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                <title>ministry - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>मानव संसाधन विकास मंत्रालय की टीम पहुंची सरसा,  जाने क्या है वजह</title>
                                    <description><![CDATA[– पहले दिन टीम ने जेएनवी ओढां में निरीक्षण कर जांची व्यवस्थाएं सरसा (सुनील वर्मा)। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (human resource development ministry) की टीम रविवार को सरसा पहुंची। टीम ने प्रथम दिन ओढ़ां स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम का नेतृत्व एनसीईआरटी से ऐश्वर्या, प्रवक्ता आसीमा, समग्र शिक्षा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/human-resource-development-ministry/article-39824"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/sirsa-13.jpg" alt=""></a><br /><h4><strong>– पहले दिन टीम ने जेएनवी ओढां में निरीक्षण कर जांची व्यवस्थाएं</strong></h4>
<p><strong>सरसा (सुनील वर्मा)।</strong> मानव संसाधन विकास मंत्रालय <strong>(<span class="HwtZe" lang="en" xml:lang="en"><span class="jCAhz ChMk0b"><span class="ryNqvb">human resource development ministry</span></span></span>)</strong> की टीम रविवार को सरसा पहुंची। टीम ने प्रथम दिन ओढ़ां स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम का नेतृत्व एनसीईआरटी से ऐश्वर्या, प्रवक्ता आसीमा, समग्र शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक बूटाराम, सहायक जिला समन्वयक शशि सचदेवा कर रही है। टीम सोमवार को कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय व आरोही विद्यालय में विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लेगी। जिले के छह खंडों में 12 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय व आरोही विद्यालय है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें– <a href="http://10.0.0.122:1245/cattle-free-city/">कैटल फ्री शहर में पशुओं की भरमार, हादसों का इंतजार</a></strong></p>
<h3><strong>– विद्यार्थियों से की बातचीत | <span class="HwtZe" lang="en" xml:lang="en"><span class="jCAhz ChMk0b"><span class="ryNqvb">human resource development ministry</span></span></span><br />
</strong></h3>
<p>केंद्रीय टीम रविवार को जवाहर नवोदय विद्यालय में पहुंची। टीम ने विद्यार्थियों को दी जा रही शिक्षा के स्तर की जांच की। इसी के साथ छात्रावास में विद्यार्थियों को दिए जा रहे खाने की क्वालिटी जांची गई। उन्होंने विद्यार्थियों को खाने के बारे में पूछताछ की। वहीं विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में आंकलन किया गया। टीम ने जांच रिपोर्ट भी तैयार की ताकि उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा सके। समग्र शिक्षा अभियान की सहायक जिला परियोजना समन्वयक शशि सचदेवा ने बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की टीम आवासीय स्कूलों में निरीक्षण करेगी। टीम सभी खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय व आरोही स्कूलों में निरीक्षण करेगी।</p>
<h3><strong>– टीम इन स्कूलों में करेगी निरीक्षण</strong></h3>
<p><strong>खंड, कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, आरोही विद्यालय</strong></p>
<ul>
<li><strong>बड़ागुढ़ा, फतेहपुरिया झिड़ी</strong></li>
<li><strong>डबवाली, रत्ताखेड़ा, कालुआना</strong></li>
<li><strong>ऐलनाबाद, धोलपालिया, खारी सुरेरा</strong></li>
<li><strong>ना. चौपटा, रामपुरा ढिल्लो, नाथूसरी कलां</strong></li>
<li><strong>ओढां, च_ा, श्रीजलालआना साहिब</strong></li>
<li><strong>रानियां, केहरवाला, मोहम्मदपुरिया</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Nov 2022 20:29:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मंत्रालयों में 40 से अधिक संयुक्त सचिवों, समकक्ष अधिकारियों की नियुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों में 40 से अधिक संयुक्त सचिवों और उनके समकक्ष अधिकारियों की नियुक्ति की घोषणा की। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने इस फेरबदल को मंजूरी दी। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अलावा, भारतीय वन सेवा (आईएफओएस), भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा (आईएएंडएएस) और भारतीय डाक सेवा (आईपीओएस) […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/appointment-of-more-than-40-joint-secretaries-equivalent-officers-in-ministries/article-31066"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/ministry.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> केन्द्र सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों में 40 से अधिक संयुक्त सचिवों और उनके समकक्ष अधिकारियों की नियुक्ति की घोषणा की। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने इस फेरबदल को मंजूरी दी। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अलावा, भारतीय वन सेवा (आईएफओएस), भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा (आईएएंडएएस) और भारतीय डाक सेवा (आईपीओएस) जैसी अन्य सेवाओं के अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, आईएएस अधिकारी गीता मीतिना को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। राजबीर एस पंवार (आईएफओएस) को कृषि मंत्रालय के तहत नेशनल एग्रीकल्चरल कोआॅपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड (एनएएफईडी) में प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसीसी ने आईएएस अधिकारी अमित सिंह नेगी की पांच साल के कार्यकाल के लिए व्यय विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी। आईए एंड एएस अधिकारी मनोज सहाय को भी संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार के रूप में व्यय विभाग में स्थानांतरित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एजीएमयूटी कैडर के आईएएस अधिकारी कुणाल को आईपीएस अधिकारी अतुल सिंह की जगह खेल विभाग का संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है, जिन्हें समय से पहले उनके मूल कैडर में वापस कर दिया गया है। इसके साथ ही जिन अन्य अधिकारियों को नई पोस्टिंग मिली है, उनमें भारतीय रेलवे यातायात सेवा (आईआरटीएस) के अधिकारी अभिजीत नरेंद्र, केरल कैडर के एलएएस अधिकारी आनंद सिंह और भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस) अधिकारी ऋचा मिश्रा शामिल हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Feb 2022 11:10:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रक्षा मंत्रालय ने बदला सर्विस रूल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की अधिकतम 65 वर्ष की</title>
                                    <description><![CDATA[चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर रह सकते हैं। रक्षा मंत्रालय ने नौसेना, वायुसेना और थल सेना के सर्विस रूल में भी यह बदलाव किया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ministry-of-defense-changed-service-rule/article-12096"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/ministry-defense.jpg" alt=""></a><br /><h2>रक्षा मंत्रालय ने नौसेना, वायुसेना और थल सेना के सर्विस रूल में भी यह बदलाव किया है। <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Ministry of Defence</span></span></h2>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी) ।</strong> चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर रह सकते हैं। रक्षा मंत्रालय (<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Ministry of Defence</span></span>) ने नौसेना, वायुसेना और थल सेना के सर्विस रूल में भी यह बदलाव किया है। अभी सेना प्रमुख अधिकतम 62 वर्ष या तीन वर्ष के कार्यकाल (दोनों में से जो पहले आता हो) तक अपने पद पर रह सकते हैं। किसी सेना प्रमुख को सीडीएस बनाए जाने पर आयु सीमा का नियम आड़े न आए इसलिए रक्षा मंत्रालय ने सर्विसेस के नियमों में सुधार किया है।</p>
<h2>पद छोड़ने के बाद सरकारी और निजी पद नहीं ग्रहण कर सकते सीडीएस | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Ministry of Defence</span></span></h2>
<p>कैबिनेट कमेटी ने मंगलवार को सीडीएस के पद को मंजूरी दी थी। यह रक्षा मंत्रालय के लिए मुख्य सैन्य सलाहकार के तौर पर काम करेंगे। सीडीएस अपना पद छोड़ने के बाद किसी भी सरकारी पद पर नहीं रह सकते हैं। पद छोड़ने के 5 साल बाद तक बिना पूर्व अनुमति के सीडीएस निजी पद भी ग्रहण नहीं कर सकते हैं।</p>
<h2>4 स्टार जनरल के बराबर होगा सीडीएस का ओहदा| <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Ministry of Defence</span></span></h2>
<ul>
