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                <title>दंगों पर न हो राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[आखिर 34 वर्ष के बाद 1984 के दंगा पीड़ितों को न्याय मिल गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने दंगों के लिए दोषी सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा सुनाई है। दंगा इंसानियत के नाम पर कलंक है। पुलिस प्रबंधों की खामियां, सांप्रदायिकता व कई अन्य कारणों के चलते पीड़ितों को देरी से न्याय मिला, फिर भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/politics-on-the-riots/article-7028"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/riots.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आखिर 34 वर्ष के बाद 1984 के दंगा पीड़ितों को न्याय मिल गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने दंगों के लिए दोषी सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा सुनाई है। दंगा इंसानियत के नाम पर कलंक है। पुलिस प्रबंधों की खामियां, सांप्रदायिकता व कई अन्य कारणों के चलते पीड़ितों को देरी से न्याय मिला, फिर भी इस फैसले से पीड़ितों के घावों पर मरहम लगेगी। दूसरी तरफ इस फैसले का जितनी तेजी से राजनीतिकरण हुआ है वह हमारे नेताओं की सत्ता स्वार्थ की तरफ संकेत करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अकाली-भाजपा इस मामले में कांग्रेस पर हमलावर है। हालांकि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। दंगों को लेकर फैसले से कोई राजनैतिक लाभ लेने की बजाय इसे इंसानियत के खिलाफ बड़े गुनाह के रूप में देखने की आवश्यकता है। अदालत ने फैसले में यह बात कही है कि सज्जन कुमार राजनैतिक संरक्षण होने के कारण बचता आया है। सजा दिलवाने के लिए मौजूदा प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई का माहौल बनाया जाए। इस जिम्मेदारी को सांप्रदायिक रंग देने वालों से बचाने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दंगा करने वालों का कोई धर्म या पार्टी नहीं होनी चाहिए लेकिन जब कोई पार्टी दंगों के मुद्दे पर अपनी, राजनैतिक रोटियां सेंकने लग जाती है तब यह अपने आप में एक ओर गुनाह बन जाता है। आवश्यकता इस बात की है कि धर्म आधारित दंगों के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाए, जिसका उद्देश्य सामाजिक व सांस्कृतिक ही हो। यह जिम्मेदारी पार्टियों की बनती है कि ऐसे नेताओं को पार्टी से निकाला जाए, जो समाज के लिए खतरा बनते हैं जहां तक देश में आए दिन हो रहे दंगों की बात है अभी तक शासन-प्रशासन व पुलिस अदालत के कटघरे में खड़ा है। दंगे होते हैं व दंगा पीड़ितों के साथ हमदर्दी कम और दंगों से राजनैतिक लाभ लेने के प्रयास ज्यादा किए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेशों की तर्ज पर न्याय व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए ताकि अपराधी भले ही कितना ही रूसूख वाला क्यों न हो कानून के सामने उसके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। सज्जन कुमार वाले फैसले से यह नसीहत लेने की आवश्यकता है। अत्याचार के हजारों मामलों के दोषियों को भी बिना किसी देरी के सख्त सजा मिले लेकिन यह बात नेताओं को अभी हजम नहीं हो रही, वह तो केवल वही बात करेंगे जिससे उन्हें चुनावों में लाभ हो, यही बात संवेदनहीन हो रही व्यवस्था का कुरूप चेहरा है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Dec 2018 08:38:54 +0530</pubDate>
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                <title>दो महीने बाद नाक में ड्रिप लगाकर घर से बाहर निकले पर्रिकर, दो पुलों का निरीक्षण किया</title>
                                    <description><![CDATA[मनोहर पर्रिकर ने मंडोवी नदी और जुआरी नदी बन रहे पुल का निरीक्षण किया पणजी । पैंक्रियाज की बीमारी से जूझ रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर नाक में ड्रिप लगाकर दो पुलों (Two Months Later Inspected The Parrikar) का निरीक्षण करने निकले। रविवार को उन्होंने मंडोवी नदी पर बन रहे एक पुल का निरीक्षण किया। बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/two-months-later-inspected-the-parrikar/article-7008"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/two-months-later-inspected-the-parrikar.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">मनोहर पर्रिकर ने मंडोवी नदी और जुआरी नदी बन रहे पुल का निरीक्षण किया</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>पणजी । </strong>पैंक्रियाज की बीमारी से जूझ रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर नाक में ड्रिप लगाकर दो पुलों (Two Months Later Inspected The Parrikar) का निरीक्षण करने निकले। रविवार को उन्होंने मंडोवी नदी पर बन रहे एक पुल का निरीक्षण किया। बाद में उन्होंने अगासैम गांव के पास जुआरी नदी पर बन रहे पुल का भी जायजा किया। पर्रिकर अपनी कार से उतरे और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और ठेका पाने वाली कंपनी के अधिकारियों के साथ काम की प्रगति पर चर्चा की। इस दौरान पर्रिकर काफी सक्रिय दिख रहे थे। दिल्ली स्थित एम्स से छुट्‌टी मिलने के करीब दो माह बाद वह पहली बार सार्वजनिक तौर पर बाहर दिखे हैं। 14 अक्टूबर को गोवा लौटने के बाद से पर्रिकर घर पर आराम कर रहे थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पर्रिकर को पैंक्रियाज से जुड़ी बीमारी है, जिसका पिछले एक साल से इलाज चल रहा</h2>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, सीएम पर्रिकर पोरवोरिम से मर्सेस गए और पुल का निरीक्षण (Two Months Later Inspected The Parrikar) किया। यह मंडोवी नदी पर बनने वाला तीसरा पुल है। इस पुल का कार्य अगले साल तक पूरा होने की उम्मीद है, यह पणजी को शेष गोवा से जोड़ेगा। एक और तस्वीर में पर्रिकर ब्रिज के ऊपर से नीचे की ट्रैफिक का जायजा लेते दिख रहे हैं।</p>
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                <pubDate>Mon, 17 Dec 2018 13:09:00 +0530</pubDate>
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                <title>कोर्ट में बच्ची ने कहा, मम्मी घर चलो, साथ ही रहेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[बच्ची की कस्टडी को लेकर हुई सुनवाई भोपाल (एजेंसी)। कुटुम्ब न्यायालय, दोपहर के 1.45 बजे हैं। 7 साल की मासूम, उसके माता-पिता और पक्षकारों से भरा कोर्ट रूम। डायस पर जज भावना साधौ। मामला था, बच्ची की कस्टडी का। अदालत को तय करना था कि वो मां के पास रहेगी या पिता के पास। दरअसल, अब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/in-court-the-girl-said-mummy-lets-go-home-we-will-stay-together/article-6843"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/court.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">बच्ची की कस्टडी को लेकर हुई सुनवाई</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भोपाल (एजेंसी)।</strong> कुटुम्ब न्यायालय, दोपहर के 1.45 बजे हैं। 7 साल की मासूम, उसके माता-पिता और पक्षकारों से भरा कोर्ट रूम। डायस पर जज भावना साधौ। मामला था, बच्ची की कस्टडी का। अदालत को तय करना था कि वो मां के पास रहेगी या पिता के पास। दरअसल, अब तक मासूम अपने पिता के साथ रहती थी और मां भोपाल में अलग रहती हैं।