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                <title>‘पबजी’ गेम बन रही बच्चों के लिए खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[पबजी गेम खेलने वाले बच्चे हो रहे मानसिक बीमारी का शिकार | PUBG GAME सिमरनजीत का कहना है कि इस गेम पर तुरंत बैन लगाया जाना चाहिए राजपुरा(सच कहूँ/जतिन्द्र लक्की)। मोबाईल फोन आज कल हर इन्सान की जरूरत बन गया है चाहे वह बड़ा हो या छोटा। सभी को मोबाईल फोन की जरूरत पड़ती है। जहां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/pubg-game-is-becoming-a-threat-to-children/article-10517"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/pubg.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">पबजी गेम खेलने वाले बच्चे हो रहे मानसिक बीमारी का शिकार | PUBG GAME</h1>
<ul>
<li><strong>सिमरनजीत का कहना है कि इस गेम पर तुरंत बैन लगाया जाना चाहिए</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>राजपुरा(सच कहूँ/जतिन्द्र लक्की)।</strong> मोबाईल फोन आज कल हर इन्सान की जरूरत बन गया है चाहे वह बड़ा हो या छोटा। सभी को मोबाईल फोन की जरूरत पड़ती है। जहां एक वस्तु का फायदा है वहीं उनका अधिक इस्तेमाल हम मनुष्यों के लिए घातक भी सिद्ध हो सकता है। मोबाईल फोन पर गेम खेलना बच्चों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। मोबाईल फोनों की गेम में एक गेम है ‘पबजी’ इसे आज कल के युवा सभी काम धंधे छोड़कर बहुत ही रूचि के साथ खेल रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस गेम ने युवाओं को पर ऐसा जादू किया है कि युवाओं को अपनी होश ही नहीं रहती और वे अपने आप में ही खोए रहते हैं। यह गेमस आजकल के बच्चों को एडिक्ट बना रही हैं। इस गेम का दिमाग व मन पर ऐसा बुरा प्रभाव पड़ रहा है कि बच्चे अपने आसपास गेम जैसा माहौल महसूस करता हुआ उटपटांग हरकतें करने लग जाते हैं। इस संबंधी राजपुरा से एक बच्चे की मां सिमरनजीत ने बताया कि उसका लड़का 12वीं कक्षा का विद्यार्थी है जब से उसने पबजी खेम खेलनी शुरू की है तब से ही उसका दिमागी संतुलन खराब हो गया है।</p>
<h1>पबजी गेम पर तुंरत बैन लगाए जाने की मांग | PUBG GAME</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong> वह सोता हुआ उठकर घुसपैठियों की तलाश करता हुआ बेड के नीचे देखने लग जाता है</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>व इसका ईलाज मनोवैज्ञानिक डॉक्टरों के पास चल रहा है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सिमरनजीत का कहना है कि इस गेम पर तुरंत बैन लगाया जाना चाहिए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जैसा उनके बच्चे के साथ हो रहा है वह किसी अन्य के बेटे के साथ न हो। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>आजकल बच्चों में मानसिकता बिगड़ने के मामलों में बढ़Þोतरी हो रही है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसका कारण आऊटडोर गेमस ना खेलकर बच्चे मोबाईल् ा गेमस खेलना पसंद करते हैं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जरूरत है इस पर रोक लगाने की ताकि बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास हो सके। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इस अपने कार्योंं में समय निकाल अभिभावक बच्चों की तरफ जरू र ध्यान दें व उसे अकेला बिल्कुल भी महसूस न होने दें।</strong></li>
</ul>
<h1 style="text-align:justify;">आईटी एक्सपर्ट का कहना | PUBG GAME</h1>
