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                <title>नशीली दवाओं की खेप सहित काबू आरोपित भेजा जेल</title>
                                    <description><![CDATA[फरार आरोपित को पकड़ने के लिए दी दबिश, नहीं आया पकड़ में हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। कार से नशीली दवाओं का जखीरा बरामद करने के मामले में फरार आरोपित (Prisoner Sent To Jail On Drug Consignment) गुरबाज सिंह निवासी मल्लरखेड़ा टिब्बी की तलाश में टाउन पुलिस ने दबिश दी लेकिन वह पकड़ में नहीं आया। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">फरार आरोपित को पकड़ने के लिए दी दबिश, नहीं आया पकड़ में</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कार से नशीली दवाओं का जखीरा बरामद करने के मामले में फरार आरोपित (Prisoner Sent To Jail On Drug Consignment) गुरबाज सिंह निवासी मल्लरखेड़ा टिब्बी की तलाश में टाउन पुलिस ने दबिश दी लेकिन वह पकड़ में नहीं आया। उधर, इस मामले में गिरफ्तार आरोपित सुखपाल सिंह (24) पुत्र परमजीत सिंह निवासी वार्ड नंबर तीन मल्लरखेड़ा पुलिस थाना टिब्बी को टाउन पुलिस ने बुधवार को न्यायालय में पेश किया। जहां से मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने आरोपित को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भिजवा दिया। टाउन थाना प्रभारी विष्णुदत्त बिश्नोई ने बताया कि फरार चल रहे सुखपाल सिंह के साथी गुरबाज सिंह की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उसके छिपने के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है लेकिन वह अभी तक पकड़ से दूर है। उन्होंने बताया कि (Prisoner Sent To Jail On Drug Consignment) रिमांड अवधि के दौरान आरोपित सुखपाल सिंह को साथ लेकर पुलिस का एक दल दिल्ली भेजा गया था। पुलिस दल ने दिल्ली में नशीली दवाओं की डिलीवरी देने वाले सप्लायर की तस्दीक आदि की कार्रवाई की। हालांकि सप्लायर हत्थे नहीं चढ़ा। वह अपने ठिकानों से फरार मिला।</p>
<h2>मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने आरोपित को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भिजवा दिया</h2>
<p style="text-align:justify;">रिमांड अवधि के दौरान आरोपित से पकड़ी गई नशीली गोलियों की सप्लाई स्थानीय क्षेत्र में किस-किस को देनी थी। इस बारे में भी  पूछताछ कर जानकारी जुटाई गई है। गौरतलब है कि 22 दिसम्बर को मुखबिर के जरिए टाउन पुलिस को सूचना मिली कि चन्द्रा कार्गो ट्रांसपोर्ट कम्पनी से भारी मात्रा में नशीली दवाओं का जखीरा हनुमानगढ़ में उतारा गया है। इस जखीरे को दो जने कार में डालकर सतीपुरा की तरफ से लेकर आ रहे हैं। इस सूचना के आधार पर टाउन पुलिस के एक दल ने सतीपुरा बाइपास स्थित घग्घर नदी के पुल पर नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान सतीपुरा की तरफ से आ रही कार को रूकने का इशारा किया तो चालक नाकाबंदी तोड़ कार को भगाकर ले गया। पुलिस टीम ने पीछा कर कार को रूकवा लिया। इस दौरान कार सवार गुरबाज सिंह मौके से भागने में कामयाब हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने कार चालक सुखपाल सिंह को पकड़कर कार की तलाशी ली तो उसमें से एनडीपीएस घटक युक्त ट्रामाडोल की कुल 1 लाख 40 हजार 400 नशीली टेबलेट बरामद हुई। पुलिस ने कार व नशीली गोलियां जब्त कर मौके से सुखपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में सुखपाल व गुरबाज के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया गया। पूछताछ में आरोपित ने खुलासा किया था कि नशीली दवाओं का जखीरा दिल्ली से मंगवाया गया था। नशीली दवाओं को क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर सप्लाई करना था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/the-accused-caught-with-a-consignment-of-drugs-was-sent-to-jail/article-7201</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Jan 2019 14:06:25 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदूषण : एनजीटी ने दिल्ली सरकार पर 25 करोड़ रु. जुर्माना लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[एनजीटी ने कहा- प्रदूषण रोकने के लिए कदम उठाने की बजाय बहाना बनाते रहे अधिकारी दिल्ली सरकार जुर्माना नहीं दे पाई तो हर महीने 10 करोड़ रुपए फाइन भरना होगा: एनजीटी नई दिल्ली। प्रदूषण की समस्या सुलझाने में नाकाम रहने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार पर 25 करोड़ रुपए जुर्माना लगाया है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pollution-ngt-has-rs-25-crore-on-delhi-government-fined/article-6811"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/pollution-ngt-has-rs-25-crore-on-delhi-government-fined.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">एनजीटी ने कहा- प्रदूषण रोकने के लिए कदम उठाने की बजाय बहाना बनाते रहे अधिकारी</h1>
<h1 style="text-align:justify;">दिल्ली सरकार जुर्माना नहीं दे पाई तो हर महीने 10 करोड़ रुपए फाइन भरना होगा: एनजीटी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रदूषण की समस्या सुलझाने में नाकाम रहने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार पर 25 करोड़ रुपए जुर्माना लगाया है। एनजीटी ने सोमवार को आदेश दिया कि यह जुर्माना दिल्ली सरकार के अधिकारियों के वेतन और प्रदूषण फैलाने वालों से वसूला जाए। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि अगर सरकार जुर्माना चुकाने में नाकाम रहती है तो उसे हर महीने 10 करोड़ रुपए फाइन भरना होगा। एनजीटी ने सतीश कुमार, महावीर सिंह की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। याचिका में कहा गया था कि प्लास्टिक, चमड़ा, रबड़, मोटर इंजन ऑयल जलने और खेतीवाली जमीन पर अवैध कारखानों के संचालित होने की वजह से प्रदूषण फैल रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">लाचारगी जाहिर करते रहे अधिकारी- एनजीटी</h2>