सुनवाई शुरू हुई। जज भावना साधौ ने बच्ची से पूछा कि तुम किसके साथ रहना चाहती हो? बच्ची ने कहा- पापा के पास रहती हूं। इसी दाैरान बच्ची की नजर कोर्ट में खड़ी अपनी मम्मी पर पड़ी तो उसने कहा- मम्मी, आप हमारे साथ घर चलो, हम साथ-साथ रहेंगे। सब ठीक हो जाएगा। बच्ची की ये बातें सुनकर मां की आंखों में आंसू आ गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कोर्ट रूम में इस दौरान सभी भावुक हो गए</h3>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट रूम में इस दौरान सभी भावुक हो गए। जज भावना साधौ ने बच्ची के सिर पर हाथ फेरा और उसे अपनी मम्मी के पास जाने को कहा। बच्ची डॉयस से नीचे आई और अपनी मां से लिपट गई। यह देख अन्य पक्षकारों की आंखों में आंसू आ गए। इसके बाद जज ने बच्ची के माता- पिता को समझाया। उन्हेंं बच्ची का वास्ता देकर मनमुटाव खत्म कर साथ रहने की सलाह दी। इस बीच पति-पत्नी में थोड़ी बहुत तकरार हुई लेकिन आखिरकार दोनों साथ रहने के लिए राजी हो गए।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">भोपाल में रहने वाली सोनाली (परिवर्तित नाम) की शादी सुरेश (परिवर्तित नाम) से 10 साल पहले हुई थी।</li>
<li style="text-align:justify;">दो साल बाद बेटी का जन्म हुआ। सोनाली का आरोप था कि ससुराल वाले उसे बेवजह परेशान करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ससुराल वालों ने कुछ कागजों पर साइन करवाकर उसे घर से निकाल दिया था।</li>
<li style="text-align:justify;">ससुराल वालों ने बेटी को अपने पास ही रख लिया।</li>
<li style="text-align:justify;">सोनाली ने अपनी बेटी से कई बार मिलने की कोशिश की लेकिन पति और ससुराल वालों ने उससे मिलने नहीं दिया।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके बाद सोनाली ने राजधानी की कोर्ट में पति के खिलाफ भरण पोषण के लिए एक दावा लगाया था।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">बेटी की कस्टडी को लेकर इसी साल मामला किया था पेश</h3>
<p style="text-align:justify;">सोनाली ने इसी साल कुटुम्ब न्यायालय में बेटी को अपने साथ रखने के लिए धारा 12 संरक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम के तहत मामला पेश किया था। अदालत में पेश मामले में सोनाली ने अपने पति पर आरोप लगाते हुए गुहार लगाई कि बच्ची का ध्यान रखने वाला कोई नहीं है। इसलिए बच्ची की सही देखभाल के लिए उसे उसकी कस्टडी दी जाए। लेकिन बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान बच्ची के भावुक शब्दों और जज की समझाइश से एक टूटा हुआ घर फिर से बस गया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Dec 2018 10:15:36 +0530</pubDate>
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                <title>जय जवान, किसान परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[दिवंगत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्रीय ने ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा देकर दोनों को देश के स्तंभ कहा था। उनका संदेश स्पष्ट था कि किसान देश का पेट भरता है और सैनिक दुश्मनों को सीमा की तरफ झांकने नहीं देता। सियाचीन में बर्फ की पहाड़ियों पर खड़े होकर ड्यूटी दे रहे सैनिकों का हौसला काबिल-ए-तारीफ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/jai-jawan-the-farmer-disturbed/article-6560"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/kjk-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दिवंगत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्रीय ने ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा देकर दोनों को देश के स्तंभ कहा था। उनका संदेश स्पष्ट था कि किसान देश का पेट भरता है और सैनिक दुश्मनों को सीमा की तरफ झांकने नहीं देता। सियाचीन में बर्फ की पहाड़ियों पर खड़े होकर ड्यूटी दे रहे सैनिकों का हौसला काबिल-ए-तारीफ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जवानों के मनोबल को बढ़ाने के लिए पहले सियाचीन व अब हरशिल क्षेत्र (चीन सीमा) पर जाकर सैनिकों के साथ दीपावली मनाई। आतंकवादियों से लोहा ले रहे सैनिकों के लिए इससे बड़ी कोई बात नहीं हो सकती कि प्रधानमंत्री उनके पास पहुंचे हैं, लेकिन देश का दूसरा स्तंभ किसान बुरी तरह से सरकार की अनेदखी से पीड़ित है,जिनकी दीपावली मंडियों में बेआरामी, अनिद्रा व खरीद की इंतजार की भेंट चढ़ गई। किसानों की समस्याएं सीमावर्ती समस्याओं से कम अहम नहीं। सैनिकों के साथ हमारा भावनात्मक रिश्ता है जो परिवारों को छोड़कर देश की सुरक्षा के लिए दिन-रात ड्यूटी दे रहे हैं। प्रधानमंत्री इस भावनात्मकता माहौल में अपनी लोकप्रियता हासिल करने का मौका नहीं गंवाते।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर किसानों की भी सुध लेनी चाहिए, जिन्होंने अनाज के ढेर लगा दिए हैं। मंडियों में अनाज रखने के लिए जगह नहीं मिल रही लेकिन किसान का दर्द यह है कि वह सरकारी नियमों के चक्करव्यू में पिसता जा रहा है। सरकारी आदेशों के अनुसार धान की फसल ठंडे मौसम में पक रही है और सरकार ही ठंड में पके हुए धान को अधिक नमी वाला कहकर खरीदने से इंकार कर रही है। भू-जल का संकट, वातावरण को पराली के धुएं से बचाने का संकट सब कुछ किसान के सिर मढ़ा जा रहा है। क्या प्रधानमंत्री किसानों की परेशानी को समझकर मंडियों में आएंगे। मंडियों में जाना सीमा पर पहुंचने की अपेक्षा कहीं ज्यादा आसान है। किसान धरने देकर, ज्ञापन देकर सरकार को अपना दुख सुना चुके हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह प्रधानमंत्री को धान की नमी की शर्त में बदलाव करने के लिए पत्र भी लिख चुके हैं लेकिन केंद्र ने नर्मीका कोई संकेत ही नहीं दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मंडियां तो लड़ाई, झगड़ों व धरनों का गढ़ बन गई हैं। जहां किसान अधिकारियों का घेराव करते हैं और कहीं-कहीं अधिकारियों को बंदी भी बना लेते हैं। सीमा पर डटे सैनिकों को जिस प्रकार सरकार की हमदर्दी मिल रही है उसी तरह की हमदर्दी किसानों को मिलनी चाहिए। यूं भी किसान सुनवाई का हकदार है लेकिन अपीलें भी दरकिनार हो रही हैं। देश को भुखमरी के साथ टक्कर लेने के काबिल बनाने में जुटे किसानों को भी प्रधानमंत्री के दौरे का इन्तजार है लेकिन फिलहाल यहां केंद्रीय या राज्यों के कृषि मंत्री भी नहीं पहुंच रहे। केंद्र ने जवानों के लिए एक रंैक एक पैंशन लागू कर दी है लेकिन किसानों के लिए प्रधानमंत्री का पांच हजार पैंशन का वायदा भी बकाया पड़ा है। अभी किसान की जय होती नजर नहीं आ रही।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Nov 2018 13:39:05 +0530</pubDate>
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                <title>चुनावी प्रक्रिया में नक्सली दखल</title>
