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                            <item>
                <title>Nirbhaya case : विनय शर्मा की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की विशेष खंडपीठ ने विनय शर्मा के वकील ए पी सिंह और केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/nirbhaya-case-supreme-court-verdict-on-vinay-sharmas-petition-on-friday/article-13019"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/nirbhaya-case-1.jpg" alt=""></a><br /><h2>विनय ने राष्ट्रपति के फैसले की समीक्षा का न्यायालय से अनुरोध किया है</h2>
<ul>
<li> उसकी दया याचिका राष्ट्रपति ने जल्दबाजी में खारिज की है: विनय</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने देश को दहला देने वाले निर्भया सामूहिक दुराचार एवं हत्या मामले के गुनाहगार विनय शर्मा की राष्ट्रपति द्वारा खरिज दया याचिका को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला गुरुवार को सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की विशेष खंडपीठ ने विनय शर्मा के वकील ए पी सिंह और केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">न्ययालय ने इस पर फैसला सुनाने के लिए शुक्रवार दोपहर बाद दो बजे का समय निर्धारित किया। इससे पहले सिंह ने दलील दी कि विनय शर्मा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया था। साथ ही यह भी कहा कि उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के गृह मंत्री ने दया याचिका खारिज करने की सिफारिश पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">मेहता ने उनकी इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सारी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">कल इस मामले में शीर्ष अदालत अपना फैसला सुनाएगा।</li>
<li style="text-align:justify;">विनय ने राष्ट्रपति के फैसले की समीक्षा का न्यायालय से अनुरोध किया है।</li>
<li style="text-align:justify;">विनय ने अपनी याचिका में कहा है कि उसकी दया याचिका राष्ट्रपति ने जल्दबाजी में खारिज की है।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2020 16:24:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कच्चे कर्मचारियों पर अदालती फैसले के बाद गरमाई सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। गत दिवस माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पूर्व की हुड्डा सरकार के समय भर्ती किए गए कच्चे कर्मचारियों संबंधित 4 पॉलिसियां रद्द कर दी गर्इं। अदालत के फैसले के बाद प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने जहां इसे मौजूदा खट्टर सरकार की नाकामी बताया है वहीं खट्टर सरकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/after-the-court-verdict-on-raw-employees-heatsy-politics/article-3908"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/ad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। </strong>गत दिवस माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पूर्व की हुड्डा सरकार के समय भर्ती किए गए कच्चे कर्मचारियों संबंधित 4 पॉलिसियां रद्द कर दी गर्इं। अदालत के फैसले के बाद प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने जहां इसे मौजूदा खट्टर सरकार की नाकामी बताया है वहीं खट्टर सरकार इसे हुड्डा सरकार की गलत नीतियों का नतीजा करार दे रही हैं। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">खट्टर ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समय विधानसभा चुनाव से पूर्व ठेका कर्मचारियों को नियमित करने के संबंध में चार नीतियों को रद्द करने के फैसले के बाद हरियाणा राज्य कर्मचारी संघ के एक शिष्टमंडल को यह आश्वासन दिया। अदालत के फैसले से 20 हजार कर्मचारी प्रभावित होंगे। संघ के प्रदेश महासचिव कृष्णलाल गुर्जर ने आज यहां जारी एक बयान में कहा कि उनका एक शिष्ट मंडल मुख्यमंत्री से मिला जिसमें कल के उच्च न्यायालय के फैसले पर गंभीरता से विचार विमर्श हुआ। उन्होंने बताया कि इस दौरान खट्टर ने आश्वासन दिया कि किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जायेगा और सरकार उच्च न्यायालय के फैसले का अध्ययन कर कोई फैसला लेगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/after-the-court-verdict-on-raw-employees-heatsy-politics/article-3908</link>
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                <pubDate>Sat, 02 Jun 2018 12:08:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जाट आंदोलन में हाई कोर्ट का फैसला, अभी वापिस नहीं होंगे हिंसा के 407 मामले</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज) जाट आंदोलन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई तोड़फोड़, हिंसा व आगजनी के 407 मामले वापिस लेने की हरियाणा सरकार की सभी कोशिशें धरी की धरी रह गई। मंगलवार को हाईकोर्ट ने कड़ा रूख अख्त्यिार करते हुए अगली सुनवाई तक इन मामलों को रद्द न किए जाने के बाबत सरकार को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज) </strong>जाट आंदोलन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई तोड़फोड़, हिंसा व आगजनी के 407 मामले वापिस लेने की हरियाणा सरकार की सभी कोशिशें धरी की धरी रह गई। मंगलवार को हाईकोर्ट ने कड़ा रूख अख्त्यिार करते हुए अगली सुनवाई तक इन मामलों को रद्द न किए जाने के बाबत सरकार को आदेश दे डाले। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने बताया कि जिन्हें सरकार मामले बता वापिस लेने की तैयारी कर रही है, उनमें से 129 मामलों को जाट आंदोलन की जाँच कर चुकी प्रकाश सिंह कमेटी बेहद ही गंभीर मामले बता चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा हाईकोर्ट के सख्त तेवर देख हरियाणा सरकार को आश्वाशन देना पड़ा कि वह फिलहाल यह 407 मामले अगली सुनवाई तक वापिस नहीं लेगी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अनुपम गुप्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि सरकार अब जाट आनदोलन में अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश में है और राजनैतिक हित साधने में लगी है और यह 407 एफआईआर शांति और सौहार्द के बहाने से वापिस लिए जाने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस संबंध में जाट नेताओं से मुलाकात भी की थी। अमित शाह की रैली के पहले भी जाटों को शांत करने के लिए सरकार ने अनेक बार जाट नेताओं से बात की थी। इसी के चलते गत वर्ष जून में 137 तथा इसी मई माह मे 270 मामलों को वापिस लेने का निर्णय लिया गया है। इस पर हरियाणा सरकार ने कहा कि यह सभी एफआईआर ट्रायल कोर्ट के समक्ष रखी जाएंगी जिस केस में ट्रायल कोर्ट मंजूरी देगी वही वापिस ली जा सकती है। सरकार की इस दलील पर गुप्ता ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में पक्ष भी तो सरकार की ओर से पब्लिक प्रोसिक्यूटर ही रखेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई नहीं करेगी</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार इस पूरी जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस पर रोक लगाई जानी बेहद ही जरुरी है हाईकोर्ट किसी भी दोषी को बचने का अवसर नहीं दे सकता है। हाईकोर्ट के दबाव के बाद आखिरकार सरकार को हाईकोर्ट को आश्वासन देना पड़ा कि वह फिलहाल इन एफआईआर को वापिस लिए जाने की प्रक्रिया पर रोक लगा देंगे और अगली सुनवाई तक इस मामले में कोई भी कार्यवाही नहीं की जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/high-court-verdict-407-cases-of-violence-will-not-return/article-3741</link>
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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 07:59:31 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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