<li><strong>कैबिनेट बैठक में तय किया गया था कि सीडीएस का पद 4 स्टार जनरल के बराबर होगा। </strong></li>
<li><strong>केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया था कि सीडीएस सरकार के प्रधान सैन्य सलाहकार होंगे। </strong></li>
<li><strong> लेकिन तीनों सेनाओं के प्रमुख पहले की तरह अपने क्षेत्र से संबंधित मामलों में रक्षा मंत्री को सलाह देते रहेंगे।</strong></li>
<li><strong>सीडीएस तीनों सेनाओं से संबंधित मुद्दों पर सरकार और सैन्य बलों के बीच संपर्क सेतु की तरह काम करेंगे। </strong></li>
<li><strong>इस पद पर नियुक्त किए जाने वाले अधिकारी पर, सेना के तीनों अंगों के बीच कामकाज में समन्वय स्थापित करने और वित्तीय मामलों में सलाह देने की जिम्मेदारी होगी।</strong></li>
</ul>
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<p>Ministry, Defense, Changed, Service, Rule</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/ministry-of-defense-changed-service-rule/article-12096</link>
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                <pubDate>Mon, 30 Dec 2019 12:45:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आत्महत्याओं पर विराम लगाएगा इंग्लैण्ड का मंत्रालय</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृति की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि इंग्लैण्ड में खुदकशी रोकने के लिए अलग से मंत्रालय बनाया गया है। इंग्लैण्ड की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने बढ़ती आत्महत्याओं को रोकने के लिए अलग से मंत्रालय बनाकर आत्महत्या मामलों की नई मंत्री बनाया है। यह शायद पहला मौका […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/englands-ministry-paused-suicides/article-6590"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/raj-bjp-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दुनिया में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृति की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि इंग्लैण्ड में खुदकशी रोकने के लिए अलग से मंत्रालय बनाया गया है। इंग्लैण्ड की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने बढ़ती आत्महत्याओं को रोकने के लिए अलग से मंत्रालय बनाकर आत्महत्या मामलों की नई मंत्री बनाया है। यह शायद पहला मौका है जब किसी देश में आत्महत्या रोकने को लेकर अलग मंत्रालय बनाया गया है। इंग्लैण्ड की यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है कि आत्महत्या की प्रवृति खासतौर से युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। मजे की बात यह है कि हमारे देश में तो राजनीतिक दलों व प्रतिक्रियावादियों द्वारा आत्महत्याओं को राजनीतिक रोटियां सेंकने के हथियार के रुप में काम में लिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आत्महत्याओं के कारणों के प्रति गंभीर होने के स्थान पर राजनीतिक दलोें, प्रतिक्रियावादियों द्वारा इसे नए आंदोलन के रुप में उपयोग किया जाने लगा है। हांलाकि यह अपने आपमें गंभीर है। प्रश्न यह उठता है कि कोई किसी भी कारण से आत्महत्या करता है तो उसका दोष केवल व्यवस्था पर मढ़ देना उचित नहीं माना जा सकता। इंग्लैण्ड ने आत्महत्या की बढ़ती प्रवृति को गंभीरता से लिया है। यही कारण है कि यह मंत्रालय इंग्लैण्ड में आत्महत्या रोकथाम संबंधी नए राष्टÑीय प्रयास करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अवसाद में आए नागरिकों से संवाद कायम कर अवसाद के कारणों का समाधान करेगा। आत्महत्या रोकने के राष्टर््ीय प्रयासों की अगुवाई कर आत्महत्याओं में कमी लाएगा। दरअसल एक मोटे अनुमान के अनुसार इंग्लैण्ड में प्रतिवर्ष 4500 लोग मौत को गले लगाते हैं। इनमें भी अधिकांश संख्या युवाओं की होती है। 19 हजार लोग आत्महत्या के प्रयास करते सामने आए हैं साल 2015-16 में इंग्लैण्ड में। दर असल आत्महत्या का प्रमुख कारण डिप्रेशन का बढ़ता प्रभाव है। अनुमान के अनुसार पिछले 25 सालों में इंग्लैण्ड में 70 फीसदी की दर से डिप्रेशन में बढ़ोतरी हो रही है। यह अपने आप में गंभीर है।</p>
