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                <title>सूलीखेड़ा की प्रियंका बनी पायलट</title>
                                    <description><![CDATA[जिन्दगी की असली उड़ान बाकी है, जिन्दगी के कई इम्तीहान अभी बाकी है भट्टूकलां (मनोज सोनी)।‘जिन्दगी की असली उड़ान बाकी है, जिन्दगी के कई इम्तीहान अभी बाकी है, अभी तो नापी है मुठ्ठी भर जमीन हमने, अभी तो सारा आसमान बाकी है।’ यह कहना है भट्टूकलां खंड के गाँव सूलीखेड़ा की प्रियंका बैनिवाल का। जिसने की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/priyanka-become-pilot/article-2171"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/priyanka-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">जिन्दगी की असली उड़ान बाकी है, जिन्दगी के कई इम्तीहान अभी बाकी है</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>भट्टूकलां (मनोज सोनी)।</strong>‘जिन्दगी की असली उड़ान बाकी है, जिन्दगी के कई इम्तीहान अभी बाकी है, अभी तो नापी है मुठ्ठी भर जमीन हमने, अभी तो सारा आसमान बाकी है।’ यह कहना है भट्टूकलां खंड के गाँव सूलीखेड़ा की प्रियंका बैनिवाल का।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसने की अपनी अथक मेहनत के बल पर पायलेट बनने का मुकाम हासिल किया है। जिसुख राम बैनीवाल के बेटे सुरत सिह बैनीवाल की सुपुत्री प्रियंका ने वर्ष 2006 से कड़ी मेहनत के दम पर अपने बचपन के सपनों को साकार कर हकीकत में बदलकर सफलता पाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जोकि उनके परिवार, गाँव, खण्ड और जिला फतेहाबाद के लिए गौरव की बात है। प्रियंका ने बचपन में आसमां में उड़ते हवाई जहाज को देखकर उसमें बैठने का सपना पालने की बजाय उसे स्वयं उड़ाने का सपना देखा और उसमें दिन रात एक करके सफलता भी हासिल कर ली है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सपने को साकार करने की शुरूआत</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रियंका ने वर्ष 2007 में हिन्दू हाई स्कूल सोनीपत से 10+2 की परीक्षा उत्तीर्ण की और इंडियन एविएशन बोर्ड के एग्जाम में अच्छी रैंकिंग हासिल की। इसके बाद देहली फ्लार्इंग क्लब से अपने सपने को साकार करने की शुरूआत की।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद डब्लूसीसी एक्सेल एयर एविएशन फलार्इंग स्कूल फिलीपींस स्कूल से प्रशिक्षण पूर्ण किया। प्रिंयका ने बताया कि उसने सात चरणों की कठिन परीक्षा और प्रेक्टिकल व साक्षात्कार को बखूबी उत्तीर्ण करते हुए इंडिगो एयरलाइंस में बतौर पायलेट नियुक्ति हासिल की है।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके पति सूर्य प्रताप सिंह चहल बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स में डिप्टी कमांडेंट के पद पर वर्तमान में फिरोजपुर पंजाब में तैनात हैं। प्रियंका ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माँ- बाप के सहयोग तथा अपनी मेहनत लगन को दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं आज के युवाओं को संदेश देते हुए उसने कहा कि कड़ी मेहनत और लक्ष्य को निर्धारित कर बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। वहीं उसने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के युवक-युवतियों को अपना समय बेकार में बर्बाद न करने की सलाह दी है। इस नियुक्ति पर परिवार के सदस्यों में खुशी का माहौल है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 01:59:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेहर सिंह की शहादत पर फ़क्र, मगर भविष्य की फिक्र</title>
