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                <title>animals - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>बेजुबानों की संभाल करने में जुटी ब्लॉक मलोट की साध-संगत</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए साध-संगत निरंतर कर रही मानवता भलाई के कार्य | Malout News 461 के करीब पक्षियों के लिए पानी वाले सकोरे, घौंसले व पशुओं के लिए बांटी पानी वाली मिट्टी की टंकियां मलोट (सच कहूँ/मनोज)। पूज्य गुुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा मानवता भलाई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/dera-devotees-of-block-malout-engaged-in-taking-care-of-animals-and-birds/article-53383"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/malout-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए साध-संगत निरंतर कर रही मानवता भलाई के कार्य | Malout News</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>461 के करीब पक्षियों के लिए पानी वाले सकोरे, घौंसले व पशुओं के लिए बांटी पानी वाली मिट्टी की टंकियां</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मलोट (सच कहूँ/मनोज)।</strong> पूज्य गुुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा मानवता भलाई के 159 कार्य चलाए जा रहे हैं, जिनमें 42वें कार्य ‘पक्षी उद्धार’ मुहिम के तहत जहां गर्मियों के दिनों में देश और विदेशों की साध-संगत पक्षियों के लिए पानी व चोगे का प्रबंध करती है, वहीं ब्लॉक मलोट की साध-संगत भी इसी कार्य में जोरों-शोरों से जुटी हुई है, ताकि कोई पक्षी भूखा-प्यासा न रहे और उनके अस्तित्व को बचाया जा सके। Malout News</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार 11 मई को जोन नम्बर 6 की साध-संगत ने गर्मियों के दिनोंं में पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए 104 पानी वाले सकोरे बांटे। इसके बाद 13 मई को जोन 3 की साध-संगत द्वारा 100 के करीब पानी वाले सकोरे व 11 जून को ‘सच कहूँ’ की 21वीं वर्षगांठ मौके 31 पानी वाले सकोरे टांगे गए। यहीं बस नहीं 16 जून को जोन 5 की साध-संगत ने 50 पानी वाले सकोरे, 75 पैकेट चोगा और 25 घौंसले बांटे। इसके बाद 24 जून को जोन नम्बर 4 की साध-संगत द्वारा स्वामी राम तीर्थ पार्क, पटेल नगर स्थित राम बाग, श्री हरिकृष्ण पब्लिक हाई स्कूल, प्रिंस मॉडल स्कूल में सकोरे टांगे गए और साध-संगत को कुल 66 पानी वाले सकोरे व 15 बेसहारा पशुओं के लिए मिट्टी की टंकियां बांटी गई। इसके अलावा 3 जुलाई को जोन 2 की साध-संगत ने गुरू पुर्णिमा के शुभ अवसर पर 60 पानी वाले सकोरे, चोगा व 10 घौंसले बांटे गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि गर्मियों के दिनोंं में ब्लॉक मलोट की साध-संगत पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए लगातार प्रयासरत रहती है और अपने घरों के बाहर, छत्त व सांझी जगहों पर पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए सकोरे व चोगे का प्रबंध करती है और यह मानवता भलाई का कार्य पिछले कई सालों से पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं के अनुसार ही कर रही है। Malout News</p>
<h3 style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी का धन्यवाद, जिनकी बदौलत साध-संगत कर रही मानवता भलाई के कार्य: प्रेमी सेवक</h3>
<p style="text-align:justify;">ब्लॉक मलोट के प्रेमी सेवक अनिल कुमार इन्सां, जोनों के प्रेमी सेवकों मक्खन लाल इन्सां, सुनील इन्सां, रोबिन गाबा इन्सां, डॉ. इकबाल इन्सां, नरेन्द्र भोला इन्सां व बिंटू पाल इन्सां ने कहा कि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं के तहत ब्लॉक मलोट की साध-संगत मानवता भलाई के कार्य बढ़चढ़ कर कर रही है और आगे भी यह कार्य इसी तरह जारी रहेंगे। उन्होंने पूज्य गुरु जी का तहेदिल से धन्यवाद किया, जिनकी बदौलत साध-संगत मानवता भलाई के कार्य कर रही है। Malout News</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="एमए लोक प्रशासन के द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर में छाई शाह सतनाम जी गर्ल्स कॉलेज की छात्राएं" href="http://10.0.0.122:1245/naman-tanwar-topped-the-university-with-eighty-percent-marks/">एमए लोक प्रशासन के द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर में छाई शाह सतनाम जी गर्ल्स कॉलेज की छात्राएं</a></p>