                                    <description><![CDATA[नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में 12 नवंबर को होने वाले मतदान के पहले चरण के 4 दिन पहले बड़ी वरदात करके लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया में दखल देने की एक बार फिर नाकाम कोशिश की है। इसके पहले 30 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में पुलिस व मीडिया टीम पर हमला किया था, जिसमें तीन पुलिसकर्मियों के साथ दूरदर्शन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/naxalism-in-the-electoral-process/article-6558"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/kjkjk-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में 12 नवंबर को होने वाले मतदान के पहले चरण के 4 दिन पहले बड़ी वरदात करके लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया में दखल देने की एक बार फिर नाकाम कोशिश की है। इसके पहले 30 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में पुलिस व मीडिया टीम पर हमला किया था, जिसमें तीन पुलिसकर्मियों के साथ दूरदर्शन समाचार चैनल के कैमरामेन को प्राण गंवाने पड़े थे। 27 अक्टूबर को बीजापुर जिले में बुलेटप्रूफ बंकर वाहन को उड़ाया, जिसमें सीआरपीएफ के चार जवान शहीद हुए और दो घायल हुए। अब दंतेवाड़ा जिले के बचेली इलाके के खदान क्षेत्र में एक बस को आईइडी धमाका करके उड़ा दिया। जिसमें एक सीआरपीएफ जवान के साथ चार नागरिकों की मौत हो गई। पिछले 15 दिन में हुए ये हमले इस बात की तस्दीक हैं कि छत्तीसगढ़ में नक्सली तंत्र मजबूत है और पुलिस व गुप्तचर एजेंसियां इनका सुराग लगाने में नाकाम हैं। क्योंकि ताजा हमला उस वक्त हुआ है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जगदलपुर में चुनावी सभा को 9 नवंबर को जाने वाले थे। नक्सलियों ने जिस निजी बस को निशाना बनाया है, वह राष्ट्रीय खनन विकास निगम के बैलाडिला खनन क्षेत्र में तैनात सीआईएसएफ दल को चुनाव ड्यूटी के लिए बचेली जा रहे थे। इस हमले में पांच जवानों की मौतें हुई हैं। ये सभी जवान सीआईएसएफ की 502 बटालियन कोलकाता के थे। साफ है, कि सरकारी अमला इस नक्सली क्षेत्र में जान जोखिम में डालकर चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने में लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस हमले से यह सच्चाई सामने आई है कि नक्सलियों का तंत्र और विकसित हुआ है, साथ ही उनके पास सूचनाएं हासिल करने का मुखबिर तंत्र भी हैं। हमला करके बच निकलने की रणनीति बनाने में भी वे सक्षम हैं। इसीलिए वे अपनी कामयाबी का झण्डा फहराए हुए हैं। बस्तर के इस जंगली क्षेत्र में नक्सली नेता हिडमा का बोलबाला है। वह सरकार और सुरक्षाबलों को लगातार चुनौती दे रहा है, जबकि राज्य एवं केंद्र सरकार के पास रणनीति की कमी है। यही वजह है कि नक्सली क्षेत्र में जब भी कोई विकास कार्य या चुनाव प्रक्रिया संपन्न होती है तो नक्सली उसमें रोड़ा अटकाते हैं। नक्सली समस्या से निपटने के लिए राज्य व केंद्र सरकार दावा कर रही हैं कि विकास इस समस्या का निदान है। यदि छत्तीसगढ़ सरकार के विकास संबंधी विज्ञापनों में दिए जा रहे आंकड़ों पर भरोसा करें तो छत्तीसगढ़ की तस्वीर विकास के मानदण्डों को छूती दिख रही हैं, लेकिन इस अनुपात में यह दावा बेमानी है कि समस्या पर अंकुश लग रहा है , बल्कि अब छत्तीसगढ़ नक्सली हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बन गया है। अब बड़ी संख्या में महिलाओं को नक्सली बनाए जाने के प्रमाण भी मिल रहे हैं। बावजूद भाजपा के इन्हीं नक्सली क्षेत्रों से ज्यादा विधायक जीतकर आते हैं। जबकि दूसरी तरफ नक्सलियों ने कांग्रेस पर 2013 में बड़ा हमला बोलकर लगभग उसका सफाया कर दिया था। कांग्रेस नेता महेन्द्र कर्मा ने नक्सलियों के विरुद्ध सलवा जुडूम को 2005 में खड़ा किया था। सबसे पहले बीजापुर जिले के कुर्तु विकासखण्ड के आदिवासी ग्राम अंबेली के लोग नक्सलियों के खिलाफ खड़े होने लगे थे। नतीजतन नक्सलियों की महेन्द्र कर्मा से दुश्मनी ठन गई। इस हमले में महेंद्र कर्मा के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और हरिप्रसाद समेत एक दर्जन नेता मारे गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि जवानों, नागरिकों के साथ खतरा राजनैतिक दलों के लिए भी बना हुआ है। इस पूरे क्षेत्र में माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया हुआ था। इसे प्रचारित करने के लिए नक्सलियों ने बड़ी संख्या में पर्चे बांटे और गांव की दीवारों पर पोस्टर भी चस्पा कर दिए । हालांकि माओवादी ऐसा हरऐक चुनाव में करते हैं, बावजूद स्थानीय लोग मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इससे जाहिर होता है कि लोगों का विश्वास लोकतंत्र में हैं और वे नक्सलियों से असंतुष्ट है। माओवादियों के मनोवैज्ञानिक आतंक का असर मतदाताओं पर असर नहीं डालता, इसलिए माओवादी हिंसा और बारूदी विस्फोट का साहरा लेकर खून की इबारतें लिखने में लगे हैं। चुनाव निर्बाध रूप से संपन्न चुनाव आयोग ने 65 हजार अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कराई है। माओवादी मंशा को चकनाचूर करने की दृष्टि से केंद्रीय सुरक्षाबल हरेक नक्सलबहु क्षेत्र में तैनात है। पहले चरण में 18 विधानसभा सीटों पर मतदान होना हैं। सुरक्षाबलों की इतनी तैनाती इसलिए है, जिससे लोग घरों से आश्वस्त होकर निकलें और निर्भय होकर मतदान करें। मतदान का बड़ा प्रतिशत ही आतंक का सही जबाव है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब किसी भी किस्म का चरमपंथ राष्ट्र-राज्य की परिकल्पना को चुनौती बन जाए तो जरुरी हो जाता है, कि उसे नेस्तानाबूद करने के लिए जो भी कारगर उपाय उचित हों, उनका उपयोग किया जाए ? किंतु इसे देश की आंतरिक समस्या मानते हुए न तो इसका बातचीत से हल खोजा जा रहा है और न ही समस्या की तह में जाकर इसे निपटाने की कोशिश की जा रही है ? जबकि समाधान के उपाय कई स्तर पर तलाशने की जरूरत है। यहां सीआरपीएफ की तैनाती स्थाई रूप में बदल जाने के कारण पुलिस ने लगभग दूरी बना ली है। जबकि पुलिस सुधार के साथ उसे इस लड़ाई का अनिवार्य हिस्सा बनाने की जरूरत है। क्योंकि अर्द्धसैनिक बल के जवान एक तो स्थानीय भूगोल से अपराचित हैं, दूसरे वे आदिवासियों की स्थानीय बोलियों और भाषाओं से भी अनजान हैं। ऐसे में कोई सूचना उन्हें टेलीफोन या मोबाइल से मिलती भी है, तो वे वास्तविक स्थिति को समझ नहीं पाते हैं। पुलिस के ज्यादातर लोग उन्हीं जिलों से हैं, जो नक्सल प्रभावित हैं। इसलिए वे स्थानीय भूगोल और बोली के जानकार होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूरदर्शन के पत्रकार की हत्या से भी यह खुलासा होता है कि माओवादी किसी भी प्रकार की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पसंद नहीं करते हैं। हालांकि कैमरामेन की मृत्यु के बाद नक्सलियों ने घड़ियाली आंसू बहाते हुए कहा है कि उनकी मंशा पत्रकार को मारने की नहीं थी। लेकिन हकीकत तो यह है कि वे पत्रकार को मारकर इतनी बड़े समाचार की सुर्खियों में आना चाहते थे, जिससे पूरे छत्तीसगढ़ में दहशत के वातावरण का निर्माण हों और मतदाता मतदान करने केंद्रों तक पहुंचे ही नहीं। लेकिन भारतीय लोकतंत्र और उसकी जनता के इरादे इतने मजबूत हैं कि किसी भी प्रकार की खूनी हिंसा का जवाब वे जनमत से देना अच्छी तरह से जानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रमोद भार्गव</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Nov 2018 13:25:30 +0530</pubDate>
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                <title>उपचुनाव परिणाम भाजपा की उम्मीदों को झटका</title>
