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                <title>Riding - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Road Accident: सड़क हादसे में स्कार्पियों सवार 6 युवकों की दर्दनाक मौत</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस के अनुसार जब वे गांव म्योली के पास पहुंचे तो उनकी कार नंबर एचआर16के-4456 को किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे उनकी कार म्योली ड्रेन का पुल पार करने के बाद मोड़ पर 40 फीट गहरी खाई में जा गिरी
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/tragic-death-of-6-youth-riding-in-a-road-accident/article-12894"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/6-youths-died.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">स्कार्पियो गाड़ी से हरिद्वार गए थे घूमने, मृतकों में मामा-भांजा सहित गाड़ी चालक शामिल</h2>
<h2 style="text-align:center;">(6 youths died)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैथल (विकास कुमार/सच कहूँ)।</strong>  हरियाणा में कैथल जिले के गांव म्योली के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कार्पियों सवार छह युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में मामा-भांजा सहित गाड़ी चालक भी शामिल है। सभी मृतक घूमने के उदद्ेश्य से स्कार्पियो गाड़ी से हरिद्वार गए हुए थे। हरिद्वार से लौटते समय यह सड़क हादसा हुआ है।  जानकारी के अनुसार सभी मृतक 3 दिन पहले घूमने के इरादे से हरिद्वार गए थे। पुलिस के अनुसार जब वे गांव म्योली के पास पहुंचे तो उनकी कार नंबर एचआर16के-4456 को किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे उनकी कार म्योली ड्रेन का पुल पार करने के बाद मोड़ पर 40 फीट गहरी खाई में जा गिरी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">एक शव घटनास्थल से 150 फीट दूर पड़ा मिला।</li>
<li style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची ।</li>
<li style="text-align:justify;">सभी को कैथल के नागरिक अस्पताल ले कर आई।</li>
<li style="text-align:justify;">जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।</li>
</ul>
<h3>मरने वालों में तीन छात्र थे (6 youths died)</h3>
<p style="text-align:justify;">मृतकों की पहचान दीपक (21) पुत्र बाल किशन वासी गांव गगसीना जिला करनाल, कपिल (19) पुत्र रोहताश निवासी गांव बिटमड़ा जिला हिसार, चालक सुनील (25) पुत्र रघुवीर वासी गांव हंसेवाला जिला फतेहाबाद, अजय (23) पुत्र दिलबाग सिंह वासी गांव सुरेवाला जिला हिसार, रामकेश (25) पुत्र महावीर वासी गांव सुरेवाला जिला हिसार और अंकुश (22) पुत्र रघुवीर वासी गांव सुरेवाला जिला हिसार के रूप में हुई है। मरने वालों में तीन छात्र थे। घटना की सूचना पाकर सभी मृतकों के परिजन अस्पताल पहुंचे। सभी का रो-रो कर बुरा हाल था। पुलिस ने सभी के शवों के पोस्टमार्टम करवाकर उनके परिजनों के हवाले कर दिया है। बहरहाल पुलिस ने मृतक अजय के चाचा राजेश निवासी गांव सुरेवाला की शिकायत पर अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कपिल की तीन महीने पहले हुई थी शादी</h3>
<p style="text-align:justify;">मरने वालों में दीपक 12वीं कक्षा में पढ़ता था। वह अपने तीन भाईयों और एक बहन में सबसे छोटा था। मृतक कपिल अपने तीन भाईयों में सबसे छोटा था। उसकी तीन महीने पहले ही शादी हुई थी। चालक सुनील अपने दो भाई और एक बहन में सबसे बड़ा था। सुनील के पिता की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। रामकेश खेतीबाड़ी का काम करता था। उसके दो भाई और एक बहन है। रामकेश की पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी है। इसी प्रकार अंकुश तीन भाई और एक बहन में सबसे छोटा था। वह बीए प्रथम वर्ष का छात्र था।