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                                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/dera-devotees-of-block-malout-engaged-in-taking-care-of-animals-and-birds/article-53383</link>
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                <pubDate>Sat, 07 Oct 2023 21:29:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&amp;#8216;Thanela&amp;#8217; disease: दुधारू पशुओं के ‘थनैला’ रोग का अब आयुर्वेदिक उपचार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। Thanela disease: चिकित्सा विशेषज्ञों ने दुधारू पशुओं में होने वाले घातक रोग ‘थनैला’ के उपचार के लिए आयुर्वेदिक पद्धति के विकसित कर लिया है जिससे किसानों को इसके इलाज पर अब भारी-भरकम रकम भी खर्च नहीं करनी होगी और उन्हें दूध का नुकसान भी नहीं होगा। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/now-ayurvedic-treatment-of-thanaila-disease-of-milch-animals/article-49669"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/animals.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> Thanela disease: चिकित्सा विशेषज्ञों ने दुधारू पशुओं में होने वाले घातक रोग ‘थनैला’ के उपचार के लिए आयुर्वेदिक पद्धति के विकसित कर लिया है जिससे किसानों को इसके इलाज पर अब भारी-भरकम रकम भी खर्च नहीं करनी होगी और उन्हें दूध का नुकसान भी नहीं होगा। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के अध्यक्ष मीनेश शाह ने बताया कि भारतीय चिकित्सा विशेषज्ञों ने मामूली खर्च में थनैला रोग के उपचार का आयुर्वेदिक तरीका ढूंढ लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस रोग से पीड़ित दुधारू जानवरों पर अब एंटीबायोटिक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसके इस्तेमाल से इसका एक हिस्सा जानवरों के दूध में चला जाता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी नहीं है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अंग्रेजी दवाओं की तुलना में उपचार होता है जल्द</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ शाह ने बताया कि एलोवेरा, हल्दी और चूने के मिश्रण से थनैला रोग का उपचार अंग्रेजी दवाओं की तुलना में काफी कम समय में पूरा कर लिया जाता है। एलोेवेरा, हल्दी और चूने के एक हिस्से को मिलाकर इसे मलहम की तरह बनाया जाता है और पीड़ित जानवर के रोगग्रस्त हिस्से पर दिन में आठ बार इसका लेपन किया जाता है। इस दवा का लेपन तीन दिनों तक लगातार किया जाता है जिसके बाद जानवर पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है। यह प्रयोग 89 प्रतिशत सफल रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देश में इस समय 303.76 मिलियन मवेशी</h3>
<p style="text-align:justify;">20वीं पशुधन गणना के अनुसार देश में लगभग 303.76 मिलियन मवेशी हैं। इसके अलावा 74.26 मिलियन भेड़ , 148.88 मिलियन बकरियां और 9.06 मिलियन सुअर हैं। डेयरी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में पांच प्रतिशत का योगदान देती है और आठ करोड़ से अधिक किसानों को सीधे रोजगार देती है। भारत दूध उत्पादन में पहले स्थान पर है जो वैश्विक दूध उत्पादन में 23 प्रतिशत का योगदान देता है। पिछले आठ वर्षों के दौरान दूध उत्पादन में 51.05 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और अब यह वर्ष 2021-22 के दौरान 221.06 मिलियन टन पहुंच गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आर्थिक नुकसान भी होगा कम</h3>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इससे पहले थनैला रोग से पीड़ित दुधारू पशुओं को अंग्रेजी दवा के माध्यम से उपचार किया जाता था, जिसमें लंबा समय लगता था और किसानों को 20-25 हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे। इस दौरान जानवरों का दूध बहुत कम हो जाता था और कई बार देर से रोग का पता चलने पर उसकी मौत भी हो जाती थी। इसके कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान भ होता था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस कारण होता है थनैला रोग</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ शाह और चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि दुधारू जानवरों में बैक्टीरिया और फंगस संक्रमण के कारण जानवर थनैला रोग की चपेट में आ जाते हैं। ऐसा साफ-सफाई में कमी और नमी के कारण भी होता है। कई बार तो पोषण में कमी के कारण भी जानवर इस बीमारी के शिकार हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Health : स्वास्थ्य पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का हमला" href="http://10.0.0.122:1245/attack-of-multinational-companies-on-health/">Health : स्वास्थ्य पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का हमला</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2023 18:26:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुधारू पशुओं पर ठंड का असर</title>
                                    <description><![CDATA[पशुपालकों को हो रही परेशानी पशुओं की खुराक बढ़ाएं:-चिकित्सक छोटे कटड़े-कटड़ियों को ठंड से बचा कर रखें, हो सकता है निमोनिया:-चिकित्सक महंगाई के चलते नहीं दे पा रहे पशुओं को उचित खुराक:-पशुपालक भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। आधे से अधिक दिसम्बर माह बीत जाने के बाद राजस्थान से सटे भिवानी जिला में ठंड का असर देखने को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/effect-of-cold-wave-on-milk-animals-of-during-winter/article-41381"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/milch-animals.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>पशुपालकों को हो रही परेशानी</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पशुओं की खुराक बढ़ाएं:-चिकित्सक</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>छोटे कटड़े-कटड़ियों को ठंड से बचा कर रखें, हो सकता है निमोनिया:-चिकित्सक</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>महंगाई के चलते नहीं दे पा रहे पशुओं को उचित खुराक:-पशुपालक</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)।</strong> आधे से अधिक दिसम्बर माह बीत जाने के बाद राजस्थान से सटे भिवानी जिला में ठंड का असर देखने को मिला।जहां ठंड से आमजन जीवन अयस्त-व्यस्त है।वहीं इसका असर दुधारू पशुओं पर भी देखा जा रहा है। अगर पशु चिकित्सक की माने तो 15 से 25 प्रतिशत उनके दूध में कमी आई है।इसके लिए पशु पालक पशुओं की खुराक में बढ़ोतरी करें।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="गहरी खाई में गिरी कार, आठ तीर्थयात्रियों की मौत, दो घायल" href="http://10.0.0.122:1245/car-falls-into-deep-gorge-8-killed/">गहरी खाई में गिरी कार, आठ तीर्थयात्रियों की मौत, दो घायल</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">ठंड का प्रभाव पशुओं पर पड़ रहा</h3>
<p style="text-align:justify;">पशुपालकों ने बताया कि ठंड पड़नी शुरू हो चुकी है। जिसका प्रभाव आमजन के साथ साथ पशुओं पर पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि पशुओं के दूध में काफी कमी आई है दुधारू पशुओं का दूध सूख रहा है।उन्होंने कहा कि खर्चे व महंगाई अधिक होने की वजह से पर्याप्त मात्रा में चाट ,खल और बिनौला पशुओं को नहीं दे पा रहे हैं।उन्होंने सरकार से गुजारिश करते हुए कहा कि उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जाए ताकि पशुओं का पालन पोषण हो सके और अपना कार्य चला सकें।<br />
बाइट:-धनपति,माया चयनपाल सिंह(पशुपालक)</p>
<h3 style="text-align:justify;">पशुओं की खुराक बढ़ाएं:-चिकित्सक</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं पशु चिकित्सक ने बताया कि लगातार तापमान में गिरावट के चलते पशुओं में इसका प्रभाव पड़ रहा।उन्होंने बताया कि 15 से 25 प्रतिशत दुधारू पशुओं में दूध की कमी आई है।उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि पशुपालक अपने पशुओं की खुराक को बढ़ा दें।उन्होंने कहा कि अब जितनी मात्रा में पशुओं को चारा डाला जा रहा है वह पर्याप्त नहीं है क्योंकि उसकी एनर्जी की खपत टेम्प्रेचर मेंटेन करने में लग जाती है।<br />
