<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/nefarious/tag-6549" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>nefarious - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/6549/rss</link>
                <description>nefarious RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पाक के नापाक रहनुमा</title>
                                    <description><![CDATA[भारत को विभाजित कर एक अलग इस्लामी राष्ट्र का गठन करने वाले कुछ मुस्लिम नेताओं ने जब इस राष्ट्र का नामकरण पाकिस्तान करने का निर्णय लिया होगा उस समय हो सकता है उन्होंने इस बात की कल्पना की हो कि भविष्य में यह देश अर्थात पाकिस्तान दुनिया का सबसे शक्तिशाली इस्लामी राष्ट्र बनेग। इन्होंने यह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/nefarious/article-10053"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-07/nefarious.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत को विभाजित कर एक अलग इस्लामी राष्ट्र का गठन करने वाले कुछ मुस्लिम नेताओं ने जब इस राष्ट्र का नामकरण पाकिस्तान करने का निर्णय लिया होगा उस समय हो सकता है उन्होंने इस बात की कल्पना की हो कि भविष्य में यह देश अर्थात पाकिस्तान दुनिया का सबसे शक्तिशाली इस्लामी राष्ट्र बनेग। इन्होंने यह भी सोचा होगा कि पाकिस्तान भविष्य में मुस्लिम राष्ट्रों का नेतृत्व करेगा। संयुक्त भारत में रहने वाले मुसलमानों को वरगलाने के लिए इन चंद नाम निहाद मुस्लिम नेताओं ने इस प्रस्तावित देश का नाम पाकिस्तान रखकर यह जताना चाहा था कि यह एक पाक अर्थात पवित्र आस्तां अर्थात पवित्र लोगों का घर बनेगा। परन्तु जब इतिहास से मुझे यह जानकारी मिली कि पाकिस्तान के गठन के सबसे बड़े किरदार और मुख्य संस्थापक यानी मोहम्मद अली जिन्नाह उस समय के एक ऐसे इस्माइली शिया मुसलमान थे जो शराब पिए बिना रात का भोजन नहीं करते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पाक के सबसे लोकप्रिय नेता इस्लामी नजरिये से स्वयं में ही न केवल नापाक थे बल्कि गैर इस्लामी भी थे। क्या अजब इत्तेफाक है कि आज तक उन्हीं जिन्नाह को तथाकथित इस्लामिक देश, पाकिस्तान के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। वे मुस्लिम लीग के भी सर्वोच्च नेता थे। पाकिस्तान के गठन के बाद वे वहां के पहले गवर्नर जनरल बने। पाकिस्तान में उन्हें कायदे-आजम यानी महान नेता और बाबा-ए-कौम अर्थात राष्ट्र पिता के लकब से नवाजा जाता है। उनके जन्म दिन पर पाकिस्तान में अवकाश भी रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल गैर इस्लामी चाल चलन रखने वाले रहनुमाओं की कोशिशों के नतीजे में बने देश का हश्र भी आज वैसा ही होता दिखाई दे रहा है जैसी कि इस देश की बुनियाद रक्खी गई है। अपने अस्तित्व में आने के मात्र 24 वर्षों बाद ही पाकिस्तान के इस्लामी राष्ट्र होने के दावे की हवा पूरी तरह उस समय निकल गई जबकि पूर्वी पाकिस्तान ने इस्लाम के नाम पर इकठ्ठा रहने के बजाए क्षेत्र व भाषा के नाम पर अलग रहना ज्यादा लाभदायक और जरूरी समझा। आखिर जब इस्लामी राष्ट्र का सपना दिखा कर भारत को विभाजित किया गया था तो उस स्थिति को क्योंकर बनाए नहीं रखा गया? 1971 से पहले भी पाकिस्तान के स्थानीय मुसलमानों द्वारा भारत से 1947 में व उसके बाद पहुँचने वाले मुसलमानों के साथ काफी जुल्म, ज्यादती व अन्याय करने की खबरें आती रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें आज तक मुहाजिर कहा जाता है। इसके अतिरिक्त पाकिस्तान को जनरल जियाउलहक के रूप में एक ऐसा कट्टर शासक मिला जिसने पाकिस्तान को कट्टरपंथ के मार्ग पर आगे बढ़ाया। जिया के समय ही पाकिस्तान में ईश निंदा कानून बना जिसका आज तक दुरूपयोग होता आ रहा है। आज पाकिस्तान अलग अलग विचारधारा के कट्टरपंथियों का गढ़ बन चुका है। यह तथाकथित इस्लामी राष्ट्र पाकिस्तान ही है जहाँ जुलाई 2007 में इस्लामाबाद में इतना बड़ा लाल मस्जिद हादसा हुआ जिसकी पूरी दुनिया में दूसरी कोई मिसाल नहीं मिलती। पिछले दिनों पाकिस्तान के बारे में सिलसिलेवार तरीके से छपी खबरों ने पूरी दुनिया को चौंका कर रख दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">खबर