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                <title>Man Ki Bat - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से लोकतंत्र को मजबूत करने का किया आह्वान, चुनाव आयोग की भूमिका की सराहना की</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए लोकतंत्र के प्रति उनकी अटूट निष्ठा की सराहना की। उन्होंने इस दिन को भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास को और अधिक गहरा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र के प्रहरी के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/prime-minister-modi-called-on-citizens-to-strengthen-democracy/article-80692"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/man-ki-bat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए लोकतंत्र के प्रति उनकी अटूट निष्ठा की सराहना की। उन्होंने इस दिन को भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास को और अधिक गहरा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में कार्य कर रहे भारत निर्वाचन आयोग की प्रशंसा करते हुए कहा कि आयोग से जुड़े सभी लोग भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सशक्त बनाने के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। मतदाता भागीदारी को लोकतंत्र की जान बताते हुए मोदी ने स्पष्ट किया कि मतदान करना केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि एक अनिवार्य कर्तव्य भी है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया हर नागरिक को राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में भागीदारी सुनिश्चित करने का मंच प्रदान करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे निरंतर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का हिस्सा बनें। उन्होंने विशेष रूप से युवा मतदाताओं और पहली बार मतदाता बनने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। मोदी ने मतदाता बनने की प्रक्रिया को एक उत्सव के रूप में देखने की बात कही।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ‘मेरा-भारत’ स्वयंसेवकों को पत्र लिखकर एक नयी पहल का आह्वान भी किया। उन्होंने आग्रह किया कि जब भी कोई युवा पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकृत हो, तो उस क्षण को एक उत्सव के रूप में मनाना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भावनाओं को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा कि मतदान के माध्यम से ही हम अपनी लोकतांत्रिक भावना का सम्मान कर सकते हैं और देश की आधारशिला को और अधिक मजबूत बना सकते हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 16:43:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मन की बात में बोले पीएम- 26 जनवरी को लालकिले पर तिरंगे के अपमान से देश दु:खी हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री ने कहा कि जब मैं मन की बात करता हूं तो ऐसा लगता है, जैसे आपके बीच, आपके परिवार के सदस्य के रूप में उपस्थित हूं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/narendra-modi-said-in-mann-ki-baat-on-26-january-the-country-became-sad-due-to-the-insult-of-the-tricolor-on-the-red-fort/article-21388"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/narendra-modi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने रविवार को कहा कि 26 जनवरी को लालकिले पर तिरंगें के अपमान से समस्त देश बहुत दुखी हुआ लेकिन हमें आने वाले समय को नयी आशा और नवीनता से भरना है। मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के दूसरे चरण के 20 वें संस्करण में राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2021 कई नयी शुरूआत हुई लेकिन दिल्ली में, 26 जनवरी को तिरंगे का अपमान देख, देश, बहुत दुखी भी हुआ। उन्होंने कहा, ‘हमें आने वाले समय को नई आशा और नवीनता से भरना है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमने पिछले साल असाधारण संयम और साहस का परिचय दिया। इस साल भी हमें कड़ी मेहनत करके अपने संकल्पों को सिद्ध करना है। अपने देश को, और तेज गति से, आगे ले जाना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महीने, क्रिकेट पिच से भी बहुत अच्छी खबर मिली। हमारी क्रिकेट टीम ने शुरूआती दिक्कतों के बाद, शानदार वापसी करते हुए आॅस्ट्रेलिया में सीरीज जीती। हमारे खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और आपसी सहयोग प्रेरित करने वाला है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>प्रधानमंत्री ने सड़क हादसों पर चिन्ता व्यक्त की</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सड़क हादसों पर चिन्ता व्यक्त करते हुए रविवार को कहा कि देश में सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार के साथ ही व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर कई तरह के प्रयास भी किये जा रहे हैं। मोदी ने आकाशवाणी पर इस वर्ष के पहले रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि इसी महीने 18 जनवरी से 17 फरवरी तक देश में ‘सड़क सुरक्षा माह’ मनाया जा रहा है। सड़क हादसे आज हमारे देश में ही नहीं पूरी दुनिया में चिंता का विषय हैं। इसको लेकर सरकार के साथ ही व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर कई तरह के प्रयास भी किये जा रहे हैं।  जीवन बचाने के इन प्रयासों में हम सबको सक्रिय रूप से भागीदार बनना चाहिए। उन्होंने सीमा सड़क संगठन के कामकाज की चर्चा करते हुए कहा कि यह संगठन सड़क दुर्घनाओं की रोकथाम को लेकर लोगों में जागरुकता लाने के लिए अभिनव स्लोगन का उपयोग करता है ।</p>
