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                <title>Paddy Transplantation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Paddy Transplantation RSS Feed</description>
                
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                <title>संगरूर में धान की रोपाई के काम ने पकड़ा जोर</title>
                                    <description><![CDATA[ पंजाब में सबसे अधिक अनाज उत्पादन करने वाले जिला संगरूर में किसानों द्वारा धान की रोपाई का काम बड़े स्तर पर चल रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/paddy-transplantation-work-gained-momentum-in-sangrur/article-86579"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/paddy-transplantation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)।</strong> Sangrur News: पंजाब में सबसे अधिक अनाज उत्पादन करने वाले जिला संगरूर में किसानों द्वारा धान की रोपाई का काम बड़े स्तर पर चल रहा है। आगामी कुछ दिनों में किसानों द्वारा धान की रोपाई का काम पूरा किए जाने के आसार हैं। अंतिम जोन में शामिल जिलों संगरूर, मलेरकोटला और बरनाला में 9 जून से धान की रोपाई शुरू हो चुकी है। रोपाई के काम की रफ्तार को देखते हुए जिले में प्रवासी मजदूरों की आवद भी शुरू हो गई है। कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार इस बार जिले में करीब 2 लाख 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई होने की संभावना है। इसे लेकर कृषि विभाग, बिजली विभाग और अन्य संबंधित विभाग पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। हर बार की तरह इस बार भी किसान सीधी बिजाई की बजाय पारंपरिक तरीके से कद्दू (पानी भरकर) विधि से रोपाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विभागीय आँकड़ों के अनुसार इस बार धान की सीधी बिजाई लगभग 8 हजार एकड़ में हो रही है, जो पिछले साल की तुलना में दोगुनी बताई जा रही है। गाँव लड्डा और गग्गड़पुर के किसानों ने बताया कि इस बार उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा से आने वाले प्रवासी मजदूरों की दिहाड़ी महंगी पड़ रही है। पिछले साल जहाँ प्रति एकड़ रोपाई का रेट 4,000 से 4,500 रुपये था, वहीं इस बार यह बढ़कर 5,000 रुपये प्रति एकड़ हो गया है। किसानों ने कहा कि स्थानीय मजदूरों की दिहाड़ी प्रवासी मजदूरों से भी ज्यादा है, इसलिए मजबूरी में उन्हें प्रवासी मजदूरों से काम करवाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि खेतों के लिए 8 घंटे बिजली सप्लाई शुरू हो चुकी है। जुताई के बाद सूखे खेतों में पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन अधिक तापमान, मजदूरों की कमी और कम उम्र की पनीरी के कारण रोपाई ने अभी पूरी रफ्तार नहीं पकड़ी है। गर्मी के कारण पनीरी के जलने का खतरा भी बना हुआ है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बिजली व्यवस्था से किसान संतुष्ट</h4>
<p style="text-align:justify;">किसानों ने कहा कि इस बार बिजली की कोई कमी नहीं है और वे बिजली व्यवस्था से संतुष्ट हैं। किसान मुख्य रूप से पीआर-126, पीआर-130 और पीआर-131 किस्मों की रोपाई कर रहे हैं। ये किस्में कम समय में पकती हैं और पानी की खपत भी कम करती हैं। किसानों का कहना है कि यदि अच्छी बारिश हो जाए तो रोपाई का सीजन पूरी गति पकड़ लेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में जिला संगरूर के मुख्य कृषि अधिकारी धमेन्द्र सिंह सिद्धू ने बताया कि जिले में धान की रोपाई का काम काफी तेजी पकड़ चुका है। उम्मीद है कि आने वाले एक सप्ताह के भीतर रोपाई का काम पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि धान की सीधी बिजाई का रकबा पिछले साल से अधिक है, और इस वर्ष लगभग 8 हजार एकड़ में सीधी बिजाई करवाई जा रही है, जबकि पिछले साल यह आँकड़ा कम था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ट्यूबवेलों को 8 घंटे बिजली उपलब्ध करवाई कराई जा रही: जिंदल </h4>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में पावरकॉम के एक्सईएन एनके जिंदल ने बताया कि धान सीजन के दौरान किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ट्यूबवेलों को 8 घंटे बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है। जहाँ भी कोई फॉल्ट आता है, वहाँ तुरंत टीमें भेजकर उसे ठीक किया जाता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि धान सीजन के दौरान संगरूर के किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/paddy-transplantation.jpg" alt="Paddy Transplantation" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 20:59:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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                <title>धान रोपाई से पहले इस तरह तैयार करें खेत</title>
