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                <title>खजुराहो में क्षेत्रवाद और राष्ट्रवाद के सहारे दोनों प्रमुख दल</title>
                                    <description><![CDATA[खजुराहो (एजेंसी) बुंदेलखंड क्षेत्र के मध्यप्रदेश के हिस्से की सबसे अहम और महत्वपूर्ण लोकसभा सीट खजुराहो में हर बार की तरह इस बार भी जनता से जुड़े अहम मुद्दों के स्थान पर कांग्रेस के लिए क्षेत्रवाद और भारतीय जनता पार्टी के लिए राष्ट्रवाद ही अहम मुद्दा बन कर उभर रहा है। विकास की असीमित संभावनाओं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/in-khajuraho-both-the-main-parties-supported-by-nationalism-and-nationalism/article-8870"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-05/congress-bjp_0.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>खजुराहो (एजेंसी)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">बुंदेलखंड क्षेत्र के मध्यप्रदेश के हिस्से की सबसे अहम और महत्वपूर्ण लोकसभा सीट खजुराहो में हर बार की तरह इस बार भी जनता से जुड़े अहम मुद्दों के स्थान पर कांग्रेस के लिए क्षेत्रवाद और भारतीय जनता पार्टी के लिए राष्ट्रवाद ही अहम मुद्दा बन कर उभर रहा है। विकास की असीमित संभावनाओं से भरे इस संसदीय क्षेत्र की विसंगति ही है कि यहां हर बार की तरह इस बार भी विकास के मुद्दे पर चुनाव नहीं हो रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जातिवाद यहां अब भी एक बड़ा मुद्दा बन कर उभरा है। यही वजह है कि विकास की विपुल संभावनाओं से भरा यह क्षेत्र आज भी पिछड़ा और मूलभूत बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, बेरोजगारी, पलायन, कुपोषण, पेयजल संकट और अवैध खनन बड़े मुद्दे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार भी यहां सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है। कांग्रेस ने यहां से छतरपुर के प्रभावी परिवार की बहू कविता सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है। उनके पति विक्रम सिंह नातीराजा राजनगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक हैं। इनके मुकाबले में भाजपा ने वी डी शर्मा को आजमाया है। श्री शर्मा के बाहरी होने काे लेकर कांग्रेस जनता के बीच जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस प्रत्याशी सिंह को जहां एक ओर भरोसा है कि उन्हें स्थानीय होने के नाते क्षेत्र के मतदाताओं का भरपूर समर्थन मिलेगा, वहीं भाजपा प्रत्याशी का मानना है कि लोग नरेन्द्र मोदी को एक बार फिर प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। ऐसे में कांग्रेस क्षेत्रवाद तो वहीं भाजपा राष्ट्रवाद के सहारे चुनावी जंग जीतने के प्रति आशान्वित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संसदीय क्षेत्र में छह मई को मतदान होना है। अब तक दोनों ही दलों के अध्यक्ष अमित शाह और राहुल गांधी यहां अपने-अपने दलों के प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी प्रचार में उतर चुके हैं। इसके अलावा कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री कमलनाथ और भाजपा की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रचार की कमान संभाली हुई है। कांग्रेस का प्रचार-प्रसार जहां एक ओर न्याय योजना के सहारे है, वहीं भाजपा नेता श्री मोदी को एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनाकर देश को मजबूत बनाने की अपील करने में जुटे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खजुराहो संसदीय क्षेत्र के अधीन आने वाली 6 विधानसभा सीटों पर भाजपा व 2 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। वर्ष 2004 से इस संसदीय सीट पर लगातार भाजपा का कब्जा बना हुआ है। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा के नागेन्द्र सिंह ने कांग्रेस के राजा पटेरिया को करीब ढाई लाख मतों के अन्तर से पराजित किया था। इस बार यहां से कुल 17 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। संसदीय क्षेत्र में कुल 18 लाख 41 हजार 92 मतदाता हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 May 2019 09:06:16 +0530</pubDate>