<p style="text-align:justify;">हांलाकि वर्तमान परिस्थितियों, सामाजिक ताने बाने, रहन-सहन, खान-पान, आवश्यकताओं में बढ़ोतरी और अंधी प्रतिस्पर्धा के चलते एकाकीपन और कुंठा में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। यही कारण है कि जान दे देना और जान ले लेना आज बच्चों का खेल होता जा रहा है। यह विश्वव्यापी समस्या है। देखा जाए तो इंग्लैण्ड में सांसद कॉक्स के अनवरत अभियान का यह परिणाम है। लेबर पार्टी के सांसद जो कॉक्स ने समूचे इंग्लैण्ड में अकेलेपन और डिप्रेशन के खिलाफ मुहिम चलाई और इस हिम का परिणाम ही रहा है कि इंग्लैण्ड में अलग से मंत्रालय अस्तित्व में आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">युवाओं में तेजी से बढ़ती डिप्रेशन की बीमारी को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन का अध्ययन न केवल चेताने वाला है अपितु गंभीर चिंता का विषय भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 2020 आते आते डिप्रेशन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी हो जाएगी। अकेले इंग्लैण्ड में 90 लाख लोग अकेलेपन व डिप्रेशन के शिकार हैं। ऐसा नहीं है कि डिप्रेशन या आत्महत्या इंग्लैण्ड की ही समस्या है अपितु यह विश्वव्यापी समस्या है और यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार चेताता आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">डिप्रेशन के कारण कुंठा, अवसाद, चिड़चिड़ापन और आत्म हत्याओं का ग्राफ दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। संयुक्त परिवार का विघटन, नौकरी में लक्ष्य प्राप्ति के लिए अत्यधिक दबाव, अनावश्यक प्रतिस्पर्धा, दूसरे के सुख से दुबले होना आदि ऐसी प्रवृतियां विकसित होती जा रही हंै जिससे व्यक्ति कुंठाग्रस्त होकर डिप्रेशन का शिकार होता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अकेलेपन और डिप्रेशन की समस्या से युवाओं के साथ साथ बुजुर्ग भी झेलते जा रहे हैं। बदलती पारिवारिक स्थितियां बुजुर्गों को एकाकीपन की और धकेल रही हैं और यह एकाकीपन डिप्रेशन का रुप लेता जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार कार्य क्षेत्र पर अत्यधिक दबाव और टारगेट आधारित वेतन भत्तों के चलते कारपोरेट क्षेत्र में काम करने वाले 42 फसीदी युवा डिप्रेशन की चपेट में आते जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज की युवा पीढ़ी खेलने-कूदने के दिनों में जिस तरह से डिप्रेशन का शिकार हो रही है वह किसी भी देश की भावी पीढ़ी के लिए उचित नहीं माना जा सकता है। सबसे मजे की बात यह है कि ग्लेमर या मौज मस्ती की मानी जानी वाली नौकरियों में ही सर्वाधिक डिप्रेशन का शिकार होना पड़ रहा है। आज सबसे ज्यादा डिप्रेशन का शिकार मीडिया खासतौर से इलेर्क्टेनिक मीडिया से जुड़े युवा, दूरसंचार, आईटी, केपीओ, बीपीओं और मार्केटिंग से जुड़े क्षेत्र के युवा हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सब तो तब है जब आज की युवा पीढ़ी स्वास्थ्य और खान-पान के प्रति अधिक सजग होने लगी है। जिम जाना या भोजन में कोलेस्टर््ेल, प्रोटिन, काबोर्हाईड्रेट या अन्य पोषक तत्वों की अधिक जानकारी रखने के बावजूद फास्टफूड का बढ़ता मोह स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">गैलप की भी सर्वे रिपोर्ट ने विकास की ओर तेजी से बढ़ते भारत के नियंताओं को सोचने को मजबूर कर दिया है। गैलप की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार देशवासियों खासतौर से ग्रामीणों में निराशा की भावना अधिक बढ़ रही है। बदलते सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने के कारण निराशा बढ़ना स्वभाविक भी लगती है। एक समय था तब हमारा आदर्श साधा जीवन-उच्च विचार होता था। जीवन की सीमित आवश्यकताओं के कारण जीवन जीने का अलग ही अंदाज होता था। दैनिक आवश्यकताएं सीमित होती थी।</p>
<p style="text-align:justify;">दिखावे को सराहा नहीं बल्कि व्यंग के रुप में देखा जाता था। व्यक्ति की पहचान उसकी सादगी और विचारों से होती थी। आज स्थिति उलट है। अमीर व गरीब के बीच की खाई बढ़ने के साथ ही अमीर व अमीर के बीच ही दिखावे की अंतहीन प्रतिस्पर्धा होने लगी है। तेरी कमीज मेरी कमीज से अधिक उजली कैसे ? इसी में मरे जा रहे हैं हम आज।</p>
