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                <title>science - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में योग आयुर्वेद का सम्मिलन करेगा रोगों का उन्मूलन: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में योग एवं आयुर्वेद के सम्मिलन को प्रमाण आधारित प्रभावी उपचार का माध्यम साबित होने पर खुशी जाहिर की और आशा जतायी कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का प्रयोग देश में रोगों के उन्मूलन एवं किफायती उपचार में महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/combination-of-yoga-and-ayurveda-in-modern-medical-science-will-eradicate-diseases/article-41426"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/modi-1-e16456914208532.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में योग एवं आयुर्वेद के सम्मिलन को प्रमाण आधारित प्रभावी उपचार का माध्यम साबित होने पर खुशी जाहिर की और आशा जतायी कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का प्रयोग देश में रोगों के उन्मूलन एवं किफायती उपचार में महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा। मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में कहा कि यानि सत्य को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती, जो प्रत्यक्ष है, उसे भी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन बात जब आधुनिक मेडिकल विज्ञान की हो, तो उसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है – प्रमाण। सदियों से भारतीय जीवन का हिस्सा रहे योग और आयुर्वेद जैसे हमारे शास्त्रों के सामने प्रमाण आधारित शोध की कमी, हमेशा-हमेशा एक चुनौती रही है – परिणाम दिखते हैं, लेकिन प्रमाण नहीं होते हैं। लेकिन, खुशी की बात है कि प्रमाण आधारित उपचार के युग में, अब योग और आयुर्वेद, आधुनिक युग की जाँच और कसौटियों पर भी खरे उतर रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>योग बहुत ज्यादा असरकारी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सभी ने मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर के बारे में जरूर सुना होगा। इस संस्थान ने शोध, नवान्वेषण और कैंसर केयर में बहुत नाम कमाया है। इस सेंटर द्वारा किये गये एक गहन शोध में सामने आया है कि स्तन कैंसर के मरीजों के लिए योग बहुत ज्यादा असरकारी है। टाटा मेमोरियल सेंटर ने अपने शोध के नतीजों को अमेरिका में हुई बहुत ही प्रतिष्ठित, स्तन कैंसर सम्मेलन में प्रस्तुत किया है। इन नतीजों ने दुनिया के बड़े-बड़े विशेषज्ञों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। क्योंकि, टाटा मेमोरियल सेंटर ने प्रमाण के साथ बताया है कि कैसे मरीजों को योग से लाभ हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सेंटर के शोध के मुताबिक, योग के नियमित अभ्यास से, स्तन कैंसर के मरीजों की बीमारी के, फिर से उभरने और मृत्यु के खतरे में, 15 प्रतिशत तक की कमी आई है। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में यह पहला उदाहरण है, जिसे, पश्चिमी तौर-तरीकों वाले कड़े मानकों पर परखा गया है। साथ ही, यह पहला अध्ययन है, जिसमें स्तन कैंसर से प्रभावित महिलाओं में, योग से, जीवन की गुणवत्ता के बेहतर होने का पता चला है। इसके दीर्घकालिक लाभ भी सामने आये हैं। टाटा मेमोरियल सेंटर ने अपने अध्ययन के नतीजों को पेरिस में हुए यूरोपियन सोसाइटी आॅफ मेडिकल आॅन्कोलॉजी सम्मेलन में प्रस्तुत किया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>योग के लाभों को लेकर अध्ययन किया जा रहा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने कहा कि आज के युग में, भारतीय चिकित्सा पद्दतियाँ, जितनी ज्यादा प्रमाण आधारित होंगी, उतनी ही पूरे विश्व में उनकी स्वीकार्यता, बढ़ेगी। इसी सोच के साथ, दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भी एक प्रयास किया जा रहा है। यहाँ, हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्दतियों को वैधानिकता प्रदान करने लिए छह साल पहले सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च की स्थापना की गई। इसमें अत्याधुनिक तकनीक और शोध विधियों का उपयोग किया जाता है। यह सेंटर पहले ही प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शोधपत्रिकाओं में 20 शोधपत्र प्रकाशित कर चुका है। अमेरिकन कॉलेज आॅफ कार्डियोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित एक शोधपत्र में सिन्कपी से पीड़ित मरीजों को योग से होने वाले लाभ के बारे में बताया