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                <title>massacre - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>massacre RSS Feed</description>
                
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                <title>खौफनाकः मां और दो बच्चियों के किए टुकड़े, बच्ची के शव को उबालकर कुत्ते को खिलाया</title>
                                    <description><![CDATA[आरोपी राजेश ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी -पूछताछ में तिहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपी राजेश ने खुलासा किया भिवानी (हरियाणा) महिला और उसकी दो मासूम बच्चियों की हत्या करने में आरोपी राजेश ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं। तीनों का सिर धड़ से अलग करने के बाद उनके टुकड़े […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bhiwani-massacre/article-9758"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-07/untitled-3-copy.jpg" alt=""></a><br /><h2>आरोपी राजेश ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी</h2>
<h2>-पूछताछ में तिहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपी राजेश ने खुलासा किया</h2>
<p><strong>भिवानी (हरियाणा)</strong> महिला और उसकी दो मासूम बच्चियों की हत्या करने में आरोपी राजेश ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं। तीनों का सिर धड़ से अलग करने के बाद उनके टुकड़े करके गैस से जलाया था। सबूत मिटाने के लिए करीब आठ माह की सबसे छोटी बच्ची के टुकड़े करके पतीले में उबाला था। इसके बाद उसे कुत्ते को खिला दिया। पुलिस पूछताछ में तिहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपी राजेश ने यह खुलासा किया।</p>
<h2>उमरावत गांव में राजेश के प्लॉट से खून से सना पतीला बरामद</h2>
<p>वहीं, दो दिन तक राजेश की निशानदेही पर मृतकों के सिर नहीं मिलने के बाद पुलिस ने क्षेत्र में कॉम्बिंग अभियान चलाया। दो घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस को झाड़ियों में महिला और छोटी बच्ची का सिर मिला, जिसमें सिर्फ कंकाल ही है। अब इनका डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। वहीं, पुलिस ने उमरावत गांव में राजेश के प्लॉट से खून से सना गद्दा और वह पतीला बरामद किया, जिसमें बच्ची के शव के टुकड़े उबाले थे।</p>
<p>बता दें कि तिहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपी राजेश कबाड़ी को पुलिस ने 28 जून को गिरफ्तार किया था। 29 जून को कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया था। राजेश की निशानदेही पर शवों के सिर बरामद करने के लिए पुलिस ने कोट गांव के जोहड़ के पास खुदाई करवाई, लेकिन सिर नहीं मिले। रविवार को भी पुलिस ने जांच अभियान चलाया, मगर सफलता नहीं मिली। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर करीब 150 कर्मचारियों ने कॉम्बिंग अभियान चलाया। जोहड़ के आसपास के क्षेत्र, खेतों, झाड़ियों में सर्च किया। करीब दो घंटे के अभियान के दौरान पुलिस ने सिर बरामद किया, जिसमें खोपड़ी के साथ दांत ही हैं।</p>
<p>आरोपी राजेश की निशानदेही पर पुलिस उसके उमरावत गांव स्थित प्लॉट से एक खून से सना गद्दा और पतीला बरामद किया। राजेश ने बताया कि महिला इस पर सो रही थी तो उसका गला काटा। बड़ी लड़की ने भागने का प्रयास किया, तो पकड़कर उसका गर्दन धड़ से अलग कर दिया।</p>
<p>छोटी बच्ची को फर्श पर रखकर गर्दन काट दी। कटर मशीन से शवों के छोटे-छोटे टुकड़े किए। इसके बाद पतीले में पानी डालकर छोटी बच्ची के शव के टुकड़े करके उबाल दिया। बाद में उसके साथी मक्खन ने पतीला धोया। इसी पतीले में पहले चिकन बनाकर खाया था।</p>