                                    <description><![CDATA[धर्मपत्नी प्रतीम कौर ने दु:ख तकलीफों के बीच की बेटे व बेटी की परवरिश 1988 में कारगिल में शहीद हुए मेहर सिंह के परिवार की किसी ने नहीं ली सुध मंरणोपरान्त शहीद के परिवार को 1990 में राष्ट्रपति द्वारा दिया गया शोर्य चक्र टोहाना (सुरेन्द्र समैण)। शहीद देश का मान होते हैं उनकी बदौलत राष्ट्र चेन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/proud-on-martyrdom-of-mehar-singh-but-worry-about-the-future/article-2124"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/mehar-singh.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">धर्मपत्नी प्रतीम कौर ने दु:ख तकलीफों के बीच की बेटे व बेटी की परवरिश</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>1988 में कारगिल में शहीद हुए मेहर सिंह के परिवार की किसी ने नहीं ली सुध</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मंरणोपरान्त शहीद के परिवार को 1990 में राष्ट्रपति द्वारा दिया गया शोर्य चक्र</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>टोहाना (सुरेन्द्र समैण)। </strong>शहीद देश का मान होते हैं उनकी बदौलत राष्ट्र चेन की नींद सोता है, शहीद अपनी अपने परिवार की चिंता किए बैगर एक क्षण में अपना जीवन देश के करोड़ों लोगों पर न्यौछावर कर देते हैं। जहां हम एक छोटी से चोट लगने पर बिलबिला जाते हैं वही वो देश की सीमा पर अपनी सीना छननी करवा कर भी हंसते हुए शहीद हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी शहादत को अनदेखा करने से बड़ा अपराध शायद ही कोई और हो। ऐसा ही कुछ टोहाना खंड के गांव सनियाना के कारगिल शहीद मेहर सिंह के साथ हो रहा है। फतेहाबाद के गांव सनियाना से मेहर सिंह 18 सितंबर 1988 को कारगिल की लड़ाई में शहीद हो गए थे। एक लंबी लड़ाई के बाद गांव के लोगों ने उनका नाम स्कूल व चौक के लिए कागजों में तो मंजूर करवा दिया पर चौक का नाम अभी भी धरातल में रखवाने में वो सफल नहीं हो पाए हंै।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवार को फौज के अधिकारियों ने तो संभाला पर प्रदेश व देश का शासन प्रशासन से कभी भी उनकी सुध लेने उनकी चौखट पर नहीं पहुंचा। परिवार के आरोप बेहद गंभीर है कि उनकी प्राथमिकता होते हैं शहीद आवंबटन में भेदभाव हुआ। शहीद की शहादत के बेहद तकलीफे उठा कर उनकी धर्मपत्नी ने अपने बेटे व बेटी की परवरिश की। शहीद परिवार का कहना है कि हमें कुछ नहीं चाहिए पर जो एक शहीद का हक है वो तो उसे देने में राजनीति ना की जाए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आज तक दु:ख बांटने नहीं आया कोई अफसर</h2>
<p style="text-align:justify;">शहीद की धर्मपत्नी प्रतीम कौर ने बताया कि उनकी शहादत पर बड़ी ही खुशी बड़ा ही मान है। बड़ा गर्व है उन्होंने जो देश के लिए किया है। लेकिन प्रशासन ने हमारे बारे में कु छ नहीं सोचा जो एक शहीद परिवार के लिए जरूरी था। जितनी बार भी हमने कोशिश की हमें कोई सफ लता नहीं मिली। मैंने आर्थिक तंगी के बीज अपने बच्चों का पालन-पोषण किया लेकिन किसी ने उनकी सहायता के लिए हाथ नहीं बढ़ाया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सम्मान और परिवार को अनदेखा कर रही सरकार</h2>
<p style="text-align:justify;">शहीद भगत सिंह युवा क्लब के प्रवक्ता जोगा सिंह ने कहा कि बडे दुभागर््य की बात है कि हम 2017 के आधुनिक भारत की बात करते हंै जिसमें इस शहीद की शहादत को सम्मान दिलवाने के लिए 25 से 30 साल लग गए। लेकिन वो सम्मान अब तक भी नहीं मिल पाया।बड़ी मुश्किलों के बाद कारगिल शहीद मेहर सिंह के नाम स्कूल का नाम रखवा पाए। जिसमें भी हमें 25 साल लग गए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">शहादत से कारगिल में मिल रहा पीने का पानी</h2>