<p style="text-align:justify;">एनजीटी अध्यक्ष आदर्श कुमार की बेंच ने कहा- शहर में वायु प्रदूषण को काबू करने में नाकाम रहने पर दिल्ली सरकार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जुर्माना दे। प्राधिकरण के स्पष्ट आदेशों के बावजूद इन्हें पूरा करने के लिए शायद ही कोई कदम उठाया गया। अधिकारियों की नाक के नीचे कानून तोड़ा जाता रहा और लगातार प्रदूषण बढ़ता रहा। अधिकारियों ने लाचारगी जाहिर करने और बहानेबाजी करने के अलावा कोई मजबूत कदम नहीं उठाया। आम आदमी पार्टी सरकार इस संबंध में परफॉर्मेंस गारंटी रिपोर्ट दाखिल करे, ताकि जुर्माने के संबंध में आगे कोई कोताही ना बरती जाए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">प्रदूषण हमेशा दिल्ली तक सीमित कर दिया जाता है- आप</h2>
<p style="text-align:justify;">आप नेता अतिशी ने कहा- वायु प्रदूषण के मुद्दे पर हंगामा केवल दिल्ली तक ही सीमित कर दिया जाता है, जबकि नासा की सैटेलाइट तस्वीरोें से जाहिर हो गया है कि देश के दूसरे हिस्सों में भी बड़े पैमाने पर पराली जलाई जाती है। दिल्ली सरकार अपनी तरफ से प्रदूषण करने के लिए कदम उठा रही है। इसीलिए हम ई-व्हीकल और ई-बसें लाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खराब रही दिल्ली में वायु की गुणवत्ता</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में सोमवार को भी वायु की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में रही। अधिकारियों का कहना है कि अगले दिन में प्रदूषण और ज्यादा बढ़ेगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, एयर क्वॉलिटी इंडेक्स में पीएम2.5 337 रिकॉर्ड किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Dec 2018 14:21:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अक्षय और रजनी की फिल्म 2.0 के हिन्दी वर्जन ने तीसरे दिन कमाए 25 करोड़ रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[एजेंसी। भारत की सबसे महंगे बजट वाली मूवी 2.0 गुरुवार को रिलीज हो चुकी है। फिल्म के हिन्दी वर्जन ने तीन दिन में 63.25 करोड़ की कमाई कर ली है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट करके यह जानकारी शेयर की। तरण ने अपने ट्वीट में लिखा है कि फिल्म ने तीसरे दिन शुक्रवार के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/hindi-version-of-akshay-and-rajni-film-2-0-earned-rs-25-crore-on-third-day/article-6788"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/akshay-rajni.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>एजेंसी। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">भारत की सबसे महंगे बजट वाली मूवी 2.0 गुरुवार को रिलीज हो चुकी है। फिल्म के हिन्दी वर्जन ने तीन दिन में 63.25 करोड़ की कमाई कर ली है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट करके यह जानकारी शेयर की। तरण ने अपने ट्वीट में लिखा है कि फिल्म ने तीसरे दिन शुक्रवार के मुकाबले 23.46 फीसदी ज्यादा कलेक्शन किया है। उन्होंने आगे लिखा कि चौथे दिन यानी रविवार को फिल्म के कलेक्शन में और ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। गुरुवार को फिल्म ने 20.25 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था जो शुक्रवार को गिरकर 18 करोड़ ही रह गया था।</p>
<p style="text-align:justify;"> तीसरे दिन फिल्म का नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (NBOC) 55 करोड़ रुपए जबकि ग्रॉस बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (GBOC) 70 करोड़ रुपए रहा। इस तरह शंकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म के हिन्दी, तमिल और तेलगु तीनों वर्जन ने तीन दिन में कुल NBOC कलेक्शन 167 करोड़ और GBOC कलेक्शन 212.50 करोड़ रुपए हो गया। रिलीज से पहले ही निकाली लागत: अक्षय और रजनी की इस फिल्म का बजट 543 करोड़ रुपए है। फिल्म ने रिलीज होने के पहले ही करीब 490 करोड़ रुपए की कमाई कर ली थी। इसमें करीब 120 करोड़ रुपए एडवांस बुकिंग के थे। इसके साथ ही 2.0 ने रिलीज से पहले ही प्रभास की सुपरहिट फिल्म बाहुबली-2 की लागत (250 करोड़) से करीब दोगुनी कमाई कर ली है।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Dec 2018 13:18:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाक के बुलावे पर सार्क में शामिल नहीं होंगे मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[सुषमा ने कहा- आतंकवाद और बातचीत एकसाथ नहीं नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार को कहा कि करतारपुर कॉरिडोर खोलने का ये मतलब नहीं कि दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हो जाएगी। आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/modi-will-not-join-saarc-on-call-of-pak/article-6697"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/modi-will-not-join-saarc-on-call-of-pak.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">सुषमा ने कहा- आतंकवाद और बातचीत एकसाथ नहीं</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार को कहा कि करतारपुर कॉरिडोर खोलने का ये मतलब नहीं कि दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हो जाएगी। आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकते। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि हम नरेंद्र मोदी को सार्क सम्मेलन में शामिल होने के लिए न्योता भेजेंगे। पाक ने कहा था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि भारत अगर बातचीत और दोस्ती के लिए एक कदम बढ़ाता है तो हम दो कदम बढ़ाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"> सुषमा ने कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद खत्म नहीं करता, हम उनके बुलावे पर प्रतिक्रिया नहीं देंगे। इसलिए हम सार्क में हिस्सा नहीं लेंगे। भारत सरकार कई सालों से करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग कर रही है। लेकिन सिर्फ इस बार ही पाकिस्तान की ओर से सकारात्मक पहल हुई। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत शुरू हो जाएगी। 19वें सार्क शिखर सम्मेलन का आयोजन 2016 में पाकिस्तान में किया जाना था लेकिन भारत समेत बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने इस समिट में हिस्सा नहीं लिया था। 18 सितंबर को भारत में जम्मू कश्मीर के उड़ी में भारतीय आर्मी कैंप पर आतंकी हमला हुआ था। हमले के विरोध में भारत ने सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया था। वहीं, बांग्लादेश घरेलू परिस्थितियों का हवाला देते हुए इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ था। जिसके बाद ये सम्मेलन रद्द करना पड़ा था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हर दो साल में होता है सार्क शिखर सम्मेलन</h2>
