुलिस ने हमें प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी, इसलिए हमने विरोध किया। हमारा लक्ष्य यात्रा को पूरा करना था जो किया गया है। अब किसान अपने गांवों की ओर वापस जा रहे हैं।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Oct 2018 09:46:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ओलांद के बयान पर बोली फ्रांस सरकार: राफेल डील में हमने नहीं चुनी भारतीय कंपनी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली(एजेंसी)। राफेल पर छिड़ी सियासी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है।पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद फ्रांस की वर्तमान सरकार ने कहा कि वह राफेल फाइटर जेट डील के लिए भारतीय औद्योगिक भागीदारों को चुनने में किसी भी तरह से शामिल नहीं थी। सरकार ने जोर देते हुए कहा कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/french-government-we-have-not-selected-indian-company-in-rafael-deal/article-6021"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/rafel.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> राफेल पर छिड़ी सियासी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है।पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद फ्रांस की वर्तमान सरकार ने कहा कि वह राफेल फाइटर जेट डील के लिए भारतीय औद्योगिक भागीदारों को चुनने में किसी भी तरह से शामिल नहीं थी। सरकार ने जोर देते हुए कहा कि फ्रांसीसी कंपनियों को करार करने के लिए भारतीय कंपनियों का चयन करने की पूरी आजादी है। फ्रांस सरकार का ये बयान तब आया है जब पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा कि राफेल डील के लिए भारत सरकार की ओर से अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस का नाम प्रस्तावित किया गया था और दसॉ एविएशन कंपनी के पास कोई और विकल्प नहीं था।</p>
<p>ओलांद के इस बयान के बाद देश में राजनीति फिर गर्मा गई है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलने का एक और कारण मिल गया. राहुल ने ओलांद के इस बयान को दोनों हाथों से लपका और बिना देरी किए पीएम मोदी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने बंद दरवाजे के पीछे निजी तौर पर राफेल डील पर बात की और इसमें बदलाव कराया।राहुल गांधी ने कहा कि फ्रांस्वा ओलांद को धन्यवाद, हम अब जानते हैं कि उन्होंने दिवालिया हो चुके अनिल अंबानी के लिए बिलियन डॉलर्स की डील कराई. प्रधानमंत्री ने देश को धोखा दिया है। उन्होंने हमारे सैनिकों की शहादत का अपमान किया है।</p>
<h3>कंपनी को पार्टनर चुनने की आजादी</h3>
<p>फ्रांस सरकार के बयान में आगे कहा गया कि भारत की अधिग्रहण प्रक्रिया के अनुसार, फ्रांसीसी कंपनियों को भारतीय कंपनियों को साझेदार चुनने की पूरी आजादी है। वे जिसे सबसे प्रासंगिक मानती हैं वे उसको चुन सकती हैं।फ्रांस सरकार ने कहा कि 36 राफेल विमानों की आपूर्ति के लिए भारत के साथ किए गए अंतर-सरकारी समझौते से विमान की डिलीवरी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में पूरी तरह से उसे अपने दायित्वों की चिंता है।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Sep 2018 08:13:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सावधान ! पनीर नहीं जहर खा रहे हैं आप?</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में हुआ बड़ा खुलासा सच कहूँ/इंद्रवेश भिवानी। सावधान ! सेहत ठीक करने के लिए आप जो पनीर खा रहे हैं, कहीं वो नकली तो नहीं है क्योंकि आजकल बाजार में मिलावटी मावा-पनीर का धंधा जोरों से चल रहा है। मिलावटखोर आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। भिवानी में भी इन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/careful-are-not-you-poisoned-cheese/article-5983"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/poisend-chgess.jpg" alt=""></a><br /><h1>स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में हुआ बड़ा खुलासा</h1>
