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                <title>Nipah - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>निपाह का कहर जारी : महिला की मौत, कोझिकोड में स्कूल कॉलेज 12 तक रहेंगे बंद</title>
                                    <description><![CDATA[कोझिकोड (एजेंसी) केरल के कोझिकोड में शनिवार सुबह 39 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई। उसमें निपाह वायरस के लक्षण दिखे थे लेकिन ब्लड सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव पाई गई। महिला की मौत के बाद जिले के सभी स्कूल और कॉलेजों को 12 जून तक के लिए बंद कर दिया गया है। संघ लोक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/nipah-death-of-woman/article-3930"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/nepah.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोझिकोड (एजेंसी) </strong>केरल के कोझिकोड में शनिवार सुबह 39 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई। उसमें निपाह वायरस के लक्षण दिखे थे लेकिन ब्लड सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव पाई गई। महिला की मौत के बाद जिले के सभी स्कूल और कॉलेजों को 12 जून तक के लिए बंद कर दिया गया है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित परीक्षाओं को छोड़कर सभी परीक्षाएं भी टाल दी गई हैं। इसके अलावा राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा कराए जाने वाले इंटरव्यू को भी स्थगित कर दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फैसला राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा और अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) राजीव सदानंदन की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। राज्य में 17 मई को निपाह वायरस की पुष्टि होने के बाद अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। शैलजा ने कहा कि एहतियातन उपाय के तहत स्कूलों-कॉलेजों को फिर से खोलने को टाल दिया गया है। निपाह वायरस से उत्पन्न हालात की समीक्षा के लिए तिरुवनंतपुरम में सोमवार को सभी दलों की बैठक होगी।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Jun 2018 09:31:06 +0530</pubDate>
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                <title>हिमाचल में मिले कई मरे चमगादड़, निपाह वायरस का खौफ</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। केरल में निपाह वायरस से अब तक 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 15 पीड़ितों का इलाज जारी है।सरकार ने केरल के अलावा 5 अन्य राज्यों में भी निपाह को लेकर सावधानी बरतने के लिए एडवाइजरी और अलर्ट जारी किए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर, गोवा, राजस्थान, गुजरात और तेलंगाना शामिल हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/many-dead-bats-in-himachal-fear-of-nipah-virus/article-3766"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/niphaa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>केरल में निपाह वायरस से अब तक 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 15 पीड़ितों का इलाज जारी है।सरकार ने केरल के अलावा 5 अन्य राज्यों में भी निपाह को लेकर सावधानी बरतने के लिए एडवाइजरी और अलर्ट जारी किए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर, गोवा, राजस्थान, गुजरात और तेलंगाना शामिल हैं। उधर, हिमाचल में भी ऐसा ही एक मामला नाहन की पंचायत बर्मापापड़ी में सामने आया है । यहां बर्मापापड़ी सीनियर सेकंडरी स्कूल के प्रांगण में एक पेड़ में वर्षों से चमगादड़ रह रहे हैं, लेकिन बुधवार को अचानक ही दर्जनों चमगादड़ मरे हुए पाए गए। मरे चमगादड़ों के ढेर को देखते ही लोगों में सनसनी फैल गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। मृतक चमगादड़ों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए गए हैं। इनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की वजह का खुलासा हो पाएगा। अचानक हुई इन चमगादड़ों की मौत पर वन विभाग के डीसी ललित जैन का कहना है कि चमगादड़ों की मौत के बाद इस क्षेत्र में ऐसा वायरस फैल ही नहीं सकता है। क्योंकि चमगादड़ों के मरने से किसी भी प्रकार के संक्रमण फैलने की कोई संभावना नहीं पाई गई है। लोगों को डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।उन्होंने कहा कि एडीएम एसएस राठौर के नेतृत्व में एक टीम को मौके पर भेज दिया गया है. कहा जा रहा है कि गर्मी के कारण चमागादड़ों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा मृत चमगादड़ों के सैंपल लिए गए। जिसे पूना और जालंधर प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 May 2018 08:21:19 +0530</pubDate>