                                    <description><![CDATA[इन दिनों किसानों ने धान की फसल को लेकर तैयारियां शुरु कर दी हैं। 16 जून से प्रदेशभर में धान की रोपाई का दौर शुरू हो जाएगा। रोपाई से पहले धान के बीज का उपचार किसानों के लिए सबसे जरूरी कार्य है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की नर्सरी बीजने से पहले खेतों में 10-12 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/prepare-the-farm-before-the-paddy-transplantation/article-3893"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/dhan-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इन दिनों किसानों ने धान की फसल को लेकर तैयारियां शुरु कर दी हैं। 16 जून से प्रदेशभर में धान की रोपाई का दौर शुरू हो जाएगा। रोपाई से पहले धान के बीज का उपचार किसानों के लिए सबसे जरूरी कार्य है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की नर्सरी बीजने से पहले खेतों में 10-12 गाड़ी कंपोस्ट खाद डालकर मिला दें। खेत तैयार करते समय बत्तर आने पर खेत को 2-3 जुताई करके खेत को अच्छी तरह तैयार कर लें।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद खेत में पानी भरकर कद्दू करें। इसी समय 22 किलो यूरिया व 62 किलो सिंगल सुपरफास्फेट व 10 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ डालें व सुहागा लगाएं। सुहागा लगाने के 4-5 घंटे बाद जब रेगा बैठ जाए तो पहले से उपचारित व अंकुरित किया हुआ बीज 40-50 ग्राम प्रति वर्गमीटर के हिसाब से 2-3 सैंटीमीटर खड़े पानी में बीजेंं। पहले 7-8 दिन पनीरी में बहुत हल्का-हल्का पानी लगायें।</p>
<p style="text-align:justify;">पौध शैय्या में खरपतवार नियंत्रण के लिए बिजाई के 1-3 दिन बाद 600 ग्राम सोफिट या 1.2 लीटर ब्यूटाक्लोर या सेटर्न या स्टा प को 60 किलोग्राम सूखी रेत में मिलाकर अंकुरित धान बोने के 6 दिन बाद प्रति एकड़ नर्सरी में डालें। इससे 50 से 60 प्रतिशत खरपतवारों की रोकथाम हो जाती है। पानी शाम के समय लगाना अच्छा रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">15 दिन बाद खरपतवार निकालकर 22 किलो यूरिया प्रति एकड़ डालें। अगर पनीरी में लोहे की कमी आ जाती है तो 0.5 प्रतिशत फेरस सल्फेट +2.5 प्रतिशत यूरिया का स्प्रे करें। बरसीम वाला खेत धान पनीरी बीजने के लिए अच्छा रहता है। 25-30 दिन में पौध खेत में लगाने योग्य हो जाती है। बासमती किस्मों की रोपाई 15 जुलाई से पहले कर दें। ऐसा करने से बदरा रोग का प्रकोप कम होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोपाई की विधि</h3>
<p style="text-align:justify;">धान की रोपाई जून माह के तीसरे सप्ताह में आरंभ कर लें। रोपाई सही फासले (15 संै.मी. *15 सैं.मी.) पर करें और एक स्थान पर 2-3 पौधे खडे पानी में रोपे। रोपाई के 6-10 दिन बाद पानी रोक दें ताकि पौधों की जड़ें विकसित हो जाएं। छोटी बढ़ने वाली बौनी किस्मों में रोपाई से पहले या कद्दू करते समय 44 किलो यूरिया, 50 किलोग्राम डीएपी या 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 40 किलोग्राम यूरेट आॅफ पोटाश एवं 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति एकड़ तथा लंबी बढ़ने वाली किस्मों में 25 किलो डीएपी या 75 किलो सिंगल सुपर फास्फेट तथा 10 किलों जिंक सल्फेट प्रति एकड़ रोपाई से पहले कद्दू या लेव करते समय प्रयोग करें।</p>
<p style="text-align:justify;">धान की बौनी किस्मों में 45 किलो यूरिया व लंबी किस्मों में 25 किलो यूरिया प्रति एकड़ रोपाई के 21 दिन बाद खेत में पानी कम करके छिंटे द्वारा प्रयोग करें। दूसरी मात्रा के समान तीसरी मात्रा रोपाई के 42 दिन बाद करें। इसके बाद फसल में खाद न डालें। यदि फास्फोरस की खाद डीएपी से डाली गई हो तो बौनी धान की किस्मों में 20 किलो (रोपाई के समय)व लंबी धान की किस्मों में 10 किलो यूरिया प्रति एकड़ कम डालें। कल्लर वाले खेतों में 20 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति एकड़ प्रयोग करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बीज का उपचार</h3>
<p style="text-align:justify;">भारी व स्वस्थ बीज के चुनाव हेतु 10 प्रतिशत नमक के घोल (10 लीटर पानी में 1 किलो नमक )में बीज को थोडा़-थोड़ा करके डालें। ऊपर तैरते हुए बीज व अन्य पदार्थों को बाहर निकाल कर नष्ट कर दें। नीचे बैठे भारी बीज को साफ पानी से 3-4 बार धो लें, ताकि बीज पर नमक का अंश न रहने पाए और रासायनिक उपचार बीजगत फफूंद व जीवाणुओं के नियंत्रण के लिए करें।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए 10 लिटर पानी में 10 ग्राम काबार्नाडाजिम (बैविस्टिन)या 10 ग्राम एमीसान व 1 ग्राम स्टै्रप्टोसाइक्लीन घोल लें और इस घोल में 10-12 किलो बीज को 24 घंटे तक भिगोकर उपचारित करें। इसके बाद बीज को घोल से निकालकर छाया में पकेफर्श या बोरी पर ढ़ेर के रूप में डालें व गीली बोरी से 24-36 घंटे तक ढ़क दें। समय-समय पर पानी छिड़ककर बीज को गीला रखें ताकि अंकुरण हो सके।</p>
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Jun 2018 11:09:41 +0530</pubDate>
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