<pre><strong>सच कहूँ/इंद्रवेश</strong>
<strong>भिवानी।</strong></pre>
<p style="text-align:justify;">सावधान ! सेहत ठीक करने के लिए आप जो पनीर खा रहे हैं, कहीं वो नकली तो नहीं है क्योंकि आजकल बाजार में मिलावटी मावा-पनीर का धंधा जोरों से चल रहा है। मिलावटखोर आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। भिवानी में भी इन दिनों रोहतक से लाया जा रहा मिलावटी पनीर होटलों में 150 रुपए किलो के हिसाब से बिक रहा है जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। भिवानी में स्वास्थ्य विभाग ने गुप्त सूचना पर ऐसे विक्रेता को पकड़ा है जो सप्रेटा दूध से पनीर तैयार कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">130 रुपये प्रति किलो पनीर लेकर वह 150 रुपए प्रति किग्रा. बेच रहा है। भिवानी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना मिली थी कि भिवानी-रोहतक रोड़ पर नकली पनीर बेचा जा रहा है जो कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने एफएसओ सुरेंद्र पूनिया के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया। टीम ने स्प्रेटा दूध का पनीर बेचने वाले को 10 किलो पनीर के साथ पकड़ लिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>इस तरह कर सकते हैं मिलावटखोरों की शिकायत</strong></p>
<p style="text-align:justify;">उपभोक्ताओं को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी आफ इंडिया की वेबसाइट पर जाना होगा। वेबसाइट पर सिटीजन कनेक्ट के नाम से एक सिंबल बना हुआ है। वहां पर उपभोक्ता को क्लिक करना होगा। उससे नया पेज खुल जाएगा। उसके बाद दिए गए निदेर्शों के मुताबिक कॉलम भरना होगा। फोटो अपलोड कीजिए और उसे भेज दीजिए। 15 दिन के भीतर स्थानीय अफसर शिकायत पर कार्रवाई कर देगा। इसकी जानकारी भी शिकायतकर्ता को दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">एफएसओ सुरेंद्र पूनिया ने बताया कि नकली पनीर की सूचना पर छापा मारा है। उन्होंने बताया कि ये पनीर रोहतक से यहां लाया जाता है। उन्होंने बताया कि ये पनीर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करता है। उन्होंने बताया कि स्प्रेटा दूध पर भी पाबंदी है,ऐसे में पनीर पर भी है। उन्होंने बताया कि यह पनीर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।</p>
<pre style="text-align:justify;"><strong>इस तरह करें असली पनीर की पहचान</strong></pre>
<p style="text-align:justify;">पनीर का एक छोटा सा टुकड़ा अपने हाथ पर मसल कर देख ले अगर यह टूट कर बिखरने लग जाए तो समझ लीजिए पनीर मिलावटी होता है क्योंकि इसके अंदर जो केमिकल होता है वह ज्यादा दबाब सह नहीं पाता और वह बिखरने लग जाता है। हमेशा एक बात और ध्यान रखें कि नकली पनीर हमेशा ही टाइट होगा वह एक रबड़ की तरह नहीं होता है। अगर आप कभी भी गलती से पनीर घर ला चुके हैं तो उसको थोड़ा सा पानी में उबालकर ठंडा कर लें जब वह ठंडा हो जाए उसके बाद कुछ बूंदें उसके ऊपर आयोडीन की डाल दें अगर पनीर का रंग नीला पड़ने लग जाए तो समझ लीजिए कि यह बहुत मिलावटी है। जब भी आप मिलावटी पनीर खाएंगे रबड़ की तरह खिंचता चला जाएगा इसलिए मिलावटी पनीर से बचें क्योंकि हमारे शरीर को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Sep 2018 12:16:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>&amp;#8230;कभी अस्त नहीं हो सकता ‘सच’ का सूरज</title>