<p style="text-align:justify;">आईटी एक्सपर्ट मुखबीर का कहना है कि गेमस खेलने से बच्चों का दिमाग जरूर तेज होता है लेकिन जो गेमस बच्चों की मानसिकता पर बुरा प्रभाव डालती हैं, उनको प्ले स्टोर ऐप से ही हटा देना चाहिए, जिससे न मोबाईल में गेम होगी व न ही कोई इसे डाऊनलोड कर सकेगा। समय रहते इस पर विचार न किया गया तो आने वाले समय हमारी पीढ़ी के लिए बहुत ही भयानक सिद्ध होगा। इस पर समय रहते विशेष ध्यान देने की जरूरत है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Sep 2019 19:04:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ममता की पहली बंगाली पीएम बनने की अच्छी संभावना :  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[दिलीप घोष ने ममता को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके सेहतमंद बने रहने की कामना की कोलकाता. भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की (Mamata’s Good Prospect Becoming First Bengali PM: State BJP President) पहला बंगाली प्रधानमंत्री बनने की अच्छी संभावनाएं हैं। ममता को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">दिलीप घोष ने ममता को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके सेहतमंद बने रहने की कामना की</h1>
<p style="text-align:justify;">कोलकाता. भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की (Mamata’s Good Prospect Becoming First Bengali PM: State BJP President) पहला बंगाली प्रधानमंत्री बनने की अच्छी संभावनाएं हैं। ममता को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए घोष ने कहा कि वे उनकी अच्छी सेहत और कामयाबी की दुआ करते हैं। स्टालिन के प्रस्ताव के बयान आया था ममता का बयान घोष ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि वे (ममता) सेहतमंद रहें ताकि अच्छा काम कर सकें। उनका सेहतमंद रहना जरूरी है, क्योंकि अगर किसी बंगाली के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं हैं तो उनमें वही एक हैं।” इससे पहले ममता ने भी विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के मुद्दे पर कहा था कि 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद ही इस पर चर्चा हो सकती है।</p>
<h2>पीएम उम्मीदवार के सवाल पर ममता भी कह चुकीं- लोकसभा चुनाव के बाद ही इस पर चर्चा हो सकती है</h2>
<p style="text-align:justify;">ममता का यह बयान द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन के उस बयान पर आया था, जिसमें उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल (Mamata’s Good Prospect Becoming First Bengali PM: State BJP President) गांधी का नाम विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर घोषित करने का प्रस्ताव रखा था। ममता ने मीडिया से कहा था, ‘‘2019 में लोकसभा चुनाव के बाद ही इस पर चर्चा हो सकती है। एक बार विपक्षी गठबंधन जीत जाए फिर सभी पार्टियां बैठककर इस मसले पर फैसला करेंगी। हम उसे मंजूर करेंगे।” यह पूछने पर कि क्या वे भी इस दौड़ में शामिल हैं? उन्होंने कहा था, ‘‘इस मसले पर बात करने का यह उचित वक्त नहीं है। मैं अकेली नहीं हूं। हम साथ में काम कर रहे हैं। हम मजबूती से साथ में हैं।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">बंगाल में 2014 में किसे कितनी सीटें मिलीं</h2>
<p style="text-align:justify;">टीएमसी : 34<br />
कांग्रेस : 04<br />
भाजपा : 02<br />
माकपा : 02</p>
<p style="text-align:justify;">कुल सीटें : 42</p>
<div>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/mamatas-good-prospect-of-becoming-first-bengali-pm-state-bjp-president/article-7231</link>