<p style="text-align:justify;">शहीद के बेटे ने बताया कि कारगिल सेक्टर में पानी की समस्या थी जब ये लोग पानी के लिए बाहर निकलते थे तो पाकिस्तान की फौज भारत के लोगों को काफी नुकसान पहुंचाती थी तब उस समय 15 पंजाब रेजिमेंट जिसमें मेरे पिता जी भी शामिल थे। उन्होंने इस बात का बीड़ा उठाया था कि इस मुश्किल को हल किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">तो इस तरह से सीनयिर अफसर से बात कर यह लड़ाई का रूप बना तो ओपी रक्षक शुरू हुआ है। पानी की लड़ाई बढ़ते-बढ़ते इतना बढ़ गई कि यह एक बडे आॅपरेशन का रूप ले गई। पानी की जो दिक्कत थी उसे तो आर्मी वालों ने क्लीयर कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों को उस समय से लेकर आज तक पानी उपलब्ध हो रहा है। ये जो जगह है पानी वाली इसका नाम पापा पोस्ट है। आॅपरेशन रक्षक के दौरान ही मेरे पिता शहीद हुए थे। शहादत के बाद पापा पोस्ट को जितने के बाद देश के राष्ट्रपति ने उनको मरणोपांत शोर्य पदम 15 जनवरी 1990 को दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2017 02:17:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हर देशवासी तक जाए यह जीत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की जूनियर हॉकी टीम ने ठीक पन्द्रह वर्ष बाद एक बार फिर भारत को हॉकी का शिरोमणि बना दिया है। इन किशोरों ने साबित कर दिया है कि भारत के राष्ट्रीय खेल के दिन अभी भी बहुत अच्छे हैं लेकिन हॉकी के बाहर, राजनीतिक स्तर पर, प्रशासनिक स्तर पर भारतीय हॉकी को अभी भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/by-compatriot-to-win-it-all/article-559"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/junior-hockey.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत की जूनियर हॉकी टीम ने ठीक पन्द्रह वर्ष बाद एक बार फिर भारत को हॉकी का शिरोमणि बना दिया है। इन किशोरों ने साबित कर दिया है कि भारत के राष्ट्रीय खेल के दिन अभी भी बहुत अच्छे हैं लेकिन हॉकी के बाहर, राजनीतिक स्तर पर, प्रशासनिक स्तर पर भारतीय हॉकी को अभी भी वह सम्मान नहीं दे रहे जो क्रिकेट को मिला हुआ है। आजादी से पहले दशकों व बाद के तीन दशक तक दुनिया भर में भारतीय हॉकी अजेय रही। अभी भारत ने बेल्जियम को हराया है। इस खेल में भारत के जूनियर खिलाड़ियों ने यहां पहले हाफ में आक्रामक रूख अपनाया तो बाद के हाफ में वह सुरक्षात्मक खेले। अफसोस देश में कहीं भी इन युवाओं की जीत पर पटाखे नहीं फूटे जबकि इन्होंने भारत को विश्व विजेता बनाया है। बस देशवासियों की यही उदासनीता है, जो भारत के राष्ट्रीय खेल का घात किए हुए है। कुश्ती, कबड्डी में अवश्य थोड़ा सुधार होने लगा है चूंकि इन खेलों के लिए प्रीमियर लीग व राज्य सरकारों के दिलचस्पी लेने के चलते धीरे-धीरे खेल अपना विकास करने लगे हैं। हॉकी प्रशासनिक व खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर पिछल्ले सालों में बुरी तरह विवादों में घिरी रही, हालांकि उन विवादों की एकमात्र वजह भारतीय खेल संघों में फैली भ्रष्टाचार की बीमारी ही थी जिससे हॉकी भी अछूती नहीं है। केन्द्र व वह राज्य सरकारें यहां से जूनियर हॉकी टीम के खिलाड़ी आए हैं अब उनका दायित्व है कि वह हॉकी के इस विश्वकप की बात देश के हर युवा तक लेकर जाएं। भारत के हर परिवार को वह जीत की इस खुशी में शामिल करें। ताकि भारतीय परिवार अपने बच्चों में भी भावी खिलाड़ी देख सकें। यह इसलिए जरूरी है कि जब किसी जीत का सम्मान नहीं होता तब वह जीत हार से भी ज्यादा चुभती है। भारत के ये जूनियर आज भले ही जूनियर हैं, लेकिन अगले दो-चार साल में ये सीनियर होंगे तब यदि इनका आज का हुनर और निखेरगा, तो भारत का रूख कई विश्व कप करेंगे। देश में शिक्षा के समानांतर ही खेल ढांचे का विकास तेजी से किए जाने की आवश्यकता है। अभी भारतीय जिला व ब्लॉक एवं गाँव खेलों के विकास के लिए बहुत पीछे चल रहे हैं। देश में खेलों के प्रशिक्षकों की कोई कमी नहीं है। आज देश के पास हर खेल के हजारों प्रशिक्षक हैं परंतु जब तक इन प्रशिक्षकों को नियुक्त नहीं किया जाएगा उन्हें पूरा ढांचा नहीं दिया जाएगा तब तक सब व्यर्थ है। आमजन को भी चाहिए कि वह सरकार से अपने अपने क्षेत्र के लिए हस्पताल मांगने से पहले अच्छे खेल संस्थान मांगे। इससे यहां देश का स्वास्थ्य मजबूत होगा, वहीं देश हर खेल में विश्व विजेता भी बनेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Dec 2016 00:35:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा की बेटी प्रीति बनी राजस्थान केसरी</title>