गया है। इसी प्रकार, न्यूरोलॉजी जर्नल में, माईग्रेन में, योग के फायदों के बारे में बताया गया है। इनके अलावा कई और बीमारियों में भी योग के लाभों को लेकर अध्ययन किया जा रहा है जैसे हृदय रोग, अवसाद, अनिद्रा और गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होने वाली समस्यायें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही गोवा में विश्व आयुर्वेद कांग्रेस का आयोजन हुआ। इसमें 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए और यहां 550 से अधिक वैज्ञानिक शोधपत्र प्रस्तुत किये गए। भारत सहित दुनियाभर की करीब 215 कंपनियों ने यहाँ प्रदर्शनी में अपने उत्पाद को प्रदर्शित किया। चार दिनों तक चले इस एक्स्पो में एक लाख से भी अधिक लोगों ने आयुर्वेद से जुड़े अपने अनुभव का आनंद उठाया। उन्होंने कहा, ‘आयुर्वेद कांग्रेस में भी मैंने दुनिया भर से जुटे आयुर्वेद विशेषज्ञ के सामने प्रमाण आधारित शोध का आग्रह दोहराया। जिस तरह कोरोना वैश्विक महामारी के इस समय में योग और आयुर्वेद की शक्ति को हम सभी देख रहे हैं, उसमें इनसे जुड़ा प्रमाण आधारित शोध बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होगा। मेरा आपसे भी आग्रह है कि योग, आयुर्वेद और हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े हुए ऐसे प्रयासों के बारे में अगर आपके पास कोई जानकारी हो तो उन्हें सोशल मीडिया पर जरुर साझा करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>मन की बात</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में हमने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियों पर विजय पाई है। इसका पूरा श्रेय हमारे चिकित्सा विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और देशवासियों की इच्छाशक्ति को जाता है। हमने भारत से चेचक, पोलियो और ‘गिनी वाम’ जैसी बीमारियों को समाप्त करके दिखाया है। उन्होंने कहा, ‘आज, ‘मन की बात’ के श्रोताओं को, मैं, एक और चुनौती के बारे में बताना चाहता हूं, जो अब, समाप्त होने की कगार पर है। ये चुनौती, ये बीमारी है ‘कालाजार’। इस बीमारी का परजीवी यानि बालू मक्खी के काटने से फैलता है। जब किसी को ‘कालाजार’ होता है तो उसे महीनों तक बुखार रहता है, खून की कमी हो जाती है, शरीर कमजोर पड़ जाता है और वजन भी घट जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत को 2025 तक टी.बी. मुक्त</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह बीमारी, बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी को भी हो सकती है। लेकिन सबके प्रयास से, ‘कालाजार’ नाम की ये बीमारी, अब, तेजी से समाप्त होती जा रही है। कुछ समय पहले तक, कालाजार का प्रकोप, 4 राज्यों के 50 से अधिक जिलों में फैला हुआ था। लेकिन अब ये बीमारी, बिहार और झारखंड के 4 जिलों तक ही सिमटकर रह गई है। मुझे विश्वास है, बिहार-झारखंड के लोगों का सामर्थ्य, उनकी जागरूकता, इन चार जिलों से भी ‘कालाजार’ को समाप्त करने में सरकार के प्रयासों को मदद करेगी। ‘कालाजार’ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से भी मेरा आग्रह है कि वो दो बातों का जरूर ध्यान रखें। एक है – बालू मक्खी पर नियंत्रण, और दूसरा, जल्द से जल्द इस रोग की पहचान और पूरा इलाज। ‘कालाजार’ का इलाज आसान है, इसके लिए काम आने वाली दवाएं भी बहुत कारगर होती हैं। बस, आपको सतर्क रहना है।</p>
<p style="text-align:justify;">बुुखार हो तो लापरवाही ना बरतें, और, बालू मक्खी को खत्म करने वाली दवाइयों का छिड़काव भी करते रहें। जरा सोचिए, हमारा देश जब ‘कालाजार’ से भी मुक्त हो जाएगा, तो ये हम सभी के लिए कितनी खुशी की बात होगी। उन्होंने कहा कि सबका प्रयास की इसी भावना से, हम, भारत को 2025 तक टी.बी. मुक्त करने के लिए भी काम कर रहे हैं। बीते दिनों, जब, टी.बी. मुक्त भारत अभियान शुरू हुआ, तो हजारों लोग, टी.बी. मरीजों की मदद के लिए आगे आए। ये लोग निक्षय मित्र बनकर, टी.बी. के मरीजों की देखभाल कर रहे हैं, उनकी आर्थिक मदद कर रहे हैं। जनसेवा और जनभागीदारी की यही शक्ति, हर मुश्किल लक्ष्य को प्राप्त करके ही दिखाती है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Dec 2022 14:16:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विज्ञान की प्रमुख शाखाएँ एवं उनके अध्ययन विषय</title>