विजय सनसनवाल (पशु चिकित्सक)</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्थिति को कंट्रोल कर पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा</h3>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सक ने बताया कि पशुओं को चारे में तूड़ा के साथ साथ चाट ,खल बिनौला मिलाकर दें ताकि दूध में बढ़ोतरी बनी रहे। ठंड से पशुओं को बचाने के लिए ठंडा पानी न पिलाएं और जब भी धूप निकले तो पशुओं को बाहर बांधे और बोरी से ढाँपकर सखे।उन्होंने कहा कि छोटे कटड़े- कटड़ियों, बछड़े -बछड़ियों निमोनिया की काफी शिकायत आ रही है उनका विशेष ध्यान रखें।उन्होंने बताया कि किसी पशु को निमोनिया हो जाता है तो तुरंत पशु अस्पताल में उसका इलाज करवाएं और पशुओं के इलाज के लिए प्रदेश सरकार द्वारा निशुल्क मेडिसिन सुविधाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि यदि पशु का इलाज समय पर नहीं करवाया गया तो बाद में स्थिति को कंट्रोल कर पाना बहुत मुश्किल होता है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/effect-of-cold-wave-on-milk-animals-of-during-winter/article-41381</link>
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                <pubDate>Sat, 24 Dec 2022 15:28:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&amp;#8230;किस बड़ी घटना का है इंतजार?</title>
                                    <description><![CDATA[गांव बारना में आए दिन जोहड़ में गिर कर प्राण त्याग रही गऊ माता गांव की धरोहर जोहड़ हो रहे पंचायतों की उपेक्षा का शिकार अनेकों बेजुबानों की हो चुकी इस जोहड़ में फंसने से मौत ग्रामीणों ने की जोहड़ की सफाई करने की मांग कुरुक्षेत्र(सच कहूँ, देवीलाल बारना)। गांव बारना का जोहड़ बेजुबान पशुओंं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cows-and-other-animals-are-facing-problem-in-barna-village/article-40830"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/cow.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>गांव बारना में आए दिन जोहड़ में गिर कर प्राण त्याग रही गऊ माता</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>गांव की धरोहर जोहड़ हो रहे पंचायतों की उपेक्षा का शिकार </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>अनेकों बेजुबानों की हो चुकी इस जोहड़ में फंसने से मौत </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>ग्रामीणों ने की जोहड़ की सफाई करने की मांग</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र(सच कहूँ, देवीलाल बारना)।</strong> गांव बारना का जोहड़ बेजुबान पशुओंं के लिए मौत के कुंए के समान बन गया है। इस जोहड़ में उगे पान पत्ते में फंसने से अनेकों गऊएं व अन्य पशुओं की मौत चुकी है। आए दिन कोई न कोई गऊ या अन्य जानवर इसमें फंसा दिखाई पड़ता है। हालांकि अनेकों बार ग्रामीणों द्वारा इस जोहड़ में फंसी गऊओं को अपनी जान पर खेलकर बचाया भी है लेकिन ग्रामीण जोहड़ की इस स्थिति से बहुत परेशान हैं। ऐसा ही शनिवार सुबह भी देखने को मिला जब एक गऊ को जोहड़ में फंसा हुआ देखा गया। गऊ को जोहड़ में फंसा देख दर्जनभर ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद इस गऊ को जोहड़ से बाहर निकाला। जोहड़ में गिरने से हो रही गऊओं की मौत से ग्रामीणों में काफी रोष देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण सुखविंद्र सिंह, प्रवीण कश्यप, रामचंद्र, सुरेंद्र सैन, सुलतान सिंह, फूलकुमार, राहुल शर्मा, रामकुमार, रामजवाया, पाला राम, प्रिंस, बीरा राम सहित अन्य ग्रामीणों ने गाए को बाहर निकाला व गुड खिलाया व दवाई दी। ग्रामीण सुलतान ने कहा कि यह जोहड़ तकरीबन 20 फूट गहरा है। कश्यप बस्ती इस जोहड़ से बिल्कुल सटी हुई है। ऐसे में कोई बड़ा हादस होने का डर बना रहता है। वहीं जोहड़ की सफाई न होने से जहरीले जानवर भी जोहड़ से निकलकर घरों में घुसते रहते हैं। ग्रामीण रामचंद्र सहारण ने कहा कि सालों से इस जोहड़ की यही स्थिति है लेकिन प्रशासन व पंचायत ने इस ओर कभी ध्यान नही दिया। उन्होने कहा कि अनेकों बार ग्रामीणों द्वारा इस जोहड़ में फंसी गऊओं को अपनी जान पर खेलकर निकाला गया है। लेकिन पंचायत द्वारा कभी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि मौत के कुंए बने इस जोहड़ की सफाई करवाई जाए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>जोहड़ होते हैं गांव की धरोहर : सुरेंद्र सैन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण सुरेंद्र सिंह ने कहा कि जोहड़ को गांव में पूजनीय माना जाता है और ये गांव की धरोहर हैं लेकिन पंचायत की लापरवाही के चलते इस ओर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। इसलिए सरकार को इस ओर कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। बारना गांव में तीन जोहड़ है और सभी जोहड़ों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। कोई जोहड़ ऐसा नही है जहां पर पशुपालक अपने पशुओं को पानी पिला सकें व नहला सकें।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Dec 2022 13:28:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बठिंडा : सरकारी गौशाला हरराएपुर में नरक भरी जिंदगी जी रहे पशु</title>