                                    <description><![CDATA[12 महीने, 365 दिन या एक बरस। मुमकिन है, आप सबके लिए इन तीनों ही संज्ञाओं का एक ही रटा-रटाया (The sun of ‘truth)  अर्थ हो यानि महज ‘कलेंडर’ में बदलाव। लेकिन, हर गुजरते पल के साथ एक अनकही-अनसुनी-अंजानी सी ‘पीर’ सहने वाले किसी भी शख्स से चंद पल बतियाएंगे तो बखूबी मालूम चल जाएगा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/can-never-set-not-true-in-the-sun/article-5551"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/can-never-set-not-true-in-the-sun.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;"><strong>12 महीने, 365 दिन या एक बरस। </strong></h1>
<p style="text-align:justify;">मुमकिन है, आप सबके लिए इन तीनों ही संज्ञाओं का एक ही रटा-रटाया<strong> (The sun of ‘truth)</strong>  अर्थ हो यानि महज ‘कलेंडर’ में बदलाव। लेकिन, हर गुजरते पल के साथ एक अनकही-अनसुनी-अंजानी सी ‘पीर’ सहने वाले किसी भी शख्स से चंद पल बतियाएंगे तो बखूबी मालूम चल जाएगा कि, वक्त की ‘धार’ और ‘मार’, दोनों ही कितनी भयावह होती हैं? भारतवर्ष ही नहीं, वरन् समूचे विश्व में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अलौकिक प्रकाश बिखेरने वाली विशाल सेवाशील संस्था ‘डेरा सच्चा सौदा’ से जुड़े हर अनुयायी ने ऐसी परिस्थितियों को झेला है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात और है कि, अपने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अनन्य प्रेरणा और मार्गदर्शन की बदौलत ऐसे किसी भी व्यक्ति के मन में कभी किसी के प्रति द्वेष या निंदा का भाव उत्पन्न नहीं हुआ। हर संकट, हर मुश्किल, हर चुनौती से विचलित हुए बिना वे आज भी पूर्ण मनोयोग से मानवता मात्र की सेवा में जुटे हैं और नित प्रतिदिन ईश्वर से बस यही प्रार्थना करते हैं कि, परमपिता परमेश्वर सर्वजगत का कल्याण करें और राह से भटकने वालों को सदा के लिए सत्यता के प्रकाश से आलोकित कर दें।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरी दुनिया में डेरा सच्चा सौदा की ख्याति और लोकप्रियता की मिसाल यूं ही नहीं दी जाती। यह अपनी ही अनुकरणीय कार्य शैली से जन-जन की सेवा का आदर्श उदाहरण पेश करने वाली ऐसा आदर्श संस्था है, जिसके सेवादारों की संख्या स्वयं किसी विश्व कीर्तिमान से कम नहीं। आप महज क्षण भर के लिए सेवा के किसी भी प्रारूप की परिकल्पना भर करिए, डेरे के अनगिनत अनुयायियों की ओर से पूर्ण नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा के अनेक उदाहरण देखते ही देखते आपकी आँखों के आगे नुमायां हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यकीनन, मानव कल्याण के प्रति सत्त समर्पित इस संस्था के मार्गदर्शक परम पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से हासिल सकारात्मक दृष्टिकोण और आदर्श शिक्षाओं का ही काबिल-ए-तारीफ प्रतिफल है कि, तमाम चुनौतियों के बावजूद आज भी अनुयायियों का यह विशाल समूह पूरी लगन एवं निष्ठाभाव से अपने दायित्व निर्वहन में जुटा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वह भी तब, जब गत वर्ष कमोबेश इन्हीं दिनों में, समाज विरोधियों की पूज्य गुरु जी के खिलाफ रची गई साजिश का घिनौना रूप सामने आया था, ताकि उनके अनगिनत सेवादारों का मनोबल पूरी तरह समाप्त हो जाए और वे ‘व्रजआघात’ सरीखे इस असहनीय कष्ट को सहने योग्य तक न रह सकें।<br />