<h2>यह है मामला</h2>
<p>28 दिसंबर 2018 की सुबह भिवानी-रोहतक नेशनल हाईवे पर खरक गांव के पास एक प्लास्टिक ड्रम में तीन शव मिले थे। जांच की गई तो तीनों के सिर नहीं थे। पुलिस जांच में सामने आया कि शव असम की एक महिला और उसकी दो बच्चियों के थे, जिन्हें बावड़ी गेट पर कबाड़ी की दुकान चलाने वाले राजेश ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर मार दिया था। पुलिस ने पहले राजेश के दो साथी मक्खन और पूनम फौजी को गिरफ्तार किया। तीन दिन पहले पुलिस ने मुख्य आरोपी राजेश कबाड़ी को गिरफ्तार किया। राजेश दिल्ली में छिपा था।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jul 2019 09:05:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>ब्रिटेन ने जलियांवाला बाग नरसंहार पर फिर मांगी माफी, शर्मनाक घटना दिया करार</title>
                                    <description><![CDATA[अमृतसर (एजेंसी)। जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी पर ब्रिटिश सरकार ने एक बार फिर माफी मांगी है और इसे शर्मनाक घटना करार दिया है। भारत में ब्रिटिश उच्‍चाुयक्‍त डोमिनिक एक्‍यूथ ने कहा कि 100 साल पहले हुई यह घटना एक बड़ी त्रासदी थी। यहां जो भी हुआ उसका हमें हमेशा खेद रहा है। यह बेहद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/jallianwala-bagh-massacre-2/article-8511"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/jallianwala-bagh-massacre.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृतसर (एजेंसी)।</strong> जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी पर ब्रिटिश सरकार ने एक बार फिर माफी मांगी है और इसे शर्मनाक घटना करार दिया है। भारत में ब्रिटिश उच्‍चाुयक्‍त डोमिनिक एक्‍यूथ ने कहा कि 100 साल पहले हुई यह घटना एक बड़ी त्रासदी थी। यहां जो भी हुआ उसका हमें हमेशा खेद रहा है। यह बेहद शर्मनाक था। ब्रिटिश उच्‍चायुक्‍त ने शहीद स्‍मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी है। उन्‍होंने ट्वीट कर शहीदों को याद किया। कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी और पंजाब के सीएम कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने जलियांवाला बाग पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। जलियांवाला बाग नहरसंहार के 100 वर्ष पूरे होने पर शताब्‍दी श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  दी श्रद्धांजलि, राहुल गांधी जलियांवाला बाग पहुंचे</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट में लिखा, ‘आज, जब हम भयावह जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 वर्षों का निरीक्षण करते हैं, तो भारत उस घातक दिन पर शहीद हुए सभी लोगों को श्रद्धांजलि देता है। उनकी वीरता और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उनकी स्मृति हमें उस भारत के निर्माण के लिए और भी अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है जिस पर उन्हें गर्व होगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटिश उच्‍चायुक्‍त के अलावा कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी, पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सहित कई गण्‍यमान्‍य लोगों ने शहीद स्‍मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर जलियांवाला बाग और इसके आसपास के क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा है। जलियांवाला बाग के मुख्‍य द्वार सहित पूरे क्षेत्र में पुलिस व अर्द्ध सैनिक बलोें के जवान तैनात हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जलियांवाला नरसंहार के 100 साल होने पर शहर में सुबह से ही काफी संख्‍या में लाेग पहुंच रहे हैं। कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी और पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह भी सुबह जलियांवाला बाग पहुंचे। उनके साथ कैबनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू सहित अन्‍य मंत्री भी थे। उन्‍होंने जलियांवाला बाग के शहीद स्‍मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटिश उच्‍चायुक्‍त सुबह जलियांवाला बाग पहुंचे और वहां शहीद स्‍मारक पर 100 साल पहले मारे गए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्‍होंने शहीद स्‍मारक पर पुष्‍पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्‍होंने जलियांवाला बाग का अन्‍य हिस्‍सों को देखा। ब्रिटिश उच्‍चायुक्‍त डोमिनिक ने इसके बाद जलियांवाला बाग के विजिटर बुक पर अपने उद्गार लिखे। उन्‍होंने लिखा- 100 साल पहले हुई यह घटना एक बड़ी त्रासदी थी। यहां जो भी हुआ उसका हमें हमेशा खेद रहा है। बीच मजबूत रिलेशनशिप चाहते हैं।यह बेहद शर्मनाक था।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Apr 2019 10:28:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ब्रिटेन को माफी मांगने से क्यों गुरेज है?</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की आजादी के आंदोलन में जिस घटना ने देशवासियों पर सबसे ज्यादा असर डाला, वह है जलियांवाला बाग हत्याकांड। इस हत्याकांड ने हमारे देश के इतिहास की पूरी धारा को ही बदल के रख दिया था। जलियांवाला बाग हत्याकांड को इस साल 100 साल पूरे हो गये हैं। एक सदी पहले, साल 1919 में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/jallianwala-bagh-massacre/article-8503"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/uk.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत की आजादी के आंदोलन में जिस घटना ने देशवासियों पर सबसे ज्यादा असर डाला, वह है जलियांवाला बाग हत्याकांड। इस हत्याकांड ने हमारे देश के इतिहास की पूरी धारा को ही बदल के रख दिया था। जलियांवाला बाग हत्याकांड को इस साल 100 साल पूरे हो गये हैं। एक सदी पहले, साल 1919 में आज ही के दिन, 13 अप्रैल को जब पूरा पंजाब बैसाखी मना रहा था, ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने जलियांवाला बाग में निहत्थे लोगों को चारों तरफ से घेरकर बंदूकों की गोलियों से मार डाला था। इस हत्याकांड में महिलाओं और बच्चों समेत सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस हत्याकांड के पीछे ब्रिटिश सरकार का काला कानून रॉलेट एक्ट था, जिसका उस वक्त पूरे देश में जबर्दस्त विरोध हो रहा था। यह कानून आजादी के लिए चल रहे आंदोलन पर रोक लगाने के लिए था, जिसके अंतर्गत ब्रिटिश सरकार को और अधिक अधिकार दिए गए थे। जिससे वह प्रेस पर सेंसरशिप लगा सकती थी, नेताओं को बिना मुकदमें के जेल में रख सकती थी, लोगों को बिना वॉरण्ट के गिरफ्तार कर सकती थी, उन पर विशेष ट्रिब्यूनलों और बंद कमरों में बिना जवाबदेही दिए हुए मुकदमा चला सकती थी। जाहिर है इस जनविरोधी कानून का विरोध होना ही था। कानून के विरोध में पूरा भारत एक साथ उठ खड़ा हुआ और प्रतिकार स्वरूप लोगों ने जगह-जगह सरकार को अपनी गिरफ्तारियां दीं। इस कानून के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश को देखकर ब्रिटिश राज ने दमन का रास्ता अपनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">कानून के खिलाफ खास तौर से पंजाब में बहुत गुस्सा था। वजह, पंजाब के दो लोकप्रिय लीडर डॉक्टर सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू को अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर ने बिना किसी वजह के गिरफ्तार कर लिया था। इसके विरोध में जनता ने एक शान्तिपूर्ण जुलूस निकाला। पुलिस ने जुलूस को आगे बढ़ने से रोका और रोकने में कामयाब ना होने पर आगे बढ़ रही भीड़ पर गोलियाँ चला दी, जिसके परिणामस्वरूप दो लोग मारे गये। इस गिरफ्तारी की निंदा करने और पहले हुए गोलीकांड की भर्त्सना करने के लिए 13 अप्रैल, 1919 को बैसाखी के दिन शाम को करीब साढ़े चार बजे अमृतसर के जलियाँवाला बाग में एक सभा का आयोजन हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">सभा में डॉक्टर सैफुद्दीन किचलू एवं सत्यपाल की रिहाई एवं रॉलट एक्ट के विरोध में नेताओं के वक्तव्य हो रहे थे। जैसे ही अंग्रेज हुकूमत को यह खबर मिली कि आंदोलनकारी जलियांवाला बाग में जमा हो रहे हैं, तो प्रशासन ने उन्हें सबक सिखाने की ठान ली। हालांकि शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था, फिर भी इसमें सैंकड़ों लोग ऐसे भी थे, जो आस-पास के इलाकों से बैसाखी के मौके पर परिवार के साथ मेला देखने और शहर घूमने आए थे और सभा की खबर सुन कर वहां जा पहुंचे थे। सभा के शुरू होने तक वहां 10-15 हजार लोग जमा हो गए थे। तभी इस बाग के एकमात्र रास्ते से डायर ने अपनी सैनिक टुकड़ी के साथ वहां पोजिशन ले ली और बिना किसी चेतावनी के गोलीबारी शुरू कर दी। जलियांवाला बाग में जमा हजारों लोगों की भीड़ पर कुल 1,650 राउंड गोलियां चलाई गईं, जिसमें सैंकड़ो अहिंसक सत्याग्रही शहीद हो गए और हजारों घायल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड की देश में ही नहीं, दुनिया भर में तीखी आलोचना हुई। आलोचना के ही दवाब में अंग्रेज हुकूमत को इस घटना की तहकीकात के लिए एक कमीशन बिठाना पड़ा। ब्रिटेन के सेक्रेटरी आॅफ स्टेट एडविन मॉंटेग्यु ने साल 1919 के आखिर में जलियांवाला बाग हत्याकांड की तहकीकात के लिए हंटर कमीशन नियुक्त किया। हंटर कमीशन की रिपोर्ट में सारी सच्चाई सामने आ गई। अंग्रेज हुकूमत ने देखने-दिखाने के लिए इस रिपोर्ट पर प्रतीकात्मक कार्यवाही करते हुए ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर को पदावनत कर कर्नल बना दिया और उसे भारत में आइंदा कोई ओहदा न देने का फैसला किया। ब्रिटेन में हाउस आॅफ कॉमन्स ने जनरल डायर के इस घृणात्मक कृत्य के लिए निंदा प्रस्ताव पारित किया, लेकिन इसके उलट हाउस आॅफ लॉर्ड ने जलियांवाला बाग हत्याकांड की तारीफ करते हुए जनरल डायर का प्रशस्ति प्रस्ताव पारित कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया भर की नजर थी और दबाव में आखिरकार ब्रिटिश सरकार को भी झुकना पड़ा। ब्रिटिश संसद ने इस घटना के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया और साल 1920 में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर को इस्तीफा देना पड़ा। जलियांवाला हत्याकाण्ड के बारे में थॉम्पसन एवं गैरट ने लिखा है कि ‘‘अमृतसर दुर्घटना भारत-ब्रिटेन सम्बन्धों में युगान्तकारी घटना थी, जैसा कि 1857 का विद्रोह।’’इस बर्बर हत्याकांड के बाद भी देशवासियों के आजादी के जज्बे पर कोई खास असर नहीं पड़ा। सच बात तो यह है कि इस घटना के बाद ही आजादी हासिल करने की चाहत उनमें और जोर से उफान मारने लगी। आजादी की चाह न केवल पंजाब, बल्कि पूरे देश में बच्चे-बच्चे के सिर चढ़ कर बोलने लगी। हजारों हिंदोस्तानियों ने जलियांवाला बाग की मिट्टी को माथे से लगाकर देश को आजाद कराने की कसम खाई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना से पंजाब पूरी तरह से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गया और इसी नरसंहार की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप गांधी जी ने साल 1920 में असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इस नरसंहार के विरोध में अपना नाइटहुड का खिताब वापस कर दिया। ऊधम सिंह ने अपनी यह कसम इक्कीस साल बाद पूरी की। 