<p style="text-align:justify;">सार्क की स्थापना 1985 में की गई थी। सार्क शिखर सम्मेलन, दक्षिण एशिया के आठ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की होने वाली बैठक है, जो हर दो साल में होती है। सार्क में अफगानिस्तान, भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव शामिल हैं। आखिरी सार्क शिखर सम्मेलन 2014 में काठमांडू में आयोजित किया गया था। उससे पहले 2011 में मालदीव में 17वां सार्क सम्मेलन आयोजित हुआ था।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Nov 2018 14:01:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>रावण दहन पर रेल ने लिए 60 से ज्यादा लोगों के प्राण</title>
                                    <description><![CDATA[अमृतसर में रावण दहन के अवसर पर हुआ रेल हादसा सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। इस लापरवाही के चलते उत्सव में शामिल 61 लोग असमय काल के गाल में समा गए और दर्जनों स्थाई विकलांगता के शिकार हो गए। दशहरे जैसे पावन और प्रचलित पर्व पर घटा यह भयंकर हादसा शोक के साथ मन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/more-than-60-people-have-died-due-to-rains-on-ravana-dahan/article-6369"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/more-than-60-people-have-died-due-to-rains-on-ravana-dahan-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमृतसर में रावण दहन के अवसर पर हुआ रेल हादसा सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। इस लापरवाही के चलते उत्सव में शामिल 61 लोग असमय काल के गाल में समा गए और दर्जनों स्थाई विकलांगता के शिकार हो गए। दशहरे जैसे पावन और प्रचलित पर्व पर घटा यह भयंकर हादसा शोक के साथ मन को बेचैन करने वाला है। क्योंकि प्रशासन को पता था कि जिस स्थल पर घटना घटी है, वहां प्रत्येक वर्ष रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाते हैं और बड़ी मात्रा में आतिशबाजी छोड़ी जाती है। इस सांस्कृतिक उत्सव को देखने हजारों लोग उल्लास के साथ आते हैं। बावजूद यह समझ से परे है कि रेल पटरियों के एकदम निकट रावण दहन क्यों करने दिया? परंपरा के अनुसार यह जरूरी भी था तो रेल विभाग को दहन के समय रेलें आउटर पर ही रोकने की हिदायत क्यों नहीं दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">रेल महकमे को भी इस दिन सावधानी बरतने की इसलिए जरूरत थी, क्योंकि उसे पता था कि पटरियों के निकट रावण दहन होता है। इसलिए एक तो रेलों को आउटर पर ही रोके रखने की जरूरत थी, दूसरे यदि रेल निकालना जरूरी था तो उसकी गति धीमी रखने की जरूरत थी। जब रावण जला और आतिशबाजी के भीषण विस्फोट होने लगे तो श्रद्धालु दर्शक पटरियों पर खड़े हो गए। इस शोर के चलते उन्हें रेल के इंजन और होर्न की अवाज भी सुनाई नहीं दी। संयोग से इसी समय दोनों दिशाओं से 100 की गति से रेलें आई और दर्शकों को रौंदती निकल गई। जालंधर एक्सप्रेस की चपेट में सबसे ज्यादा लोग आए। देश में धार्मिक मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान भीड़ में भगदड़ मचने से होने वाले हादसों का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। बावजूद देखने में नहीं आया कि किसी अधिकारी की जबावदेही सुनिश्चित की गई हों और उसे दंडित किया और जाकर नौकरी से हाथ धोने पड़े हों ? यही कारण है कि मेले-ठेलों में हादसों का सिलसिला लगातार बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">ठीक इसी किस्म की लापरवाही केरल में कोल्लम के पास पुत्तिंगल देवी मंदिर परिसर में हुई त्रासदी के समय देखने में आई थी। इस घटना में 110 लोग मारे गए थे और 383 लोग घायल हुए थे। यह ऐसी घटना थी, जिसे मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन सचेत रहते तो टाला जा सकता था। क्योंकि मलयालम नववर्ष के उपलक्ष में हर वर्ष जो उत्सव होता है, उसमें बड़ी मात्रा में आतिशबाजी की जाती है और इसका भंडारण मंदिर परिसर में ही किया जाता है। आतिशबाजी चलाने के दौरान एक चिंगारी भंडार में रखी आतिशबाजी तक पहुंच गई और भीषण त्रासदी में लोगों की दर्दनाक मौतें हो गईं। यह हादसा इतना बड़ा और हृदयविदारक था कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिकित्सकों का दल लेकर कोल्लम पहुंचना पड़ा था। लेकिन इस तरह से संवेदना जताकर और मुआवजा देने की खानापूर्ति कर देने भर से मंदिर हादसों का क्रम टूटने वाला नहीं हैं। जरूरत तो शीर्ष न्यायालय के उस निर्देश का पालन करने की है, जिसमें मंदिरों में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी समान नीति बनाने का उल्लेख है। यदि प्रधानमंत्री इस हादसे से सबक लेकर इस नीति को बनाने का काम करते हैं तो शायद अमृतसर रेल हादसा नहीं हुआ होता ?</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में पिछले डेढ़ दशक के दौरान मंदिरों और अन्य धार्मिक आयोजनों में उम्मीद से कई गुना ज्यादा भीड़ उमड़ रही है। जिसके चलते दर्शनलाभ की जल्दबाजी व कुप्रबंधन से उपजने वाली भगदड़ व आगजनी का सिलसिला जारी है। धर्म स्थल हमें इस बात के लिए प्रेरित करते हैं कि हम कम से कम शालीनता और आत्मानुशासन का परिचय दें। किंतु इस बात की परवाह आयोजकों और प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं होती। इसलिए उनकी जो सजगता घटना के पूर्व सामने आनी चाहिए, वह अकसर देखने में नहीं आती। लिहाजा आजादी के बाद से ही राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र उस अनियंत्रित स्थिति को काबू करने की कोशिश में लगा रहता है, जिसे वह समय पर नियंत्रित करने की कोशिश करता तो हालात कमोबेश बेकाबू ही नहीं हुए होते ?