बाकायदा, गहन ‘रिसर्च’ और सुनियोजित ‘पटकथा’ का सहारा लेते हुए ऐसे तमाम शर्मनाक तथा मनमाने अनर्गल आरोप पूज्य गुरुजी पर लगाए गए, जिनकी रंगत पूरी तरह ‘स्याह’ होने के बावजूद यह कांच की मानिंद बखूबी साफ हो गया कि, इस देश में अब ‘सच’ का साथ देने वालों का कोई खैरख्वाह नहीं। इतना ही नहीं, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाले मीडिया के एक बड़े वर्ग की भूमिका भी इस पूरे प्रकरण से सवालों में घिर गई, जब महज ‘सुर्खियां’ बटोरने या ‘टीआरपी’ में खुद को सबसे आगे बनाए रखने की होड़ में हर किस्म की नैतिकता से लेकर सदाचार, परोपकार, सेवाभाव, जन कल्याण और सत्यता सरीखे समस्त आदर्श मानवीय मूल्यों को सिरे से दरकिनार कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">न कोई ठोस प्रामाणिक तथ्य और न ही किसी प्रकार की मान-मर्यादा। ऐसे हर पहलू को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए मीडिया का एक बड़ा वर्ग बाकायदा किसी तयशुदा ‘टीवी श्रृंखला’ की तर्ज पर समाज में चौतरफा दुष्प्रचार का जहर घोलता रहा। मीडिया के इसी रवैये के कारण न केवल डेरे के अनुयायियों की आस्था बुरी तरह आहत हुई बल्कि, देश के आम जनमानस को गुमराह करने में भी तकरीबन तमाम टीवी चैनलों से लेकर प्रिंट मीडिया तक का एक बड़ा वर्ग कतई पीछे नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जन कल्याण में जुटे डेरा सच्चा सौदा के समूचे सांगठनिक ढांचे को पूरी तरह छिन्न-भिन्न करने की मंशा के साथ इतनी तेजी से इस षड्यंत्र का ताना-बाना बुना गया कि, दिन-रात समाजसेवा में लीन साध-संगत को कानोंकान कोई खबर न हो सकी। बची-खुची कसर, पर्दे के पीछे से ही पूरे खेल को अंजाम तक पहुंचाने में जुटी उन ‘सफेदपोश’ ताकतों ने पूरी कर दी, जो महज अपनी ‘स्वार्थपूर्ति’ की खातिर इतने खतरनाक ढंग से एक-एक चाल चलते चले जा रहे थे। तकरीबन, समूचे उत्तर भारत की हिंदी पट्टी में आम पाठकों से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग को पूरी तरह भ्रमित करते हुए डेरा सच्चा सौदा और पूज्य गुरु जी पर तमाम किस्म के मिथ्या आरोप लगाने का यह सिलसिला बदस्तूर महीनों तक जारी रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">निष्ठुरता और अमानवीयता की हद तो तब हो गई, जब इस पूरी काली साजिश के कारण अंततोगत्वा पूज्य गुरु जी के सुनारियां जाने के बाद भी मीडिया के तथाकथित मठाधीशों ने एक क्षण के लिए भी उफ न करते हुए झूठे आरोपों और तथ्यों का पुलिंदा अपने-अपने मंचों पर परोसने का क्रम थमने नहीं दिया।<br />
लेकिन, यह भी निस्संदेह, पूज्य गुरु जी से ही हासिल आत्मबल और प्रेरणा का ही सशक्त प्रभाव रहा कि, न जाने कितने ही प्रकार के पूर्वाग्रहों और कुंठित मनोदशाओं से ग्रस्त मीडिया के इस बड़े तबके से मिलने वाली नित नई चुनौती का सामना करने में आपके प्रिय समाचार पत्र ‘सच कहूँ’ ने कहीं कोई कमी नहीं रख छोड़ी। हर रोज पूरी ताकत के साथ, ‘सच कहूँ’ अपने शीर्षक के अनुरूप और यथा नाम तथा गुण की तर्ज पर सत्य की मशाल लगातार रोशन किए रहा। मिथ्या आरोपों का मजबूती से जवाब देते हुए ‘सच कहूँ’ ने अपने मार्गदर्शक की प्रेरणा के सहारे डेरा सच्चा सौदा से जुड़े एक-एक अनुयायी तक बखूबी संदेश पहुंचाया कि, उन्हें मीडिया के एक बड़े वर्ग में दर्शाए गए झूठ से जरा भी घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है बल्कि, वे पूरे आत्मविश्वास के साथ इस संकट का सामना करें और पूज्य गुरु जी से मिली सीख के सहारे जन-जन की सेवा में पहले की भांति स्वयं को क्षण प्रतिक्षण तल्लीन रखें।