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                <pubDate>Sun, 06 Jan 2019 14:14:09 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नन्हें वाहन चालकों के अभिभावकों व बुलेट के पटाखों की खैर नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[सार्वजनिक स्थानों पर वाहन चलाने व बिना ड्राइविंग लाइसेंस ड्राईविंग व जुर्माने के अलावा सजा का भी प्रावधान बठिंडा(अशोक वर्मा)। बठिंडा में अब छोटी आयु में वाहन चलाने वाले बच्चों के अभिभावकों की भी खैर नहीं है। बठिंडा पुलिस ने नाबालिग (18 साल से कम) वाहन चालकों के माता-पिता के खिलाफ मोटर वहीकल एक्ट की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/small-children-becoming-a-threat-to-the-people/article-4857"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/dangers-news.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सार्वजनिक स्थानों पर वाहन चलाने व बिना ड्राइविंग लाइसेंस ड्राईविंग व<br />
जुर्माने के अलावा सजा का भी प्रावधान</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा(अशोक वर्मा)।</strong> बठिंडा में अब छोटी आयु में वाहन चलाने वाले बच्चों के अभिभावकों की भी खैर नहीं है। बठिंडा पुलिस ने नाबालिग (18 साल से कम) वाहन चालकों के माता-पिता के खिलाफ मोटर वहीकल एक्ट की धारा 180 के अंतर्गत कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। फिलहाल पुलिस ने ऐसे बच्चों के माता-पिता को नसीहत भी दी है और जल्द ही सख़्त एक्शन लिए जाएंगे। बताने योग्य है कि 18 साल से कम आयु का लड़का या लड़की वाहन नहीं चल सकता है वैसे 16 साल की उम्र में बिना गेयर के दो पहिया वाहन चलाने की स्वीकृति है। मोटर वहीकल एक्ट मुताबिक 18 वर्ष से कम उम्र में सार्वजनिक स्थानों पर वाहन चलाने व बिना ड्राइविंग लाइसेंस ड्राईविंग व जुर्माने के अलावा सजा का भी प्रावधान है।</p>
<h1 style="text-align:center;">‘रफ ड्राईविंग’ करने पर तीन माह की जेल व एक हजार रु पये जुर्माने की सजा</h1>
<p style="text-align:justify;">सैंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 180 अनुसार यदि कोई व्यक्ति नाबालिग को अपना वाहन चलाने के लिए देता है तो उसे एक हजार जुर्माना या तीन माह की कैद या दोनों सजाएं हो सकतीं हैं। इस तरह ही तय सीमा से अधिक स्पीड पर वाहन चलाने के मामले में पहली बार 400 रुपये जुर्माना किया जा सकता है यदि यही गलती दोबारा होती है तो जुर्माने की राशि एक हजार होगी। नाबालिग वाहन चालक द्वारा ‘रफ ड्राईविंग’ करने पर तीन माह की जेल व एक हजार रु पये जुर्माने की सजा है वहीं दूसरी बार इसी अपराध के लिए दो साल की कैद या दो हजार जुर्माने का प्रावधान है या दोनों सजाएं इकट्ठे हो सकतीं हैं। ट्रैफिक पुलिस के कर्मचारियों ने बताया कि बठिंडा में मोटरसाईकलों व ऐक्टिवा पर धूल उठाते फिर रहे नाबालिग वाहन चालकों को नियमों की जरा भी परवाह नहीं है।</p>
<h1 style="text-align:center;">माता पिता के लाडले अन्यों के लिए बन रहे खतरा</h1>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बड़ी बात है कि माता पिता के लाडले अन्यों के लिए खतरा बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस स्टंटबाजी में लड़कियां भी पीछे नहीं जोकि अक्सर बेखौफ ढंग से रैड्ड लाईटें जम्प करती दिखाई देती हैं। देखने में आता है कि बालिग वाहन चालकों के लिए अजीत रोड व सौ फूटी स्वर्ग बने हुए हैं जबकि बच्चे शहर की मुख्य सड़क, माल रोड व कई प्राईवेट स्कूलों समीप कानून का उल्लंघन करते नजर आते हैं। मनाही के बावजूद बुलेट, एक्टिवा व 125 सीसी के मोटरसाईकलों पर बिना हेल्मट, ट्रिपल राइडिंग व तेज रफ़्तार जैसी उल्लंघनाएं करना आम हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रैफिक पुलिस की एक महिला सिपाही ने बताया कि इस तरह के लड़कों में अधिकतर अंडरएज विद्यार्थी शामिल हैं, जिनके दिलों में न पुलिस व न ही चोट लगने का का डर है। उन्होंने बताया कि उनकी तरफ से जा रही सख्ती भी नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगाम कसने में नाकाम सिद्ध हो रही है। उन्होंने बताया कि बिना गियर के 50 सीसी तक के वाहन चलाने के लिए भी माता-पिता की लिखित स्वीकृति जरूरी है परंतु माता-पिता भी इस प्रति लापरवाह हैं इस तरह के कई बच्चों को पुलिस अपने अंदाज में मना करती भी है परन्तु लड़के लड़कियां किसी की बात सुनने को तैयार नहीं है। वास्तव में इस मामले में माता-पिता भी कसूरवार हैं जो अपने बच्चों को छोटी उम्र में मोटरसाईकल खरीदकर देते हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">नहीं बजेंगे बुलेट के पटाखे</h1>