                                    <description><![CDATA[गौशाला के मैनेजर बलजीत सिंह ने कहा कि गौशाला में किसी किस्म की कोई कमी नहीं है।
उन्होंने बताया कि हरे चारों की किल्लत के कारण हरे की समस्या आई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/animals-living-hellish-life-in-government-gaushala-hararepur/article-12395"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/government-cowshed-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">एनजीओ जागो ग्राहक के नेताओं ने किया दौरा, सरकार से की गौशाला के सुधार की मांग | Government Cowshed</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा(अशोक गर्ग )।</strong> बठिंडा जिले में गांव हरराएपुर में बनी <strong>(Government Cowshed)</strong> सरकारी गौशाला में गाय नरकभरी जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। यह गाय बेशक बोल कर नहीं बता सकतीं परंतु इनकी हालत यह ही बयान करती हैं। बीते दिनों एनजीओ ‘जागो ग्राहक जागो’ के संजीव गोयल और वातावरण प्रेमी क्लब के संजीव कुमार सिंगला, पंकज कुमार ने सरकारी गौशाला हरराएपुर का दौरा किया। उन्होंने बताया कि वहां गायों, सांडों व बछड़ियों का का बुरा हाल था और काफी गाय मरी हुई थी। गौशाला में कई बछड़ियों की टांगें भी टूटीं हैं जो चल फिर नहीं सकती, जिनका कोई इलाज नहीं किया जा रहा। संजीव सिंगला ने बताया कि जब वह गौशाला के दौरे पर गए थे तो वहां हर सैड में लगभग 4-5 गाय व बछड़ियां मरी हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिला कर 12 -13 पशु मृत अवस्था में पड़Þे थे, जब कि 5-6 गाय मरने के किनारे पड़ी थी, जिनको बाकी पशु कुचल रहे थे। गौशाला में पशुओं के खाने को सिर्फ भूसा ही दिया जा रहा है और इसके अलावा किसी भी तरह का कोई चारा नहीं दिया जा रहा। यहां तक कि हरा काटने वाली मशीन भी पता चला खराब पड़ी है। सिंगला ने बताया कि गौशाला को जो रास्ता जाता है वह भी कच्चा है और बारिशों के दौरान इस रास्ते का बुरा हाल हो जाता है, जिससे गौशाला को जाने वाले सेवकों को बहुत दिक्कत आती है। संस्था नेताओं ने सरकार से मांग की कि इस गौशाला का सुधार कर गायों को बचाया जाये। जब डिप्टी कमिशनर बठिंडा के साथ संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पहले भी इस गौशाला में संभाल के बिना करीब 1200 पशु मर चुके हैं जबकि इस गौशाला के चेयरमैन डिप्टी कमिशनर बठिंडा हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">गौशाला में किसी किस्म की कोई कमी नहीं : मैनेजर</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">गौशाला के मैनेजर बलजीत सिंह ने कहा कि गौशाला में किसी किस्म की कोई कमी नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि हरे चारों की किल्लत के कारण हरे की समस्या आई है।</li>
<li style="text-align:justify;">जो हरा कतरन वाली मशीन खराब थी वह चालू करवा दी है।</li>
<li style="text-align:justify;">सरकारी डॉक्टर भी रोजमर्रा ही इन पशुओं का चैकअप करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">उनसे गायों के मरने संबंधी पूछे सवाल में कहा कि गायों व सांड नगर निगम की ओर से यहां छोड़े जाते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">शहर अंदर गन्दगी, लिफाफे आदि खाने साथ पहले ही बीमार होते हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">जब यह पशु मर जाते हैं तो डॉक्टरों की ओर से बाकायदा पोस्टमार्टम किया जाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">इनके अंदर से लिफाफे, सिरिंजें व गली वस्तुएं मिलती हैं, जिस कारण यह मर जाते हैं।</li>
</ul>