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक 79 विश्व कीर्तिमान अपने नाम कर चुके डेरे का यह गौरवशाली सफर पूरी आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ सतत् चलायमान है। मुश्किलें चाहें कितनी भी हों, राह में बाधाएं कितनी भी क्यों न आएं, ‘सत्य’ का सूरज कभी अस्त नहीं होगा…! वस्तुत: अपने कर्तव्य पथ से एक पल के लिए विमुख न होने वाले ये तमाम सेवाशील प्राणी हर रोज परमपिता से यही प्रार्थना करते हैं कि, वे अनर्गल और मिथ्या आरोप लगाने वालों को क्षमा करें क्योंकि, वे नहीं जानते कि, वे क्या कह रहे हैं ? वे अज्ञानी हैं, पतित हैं, अंध हैं, अश्रद्ध हैं, अविवेकी हैं, नश्वर हैं, वे धर्म-अधर्म नहीं जानते, दर्शन नहीं जानते, परोपकार नहीं जानते, वे पुण्य नहीं समझते और दान या सेवा की महिमा से पूरी तरह अंजान हैं। उनका केवल इतना उद्देश्य है कि, किसी भी तरह हमारी प्राचीन-अवार्चीन आध्यात्मिक संपन्नता और सेवाशीलता को समर्पित भावना तहस-नहस हो जाए। लेकिन, वे यह नहीं जानते कि, आध्यात्मिक संपन्नता ही तो हमारा वास्तविक बल है। न जाने कब से इसे तोड़ने के कुत्सित प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी आस्थाओं, श्रद्धाओं, सेवाशीलता को अंधश्रद्धा साबित करने की साजिश रची जा रही है। इसी के तहत, हमारे मार्गदर्शकों पर मुकदमे किए गए, उन्हें जेल में डालकर यातनाएं दी जा रही हैं लेकिन, याद रखना चाहिए कि, सांच को आंच नहीं होती। युग कोई भी हो, चुनौतियों का पहाड़ कितना ही विशालकाय क्यों न हो, हमारे आदर्श हमेशा बेदाग साबित होते रहे हैं, क्योंकि चाहे शासन-प्रशासन हो या फिर न्याय व्यवस्था ही क्यों न हो, हर व्यवस्था में आध्यात्मिक तत्व अवश्य विद्यमान रहता है और इस मूल सार्वभौमिक तत्व में विश्वास रखने वाले किसी भी परिस्थिति में अध्यात्म की गहराई में झांककर सत्य खंगालने से एक क्षण के लिए पीछे नहीं हटते। वे अध्यात्म की विराट परिधि से पूरी तरह परिचित होते हैं, साथ ही डेरा सच्चा सौदा सरीखे मानव कल्याण के प्रति सत्त समर्पित आध्यात्मिक केंद्रों तथा उनके साधकों की महिमा भी जानते हैं और हमारी आध्यात्मिक संपन्नता को हर हाल में अक्षुण्ण बनाए रखने का अपना सबसे परम दायित्व भी…! पवन शर्मा</p>
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                <pubDate>Sat, 25 Aug 2018 12:59:42 +0530</pubDate>
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                <title>नहीं थम रहे पत्थरबाज</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर बकरीद के मौके पर कई हिंसक वारदातें हुईं। सेना के वाहन और सैनिकों पर पत्थर बरसाए गए। दो पुलिसकर्मी मोहम्मद अशरफ डार एवं मोहम्मद याकूब के साथ भाजपा कार्यकर्ता शबीर अहमद भट्ट की हत्या कर दी गई। यही नहीं श्रीनगर की हजरतबल मस्जिद में नेशनल कांफ्रेंस के नेता और राज्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/not-stopping-stone-makers/article-5540"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/kasmir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर बकरीद के मौके पर कई हिंसक वारदातें हुईं। सेना के वाहन और सैनिकों पर पत्थर बरसाए गए। दो पुलिसकर्मी मोहम्मद अशरफ डार एवं मोहम्मद याकूब के साथ भाजपा कार्यकर्ता शबीर अहमद भट्ट की हत्या कर दी गई। यही नहीं श्रीनगर की हजरतबल मस्जिद में नेशनल कांफ्रेंस के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ नारेबाजी हुई और उन पर जूते फेंके गए। मालूम हो अब्दुल्ला ने दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा में भारत माता की जय का नारा लगाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी के विरोध में उनके साथ बद्सलूकी बरती गई। नतीजतन फारूक को मस्जिद से लौटना पड़ा। लौटने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने बेबाकी से कहा अगर सिरफिरे लोगों को लगता है कि फारूक डर जाएगा तो यह