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                <title>Statue of Chhatrapati Shivaji: 12 टन वजनी &amp;#8216;घोड़े पर सवार शिवाजी&amp;#8217; जल्द ही करेंगे इस शहर में प्रवेश!</title>
                                    <description><![CDATA[Statue of Chhatrapati Shivaji: जयपुर (गुरजंट धालीवाल)। धातु के विश्व प्रसिद्ध मूर्तिकार जयपुर निवासी राजकुमार पंडित (Sculptor Rajkumar Pandit) द्धारा करीब दो साल में तैयार की गई देश की पहली घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी की सबसे बड़ी प्रतिमा इसी साल मुंबई में स्थापित की जाएगी। लगभग 12 टन वजनी इस मूर्ति को बनाने में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/statue-of-chhatrapati-shivaji-maharaj-in-mumbai/article-54547"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/rajkumar-pandit-artist.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Statue of Chhatrapati Shivaji: जयपुर (गुरजंट धालीवाल)।</strong> धातु के विश्व प्रसिद्ध मूर्तिकार जयपुर निवासी राजकुमार पंडित (Sculptor Rajkumar Pandit) द्धारा करीब दो साल में तैयार की गई देश की पहली घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी की सबसे बड़ी प्रतिमा इसी साल मुंबई में स्थापित की जाएगी। लगभग 12 टन वजनी इस मूर्ति को बनाने में 30 कारीगरों की कड़ी मेहनत का परिणाम है कि घोड़े पर सवार शिवाजी की देश में सबसे बड़ी मूर्ति होगी। Jaipur News</p>
<h3>जयपुर के मूर्तिकार राजकुमार पंडित ने दो साल में बनाई मूर्ति</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा राजकुमार पंडित द्धारा जयपुर के आकेड़ा डूंगर में 108 फुट ऊंची भगवान परशुराम की मूर्ति भी बनाई जा रही है, जिसका वजन करीब 40 टन होगा। यह मूर्ति उतरप्रदेश में स्थापित होगी। साथ ही जयपुर में ही रामायण का लेखन करते हुए स्वामी तुलसीदास की 12 फुट की बैठक मुद्रा में मूर्ति बनाई जा रही है, जो कि यूपी के चित्रकूट जिले में लगेगी। अपने आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी देते हुए राजकुमार पंडित ने बताया कि यूपी के कानपुर देहात में रानी लक्ष्मीबाई, आगरा में महाराजा सूरजमल व हाथरस जिले में स्वतंत्रता सेनानी मलखान सिंह की 12-12 फीट की धातु से बनीं मूर्तियां लगाई जाएंगी। इनका निर्माण राजकुमार पंडित व उनकी 30 सदस्यीय टीम कर रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विदेशी भी राजकुमार पंडित की कला के मुरीद | Jaipur News</h3>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के कई पॉपुलर लीडर की मेटल स्टैच्यू बनाने वाले राजकुमार पंडित ने जीवन की विपरीत परिस्थितियों के बाद भी अपने हुनर की चमक पूरी दुनिया में बिखेरी है। राजकुमार पंडित को 18 देशों से धातु की मूर्तियों के प्रोजेक्ट मिले हैं। अमेरिका में अरबपति चार्ली मुंगर और अरबपति बिजनेसमैन वारेन वफेट की 10-10 मूर्तियां बनाकर भेजने के बाद अब इन दोनों की 10-10 और मूर्तियां बनाने का दुबारा आर्डर मिला है। ये मूर्तियां इनके 10 देशों में संचालित कार्यालयों में लगेंगी। यही नहीं धातु की मूर्तियों में प्रसिद्ध इटली जैसे देश में भी राजकुमार पंडित की कला के मुरीद हैं। इन्होंने इटली में धातु की मूर्तियां बनाकर भेजी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देश के इन राज्यों में लगाईं सैकड़ों मूर्तियां | Statue of Chhatrapati Shivaji</h3>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी बनाई गई स्टैच्यू लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं। राजस्थान विधानसभा का अशोक स्तंभ, जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम के बाहर अर्जुन की प्रतिमा, घोड़े पर विराजमान छत्रपति शिवाजी, जयपुर का ही पीकॉक गार्डन, कोटा में पंडित जवाहरलाल नेहरू का 42 फीट का मास्क सहित अनेक उपलब्धियां इनके खाते में हैं। मूर्तिकार राजकुमार पंडित अब सबसे ऊंची मूर्ति भगवान परशुराम की बना रहे हैं, जिसकी ऊंचाई 108 फीट की है। यह मूर्ति लखनऊ में लगेगी। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लखनऊ, जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम के बाहर अर्जुन की मूर्ति, घोड़े पर विराजमान छत्रपति शिवाजी, भारत माता, शहीद-ए-आजम भगत, राजगुरु, सुखदेव, बप्पा रावल, राणा पूंजा, डॉ. बीआर अंबेडकर, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, महाराणा प्रताप, वीर सावरकर, स्वामी विवेकानंद, चाणक्य की मूर्तियां राजकुमार ने ही बनाई हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">संसद भवन में बनाई पहली मूर्ति</h3>
<p style="text-align:justify;">राजकुमार ने बालकृष्ण गुरु के दिशा-निर्देशन में संसद भवन में पहली बार गांधी जी की धातु की मूर्ति बनाई। साल 1997 में वे काम की तलाश में जयपुर पहुंचे। राजस्थान में उनकी बनाई मेटल की पहली स्टैच्यू जोधपुर की मसूरिया पहाड़ी पर लगने वाली वीर दुगार्दास राठौड़ की है। इसके बाद जयपुर स्थित सचिवालय भवन में महात्मा गांधी की प्रतिमा व राजस्थान विधानसभा में अशोक स्तंभ बनाया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मूर्तिकार हिम्मत शाह ने दिया मौका</h3>
<p style="text-align:justify;">मूर्तिकार हिम्मत शाह को राजकुमार पंडित अपना आदर्श मानते हैं। उन्होंने जयपुर में सबसे पहले हिम्मत शाह के साथ ही काम करना स्टार्ट किया था। वे कहते हैं-2004 तक महज 4000 रुपए की मासिक सैलरी मिलती थी। सात भाई-बहनों में सबसे बड़ा होने के नाते परिवार की जिम्मेदारी आ गई। वेतन बेहद कम होने के कारण घर चला पाना मुश्किल हो रहा था। हिम्मत शाह ने टैलेंट को पहचाना और एक लाख रुपए का आर्थिक सहयोग देकर वर्क्स फॉर आर्टिस्ट फाउंड्री कंपनी स्थापित करवाई। इस कंपनी के जरिए जयपुर के मालवीय नगर में पंडित ने पीकॉक गार्डन का प्रोजेक्ट लिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कोटा में लगाया विश्व का सबसे बड़ा मास्क</h3>
<p style="text-align:justify;">कोटा में लगा पंडित जवाहरलाल नेहरू का 42 फीट का मास्क विश्व का सबसे बड़ा है। इसके अलावा कोटा में ही 45 फीट का फाउंटेन, 18 फीट की स्वामी विवेकानंद की मूर्ति, 12 फीट की महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू व सरदार पटेल की समूह चर्चा की मुद्रा में मूर्तियां स्थापित की हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत रावतभाटा, नाथद्वारा, अजमेर के सेवन वंडर पार्क में स्टैच्यू आफ लिबर्टी सहित कई मूर्तियां लगाई गई हैं। पंडित द्वारा बनाई गई मूर्तियां बेल्जियम, सिंगापुर, फ्रांस, इंग्लैंड, अमेरिका, सूडान, पेरू, चीन सहित 15 देशों में लगाई जा चुकी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मिल चुके हैं कई सम्मान</h3>