13 मार्च, 1940 को उन्होंने लंदन के कैक्सटन हॉल में ब्रिटिश लेफ्टिनेण्ट गवर्नर मायकल ओ डायर को पिस्तोल से गोली चलाकर मार डाला। जलियांवाला हत्याकांड का देश के एक और बड़े क्रांतिकारी शहीद भगतसिंह के मन पर भी काफी असर पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 12 साल थी। इस घटना की खबर मिलते ही भगतसिंह अपने स्कूल से 12 मील पैदल चलकर जालियांवाला बाग पहुंच गए और उन्होंने भी बाग की मिट्टी उठाकर यह कसम ली कि देश की आजादी के लिए वे अपना सब कुछ कुर्बान कर देंगे। शहीद ऊधमसिंह और शहीद भगतसिंह की जिंदगी से जुड़ी हुई यह दो छोटी-छोटी मिसालें बतलाती हैं कि जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उस वक्त देशवासियों के दिलोदिमाग पर कितना असर डाला था। वे क्यों देश की आजादी के लिए आंदोलित और उस पर मर मिटने के लिए तैयार हो गए थे ? जलियांवाला बाग हत्याकांड देश के स्वतंत्रता आंदोलन में मील का पत्थर साबित हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">इस हत्याकांड के 28 साल बाद हमारा देश आजाद हो गया।<br />
ब्रिटिश सरकार, जलियांवाला बाग जैसे नृशंस हत्याकांड के लिए भारत से माफी मांगे, यह मांग वर्षों से उठती रही है। ब्रिटिश सरकार, इस मामले में कई बार अपना अफसोस जता चुकी है, लेकिन जब भी औपचारिक माफी की बात आती है, तो सरकार किनारा कर लेती है। साल 1997 में जब महारानी एलिजाबेथ द्वितीय भारत के दौरे पर आईं, तो जलियांवाला बाग जाने से पहले उन्होंने इस घटना को इतिहास का दुखद उदाहरण बतलाया, पर माफी के सवाल पर खामोश रहीं। कमोबेश यही रवैया, ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन का भी ंरहा, साल 2013 में अपनी भारत यात्रा पर उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार पर खेद जताते हुए, इसे बेहद शर्मनाक त्रासदी बताया, लेकिन माफी नहीं मांगी। इस साल जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 साल पूरे होने पर भारत में ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन में भी एक बार फिर यह मांग उठी कि बरतानवी हुकूमत को इस शर्मनाक घटना के लिए भारतवासियों से औपचारिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">फरवरी महीने में ब्रिटेन के उच्च सदन ‘हाउस आॅफ लॉडर्स’ में इस प्रस्ताव को लेकर लंबी बहस हुई, जिसमें सरकार के कई मंत्रियों और सांसदों ने भागीदारी की। कई सांसदों ने इस बात का भी आग्रह किया कि ब्रिटेन सरकार को जलियांवाला बाग हत्याकांड की जांच के लिए बनाए गए, ‘हंटर आयोग’ की रिपोर्ट पर भी माफी मांगनी चाहिए। जिसने इस नृशंस घटना के खलनायक कर्नल डायर को गोली चलाने के फैसले को चूक करार दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, बहस के समापन पर अंग्रेज सरकार का वही रवैया सामने आया। सरकार ने जलियांवाला बाग नरसंहार की निंदा तो की, लेकिन माफी नहीं मांगी। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरिजा मे ने ब्रिटिश संसद के निचले सदन ‘हाउस आॅफ कॉमंस’ में संसद को संबोधित करते हुए, जलियांवाला बाग हत्याकांड पर अपना दु:ख जताया, इस घटना को ब्रिटिश-भारतीय इतिहास में शर्मसार धब्बा भी करार दिया। अलबत्ता, ब्रिटिश राज में हुए इस नरसंहार के लिए, उन्होंने औपचारिक माफी नहीं मांगी। ब्रिटिश सरकार जब इस घटना को गलत मानती है, उसकी निंदा करती है और उसे इस घटना का अपराधबोध भी है, तो फिर उसे माफी मांगने से क्यों गुरेज है ?</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Apr 2019 20:06:43 +0530</pubDate>