                                    <description><![CDATA[1. अरबोरीकल्चर — वृक्ष उत्पादन संबंधी विज्ञान 2. आरकोलॉजी — पुरातत्व सम्बन्धित विज्ञान की शाखा 3. आर्थोपीडिक्स — अस्थि उपचार का अध्ययन 4. इकोलॉजी — जीव व पर्यावरण के बीच पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन 5. इथेनोलॉजी — विभिन्न संस्कृतियों का तुलनात्मक अध्ययन 6. इथेनोग्राफी — किसी विशिष्ट संस्कृति का अध्ययन 7. इथोलॉजी — प्राणियोँ के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/major-branches-of-science-and-their-subjects-of-study/article-29352"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/science.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">1. अरबोरीकल्चर — वृक्ष उत्पादन संबंधी विज्ञान<br />
2. आरकोलॉजी — पुरातत्व सम्बन्धित विज्ञान की शाखा<br />
3. आर्थोपीडिक्स — अस्थि उपचार का अध्ययन<br />
4. इकोलॉजी — जीव व पर्यावरण के बीच पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन<br />
5. इथेनोलॉजी — विभिन्न संस्कृतियों का तुलनात्मक अध्ययन<br />
6. इथेनोग्राफी — किसी विशिष्ट संस्कृति का अध्ययन<br />
7. इथोलॉजी — प्राणियोँ के व्यवहार का अध्ययन<br />
8. एंटोमोलॉजी — कीटों का वैज्ञानिक अध्ययन<br />
9. एंथोलॉजी — फूलों का अध्ययन<br />
10. एग्रोस्टोलॉजी —घास का अध्ययन<br />
11. एकोस्टिक्स — यह ध्वनि से सम्बन्धित अध्ययन<br />
12. एपीकल्चर— मधुमक्खियों के पालन का अध्ययन<br />
13. एपीग्राफी— शिलालेख सम्बन्धी ज्ञान का अध्ययन<br />
14. एस्ट्रोनॉमी— खगोलीय पिण्डों का अध्ययन<br />
15. आॅरनीथोलॉजी— पक्षियों का अध्ययन<br />
16. आॅस्टियोलॉजी— हड्डियों का अध्ययन<br />
17. ओरोलॉजी — पर्वतों का अध्ययन<br />
18. ओप्टिक्स — प्रकाश के प्रकार व गुणों का अध्ययन<br />
19. ओलिवोकल्चर— जैतून की कृषि का अध्ययन<br />
20. कार्डियोलॉजी — ह्रदय की रचना तथा रूधिर कार्यविधि का अध्ययन</p>
<p> </p>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Dec 2021 15:47:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरसा में बने दस साइंस क्लबों को 50-50 हजार की ग्रांट जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अप्रैल माह से साइंस क्लबों में शुरू होंगी गतिविधियां सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा। साइंस के प्रति विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए प्रदेश के हर जिले के दस स्कूलों में साइंस क्लबों का गठन किया गया है। हरियाणा स्टेट काऊंसिल फॉर साइंस एंड टैक्नोलोजी, डिपार्टमेंट आॅफ साइंस एंड टैक्नोलोजी की ओर से साइंस क्लब बनाने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">अप्रैल माह से साइंस क्लबों में शुरू होंगी गतिविधियां</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा</strong><br />
<strong>सरसा।</strong> साइंस के प्रति विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए प्रदेश के हर जिले के दस स्कूलों में साइंस क्लबों का गठन किया गया है। हरियाणा स्टेट काऊंसिल फॉर साइंस एंड टैक्नोलोजी, डिपार्टमेंट आॅफ साइंस एंड टैक्नोलोजी की ओर से साइंस क्लब बनाने के लिए इन स्कूलों को 50-50 हजार रुपए की ग्रांट जारी कर दी गई है। साइंस क्लबों की मानिटरिंग का जिम्मा जिला विज्ञान विशेषज्ञ डा. मुकेश कुमार को सौंपा गया है। साइंस क्लबों के बनने से खासकर विज्ञान में रूचि रखने वाले विद्यार्थियों को खासा लाभ होगा। अप्रैल माह से साइंस क्लबों में गतिविधियां शुरू कर दी जाएंगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">साइंस क्लबों में ये होगी गतिविधियां</h2>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल माह में निबंध प्रतियोगिता, साइंस क्विज, पोस्टर व चार्ट प्रतियोगिता, मई माह में आसपास के नर्सरी, फार्म व वाटर वर्क्स का भ्रमण, जुलाई माह में पेड़ पौधों व जंतुओं की जानकारी संबंधी कार्यक्रम करवाए जाएंगे। अगस्त माह में विभिन्न प्रकार की दालों, अनाज व भोज्य पदार्थों का संग्रहण, सितंबर माह में पोस्टर, फोटोग्राफस, चार्टस, रिपोर्टस, एकत्रित किए हुए नमूनों की स्कूल के अंदर प्रदर्शनी लगाई जाएगी। अक्तूबर माह में कम से कम अपशिष्ट उत्पादन व अपशिष्ट के निपटान कार्यक्रम करवाए जाएंगे। नवंबर माह में कचरे को अंधाधुंध जलाने से होने वाले सांस की बिमारियों के बारे में जागरूक किया जाएगा। दिसंबर में प्लास्टिक बैग के कम से कम प्रयोग बारे बच्चों को पे्ररित किया जाएगा। जनवरी में विज्ञान से संबंधी मॉडल बनाए जाएंगे। फरवरी में बच्चों को विज्ञान के अनुप्रयोगों से रूबरू करवाया जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">साइंस क्लब के लिए इन दस स्कूलों को मिली ग्रांट</h2>