<p style="text-align:justify;">वर्क्स फॉर आर्टिस्ट फाउंड्री के डायरेक्टर राजकुमार पंडित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत व पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, राज्यपाल कलराज मिश्र और कर्नाटक व उतराखंड सरकार से सम्मानित हो चुके हैं। हाल ही में जयपुर प्रवास के दौरान राष्टÑपति द्रोपदी मुर्मु ने राजभवन में राजकुमार पंडित से विशेष चर्चा की। इस दौरान राजकुमार पंडित ने राष्टपति को उन्हीं का धातु से बनाया स्मृति चिन्ह भेंट किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कभी श्मशान में रहने को मजबूर थे राजकुमार पंडित | Jaipur News</h3>
<p style="text-align:justify;">राजकुमार पंडित के बचपन में सिर से मां का साया उठ गया। आर्थिक तंगी से जूझते हुए कड़ी मेहनत और लगन से मेटल (धातु) की मूर्ति निर्माण में महारथ हासिल कर देश-विदेश में प्रसिद्धि पाई। राजकुमार आज न केवल 50 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं, बल्कि उनके इस काम में उनकी धर्मपत्नी व दोनों बेटे कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं। राजकुमार पंडित का सालाना कारोबार करोड़ों में है। राजकुमार की कड़ी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि राष्टपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नहीं, बल्कि कई राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल तक इनकी कला की प्रशंसा की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दादा से सीखा हुनर | Jaipur News</h3>
<p style="text-align:justify;">बिहार के नालंदा जिले के गांव सिंदुआरा में 4 अगस्त 1977 को जन्मे राजकुमार सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर के हैं। उनको बचपन से ही मूर्ति निर्माण में रुचि थी, जिसे दादा शिवचरण पंडित ने पंख दिए। करीब 12 साल की उम्र में ही उन्होंने मिट्टी से बर्तन व देवी-देवताओं की मूर्तियां बनानी शुरू कर दी थीं। इसी हुनर को प्रोफेशन बनाने के लिए 1994 में वे दिल्ली आ गए। राजकुमार ने दिल्ली चौक-चौराहों पर लगी धातु की मूर्तियों देखकर नई दिल्ली स्थित मॉर्डन आर्ट आफ स्कूल से मूर्ति निर्माण का प्रशिक्षण लिया। Jaipur News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rajasthan Congress Candidate List: महेश जोशी कट, धारीवाल पर संशय!" href="http://10.0.0.122:1245/mahesh-joshi-cut-doubts-over-dhariwal/">Rajasthan Congress Candidate List: महेश जोशी कट, धारीवाल पर संशय!</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Nov 2023 15:31:59 +0530</pubDate>
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                <title>स्टैच्यू आॅफ यूनिटी राष्ट्रनायक की स्मृति का शिखर</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीयता के महानायक, प्रथम उपप्रधानमन्त्री तथा प्रथम गृहमन्त्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को इस वर्ष उनके जन्मदिवस पर समूचा राष्ट्र एक अनूठे एवं यादगार तरीके उन्हें याद करेगा। इस दिन उनकी स्मृति में निर्मित किये गये एकता की मूर्ति-स्टैच्यू आॅफ यूनिटी का भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकार्पण किया जाएगा। यह एक अनूठा, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/statue-of-unity-the-peak-of-the-nationwide-memory/article-6522"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/statue-unity-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीयता के महानायक, प्रथम उपप्रधानमन्त्री तथा प्रथम गृहमन्त्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को इस वर्ष उनके जन्मदिवस पर समूचा राष्ट्र एक अनूठे एवं यादगार तरीके उन्हें याद करेगा। इस दिन उनकी स्मृति में निर्मित किये गये एकता की मूर्ति-स्टैच्यू आॅफ यूनिटी का भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकार्पण किया जाएगा। यह एक अनूठा, विलक्षण एवं दर्शनीय स्मारक है, जो गुजरात में सरोवर बांध से 3.2 किमी की दूरी पर साधू बेट नामक स्थान पर निर्मित किया गया है जो कि नर्मदा नदी पर एक टापू है। यह विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति है, जिसकी लम्बाई 182 मीटर (597 फीट) है। वर्तमान में विश्व की सबसे ऊँची स्टैच्यू या मूर्ति 152 मीटर की चीन में स्प्रिंग टैम्पल बुद्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;">उससे कम दूसरी ऊँची मूर्ति भी भगवान बुद्ध की ही है जिसकी ऊँचाई 120 मीटर है। बुद्ध की यह मूर्ति सन् 2008 में म्याँमार सरकार ने बनवायी थी और विश्व की तीसरी सबसे ऊँची मूर्ति भी भगवान बुद्ध की है, जो जापान में है, जिसकी ऊँचाई 116 मीटर हैं। स्टैच्यू आॅफ यूनिटी सरदार पटेल की तेजस्विता एवं राष्ट्रीयता का स्मृति स्थल है, यह उनके प्रति सम्पूर्ण राष्ट्र की श्रद्धांजलि का तीर्थ स्थल भी है। स्टैच्यू आॅफ यूनिटी का बड़ा सच यह है कि सही समय पर लिये गये इस निर्णय ने सरदार पटेल के राष्ट्र-निर्माण में किये गये योगदान का सही मूल्यांकन किया है। यह स्मारक चुनौती बना है उन लोगों के लिये जो राष्ट्रीय एकता के लिये सिर्फ योजनाएं बनाते हैं, पर क्रियान्विति में पसीना नहीं बहाते। यह स्मारक एक सन्देश भी है उनके लिये जो ऐसे राष्ट्र-नायक के योगदान को विस्मृत करने की कुचेष्टाएं करते हैं, उनके नाम पर राजनीति करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सच तो यह है कि इस स्मारक ने हमारे भीतर विश्वास एवं विवेक को और अधिक सुदृढ़ता दी है कि खोजने वालों को उजालों की कमी नहीं है। सार्वभौम व्यक्तित्व की इस तरह की जा रही अभ्यर्थना भारतीय संस्कृति का गौरव बन रही है। स्टैच्यू आॅफ यूनिटी एक ऐसे विराट व्यक्तित्व का स्मारक है, जो एक राजनेता ही नहीं, एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं बल्कि इस देश की आत्मा थे। राष्ट्रीय एकता, भारतीयता एवं राजनीति में नैतिकता की वे अद्भुत मिसाल थे। आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए पटेल को भारत का बिस्मार्क और लौह पुरूष भी कहा जाता है। उन्हें 1991 में भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं है लेकिन वे इस माटी के लिए किये गये उल्लेखनीय अवदानों के लिए सदियों तक याद किये जायेंगे और यह स्मारक उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाड में हुआ। वे कृषक परिवार से थे। उनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल एवं माता का नाम लाडबा देवी है। वे उनकी चौथी संतान हैं। लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढ़ाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया। उनका जन्म दिवस राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्टैच्यू आॅफ यूनिटी केवल मूर्ति या स्टैच्यू नहीं है, यह एक सम्पूर्ण स्मारक है जहां मेमोरियल संग्रहालय, गार्डेन और श्रेष्ठ भारत भवन नाम से एक कन्वेंशन सेंटर भी होगा। जहां सरदार पटेल का सम्पूर्ण जीवन सजीव एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत होगा। जैसाकि उनका 1893 में 16 साल की आयु में ही झावेरबा के साथ विवाह कर दिया गया था। उन्होंने अपने विवाह को अपनी पढ़ाई के रास्ते में नहीं आने दिया। 1897 में 22 साल की उम्र में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। 1900 में जिला अधिवक्ता की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए, जिससे उन्हें वकालत करने की अनुमति मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">गोधरा में वकालत की प्रेक्टिस शुरू कर दी। 