यह थी कि इस पाक और इस्लामी देश के एक पूर्व राष्ट्रपति व दो पूर्व प्रधानमंत्री रिश्वत, धनशोधन, पद के दुरूपयोग तथा भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं जबकि दो अन्य पूर्व प्रधानमंत्री ऐसे ही आरोपों में मुकददमों का सामना कर रहे हैं। इस समय जहाँ आसिफ जरदारी के रूप में एक पूर्व राष्ट्रपति पाकिस्तान की जेल की शोभाबढ़ा रहे हैं वहीं नवाज शरीफ और शाहिद खाकान अब्बासी जैसे पाक के दो पूर्व प्रधानमंत्री भी जेलों की रौनक में इजाफा कर रहे हैं। सभी पर भ्रष्टाचार व आर्थिक अनियमिताओं तथा इसके लिए पद का दुरूपयोग करने का इलजाम है।</p>
<p style="text-align:justify;">आश्चर्य तो यह है की बदनाम व्यक्ति होने के बावजूद उनकी पार्टी ने बेनजीर की हत्या के बाद उन्हें कैसे राष्ट्रपति बना दिया। इन तीन नापाक रहनुमाओं के अलावा दो और पूर्व पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और राजा परवेज अशरफ भी ऐसे ही मामलों का अदालती सामना कर रहे हैं। यदि अदालत ने इन्हें भी नापाक साबित कर दिया तो पाकिस्तान नापाक रहनुमाओं के सजा पाने व जेल जाने के अपने ही मौजूदा 3 के रिकार्ड को तोड़ कर 5 नापाक रहनुमाओं तक पहुंचा देगा। पिछले दिनों पाकिस्तान पर आए भयंकर आर्थिक संकट पर प्रधानमंत्री इमरान खान की मार्मिक अपील ने यह सोचने के लिए मजबूर किया कि आखिर पड़ोसी देश की दुर्दशा की वजह क्या है। तो पीछे मुड़कर देखने पर यही नजर आया कि जिस तरह इस की बुनियाद ही नापाक थी उसी तरह आगे चलकर भी यहाँ के रहनुमाओं ने भी नपाकीजगी में और इजाफा करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। पाकिस्तान की रुसवाई का सबसे बड़ा कारण ही यही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>तनवीर जाफरी</em></strong></p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/nefarious/article-10053</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/nefarious/article-10053</guid>
                <pubDate>Tue, 23 Jul 2019 19:42:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2019-07/nefarious.jpg"                         length="47292"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जज्बे से भरेगा नापाक हरकतों का जख्म</title>
                                    <description><![CDATA[कश्मीर में पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या घाटी के अमनपंसद लोगों के लिए बहुत बड़ा धक्का है। हत्या किसने की यह एसआईटी जांच से सामने आएगा लेकिन इतना तय है कि यह घाटी की भलाई के लिए सोचने वालों का कृत्य नहीं हो सकता। बल्कि यह घटना उन लोगों का दिल ठंडा करने के लिए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/murder-of-journalist-shujaat-bukhari-in-kashmir/article-4232"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/jnrlist.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कश्मीर में पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या घाटी के अमनपंसद लोगों के लिए बहुत बड़ा धक्का है। हत्या किसने की यह एसआईटी जांच से सामने आएगा लेकिन इतना तय है कि यह घाटी की भलाई के लिए सोचने वालों का कृत्य नहीं हो सकता। बल्कि यह घटना उन लोगों का दिल ठंडा करने के लिए अंजाम दी गई है जो पाकिस्तान में बैठकर भारत के सीने को चीरने की नापाक तमन्ना रखते हैं। ऐसे लोगों को घाटी में आतंकियों के खिलाफ अभियान पर रोक से बहुत ज्यादा बेचैनी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">शायद उन्हें इस बात का डर था कि अगर सीजफायर बढ़ा तो घाटी के लोगों का दिल जीतने की मुहिम परवान चढ़ सकती है। वे भारतीय तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों को विवश करना चाहते हैँ कि घाटी में सीजफायर की बात सोचना छोड़ दें। खैर, कश्मीर में ऐसी कुर्बानियों का इतिहास है। लेकिन यह स्पष्ट है कि हर बार पाकिस्तान की नापाक मंशा कश्मीर के लोगों ने ही खारिज की है। इसी वजह से वहां चुनी हुई सरकार है। यह तथ्य है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के चलते पिछले कुछ दशकों में घाटी में हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा बल के जवान बड़ी संख्या में शहीद हुए हैं। वर्ष 2017 के दौरान करीब 1900 से ज्यादा जवान हिंसा के चलते घायल हो गए। सुरक्षा बलों ने संयम नहीं छोड़ा। आतंकियों पर कहर जरूर बरसाया गया लेकिन आमजनों के प्रति सुरक्षा बलों का रुख संजीदा रहा है। यह तथ्य है है कि लश्कर, जैश ए मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकी संगठनों ने पाकिस्तान की शह पर घाटी में खूनी खेल जारी रखा लेकन हर बार अमन पसंद लोगों ने अपने जज्बे से खून खराबे वाली मानसिकता को मात दी।</p>