<p style="text-align:justify;">गैलप की रिपोर्ट में खुलासे के अनुसार पिछले वर्षोे में ही सोच में काफी बदलाव आ गया है। इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने विज्ञापनों के माध्यम से जो सब्जबाग दिखाया है उसके कारण लोगों में जीवन जीने को लेकर असंतोष अधिक बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार हुआ है। नए रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन, बढ़ती महंगाई की तुलना में सीमित आय व जीवन स्तर में बदलाव के कारण निराशा अधिक बढ़ रही है। गॉंवों में पारंपरिक उद्योगों की जगह नए उद्योगों ने ले ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">कारपोरेट कार्मिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रतिस्पर्धा के कारण तनाव में रहना है। एकल परिवार, कार्यक्षेत्र परिवार से दूर होने के कारण अकेले रहने, लिव इन रिलेशनशिप, बाजार में प्रतिस्पर्धा और ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत की संस्कृति के कारण तनाव बढ़ रहा है। आज घर की परिभाषा ही बदल गई है। अब तो परिवार के भी मानक बदल गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिश्ते नाते पीछे चले गए हैं, डिप्रेशन रिलीज नहीं होने के कारण मस्तिष्क के किसी कोने में तनाव के अंश सुशुप्त अवस्था में रह जाते हैं और इससे कुंठा, अनिंद्रा, झुंझलाहट, ब्लडप्रेशर और ना जाने कितनी ही बीमारियों को पाल लेते हैं। टीवी चैनलों में आ रहें आज के सीरियलों में एक के बाद एक साजिशों का दौर तनाव का नया कारण बनता जा रहा है। एक समय था जब घर को पूरा समय नहीं देने पर बड़े बुजुर्ग कहा करते थे कि घर को सराय समझ रखा है क्या वहीं आज नौकरी पेशा लोगों के लिए घर सराय से अधिक नहीं रह जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इंग्लैण्ड ने समय रहते वक्त की नजाकत और समस्या की गंभीरता को समझा है। अकेलेपन और डिप्रेशन की समस्या विश्वव्यापी समस्या है और जिस तरह से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी बनने जा रही है इसके लिए सरकारों के साथ ही सामाजिक चिंतकों व मनोविज्ञानियों को गंभीर चिंतन मनन करना होगा ताकि समय रहते इस समस्या का हल खोजा जा सके। आत्महत्याओं को राजनीतिक रोटियां सेंकने का माध्यम बनाना किसी भी तरह से आज की युवा पीढ़ी के हित में नहीं होगा। समाज विज्ञानियों को भी खुदकशी की बढ़ती समस्या के कारणों को चिन्हित करने के साथ ही सरकारों को सामाजिक ताने-बाने को टूटने से बचाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Nov 2018 13:51:17 +0530</pubDate>
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                <title>प्रधानमंत्री मुद्रा योजना : वित्त मंत्रालय ने ई-कॉमर्स कंपनियों संग किया करार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत छोटे उद्यमियों को लोन मुहैया करवाने के लिए दो दर्जन से ज्यादा ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ करार किया है, जिसमें अमेजन, फ्लिपकार्ट, ओला और उबर जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है। कर्जदाता, उद्योग और सरकार के बीत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ministry-of-finance-has-entered-into-an-agreement-with-e-commerce-companies/article-3762"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/02.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत छोटे उद्यमियों को लोन मुहैया करवाने के लिए दो दर्जन से ज्यादा ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ करार किया है, जिसमें अमेजन, फ्लिपकार्ट, ओला और उबर जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है। कर्जदाता, उद्योग और सरकार के बीत इस त्रिस्तरीय साझेदारी का उद्देश्य छोटे व्यवसायों को लोन मुहैया करवाना है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सरकार की एक फ्लैगशिप योजना है जिसका उद्देश्य छोटे उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक का लोन मुहैया करवाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्त सेवा सचिव राजीव कुमार ने बताया, “यहां पर ओला, फ्लिपकार्ट, उबर, डब्बावाला, केबल ऑपरेटर और जोमैटो जैसी कंपनियां हैं जिनमें तमाम छोटे उद्यमी साझेदार के रुप में होते हैं, जिन्हें लोन की जरूरत होती है। हम मुद्रा योजना के तहत आगे बढ़कर उनकी मदद करना चाहते हैं। बैंक अच्छे उद्यमियों की तलाश में रहते हैं, कंपनियां अपने साझेदारों की मदद करने की कोशिशें करती रहती हैं और हम सिर्फ इन डॉट्स को सिर्फ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अप्रैल 2015 को लॉन्च किया था जिसके अंतर्गत नॉन कार्पोरेट, नॉन फार्म (गैर-कृषि) छोटे एवं मझौले उद्योगों को 10 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध करवाया जाता है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 May 2018 07:44:39 +0530</pubDate>
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