उनकी गलती है। मुझे भारत माता की जय बोलने से कोई नहीं रोक सकता है। यही नहीं नवाज के बाद अलगाववादियों ने श्रीनगर, कुलगाम एवं अनंतनाग समेत घाटी के कई शहरों में पाकिस्तान और आईएसएस के झंडे लहराए और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगाए। इन देश विरोधी हरकतों से साफ हुआ है कि पाकिस्तान और आईएस अब जम्मू-कश्मीर में मिलकर अलगाव की मुहिम चला रहे हैं। हालांकि अब सत्यपाल मलिक के रूप में इस राज्य को 51 साल बाद ऐसा राज्यपाल मिला है, जो सैन्य अथवा प्रशासनिक सेवा की पृष्ठभूमि से नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वे कई राजनैतिक धाराओं से पार पाते हुए भाजपा में रहते हुए राज्यपाल पद तक पहुंचे हैं। इसलिए उनसे उम्मीद की जा सकती है कि अब कश्मीर समस्या का निदान राजनीतिक समझ से खोजा जाएगा। यदि पाकिस्तान के नए वजीरे-आजम इमरान खान भी सेना के इशारे पर चलने की बजाय, स्वयं के राजनीतिक विवेक से कश्मीर समस्या को लेते हंै तो समस्या का हल मुमकिन हो सकता है।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की दीवार से भाषण देते हुए कहा था कि कश्मीर के संदर्भ में अटलबिहारी वाजपेई की नीति ह्यइंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत को अमल में लाएंगे। बीते चार साल में हुर्रियत के किसी भी नेता से औपचारिक बातचीत भी नहीं करने वाली मोदी सरकार अब यदि ऐसा संकेत दे रही है तो इसका मतलब यही है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर वह अपनी रणनीति बदलना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस परिप्रेक्ष्य में मलिक की नियुक्ति को बदलती नीति की शुरूआत माना जा सकता है। क्योंकि भाजपा में शामिल होने के बाद भी सत्यपाल मलिक की उदारवादी छवि में विपरीत रुझान देखने को नहीं मिला है। संयोगवश इसी समय क्रिकेट खिलाड़ी इमरान खान पाक के प्रधानमंत्री बने हैं। गोया, जम्मू-कश्मीर के मोर्चे पर सुलग रही आग को शांत किए बिना पाकिस्तान की सत्ता को रचनात्मक गति देना इन्हें भी मुश्किल होगा। क्योंकि नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर जबरदस्त पकड़ के चलते पाक को अमेरिका समेत अन्य देशों से आर्थिक मदद मिलने पर प्रतिबंध लग गया है। पाक के अपने इतने आर्थिक संसाधन मजबूत नहीं हैं, कि वह बिना किसी बाहरी मदद के विकास कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कश्मीर के अलगाववादियों को पाक सेना और आईएस व अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों में इतना बरगला दिया है कि उन्हें कश्मीर की तथाकथित आजादी सच लगने लगी है। जबकि यह किसी दिवास्वप्न की तरह महज एक भ्रम है। बावजूद हुर्रियत के अलगाववादी नेता जिहाद के नाम पर कश्मीरी युवाओं को आतंक के लिए प्रेरित करने की भूल कर रहे हैं। वे अभी भी मुगालते में है कि कश्मीर की आजादी का स्वप्न दिखाकर वे अपना उल्लू सीधा कर पाकिस्तान से इस बहाने करोड़ों की धनराशि लेते रहेंगे। जबकि यह रास्ता कश्मीर और उसकी अवाम को बर्बादी के रास्ते पर ले जा रहा है। गोया अब बेहतर तो यह होगा कि अपने युवाओं को खो रही कश्मीरी अवाम को अलगाववादियों से पूछना चाहिए कि क्या अशरफ डार, मोहम्मद याकूब एवं शबीर भट्ट कश्मीरी नहीं थे ? इसके पहले भी आतंकी उमर फैयाज और आयूब पंडित जैसे अनेक कश्मीरी पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अलगाव और आतंक की पैरवी करने वालों से यह भी पूछने की जरूरत है कि वे कश्मीर को बर्बाद करने वाले आईएसआईएस, अलकायदा, हिजबुल मुजाहिद्ीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों से बर्बादी का सबक क्यों सीख रहे हैं ? हालांकि इन संगठनों और अलगाववादियों को पाकिस्तान से मिल रही