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                <title>Per - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>धान में 200 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा</title>
                                    <description><![CDATA[कैबिनेट बैठक में बुधवार को इसे मंजूरी दे दी नई दिल्ली। सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 200 रुपए बढ़ाकर 1,750 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। कैबिनेट बैठक में बुधवार को इसे मंजूरी दे दी गई। बता दें की धान के एमएसपी में 10 साल में सबसे ज्यादा 200 रुपए का इजाफा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/200-paisa-per-quintal-increase-in-paddy/article-4652"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/per-quintal-increase-in-paddy.jpg" alt=""></a><br /><h1>कैबिनेट बैठक में बुधवार को इसे मंजूरी दे दी</h1>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p>सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 200 रुपए बढ़ाकर 1,750 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। कैबिनेट बैठक में बुधवार को इसे मंजूरी दे दी गई। बता दें की धान के एमएसपी में 10 साल में सबसे ज्यादा 200 रुपए का इजाफा किया गया है जो​कि अब तक का सबसे बडा मूल्य है । यदि 2008-09 की बात करे तो 2008.9 में इस पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 155 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाया गया था। मानसूनइ आते ही खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है।</p>
<p>अगर कटाई की बात करें तो इनकी कटाई अक्टूबर से शुरू होती है। बजट में सरकार ने कहा था कि एमएसपी उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना तय किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा एमएसपी से धान का उत्पादन और बढ़ सकता है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Jul 2018 08:05:01 +0530</pubDate>
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                <title>तंबाकू जनित बीमारियों से हर साल 70 लाख से अधिक मौतें</title>
                                    <description><![CDATA[जिनेवा (एजेंसी)। विश्व में हर साल तंबाकू उत्पादों से सत्तर लाख से अधिक लोगों की मौत हो रही है और 30 लाख लोग इसके कारण दिल की बीमरियों तथा लकवे का शिकार हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आज यह जानकारी दी। डब्ल्यूएचओ ने आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस(नो टौबेको डे) के मौके पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/more-than-7-million-deaths-per-year-from-tobacco/article-3862"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/aa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जिनेवा (एजेंसी)। </strong>विश्व में हर साल तंबाकू उत्पादों से सत्तर लाख से अधिक लोगों की मौत हो रही है और 30 लाख लोग इसके कारण दिल की बीमरियों तथा लकवे का शिकार हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आज यह जानकारी दी। डब्ल्यूएचओ ने आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस(नो टौबेको डे) के मौके पर जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि धूम्रपान करने वाले लोग तो इससे होने वाली बीमारियों की चपेट में आकर मारे जाते हैं लेकिन ये लोग आस पास धुआं छोड़ते हैं तो इसके संपर्क में आकर लोग भी अपनी जान गवां रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह के सेकंड हैंड एक्सपोजर से मरने वालों का आंकड़ा 890,000 है। डब्ल्यूएचओ ने तंबाकू उत्पादों और ध्रूमपान के खतरों से लोगों को अवगत कराने के लिए 2005 में एक प्रस्ताव पेश किया था जिसका अनुमोदन 180 देशों ने कर दिया है। इसमें तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन और प्रायोजकता पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">डब्ल्यूएचओ के अंसचारी रोग विभाग के निदेशक डगलस बैचर ने बताया कि इस मुहिम के अच्छे परिणाम सामने आए हैं और 2000 में जहां विश्व की कुल आबादी का 20 प्रतिशत हिस्सा तंबाकू उत्पादों का सेवन करता था वहीं यह 2016 में घटकर 20 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि अभी इस दिशा में काफी कुछ किया जाना है और सबसे अधिक दिक्कतें निम्न और मध्य आय वाले देशों में आ रही हैं जहां तंबाकू लाबी इतनी ताकतवर है कि वे अपने उत्पादों के प्रचार के लिए किसी भी तरह के हथकंडे अपनाने को तैयार रहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ये कंपनियां अपने उत्पादों का प्रचार गलत तरीके से करती हैं और इनका लक्ष्य युवा वर्ग होता है जिसके लिए ये उत्पादों की कीमत कम रखती हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रति वर्ष तंबाकू उत्पादों के सेवन से सत्तर लाख से अधिक लोग मारे जा रहे हैं और इनमें से अधिकांश को पता होता है कि धूम्रपान कैंसर का एक बड़ा कारण है लेकिन फिर भी ये इनके दुष्चक्र में फंस जाते हैं। विश्व में धूम्रपान करने वालों की संख्या 1़ 1 अरब है जिनमें चीन में 30़ 7 करोड़ लोग और भारत में 10़ 6 करोड़ लोग इसके जाल में फंसे हुए हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 May 2018 10:04:04 +0530</pubDate>
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