<p style="text-align:justify;">जिल के दस स्कूलों को जिनमें साइंस क्लब की स्थापना की जानी है, उन्हें हरियाणा स्टेट काऊंसिल फॉर साइंस एंड टैक्नोलोजी, डिपार्टमेंट आॅफ साइंस एंड टैक्नोलोजी की ओर से 50-50 हजार रुपए की ग्रांट दी गई है। इन स्कूलों में जीएसएसएस रिसालियाखेड़ा, जीएसएसएस जमाल, जीजीएसएसएस रानियां, जीएसएसएस पतली डाबर, जीएसएसएस मेहनाखेड़ा, जीएसएसएस बड़ागुढ़ा, जीएसएसएस खारिया, जीएसएसएस फग्गू, जीएसएसएस ऐलनाबाद, जीएसएसएस गुडियाखेड़ा शामिल हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ऐसे करने होंगे 50 हजार रुपए खर्च:</h2>
<p style="text-align:justify;">साइंस क्लबों को दी गई 50 हजार रुपए की राशि में से 25 हजार रुपए महीनेवार गतिविधियां करवाने पर खर्च करने होंगे। 13 हजार रुपए शैक्षिक किट के लिए देने होंगे। 7 हजार रुपए मॉडल बनाने के लिए दिए जाएंगे। 5 हजार रुपए पुरस्कार व सर्टिफिकेट के लिए मिलेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">‘‘हरियाणा स्टेट काऊंसिल फॉर साइंस एंड टैक्नोलोजी, डिपार्टमेंट आॅफ साइंस एंड टैक्नोलोजी की ओर से 50-50 हजार रुपए की ग्रांट जिले के दस साइंस क्लबों को दी गई है। इससे विद्यार्थियों का साइंस के प्रति रूझान बढ़ेगा।<br />
<strong>-डॉ. मुकेश कुमार, जिला विज्ञान विशेषज्ञ, सरसा।</strong></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/science-club/article-7672</link>
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                <pubDate>Wed, 13 Feb 2019 19:54:02 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब विज्ञान प्रयोगशालाओं में नहीं रहेगी फर्नीचर की कमी</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी शीशा लगी अलमीरा में सुरक्षित रख सकेंगे अपने मॉडल सच कहूँ-सुनील वर्मा सरसा। प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में बनी विज्ञान प्रयोगशालाओं में अब विद्यार्थियों को फर्नीचर की कमी से नहीं जूझना पड़ेगा। क्योंकि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद् ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर उनके जिले […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/a-shortage-of-furniture-in-science-labs-will-be-completed/article-4974"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/science-lab.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी शीशा लगी अलमीरा में सुरक्षित रख सकेंगे अपने मॉडल</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ-सुनील वर्मा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में बनी विज्ञान प्रयोगशालाओं में अब विद्यार्थियों को फर्नीचर की कमी से नहीं जूझना पड़ेगा। क्योंकि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद् ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर उनके जिले के स्कूलों की प्रयोगशालाओं में जिन फर्नीचर की कमी है उनकी डिमांड भेजने का कहा है। अब जिला के साइंस एक्सपर्ट ने अपने-अपने जिला के हाई स्कूलों में जिन फर्नीचर की कमी थी, उनकी डिमांड बनाकर विभाग को भेज दी है, ताकि विद्यार्थियों को विज्ञान प्रयोगशाला में फर्नीचर की समस्या से दो-चार न होना पड़े।</p>
<h2>प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को  जारी पत्र</h2>
<p style="text-align:justify;">दरअसल बीते दिनों प्रदेश के सभी जिलों के जिला विज्ञान विशेषज्ञों की हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद् के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने मीटिंग ली थी। जिसमें डायरेक्टर ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर उनके स्कूलों में जिन फर्नीचर की कमी है उनकी डिमांड 20 जुलाई तक बनाकर भेजने के निर्देश दिए थे। इतना ही नहीं पत्र में यह भी कहा गया है कि वे अपने प्रयोगशाला में किस प्रकार के फर्नीचर मंगवाना चाहते हैं, उनकी कीमत कितनी है, यह भी बताने को कहा गया था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">50 विद्यार्थी के अनुसार फर्नीचर की डिमांड भेजने के दिए थे निर्देश</h2>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी हुए पत्र में कहा गया है कि सभी अधिकारी प्रत्येक स्कूल में कम से कम 50 विद्यार्थियों के हिसाब से फर्नीचर की डिमांड बनाकर भेजे, कि उन्हें कितना फर्नीचर चाहिए। डिमांड में उन्हें यह भी बताना होगा कि उन्हें प्रत्येक स्कूल में कितनी अलमारी, कितने मेज, कितने रैक्स सहित अन्य फर्नीचर की आवश्यकता है, उन सभी फर्नीचर के फोटोग्राफ भी साथ भेजने के निर्देश दिए थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इन फर्नीचर की भेजी है डिमांड</h2>