1902 में इन्होंने वकालत का काम बोरसद स्थानांतरित कर लिया। क्रिमिनल लॉयर के रूप में उनकी यश और कीर्ति चारों ओर फैली, खूब नाम कमाया। अपनी वकालत के दौरान उन्होंने कई बार ऐसे केस लड़े जिसे दूसरे नीरस और हारा हुए मानते थे। उनकी प्रभावशाली वकालत का ही कमाल था कि उनकी प्रसिद्धि दिनों-दिन बढ़ती चली गई। गम्भीर और शालीन पटेल अपने उच्चस्तरीय तौर-तरीकों लिए भी जाने जाते थे। वे अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी, समर्पण व हिम्मत से साथ पूरा करते थे। उनके इन गुणों का साक्षात्कार तब हुआ जब सन् 1909 में वे कोर्ट में केस लड़ रहे थे, उस समय उन्हें अपनी पत्नी की मृत्यु (11 जनवरी 1909) का तार मिला। पढ़कर उन्होंने इस प्रकार पत्र को अपनी जेब में रख लिया जैसे कुछ हुआ ही नहीं। दो घंटे तक बहस कर उन्होंने वह केस जीत लिया। बहस पूर्ण हो जाने के बाद न्यायाधीश व अन्य लोगों को जब यह खबर मिली कि सरदार पटेल की पत्नी का निधन हो गया है तब उन्होंने सरदार पटेल से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उस समय मैं अपना फर्ज निभा रहा था, जिसका शुल्क मेरे मुवक्किल ने न्याय के लिए मुझे दिया था। मैं उसके साथ अन्याय कैसे कर सकता था। ऐसी कर्तव्यपरायणता और शेर जैसे कलेजे की मिशाल इतिहास में विरले ही मिलती है। इससे बड़ा चरित्र और क्या हो सकता है?</p>
<p style="text-align:justify;">
स्टैच्यू आॅफ यूनिटी, सरदार पटेल का जीवन और दर्शन किस तरह भातीयता को सुदृढ़ करने साक्षी बना, उसको बयां करेगा। यह स्मारक सरदार पटेल के चिन्तन को सजीवता देगा। जैसाकि एकता में सबसे बड़ा बाधक स्वहित है। आज के समय में स्वहित ही सर्वोपरि हो गया है। आज जब देश आजाद है, आत्मनिर्भर है तो वैचारिक मतभेद उसके विकास में बेड़ियाँ बनी हुई हैं। आजादी के पहले इस स्वार्थी दृष्टिकोण एवं स्वहित की भावना का फायदा अंग्रेज उठाते थे और आज देश के राजनीतिक लोग। देश में एकता के स्वर को सबसे ज्यादा बुलंद सरदार पटेल ने किया था। उनकी सोच, उनका दर्शन, उनकी राष्ट्रीयता के कारण ही आज हम एक सूत्रता में बंधे हुए हैं। उनकी सोच आज के युवा जैसी नयी सोच थी। वे सदैव देश को एकता का संदेश देते थे। राष्ट्रीयता को उन्होंने केवल परिभाषित ही नहीं किया बल्कि उसे संगठित करके दिखाया।</p>
<p style="text-align:justify;">वे अपना निजी त्याग, राष्ट्रीयता के प्रति सर्वस्व बलिदान कर देने की भावना एवं कठिन जीवनचर्या को वर्चस्व बनाकर किसी पर नहीं थोपते अपितु व्यक्ति की स्वयं की कमजोरियों को उसे महसूस करवाकर उससे उसको बाहर निकालने का मानवीय स्पर्श करते थे। आपने साल का वृक्ष देखा होगा- काफी ऊंचा् शील का वृक्ष भी देखें- जितना ऊंचा है उससे ज्यादा गहरा है। सरदार पटेल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व में ऐसी ही ऊंचाई और गहराई थी। जरूरत है इस गहराई को मापने की। उन्हें भारतीय राजनीति का आदर्श बनाकर प्रस्तुत करने की। एक महान राष्ट्रनायक के इन योगदानों का अंकन करने में यद्यपि यह स्मारक बहुत छोटा है, पर इसने राष्ट्रीय जीवन में सच्चे राष्ट्रनायक का सम्मान कर लोकतंत्र में लोगों की आस्था, आदर्श और आदर की भावना को एक साथ ऊंचाई और गहराई दे दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरदार पटेल अपनी विलक्षण सोच एवं अद्भुत कार्यक्षमता से असंख्य लोगों के प्रेरक बन गए। उनका जीवन एक यात्रा का नाम है- आशा को अर्थ देने की यात्रा, ढलान से ऊंचाई देने की यात्रा, गिरावट से उठने की यात्रा, मजबूरी से मनोबल की यात्रा, सीमा से असीम होने की यात्रा, जीवन के चक्रव्यूह से बाहर निकलने की यात्रा, परतंत्रता से स्वतंत्रता की यात्रा, बिखराव से जुड़ाव की यात्रा। उनका अभियान सफल हुआ और यह देश एकता के सूत्र में बंधा। उस महापुरुष के इसी मनोबल का साक्ष्य बनेगा स्टैच्यू आॅफ यूनिटी। सरदार पटेल का संपूर्ण जीवन विलक्षणताओं एवं उपलब्धियों का समवाय है जिसमें सर्वत्र देश के लिए त्याग भावना एवं कुछ नया करने का जज्बा दिखाई देता है। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध खेड़ा सत्याग्रह और बरडोली विद्रोह का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। उनकी सफलता का सफरनामा भी यही है कि दिशा एवं दायरों के चुनाव में उनका विवेकी निर्णय हर मोड़ पर जागृत रहा। प्रसिद्धि में अहं उन्हें कभी छू नहीं सका, आलोचनाओं एवं विरोध के बीच वे कभी आहत नहीं हुए। उनकी निष्काम, निस्पृह जीवनयात्रा सबके लिये प्रेरणा है और इस प्रेरकता की रोशनी यह स्टैच्यू आॅफ यूनिटी हमें देता रहेगा। यह स्मारक उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।</p>
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                <pubDate>Wed, 31 Oct 2018 08:25:42 +0530</pubDate>
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                <title>मोम के पुतले में अवतरित हुए विराट</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रतिष्ठित फोर्ब्स पत्रिका ने जिस दिन भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली को देश का सबसे अमीर खिलाड़ी घोषित किया उसी दिन दिल्ली के मैडम तुसाद संग्रहालय में दुनिया का यह सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ मोम के पुतले में अवतरित हो गया। विराट के मोम के पुतले का मैडम तुसाद संग्रहालय में बुधवार को अनावरण हुआ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/virat-kohlis-wax-statue-unveiled-madame-tussauds/article-3996"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/virat-kohli.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>प्रतिष्ठित फोर्ब्स पत्रिका ने जिस दिन भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली को देश का सबसे अमीर खिलाड़ी घोषित किया उसी दिन दिल्ली के मैडम तुसाद संग्रहालय में दुनिया का यह सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ मोम के पुतले में अवतरित हो गया। विराट के मोम के पुतले का मैडम तुसाद संग्रहालय में बुधवार को अनावरण हुआ जिसे देखने के लिए विराट के प्रशंसकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। विराट हालांकि अपने पुतले के अनावरण के लिए मौजूद तो नहीं थे लेकिन उन्होंने इसके लिए एक बयान में कहा कि मैं अपना मोम का पुतला बनाने के लिए किए गए अथक प्रयास और शानदार काम की दिल से सराहना करता हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">तीनों फार्मेट के भारतीय कप्तान विराट ने कहा कि मैं इस अद्भुत अनुभव के मैडम तुसाद का शुक्रगुज़ार हूं। मैं साथ ही अपने प्रशंसकों का उनके प्यार और समर्थन के लिए शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। यह अनुभव मेरे जीवन की यादगार स्मृतियों में हमेशा अंकित रहेगा। इस बेहतरीन पुतले को बनाने वाले कारीगरों को मेरा शुक्रिया और अब मुझे अपने प्रशंसकों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। भारतीय कप्तान ने इस मोम के पुतले के लिए टीम इंडिया की नीले रंग की एकदिवसीय जर्सी पहनी हुई है जिस पर उनका 