<p style="text-align:justify;">ट्रैफिक पुलिस ने पटाखे बजाने वाले बुलेट सवारों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। बठिंडा में ऐसे बुलेट सवारों को जुर्माने व सजा का सामना करना पड़ सकता है। पुलिस का मानना है कि इससे दहशत का महौल बनता है पता चला है कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के नियमों मुताबिक बुलेट के पटाखे बजाने वाले को 6साल तक की कैद हो सकती है व इस कानून के अंतर्गत जुर्माने का भी प्रबंध है। बुलेट पर पटाखे चलाने साथ कई हादसे भी घटित हो चुके हैं व इन हादसों की चपेट में अधिकतर महिलाएं व बुजुर्ग आए हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">नाबालिग वाहन चालकों पर नकेल कसने का निर्णय</h1>
<p style="text-align:justify;">एसपी (ट्रैफिक) गुरमीत सिंह ने कहा कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाकर हादसों का कारण बनना बड़ा गंभीर मसला है इसलिए उन्होंन्े अन -अधिकारित वाहन चालकों को नकेल कसने का निर्णय किया है उन्होंने कहा कि जिन माता-पिता के नाम वाहन रजिस्टर्ड होगा उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस ने बुलेट पर पटाखे बजाने वालों के खिलाफ भी सख्ती की रणनीति तैयार की है, जिसमें धारा 207 के अंतर्गत मोटरसाईकल बंद करने के साथ-साथ ऐसे उपकरण लाने व बेचने वाले मेकैनिकों व दुकानदारों विरुद्ध कार्रवाई भी शामिल है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/small-children-becoming-a-threat-to-the-people/article-4857</link>
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                <pubDate>Mon, 16 Jul 2018 03:53:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुनील दत्त बर्थडे : एक बस कंडक्टर से एक्टर बनने तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। 6 जून को सुनहरे दौर के लोकप्रिय अभिनेता सुनील दत्त का बर्थडे होता है। उनकी एक फ़िल्म ‘जानी दुश्मन’ में उनका एक प्रसिद्ध संवाद है- ‘मर्द तैयारी नहीं करते…हमेशा तैयार रहते हैं।’ उनका यह संवाद उन पर पूरी तरह से फिट बैठता है। एक बस कंडक्टर से एक्टर और फिर सामाजिक कार्यकर्ता से भारत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/sunil-dutt-birthday-a-journey-from-a-bus-conductor-to-becoming-an-actor/article-3973"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/sunil.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)। </strong>6 जून को सुनहरे दौर के लोकप्रिय अभिनेता सुनील दत्त का बर्थडे होता है। उनकी एक फ़िल्म ‘जानी दुश्मन’ में उनका एक प्रसिद्ध संवाद है- ‘मर्द तैयारी नहीं करते…हमेशा तैयार रहते हैं।’ उनका यह संवाद उन पर पूरी तरह से फिट बैठता है। एक बस कंडक्टर से एक्टर और फिर सामाजिक कार्यकर्ता से भारत सरकार में मंत्री तक का सफ़र तय करने वाले सुनील दत्त की जीवन यात्रा एक मिसाल है। आइये उनकी जयंती पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें!</p>