<p style="text-align:justify;">सड़को से गुजरते हुए ये स्लोगन देखने को मिलते हैं। जैसे दिस इन हाईवे नॉट रन वे । ये स्लोगन सड़क पर सावधानी बरतने को लेकर लोगों को जागरूक करने में काफी प्रभावी होते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे स्लोगन भेजने की अपील की है । प्रधानमंत्री ने सड़कों पर टोल वसूली के लिए फास्ट टैग से होने वाले फायदे की चर्चा करते हुए कहा कि इससे यात्रा का अनुभव ही बदल गया है। इससे समय की तो बचत होती ही है, टॉल प्लाजा पर रुकने और भुगतान की चिंता करने जैसी दिक्कतें भी खत्म हो गई हैं। पहले हमारे यहाँ टॉल प्लाजा पर एक गाड़ी को औसतन सात से आठ मिनट लग जाते थे, लेकिन फास्ट टैग के आने के बाद, ये समय, औसतन सिर्फ डेढ़-दो मिनट रह गया है। गाड़ी के रुकने में कमी आने से ईंधन की बचत भी हो रही है। इससे देशवासियों के करीब 21 हजार करोड़ रूपए बचने का अनुमान है ।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बुंदेलखंड में स्ट्राबेरी की खेती से किसान उत्साहित</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि के क्षेत्र में किये जा रहे अभिनव प्रयोगों की चर्चा करते हुए रविवार को कहा कि बुन्देलखंड में स्ट्राबेरी की खेती को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ रहा है और सरकार खेती को आधुनिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री इस वर्ष के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा, ‘अगर मैं आपसे बुदेलखंड के बारे में बात करूँ तो वो कौन सी चीजें हैं, जो आपके मन में आएंगी! इतिहास में रूचि रखने वाले लोग इस क्षेत्र को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ जोड़ेंगे। वही कुछ लोग सुन्दर और शांत ‘ओरछा’ के बारे में सोचेंगे। कुछ लोगों को इस क्षेत्र में पड़ने वाली अत्यधिक गर्मी की भी याद आ जाएगी, लेकिन, इन दिनों यहाँ कुछ अलग हो रहा है, जो काफी उत्साहवर्धक है और जिसके बारे में हमें जरुर जानना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">झाँसी का स्ट्राबेरी महोत्सव ‘स्टे एट होम’ पर जोर देता है</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पिछले दिनों झांसी में एक महीने तक चलने वाला ‘स्ट्राबेरी महोत्सव’ शुरू हुआ। हर किसी को आश्चर्य होता है ‘स्ट्राबेरी और बुंदेलखंड! लेकिन, यही सच्चाई है। अब बुंदेलखंड में स्ट्राबेरी की खेती को लेकर उत्साह बढ़ रहा है और इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई है, झाँसी की एक बेटी गुरलीन चावला ने। विधि की छात्रा गुरलीन ने पहले अपने घर पर और फिर अपने खेत में स्ट्राबेरी की खेती का सफल प्रयोग कर ये विश्वास जगाया है कि झाँसी में भी ये हो सकता है। झाँसी का स्ट्राबेरी महोत्सव ‘स्टे एट होम’ पर जोर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस महोत्सव के माध्यम से किसानों और युवाओं को अपने घर के पीछे खाली जगह पर, या छत पर बागवानी करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई प्रौद्योगिकी की मदद से ऐसे ही प्रयास देश के अन्य हिस्सों में भी हो रहे हैं, जो स्ट्राबेरी कभी पहाड़ों की पहचान थी, वो अब कच्छ की रेतीली जमीन पर भी होने लगी है किसानों की आय बढ़ रही है। खेती को आधुनिक बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और अनेक कदम उठा भी रही है। सरकार के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                <pubDate>Sun, 31 Jan 2021 11:29:51 +0530</pubDate>
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                <title>परम्परागत खेलों को मिले प्रोत्साहन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 44वें संस्करण में परम्परागत खेलों को प्रोत्साहन देने की बात कही है। हमारे देश में बरसों से खेले जाने वाले पारंपरिक खेलों की कम होती लोकप्रियता और आधुनिक युग के बच्चों का मोबाइल व कंप्यूटर के खेलों के प्रति बढ़ते रूझान को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/incentives-for-traditional-games/article-3809"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/modi1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 44वें संस्करण में परम्परागत खेलों को प्रोत्साहन देने की बात कही है। हमारे देश में बरसों से खेले जाने वाले पारंपरिक खेलों की कम होती लोकप्रियता और आधुनिक युग के बच्चों का मोबाइल व कंप्यूटर के खेलों के प्रति बढ़ते रूझान को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ‘यदि पारंपरिक खेलों को नहीं बचाया गया था तो बचपन भी नहीं बच पाएगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 35वें संस्करण में भी आउटडोर गेम्स को लेकर चिंता जाहिर करते हुए उन्हें संरक्षण प्रदान करने की बात कही थी। तब उन्होंने कहा था कि ‘एक जमाना था जब मां बेटे से कहती थी कि बेटा, खेलकर घर वापस कब आओगे। और एक आज का जमाना है जब मां बेटे से कहती है कि बेटा, खेलने के लिए घर से कब जाओगे।’</p>