18 नंबर अंकित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मोम के पुतले को बनाने के लिए विराट को अपना माप देने के लिए कई सत्रों से गुज़रना पड़ा था और उनके 200 से अधिक माप और फोटोग्राफ लिए गए थे। विराट का अपने पसंदीदा शॉट के साथ बल्ले को उठाए हुए लिया गया पोज़ उनकी इंटरनेशनल क्रिकेट आइकन की छवि को हुबहू सामने लाता है। संग्रहालय में इससे पहले भारत के पहले विश्वकप विजेता कप्तान कपिल देव और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के पुतले भी लगे हैं। इनके अलावा अन्य खिलाड़ियों में ब्रिटेन के स्टार फुटबालर डेविड बैकहम, अर्जेंटीना के स्टार लियोनल मैसी, दुनिया के सबसे तेज़ धावक जमैका यूसेन बोल्ट, भारत के उड़नसिख मिल्खा सिंह, महिला मुक्केबाज़ एम सी मैरीकॉम के भी पुतले लगे हुए हैं।</p>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jun 2018 16:46:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जब दंगे में आमिर खान ने महात्&amp;#x200d;मा गांधी के स्&amp;#x200d;टैच्&amp;#x200d;यू के नीचे गुजारी रात</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली(एजेंसी)। आमिर खान और निर्देशक राजकुमार हिरानी की जोड़ी काफी अच्‍छी मानी जाती है। हिरानी ने आमिर खान के सामने यह प्रस्‍ताव रखा था कि वह फिल्‍म संजू में संजय दत्‍त के पिता सुनील दत्‍त की भूमिका निभाएं, लेकिन आमिर ने इससे इंकार कर दिया । आमिर ने हिरानी से कहा कि वह इस फिल्‍म […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/when-aamir-khan-spent-the-night-under-the-statue-of-mahatma-gandhi/article-3775"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/amir-khan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)। </strong>आमिर खान और निर्देशक राजकुमार हिरानी की जोड़ी काफी अच्‍छी मानी जाती है। हिरानी ने आमिर खान के सामने यह प्रस्‍ताव रखा था कि वह फिल्‍म संजू में संजय दत्‍त के पिता सुनील दत्‍त की भूमिका निभाएं, लेकिन आमिर ने इससे इंकार कर दिया । आमिर ने हिरानी से कहा कि वह इस फिल्‍म में सिर्फ संजय दत्‍त की भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन संजय के रोल के लिए हिरानी रणबीर कपूर को पहले ही साइन कर चुके थे। जब आमिर से सुनील दत्‍त से जुड़ी यादें पूछी गईं तो उन्‍होंने कहा, ”सुनील दत्‍त वाकई में एक गरिमामय इंसान थे। मुझे याद है जब हमने 1993 के दंगों के दौरान एक रात बाहर गुजारी थी।”</p>
<p style="text-align:justify;">आमिर ने बताया, ”जब 1993 में मुंबई दंगे हुए, तब फिल्‍म इंडस्‍ट्री का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्‍यमंत्री से मिलने पहुंचा था और आर्मी बुलाए जाने की मांग की थी। सीएम से कहा गया कि किसी भी तरह दंगों को रोका जाए। इसके बाद दंगों के विरोध में हमने महात्‍मा गांधी के एक स्‍टैच्‍यू के नीचे पूरी रात बिताई। मेरे साथ सुनील दत्‍त, यश चोपड़ा, जॉनी वाकर और एक प्रोड्यूसर थे। ये इस विरोध की पहली रात थी।” आमिर ने कहा, ”ये रात वाकई यादगार थी. मैंने यश चोपड़ा और सुनील दत्‍त के करियर के खूब अनुभव सुने। अगली शाम तक सीएम ने एक्‍शन लिया और हालात सामान्‍य हुए।” आमिर खान ने 29 अप्रैल 2018 को अपने करियर के 30 साल पूरे किए। 1988 में उनकी डेब्‍यू फिल्‍म कयामत से कयामत तक आई थी. आमिर इस समय ठग्‍स ऑफ हिन्‍दोस्‍तान की शूटिंग में बिजी हैं।</p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 May 2018 09:57:07 +0530</pubDate>
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