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</span></span></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2020 20:29:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>काल बनकर घूम रहे आवारा पशु</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक राजस्थान भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक है। यही पर्यटन स्थल आज आवारा पशुओं की सैरगाह बना हुआ है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आवारा पशुओं की समस्या नासूर बन गई है (Problems of stray animals in capital Jaipur) । यहाँ आवारा गाय, सांड, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/problems-of-stray-animals-in-capital-jaipur/article-6803"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/cow.jpg" alt=""></a><br /><h2>राजस्थान भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक</h2>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक है। यही पर्यटन स्थल आज आवारा पशुओं की सैरगाह बना हुआ है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आवारा पशुओं की समस्या नासूर बन गई है <strong>(Problems of stray animals in capital Jaipur)</strong> । यहाँ आवारा गाय, सांड, सूअर, बन्दर और कुत्ते राजधानी के लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बन गए है। आवारा पशुओं ने राजधानी जयपुर में पिछले एक साल में एक विदेशी पर्यटक सहित तीन लोगों की जान ले ली। जबकि प्रदेश भर में एक दर्जन लोग मौत के मुंह में समा चुके है। घायलों की संख्या सैंकड़ों में है। हाई कोर्ट ने प्रशासन को फटकारा तब आवारा पशुओं की धर पकड़ हुई। कुछ दिनों बाद प्रशासन ने अपने हाथ खींच लिए और इसी के साथ आवारा पशुओं के धर पकड़ का नाटक खत्म हो गया। आवारा पशु पहले की भांति बेखौफ होकर आतंक फैलाने लगे।</p>
<h2>शहरों में आवारा पशुओं के कातिलाना कहर की खबरें अकसर मीडिया में सुर्खियां बनती रहती हैं</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">छोटे नगरों से लेकर बड़े मैट्रो शहरों में आवारा पशुओं के कातिलाना कहर की खबरें अकसर मीडिया में सुर्खियां बनती रहती हैं</li>
<li style="text-align:justify;">फिर भी उन पर लगाम नहीं कसी जा रही। अगर प्रशासन कुछ सख्ती दिखाता भी है</li>
<li style="text-align:justify;">तो आनन फानन में अभियान चलकर आवारा पशुओं को पकड़ने की मुहिम चलती है</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन फिर थोड़े दिन बाद मामला ठंडा पड़ जाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">सही तो यह है आवारा पशुओं का यह मुद्दा हमें देखने में छोटा लगता है लेकिन है बड़ा गंभीर।</li>
<li style="text-align:justify;">गाय भैंस या सांड़ ही क्यों, आवारा कुत्ते भी लोगों की नाक में कम दम नहीं करते।</li>
<li style="text-align:justify;">बच्चे तो उन के डर से घर से बाहर तक नहीं निकल पाते।</li>
<li style="text-align:justify;">अब तो शहरों में बंदरों का खौफ भी देखा जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">अस्पतालों में बंदरों के काटने के बहुत से मामले सामने आने लगे हैं।</li>
</ul>
<h2>छोटे स्कूली बच्चे इन आवारा पशुओं के आपसी झगड़े को देख काफी भयभीत हो जाते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">राजधानी में पिछले कई महीनों से आवारा पशुओं की भरमार हो गई है। बाजार क्षेत्र सहित सकरी गलियों में साँडों व आवारा पशुओं का निरंकुश होकर घूमना लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इनके आपस में झगड़ने के कारण कई बुजुर्ग-महिलाएँ एवं बच्चे भी इनकी चपेट में आने के कारण चोटिल हो जाते हैं। कभी-कभार तो छोटे स्कूली बच्चे इन आवारा पशुओं के आपसी झगड़े को देख काफी भयभीत हो जाते हैं। अक्सर खाद्य व सब्जी आदि की दुकानों पर भी यह अपना मुँह मारते रहते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में समुचित सफाई नहीं होने और जगह-जगह कचरे के ढेर लग रहने से वहाँ आवारा मवेशियों का जमघट लगा रहता है। भयावह स्थिति तब बन जाती है, जब ये आवारा मवेशी मार्गों के किनारे लगे कचरे के ढेरों पर आपस में झगड़ते हैं। कई बार तो बाजार क्षेत्र में भी इनके आपस में झगड़ने से यातायात बाधित होता है</p>
<h2>जयपुर नगर निगम ने कुछ जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ हालाँकि कार्यवाही की है</h2>
