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                <title>CISF करेगी  जम्मू और श्रीनगर के हवाई अड्डों की सुरक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[जन्मू कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को डीएसपी देवेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद जम्मू और श्रीनगर  के हवाई अड्डों की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के हवाले करने का फैसला लिया है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/cisf-will-protect-jammu-and-srinagar-airports/article-12548"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/cisf.jpg" alt=""></a><br /><h2>जम्मू कश्मीर के गृह विभाग ने पुलिस महानिदेशक को जारी किये आदेश | CISF</h2>
<ul>
<li><strong>अति संवेदनशील एयरपोर्टों की सुरक्षा 31 जनवरी तक सौंपने के आदेश</strong></li>
</ul>
<h4>Edited By Vijay Sharma</h4>
<p><strong>नई दिल्‍ली(एजेंसी)।</strong> जन्मू कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को डीएसपी देवेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद जम्मू और श्रीनगर  के हवाई अड्डों की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल<strong> (CISF)</strong> के हवाले करने का फैसला लिया है। जम्मू कश्मीर के गृह विभाग की ओर से पुलिस महानिदेशक को अपने आदेश में कहा कि दोनों ही अति संवेदनशील एयरपोर्टों की सुरक्षा 31 जनवरी तक सीआईएसएफ को सौंप दी जानी चाहिए। बता दें कि जम्मू और श्रीनगर हवाई अड्डों की सुरक्षा का दायित्व अभी तक सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के पास था लेकिन नए आदेश के बाद अब राज्‍य के इन दोनों हवाई अड्डों पर सुरक्षा बदलने का फैसला लिया गया है।</p>
<h2>बादामी बाग स्थित निमार्णाधीन बंगला अब निशाने पर</h2>
<p>बता दें कि जम्मू और श्रीनगर हवाईअड्डों की सुरक्षा का दायित्व अभी तक सीआरपीएफ  और जम्मू कश्मीर पुलिस के पास था लेकिन बुधवार को जारी नए आदेश के बाद अब राज्‍य के इन दोनों हवाईअड्डों पर सुरक्षा की तस्‍वीर बदली नजर आएगी। जारी आदेश में कहा गया है कि हाल ही में डीएसपी एयरपोर्ट सिक्‍योरिटी देवेंद्र सिंह  की गिरफ्तारी के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।</p>
<ul>
<li><strong>बता दें कि डीएसपी देविंदर सिंह को जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस प्रशासन ने बर्खास्त कर दिया है। </strong></li>
<li><strong>यही नहीं उसको दिया गया शेरे-कश्मीर पुलिस मेडल भी वापस ले लिया गया है। </strong></li>
<li><strong> इससे पहले भी देविंदर आतंकियों की मदद करने के आरोप में निलंबित किया जा चुका है।</strong></li>
</ul>
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<p>CISF, Protect, Jammu, Srinagar, Airports</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2020 13:52:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>वनों को आग से बचाने के लिए बने ठोस नीति</title>
                                    <description><![CDATA[वनों के बिना धरती दिवस मनाने का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। वनों की तबाही के होते विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। बेहतर हो यदि अमीर देश व अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वनों को बचाने के लिए कोई ठोस मुहिम चलाएं, हर घटना पर चुप रहने से समस्या का निराकरण नहीं हो सकता।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/make-a-concrete-policy-to-protect-the-forest-from-fire/article-12344"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/make-a-concrete-policy-to-p.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आस्ट्रेलिया के वनों में लगी भयानक आग वातावरण के लिए चुनौती है जिसमें 50 करोड़ जानवरों की मौत होने का अनुमान है। इस हादसे में 2 हजार घर भी जल गए हैं। आग की भयानकता का अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि हमारे देश के राज्य पश्चिम बंगाल के क्षेत्रफल जितना जंगल जल गया है। तीन हजार के करीब सैनिक आग बुझाने में जुटे हुए हैं। कुछ माह पूर्व ही दुनिया के फेफड़े माने जाने वाले अमेजन के वनों को आग लग गई थी। गत वर्षों में कनाडा में भी बड़े स्तर पर वन आग की चपेट में आ गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आग लगने का कारण भले ही कोई भी क्यों न हो लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि हरियाली कायम रखने और बढ़ाने संबंधी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस प्रकार के कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं उसके मुताबिक वनों को आग से बचाने के लिए तकनीक विकसित नहीं हो सकी और न ही प्रबंध मुकम्मल किए जा सके हैं। कनाडा में आज भी आग से वनों का उतना नुक्सान हो जाता है जितना कभी 100 साल पूर्व होता था। इस मामले में शक्तिशाली देशों के बीच सहयोग व तालमेल की कमी बनी रहती है। अधिकतर देश ऐसी घटनाओं में अपनी लड़ाई अकेला ही लड़ता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे देश तकनीक व अनुदान के लिए समर्थ देश हैं। कई वन एक से अधिक देशों की सीमाओं के साथ सटे हुए हैं।  