                                    <description><![CDATA[गत 3 नवम्बर को हुए कर्नाटक उपचुनावों में भाजपा की उम्मीदों को जबरदस्त झटका लगा है। तीन लोकसभा और दो विधानसभा सीटों पर हुए इन उपचुनावों में कांग्रेस-जेडीएस 4 सीटों पर जबकि भाजपा केवल एक सीट पर विजय पताका लहराने में सफल हो सकी। अगले वर्ष होने जा रहे लोकसभा चुनावों और चंद दिनों के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/bye-election-results-shock-the-bjps-hopes/article-6552"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/bye-election-results-shock-the-bjps-hopes-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गत 3 नवम्बर को हुए कर्नाटक उपचुनावों में भाजपा की उम्मीदों को जबरदस्त झटका लगा है। तीन लोकसभा और दो विधानसभा सीटों पर हुए इन उपचुनावों में कांग्रेस-जेडीएस 4 सीटों पर जबकि भाजपा केवल एक सीट पर विजय पताका लहराने में सफल हो सकी। अगले वर्ष होने जा रहे लोकसभा चुनावों और चंद दिनों के भीतर हो रहे पांच विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा के लिए यह एक बड़ा आघात है। हालांकि उपचुनावों का असर इतना व्यापक नहीं माना जाता किन्तु पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उपचुनावों के परिणामों को कमतर भी नहीं आंका जा सकता। प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुके कर्नाटक उपचुनाव में कांग्रेस-जेडीएस को मिली बम्पर जीत को दिवाली बोनस बताया जा रहा है, वहीं गठबंधन के इस बेहतरीन प्रदर्शन से भाजपा के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। भाजपा केवल अपनी ही शिमोगा सीट को बरकरार रखने में सफल रही है लेकिन उसे भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली दूसरी लोकसभा सीट बेल्लारी गंवानी पड़ी और विधानसभा की दोनों सीटों पर भी हार का मुंह देखना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">1999 में सोनिया गांधी ने भाजपा की सुषमा स्वराज को बेल्लारी में परास्त किया था किन्तु 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा कांग्रेस से यह सीट छीनने में सफल रही थी और तभी से वह इस सीट पर काबिज थी लेकिन पूरे 14 साल बाद कांग्रेस अब भाजपा यह किला ढ़हाने में सफल हो गई है, इसलिए कांग्रेस की यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। इससे एक ओर जहां कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सफलता पर मोहर लगी है, वहीं भाजपा के घटते प्रभाव का भी स्पष्ट संकेत मिलता है। मांडया लोकसभा सीट पर जनता दल (एस) उम्मीदवार ने जीत दर्ज की और दो विधानसभा सीटों जमखंडी तथा रामनगरम पर भी क्रमश: कांग्रेस व जेडीएस अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल रहे। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कर्नाटक की कुल 28 सीटों में से 17 सीटों पर जीत हासिल हुई थी जबकि कांग्रेस को 9 तथा एच डी कुमारस्वामी की जेडीएस को 2 सीटें मिली थी। फिलहाल जिन पांच सीटों पर उपचुनाव हुए, उनमें से 4 सीटें इस्तीफा दिए जाने के कारण और एक सीट विधायक के निधन के बाद खाली हुई थी। जामखंडी सीट से कांग्रेस विधायक सिद्दू न्यामगौड़ा का निधन हो गया था जबकि रामनगरम सीट सीएम कुमारस्वामी के इस्तीफे के बाद, बेल्लारी सीट भाजपा के श्रीमुलु, शिमोगा सीट भाजपा के बी एस येदियुरप्पा तथा मांडया सीट कांग्रेस के सी एस पुद्दाराजू के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बेल्लारी लोकसभा क्षेत्र खनन उद्योग के विवादित रेड्डी बंधुओं का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार वी एस उगरप्पा ने भाजपा प्रत्याशी जे. शांता को 243161 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया जबकि मांड्या लोकसभा सीट पर जेडीएस के एल आर शिवरामेगौड़ा ने रिकॉर्ड 324943 वोटों के अंतर से भाजपा उम्मीदवार को हराकर बाजी मारी। शिमोगा लोकसभा सीट भाजपा के दिग्गज नेता बी एस येदियुरप्पा का गढ़ मानी जाती है, जहां उन्हीं के पुत्र भाजपा प्रत्याशी बीवाई राघवेंद्र जेडीएस के मधु बंगारप्पा को 52148 वोटों के अंतर से हराने में सफल रहे। रामनगरम विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पत्नी अनिता कुमारस्वामी जबकि जामखंडी विधानसभा सीट से कांग्रेस के आनंद सिद्दू न्यामागौड़ा ने भाजपा प्रत्याशियों को परास्त कर शानदार जीत दर्ज की।</p>
<p style="text-align:justify;">इन परिणामों से कर्नाटक में तो कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी ही, 2019 के आम चुनावों के लिए भी गठबंधन को नई ऊर्जा मिलने की संभावनाएं जताई जाने लगी हैं। लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन की ताकत, गठबंधन की पार्टियों का आपसी तालमेल और जनता पर गठबंधन की राजनीति का असर भी देखने को मिला है, जो आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जाने लगे हैं कि आगामी लोकसभा चुनावों के दौरान गठबंधन की राजनीति को और आगे बढ़ाने में कांग्रेस को अब अपेक्षित मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी तो उपचुनावों में जीत के बाद कह भी चुके हैं कि लोकसभा चुनाव भी दोनों पार्टियां मिलकर लड़ेंगी। उपचुनावों में हालांकि बेल्लारी को छोड़कर शेष सभी चारों सीटों पर भाजपा, कांग्रेस व जेडीएस ने पूर्ववत पकड़ बनाए रखी है लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के चुनावी माहौल में कर्नाटक में कुल पांच में से चार सीटों पर भाजपा का हार जाना उसके लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता। उपचुनाव परिणामों ने भाजपा की विधानसभा में ताकत बढ़ाने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उपचुनाव के बाद 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस-जेडीएस के विधायकों की संख्या अब 120 हो गई है जबकि भाजपा के पास कुल 104 विधायक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">निश्चित रूप से कांग्रेस अब इन परिणामों को आसन्न चुनावों में अपने पक्ष में भुनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी किन्तु भाजपा के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है और चुनाव परिणामों के बाद कर्नाटक में पार्टी के वरिष्ठतम नेता बी एस येदियुरप्पा ने भाजपा की स्थिति स्पष्ट भी कर दी है कि नतीजे भाजपा के लिए चेतावनी है और पार्टी को सही दिशा में काम करने की जरूरत है। बीते कुछ सालों में विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों में अधिकांश में नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं रहे हैं। पिछले साढ़े चार वर्षों में भाजपा को 10 चुनावों में पराजय का मुंह देखना पड़ा है। कर्नाटक उपचुनाव में तो पराजय का सामना करने के बाद भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें उभरना स्वाभाविक ही है क्योंकि चंद ही दिनों में पांच राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने हैं और कर्नाटक उपचुनावों के नतीजों का कुछ असर तो इन विधानसभा चुनावों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, कर्नाटक के नतीजों से एक बात तो साफ हो गई है कि कांग्रेस अगर भाजपा विरोधी दलों के साथ गठबंधन के अपने प्रयत्नों में सफल हो जाती है तो आम चुनावों में वह भाजपा पर भारी पड़ सकती है और उपचुनाव के नतीजों के बाद महागठबंधन की सोयी हुई उम्मीदों को फिर बल मिलने लगा है। भाजपा के लिए चिंता की स्थिति इसलिए भी बनती जा रही है कि जिन मुद्दों को लेकर कांग्रेस को घेरते हुए देशभर में कांग्रेस विरोधी माहौल बनाकर उसने 2014 का लोकसभा चुनाव जीता था, आज वही मुद्दे उसके गले की फांस बनते जा रहे हैं। आतंकवाद, पाकिस्तान, महंगाई, पैट्रोल-डीजल व रसोई गैस की कीमतें, किसानों की समस्याएं, भ्रष्टाचार इत्यादि जिन मुद्दों को लेकर पिछले चुनाव में भाजपा आक्रामक थी, भाजपा नेताओं के उन्हीं पुराने बयानों को लोग अब सोशल मीडिया पर वायरल कर पार्टी से सवाल पूछ रहे हैं कि इन सभी मुद्दों का क्या हुआ और भाजपा की विड़म्बना यह है कि उसके पास साढ़े चार साल सत्ता में रहने के बावजूद इनमें से किसी भी सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। अब देखना होगा कि भाजपा इस नुकसान की पूर्ति के लिए किस प्रकार की रणनीति बनाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>योगेश कुमार गोयल</strong></em></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Nov 2018 11:44:59 +0530</pubDate>