करोड़ों रुपए की निधि के खुलासे ने कश्मीर की कथित आजादी के संघर्ष पर भी सवाल उठाए हैं। पिछले दिनों पाकिस्तान से धन लेकर कश्मीर में आग लगाने वाले सात अलगावदियों को एनआईए ने हिरासत में लिया है। केंद्र सरकार ने इन्हें गिरफ्तार करके उस संकल्प शक्ति का परिचय दिया था, जिसे दिखाने की बहुत पहले जरूरत थी। जम्मू-कश्मीर के अलगावादी जम्मू-कश्मीर को अस्थिर बनाए रखने के साथ पाकिस्तान के शह पर इसे देश से अलग करने की मुहिम भी चलाए हुए हैं। इस नाते गिरफ्तार किए गए अलगावादी देशद्रोह का काम कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए इन पर देश की अखंडता व संप्रभुता को चुनौती देने के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रद्रोह का मामला बनता है। आतंक और देश की संपत्ति को नश्ट करने के लिए लिया गया विदेशी धन राश्ट्रद्रोह से जुड़ी गतिविधियां ही हैं। क्योंकि चंद लोगों के राष्ट्रविरोधी रुख के कारण देश का भविश्य दांव पर लगा है। पंजाब में भी इसी तरह का आतंकवाद उभरा था। लेकिन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव और पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की दृढ़ इच्छा शक्ति ने उसे नेस्तनाबूद कर दिया था। कश्मीर का भी दुश्चक्र तोड़ा जा सकता है, यदि वहां की गठबंधन पीडीपी और भाजपा गठबंधन सरकार मजबूत इरादे रही होती ? पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती दुधारी तलवार पर सवार रहीं थीं। एक तरफ तो उनकी सरकार भाजपा से गठबंधन के चलते केंद्र सरकार को साधती रही, तो दूसरी तरफ हुर्रियत की हरकतों को नजरअंदाज करती रहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण वह हुर्रियत नेताओं के पाकिस्तान से जुड़े सबूत मिल जाने के बावजूद कोई कठोर कार्यवाही नहीं करने में नाकाम रहीं थीं। नतीजतन राज्य के हालात नियंत्रण से बाहर हुए। अब राज्यपाल के रूप में सत्यपाल मलिक की तैनाती के बाद लगता है कि बातचीत से हल निकालने की दृश्टि से भले ही वे उदार दिखें, लेकिन राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को कतई बरदास्त नहीं करेंगे। दरअसल, अब जो नए तथ्य सामने आ रहे है, उनसे पता चलता है कि हुर्रियत कांफ्रेंस के लिए भी वजूद का संकट पैदा होने जा रहा है। क्योंकि आईएस और अलकायदा से जुड़े कट्टर आतंकी हुर्रियत के विरुद्ध चल रहे हैं। यही वजह है कि अलकायदा और आईएस के आतंकियों की घाटी में मौजूदगी को अलगाववादी हुर्रियत भारतीय खुफिया तंत्र और जांच एजेंसियों की साजिश बता रहे हैं। दरअसल हुर्रियत नेता अभी तक कश्मीरी युवाओं को बड़ी संख्या में बरगलाने में लगातार कामयाब हो रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इन नेताओं की दलील थी कि उनकी लड़ाई कश्मीर की आजादी के लिए है और पाकिस्तान इसे प्राप्त करने में महज मदद कर रहा है। किंतु इसके उलट खुफिया एजेंसियों ने इनका कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। इन जांचों से तय हुआ है कि किस तरह पाकिस्तान से मिल रही धनराशि से हुर्रियत नेताओं ने करोड़ों की संपत्ति और अय्याशी के साधन जुटाए हुए हैं। उनके बच्चे भी देश-विदेश के नामी शिक्षण संस्थाओं में पढ़कर सरकारी और निजि क्षेत्रों में अच्छी नौकरियां हासिल कर रहे हैं। इन तथ्यों के आधार पर साबित हुआ है कि अलगाववादी महज पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्यादे भर हैं। इसी धन से ये कश्मीरी युवाओं को पैसा देते हैं और सेना व सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसवाते हैं। बहरहाल अलगाववाद के विरुद्ध फारुक नेतृत्व संभालते हैं तो कश्मीरी जनता एकजुट होकर अलगाववादियों के खिलाफ खड़ी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>प्रमोद भार्गव</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Aug 2018 08:11:09 +0530</pubDate>
