<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/costs/tag-6137" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Costs - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/6137/rss</link>
                <description>Costs RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>समर्थन मूल्य बढ़ाना संकट का हल नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र सरकार ने खरीफ की फसलों के खासकर धान के भाव में 200 रुपये का रिकार्ड वृद्धि कर किसानों को खुश करने का प्रयास किया है। बेशक यह दुरुस्त कदम है पर ऐसे कदम पहले ही उठाए जाने की जरूरत थी। पिछले वर्षों में मोदी सरकार ने फसलों के न्यूनतम भावों में मामूली सी बढ़ोत्तरी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/increasing-support-costs-is-not-a-crisis-solution/article-4762"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/dhan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार ने खरीफ की फसलों के खासकर धान के भाव में 200 रुपये का रिकार्ड वृद्धि कर किसानों को खुश करने का प्रयास किया है। बेशक यह दुरुस्त कदम है पर ऐसे कदम पहले ही उठाए जाने की जरूरत थी। पिछले वर्षों में मोदी सरकार ने फसलों के न्यूनतम भावों में मामूली सी बढ़ोत्तरी की थी। भले ही इस बढ़े भाव के पीछे अगले लोकसभा चुनाव मुख्य कारण हंै फि र भी इसे कृषि संकट का हल नहीं माना जा सकता। यह भी तथ्य हैं कि स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू करने से भी कृषि संकट हल नहीं होता। कमिशन की सिफारिशें खर्चे व मुनाफे पर आधारित हैं। आज का संकट सिर्फ कृषि का घाटा होने तक ही सीमित नहीं बल्कि कृषि का अस्तित्व खत्म होने का है। यदि किसान को धान का भाव ज्यादा मिल भी गया तो वह भूजल के खत्म होने की हालत में कृषि कैसे करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">धान की कीमत बढ़ने से किसान के लिए फायदेमंद हो या ना हो लेकिन यह भूजल के संकट को और अधिक गंभीर करेगा। केंद्र सरकार ने भाव तय करते समय फसली विभिन्नता को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया है। धान के साथ-साथ मक्की तथा अन्य फसलों की बिजाई बढ़ाने पर जोर देने की जरूरत है। जहां तक कृषि लागत खर्चों की बात है डीजल का रेट लगातार बढ़ रहा है, जिससे धान के रेट में बढ़ोत्तरी किसानों के लिए कोई बड़ी राहत नहीं है। खादों पर सब्सिडी लगातार घटाई जा रही है। बीज, कृषि के औजार मंहगे हो रहे हैं। इसलिए कृषि का संकट महज कम खरीद मूल्य की देन नहीं बल्कि जमीन की सेहत तथा पानी की शुद्धता की आवश्यक उपलब्धता पर भी निर्भर है। देश का भला किसानों की आर्थिक खुशहाली के साथ भविष्य में धरती पर पानी की बचत में है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल कृषि संबंधी नीतियां राजनीतिक चुनावी मत्था पच्ची में घिर गई हैं। खेती विशेषज्ञों की रिपोर्टों को पढ़ा तक नहीं जाता। कहीं ऐसा ना हो कि कृषि की एक कमी को दूर करने के लिए कोई दूसरी गलती हो जाए। स्वामीनाथन की सिफारिशें जायज हैं, जिन्हें पूरा करने के साथ-साथ मौजूदा परिस्थितियों पर भी विचार करना होगा जो आज की वास्तविकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/increasing-support-costs-is-not-a-crisis-solution/article-4762</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/increasing-support-costs-is-not-a-crisis-solution/article-4762</guid>
                <pubDate>Mon, 09 Jul 2018 06:14:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-07/dhan.jpg"                         length="128414"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ATF के दाम बढ़ने से महंगा हो सकता है हवाई सफर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। बीते एक साल के दौरान एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में 30 फीसद तक का इजाफा हो चुका है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू परिचालन की लागत को पूरा करने के लिए विमानन कंपनियों को हवाई किराए में संशोधन को मजबूर होना पड़ सकता है। एयरलाइन्स की कॉस्ट (लागत) में 45 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/air-travel-can-be-costly-by-increasing-atf-costs/article-3763"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/air.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>बीते एक साल के दौरान एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में 30 फीसद तक का इजाफा हो चुका है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू परिचालन की लागत को पूरा करने के लिए विमानन कंपनियों को हवाई किराए में संशोधन को मजबूर होना पड़ सकता है। एयरलाइन्स की कॉस्ट (लागत) में 45 फीसद हिस्सा जेट फ्यूल का होता है, ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन कंपनियां हवाई किराए में 15 फीसद के इजाफे का विचार कर सकती हैं। हालांकि इस पर सीधी प्रतिक्रिया देने से एयरलाइन कंपनियों ने किनारा किया लेकिन कुछ निजी विमानन कंपनियों ने कहा है कि एटीएफ में वृद्धि के बाद बढ़ने वाली लागत को कैसे पूरा किया जाए इस पर अभी फैसला लिया जाना बाकी है जबकि परिस्थितियां किराए में बढ़ोतरी पर जोर दे रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीते एक साल के दौरान एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में 30 फीसद का इजाफा हो चुका है जिसमें से 25 फीसद इजाफा बीते 6 महीनों में ही हुआ है। इस अनिश्चितता पर एक निजी विमानन कंपनी के कार्यकारी ने बताया, ह्लबीते साल नवंबर महीने से अब तक जेट फ्यूल की कीमत में 25 फीसद का इजाफा हो चुका है, ऐसे में यह हवाई किराए में बढ़ोतरी पर जोर देता है ताकि लागत को पूरा किया जा सके। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) को जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) कर व्यवस्था के दायरे में लाने को लेकर विमानन कंपनियों की बढ़ती मांग के बीच नागर विमानन सचिव आर एन चौबे ने कहा है कि वो इस मामले को वित्त मंत्रालय के समक्ष उठाएंगे, क्योंकि जेट फ्यूल की कीमतें जनवरी 2017 के बाद से अब तक 40 फीसद तक बढ़ चुकी हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/business/air-travel-can-be-costly-by-increasing-atf-costs/article-3763</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/business/air-travel-can-be-costly-by-increasing-atf-costs/article-3763</guid>
                <pubDate>Thu, 24 May 2018 07:50:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-05/air.jpg"                         length="43007"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        