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                <title>फाइनल में भिड़ेंगे घरेलू क्रिकेट के पावर हाऊस</title>
                                    <description><![CDATA[विजय हजारे ट्रॉफी एकदिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में मुंबई और दिल्ली में भिड़ंत आज बेंगलुरु (एजेंसी)। घरेलू क्रिकेट के पावर हाऊस कहे जाने वाले दिल्ली और मुुंबई शनिवार को यहां विजय हजारे ट्रॉफी एकदिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में आमने-सामने होंगे। दिल्ली ने सेमीफाइनल में झारखंड को कड़े संघर्ष में दो विकेट से और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/power-house-in-the-final-of-the-domestic-cricket/article-6359"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/power-house-in-the-final-of-the-domestic-cricket-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">विजय हजारे ट्रॉफी एकदिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में मुंबई और दिल्ली में भिड़ंत आज</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">घरेलू क्रिकेट के पावर हाऊस कहे जाने वाले दिल्ली और मुुंबई शनिवार को यहां विजय हजारे ट्रॉफी एकदिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में आमने-सामने होंगे। दिल्ली ने सेमीफाइनल में झारखंड को कड़े संघर्ष में दो विकेट से और मुंबई ने हैदराबाद को एकतरफा अंदाज़ में 60 रन से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। मुंबई अपने युवा ओपनर पृथ्वी शॉ से खासी उम्मीदें रहेंगी जो इस समय जबरदस्त फार्म में हैं। दिल्ली को अपने कप्तान गौतम गंभीर से सबसे अधिक उम्मीदें रहेंगी जो इस सत्र में 9 मैचों में दो शतकों की मदद से 517 रन बना चुके हैं और सर्वाधिक रन बनाने में दूसरे स्थान पर हैं। गंभीर ने क्वार्टरफाइनल में हरियाणा के खिलाफ शतक बनाया था। दिल्ली के नीतीश राणा ने इस सत्र में आठ मैचों में 362 रन और ध्रुव शौरी ने नौ मैचों में 301 रन बनाए हैं। दिल्ली के तेज़ गेंदबाज़ कुलवंत खेजरोलिया ने टीम के लिए इस सत्र में शानदार प्रदर्शन किया है। वह चार मैचों में 14 विकेट ले चुके हैं जिनमें हरियाणा के खिलाफ हैट्रिक सहित 6 विकेट शामिल हैं। नवदीप सैनी ने 7 मैचों में 13 विकेट लिए हैं जबकि ललित यादव ने भी 9 मैचों में 13 विकेट लिए हैं। आॅलराउंडर पवन नेगी का सेमीफाइनल में मैच विजयी प्रदर्शन दिल्ली की उम्मीदों को मजबूत कर सकता है। मुंबई की तरफ से लेफ्ट आर्म स्पिनर शम्स मुलानी ने इस सत्र में शानदार प्रदर्शन किया है और 21 साल के इस गेंदबाज़ ने 8 मैचों में 16 विकेट लिए हैं। धवल कुलकर्णी आठ मैचों में 15 विकेट ले चुके हैं। दोनों टीमों के बीच दिलचस्प भिड़ंत होने<br />
की पूरी उम्मीद है।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/sports/power-house-in-the-final-of-the-domestic-cricket/article-6359</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Oct 2018 13:45:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जेएनयू की राह पर एएमयू</title>
                                    <description><![CDATA[अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आतंकवादी मनन वानी की नमाज-ए-जनाजा को परिसर में ही गोपनीय ढंग से जिस तरह पढ़ने की नाकाम कोशिश की गई, उससे लगता है, कहीं न कहीं इसे जवाहरलाल नेहरू विवि की राह पर धकेले जाने का षड्यंत्र तो नहीं चल रहा ? हालांकि विवि प्रशासन ने तुरंत सक्रिय होकर इस गतिविधि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/amu-on-the-path-of-jnu/article-6331"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/amu-on-the-path-of-jnu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आतंकवादी मनन वानी की नमाज-ए-जनाजा को परिसर में ही गोपनीय ढंग से जिस तरह पढ़ने की नाकाम कोशिश की गई, उससे लगता है, कहीं न कहीं इसे जवाहरलाल नेहरू विवि की राह पर धकेले जाने का षड्यंत्र तो नहीं चल रहा ? हालांकि विवि प्रशासन ने तुरंत सक्रिय होकर इस गतिविधि पर अंकुश लगाने के साथ हरकत में शामिल तीन छात्रों को निलंबित कर दिया है। सेना के हाथों जम्मू-कश्मीर की सरहद हिंदवाड़ा पर मारा गया आतंकी मनन वानी इसी विवि का छात्र था और पीएचडी कर रहा था। जनवरी 2017 में उसने सोशल मीडिया साइट पर एके-47 राइफल के साथ अपनी तस्वीर डाली थी, इसके तुरंत बाद उसे विवि से निष्कासित कर दिया गया था। यह हिजबुल मुजाहिदीन संगठन का आतंकी बन गया था। इस घटना के बाद कश्मीर से दुर्भाग्यपूर्ण पहलू में यह सामने आया है कि वहां देशविरोधी नारे लगाने वाले छात्रों के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा है। मांग की जा रही है कि यदि देशद्रोह का मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो एएमयू में पढ़ने वाले 1200 कश्मीरी छात्र विवि छोड़ देंगे। शासन को अलगाववादियों की इस धमकी के दबाव में आने की जरूरत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">विवि सांप्रदायिक बंटवारे से बचा रहे इस नाते यहां के प्रवक्ता प्राध्यापक शाफे किदवई और एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन के निष्पक्ष व बाजिब दखल को दाद देनी होगी। जब विवि प्रशासन को इस हरकत की खबर लगी कि जम्मू-कश्मीर के रहने वाले कुछ छात्र केनेडी हॉल के पास एकत्रित होकर वानी की नमाज-ए-जनाजा पढ़ने की फिराक में हैं। इस पर विवि के सुरक्षाकर्मी व अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे। फैजुल हसन भी पहुंच गए। इन लोगों ने कड़ा हस्तक्षेप करते हुए नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी। फैजुल ने बेहिचक कहा कि एक आतंकवादी के जनाजे की नमाज पढ़ना स्वीकार नहीं है और न ही कश्मीरी छात्रों को इस परिसर में ऐसा करने दिया जाएगा। एएमयू के कर्मचारियों ने भी कुछ इसी तरह का दबाव बनाया। दोनों पक्षों में तीखी बहस भी हुई। किदवई ने भी हरकती छात्रों से कहा कि वे किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। विवि प्रशासन के इस विरोध के चलते हरकती छात्रों को राष्ट्रविरोधी गतिविधि बंद करनी पड़ी। इस कार्यक्रम के टलने के बाद फैजुल हसन ने स्पष्ट किया कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हिमायत करते हैं, लेकिन राष्ट्रद्रोह या आतंकवाद किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दहशतगर्दों के समर्थन का कोई भी कार्यक्रम विवि परिसर में नहीं होने दिया जाएगा। इसी बीच अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम ने नमाए-ए-जनाजा पढ़ने की कोशिश करने वाले छात्रों को एएमयू से निष्कासित करने की मांग की। साथ ही उन्होंने नमाज पढ़ने से रोकने वाले फैजुल किदवई और कर्मचारियों की भी सराहना की। इस घटना का एमएमयू छात्र संघ और कर्मचारियों के हस्तक्षेप से संतोषजनक पटाक्षेप हो गया। अन्यथा यह मामला भी जेएनयू और जादवपुर विवि की तरह सांप्रदायिक रूप ले सकता था। हालांकि कश्मीर में सांप्रदायिक उभार को हवा देकर एएमयू का सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश हो रही है, जो कतई उचित नहीं है। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर इन विवि में राष्ट्रविरोधी मानसिक कुरुपता कैसे और क्यों विकसित हो रही है ? इसके पीछे वे कौन से शड्यंत्रकारी तत्व हैं, जो मासूम छात्रों के जीवन से खिलवाड़ कर धर्म के नाम पर आतंक का पाठ पढ़ाकर आतंक के अनुयायी बना रहे हैं ? इस दुश्चक्र का शुरूआती पहलू जेएनयू में फरवरी 2016 में सामने आया था। यहां अफजल गुरू के समर्थन में नारे लगने के साथ देश तोड़ने के भी नारे लगाए गए थे। हालांकि बाद में जांच से पता चला कि ये आपत्तिजनक गतिविधियां इस विवि में पिछले चार साल से चल रही थीं। बाद में इसी मामले की हुंकार पश्चिम बंगाल के जादवपुर विवि में भरी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">देशद्रोह से जुड़े नारों को लगाते वक्त षड्यंत्रकारियों ने यह भ्रम फैलाने की कवायद की थी कि इसमें मुख्यधारा के विद्यार्थी भी शामिल हैं। क्योंकि इस समूह में शामिल जेएनयू छात्रसंघ के तत्कालीन अध्यक्ष कन्हैया कुमार को देशद्रोह के आरोप में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि कन्हैया ने अपना मंतव्य स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके रहते हुए कोई भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि नहीं चली। उसकी संविधान में पूरी आस्था है और वह देश तोड़ने वाली ताकतों के खिलाफ है। लेकिन इस मामले में विडंबना यह रही कि जिस डेमोक्रेटिक स्टूडेंस यूनियन ने और उसके जिस नेता ने अफजल के समर्थन में नारे लगाने और देश के हजार टुकड़े करने की हुंकार भरी थी उसके विरुद्ध कोई कठोर कार्यवाही नहीं की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इन विश्वविद्यालयों में प्रशासन और छात्रों को स्वायक्ता इसलिए दी गई है, जिससे वे कुछ मौलिक व रचनात्मक ज्ञान अर्जित करें और देश व दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाएं। शिक्षा के जो भी प्रतिष्ठान हैं, चरित्र निर्माण, सहिष्णुता, विवेकशीलता, वैचारिकता और सत्य के अनुसंधान के लिए हैं। यदि ये संस्थान सम्यक दायित्व बोध में असफल सिद्ध होते हैं तो कालांतर में ये अराजक तत्वों का सह-उत्पाद बनकर रह जाएंगे। धार्मिक कट्टरता और जातीय आरक्षण को लेकर देश में जैसे मतांतर पिछले दिनों देखने में आए हैं, वे भी शिक्षा की प्रसांगिकता पर सवाल खड़े करते हैं कि आखिर हम ऐसी कौनसी शिक्षा का पाठ पढ़ा रहे हैं, जिसके चलते छात्र धर्म और जाति के दायरे में ध्रुवीकृत हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई विवि यदि राष्ट्रविरोधी हरकतों के चलते चर्चा में आता है, तो वहां के शिक्षक व प्रशासक भी निंदा के दायरे में आते हैं। ऐसे में यह शक स्वाभाविक रूप में जहन में उभरता है कि क्या इनके स्वायत्ता से संबद्ध विधान, आधारभूत सरंचना, पाठ्य पुस्तकें और शोध प्रक्रिया जैसे बुनियादी तत्वों में कहीं कोई कमी है ? दरअसल जेएनय, एमएमयू, वणारस हिंदू विवि, जादवपुर विवि जैसे शीर्ष शिक्षा संस्थानों की आधारशीला रखते वक्त परिकल्पना यह की गई थी कि ये संस्थान विश्वस्तरीय वैज्ञानिक, अभियंता और चिकित्सक देंगे। लेकिन देखने में आया है कि आज तक इन विवि ने ऐसा कोई वैज्ञानिक या आविष्कारिक नहीं दिया, जिसके सिद्धांत अथवा अविष्कार को वैश्विक मान्यता या नोबेल पुरस्कार मिला हो ? क्या ऐसा वामपंथी वैचारिक जड़ता के कारण हुआ ? क्योंकि खासतौर से जेएनयू में तो परंपरा ही बन गईं है कि वामपंथी विद्धानों की इस संस्थान में नियुक्ति हो, छात्रों में इसी एकमात्र विचारधारा को वे प्रोत्साहित करें, जिससे देश में वर्ग संघर्श उत्पन्न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">बहुलतावादी वैचारिक सोच का समावेश न होने पाए। अब परिदृश्य बदल रहा है, इसलिए इस वामपंथी चौखट को तोड़ना होगा। गांधी ने भारतीय भौगोलिक परिवेश और मानसिकता के अनुसार ज्ञानार्जन की बात कही थी, उस गांधी दर्शन का प्रवेश इन परिसरों में जरूरी हो गया है। लोहिया ने समानता का भाव पैदा करने वाली शिक्षा को अंगीकार किया था। इसी तरह दक्षिणपंथी दीनदयाल उपध्याय ने अंत्योदय की बात कही है। क्यों नहीं अब विभिन्न अकादमिक पदों पर विचार भिन्नता से जुड़े अध्यापकों की भर्ती हो ? यदि ऐसा होता है तो एकपक्षीय विचारों की जड़ता टूटेगी। नए विचार संपन्न संवादों के संप्रेषण से समावेशी सोच विकसित होगी। जब हम देश की अखंडता बनाए रखने की दृष्टि से विविधता में एकता का नारा देते हैं तो फिर शिक्षा में वैचारिक एकरूपता क्यों ? जेएनयू में शायद वाम विचारधारा को महत्व इसलिए दिया जाता रहा है, जिससे दूसरे प्रकार की वैचारिकता से चुनौती मिले ही नहीं ? अब जेएनयू की तरह अन्य विश्वविद्यालयों में दक्षिणपंथी की उपस्थिति दर्ज हो रही है, तो वामपंथी धर्मनिरपेक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बहाने बचने की कोशिश में हैं। किंतु धर्मनिरपेक्षता को केवल मुस्लिम तुष्टिकरण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पाकिस्तान जिंदाबाद के नारों से मुक्त होना होगा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी संविधान के दायरे में नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि आर्थिक उदारवाद के इस कठिन दौर में जिस तरह का भूमंडलीकरण उभरा है, उसके तईं सांस्कृतिक मूल्य और परिदृश्य भी तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में छात्रों की स्वतंत्रता कब स्वछंदता का रूप ले लेती है, यह रेखांकित करना मुश्किल हो जाता है। इन संस्थानों से निकले छात्र ही, कल देश के नेतृत्वकर्ता होंगे ? इस नाते इनके क्या उत्तरदायित्व बनते हैं, यह गंभीरता से सोचने की जरूरत है। अंतत: देश में समरसता और समृद्धि समावेशी उदारता से ही पनपेगी, इसलिए बहुलतावादी सोच को अंगीकार करना अनिवार्य हो गया है। <strong><em>प्रमोद भार्गव</em></strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Oct 2018 12:28:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>आपसी सौहार्द व सद्भावना, चुनावी प्रक्रिया पर हावी</title>
                                    <description><![CDATA[शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थाओं में सभी पदों पर निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार सच कहूँ सरसा। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की शिक्षाओं का असर न केवल करोड़ों जन मानस को प्राप्त है। बल्कि उनका व्यापक प्रभाव युवा वर्ग पर भी खासा है। करीब 22 वर्षों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mutual-goodwill-and-goodwill-dominate-the-electoral-process/article-6323"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/mutual-goodwill-and-goodwill-dominate-the-electoral-process-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थाओं में सभी पदों पर निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार</h1>