<p style="text-align:justify;">विभाग द्वारा मांगी गई डिमांड के पश्चात सरसा जिला के विज्ञान विशेषज्ञों ने डीईओ के दिशा निर्देशन में 5 तरह के फर्नीचर की डिमांड बनाकर भेजी गई है। जिनमें सर्वप्रथम 6 लेयर के स्टील के रैक्स की मांग की गई है और प्रत्येक स्कूल के लिए ऐसे 2 रैक्स की मांग की गई है। एक रैक्स की कीमत लगभग 4000 रुपए हो। इसके अलावा ग्लास डोर वाली स्टील की अलमीरा की मांग की गई है। जिनकी प्रत्येक स्कूल में संख्या 2 हो तथा इनकी एक की कीमत 6000 रुपए हो। वहीं विज्ञान प्रयोगशाला में लगने वाले कक्षाओं में बैठने के लिए बैंच की मांग की गई है। इनकी प्रत्येक स्कूल में सख्यां 40 मांगी गई है। एक बैंच की कीमत 500 रुपए होनी चाहिए।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jul 2018 03:52:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छात्रों के आइडिया अपनाएगा विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग</title>
                                    <description><![CDATA[ देश की किसी भी मान्य भाषा में भेज सकते हैं सुझाव  बैंक अकाऊंट में डाली जाएगी पुरस्कार राशि सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा। देश व प्रदेश के सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में छठी से दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थी, जिनकी आयु 10-15 वर्ष के बीच है, उनके आइडिया प्रतियोगिता से निकले दो से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/department-of-science-and-technology-will-adopt-students-ideas/article-4348"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/sirsa-ok.jpg" alt=""></a><br /><h2> देश की किसी भी मान्य भाषा में भेज सकते हैं सुझाव</h2>
<h2> बैंक अकाऊंट में डाली जाएगी पुरस्कार राशि</h2>
<p><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा</strong></p>
<p><strong>सरसा।</strong> देश व प्रदेश के सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में छठी से दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थी, जिनकी आयु 10-15 वर्ष के बीच है, उनके आइडिया प्रतियोगिता से निकले दो से तीन अच्छे विचारों/नई जानकारी/नवप्रवर्तनों को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘इंस्पायर अवार्ड मानक’ के लिए आमंत्रित किया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मेधावी छात्रों के अंदर छोटी आयु में ही विज्ञान की पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना व वैज्ञानिक अनुसंधान को अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित व आकर्षित करना है।</p>
<p>इसी कार्यक्रम को लेकर बीते मंगलवार को प्रोजेक्ट के इंचार्ज डॉ. संजय मिश्रा ने दिल्ली में हरियाणा, दिल्ली व उत्तराखंड प्रदेशों के इंस्पायर अवार्ड मानक के नोडल अधिकारियों व जिला नोडल अधिकारियों की बैठक ली। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य और जिला स्तर के पदाधिकारियों में इंस्पायर अवार्ड मानक कार्यक्रम के प्रति जागरूकता और कार्यक्षमता को बढ़ाना था।</p>
<p>इंस्पायर अवार्ड मानक में आवेदन की तिथि अब 30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है। इस बैठक में सरसा से इंस्पायर अवार्ड मानक के नोडल अधिकारी व जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार ने शिरकत की। ेबता दें कि वर्ष 2009-10 में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इंस्पायर पुरस्कार योजना की शुरुआत की थी और अब उक्त योजना में कुछ सुधार किए गए हैैं और पुरस्कार राशि को भी बढ़ाया गया है।</p>
<p>छठी से दसवीं कक्षा के विद्यार्थी निर्धारित प्रारूप के तहत देश की मान्यता प्राप्त सभी भाषाओं में अपना आवेदन अपने विद्यालय में जमा करवा सकते है। स्कूल प्राचार्य द्वारा स्कूलों में आईडिया प्रतियोगिता के जरिए विद्यार्थियों के दो से तीन अच्छे विचारों/नवप्रवर्तनों का चयन किया जाएगा, जिसका आॅनलाइन नामांकन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार की वेब पोर्टल ई-एमआईएएस पर होगा। नए विद्यालय वेब पोर्टल पर ई-एमआईएएस पर स्वयं को पंजीकृत कर सकते हैं।</p>
<p>देशभर से एक लाख छात्रों को मिलेगा पुरस्कार भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान द्वारा देशभर से आने वाले सर्वश्रेष्ठ एक लाख विचारों का चयन किया जाएगा। इन चयनित विद्यार्थियों को 10 हजार रुपये प्रति पुरस्कार राशि उनके खाते में डाली जाएगीं। विचारों का चयन उसकी नवीनता, व्यवहारिकता, सामाजिक उपयोगिता, पर्यवरण की अनुकूलता और वर्तमान में मौजूद तकनीक से बेहतरी के आधार पर होगा।</p>