</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे धार्मिक-आध्यात्मिक आयोजन विराट रुप लेते जा रहे हैं। कुंभ मेलों में तो विशेष पर्वों के अवसर पर एक साथ तीन-तीन करोड़ तक लोग एक निश्चित समय के बीच स्नान करते हैं। दरअसल भीड़ के अनुपात में यातायात और सुरक्षा के इंतजाम देखने में नहीं आते। जबकि शासन-प्रशासन के पास पिछले पर्वों के आंकड़े हाते है। बावजूद लपरवाही बरतना हैरान करने वाली बात है। दरअसल, कुंभ या अन्य मेलों में जितनी भीड़ पहुंचती है और उसके प्रबंधन के लिए जिस प्रबंध कौशल की जरुरत होती है, उसकी दूसरे देशों के लोग कल्पना भी नहीं कर सकते ? इसलिए हमारे यहां लगने वाले मेलों के प्रबंधन की सीख हम विदेशी साहित्य और प्रशिक्षण से नहीं ले सकते ? क्योंकि दुनिया किसी अन्य देश में किसी एक दिन और विशेष मुहूर्त के समय लाखों-करोडों़ की भीड़ जुटने की उम्मीद ही नहीं की जा सकती ? बावजूद हमारे नौकरशाह भीड़ प्रबंधन का प्रशिक्षण लेने खासतौर से योरुपीय देशों में जाते हैं। प्रबंधन के ऐसे प्रशिक्षण विदेशी सैर-सपाटे के बहाने हैं, इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता। ऐसे प्रबंधनों के पाठ हमें खुद अपने देशज ज्ञान और अनुभव से लिखने होंगे। प्रशासन के साथ हमारे राजनेता, उद्योगपति, फिल्मी सितारे और आला अधिकारी भी धार्मिक लाभ लेने की होड़ में व्यवस्था को भंग करने का काम करते हैं। इनकी वीआईपी व्यवस्था और यज्ञ कुण्ड अथवा मंदिरों में मूर्तिस्थल तक ही हर हाल में पहुंचने की रुढ़ मनोदशा, मौजूदा प्रबंधन को लाचार बनाने का काम करती है। नतीजतन भीड़ ठसाठस के हालात में आ जाती है। ऐसे में कोई महिला या बच्चा गिरकर अनजाने में भीड़ के पैरों तले रौंद दिया जाता है और भगदड़ मच जाती है। आंध्रप्रदेश में गोदावरी तट पर घटी घटना एक साथ दो मुख्यमंत्रियों के स्नान के लिए रोक दी गई भीड़ का परिणाम थी।</p>
<p style="text-align:justify;">धार्मिक स्थलों पर भीड़ बढ़ाने का काम मीडिया भी कर रहा है। इलेक्ट्रोनिक मीडिया टीआरपी के लालच में इसमें अहम् भूमिका निभाता है। वह हरेक छोटे बड़े मंदिर के दर्शन को चमात्कारिक लाभ से जोड़कर देश के भोले-भाले भक्तगणों से एक तरह का छल कर रहा है। इस मीडिया के अस्तित्व में आने के बाद धर्म के क्षेत्र में कर्मकाण्ड और पाखण्ड का आंडबर जितना बड़ा है, उतना पहले कभी देखने में नहीं आया। दरअसल मीडिया, राजनेता और बुद्धिजीवियों का काम लोगों को जागरुक बनाने का है, लेकिन निजी लाभ का लालची मीडिया,धर्मभीरु राजनेता और धर्म की आंतरिक आध्यात्मिकता से अज्ञान बुद्धिजीवी भी धर्म के छद्म का शिकार होते दिखाई देते हैं। यही वजह है कि पिछले एक दशक के भीतर मंदिर हादसों में लगभग 3500 हजार से भी ज्यादा भक्त मारे जा चुके हैं। बावजूद श्रद्धालु हैं कि दर्शन, श्रद्धा, पूजा और भक्ति से यह अर्थ निकालने में लगे हैं कि इनको संपन्न करने से इस जन्म में किए पाप धुल जाएंगे, मोक्ष मिल जाएगा और परलोक भी सुधर जाएगा। गोया, पुनर्जन्म हुआ भी तो श्रेष्ठ वर्ण में होने के साथ समृद्ध व वैभवशाली भी होगा। जाहिर है, धार्मिक हादसों से छुटकारा पाने की कोई उम्मीद निकट भविष्य में दिखाई नहीं दे रही है? <strong><em>प्रमोद भार्गव</em></strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Oct 2018 12:23:28 +0530</pubDate>
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                <title>जेएनयू की राह पर एएमयू</title>
                                    <description><![CDATA[अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आतंकवादी मनन वानी की नमाज-ए-जनाजा को परिसर में ही गोपनीय ढंग से जिस तरह पढ़ने की नाकाम कोशिश की गई, उससे लगता है, कहीं न कहीं इसे जवाहरलाल नेहरू विवि की राह पर धकेले जाने का षड्यंत्र तो नहीं चल रहा ? हालांकि विवि प्रशासन ने तुरंत सक्रिय होकर इस गतिविधि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/amu-on-the-path-of-jnu/article-6331"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/amu-on-the-path-of-jnu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आतंकवादी मनन वानी की नमाज-ए-जनाजा को परिसर में ही गोपनीय ढंग से जिस तरह पढ़ने की नाकाम कोशिश की गई, उससे लगता है, कहीं न कहीं इसे जवाहरलाल नेहरू विवि की राह पर धकेले जाने का षड्यंत्र तो नहीं चल रहा ? हालांकि विवि प्रशासन ने तुरंत सक्रिय होकर इस गतिविधि पर अंकुश लगाने के साथ हरकत में शामिल तीन छात्रों को निलंबित कर दिया है। सेना के हाथों जम्मू-कश्मीर की सरहद हिंदवाड़ा पर मारा गया आतंकी मनन वानी इसी विवि का छात्र था और पीएचडी कर रहा था। जनवरी 2017 में उसने सोशल मीडिया साइट पर एके-47 राइफल के साथ अपनी तस्वीर डाली थी, इसके तुरंत बाद उसे विवि से निष्कासित कर दिया गया था। यह हिजबुल मुजाहिदीन संगठन का आतंकी बन गया था। इस घटना के बाद कश्मीर से दुर्भाग्यपूर्ण पहलू में यह सामने आया है कि वहां देशविरोधी नारे लगाने वाले छात्रों के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा है। मांग की जा रही है कि यदि देशद्रोह का मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो एएमयू में पढ़ने वाले 1200 कश्मीरी छात्र विवि छोड़ देंगे। शासन को अलगाववादियों की इस धमकी के दबाव में आने की जरूरत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">विवि सांप्रदायिक बंटवारे से बचा रहे इस नाते यहां के प्रवक्ता प्राध्यापक शाफे किदवई और एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन के निष्पक्ष व बाजिब दखल को दाद देनी होगी। जब विवि प्रशासन को इस हरकत की खबर लगी कि जम्मू-कश्मीर के रहने वाले कुछ छात्र केनेडी