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Feb 2020 20:14:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>भारतीय आर्यों के रक्ष पर सवार इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[इतिहास तथ्य और घटना के सत्य पर आधारित होता है। इसलिए इसकी साहित्य की तरह व्याख्या संभव, नहीं है। विचारधारा के चश्मे से इतिहास को देखना उसके मूल से खिलवाड़ है। गोया, अब उत्तर-प्रदेश के बागपत जिले के सिनौली गांव में भारतीय पुरातत्व विभाग ने जो उत्खनन किया है और इस उत्खनन में जो रामायण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/riding-history-on-the-defense-of-indian-aryans/article-4173"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/ayrns.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इतिहास तथ्य और घटना के सत्य पर आधारित होता है। इसलिए इसकी साहित्य की तरह व्याख्या संभव, नहीं है। विचारधारा के चश्मे से इतिहास को देखना उसके मूल से खिलवाड़ है। गोया, अब उत्तर-प्रदेश के बागपत जिले के सिनौली गांव में भारतीय पुरातत्व विभाग ने जो उत्खनन किया है और इस उत्खनन में जो रामायण और महाभारत में वर्णित रथों जैसे तीन रथ निकले हैं, इसके मूल से यदि पूर्वग्रही मानसिकता से छेड़छाड़ की गई तो यह इतिहास और भारतीय धरोहर की गरिमा को झुठलाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि ये नए तथ्य अंग्रेजों और भारतीय वामपंथियों द्वारा लिखी उस अवधारणा को सर्वथा नकार रहे हैं, जिसमें बार-बार दावा किया जाता रहा है कि कथित आर्य घोड़ों से जूते रथों पर सवार होकर पश्चिम से भारत आए थे। इन आर्यों ने भारत पर आक्रमण कर यहां की पुरातन सभ्यता और संस्कृति को बुरी तरह रौंदा और भरतखंड के मालिक बन बैठे।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु अब सिनौली के मिट्टी के नीचे दबे जो प्रमाण सामने आए है, उनसे निश्चित हुआ है कि आर्यों के आक्रमण की कथित अवधारणा से भी करीब तीन हजार ईसा पूर्व हमारे पूर्वज रथ बना चुके थे। उस समय के राज-परिवार के लोग इनका आवागमन के लिए उपयोग करते थे। इस उत्खनन से हमारी वे प्राचीन मान्यताएं पुष्ट हो रही हैं, जो ऋृग्वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत में दर्ज होने के बावजूद नकारी जाती रही हैं। गोया, अब अंग्रेजों के लिखे इतिहास को बदलने का समय आ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एससआई का जो दल डॉ संजय मंजुल के नेतृत्व में खुदाई में लगा है, उनका दावा है कि इन साक्ष्यों से महाभारत काल निर्धारण और हड़प्पा-युग में घोड़ों के अस्तित्व को स्वीकारने की उम्मीद बढ़ गई है। इस उत्खनन से पहले तक मेसोपोटामिया, जॉर्जिया और ग्रीक सभ्यता में रथ के प्रमाण मिले हैं, लेकिन अब हम कह सकते हैं कि इन सभ्ताओं की तरह भारत के लोग भी रथों का निर्माण व प्रयोग करते थे। दरअसल अंग्रेजों ने अभी तक यह धारणा गढ़ी हुई है कि आर्यों ने 1500-2000 वर्ष ईसा पूर्व भारत पर हमला किया। वे रथों से आए और यहां की सभ्यता को नेस्तनाबूद करते हुए नई सभ्यता की नींव रखी।</p>
<p style="text-align:justify;">इनका दावा था कि इस समय तक भारत में बैलगाड़ी तो थी, किंतु घोड़ा-गाड़ी नहीं थी। अलबत्ता अब इस खुदाई में मिले प्रमाणों ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत में ईसा पूर्व 5000 साल पहले से ही रथ उपयोग में लाए जाते रहे थे। इस खोज के पूर्व पुरातत्वविद् बी लाल पुरातत्वीय-अनुवांशिक की आधार पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि हमारे डीएनए के गुण-सूत्रों में पिछले 12 हजार वर्ष से कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। दिसंबर 2007 में भी सिनौली में एक साथ 160 नरकंकाल मिले थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इनकी कॉर्बन डेटिंग से यह खुलासा हुआ था कि ये चार से पांच हजार वर्ष प्राचीन हैं। ऐसे में रथ के साथ कंकाल और ताबूतों का