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                <title>Sunil Dutt - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Sunil Dutt RSS Feed</description>
                
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                <title>सुनील दत्त बर्थडे : एक बस कंडक्टर से एक्टर बनने तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। 6 जून को सुनहरे दौर के लोकप्रिय अभिनेता सुनील दत्त का बर्थडे होता है। उनकी एक फ़िल्म ‘जानी दुश्मन’ में उनका एक प्रसिद्ध संवाद है- ‘मर्द तैयारी नहीं करते…हमेशा तैयार रहते हैं।’ उनका यह संवाद उन पर पूरी तरह से फिट बैठता है। एक बस कंडक्टर से एक्टर और फिर सामाजिक कार्यकर्ता से भारत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/sunil-dutt-birthday-a-journey-from-a-bus-conductor-to-becoming-an-actor/article-3973"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/sunil.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)। </strong>6 जून को सुनहरे दौर के लोकप्रिय अभिनेता सुनील दत्त का बर्थडे होता है। उनकी एक फ़िल्म ‘जानी दुश्मन’ में उनका एक प्रसिद्ध संवाद है- ‘मर्द तैयारी नहीं करते…हमेशा तैयार रहते हैं।’ उनका यह संवाद उन पर पूरी तरह से फिट बैठता है। एक बस कंडक्टर से एक्टर और फिर सामाजिक कार्यकर्ता से भारत सरकार में मंत्री तक का सफ़र तय करने वाले सुनील दत्त की जीवन यात्रा एक मिसाल है। आइये उनकी जयंती पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें!</p>
<p style="text-align:justify;">सुनील दत्‍त का जन्‍म 6 जून 1929 को अविभाजित भारत के झेलम जिले में बसे खुर्द नामक गांव में हुआ था। यह क्षेत्र अब पाकिस्तान में है। बहरहाल, उनका मूल नाम बलराज दत्‍त था। उन्होंने भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय बहुत ही करीब से हिंदू-मुस्लिम दंगों को देखा है और उसके भुक्तभोगी भी रहे हैं। बंटवारे के बाद उनका परिवार पहले यमुनानगर, पंजाब (अब हरियाणा) और बाद में लखनऊ आ बसा। सुनील दत्त का बचपन काफी संघर्ष भरा रहा है क्योंकि जब वो महज 5 साल के थे तभी उनके पिता दीवान रघुनाथ दत्त का निधन हो गया था। उनकी मां कुलवंती देवी ने उनकी परवरिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ के बाद सुनील दत्त उच्च शिक्षा के लिए मुंबई आ गए। मुंबई में उन्होंने जय हिंद कॉलेज में दाखिला लिया। चूंकि उनकी माली हालत अच्छी नहीं थी तो उन्होंने मुंबई बेस्ट की बसों में कंडक्टर की नौकरी कर ली। वहां से शुरू हुआ उनका सफ़र जिस मुकाम तक पहुंचा वो काफी प्रेरक है। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुनील दत्त की नौकरी एक एड एजेंसी में लग गयी जहां से उन्हें रेडियो सीलोन में रेडियो जॉकी बनने का मौका मिल गया। उद्घोषक के रूप में काम करते हुए वह काफी मशहूर भी हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सफल उद्घोषक के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद सुनील कुछ नया करना चाहते थे और कहते हैं न कि किस्मत बहादुरों का साथ देती है तो उन्हें भी जल्द ही 1955 में बनी फ़िल्म ‘रेलवे स्‍टेशन’ में ब्रेक मिल गया। यह उनकी पहली फ़िल्म थी। जिसके दो साल बाद साल 1957 में आई ‘मदर इंडिया’ ने उन्हें बालीवुड का फ़िल्म स्टार बना दिया। अपने 40 साल लंबे कैरियर में दत्त ने 20 से ज्यादा फ़िल्मों में विलेन का किरदार निभाया है। उस रोल में भी वो खूब जंचते थे। डकैतों के जीवन पर बनी उनकी सबसे बेहतरीन फ़िल्म ‘मुझे जीने दो’ ने उन्हें साल 1964 का फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी दिलवाया। साल 1966 में उन्हें फिर से ‘खानदान’ फ़िल्म के लिये फ़िल्मफ़ेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार प्राप्त हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">1950 के आखिरी वर्षों से लेकर 1960 के दशक में उन्होंने हिन्दी फ़िल्म जगत को कई बेहतरीन फ़िल्में दीं जिनमें साधना (1958), सुजाता (1959), मुझे जीने दो (1963), गुमराह (1963), वक़्त (1965), खानदान (1965), पड़ोसन (1967) और हमराज़ (1967) आदि प्रमुख रूप से उल्लेखनीय हैं। सुनील दत्त की शादी से जुड़ा एक रोचक किस्‍सा है। साल 1957 में महबूब ख़ान की फ़िल्म मदर इण्डिया का शूटिंग चल रही थी। तभी वहां अचानक आग लग गई। नरगिस इस आग में घिर गईं, तभी सुनील दत्त ने अपनी जान की परवाह न करते हुए नरगिस को बचा लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद इलाज के दौरान सुनील ने पूरे मन से नरगिस का ख्याल रखा और दोनों एक दूसरे के प्रति खींचे चले गए और एक दिन सुनील दत्त ने कार चलाते हुए नरगिस को शादी के लिए प्रपोज़ कर दिया। नरगिस ने भी मुस्कुराते हुए सुनील दत्त का प्रपोज़ल स्वीकार कर लिया! एक सफल अभिनेता और निर्देशक की पारी खेलने के बाद सुनील दत्त ने 1984 में राजनीति ज्‍वॉइन कर ली। वह कांग्रेस पार्टी के टिकट पर मुंबई उत्‍तर पश्‍चिम लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बने। वे यहां से लगातार पांच बार चुने गए। उनकी मृत्यु के बाद उनकी बेटी प्रिया दत्त यहां की सांसद बनीं।</p>