हॉल के पास एकत्रित होकर वानी की नमाज-ए-जनाजा पढ़ने की फिराक में हैं। इस पर विवि के सुरक्षाकर्मी व अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे। फैजुल हसन भी पहुंच गए। इन लोगों ने कड़ा हस्तक्षेप करते हुए नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी। फैजुल ने बेहिचक कहा कि एक आतंकवादी के जनाजे की नमाज पढ़ना स्वीकार नहीं है और न ही कश्मीरी छात्रों को इस परिसर में ऐसा करने दिया जाएगा। एएमयू के कर्मचारियों ने भी कुछ इसी तरह का दबाव बनाया। दोनों पक्षों में तीखी बहस भी हुई। किदवई ने भी हरकती छात्रों से कहा कि वे किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। विवि प्रशासन के इस विरोध के चलते हरकती छात्रों को राष्ट्रविरोधी गतिविधि बंद करनी पड़ी। इस कार्यक्रम के टलने के बाद फैजुल हसन ने स्पष्ट किया कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हिमायत करते हैं, लेकिन राष्ट्रद्रोह या आतंकवाद किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दहशतगर्दों के समर्थन का कोई भी कार्यक्रम विवि परिसर में नहीं होने दिया जाएगा। इसी बीच अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम ने नमाए-ए-जनाजा पढ़ने की कोशिश करने वाले छात्रों को एएमयू से निष्कासित करने की मांग की। साथ ही उन्होंने नमाज पढ़ने से रोकने वाले फैजुल किदवई और कर्मचारियों की भी सराहना की। इस घटना का एमएमयू छात्र संघ और कर्मचारियों के हस्तक्षेप से संतोषजनक पटाक्षेप हो गया। अन्यथा यह मामला भी जेएनयू और जादवपुर विवि की तरह सांप्रदायिक रूप ले सकता था। हालांकि कश्मीर में सांप्रदायिक उभार को हवा देकर एएमयू का सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश हो रही है, जो कतई उचित नहीं है। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर इन विवि में राष्ट्रविरोधी मानसिक कुरुपता कैसे और क्यों विकसित हो रही है ? इसके पीछे वे कौन से शड्यंत्रकारी तत्व हैं, जो मासूम छात्रों के जीवन से खिलवाड़ कर धर्म के नाम पर आतंक का पाठ पढ़ाकर आतंक के अनुयायी बना रहे हैं ? इस दुश्चक्र का शुरूआती पहलू जेएनयू में फरवरी 2016 में सामने आया था। यहां अफजल गुरू के समर्थन में नारे लगने के साथ देश तोड़ने के भी नारे लगाए गए थे। हालांकि बाद में जांच से पता चला कि ये आपत्तिजनक गतिविधियां इस विवि में पिछले चार साल से चल रही थीं। बाद में इसी मामले की हुंकार पश्चिम बंगाल के जादवपुर विवि में भरी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">देशद्रोह से जुड़े नारों को लगाते वक्त षड्यंत्रकारियों ने यह भ्रम फैलाने की कवायद की थी कि इसमें मुख्यधारा के विद्यार्थी भी शामिल हैं। क्योंकि इस समूह में शामिल जेएनयू छात्रसंघ के तत्कालीन अध्यक्ष कन्हैया कुमार को देशद्रोह के आरोप में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि कन्हैया ने अपना मंतव्य स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके रहते हुए कोई भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि नहीं चली। उसकी संविधान में पूरी आस्था है और वह देश तोड़ने वाली ताकतों के खिलाफ है। लेकिन इस मामले में विडंबना यह रही कि जिस डेमोक्रेटिक स्टूडेंस यूनियन ने और उसके जिस नेता ने अफजल के समर्थन में नारे लगाने और देश के हजार टुकड़े करने की हुंकार भरी थी उसके विरुद्ध कोई कठोर कार्यवाही नहीं की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इन विश्वविद्यालयों में प्रशासन और छात्रों को स्वायक्ता इसलिए दी गई है, जिससे वे कुछ मौलिक व रचनात्मक ज्ञान अर्जित करें और देश व दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाएं। शिक्षा के जो भी प्रतिष्ठान हैं, चरित्र निर्माण, सहिष्णुता, विवेकशीलता, वैचारिकता और सत्य के अनुसंधान के लिए हैं। यदि ये संस्थान सम्यक दायित्व बोध में असफल सिद्ध होते हैं तो कालांतर में ये अराजक तत्वों का सह-उत्पाद बनकर रह जाएंगे। धार्मिक कट्टरता और जातीय आरक्षण को लेकर देश में जैसे मतांतर पिछले दिनों देखने में आए हैं, वे भी शिक्षा की प्रसांगिकता पर सवाल खड़े करते हैं कि आखिर हम ऐसी कौनसी शिक्षा का पाठ पढ़ा रहे हैं, जिसके चलते छात्र धर्म और जाति के दायरे में ध्रुवीकृत हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई विवि यदि राष्ट्रविरोधी हरकतों के चलते चर्चा में आता है, तो वहां के शिक्षक व प्रशासक भी निंदा के दायरे में आते हैं। ऐसे में यह शक स्वाभाविक रूप में जहन में उभरता है कि क्या इनके स्वायत्ता से संबद्ध विधान, आधारभूत सरंचना, पाठ्य पुस्तकें और शोध प्रक्रिया जैसे बुनियादी तत्वों में कहीं कोई कमी है ? दरअसल जेएनय, एमएमयू, वणारस हिंदू विवि, जादवपुर विवि जैसे शीर्ष शिक्षा संस्थानों की आधारशीला रखते वक्त परिकल्पना यह की गई थी कि ये संस्थान विश्वस्तरीय वैज्ञानिक, अभियंता और चिकित्सक देंगे। लेकिन देखने में आया है कि आज तक इन विवि ने ऐसा कोई वैज्ञानिक या आविष्कारिक नहीं दिया, जिसके सिद्धांत अथवा अविष्कार को वैश्विक मान्यता या नोबेल पुरस्कार मिला हो ? क्या ऐसा वामपंथी वैचारिक जड़ता के कारण हुआ ? क्योंकि खासतौर से जेएनयू में तो परंपरा ही बन गईं है कि वामपंथी विद्धानों की इस संस्थान में नियुक्ति हो, छात्रों में इसी एकमात्र विचारधारा को वे प्रोत्साहित करें, जिससे देश में वर्ग संघर्श उत्पन्न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">बहुलतावादी वैचारिक सोच का समावेश न होने पाए। अब परिदृश्य बदल रहा है, इसलिए इस वामपंथी चौखट को तोड़ना होगा। गांधी ने भारतीय भौगोलिक परिवेश और मानसिकता के अनुसार ज्ञानार्जन की बात कही थी, उस गांधी दर्शन का प्रवेश इन परिसरों में जरूरी हो गया है। लोहिया ने समानता का भाव पैदा करने वाली शिक्षा को अंगीकार किया था। इसी तरह दक्षिणपंथी दीनदयाल उपध्याय ने अंत्योदय की बात कही है। क्यों नहीं अब विभिन्न अकादमिक पदों पर विचार भिन्नता से जुड़े अध्यापकों की भर्ती हो ? यदि ऐसा होता है तो एकपक्षीय विचारों की जड़ता टूटेगी। नए विचार संपन्न संवादों के संप्रेषण से