<p style="text-align:justify;">यही वजह है कि आज कश्मीर का नौजवान खेल के मैदान में अपने करतब दिखा रहा है। सिविल सर्विसेज में घाटी के नौनिहाल अपना सिक्का जमा रहे हैं। पढ़ने का जज्बा उनमें दिखता है। वे खून खराबा का समर्थन करने वाले अलगाववादियों से सवाल करते हैँ कि आप अपने बच्चों को विदेशों में, अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाते हो और हमसे जिहादी बनने को कहते हो क्यों? यह सही है कि घाटी के बहुत से युवा बंदूक थामकर गुमराह हुए हैं। कट्टरपंथी वहाबी विचारधारा का भी प्रसार चिंता का विषय है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इससे बड़ा सत्य यह भी है कि घाटी से ही इनके विरोध में लोग खड़े हो रहे हैं। बड़ा समुदाय ऐसा है जो अपने बच्चों की तालीम चाहता है। उसके मन में सपने हैं जिन्हें पूरा करने के लिए वह देश के किसी कोने में जाना चाहता है। सुरक्षा बलों को इसी मुहिम में सहयोग करने की जरूरत है। इनको ही सही मायने में हीलिंग टच की जरूरत है। हर तरह से इनकी मदद होना चाहिए। पाकिस्तान आतंकियों को मोर्टार, राकेट लांचर, ग्रेनेड, विस्फोटक मुहैया कराता रहे हमारी कोशिश होना चाहिए कि हम घाटी के नौजवानों को कलम पकड़ाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके सपनों को पंख लगाने का अवसर दें। घाटी में विकास की धारा का प्रवाह हो। आतंकी गुट बाधा बनते रहेंगे। उनकी ओर से रक्तपात थमेगा हमें यह सोचना भी नहीं चाहिए। लेकिन हमारी कोशिश हो कि निर्दोष लोगों को कैसे बचाया जाए। कैसे घाटी में यह माहौल बने जिसमें अमनपसंद लोग पत्थरबाजों पर भारी पड़ें।</p>
<p style="text-align:justify;">शुजात बुखारी या सेना व सुरक्षा बल के जवानों और आम नागरिकों की शहादत का सबक यही है कि हमें आगे बढ़ना है। हिंसा व आतंक की भाषा समझने वालों का सही ईलाज करते हुए कश्मीर में स्कूल, अस्पताल, सड़कों का जाल बिछाना है। ईद के मुबारक मौके पर हम यह उम्मीद करते हैं कि यह जरूर होगा। पाक की नापाक हरकतों से मिलने वाला जख्म इसी जज्बे से भरेगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/murder-of-journalist-shujaat-bukhari-in-kashmir/article-4232</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/murder-of-journalist-shujaat-bukhari-in-kashmir/article-4232</guid>
                <pubDate>Sun, 17 Jun 2018 08:16:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/jnrlist.jpg"                         length="66926"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रमजान के पाक महीने में पाक की नापाक हरकतें</title>
                                    <description><![CDATA[राजेश माहेश्वरी सरकार ने रमजान माह के दौरान बॉर्डर पर सीज फायर रोकने का फैसला लिया है। दरअसल सरकार ने भटके युवाओं को मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया था, लेकिन सरहद पार से रमजान में भी फायरिंग करने का दुस्साहस नहीं रुक रहा है। लगातार फायरिंग की जा रही है और सेना की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ramjan-month-pakistan-nefarious-activities/article-3991"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/ramjan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>राजेश माहेश्वरी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने रमजान माह के दौरान बॉर्डर पर सीज फायर रोकने का फैसला लिया है। दरअसल सरकार ने भटके युवाओं को मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया था, लेकिन सरहद पार