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                <title>infection - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>सरसा में बढ़ा स्वाइन फ्लू संक्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[7 और आशंकित स्वाइन फ्लू के मरीज आए सामने -मामला डीसी के संज्ञान में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट सरसा (सच कहूँ न्यूज)। स्वाइन फ्लू के 7 और आशंकित मरीज सामने आए हैं। इनमें दो मरीज नागरिक अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भी भर्ती हैं, जबकि 5 निजी अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। जिनकी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">7 और आशंकित स्वाइन फ्लू के मरीज आए सामने</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">-मामला डीसी के संज्ञान में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> स्वाइन फ्लू के 7 और आशंकित मरीज सामने आए हैं। इनमें दो मरीज नागरिक अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भी भर्ती हैं, जबकि 5 निजी अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। जिनकी जांच रिपोर्ट रोहतक पीजीआई से अभी पेंडिंग है। बता दें कि जिला में 9 स्वाइन फ्लू पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं। जिनमें दो की मौत हो चुकी है, बल्कि 12 मरीजों की जांच रिपोर्ट अभी पेंडिंग है। लेकिन जिला में बढ़ते स्वाइन फ्लू संक्रमण का मामला डीसी के संज्ञान में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है।</p>
<p style="text-align:justify;">विभाग की टीमें लोगों को बचाव बारे जागरूक करने फील्ड में उतरी हैं। यह टीमें जागरूक करते हुए लोगों को बता रही हैं कि किसी में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें, तो उससे कम से कम तीन फीट दूरी बनाए रखें, क्योंकि यह वायरस हवा में फैलता हैै, खांसने, छींकने व थूकने से वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है। आशंकित मरीज भी मुहं पर रूमाल या मास्क का प्रयोग रखें और भीड़- भाड़ वाले इलाकों में न जाएं। ऐसी स्थिति में घबराए नहीं, आंख, नाक व मुंह को छुए नहीं और किसी से हाथ न मिलायें न ही गले मिले और डॉक्टर की सलाह बिना दवाई न लें। अगर मरीज का खांसी, जुखाम दो-तीन दिन में ठीक न हो तो नागरिक अस्पताल, समुदायिक केंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">लोगों को बचाव बारे जागरूक करने में जुटी हैं टीमें</h2>
<p style="text-align:justify;">जिला में 7 नए स्वाइन फ्लू आशंकित मरीज सामने आए हैं। 12 मरीजों की जांच रिपोर्ट पेंडिंग है। विभागीय टीमें लोगों को बचाव बारे जागरूक करने में जुटी हैं। स्कूली बच्चों में जागरूकता लाने के निर्देश दिए हैं। वहीं आशा वर्कर और एएनएम भी अभियान में शामिल की गई हैं।<br />
<strong>-डॉ. अनीषा, नॉडल अधिकारी, सरसा।</strong></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/increased-swine-flu-infection-in-cadavera/article-7512</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Feb 2019 19:32:29 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>निपाह जैसे संक्रमणों से जागरूकता ही बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[केरल में चमगादड़ों व बीमार सूअरों, घोड़ों से फैलने वाले वायरस निपाह के चलते करीब एक दर्जन लोगों की मौत हो गई है। यहां तक कि निपाह रोगियों का इलाज करने के दौरान संक्रमण का शिकार हुई एक नर्स भी इसकी चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई। परिस्थितियां काफी गंभीर हैं केंद्रीय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/protect-awareness-from-infection-like-nipah/article-3745"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/doctro-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केरल में चमगादड़ों व बीमार सूअरों, घोड़ों से फैलने वाले वायरस निपाह के चलते करीब एक दर्जन लोगों की मौत हो गई है। यहां तक कि निपाह रोगियों का इलाज करने के दौरान संक्रमण का शिकार हुई एक नर्स भी इसकी चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई। परिस्थितियां काफी गंभीर हैं केंद्रीय चिकित्सा मंत्री जे.पी. नड्डा स्वयं इस मामले को देख रहे हैं। चिकित्सा मंत्री व स्वास्थ्य प्रशासन की चिंता की मुख्य वजह है कि निपाह का कोई कारगर ईलाज नहीं हैं। 1998 में निपाह सबसे पहले मलेशिया में फैला था वहां इस रोग ने करीब 300 लोगों की जान ले ली थी। 2004 में इसके कुछ मामले बांग्लादेश में भी देखे गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">खान-पान व रहन-सहन की सावधानी ही निपाह जैसे रोगों से बचने का खास उपाय है। अभी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इससे बचने का तरीका है, खजूर के खेतों में गिरे पड़े खजूर न खाना, खजूर का खुला पड़ा रस नहीं पीना, क्योंकि वह चमगादड़ों का झूठा हो सकता है। बीमार सूअरों व घोड़ों से दूर रहना। भारत व बांग्लादेश मे संक्रामण रोग इंसान से इंसान के संपर्क में आने से ज्यादा फैलते हैं, क्योंकि यहां आबादी बहुत ज्यादा है। उधर अफ्रीका के कई देशों जाम्बिया, रवांडा, बुरूंडी में इबोला का वायरस फिर से सक्रिय हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले वर्ष इस रोग ने करीब 400 लोगों की जान ले ली थी, भारत में इसका एक केस सामने आया था। हालांकि इबोला से बचाव का अब टीका तैयार हो चुका है लेकिन इसका बचाव भी सावधानियां ही हैं। इबोला संक्रमित व्यक्ति के घावों व थूक, मलमूत्र से बचा जाना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को इबोला प्रभावित क्षेत्र की यात्रा करनी भी पड़े तब वह इससे बचाव का वेक्सीन अवश्य लगावा ले।</p>
<p style="text-align:justify;">समय-समय पर फैलने वाले संक्रामक रोगों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह अपने जागरूकता कार्यक्रम चलाएं। आमजन को जानलेवा संक्रामक रोगों की पूरी जानकारी, उनके फैलने के कारण, ऋतुएं व बचाव के तरीके अवश्य बताए जाने चाहिए। संक्रामक रोगों के वक्त फैलने वाली अफवाहों या इनके इलाज के नाम पर ठगने वाले नीम हकीमों पर सरकारी कार्रवाई हो। सक्रांमक रोगों के फैलने पर अक्सर देखा जाता है कि लोगों की किसी स्थान विशेष की मिट्टी, पानी भभूत या फिर किसी तांत्रिक आदि की शक्ति या श्राप का भी प्रचार होने लगता है, इससे समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सक्रांमक रोगों से बचाव के अलावा पौष्टिक खुराक व रोगों से लड़ने के लिए प्राकृतिक शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की जानकारी देशवासियों को रहे। अच्छी खुराक व शारीरिक व्यायाम पूरे राष्ट के लिए एक नि:शुल्क औषधि है जो किसी जीव या मनुष्य को जल्द संक्रमित नहीं होने देती अत: समाज में इसे प्राप्त करना एक आदत बनाया जाए। अभी भारत में ग्रामीण लोग यहां संक्रामक रोगों से अनभिज्ञ रहते वहीं उन्हें सावधानियों का भी पता नहीं रहता। शहरी लोग आलसी किस्म एवं मिलावटी खाने के आदी हैं, इससे देश में संक्रामक रोग कई दफा स्वास्थ्य विभाग के प्रयत्नों को भी विफल कर देते हैं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 09:09:43 +0530</pubDate>
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