समावेशी सोच विकसित होगी। जब हम देश की अखंडता बनाए रखने की दृष्टि से विविधता में एकता का नारा देते हैं तो फिर शिक्षा में वैचारिक एकरूपता क्यों ? जेएनयू में शायद वाम विचारधारा को महत्व इसलिए दिया जाता रहा है, जिससे दूसरे प्रकार की वैचारिकता से चुनौती मिले ही नहीं ? अब जेएनयू की तरह अन्य विश्वविद्यालयों में दक्षिणपंथी की उपस्थिति दर्ज हो रही है, तो वामपंथी धर्मनिरपेक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बहाने बचने की कोशिश में हैं। किंतु धर्मनिरपेक्षता को केवल मुस्लिम तुष्टिकरण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पाकिस्तान जिंदाबाद के नारों से मुक्त होना होगा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी संविधान के दायरे में नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि आर्थिक उदारवाद के इस कठिन दौर में जिस तरह का भूमंडलीकरण उभरा है, उसके तईं सांस्कृतिक मूल्य और परिदृश्य भी तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में छात्रों की स्वतंत्रता कब स्वछंदता का रूप ले लेती है, यह रेखांकित करना मुश्किल हो जाता है। इन संस्थानों से निकले छात्र ही, कल देश के नेतृत्वकर्ता होंगे ? इस नाते इनके क्या उत्तरदायित्व बनते हैं, यह गंभीरता से सोचने की जरूरत है। अंतत: देश में समरसता और समृद्धि समावेशी उदारता से ही पनपेगी, इसलिए बहुलतावादी सोच को अंगीकार करना अनिवार्य हो गया है। <strong><em>प्रमोद भार्गव</em></strong></p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/article/amu-on-the-path-of-jnu/article-6331</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Oct 2018 12:28:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सावधान! इस दीवाली पर 3 घंटे से ज्यादा नहीं चला पाएंगे पटाखे</title>
                                    <description><![CDATA[शाम 6:30 बजे से लेकर रात 9:30 बजे तक समय निर्धारित सच कहूँ चंडीगढ़। देश व दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बार फिर से सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने न सिर्फ पटाखों को चलाने के लिए 3 घंटे का समय तय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/careful-fireworks-will-not-run-on-this-diwali-for-more-than-3-hours/article-6324"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/careful-fireworks-will-not-run-on-this-diwali-for-more-than-3-hours..jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">शाम 6:30 बजे से लेकर रात 9:30 बजे तक समय निर्धारित</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ चंडीगढ़।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">देश व दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बार फिर से सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने न सिर्फ पटाखों को चलाने के लिए 3 घंटे का समय तय कर दिया है बल्कि इससे सीमा को लागू करने के लिए दोनों सरकारों को सख्त आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि इस समय प्रदूषण देश में विकराल रूप धारण करता जा रहा है दिवाली के त्यौहार के समय सभी की धार्मिक भावनाओं का भी सत्कार करना फर्ज है।इसके चलते पंजाब हरियाणा में पटाखे चलाने की इजाजत तो दी जा रही है, परंतु यह एक तय समय सीमा में ही चलाने होंगे। पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में दिवाली के समय पटाखे जलाने का समय शाम 6:30 बजे से लेकर रात 9:30 बजे तक तय किया है। पिछले साल 2017 में एक पटीशन पर सुनवाई करते हुए पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से किसी भी तरह का प्रदूषण फैलाने को लेकर पाबंदी लगाई गई थी। इस दौरान पिछले साल दिवाली के मौके हाई कोर्ट की तरफ से 3 घंटे पटाखे जलाने की परमिशन दी गई थी। अभी भी यह मामला पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में विचाराधीन है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>हर जिले में तैनात रहेगी पीसीआर:</strong> बुधवार को हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों के जिला उपयुक्त, पुलिस अधीक्षक को इस मामले में निर्देश जारी किए हैं कि वह दिवाली के मौके पर समय अवधि के दौरान ही पटाखे चलाने की इजाजत दे। इस दौरान हर जिले में पीसीआर वाहन तैनात करने के लिए भी कहा गया है ताकि जो लोग देर रात तक पटाखे चलाते हुए प्रदूषण फैलाने की कोशिश करेंगे उनके खिलाफ पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई की जा सके। यही पर हाईकोर्ट की तरफ से पटाखा व्यापारियों को दिए जाने वाले लाइसेंस को भी जारी करने में नए सिरे से नियम तैयार करने के लिए कहा गया है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Oct 2018 14:09:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आतंकवाद पर कमजोर पड़ता संयुक्त राष्ट्र</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व में अमन शांति कायम रखने के उद्देश्य से बनाई राष्ट्रीय संस्था United Nations Weakens On Terrorism संयुक्त राष्ट्र विश्व भर में बढ़ रहे आतंकवाद के सामने कमजोर पड़ती दिख रही है। यह संस्था किसी विवाद से संबंधित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का पक्ष रखने का स्थान बनकर रह गई है। कार्रवाई पर अमल न के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/united-nations-weakens-on-terrorism/article-6090"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/united-nations-weakens-on-terrorism.