<p style="text-align:justify;">सच कहूँ सरसा।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की शिक्षाओं का असर न केवल करोड़ों जन मानस को प्राप्त है। बल्कि उनका व्यापक प्रभाव युवा वर्ग पर भी खासा है। करीब 22 वर्षों बाद प्रदेश भर में जहां एक ओर तमाम शैक्षणिक संस्थाओं में नीतियों के आधार पर एक-दूसरे छात्र-संगठनों को नीचा दिखाते हुए छात्र संघ के चुनाव में मतदान की प्रकिया हुई। वहीं सरसा में एक मात्र शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थान (बॉयज एंड गर्ल्ज कॉलेज) ही ऐसे संस्थान के रुप में चर्चित रहे जहां क्लास रिप्रेजेंटेटिव सहित प्रधान, उपप्रधान, सचिव व सदस्य आदि सभी पदों के लिए आवेदन करने वाले छात्र प्रतिनिधियों को निर्विरोध उनके पदों पर चुन लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बीए मास कम्यूनिकेशन तृतीय वर्ष के छात्र कपिल ढाका बने प्रधान:</strong> सर्व सहमति से शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज के बीए मास कम्यूनिकेशन तृतीय वर्ष के छात्र कपिल ढाका को महाविद्यालय प्रधान, एम कॉम द्वितीय वर्ष के मोहित को उप प्रधान, बीपीएड सैकिंड के सुखजिन्द्र सिंह को सचिव व बीएससी फाइनल ईयर के छात्र अमन को संयुक्त सचिव के तौर पर चयनित किया। अजय बीएससी नॉन मेडिकल प्रथम वर्ष, नवदीप कम्बोज बीएससी द्वितीय वर्ष, जगमीत सोनी एमएससी ज्योग्राफी, अमर सिंह डीपीएड प्रथम, बिक्रमजीत सिंह बीए फाइनल को सर्व सम्मति से कार्यकारिणी परिषद सदस्यों के तौर पर चयनित किया गया। इसके अतिरिक्त चुने गए कक्षा प्रतिनिधियों में नरेंद्र बीए प्रथम, मुकेश जयपाल बीएएमसी प्रथम, दिनेश लाम्बा बीएएमसी द्वितीय, आशिष बीसीए प्रथम, अर्जुन बीए द्वितीय, सचिन बीकॉम प्रथम, कशिश बीकॉम द्वितीय, विक्रम बीकॉम तृतीय, संदीप सिंह एमएससी मैथ फर्स्ट, अनिल कुमार एमएसी मैथ सैकिंड, अमरदीप एमएएमसी प्रथम, संदीप कुमार एमएएमसी द्वितीय वर्ष, प्रभजोत सिंह डीपीएड प्रथम व मनीष बीएससी नॉन मेडिकल सैकिंड आदि के नाम शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शाह सतनाम जी गर्ल्ज कॉलेज में ज्योति को चुना गया निर्विरोध प्रधान:</strong> शाह सतनाम जी गर्ल्ज कॉलेज में एमएससी मैथ्स प्रथम वर्ष की ज्योति को कॉलेज का निर्विरोध प्रधान बीएएमसी तृतीय वर्ष की रीना को निर्विरोध ही उपप्रधान चुना गया। बीकॉम द्वितीय वर्ष की गुरप्रीत को सचिव व बीएएमसी प्रथम वर्ष की शिक्षा को सह सचिव चुना गया। इसके अलावा एमएससी मैथ्स द्वितीय वर्ष की शिवानी, बीए तृतीय वर्ष की आदेश, बीएएमसी द्वितीय वर्ष की सोनिका, बीए द्वितीय वर्ष की गरिमा व बीसीए प्रथम की ज्योति को कार्यकारी सदस्य के रुप में चुना गया। इसके अलावा रविना, गगनदीप कौर, नवनीत कैर,ममता, रमनप्रीत, तमना, पूनम, सोनिका, सोनाली, अर्शदीप, रमन, सिमरन, कोमल,अनुराधा,सोनम, कपिस्या पूनिया आदि को क्लास रिप्रेजेंटेटिव चुना गया। शाह सतनाम जी गर्ल्ज कॉलेज में चुनाव कमेटी में डॉ. रिशू सिंह, मोनिका, पूनम धमीजा, तुलसी व रेणू दारा शामिल थी।</p>
<p>शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसबी आनंद इन्सां व गर्ल्ज कॉलेज की प्राचार्या गीता मोंगा इन्सां ने संयुक्त रुप से बताया कि डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से शाह सतनाम जी गर्ल्ज व बॉयज कॉलेज में क्लास रिप्रेजेंटेटिव सहित प्रधान, उपप्रधान, सचिव व सदस्य आदि सभी पदों पर उम्मीदवारों का चयन निर्विरोध किया गया।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mutual-goodwill-and-goodwill-dominate-the-electoral-process/article-6323</link>
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                <pubDate>Thu, 18 Oct 2018 13:59:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेमेंट डेटा /वीजा, मास्टरकार्ड जैसी कंपनियां विदेश में डेटा स्टोर कर भारतीय नियम तोड़ रहीं</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई,एजेंसी। वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी अमेरिकी कंपनियां भारत के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक 16 अक्टूबर से विदेशी कंपनियों को पेमेंट से जुड़े डेटा भारत में ही स्टोर करने थे। कंपनियों को 15 अक्टूबर रात 12 बजे तक आरबीआई को इस संबंध में बताना था। लेकिन, अमेरिकी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/companies-like-payment-data-visa-mastercard-breaking-the-indian-rule-by-storing-data-abroad/article-6293"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/companies-like-payment-data-_-visa-mastercard-breaking-the-indian-rule-by-storing-data-abroad-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई,एजेंसी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी अमेरिकी कंपनियां भारत के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक 16 अक्टूबर से विदेशी कंपनियों को पेमेंट से जुड़े डेटा भारत में ही स्टोर करने थे। कंपनियों को 15 अक्टूबर रात 12 बजे तक आरबीआई को इस संबंध में बताना था। लेकिन, अमेरिकी कार्ड कंपनियों ने ऐसा नहीं किया।<br />
<strong>जुर्माना लगा सकता है आरबीआईर</strong> : न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई ने चेतावनी दी थी कि तय समय सीमा तक निर्देशों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जाएगी। आरबीआई ने अप्रैल में सर्कुलर जारी कर कहा था कि जिन कंपनियों का सर्वर विदेश में है उन्हें पेमेंट सिस्टम से जुड़ा डेटा भारत में ही स्टोर करना पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिकी कंपनियों ने 12 महीने का वक्त मांगा : </strong>अमेरिकी कंपनियों ने 12 महीने का वक्त और मांगा है। कंपनियों की दलील है कि उनकी मशीनों का सिस्टम दुनियाभर में एक जैसा है। सिर्फ भारत के लिए सिस्टम को इतनी जल्दी नहीं बदला जा सकता। अमेरिका के डिप्टी ट्रे़ड रिप्रजेंटेटिव डेनिस शिया ने भी शुक्रवार को कहा कि इन्फॉर्मेशन का फ्री फ्लो सुनिश्चित करने के लिए हम डेटा का लोकलाइजेशन नहीं चाहते। शिया ने कहा कि ऐसा करने वाले देशों को फिर से सोचना चाहिए। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका की फाइनेंशियल कंपनियों की शिकायत के बाद वहां के अधिकारियों ने डेटा लोकलाइजेशन पर आपत्ति जताई। अमेरिकी कंपनियां डेटा लोकलाइजेशन के खिलाफ दुनियाभर में लॉबीइंग करती रही हैं। वॉट्सऐप ने नियम का पालन कियामोबाइल मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप ने पिछले दिनों कहा कि वह आरबीआई के निर्देश मानेगा। उसने पेमेंट संबंधी डेटा भारत में स्टोर करने का सिस्टम तैयार कर लिया है। अमेजन ने भी कहा था कि वह नियम पूरे करने के लिए काम कर रही है। जहां भी कंपनी का कारोबार है वहां के कानून का पालन करना प्राथमिकता है।</p>
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                <pubDate>Tue, 16 Oct 2018 15:55:57 +0530</pubDate>
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                <title>जोकोविच चौथी बार बने ‘शंघाई मास्टर’</title>