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                <title>निपाह जैसे संक्रमणों से जागरूकता ही बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[केरल में चमगादड़ों व बीमार सूअरों, घोड़ों से फैलने वाले वायरस निपाह के चलते करीब एक दर्जन लोगों की मौत हो गई है। यहां तक कि निपाह रोगियों का इलाज करने के दौरान संक्रमण का शिकार हुई एक नर्स भी इसकी चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई। परिस्थितियां काफी गंभीर हैं केंद्रीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/protect-awareness-from-infection-like-nipah/article-3745"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/doctro-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केरल में चमगादड़ों व बीमार सूअरों, घोड़ों से फैलने वाले वायरस निपाह के चलते करीब एक दर्जन लोगों की मौत हो गई है। यहां तक कि निपाह रोगियों का इलाज करने के दौरान संक्रमण का शिकार हुई एक नर्स भी इसकी चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई। परिस्थितियां काफी गंभीर हैं केंद्रीय चिकित्सा मंत्री जे.पी. नड्डा स्वयं इस मामले को देख रहे हैं। चिकित्सा मंत्री व स्वास्थ्य प्रशासन की चिंता की मुख्य वजह है कि निपाह का कोई कारगर ईलाज नहीं हैं। 1998 में निपाह सबसे पहले मलेशिया में फैला था वहां इस रोग ने करीब 300 लोगों की जान ले ली थी। 2004 में इसके कुछ मामले बांग्लादेश में भी देखे गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">खान-पान व रहन-सहन की सावधानी ही निपाह जैसे रोगों से बचने का खास उपाय है। अभी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इससे बचने का तरीका है, खजूर के खेतों में गिरे पड़े खजूर न खाना, खजूर का खुला पड़ा रस नहीं पीना, क्योंकि वह चमगादड़ों का झूठा हो सकता है। बीमार सूअरों व घोड़ों से दूर रहना। भारत व बांग्लादेश मे संक्रामण रोग इंसान से इंसान के संपर्क में आने से ज्यादा फैलते हैं, क्योंकि यहां आबादी बहुत ज्यादा है। उधर अफ्रीका के कई देशों जाम्बिया, रवांडा, बुरूंडी में इबोला का वायरस फिर से सक्रिय हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले वर्ष इस रोग ने करीब 400 लोगों की जान ले ली थी, भारत में इसका एक केस सामने आया था। हालांकि इबोला से बचाव का अब टीका तैयार हो चुका है लेकिन इसका बचाव भी सावधानियां ही हैं। इबोला संक्रमित व्यक्ति के घावों व थूक, मलमूत्र से बचा जाना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को इबोला प्रभावित क्षेत्र की यात्रा करनी भी पड़े तब वह इससे बचाव का वेक्सीन अवश्य लगावा ले।</p>
<p style="text-align:justify;">समय-समय पर फैलने वाले संक्रामक रोगों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह अपने जागरूकता कार्यक्रम चलाएं। आमजन को जानलेवा संक्रामक रोगों की पूरी जानकारी, उनके फैलने के कारण, ऋतुएं व बचाव के तरीके अवश्य बताए जाने चाहिए। संक्रामक रोगों के वक्त फैलने वाली अफवाहों या इनके इलाज के नाम पर ठगने वाले नीम हकीमों पर सरकारी कार्रवाई हो। सक्रांमक रोगों के फैलने पर अक्सर देखा जाता है कि लोगों की किसी स्थान विशेष की मिट्टी, पानी भभूत या फिर किसी तांत्रिक आदि की शक्ति या श्राप का भी प्रचार होने लगता है, इससे समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सक्रांमक रोगों से बचाव के अलावा पौष्टिक खुराक व रोगों से लड़ने के लिए प्राकृतिक शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की जानकारी देशवासियों को रहे। अच्छी खुराक व शारीरिक व्यायाम पूरे राष्ट के लिए एक नि:शुल्क औषधि है जो किसी जीव या मनुष्य को जल्द संक्रमित नहीं होने देती अत: समाज में इसे प्राप्त करना एक आदत बनाया जाए। अभी भारत में ग्रामीण लोग यहां संक्रामक रोगों से अनभिज्ञ रहते वहीं उन्हें सावधानियों का भी पता नहीं रहता। शहरी लोग आलसी किस्म एवं मिलावटी खाने के आदी हैं, इससे देश में संक्रामक रोग कई दफा स्वास्थ्य विभाग के प्रयत्नों को भी विफल कर देते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 09:09:43 +0530</pubDate>
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