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                <title>क्षेत्रवाद की बू</title>
                                    <description><![CDATA[शिलांग में दो समुदायों के बीच हिंसा की घटनाओं ने क्षेत्रवाद के करूप चेहरे को नंगा कर दिया है। चिंता वाली बात है कि आजादी से पहले पौनी सदी बाद भी क्षेत्र व जाति व भाषा के आधार पर भेदभाव और बेगानगी का अहसास खत्म होने का नाम नहीें ले रहा। शिलांग के मूल निवासियों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/regionalism/article-3990"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/edutorial.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">शिलांग में दो समुदायों के बीच हिंसा की घटनाओं ने क्षेत्रवाद के करूप चेहरे को नंगा कर दिया है। चिंता वाली बात है कि आजादी से पहले पौनी सदी बाद भी क्षेत्र व जाति व भाषा के आधार पर भेदभाव और बेगानगी का अहसास खत्म होने का नाम नहीें ले रहा। शिलांग के मूल निवासियों और पंजाबियों के बीच टकराव की सख्ती इस हद तक पहुंच गई कि वहां केंद्रीय बल तैनात करने पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">सख्त सुरक्षा के बावजूद शरारती अनसरों ने सुरक्षा बलों पर बम फेंका। ये घटनाएं मानवीय मन में इस अहसास को पक्का करती हैं कि वो किसी अन्य राज्य या क्षेत्र में जाकर जितनी मर्जी तरक्की कर लें और वहां की आबादी में घुल मिल जाए पर बेगाने होने की कसक से पीछा नहीं छुड़ा सकता। शिलांग के विकास में पंजाबी समुदाय ने अहम रोल अदा करके ना सिर्फ वहां की आर्थिकता को मजबूत किया बल्कि स्थानीय लोगों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मेलजोल भी बढ़ाया है। पंजाबी अपने दिलो दिमाग को मेघालय के साथ जोड़ चुके थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पर किसी एक घटना ने क्षेत्रवाद की आग को भड़का दिया। चाहे राज्य सरकार दावा करती है कि विवाद का कारण क्षेत्रवाद नहीं, पर भड़की भीड़ के तेवरों से क्षेत्रवाद का चेहरा स्पष्ट नजर आता है। ऐसी घटनाएं एक देश के संकल्प में बाधा बनती हैं। पंजाबी भाईचारे के हितों की रक्षा की पहली जिम्मेदारी मेघालय सरकार की है। केंद्र सरकार को ऐसे मामलों में तेज नजर रखकर हालातों को सामान्य बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। दरअसल शुरूआती दौर में ही अगर कानूनों को सख्ती के साथ लागू किया जाता तो शिलांग में ऐसे हालात ना बनते।</p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्रवाद को पहले महाराष्टÑ में हवा मिलती रही है। सरकार की तरफ से वोट बैंक नीति के कारण नफरत को खत्म करने के लिए कोई ठोस प्रयास किये गए। ये बात समझने की जरूरत है कि यदि कोई अपने देश को प्यार करता है तो वो देश वासियों से नफरत किस आधार पर करता है? एक देश के लोगों को घुलमिल कर रहकर देश को आगे बढ़ाने की जरूरत है। देश एक गुलदस्ता है और विभिन्नता इसकी विशेषता है। सह असतित्व ना सिर्फ पूर्वी बल्कि पश्चिमी जीवन शैली का भी मुख्य अंग है और ये बात पश्चिम की ताकत भी बनी है। बाहर के देशों के रक्षा विभाग के मंत्री भी भारतीय मूल के नेता बने हैं। सद्भावना के साथ ही देश तरक्की कर सकता है। क्षेत्रवाद के लिए भारतीय संस्कृति में कोई जगह नहीं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jun 2018 13:56:21 +0530</pubDate>
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