<p style="text-align:justify;">निश्चित ही, बदलते तकनीकी दौर में आज की पीढ़ी का मैदान के खेलों के प्रति उत्पन्न होती अरुचि और मोहभंग हर किसी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। गौर करें तो इस स्थिति के पीछे के कई कारण सामने आते हैं। पहला तो यह है कि इलोक्ट्रॉनिक उपकरण (स्मार्ट फोन, मोबाइल, लेपटॉप) इत्यादि के उपयोग में तीव्रगामी परिवर्तन आना। छोटी उम्र में बच्चों के हाथों में मोबाइल आने के बाद वे अपना सारा समय इसमें ही गंवा देते हैं। उनका खेलना, खाना-पीना सबकुछ आॅनलाइन होता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं अधिक समय तक अधिक रोशनी वाले उपकरण पर दिमाग खपाने से उनकी आंखों की रोशनी पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। वस्तुत: उम्र से पहले ही आंखों पर चश्मा आना इसी का एक परिणाम समझा जाये। यह भी प्राय: देखा गया है कि मोबाइल के खेल खेलने से अक्सर बच्चें चिड़चिड़ेपन से ग्रस्त हो जाते हैं और अकेलापन महसूस करते हैं। बात-बात पर आक्रोश की मुद्रा धारण करना और नकारात्मक हो जाना इसी का दुष्परिणाम है। मैदान के खेलों का क्रेज खत्म होने का दूसरा कारण मैदानों की निरंतर कमी होना है।</p>
<p style="text-align:justify;">भौतिकवादी सुविधाओं के मोह में मैदानों की जगह दस-बारह मंजिल की अट्टालिका का निर्माण किया जाने लगा है। गांव में तो आज भी खुली जगह बच्चों को खेलने के लिए आमंत्रण देती है लेकिन, शहर की घुटन भरी जिंदगी में निकटवर्ती कोई मैदान बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित नही रहा है। जिसके कारण बच्चें खाली समय में बोरियत कम करने के लिए अनायास ही मोबाइल और कम्प्यूटर के खेलों के शिकार हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तीसरा कारण यह भी है कि हमारे समाज में अक्सर बड़े-बुजुर्गो के मुंह से कहावत सुनने को मिलती है कि खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब और पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब बच्चों को केवल किताबों तक ही संकुचित करती हैं। पढ़ाई के साथ खेल भी बहुत ही जरूरी है। मानव मस्तिष्क एक हद तक पढ़ाई कर सकता है। अत: मन को हरा-भरा रखने और शरीर को तरोताजा करने के लिए खेलों को खेलना भी अतिआवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">चौथा कारण है अभिभावक के पास समय का अभाव होना। रोजमुर्रा की जिंदगी में धनार्जन करने की प्रवृत्ति ने हर किसी को व्यस्त कर दिया है। दूसरों के लिए तो छोड़िए, स्वयं और परिवार के लिए भी समय निकालना व्यक्ति के लिए दूभर होता जा रहा है। ऐसे में आज के मासूमों को कौन बचपन के खेल (डिब्बा स्पाइस, सतोलिया, लुका छिपी, लगंड़ी, कबड्डी, खो-खो) इत्यादि के बारे में बतायेगा?</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे मासूम मन में इन खेलों के प्रति खेलने की जिज्ञासा उत्पन्न हो सके। बेशक, कुछ गलतियां तो अभिभावक की भी है, जिन्हें समय रहते सुधारा जा सकता है। अगर समय रहते हम बालमन के मनोवैज्ञानिकता को लेकर सचेत नहीं हुए तो ”ब्लू व्हेल” नामक खूनी खेल हमारे देश के नौनिहालों की जान के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आज जरूरत है कि मैदान के खेलों के प्रति बाल और युवा पीढ़ी का ध्यान आकर्षित किया जायें। उन्हें बताया जाएं कि मोबाइल और कम्प्यूटर पर क्रिकेट खेलने से कहीं अधिक मजा मैदान में जाकर क्रिकेट खेलने में है। भारत सदैव से ही खेल परंपरा का संवाहक रहा है। यहां मिल्खा सिंह से लेकर मेजर ध्यानचंद जैसे हॉकी के जादूगर ने जन्म लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सचिन से लेकर साइना तक और मिताली से लेकर कृष्णा पूनिया तक के खिलाड़ियों ने दमखम के साथ विश्वपटल पर तिरंगे का नाम ऊंचा किया है। आज इन्हीं सब से प्रेरणा लेकर बच्चों में खेलों के प्रति उत्साह और आशा का माहौल बनाने की जरूरत है। क्योंकि देश की एकता को बरकरार रखने के लिए भाईचारे, प्रेम और मैत्री की भावना इन्हीं खेलों से विकसित की जा सकती है। इसलिए खेल संस्कृति को एक बार फिर से जीवित करने की जरूरत है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 May 2018 07:44:49 +0530</pubDate>
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