मिलना, अंग्रेजों की आर्य संबंधी अवधारणा को पलटने के ठोस प्रमाण हैं। गोया, अब भारतीय इतिहास लेखन में जो भूलें बरतीं गई हैं, उन्हें सुधारा जाना आवश्यक हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिनौली ऐसा महत्वपूर्ण स्थल है, जहां शुरू से ही घर की बुनियाद कुआं या अन्य कोई गड्ढा खोदने पर शिव, महिशासुर-मर्दिनी, शाकुंभरी और चामुंडा देवी की मिट्टी की मूर्तियां मिलती रही हैं। इसीलिए इस पूरे क्षेत्र को टेराकोटा क्षेत्र का दर्जा दिया हुआ है। इनके अलावा यहां सिंधु घाटी की सभ्यता से मेल खाते मिट्टी के बर्तन, कंकाल, आभूषण, मूठ वाली तलवार, तांबे की कीलें और कंघियां मिले हैं। यहां जो ताबूत मिले हैं, उन ताबूतों के ऊपर तांबे से बने पशुपतिनाथ के मुहर जैसे चिन्ह भी मिले हैं, जो भगवान शिव की मान्यता के प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुरु जनपद की राजधानी हस्तिनापुर गंगा के किनारे थी और महाभारत का युद्धस्थल कुरुक्षेत्र यमुना नदी के किनारे था। कुरूक्षेत्र के निकट ही करनाल, पानीपत और सोनीपत हैं। इनके निकट ही सिनौली का वह क्षेत्र है, जो जहां उत्खनन में रथ मिले हैं। इससे यह उम्मीद है कि मिले रथ व कंकाल महाभारतकालीन हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बागपत का प्राचीन नाम वयाग्रप्रस्थ, सोनीपत का स्वर्णप्रस्थ, पानीपत का पर्णप्रस्थ और बरनावा का वाणार्वृत है। पांच में से ये ही वे चार गांव हैं, जो पांडवों ने दुर्योधन से मांगे थे, लेकिन दुर्योधन ने सुई की नोक के बराबर भी भूमि पांण्डवों को देने से मना कर दिया था। अंतत: इसकी परिणति महाभारत युद्ध के रूप में सामने आई।</p>
<p style="text-align:justify;">ऋृग्वेद के पहले मंडल के दूसरे अध्याय में स्पष्ट उल्लेख है कि अग्नि और जल के वेग से युक्त किया हुआ रथ बहुत दूर स्थित स्थानों पर भी तुरंत पहुंचता है। यानी वैदिक काल में ऐसे भी रथ थे, जो घोड़ों के अलावा अग्नि और जल की ऊर्जा से संचालित होते थे। इसे ही अश्व-शक्ति कहा गया, जो इंजन के आविष्कार के बाद होर्स पावर के नाम से जानी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी आध्याय के एक अन्य मंत्र में कहा गया है कि जैसे मनुष्य पहले कुंए को खोदकर उसके जल के उपयोग से संतुष्ट होता है, उसी तरह विद्वान लोग कलायंत्रों में अग्नि को जोड़कर उसकी सहायता से यंत्रों में जल को प्रवेश कराकर, उनको गतिमान कर अनेक कार्यों को सिद्ध करते हैं। वेदों में वर्णित इस वैज्ञानिकता को जब अंग्रेज मैकाले और जर्मन मैक्समूलर ने समझा तो वे हतप्रभ रह गए।</p>
<p style="text-align:justify;">वे जान गए कि भारत में यदि संस्कृत की महत्ता बनी रहती है और इसका प्रचार व विस्तार वैश्विक स्तर पर होता है तो ईसाई, धर्म और बाइबिल को खतरा उत्पन्न हो सकता है ? यूरोपियन ईसाई भी श्रेष्ठ धर्म के रूप में सनातन हिंदू धर्म और श्रेष्ठ भाषा के रूप में संस्कृत को अपना सकते हैं?</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jun 2018 08:17:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कागज की नाव पर सवार कर्नाटक की सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का हालिया बयान कि, वे कांग्रेस की कृपा से मुख्यमंत्री हैं, कई मायनों में खास है। वहीं इस बयान से कर्नाटक की राजनीतिक उथल-पुथल, सांठ-गांठ और बेमेल गठजोड़ को भली भांति समझा जा सकता है। कुमारस्वामी ने यह बयान देने के बाद सफाई भी पेश की, लेकिन जाने-अनजाने ही सही कुमारस्वामी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/government-of-karnataka-riding-on-paper-boat/article-3837"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/kartnka-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का हालिया बयान कि, वे कांग्रेस की कृपा से मुख्यमंत्री हैं, कई मायनों में खास है। वहीं इस बयान से कर्नाटक की राजनीतिक उथल-पुथल, सांठ-गांठ और बेमेल गठजोड़ को भली भांति समझा जा सकता है। कुमारस्वामी ने यह बयान देने के बाद सफाई भी पेश की, लेकिन जाने-अनजाने ही सही कुमारस्वामी के दिल की बात जुबां पर आ ही गयी है। ऐसे में अहम सवाल यह है कि कर्नाटक में राजनीतिक नाटक कब तक चलेगा। उससे बड़ा सवाल यह है कि जेडीएस और कांग्रेस का साथ कब तक जारी रहेगा। क्या जेडीएस भविष्य के लिए नये विकल्प खोज रहा है। राजनीतिक विशलेषकों की मानें तो कर्नाटक की गठबंधन की सरकार कागज की नाव पर सवार है, जिसका देर-सबेर डूबना लाजिमी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमारस्वामी के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में अब सवाल यह है कि इस सरकार में स्थायित्व कब तक। ज्यादा विधायकों के बावजूद एक जूनियर पार्टनर के रूप कांग्रेस कब तक जेडीएस को स्वीकार करेगी। कयास हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव तक और जब तक कांग्रेस अपनी खोई ताकत हासिल नहीं कर लेती। निश्चित रूप से यह मजबूरियों का समझौता है। दस साल से सत्ता से बाहर रही जेडीएस के लिये भी यह अस्तित्व का प्रश्न था। तभी तीखे कटुता वाले चुनाव के बावजूद उसने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चलाने का विकल्प चुना। ऐसे में इसे असहज गठबंधन जरूर कहा जा सकता है। गठबंधन की विसंगतियों की परतें भी खुलती रहेंगी। जैसे पहले कांग्रेस लिंगायत समुदाय से दूसरा उपमुख्यमंत्री मांग रही थी। जाहिरा तौर पर मंत्री पदों को लेकर हितों का टकराव भी सामने आ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जिस तरह का खंडित जनादेश आया, उसने वर्ष 2019 में होने जा रहे आगामी आम चुनाव के लिहाज से भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के लिए भी चुनौतियां पेश करते हुए कुछ सबक भी दिए हैं! इसमें कोई शक नहीं कि वर्ष 2014 के आम चुनाव में प्रचंड जनादेश हासिल करने के बाद भाजपा का अब तक का चुनावी सफर इक्का-दुक्का झटकों को छोड़कर शानदार रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उसे दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनावों में मात जरूर मिली और कुछ जगहों पर उपचुनावों में भी इसे हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इन अपवादों को छोड़ दें तो राज्य-दर-राज्य भाजपा की सफलता का ग्राफ चढ़ता ही गया है। आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी से पूछा कि कर्नाटक में इस शपथ ग्रहण समारोह का संदेश क्या है? इस सवाल पर येचुरी ने खुशी जताई कि विपक्ष ने हार कर भी सरकार बनाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार फिर भाजपा की रणनीति को नाकाम करने में हम सफल रहे हैं। गोवा, मणिपुर, मेघालय में भाजपा ने जो रणनीति खेली थी, कर्नाटक में उसी में वह नाकाम रही है। इसी के साथ येचुरी ने शंका भी जताई कि भाजपा 3 महीने में ही सरकार गिरा सकती है। इस संदर्भ में उन्होंने कर्नाटक भाजपा के दिग्गज नेता एवं केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा का नाम भी लिया। येचुरी, नायडू और डी. राजा का यह संवाद कोरी कल्पना नहीं है, बल्कि एक वीडियो का सच है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि हम उस वीडियो की पुष्टि नहीं कर सकते, लेकिन खुद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी बोले-‘यह सरकार चलेगी, इस पर मुझे तो क्या, राज्य के लोगों को भी भरोसा नहीं है।’ इस बयान के बाद येचुरी की आशंका पर सवाल नहीं किए जा सकते। बेशक कर्नाटक मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में देश के 11 दलों के नेता आए। उनमें एक पूर्व प्रधानमंत्री, 5 मुख्यमंत्री, 5 पूर्व मुख्यमंत्री और 4 सांसद दिखाई दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उनमें कुछ चेहरे ऐसे थे, जो ह्यस्वयंभू प्रधानमंत्रीह्ण के तौर पर आंके जाते हैं। बहरहाल विपक्ष के नेताओं की बाहें हवा में उठीं, हाथ मिले, अलबत्ता सोनिया गांधी और शरद पवार की बाहें दूर-दूर ही रहीं। मायावती और अखिलेश यादव के हाथ नहीं मिले। तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक गैरहाजिर रहे। वे गैरकांग्रेस और गैरभाजपा की राजनीति में विश्वास रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ जिस विपक्षी एकता की नुमाइश की गई है, वह भी घोर सवालिया है। क्या आंध्रप्रदेश में कांग्रेस और टीडीपी या कांग्रेस और वाईएसआर-कांग्रेस में गठबंधन होगा? क्या बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल और प्रमुख विपक्षी वाममोर्चा तथा कांग्रेस सभी एक साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं? क्या ओडिशा में बीजद और कांग्रेस में गठजोड़ संभव है, जबकि बीजद बुनियादी तौर पर कांग्रेस-विरोधी दल है?</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी में गठबंधन तो स्वाभाविक है, क्योंकि वह पहले भी रहा है, लेकिन भाजपा से अलग होने के बाद शिवसेना क्या इनके गठबंधन में शामिल हो सकती है? कुछ विरोधाभास ये हैं कि ममता राहुल गांधी को नेता मानने को तैयार नहीं हैं। मायावती उपचुनाव में सपा का साथ दे सकती है, क्योंकि सैद्धांतिक तौर पर बसपा उपचुनाव नहीं लड़ती, लेकिन क्या वह अखिलेश यादव को अपने से बड़ा नेता मान लेंगी? सवाल यह भी है कि मायावती, अखिलेश यादव और राहुल गांधी एकसाथ या अलग-अलग कैराना चुनाव में क्यों नहीं गए? असल में कर्नाटक ही नहीं, देशभर में जो विपक्षी एकता दिख रही है। उसका मकसद केवल भाजपा के बढ़ते कदमों को रोकना ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपसी मनभेद-मतभेद भुलाकर तमाम दल एक मंच पर आने की कोशिशों में जुटे हैं। लेकिन ये तमाम गठबंधन परवान चढ़ेंगे, इसका भरोसा देश की जनता को तो क्या खुद राजनीतिक दलों को भी नहीं है। कर्नाटक में भले ही कांग्रेस ने बड़ा दिल दिखाते हुए तीसरे पायदान पर खड़ी जेडीएस को मुख्यमंत्री पद सौंपा हो, लेकिन अंदर खाने कांग्रेस कुमारस्वामी सरकार को अपने इशारे पर नचाना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस कर्नाटक में तमाम विरोधी दलों के नेताओं ने एकजुट होकर विपक्षी एकता का संदेश दिया है, कहीं वहीं कर्नाटक विपक्षी एकता की कब्र खोदने का काम न कर दे, इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिस प्रकार सरकार गठन के चंद दिनों बाद ही जेडीएस और कांग्रेसी खेमे से विरोधी बयानबाजी की जा रही है, उससे कर्नाटक सरकार के भविष्य का संहज अंदाजा लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीताराम येचुरी ने जो आशंका जताई है, वह निराधार नहीं है। कर्नाटक भाजपा की राजनीतिक उम्मीदों का एक आधार है, लिहाजा वह कांग्रेस-जद (एस) का ह्यअनैतिक गठबंधनह्ण किसी भी सूरत में 2019 तक नहीं चलने देगी। निशाना जद-एस को बनाया जा सकता है, क्योंकि उसके 38 विधायक ही हैं। उनमें कई विधायक ऐसे हैं, जिन पर लिंगायत समुदाय का दबाव बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वे अपनी विधायिका का जोखिम उठाकर सत्तारूढ़ पक्ष से अलग हो सकते हैं। अब कर्नाटक में यह प्रक्रिया कैसे होती है, यह तब तक एक सवाल है जब तक यथार्थ सामने नहीं आता। जिस तरह कर्नाटक विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की निगाहें टिकी थीं, उसी तरह कर्नाटक की सरकार पर भी देश भर की निगाहें टिकी हैं। अगर कांग्रेस जेडीएस गठबंधन की सरकार कामयाब होती है तो यह देश में विपक्षी एकता को मजबूत करने का काम करेगा, लेकिन फिलवक्त ऐसा आभास हो रहा है कि कर्नाटक की सरकार कागज की नाव पर सवार दिख रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-राजेश माहेश्वरी</strong></p>
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                <pubDate>Wed, 30 May 2018 08:03:01 +0530</pubDate>
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