एक देश में घटित घटना दूसरे देशों के लिए भी मुसीबत बनती है। इन हालातों में सबंधित देशों का कोई संयुक्त अभियान चलाया जा सकता है। वृक्ष प्रकृति के वरदान हैं जो मानव को आॅक्सीजन देते हैं। एक वृक्ष तैयार करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन आग से मिनटों में लाखों पेड़ जलकर राख हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग हर साल की तरह ऐसी घटनाएं घटती हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आग से हो रहे नुक्सान को रोकने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि बढ़ रही जनसंख्या, उद्यौगिकरण व कई अन्य कारणों के चलते वन ही धरती का अस्तित्व का आधार हैं। वनों के बिना धरती दिवस मनाने का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। वनों की तबाही के होते विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। बेहतर हो यदि अमीर देश व अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वनों को बचाने के लिए कोई ठोस मुहिम चलाएं, हर घटना पर चुप रहने से समस्या का निराकरण नहीं हो सकता। वनों को हर हाल में आग से बचाने की आवश्यकता है।</p>
<p> </p>
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</span></span></p>
<p><span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title=""> </span></span></p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2020 20:52:38 +0530</pubDate>
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                <title>निपाह जैसे संक्रमणों से जागरूकता ही बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[केरल में चमगादड़ों व बीमार सूअरों, घोड़ों से फैलने वाले वायरस निपाह के चलते करीब एक दर्जन लोगों की मौत हो गई है। यहां तक कि निपाह रोगियों का इलाज करने के दौरान संक्रमण का शिकार हुई एक नर्स भी इसकी चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई। परिस्थितियां काफी गंभीर हैं केंद्रीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/protect-awareness-from-infection-like-nipah/article-3745"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/doctro-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केरल में चमगादड़ों व बीमार सूअरों, घोड़ों से फैलने वाले वायरस निपाह के चलते करीब एक दर्जन लोगों की मौत हो गई है। यहां तक कि निपाह रोगियों का इलाज करने के दौरान संक्रमण का शिकार हुई एक नर्स भी इसकी चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई। परिस्थितियां काफी गंभीर हैं केंद्रीय चिकित्सा मंत्री जे.पी. नड्डा स्वयं इस मामले को देख रहे हैं। चिकित्सा मंत्री व स्वास्थ्य प्रशासन की चिंता की मुख्य वजह है कि निपाह का कोई कारगर ईलाज नहीं हैं। 1998 में निपाह सबसे पहले मलेशिया में फैला था वहां इस रोग ने करीब 300 लोगों की जान ले ली थी। 2004 में इसके कुछ मामले बांग्लादेश में भी देखे गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">खान-पान व रहन-सहन की सावधानी ही निपाह जैसे रोगों से बचने का खास उपाय है। अभी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इससे बचने का तरीका है, खजूर के खेतों में गिरे पड़े खजूर न खाना, खजूर का खुला पड़ा रस नहीं पीना, क्योंकि वह चमगादड़ों का झूठा हो सकता है। बीमार सूअरों व घोड़ों से दूर रहना। भारत व बांग्लादेश मे संक्रामण रोग इंसान से इंसान के संपर्क में आने से ज्यादा फैलते हैं, क्योंकि यहां आबादी बहुत ज्यादा है। उधर अफ्रीका के कई देशों जाम्बिया, रवांडा, बुरूंडी में इबोला का वायरस फिर से सक्रिय हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले वर्ष इस रोग ने करीब 400 लोगों की जान ले ली थी, भारत में इसका एक केस सामने आया था। हालांकि इबोला से बचाव का अब टीका तैयार हो चुका है लेकिन इसका बचाव भी सावधानियां ही हैं। इबोला संक्रमित व्यक्ति के घावों व थूक, मलमूत्र से बचा जाना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को इबोला प्रभावित क्षेत्र की यात्रा करनी भी पड़े तब वह इससे बचाव का वेक्सीन अवश्य लगावा ले।</p>
<p style="text-align:justify;">समय-समय पर फैलने वाले संक्रामक रोगों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह अपने जागरूकता कार्यक्रम चलाएं। आमजन को जानलेवा संक्रामक रोगों की पूरी जानकारी, उनके फैलने के कारण, ऋतुएं व बचाव के तरीके अवश्य बताए जाने चाहिए। संक्रामक रोगों के वक्त फैलने वाली अफवाहों या इनके इलाज के नाम पर ठगने वाले नीम हकीमों पर सरकारी कार्रवाई हो। सक्रांमक रोगों के फैलने पर अक्सर देखा जाता है कि लोगों की किसी स्थान विशेष की मिट्टी, पानी भभूत या फिर किसी तांत्रिक आदि की शक्ति या श्राप का भी प्रचार होने लगता है, इससे समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सक्रांमक रोगों से बचाव के अलावा पौष्टिक खुराक व रोगों से लड़ने के लिए प्राकृतिक शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की जानकारी देशवासियों को रहे। अच्छी खुराक व शारीरिक व्यायाम पूरे राष्ट के लिए एक नि:शुल्क औषधि है जो किसी जीव या मनुष्य को जल्द संक्रमित नहीं होने देती अत: समाज में इसे प्राप्त करना एक आदत बनाया जाए। अभी भारत में ग्रामीण लोग यहां संक्रामक रोगों से अनभिज्ञ रहते वहीं उन्हें सावधानियों का भी पता नहीं रहता। शहरी लोग आलसी किस्म एवं मिलावटी खाने के आदी हैं, इससे देश में संक्रामक रोग कई दफा स्वास्थ्य विभाग के प्रयत्नों को भी विफल कर देते हैं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 09:09:43 +0530</pubDate>
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