से रमजान में भी फायरिंग करने का दुस्साहस नहीं रुक रहा है। लगातार फायरिंग की जा रही है और सेना की चौकियों पर गोले दागे जा रहे हैं। इसका असर आबादी पर पड़ रहा है। सरकार की नीति से अलगाववादी और आतंकवादी जरूर बेनकाब हो रहे हैं, लेकिन सरकार के फैसले का राजनीतिक तौर पर कोई असर नही दिख रहा है। पाकिस्तान पर जवाबी कार्यवाही न होना दुश्मन को खुली छूट देने जैसा है, क्योंकि इस आदेश से भारतीय सेना के हाथ कार्यवाही के लिए बंध गये हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर में एक ‘अघोषित युद्ध’ जारी है। सीमापार से गोलाबारी, ग्रेनेड गोलीबारी लगातार की जा रही है। हमारे जवान लगातार ‘शहीद’ हो रहे हैं और नागरिक भी जख्मी हो रहे हैं। इस दौरान भारत-पाक के डीजीएमओ स्तर के सेना अधिकारियों के बीच बातचीत भी हुई। पाकिस्तान ने कबूल किया कि वह संघर्ष विराम का सम्मान 2003 के समझौते के मुताबिक करेगा। इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से ऐसी फायरिंग की गई कि अखनूर सेक्टर में बीएसएफ के दो जवान ‘शहीद’ हो गए और 13 नागरिक घायल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">मौत का आखिरी आंकड़ा क्या होगा, उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। एक जवान की तो इसी महीने शादी तय थी। घर में उल्लास का माहौल एकदम मातम में तबदील हो गया। श्रीनगर में भी आतंकी हमला किया गया है। घायलों और मृतकों की गिनती करना छोड़ देना चाहिए। हालांकि कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन सेना के जवानों ने एक आतंकी को मार गिराया। उसके पास से एके रायफल, विस्फोटक आदि बरामद किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खुफिया रपट है कि अब भी करीब 20 आतंकी सीमापार से घुसपैठ की फिराक में हैं। उन्हें जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी माना जा रहा है। इन आतंकी और फौजी हरकतों के पलटवार में भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान की 11 चैकियां तबाह कर दी हैं! कई रेंजर्सं भी ढ़ेर हुए होंगे! यह युद्ध का परिदृश्य नहीं है, तो और क्या है? बेशक युद्ध की विधिवत घोषणा नहीं की गई है, लेकिन दोनों ओर से जो पलटवार जारी हैं, उन्हें क्या नाम देंगे? कश्मीर के भीतर और पाकिस्तान की सरहद के ये मौजूदा हालात संघर्ष विराम के बावजूद हैं। आखिर संघर्ष विराम के हासिल क्या रहे हैं? रमजान के पाक महीने में संघर्ष विराम के मायने क्या रहे?</p>
<p style="text-align:justify;">क्या पाकिस्तान अमन की भाषा और बोली नहीं समझता? यदि रमजान के दौरान संघर्ष विराम के मायने पाकिस्तान, आतंकियों और कश्मीर के पत्थरबाजों के लिए नहीं थे, तो फिर संघर्ष विराम का मकसद क्या था? भारत और जम्मू-कश्मीर सरकारों की संघर्ष विराम के पीछे नीति क्या थी? दोनों सरकारों ने यह ऐलान क्यों नहीं किया कि संघर्ष विराम अमुक पक्षों के लिए नहीं है। संघर्ष विराम के ऐलान के बावजूद पाकिस्तान सैंकड़ों बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है। ऐसे हालात में बातचीत किससे करें-दीवारों से या फौज से!</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान में वजीर-ए-आजम तो फिलहाल कार्यवाहक है। जुलाई में आम चुनाव होने हैं। लगातार हत्याओं के बावजूद जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती एक ही राग अलापती रही हैं कि समाधान बातचीत से ही निकलेगा। जवानों को नहीं मारना चाहिए। संघर्ष विराम का सम्मान करना चाहिए। दरअसल यह भाषा महबूबा पहले भी बोलती रही हैं। क्या वह पाकिस्तान की पैरोकार हैं? ऐसे बयान के बावजूद जैश-ए-मुहम्मद आतंकी संगठन का सरगना मसूद अजहर रमजान के दौरान ही आतंकी हमले व्यापक और तीखे करने की धमकी देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वह संघर्ष विराम को आतंकियों के लिए ‘ईदी’ करार देता है। क्या इन परिस्थितियों में भी बातचीत हो सकती है? जब डीजीएमओ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर के संवाद नाकाम साबित हो चुके हैं, तो अब कौन-सी उम्मीदों के चिराग कायम हैं? बेशक सरकारें मानें या न मानें, कश्मीर के भीतर और अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा के आसपास मौजूदा हालात जंग के ही हैं। संघर्ष विराम को बंद किया जाना चाहिए और भारतीय जवानों को जंग की तरह लड़ाई लड़ने की छूट और अनुमति देनी चाहिए। उन घरों और आंगनों का क्रंदन, चीख-पुकार, विलाप और सब कुछ खोने का एहसास सरकारों को भी करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">कश्मीर के पत्थरबाजों को भी कुचलना बेहद जरूरी है, बेशक वे अपने ही लोग हैं, लेकिन वे पाकपरस्त भी हैं और उसके भाड़े पर सेना-विरोधी और भारत-विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं। यह कहां का न्याय है कि पत्थरबाजों का सामना करने वाले जवानों के खिलाफ तो कानूनी केस दर्ज किए जाते हैं और सीआरपीएफ का वाहन घेर कर पथराव करना मानो पत्थरबाजों का मौलिक अधिकार है! इससे हमारे जवानों के मनोबल पर उल्टा असर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिरकार डायरेक्टर जनरल आॅफ मिलिट्री आॅपरेशन यानी डीजीएमओ स्तर की वार्ता के बाद पाक एलओसी व अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सीजफायर पर सहमत हुआ है। यह फैसला 2003 में हुए शांति समझौते की शर्तों के अनुरूप है। दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच सहमति बनी कि यदि किसी ने भी सीजफायर तोड़ा तो पहले हॉटलाइन पर बातचीत होगी और फिर कोई निर्णय। इससे पहले एलओसी और अंतर्राष्ट्रीय सीमा की स्थिति पर बातचीत हुई। सितंबर 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद यह पहला मौका है जब डीजीएमओ स्तर पर सेना संघर्ष विराम के पालन पर सहमत हुई। इसमें सीमा के निकट दोनों तरफ के नागरिकों की मुश्किलों को गंभीरता से लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अब यह आने वाला वक्त बताएगा कि पाक इस वायदे का कितनी ईमानदारी से पालन करता है। देखना यह भी होगा कि क्या यह कोशिश रमजान के दौरान अपने नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने तक ही सीमित रहती है या आगे भी इसका पालन होता है। विगत के हमारे अनुभव बेहद कटु रहे हैं। गत 23 मई को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार इस साल पाकिस्तान ने एलओसी और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 1088 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया। भारतीय सीमा पर जहां इस दौरान 36 लोग मारे गये वहीं 120 से अधिक घायल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छी बात यह भी है कि जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता अब बातचीत की टेबल पर आने को इच्छुक नजर आ रहे हैं। हुर्रियत ने कहा है कि अगर केंद्र स्पष्ट रोडमैप पेश करता है तो कश्मीर के अलगाववादी नेता बातचीत में शामिल होंगे। वे अपनी शर्तों पर बातचीत करना चाहते हैं। दरअसल, पिछले दिनों गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि यदि हुर्रियत बातचीत के लिये आगे आए तो सरकार बातचीत कर सकती है। लेकिन जिस तरह से पाकिस्तान की नापाक हरकतें जारी हैं ऐसे में संघर्ष विराम का फैसला सहज नहीं है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर का इस संदर्भ में बयान फिजूल नहीं जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ अंतराल के बाद कश्मीर में अमरनाथ यात्रा शुरू होने वाली है। वह हिंदुओं की धार्मिक यात्रा है। आतंकी उसे व्यापक स्तर पर निशाना बना सकते हैं। लिहाजा गंभीरता से विश्लेषण किया जाए, तो संघर्ष विराम से हमें कुछ भी हासिल नहीं हुआ। आतंकी, अलगाववादी और पत्थरबाज जरूर लामबंद हुए होंगे। कश्मीर में शांति और स्थिरता तब तक संभव नहीं है, जब तक आतंकवाद का सफाया नहीं किया जाता। संघर्ष एक तरफा न बने इस लिए भारत को सोचना होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ramjan-month-pakistan-nefarious-activities/article-3991</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ramjan-month-pakistan-nefarious-activities/article-3991</guid>
                <pubDate>Wed, 06 Jun 2018 14:01:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/ramjan.jpg"                         length="30114"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        