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विश्व में अमन शांति कायम रखने के उद्देश्य से बनाई राष्ट्रीय संस्था <strong>United Nations Weakens On Terrorism</strong> संयुक्त राष्ट्र विश्व भर में बढ़ रहे आतंकवाद के सामने कमजोर पड़ती दिख रही है। यह संस्था किसी विवाद से संबंधित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का पक्ष रखने का स्थान बनकर रह गई है। कार्रवाई पर अमल न के बराबर है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ पेश तथ्यों पर गौर नहीं किया जा रहा। एक देश (पाकिस्तान) आतंकवाद को सरकारी सरंक्षण देकर भी संयुक्त राष्ट्र का सदस्य रह सकता है। पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में मारे गए आतंकवादी बुरहान वानी के नाम पर टिकट जारी कर यह दिखाया है कि इस्लामाबाद आतंकवाद को खुला समर्थन करता है। जबकि वानी की आतंकी कार्रवाईयों को उसके पिता सहित परिवार का कोई भी सदस्य स्वीकार नहीं करता।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र भी इस्लाम व आतंकवाद को एक नहीं मानता लेकिन पाकिस्तान <strong>United Nations Weakens On Terrorism</strong> में इस्लाम व आतंकवाद को जोड़कर पेश किया जा रहा है। पाकिस्तान की दोगली नीतियों का खुलासा करने के बावजूद संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान लगातार बचता आ रहा है और चीन जैसा देश सुरक्षा परिषद् में उसका समर्थन कर रहा है। चीन ने एक बार फिर भारत को वांछित आतंकवादी मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने में बाधा डालकर संयुक्त राष्ट्र को बेजान संस्था साबित कर दिया है। दरअसल संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, चीन व रूस के लिए एक खिलौना बनकर रह गया है। यह संस्था आतंकवाद के कारण उजड़े परिवारों के लिए हजारों अरबों रुपए की मदद बांट रही है, लेकिन आंतकवाद के खिलाफ निष्पक्ष व असरदार कार्रवाई के लिए ताकतवर देशों की मर्जी से आगे नहीं बढ़ पा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत-पाक के बीच संबंधों में बड़ी रुकावट आतंकवाद है और भारत निरंतर आतंकवाद के खात्मे से पहले बातचीत के लिए राजी नहीं। संयुक्त राष्ट्र को इन बातों पर विचार करना चाहिए कि अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने ही शरण दी थी। अमेरिका द्वारा आतंकवादी घोषित हाफिज मौहम्मद सैय्यद भी पाकिस्तान में सरेआम घूम रहा है। फिर भी पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य होने के साथ-साथ आतंकवाद प्रभावित देशों के साथ बहस कर रहा है। यदि संयुक्त राष्ट्र की भूमिका केवल बैठक की व्यवस्था करवाने तक सीमित है तब पाकिस्तान की तरह अन्य देश भी अंतरराष्ट्रीय संस्था के भय से मुक्त हो जाएंगे। भारत को सर्जिकल स्ट्राईक तक की नौबत आ गई। यदि यह तनातनी यूं ही बढ़ती रही तब युद्ध के हालात बनने तय हैं। संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद की परिभाषा के तहत पाकिस्तान के हालातों का विश्लेषण कर ठोस निर्णय ले ताकि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठा कायम रह सके।</p>
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                <pubDate>Mon, 01 Oct 2018 12:54:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रणजीत सिंह पर फिल्म बनायेंगे जे पी दत्ता</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी) बॉलीवुड के जाने माने फिल्मकार जे पी दत्ता सिख योद्धा महाराजा रणजीत सिंह पर बायोपिक बनाने वाले हैं। जे पी दत्ता की फिल्म पलटन रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म 1967 में चीन के सैनिकों को हथियार डालने पर मजबूर करने की कहानी है। जे पी दत्ता जल्द सिख योद्धा महाराजा रणजीत सिंह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/j-p-dutta-will-make-a-film-on-ranjit-singh/article-5799"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/j-p-dutta-will-make-a-film-on-ranjit-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई (एजेंसी)</p>
<p>बॉलीवुड के जाने माने फिल्मकार जे पी दत्ता सिख योद्धा महाराजा रणजीत सिंह पर बायोपिक बनाने वाले हैं। जे पी दत्ता की फिल्म पलटन रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म 1967 में चीन के सैनिकों को हथियार डालने पर मजबूर करने की कहानी है। जे पी दत्ता जल्द सिख योद्धा महाराजा रणजीत सिंह पर बायोपिक बनाने वाले हैं। महाराजा रणजीत सिंह ने 19वीं शताब्दी में पश्चिमोत्तर भारत में राज किया था।</p>
<p>वो शेर-ए-पंजाब के नाम से बेहद फेमस थे। जे पी दत्ता मानते हैं कि महाराजा रणजीत सिंह देश के बड़े योद्धा रहे हैं और उनके बारे में फिल्म के जरिये लोगों तक बातें पहुंचाई जा सकती हैं। उनकी खासला आर्मी में सभी धर्म के लोगों को जगह मिली थी। इसके बाद जे पी दत्ता की दूसरी बायोपिक किसी एक व्यक्ति नहीं बल्कि राजस्थान के पॉवरफुल पर्सनालिटीज पर होगी। यह फिल्म इस साल नवंबर में फ्लोर पर जायेगी। इन दोनों फिल्मों को जे पी दत्ता ही निर्देशित करेंगे।</p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Sep 2018 15:04:13 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>माईनिंग माफिया ने किया ‘आप’ विधायक पर जानलेवा हमला</title>
                                    <description><![CDATA[अवैध माइनिंग रोकने गए थे आप विधायक अमरजीत सन्दोआसुरक्षा रोपड़/चंडीगढ़(अशवनी चावला)। रोपड़ विधान सभा सीट से विधायक अमरजीत सिंह सन्दोआ पर माइनिंग माफिया के साथ जुड़े हुए कुछ लोगों ने हमला करते हुए विधायक को गंभीर रूप में घायल कर दिया है। अमरजीत सन्दोआ रोपड़ के गांव बेईहाड़ा में अवैध माईनिंग को रोकने के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/mines-attack-kill-killer-on-mla/article-4379"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/jkj-copy-1.jpg" alt=""></a><br /><h1>अवैध माइनिंग रोकने गए थे आप विधायक अमरजीत सन्दोआसुरक्षा</h1>
<pre><strong>रोपड़/चंडीगढ़(अशवनी चावला)।</strong></pre>
<p>रोपड़ विधान सभा सीट से विधायक अमरजीत सिंह सन्दोआ पर माइनिंग माफिया के साथ जुड़े हुए कुछ लोगों ने हमला करते हुए विधायक को गंभीर रूप में घायल कर दिया है। अमरजीत सन्दोआ रोपड़ के गांव बेईहाड़ा में अवैध माईनिंग को रोकने के लिए गए थे, जहां कि मौके पर कुछ लोगों ने न सिर्फ हमला किया, बल्कि विधायक सन्दोआ को मौके पर भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी है। इस दौरान विधायक अमरजीत सन्दोआ को काफी अधिक चोटें भी लगीं हैं, जिस कारण वह इस समय पीजीआई चंडीगढ़ में उपचाराधीन हैं।</p>