<p style="text-align:justify;">जब उनकी मौत हुई तब वो भारत सरकार में खेल व युवा मामले का मंत्रालय संभाल रहे थे।सामाजिक प्रतिबद्धताओं के लिए भी सुनील दत्त हमेशा आगे रहे। 1987 में पंजाब में खालिस्तान मूवमेंट के तहत ज़बरदस्त हिंसक आंदोलन चल रहा था। तब सुनील दत्त ने महात्मा गांधी के तर्ज़ पर पदयात्रा करने की सोची और पंजाब में शांति बहाल हो इस उद्देश्य से मुंबई से अमृतसर ( दो हज़ार किलोमीटर) के लिए महाशांति पदयात्रा पर निकल पड़े। उनके साथ उनकी बेटी प्रिया दत्त समेत 80 और लोग भी थे।</p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jun 2018 07:41:42 +0530</pubDate>
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                <title>बॉलीवुड के पहले रियल ऐंटी हीरो थे सुनील दत्त</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। हिन्दी सिनेमा जगत में सुनील दत्त पहले ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने सही मायने में ‘एंटी हीरो’ की भूमिका निभाई और उसे स्थापित करने का काम किया। झेलम जिले के खुर्द गांव में छह जून 1929 को जन्में बलराज रघुनाथ दत्त उर्फ सुनील दत्त बचपन से ही अभिनेता बनने की ख्वाहिश रखते थे। सुनील दत्त […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/sunil-dutt-who-was-bollywoods-first-real-hero/article-3968"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/suni-dutt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)। </strong>हिन्दी सिनेमा जगत में सुनील दत्त पहले ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने सही मायने में ‘एंटी हीरो’ की भूमिका निभाई और उसे स्थापित करने का काम किया। झेलम जिले के खुर्द गांव में छह जून 1929 को जन्में बलराज रघुनाथ दत्त उर्फ सुनील दत्त बचपन से ही अभिनेता बनने की ख्वाहिश रखते थे। सुनील दत्त को अपने करियर के शुरुआती दौर में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अपने जीवन यापन के लिए उन्हें बस डिपो में चेकिंग क्लर्क के रुप में काम किया जहां उन्हें 120 रुपएं महीना मिला करता था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच उन्होने रेडियो सिलोन में भी काम किया जहां वह फिल्मी कलाकारो का साक्षात्कार लिया करते थे। प्रत्येक साक्षात्कार के लिए उन्हें 25 रुपए मिलते थे। सुनील दत्त ने अपने सिने केरियर की शुरुआत वर्ष 1955 में प्रदर्शित फिल्म रेलवे प्लेटफार्म से की। वर्ष 1955 से 1957 तक वह फिल्म इंडस्ट्री मे अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहे। ‘रेलवे प्लेटफार्म’ फिल्म के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली उसे वह स्वीकार करते चले गए। उस दौरान उन्होंने कुंदन, राजधानी, किस्मत का खेल और पायल जैसी कई बी ग्रेड फिल्मों मे अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स आॅफिस पर सफल नहीं हुई। सुनील दत्त की किस्मत का सितारा 1957 में प्रदर्शित फिल्म ‘मदर इंडिया’ से चमका।</p>
<p style="text-align:justify;">इस फिल्म में सुनील दत्त का किरदार ऐंटी हीरो का था। करियर के शुरुआती दौर में ऐंटी हीरो का किरदार निभाना किसी भी नए अभिनेता के लिए जोखिम भरा हो सकता था लेकिन सुनील दत्त ने इसे चुनौती के रुप में लिया और ऐंटी हीरो का किरदार निभाकर आने वाली पीढ़ी को भी इस मार्ग पर चलने को प्रशस्त किया। ऐंटी हीरो वाली उनकी प्रमुख फिल्मों में जीने दो, रेशमा और शेरा, हीरा, प्राण जाए पर वचन न जाए, 36 घंटे, गीता मेरा नाम।</p>
<p style="text-align:justify;">जख्मी, आखिरी गोली, पापी आदि प्रमुख हैं। मदर इंडिया ने सुनील दत्त के सिने कैरियर के साथ ही व्यक्तिगत जीवन मे भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। वर्ष 1981 में अपने पुत्र संजय दत्त को लांच करने के लिए उन्होंने फिल्म ‘रॉकी’ का निर्देशन किया। फिल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई। फिल्मों में कई भूमिकाएं निभाने के बाद सुनील दत्त ने समाज सेवा के लिए राजनीति में प्रवेश किया और कांग्रेस पार्टी से लोकसभा के सदस्य बने। वर्ष 1968 में सुनील दत्त पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनील दत्त को 1982 में मुंबई का शेरिफ नियुक्त किया गया। सुनील दत्त ने कई पंजाबी फिल्मों में भी अपने अभिनय का जलवा दिखलाया। सुनील दत्त को अपने सिने कैरियर में दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें मुझे जीने दो 1963 और खानदान 1965 शामिल है। वर्ष 2005 में उन्हें फाल्के रत्न अवार्ड प्रदान किया गया। सुनील दत्त ने लगभग 100 फिल्मों में अभिनय किया। अपनी निर्मित फिल्मों और अभिनय से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाने वाले सुनील दत्त 25 मई 2005 को इस दुनिया को अलविदा कह गए।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Jun 2018 20:26:21 +0530</pubDate>
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