<p>इसके पश्चात पूरे भारत से जिला स्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट कम्पटीशन करवाकर एक लाख नवप्रवर्तनों में से 10 हजार नवप्रवर्तनों का चयन राज्यस्तरीय प्रतियोगिता और प्रदर्शनी के लिए किया जाएगा। इसके बाद राज्यस्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट कम्पटीशन द्वारा 10 हजार में से एक हजार नवप्रवर्तनों का चयन होगा। चयनित 1000 प्रतिकृति को राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में रखा जाएगा, जहां से श्रेष्ठ 60 को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित किया जाएगा, जिन्हें मार्च में राष्टÑपति भवन में महामहिम राष्टÑपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा।</p>
<h2>क्या है इंस्पायर अवार्ड मानक कार्यक्रम</h2>
<p>इंस्पायर अवार्ड मानक विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग भारत सरकार का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य मेधावी छात्रों के अंदर छोटी आयु में ही विज्ञान की पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना व वैज्ञानिक अनुसंधान को अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित व आकर्षित करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत छठी से दसवीं कक्षा के मेधावी छात्रों जिनकी आयु 10-15 वर्ष के बीच होती है, को दस हजार रुपए की अवार्ड राशि प्रदान की जाती है। इस राशि का उपयोग छात्रों द्वारा विज्ञान का एक प्रोजेक्ट या मॉडल बनाने व उसे जिलास्तरीय प्रदर्शनी व प्रतियोगिता स्थल तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। इसके तहत अवार्ड विजेता छात्र जिला, राज्य व राष्ट्रय स्तर पर हिस्सा लेता है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सम्मिलित होने वाले प्रतिभागियों को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाता है।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 08:42:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>विज्ञान लाभदायक यदि इसे माना भी जाए</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले एक महीने से देश के अलग-अलग राज्यों में आंधी तूफान से भारी नुकसान हुआ। इस दौरान 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग की तरफ से अलर्ट जारी करने के बाद जहां नुकसान कम हुआ है वहीं प्रशासन समय अनुसार लोगों को सूचित करने व जरूरी प्रबंध करने में भी कामयाब […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/science-is-profitable-if-it-is-considered/article-4094"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/77-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले एक महीने से देश के अलग-अलग राज्यों में आंधी तूफान से भारी नुकसान हुआ। इस दौरान 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग की तरफ से अलर्ट जारी करने के बाद जहां नुकसान कम हुआ है वहीं प्रशासन समय अनुसार लोगों को सूचित करने व जरूरी प्रबंध करने में भी कामयाब हुआ है। विशेष तौर पर मुंबई प्रशासन ने भारी वर्षा के मद्देनजर पूरी चौकसी रखी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिक जानकारी फायदेमंद साबित हुई है। विज्ञान खोजों के मुताबिक उन गलतियों को भी सुधारने का प्रयास होना चाहिए, जिन कारणों से प्राकृतिक मुसीबतों में लगातार वृद्धि हो रही है। विज्ञान के अनुसार मनुष्य का प्रकृति में अंधाधुंध दखल प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रहा है, जिससे वातावरण में अनचाहा बदलाव आ रहा है। बढ़ती आबादी और सड़क निर्माण के लिए करोड़ों वृक्ष काटे जा रहे हैं। नई सड़कें प्रगति और रफ्तार को पंख लगा रही हैं लेकिन ये सड़कें वातावरण के घात की तरफ भी इशारा कर रही हैं। जितने वृक्ष उखाड़े गए उससे ज्यादा गिनती में पौधे लगाए जाने चाहिए। बढ़ रही गर्मी के कारण वर्षा का संतुलन बिगड़ रहा है। देश का एक हिस्सा तप रहा है वहीं दूसरी तरफ बाढ़ जैसी स्थिति बन रही है। पहाड़ी जंगल घट रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कारखानों के दूषित जल का सही निपटान नहीं हुआ और यह पानी नदियों के पानी को दूषित कर रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। आज विज्ञान का युग है पर विज्ञान के फ ायदे ले रहा प्रशासन और मनुष्य विज्ञान की ही चेतावनियों को मानने को तैयार नहीं है। प्रशासन वातावरण के प्रति लापारवाह है