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                <title>शैलजा हत्याकांड: निखिल के अलावा उसके दो और रिश्तेदार शक के दायरे में</title>
                                    <description><![CDATA[शक के आधार पर पुलिस ने निखिल के चाचा और भाई को किया गिरपफतार दिल्ली। दिल्ली में एक आर्मी ऑफिसर की पत्नी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार मेजर निखिल हांडा ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है। मेजर हांडा ने पूछताज में पुलिस को बताया कि वह शैलजा के प्यार में पागल था और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sheljah-massacre-nikhil-two-more-relatives-suspect/article-4496"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kjkj-copy-6.jpg" alt=""></a><br /><h1>शक के आधार पर पुलिस ने निखिल के चाचा और भाई को किया गिरपफतार</h1>
<p><strong>दिल्ली।</strong></p>
<p>दिल्ली में एक आर्मी ऑफिसर की पत्नी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार मेजर निखिल हांडा ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है। मेजर हांडा ने पूछताज में पुलिस को बताया कि वह शैलजा के प्यार में पागल था और उससे शादी करना चाहत था। लेकिन शैलजा के मना करने पर वह हताश होगया, शैलजा के मना करने पर वह बहुत गुस्से में था जिसके चलते उसने चाकू से गला रेतकर शैलजा की हत्या कर दी। शुरुआत में शैलजा की हत्या दुर्घटना प्रतीत हुई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया तो पता चला कि शैलजा की गला रेतकर हत्या की गई थी। वारदात के 24 घंटे के अंदर मुख्य आरोपी निखिल की गिरफ्तारी के बाद हत्या की पुष्टि भी हो गई। लेकिन अब इस हत्याकांड में निखिल के अलावा उसके दो और रिश्तेदार शक के दायरे में आ गए हैं। पुलिस ने बताया कि सोमवार को निखिल के चाचा और उसके भाई को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या वाकई इस हत्याकांड में निखिल के अलावा उसके चाचा और भाई की भी कोई रोल है</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jun 2018 15:02:53 +0530</pubDate>
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                <title>जार्डन हत्याकांड की एसओजी जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[एएसपी संजीव भटनागर ने देखा घटनास्थल श्रीगंगानगर । हिस्ट्रीशीटर विनोद श्योराण उर्फ जार्डन हत्याकांड की एसओजी जांच शुरू हो गई है। इसके साथ साथ पंजाब पुलिस की उस टीम का भी साथ लिया जाएगा, जिसने कुछ समय पहले विक्की गोंडा का इनकाउंटर किया था। जॉर्डन की हत्या के सिलसिले मेँ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ जवाहर नगर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/jordanian-massacre-begins-sog-probe/article-3759"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/jorden-.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">एएसपी संजीव भटनागर ने देखा घटनास्थल</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर । </strong>हिस्ट्रीशीटर विनोद श्योराण उर्फ जार्डन हत्याकांड की एसओजी जांच शुरू हो गई है। इसके साथ साथ पंजाब पुलिस की उस टीम का भी साथ लिया जाएगा, जिसने कुछ समय पहले विक्की गोंडा का इनकाउंटर किया था। जॉर्डन की हत्या के सिलसिले मेँ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ जवाहर नगर थाना में आईपीसी की धारा 302, 143, 120 व 27 आर्म्स एक्ट मेँ एफआईआर दर्ज हुई है। एसओजी के एडि एसपी संजीव