<p>आम आदमी पार्टी के नेताआें का कहना है कि अमरजीत सिंह कुछ दिन पहले इस गांव के नजदीक से गुजर रहे थे तो कुछ लोगों ने शिकायत की थी, जिसके आधार पर वह आज मीडिया को अपने साथ लेकर मौके पर अवैध माईनिंग को रोकने के लिए पहुंचे थे परंतु आरोपियों ने अमरजीत सिंह पर हमला करते हुए गंभीर रूप में उनको घायल कर दिया।</p>
<h2>कर्मचारियों के होते हुए भी किया हमला, पगड़ी भी उतारी</h2>
<p>गुरूवार दोपहर बाद मौके पर पहुंचे अमरजीत सिंह सन्दोआ के साथ कथित आरोपी अजविन्दर सिंह व बचित्र सिंह सहित कुछ 5-6लोगों ने गालियां निकालनी शुरू कर दीं जहां कि अमरजीत सिंह के साथ खड़े सुरक्षा कर्मचारियों ने कथित आरोपियों को रोकते हुए विधायक को एक तरफ कर दिया परंतु हमला करने आरोपियों द्वारा पुलिस कर्मचारियों को ही धक्के मारते हुए विधायक अमरजीत सिंह को से काफी मारपीट की, जिस कारण उनको छाती व माथे सहित बाजू पर चोटें लगी हैं। अमरजीत सन्दोआ की मौके पर आरोपियों द्वारा पगड़ी भी उतार ली गई, जिसके बाद विधायक द्वारा भाग कर अपनी जान बचाई गई व बाद में उनको आनन्दपुर साहब के अस्पताल में दाखिल किया गया।</p>
<p>जहां हालत खराब होता देख अमरजीत सन्दोआ को पीजीआई चंडीगढ़ रैफर कर दिया गया।<br />
इस मौके पीजीआई में अमरजीत सन्दोआ उपचाराधीन हैं व खतरे से बाहर हैं। इस मामले संबंधी एसएसपी राज बचन सिंह संधू ने बताया कि मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है व जल्द ही उनको गिरफ़्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विधायक द्वारा पुलिस को इस तरह की छापेमारी संबंधी जानकारी नहीं दी गई थी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Jun 2018 13:19:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लुधियाना में कारोबारी पर फायरिंग</title>
                                    <description><![CDATA[कारोबारी के आफिस में घुस कर दिया वारदात को अंजाम लुधियाना। फील्ड गंज के कलगीधर रोड पर सविफ्ट कार में आए 4 अज्ञात नकाबपोशों ने दिनदहाड़े चड्डा स्टोर के मालिक त्रिलोचन सिंह पर गोलियां बरसाई, और मौके से फरार हो गए। भीड़-भाड़ वाले इस बाजार में घुसे हमलावरों ने कुछ सेंकेडों में वारदात को अंजाम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/firing-on-businessman-in-ludhiana/article-4366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kjkk-copy.jpg" alt=""></a><br /><h2>कारोबारी के आफिस में घुस कर दिया वारदात को अंजाम</h2>
<p><strong>लुधियाना।</strong></p>
<p>फील्ड गंज के कलगीधर रोड पर सविफ्ट कार में आए 4 अज्ञात नकाबपोशों ने दिनदहाड़े चड्डा स्टोर के मालिक त्रिलोचन सिंह पर गोलियां बरसाई, और मौके से फरार हो गए। भीड़-भाड़ वाले इस बाजार में घुसे हमलावरों ने कुछ सेंकेडों में वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गए। वारदात के समय त्रिलोचन सिंह अपने आफिस में बैठे थे। इस दौरान उनके आपिफस में 6 नौकर भी मोजूद थे।</p>
<p>जो कि साथ वाले कमरे में ही खाना खा रहे थे। इसी दौरान एक कार में आए 4 नकाबपोशों ने त्रिलोचन सिंह के आॅपिफस में घुस कर उन पर पफायरिंग कर दी, और आॅपिफस का शटर गिराकर पफरार हो गए। घटना के बाद मौके पर मोजूद लोगों ने त्रिलोचन सिंह को सीएमसी पहुंचाया। कारोबारी की दाएं टांग पर दो व बाएं टांग पर एक गोली लगी है।</p>
<p>घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने तीन खोल बरामद किए। आशंका जताई जा रही है कि हमलावर प्रोफेशनल थे और आपसी रजिंश के चलते ही कारोबारी पर हमला किया गया है। शुरवाती जांच में पुलिस सीसीटीवी की फुटेज खंगाल रही है, सीसीटीवी कैमरे मेें गाडी साफ दिखाई दे रही है, पुलिस ने कार का नंबर भी देख लिया है और आगे की कार्रवाई में जुट गई है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 14:47:34 +0530</pubDate>
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                <title>बैंकों के 10 लाख कर्मचारी हड़ताल पर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। वेतन पुनरीक्षण की मांग को लेकर बैंककर्मियों की दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के पहले दिन आज बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और चेक क्लियरेंस तथा रेमिटेंस सेवायें भी प्रभावित हुईं। उद्योग सगठन एसोचैम ने इस दो दिवसीय हड़ताल से 20 हजार करोड़ रुपये के लेनदेन के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/10-lakh-workers-strike-on/article-3861"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/bam.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>वेतन पुनरीक्षण की मांग को लेकर बैंककर्मियों की दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के पहले दिन आज बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और चेक क्लियरेंस तथा रेमिटेंस सेवायें भी प्रभावित हुईं। उद्योग सगठन एसोचैम ने इस दो दिवसीय हड़ताल से 20 हजार करोड़ रुपये के लेनदेन के प्रभावित होने का अनुमान जताया है। उसने कहा कि हड़ताल से जहां सरकारी बैंकों का परिचालन प्रभावित हुआ वहीं बड़े निजी बैंकों का कामकाज सुचारू तरीके से जारी रहा। राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश में बैंक हड़ताल का असर दिखा।</p>
<p style="text-align:justify;">कई स्थानों पर एटीएम से भी रुपये नहीं निकलने की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड़ व अन्य राज्यों में भी व्यापक असर देखा गया। वेतन में बढ़ोत्तरी और अन्य संबंधित मांगों को लेकर यूनाइटेड फोरम आॅफ बैंक यूनियन्स के आहवान पर बुधवार से आयोजित राष्ट्रीयकृत बैंकों हड़ताल के तहत गुजरात में भी ऐसी बैंकों की लगभग दस हजार शाखाओं में कामकाज ठप रहा।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 May 2018 09:50:38 +0530</pubDate>
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