<p style="text-align:justify;">दिन हो या रात आवारा पशु सड़क पर झुंड बनाकर बैठ जाते हैं जिससे लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। राजधानी जयपुर में बड़ी संख्या में पशु डेयरियां है। पशु पालक जब तक गाय भैंस दूध देती है उसका दूध निकालते हैं और उसके बाद पशुपालक इन्हें खुला छोड़ देते हैं। इसके बाद जब वह फिर से दूध देने की स्थिति में आती है तो उसे फिर से पकड़ लेते हैं। कुछ लोग तो सुबह शाम दूध निकालने के बाद जानवरों को खुला छोड़ देते हैं। विदेशी पर्यटक की मौत के बाद जयपुर नगर निगम ने कुछ जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ हालाँकि कार्यवाही की है और आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया है। मगर देखने की बात यह है कि राजधानी में पशु डेयरियों के अलावा हजारों की संख्या में आवारा पशु कॉलोनियों में विचरण करते मिल जाएंगे। इनके मालिक गायों का दूध निकलने के बाद इन्हें विचरण के लिए छोड़ देते है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
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<p>Problems, Stray, Animals, Jaipur</p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/problems-of-stray-animals-in-capital-jaipur/article-6803</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Dec 2018 10:16:36 +0530</pubDate>
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                <title>किसे सुनाएं बेजुबान पक्षी व जानवर अपनी व्यथा</title>
                                    <description><![CDATA[मानव की प्रकृति में दखल देने की आदत ने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया है। बिगड़े संतुलन के चलते वातावरण में अनचाहे परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बिना मौसम के आंधी, वर्षा का आना रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल हो गया है। ऊपर से विकास के नाम पर लाखों पेड़ों की बलि ने इसे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/who-tell-you-wild-birds-and-animals/article-4153"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/birds.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मानव की प्रकृति में दखल देने की आदत ने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया है। बिगड़े संतुलन के चलते वातावरण में अनचाहे परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बिना मौसम के आंधी, वर्षा का आना रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल हो गया है। ऊपर से विकास के नाम पर लाखों पेड़ों की बलि ने इसे और विकराल रूप बना दिया है। प्राकृतिक असंतुलन से मानव जाति प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी तो बेजुबानों पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मानव तो अपने विपरीत हालातों से समझौता कर अपने अनुकूल मशीनरी के द्वारा समझौता कर सकता है पर इन बेजुबान पक्षी व जानवर अपनी व्यथा किसे सुनाएं। उन्हें तो अपने हालातों से जूझना ही पड़ता है। भूखे प्यासे ये जानवर जहां कीटनाशकों का काल बन रहे हैं वहीं शिकारियों की पैनी नजर भी इन पर बनी रहती है। राजस्थान के कई हिस्सों में हिरण व पैंथर पानी की तलाश में ही अपनी जान गवा देते हैं। आमजन व समाजसेवी संस्थाओं को चाहिए कि तालाबों व पोखरों में पीने का प्रबंध करें व जहां पानी हैं उसे कचरा डालकर खराब ना करें।</p>
<p style="text-align:justify;">इन बेजुबानों की अगर हर कोई सहायता कर सकता है तो वो हैं इनके लिए पानी व भोजन का प्रबंध करना। इन बेजुबानों की सुध लेने की जागरूकता का काम किया है डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने। पूज्य गुरूजी के सिखाए मार्ग पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने पहल की और अपने घरों की छत्तों पर पानी के कटोरे व चोगा रखना शुरू किया। डेरा सच्चा सौदा का यह प्रयास रंग लाया और अनुयायियों के घरों की मंडेर पर मंडराते पक्षियों को देख उनके पड़ौसी भी अपने घरों की छत्तों पर कटोरे व चोगा रखने लगे। डेरा सच्चा सौदा का अनुसरण किया समाजसेवी संस्थाओं ने।</p>