<p style="text-align:justify;">सुनील दत्‍त का जन्‍म 6 जून 1929 को अविभाजित भारत के झेलम जिले में बसे खुर्द नामक गांव में हुआ था। यह क्षेत्र अब पाकिस्तान में है। बहरहाल, उनका मूल नाम बलराज दत्‍त था। उन्होंने भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय बहुत ही करीब से हिंदू-मुस्लिम दंगों को देखा है और उसके भुक्तभोगी भी रहे हैं। बंटवारे के बाद उनका परिवार पहले यमुनानगर, पंजाब (अब हरियाणा) और बाद में लखनऊ आ बसा। सुनील दत्त का बचपन काफी संघर्ष भरा रहा है क्योंकि जब वो महज 5 साल के थे तभी उनके पिता दीवान रघुनाथ दत्त का निधन हो गया था। उनकी मां कुलवंती देवी ने उनकी परवरिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ के बाद सुनील दत्त उच्च शिक्षा के लिए मुंबई आ गए। मुंबई में उन्होंने जय हिंद कॉलेज में दाखिला लिया। चूंकि उनकी माली हालत अच्छी नहीं थी तो उन्होंने मुंबई बेस्ट की बसों में कंडक्टर की नौकरी कर ली। वहां से शुरू हुआ उनका सफ़र जिस मुकाम तक पहुंचा वो काफी प्रेरक है। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुनील दत्त की नौकरी एक एड एजेंसी में लग गयी जहां से उन्हें रेडियो सीलोन में रेडियो जॉकी बनने का मौका मिल गया। उद्घोषक के रूप में काम करते हुए वह काफी मशहूर भी हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सफल उद्घोषक के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद सुनील कुछ नया करना चाहते थे और कहते हैं न कि किस्मत बहादुरों का साथ देती है तो उन्हें भी जल्द ही 1955 में बनी फ़िल्म ‘रेलवे स्‍टेशन’ में ब्रेक मिल गया। यह उनकी पहली फ़िल्म थी। जिसके दो साल बाद साल 1957 में आई ‘मदर इंडिया’ ने उन्हें बालीवुड का फ़िल्म स्टार बना दिया। अपने 40 साल लंबे कैरियर में दत्त ने 20 से ज्यादा फ़िल्मों में विलेन का किरदार निभाया है। उस रोल में भी वो खूब जंचते थे। डकैतों के जीवन पर बनी उनकी सबसे बेहतरीन फ़िल्म ‘मुझे जीने दो’ ने उन्हें साल 1964 का फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी दिलवाया। साल 1966 में उन्हें फिर से ‘खानदान’ फ़िल्म के लिये फ़िल्मफ़ेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार प्राप्त हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">1950 के आखिरी वर्षों से लेकर 1960 के दशक में उन्होंने हिन्दी फ़िल्म जगत को कई बेहतरीन फ़िल्में दीं जिनमें साधना (1958), सुजाता (1959), मुझे जीने दो (1963), गुमराह (1963), वक़्त (1965), खानदान (1965), पड़ोसन (1967) और हमराज़ (1967) आदि प्रमुख रूप से उल्लेखनीय हैं। सुनील दत्त की शादी से जुड़ा एक रोचक किस्‍सा है। साल 1957 में महबूब ख़ान की फ़िल्म मदर इण्डिया का शूटिंग चल रही थी। तभी वहां अचानक आग लग गई। नरगिस इस आग में घिर गईं, तभी सुनील दत्त ने अपनी जान की परवाह न करते हुए नरगिस को बचा लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद इलाज के दौरान सुनील ने पूरे मन से नरगिस का ख्याल रखा और दोनों एक दूसरे के प्रति खींचे चले गए और एक दिन सुनील दत्त ने कार चलाते हुए नरगिस को शादी के लिए प्रपोज़ कर दिया। नरगिस ने भी मुस्कुराते हुए सुनील दत्त का प्रपोज़ल स्वीकार कर लिया! एक सफल अभिनेता और निर्देशक की पारी खेलने के बाद सुनील दत्त ने 1984 में राजनीति ज्‍वॉइन कर ली। वह कांग्रेस पार्टी के टिकट पर मुंबई उत्‍तर पश्‍चिम लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बने। वे यहां से लगातार पांच बार चुने गए। उनकी मृत्यु के बाद उनकी बेटी प्रिया दत्त यहां की सांसद बनीं।</p>
<p style="text-align:justify;">जब उनकी मौत हुई तब वो भारत सरकार में खेल व युवा मामले का मंत्रालय संभाल रहे थे।सामाजिक प्रतिबद्धताओं के लिए भी सुनील दत्त हमेशा आगे रहे। 1987 में पंजाब में खालिस्तान मूवमेंट के तहत ज़बरदस्त हिंसक आंदोलन चल रहा था। तब सुनील दत्त ने महात्मा गांधी के तर्ज़ पर पदयात्रा करने की सोची और पंजाब में शांति बहाल हो इस उद्देश्य से मुंबई से अमृतसर ( दो हज़ार किलोमीटर) के लिए महाशांति पदयात्रा पर निकल पड़े। उनके साथ उनकी बेटी प्रिया दत्त समेत 80 और लोग भी थे।</p>
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                <pubDate>Wed, 06 Jun 2018 07:41:42 +0530</pubDate>
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