                                    <description><![CDATA[उपलब्धि प्रदेश की महिला पहलवान ने भरतपुर में 6 अंकों के साथ जीती कुश्ती चेंपियनशिप बुल्लड़ अखाड़े से है ताल्लुक फाइनल मुकाबले में कांटे की टक्कर के बाद जयपुर को हराया BhadurGarh: Rakesh/Prem: बुल्लड़ अखाड़े की प्रीति ने राजस्थान के भरतपुर में हुई कुश्ती प्रतियोगिता में राजस्थान केसरी का खिताब हासिल किया है। खिताब जीतने पर पहलवान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/daughter-of-haryana-become-rajsthan-kesari/article-424"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/wrestling-girl.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>उपलब्धि प्रदेश की महिला पहलवान ने भरतपुर में 6 अंकों के साथ जीती कुश्ती चेंपियनशिप</strong></li>
<li><strong>बुल्लड़ अखाड़े से है ताल्लुक</strong></li>
<li><strong>फाइनल मुकाबले में कांटे की टक्कर के बाद जयपुर को हराया</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>BhadurGarh: Rakesh/Prem: </strong>बुल्लड़ अखाड़े की प्रीति ने राजस्थान के भरतपुर में हुई कुश्ती प्रतियोगिता में राजस्थान केसरी का खिताब हासिल किया है। खिताब जीतने पर पहलवान प्रीति का अखाड़े में वीरेंद्र बुल्लड़ पहलवान व अन्य पहलवानों ने जोरदार स्वागत किया। अखाड़ा संचालक वीरेंद्र बुल्लड़ ने बताया कि 28 नवंबर को भरतपुर के लोहागढ़ स्टेडियम में हुए महिला भारत केसरी दंगल में उनके अखाड़े की महिला पहलवान प्रीति ने राजस्थान केसरी का खिताब जीत कर बहादुरगढ़ का नाम रोशन किया है। फाइनल मुकाबले में पिंकी जयपुर को कांटे की टक्कर के बाद अंकों के आधार पर प्रीति ने जीत हासिल की। प्रीति ने 6 अंकों के साथ कुश्ती जीती। महिला पहलवान प्रीति ने बताया कि धर्मेंद्र कोच व बुलड़ पहलवान ने उन्हेंखूब परिश्रम करवाया व दांव पेच सिखाए। दंगल कमेटी की ओर से प्रीति को राजस्थान केसरी का पटा और गुर्ज, गदा भेंट की गई और 31000 रुपये का नकद इनाम दिया गया। इस मौके पर लडरावण के पूर्व सरपंच सोनू, कोच धमेंद्र जाखोदा, पहलवान कीर्ती, सीमा, मनीषा, रिधम, अवनि व उषा आदि मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>खुद खाना बनाकर अखाड़े में की कड़ी मेहनत</strong><br />
बुल्लड़ पहलवान ने बताया कि प्रीति होनहार पहलवान है और अन्य लड़कियों के साथ खुद खाना बनाकर और अपना सारा काम खुद करके सुबह शाम कड़ी मेहनत कर रही है और दिन-रात अखाड़े में ही रहती है। अखाड़ा संचालक ने कहा कि उनके अखाड़े में दूर दराज से 12 लड़कियां घर परिवार छोड़ के अखाड़े में ही रहती हैं। यदि सरकार उनके अखाड़े को कोई सरकारी महिला कोच और उपलब्ध करवा दे तो और भी अच्छा हो जाएगा। उनके अखाड़े में जिम और मैट तथा मिटी के अखाड़े की सुविधा और लड़कियों के रहन-सहन का बंदोबस्त तो पहले से ही मौजूद है। बढ़ते हुए कुश्ती के लगाव को देखते हुए उन्होंने बहादुरगढ़ क्षेत्र में कहीं भी लड़कियों की कुश्ती एकेडमी न होने के कारण अपने अखाड़े को केवल लड़कियों के लिए ही शुरू किया। लड़कियां लड़कों के मुकाबले ज्यादा अनुशासन में रहती हैं और लग्न से अभ्यास करती हैं। सरकार खिलाड़ी की जीत के बाद तो खूब सुविधा देती है, पर खिलाड़ियों की तैयारी और सुविधा में भी ध्यान देना चाहिए।</p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Dec 2016 23:45:49 +0530</pubDate>
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