<p style="text-align:justify;">आज देश की अनेक समाजसेवी संस्थाए एक अभियान के रूप में पार्कों व घरों में कटोरे बांधने लगी है तो कहीं पर पक्षियों के लिए भोजन भी रखने लगे हैं। पर दुख होता हैं जब समाजसेवी संस्थाओं द्वारा लगाए गए कटोरे ज्यादतर पानी को तरसते रहते हैं। इसलिए इन संस्थाओं को चाहिए कि कटोरे टांगने के साथ साथ उनमें पानी भरने के लिए भी अपने स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाएं। इसके अलावा सरकार को भी चाहिए कि वह इन बेजुबानों के लिए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों के साथ साथ स्थानीय निकाय के पार्कों में पक्षियों के लिए कटोरे लगाकर उनमें पानी डालने की व्यवस्था करवाएं व हो सके तो इन स्थानों पर जनसहयोग से पक्षियों के लिए भोजन भी रखा जा सकता है। बस जरूरत हैं जागरूकता की। एक जागरूकता की मुहिम व सरकार का सार्थक प्रयास ही इन बेजुबानों का सहारा बन सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Jun 2018 09:06:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आग की लपटों से घिरा जंगल, बेजुबानों पर संकट</title>
                                    <description><![CDATA[देहरादून (एंजेसी)। इन दिनों छह राष्ट्रीय पार्क, सात अभयारण्य और चार कंजर्वेशन रिजर्व वाला उत्तराखंड इन दिनों जंगलों की आग से हलकान है। 71 फीसद वन भूभाग वाले राज्य में जंगल सुलग रहे हैं। इससे वन संपदा को तो खासा नुकसान पहुंच ही रहा है, बेजुबान भी जान बचाने को इधर-उधर भटक रहे हैं। यही नहीं, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/fire-in-forest-crisis-on-animals/article-3750"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/aag.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>देहरादून (एंजेसी)। </strong>इन दिनों छह राष्ट्रीय पार्क, सात अभयारण्य और चार कंजर्वेशन रिजर्व वाला उत्तराखंड इन दिनों जंगलों की आग से हलकान है। 71 फीसद वन भूभाग वाले राज्य में जंगल सुलग रहे हैं। इससे वन संपदा को तो खासा नुकसान पहुंच ही रहा है, बेजुबान भी जान बचाने को इधर-उधर भटक रहे हैं। यही नहीं, वन्यजीवों के आबादी के नजदीक आने से मानव और इनके बीच संघर्ष तेज होने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसे में जंगल की दहलीज पार करते ही उनके शिकार की भी आशंका है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, दावा है कि राज्यभर में गांवों, शहरों से लगी वन सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। साथ ही जंगल में वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। राजाजी व कार्बेट टाइगर रिजर्व से लेकर उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ वाइल्डलाइफ सेंचुरी तक के जंगल आग की गिरफ्त में हैं। न सिर्फ संरक्षित क्षेत्र, बल्कि अन्य वन प्रभागों में सभी जगह जंगल सुलग रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूरतेहाल, बेजुबानों को इस दोहरी चुनौती से बचाने की चुनौती विभाग के सामने है। प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डीवीएस खाती भी इससे इत्तेफाक रखते हैं। वह कहते हैं कि पारे की उछाल और जंगल की आग के मद्देनजर वन्यजीवों को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसलिए राज्यभर में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए सभी संरक्षित-आरक्षित वन क्षेत्रों में गांव-शहरों से लगी सीमा पर वनकर्मियों की नियमित गश्त बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही जंगलों में बनाए गए वाटर होल में पानी का इंतजाम करने पर खास फोकस किया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रभावित हो सकती हैं उड़ानें</h3>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल हवा की गति ठीकठाक है। यदि यह कम हुई तो धुएं व धूल के कणों से बनी धुंध के कारण स्मॉग जैसी स्थिति बनने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के अनुसार, वर्तमान में धुएं और धूल के कणों से बनी धुंध से दृश्यता कम हो गई है। ऐसे में हेलीकॉप्टर ऑपरेशन में दिक्कत आ सकती है। हवा की गति कम हुई तो स्मॉग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकते।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जंगल की लपटों से घिरा विद्यालय</h3>
<p style="text-align:justify;">पहाड़ों में विकराल होती जंगल की आग अब आबादी के लिए खतरा बनने लगी है। मंगलवार को जंगल से सटे केंद्रीय विद्यालय, गढ़वाल मंडलायुक्त कार्यालय और इसके परिसर में बने सरकारी आवास लपटों से घिर गए। इससे वहां अफरातफरी मच गई। घटना के वक्त विद्यालय में 650 छात्र-छात्राएं मौजूद थे। आननफानन बच्चों को कंडोलिया खेल मैदान में पहुंचाया गया। मौके पर पहुंचे अग्निशमन कर्मी, वन और पुलिस विभाग के लोगों ने चार घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 11:03:40 +0530</pubDate>
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