भटनागर ने श्रीगंगानगर पहुँच कर जांच शुरु कर दी हैं। पंजाब पुलिस के विक्रम जीत सिंह बराड़ भी टीम के साथ गंगानगर आ चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एसओजी के आईजी दिनेश एम राजन के आदेश भी एसपी आॅफिस आ गए। इस आदेश में कहा गया है कि एसओजी के एडि एसपी संजीव भटनागर के पर्यवेक्षण मेँ एक टीम का गठन किया जाकर निर्देशित किया जाता है कि जिला पुलिस श्रीगंगानगर के साथ समन्वय स्थापित कर अपराध मेँ शामिल संगठित अपराधियों को पकड़ने की कार्यवाही करे। वहीं जार्डन के शव का पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों को सौंप दिया गया है। जार्डन के शरीर में 16 गोलियां लगी हुई थी। इससे पूर्व जार्डन के परिजनों ने एसओजी से जांच करवाने की मांग को लेकर पोस्टमार्टम करवाने से इंकार कर दिया था जिसको लेकर आज सुबह से ही गहमागहमी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">शहर के अनेक जनप्रतिनिधि पुलिस अधीक्षक हरेन्द्र महावर से मुलाकात करने पहुंचे जिनमें बिहाणी शिक्षा न्यास के अध्यक्ष जयदीप बिहाणी, नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार गौड़, भाजपा युवा मोर्चा के रमजान अली, नगर परिषद के उप सभापति लक्की दावड़ा, पार्षद पवन गौड़, पार्षद संदीप शर्मा, पार्षद धर्मपाल श्योराण सहित अनेक जनप्रतिनिधि पहुंचे। इन जनप्रतिनिधियों ने कहाकि जब तक हत्याकांड की जांच एसओजी से करवाने के आदेश जारी नहीं होते, वह पोस्टमार्टम नहीं करवायेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर पुलिस अधीक्षक ने जयपुर में एसओजी आईजी दिनेश एनएम से बातचीत करके मामले की जानकारी दी। एसओजी आईजी ने तुरंत ही जॉर्डन हत्याकांड को लेकर जवाहरनगर पुलिस थाना में दर्ज मुकदमा नम्बर 290, धारा 302, 143, 120 बी की जांच एसओजी के एएसपी संजीव भटनागर के नेतृत्व में टीम गठित करने के आदेश जारी कर दिए। इन आदेशों की प्रति शिष्टमण्डल को सौंप दी गई। विदित रहे कि मीरा मार्ग पर स्थित एक जिम में मंगलवार सुबह साढ़े पांच बजे एचएस जॉर्डन की हत्या के बाद परिजनों ने इस हत्याकांड की जांच एसओजी (स्पेशल आॅपरेशन गु्रप) से जांच करवाने की मांग करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाने से इंकार कर दिया था। ऐसे में कल से शव जिला अस्पताल के मुर्दा घर में पड़ा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">एसओजी एएसपी ने देखा घटनास्थल</h4>
<p style="text-align:justify;">स्पेशल आॅपरेशन ग्रुप (एसओजी)ने जॉर्डन हत्याकांड की जांच शुरू कर दी है। एसओजी के एएसपी पूरी टीम के साथ आज सुबह घटनास्थल पर पहुंचे और घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली। एएसपी संजीव भटनागर ने जवाहरनगर पुलिस के साथ मीरा मार्ग पर स्थित जिम में पहुंचे। श्री भटनागर ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पुलिस अधीक्षक हरेन्द्र महावर, एएसपी सुरेन्द्र ासंह राठौड़ व पुलिस उप अधीक्षक तुलसीदास पुरोहित से मुलाकात करके घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अपनी टीम के साथ हर पहलू पर चर्चा की। उन्होंने हत्यारों के सीसीटीवी फुटेज भी देखे। एसओजी के साथ जिला पुलिस के अधिकारी भी इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले अज्ञात युवकों के बारे में सुराग जुटाने में लगे हुए हैं। पुलिए अधीक्षक के आदेश पर महिला पुलिस थाना प्रभारी नरेन्द्र पूनियां, जवाहरनगर एसएचओ प्रशांत कौशिक, कोतवाली पुलिस थाना प्रभारी हनुमानाराम बिश्रोई जांच पड़ताल में जुटे हुए हैं।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 20:54:55 +0530</pubDate>
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