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                <title>केजरीवाल का बड़ा ऐलान-अकेले लड़ेंगे 2019 का चुनाव, नहीं बनेंगे महागठबंधन का हिस्सा ​​​​​​</title>
                                    <description><![CDATA[आरोप:  केन्द्र सरकार ने दिल्ली में कराये जाने वाले विकास के कार्यों में रोड़े अटकायें रोहतक (सच कहूँ)। आम आदमी पार्टी के प्रमुख एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि 2019 में भाजपा के खिलाफ संभावित महागठबंधन का वह हिस्सा नहीं बनेंगे। केजरीवाल ने कहा कि जो पार्टियां संभावित महागठबंधन में शामिल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/kejriwal-big-statement-2019-elections-will-not-be-part-of-the-coalition/article-5297"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/kejriwa.jpg" alt=""></a><br /><h2>आरोप:  केन्द्र सरकार ने दिल्ली में कराये जाने वाले विकास के कार्यों में रोड़े अटकायें</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (सच कहूँ)।</strong> आम आदमी पार्टी के प्रमुख एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि 2019 में भाजपा के खिलाफ संभावित महागठबंधन का वह हिस्सा नहीं बनेंगे। केजरीवाल ने कहा कि जो पार्टियां संभावित महागठबंधन में शामिल हो रही है, उनकी देश के विकास में कोई भूमिका नहीं रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने दिल्ली में कराये जाने वाले विकास के कार्यों में रोड़े अटकायें है।</p>
<h2>विधानसभा चुनाव के साथ-साथ लोकसभा की सभी सीटों पर भी चुनाव लड़ेगी</h2>
<p style="text-align:justify;">केजरीवाल ने आज रोहतक में कहा कि उनकी पार्टी हरियाणा में विधानसभा चुनाव के साथ-साथ लोकसभा की सभी सीटों पर भी चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि 2019 में ‘‘वे किसी भी प्रकार के महागठबंधन या अन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे।’’ केजरीवाल ने दिल्ली के रूके हुए कामों के लिए केन्द्र की मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उनके हर उस कदम को रोका गया जो आम जनता की भलाई के लिए कहा था। उन्होंने दावा किया,‘‘हमने दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में क्रांतिकारी काम किये हैं।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा धर्म के नाम पर सिर्फ दिखावा कर रही है। उसे लोगों की भावनाओं से कोई लेना-देना नहीं है।</p>
<h2>भाजपा सरकार को भी आड़े हाथों लिया</h2>
<p style="text-align:justify;">केजरीवाल ने हरियाणा की भाजपा सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने दिल्ली के मुकाबले हरियाणा को विकास के क्षेत्र में जहां पिछड़ा हुआ करार दिया तो वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री को सलाह भी दे डाली कि ‘‘वह हम से सीख ले कि सही मायनों में विकास कैसे होता है।’’ उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार जब पूर्ण राज्य न होते हुए भी बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है तो हरियाणा में खट्टर सरकार ऐसा क्यों नहीं कर सकती है। केजरीवाल ने अम्बाला के शहीद हुए जवान के परिवार के लिए हरियाणा सरकार से एक करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता की मांग की।</p>
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                <pubDate>Fri, 10 Aug 2018 09:51:16 +0530</pubDate>
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