और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को प्रशासन की खिंचाई करनी पड़ रही है। केन्द्र और राज्य सरकार के अपने-अपने पर्यावरण विभाग और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड हैं जो प्रशासनिक चक्र व्यूह में सफेद हाथी बन कर रह गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतीयों से निपटने का सामर्थ्य बढ़ाने के साथ प्रकृति के क्रोध को शांत करने की आवश्यकता है, जो मनुष्य की गलतियों का परिणाम है। जंगल, नदियां, पहाड़, ग्लेशियर, हवा प्रकृति के उपहार हैं, जिनसे मनुष्य और पशु-पक्षियों का अस्तित्व है। गैर-कानूनी माइनिंग रोकने के लिए मीडिया और कानून बने हैं पर समस्या का हल नहीं हुआ। विकास की परिभाषा से वातावरण को निकाल दिया जाए तो शेष तबाही ही बचती है। मानवीय जीवन को बरकरार रखने के लिए प्रशासन और आम लोगों को वातावरण के प्रति गंभीर होना पड़ेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/science-is-profitable-if-it-is-considered/article-4094</link>
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                <pubDate>Mon, 11 Jun 2018 15:29:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विज्ञान के लिए जारी होगा ‘संपूर्ण’ पोर्टल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार विज्ञान पर एक संपूर्ण पोर्टल लॉन्च करने वाली है, जिस पर विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं, देश तथा विदेशों में हो रहे वैज्ञानिक अनुसंधानों तथा फेलोशिप आदि के बारे में एक ही जगह जानकारी मिल सकेगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव आशुतोष शर्मा ने यूनीवार्ता को बताया, “यह पोर्टल भारत के विज्ञान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/whole-portal-will-be-released-for-science/article-4082"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/portal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>सरकार विज्ञान पर एक संपूर्ण पोर्टल लॉन्च करने वाली है, जिस पर विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं, देश तथा विदेशों में हो रहे वैज्ञानिक अनुसंधानों तथा फेलोशिप आदि के बारे में एक ही जगह जानकारी मिल सकेगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव आशुतोष शर्मा ने यूनीवार्ता को बताया, “यह पोर्टल भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का संपूर्ण मानचित्र होगा। इस पर देश की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ी हर जानकारी उपलब्ध होगी, मसलन गाँव में बैठा छात्र भी यह जान सकेगा कि सरकार या निजी क्षेत्र की ओर से विज्ञान की पढ़ाई करने वालों के लिए छात्रवृत्ति तथा फेलोशिप की या अन्य कौन-कौन सी योजनाएँ है। वहीं, वैज्ञानिक या विज्ञान में रुचि रखने वाले अन्य लोग देश की किसी भी प्रयोगशाला के अनुसंधान के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे।”</p>
<p style="text-align:justify;"><span class="storydetails">उन्होंने बताया कि यह शैक्षणिक पोर्टल नहीं होगा, लेकिन विज्ञान के किसी भी विषय के बारे में जानकारी के इच्छुक लोग सर्च में विषय वस्तु डालकर उसके बारे पूरी जानकारी हासिल कर सकेंगे। यह 360 डिग्री पोर्टल होगा जिस पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबद्ध सभी बातें उपलब्ध होंगी। स्कूल-कॉलेज के छात्रों, पीएचडी छात्रों तथा वैज्ञानिकों सबके लिए कुछ न कुछ होगा। इसका उद्देश्य ही सबको जोड़ना है। श्री शर्मा ने बताया कि इस पोर्टल पर देश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे काम के साथ ही विदेशों में हो रहे काम के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी। विज्ञान से संबंधित संगष्ठियों और सम्मेलन आदि के बारे में भी इस पर जानकारी होगी। उन्होंने बताया कि यह पोर्टल तैयार हो चुका है और सिर्फ औपचारिक लॉन्चिंग की प्रतीक्षा है। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span class="storydetails">अभी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग आते हैं, जिनके तहत अलग-अलग प्रयोगशालाएं तथा उनके अपने-अपने पोर्टल हैं। ‘संपूर्ण पोर्टल’ पर सरकारी प्रयोगशालाओं के अलावा निजी प्रयोगशालाओं को भी जोड़ने की योजना है। </span><span class="storydetails">इसके अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर एक ऑनलाइन डिजिटल टीवी शुरू करने की दिशा में भी काम चल रहा है। यह एक घंटे का कार्यक्रम होगा जो ऑनलाइन चैनल के अलावा दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर भी प्रसारित किया जायेगा। इस पर विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी जायेगी। साथ ही प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आदि के माध्यम से विज्ञान के प्रति लोगों में रुचि जगाने का काम भी होगा।</span></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/whole-portal-will-be-released-for-science/article-4082</link>