                                    <description><![CDATA[शंघाई (एजेंसी)। सर्बिया के नोवाक जोकोविच ने यहां शंघाई मास्टर्स टेनिस टूर्नामेंट में बोर्ना कोरिच को पुरुष एकल फाइनल में 6-3, 6-4 से पराजित कर खिताब अपने नाम कर लिया है जो उनका यहां चौथा खिताब है। 14 बार के ग्रैंड स्लेम चैंपियन बेहतरीन लय में खेल रहे हैं और उन्होंने 19वीं रैंक और अपने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/djokovic-became-the-fourth-shanghai-master/article-6288"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/djokovic-became-the-fourth-shanghai-master.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>शंघाई (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">सर्बिया के नोवाक जोकोविच ने यहां शंघाई मास्टर्स टेनिस टूर्नामेंट में बोर्ना कोरिच को पुरुष एकल फाइनल में 6-3, 6-4 से पराजित कर खिताब अपने नाम कर लिया है जो उनका यहां चौथा खिताब है। 14 बार के ग्रैंड स्लेम चैंपियन बेहतरीन लय में खेल रहे हैं और उन्होंने 19वीं रैंक और अपने ट्रेनिंग साथी कोरिच को मैच में खुद पर हावी होने का मौका नहीं दिया। मैच के आखिरी में सर्बियाई खिलाड़ी ने वीडियो समीक्षा के बाद चैंपियनशिप अंक हासिल करने के साथ खिताब भी जीत लिया। विजयी घोषित होते ही जोकोविच ने खुशी से अपना चेहरा छुपा लिया। 31 साल के जोकोविच इसी के साथ रोजर फेडरर को पीछे छोड़कर सोमवार को ताज़ा जारी विश्व रैंकिंग में दुनिया के दूसरे नंबर के पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं और उन्होंने नंबर एक राफेल नडाल को भी पीछे छोड़ने का संकेत दे दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले काफी समय से चोट से जूझ रहे जोकोविच की यह कोर्ट पर जबरदस्त वापसी है और वह नडाल से एटीपी रैंकिंग में केवल 215 अंक ही पीछे है। जोकोविच के लिए चौथी बार शंघाई मास्टर बनना बड़ी उपलब्धि है क्योंकि कोहनी की चोट के कारण पिछले पांच महीने पहले तक वह एटीपी रैंकिंग में 22वें नंबर पर फिसल गए थे। वह 2017 के दूसरे हाफ में खेल नहीं सके थे। लेकिन मौजूदा सत्र में वह अपनी शीर्ष फार्म में खेल रहे हैं और शंघाई में उन्होंने एक भी सर्विस गेम नहीं हारा है। सर्बियाई खिलाड़ी ने इसी के साथ लगातार 18 एटीपी मैचों को जीत लिया है। उन्होंने लगातार विम्बलडन, सिनसिनाटी मास्टर्स, यूएस ओपन और शंघाई मास्टर्स खिताब जीते हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">मैं पूरी तरह से नया जोकोविच हूं: नोवाक</h1>
<p style="text-align:justify;">जोकोविच ने जीत के बाद कहा, ‘मैं इससे बेहतर और कुछ नहीं मांग सकता था। मैं रैंकिंग में नडाल के बहुत करीब आ गया हूं और पिछले वर्ष के आखिरी से अब तक मैंने अपने खेल में काफी सुधार किया है। जोकोविच आखिरी बार दो वर्ष पहले करियर में शीर्ष रैंकिंग पर पहुंचे थे। उन्होंने अपने खेल को लेकर कहा कि वह पूरी तरह से नए जोकोविच बन गए हैं। सर्बियाई खिलाड़ी ने कहा, ‘मैं पूरी तरह से नया जोकोविच हूं। मुझे खुद को पूरी तरह से नया बनाना पड़ा है। जोकोविच पेरिस मास्टर्स से पहले विएना या बासेल टूर्नामेंट में खेल सकते हैं। जोकोविच की मौजूदा फार्म को नडाल के शीर्ष स्थान के लिए खतरा माना जा रहा है जो बीजिंग तथा शंघाई दोनों ही टूर्नामेंटों में घुटने की चोट के कारण नहीं खेल सके। 32 वर्षीय स्पेनिश खिलाड़ी लेकिन पेरिस मास्टर्स में खेलने उतर सकते हैं जो इस महीने के अंत में शुरु होगा।</p>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Oct 2018 15:11:54 +0530</pubDate>
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                <title>कंबाईन मालिकों ने नहीं  माना सरकार का आदेश, प्रशासन ने प्रदूषण को रोकने के लिए उठाया था कदम</title>
                                    <description><![CDATA[बिना एसएमएस यंत्रों से कंबाईनें चला कर रहे धान की कटाई Combined owners did not believe the order of the government बठिंडा/संगत मंडी(मंजीत नरुआणा)। राज्य सरकार की ओर से धान की पराली को आग लगाने साथ पैदा होते प्रदूषण से निजात पाने के लिए धान की कटाई करते समय कम्बाईनों पर कम्बाईन मालिकों को सुपर स्ट्रा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/combined-owners-did-not-believe-the-order-of-the-government-the-administration-had-taken-steps-to-stop-pollution/article-6273"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/combined-owners-did-not-believe-the-order-of-the-government.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">बिना एसएमएस यंत्रों से कंबाईनें चला कर रहे धान की कटाई Combined owners did not believe the order of the government</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा/संगत मंडी(मंजीत नरुआणा)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से धान की पराली को आग लगाने साथ पैदा होते प्रदूषण से निजात पाने के लिए धान की कटाई करते समय कम्बाईनों पर कम्बाईन मालिकों को सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट व्यवस्था (एसएमएस) लगाने के सख्त निर्देश दिए गए थे परंतु कम्बाईन मालिकों की ओर से राज्य सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाते एसएमएस व्यवस्था से बिना ही धान की कटाई की जा रही है। एकत्रित की जानकारी अनुसार धान की पराली को आग लगाने साथ जहां वातावरण प्रदूषित हो रहा वहीं धरती बीच वाले जीव जंतू भी आग की चपेट में आकर मर रहे हैं। ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से धान की पराली को आग लगाने के साथ पैदा होते प्रदूषित होते वातावरण को लेकर राज्य सूबा सरकार को सख़्त फटकार लगाई गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी के चलते राज्य सरकार की ओर से धान की पराली को जमीन में ही नष्ट करने के लिए कम्बाईनों पर सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट व्यवस्था (एसएमएस) लगाना जरूरी कर दिया। इस यंत्र के साथ कम्बाईन की ओर से धान की पराली को खेत में नष्ट कर फेंका जाता है। सरकार की ओर से यह हिदायतें तो जारी कर दीं परंतु इसे अमली जामा पहनाने के लिए जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं किया गया। किसानों के खेत में कम्बाईन मालिकों की तरफ से बिना किसी डर भय के एसएमएस के बिना ही धान की कटाई की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई भी विभाग उनको रोकने तक नहीं आया। बेशक कृषि विभाग की ओर से एसएमएस यंत्र को लगाने के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है परंतु फिर भी कम्बाईन मालिकों की ओर से यह यंत्र नहीं लगाया गया। अतिरिक्त जिला मैजिस्ट्रेट बठिंडा सुखप्रीत सिंह सिद्धू की ओर से विवरण फौजदारी संहिता 1973 की धारा 144 के अधीन यह आदेश जारी कर दिए कि जिले में जो भी कम्बाईन मालिक बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट व्यवस्था (एसएमएस) से धान की कटाई करेगा तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते उस की कम्बाईन को जब्त कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंजाब में धान की पराली को जलाने के कारण पैदा होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए पंजाब सरकार व राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों अनुसार पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की सिफारिशों को मद्देनजर रखते हुए ही ऐसे सख्त कदम उठाए गए हैं।</p>
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                <pubDate>Mon, 15 Oct 2018 11:46:53 +0530</pubDate>
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