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                <pubDate>Sun, 10 Jun 2018 10:30:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>राजस्थान 12वीं साइंस व कॉमर्स का रिजल्ट घोषित</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर (एजेंसी)। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बुधवार शाम 6.15 बजे सीनियर सेकंडरी विज्ञान और वाणिज्य वर्ग का परिणाम घोषित कर दिया। सुबह से विद्यार्थियों को नतीजों का इंतजार था। शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने वेबसाइट पर नतीजा जारी किया। इस बार फिर कॉमर्स के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। साइंस का परिणाम पिछले […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajsthan-12th-science-and-commerce-result-out/article-3757"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/ajmer.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अजमेर (एजेंसी)। </strong>राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बुधवार शाम 6.15 बजे सीनियर सेकंडरी विज्ञान और वाणिज्य वर्ग का परिणाम घोषित कर दिया। सुबह से विद्यार्थियों को नतीजों का इंतजार था। शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने वेबसाइट पर नतीजा जारी किया। इस बार फिर कॉमर्स के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। साइंस का परिणाम पिछले साल से भी कम रहा है। शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने वेबसाइट पर सीनियर सेकंडरी विज्ञान और वाणिज्य वर्ग का परिणाम जारी किया। विज्ञान वर्ग का परिणाम 86.60 प्रतिशत रहा। पिछले साल यह परिणाम 3.76 प्रतिशत कम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल विज्ञान का परिणाम 90.36 प्रतिशत था। इसी तरह कॉमर्स का रिजल्ट फिर शानदार रहा है। कॉमर्स का कुल परिणाम 91.09 प्रतिशत रहा है। पिछले साल के मुकाबले कॉमर्स का रिजल्ट 0.21 प्रतिशत ज्यादा रहा है। विज्ञान वर्ग में छात्रों का परिणाम 85.08 प्रतिशत रहा। जबकि छात्राओं का परिणाम 90.33 प्रतिशत रहा। इसी तरह कॉमर्स में छात्राओं का नतीजा 94.66 प्रतिशत रहा। जबकि छात्रों का नतीजा 89.23 प्रतिशत पर ही अटक गया। विज्ञान वर्ग में सरकारी स्कूल का परिणाम 84.35 प्रतिशत और वाणिज्य में 90.39 प्रतिशत रहा। जबकि विज्ञान वर्ग में निजी स्कूल का परिणाम 88.91 और वाणिज्य का 92.56 प्रतिशत रहा। बोर्ड ने साल 2017 की तरह साइंस और कॉमर्स की राज्य अथवा जिला स्तर की मेरिट लिस्ट जारी नहीं की। इसका फैसला पिछले साल ही प्रबंध बोर्ड की बैठक में हो गया था। इसके बजाय बोर्ड ने टॉप थ्री विद्यार्थियों के नाम घोषित करने का निर्णय लिया था। पिछले साल बारहवीं के कला, वाणिज्य और विज्ञान सहित दसवीं में टॉप रहे विद्यार्थियों को 24 मई को होने वाले दीक्षान्त समारोह में मेडल प्रदान किए जाएंगे।<br />
साइंस का परिणाम<br />
गर्ल्स का परिणाम रहा -90.49 प्रतिशत<br />
बॉयज का परिणाम रहा – 86.64 प्रतिशत<br />
कुल रजिस्ट्रेशन – 2,40,152<br />
कुल स्टूडेंट्स अपियर हुए – 2,37,885<br />
कुल परिणाम रहा – 87.78 प्रतिशत</p>
<p style="text-align:justify;">कॉमर्स का परिणाम<br />
गर्ल्स का परिणाम रहा – 94.66 प्रतिशत<br />
बॉयज का परिणाम रहा – 89.25 प्रतिशत<br />
कुल रजिस्ट्रेशन – 41,986<br />
कुल स्टूडेंट्स अपियर हुए – 41,557<br />
कुल परिणाम रहा – 91.09 प्रतिशत</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी स्कूल का यह रहा परिणाम<br />
साइंस में कुल परिणाम रहा 84.35 प्रतिशत<br />
कॉमर्स में कुल परिणाम रहा – 90.39 प्रतिशत</p>
<p style="text-align:justify;">प्राइवेट स्कूल का यह रहा परिणाम<br />
साइंस में कुल परिणाम रहा – 88.91<br />
कॉमर्स में कुल परिणाम रहा – 92.56</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajsthan-12th-science-and-commerce-result-out/article-3757</link>
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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 20:28:21 +0530</pubDate>
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