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                <title>उत्सव किसका और क्यों? भारत के राजनीतिक योद्धा</title>
                                    <description><![CDATA[बीते वर्ष की स्मृति लेख किन शब्दों में लिखें? खूब जश्न मनाएं और ढ़ोल नगाडेÞ बजाएं? नई आशाओं, सपनों और वायदों के साथ नव वर्ष 2019 का स्वागत करें? या बारह महीनों में निरंतर पतन की ओर बढ़Þते रहने पर शोक व्यक्त करें? वर्ष 2018 को इतिहास में एक मिले जुले वर्ष के रूप में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">बीते वर्ष की स्मृति लेख किन शब्दों में लिखें? खूब जश्न मनाएं और ढ़ोल नगाडेÞ बजाएं? नई आशाओं, सपनों और वायदों के साथ नव वर्ष 2019 का स्वागत करें? या बारह महीनों में निरंतर पतन की ओर बढ़Þते रहने पर शोक व्यक्त करें? वर्ष 2018 को इतिहास में एक मिले जुले वर्ष के रूप में याद किया जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से हमारे नेताओं ने जिसकी लाठी, उसकी भैंस की कहावत चरितार्थ की और भारत के योद्धाओं की तरह कार्य किया। अपने वोट बैंक के अनुरूप कार्य न करने वाली प्रणाली को चलाया। क्या वर्ष 2018 को एक ऐसे वर्ष के रूप में याद किया जाएगा जिसमें राजनीतिक दलों ने चुनावी जीत की खातिर अपने अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए कदम उठाए? मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़Þ विधान सभाओं में भाजपा की हार और उससे पहले 11 राज्यों में लोक सभा की चार और विधान सभा की 11 सीटों में से राजग द्वारा केवल तीन सीटों पर जीत दर्ज करना भाजपा के लिए एक बुरा सपना था और इससे विपक्ष को यह संदेश मिला कि स्थानीय स्तर पर एकजुटता के माध्यम से वे भाजपा को हरा सकते हैं। यही स्थिति कर्नाटक की रही जहां पर गौडा की जद (एस) तथा कांग्रेस ने भाजपा को मात दी। राजग ने अपने दो सहयोगी दल आंध्र प्रदेश में तेदेपा और बिहार में आरएसलएसपी को खोया। जबकि शिव सेना, जद (यू), लोजपा और अपना दल आदि सौदेबाजी में बड़ा हिस्सा मांग रहे हैं। ?</p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: इस स्थिति के लिए भगवा संघ दोषी है। भाजपा को एक कट्टरवादी पार्टी के रूप में देखा जाता है जिस पर सांस्कृतिक असहिष्णुता अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और गाय की राजनीति का आरोप है तथा अच्छे दिन लाने के लिए इसे मिली सहानुभूति धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है क्योंकि सरकार अपने वायदे पूरे नहीं कर पायी है। अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन आशानुरूप नहीं रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में आक्रोश है। शहरी क्षेत्रों में उदासीनता है और युवा रोजगार के अवसर न मिलने के कारण गुस्से में हैं। साथ ही सांप्रदायिक धु्रवीकरण और इसके वोट बैंक में कमी के चलते लगता है इसे चुनावी लाभ नहीं मिल पाएगा। प्रश्न उठता है कि क्या मोदी पर जीत दर्ज की जा सकती है? निश्चित रूप से 2018 कांग्रेस के राहुल का रहा जो पप्पू से कांग्रेस अध्यक्ष बने और जिन्होंने हिन्दी भाषी क्षेत्रों में भाजपा से तीन राज्यों से सत्ता छीनी। इसके अलावा विपक्षी दल की एकजुटता से लगने लगा है कि वे चुनावी लाभ के लिए अपनी प्रतिद्वंदिता भुला सकते हैं। चाहे उत्तर प्रदेश में मायावती की बसपा और अखिलेक्ष की सपा के बुआ भतीजे हों या कर्नाटक में राहुल की कांग्रेस और गौड़ा की जद (एस) हो और तेलंगाना में कांग्रेस तथा तेदेपा हों। किंतु क्या यह एकजुटता 2019 में भी बनी रहेगी?</p>
<p style="text-align:justify;">इस राजनीतिक आक्रोश और आम आदमी द्वारा रोटी, कपड़ा और मकान के लिए संघर्ष से जूझने के बीच नए वर्ष में गुस्साई जनता बदलाव की आशा कर रही है। आज जनता नए महाराजाओं से खिन्न है जो कुछ लोग अन्य लोगों से अधिक समान हैं के ओरवेलियन सिंड्रोम और हमेशा और अधिक की मांग की ओलियर डिसआॅर्डर से ग्रस्त हैं। सामाजिक मोर्चे पर भी स्थिति निराशाजनक है। स्वतंत्रता के सात दशकों बाद और शिक्षा, स्वास्थ्य और भोजन पर खरबों रूपए खर्च करने के बाद भी देश की 70 प्रतिशत जनसंख्या भूखी, अशिक्षित और बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित है। उसके पास कोई कौशल नहीं है। देश में जातिवाद और सांप्रदायिकता बढ़ती जा रही है। असहिष्णुता और अपराधीकरण भी बढ़ता जा रहा है। इसका दु:खद पहलू यह भी है कि आम आदमी का व्यवस्था के प्रति मोह भंग हो रहा है जो कभी भी आक्रोश का रूप ले सकता है। किसी भी मोहल्ला, जिला या राज्य में चले जाओ स्थिति वही निराशाजनक है। जिसके चलते अधिकाधिक लोग कानून अपने हाथ में ले रहे हैं तथा दंगा, लूट खसोट और बसों को जलाने की घटनाएं बढ़Þ रही हैं। देश की राजधानी दिल्ली में रोड़ रेज में हत्याओं की घटनाएं बढ़Þ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी व्यवस्था इतनी बीमार हो गई है कि चलती रेलगाड़ियों में महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा है और सह यात्री मूक दर्शक बने हुए हैं। जिनके चलते हमारा देश अंधेर नगरी बन गया है। गरीब मुस्लमानों के पुन: धर्मान्तरण के घर वापसी कार्यक्रम और हिन्दू लड़कियों को फुसलाकर विवाह करने वाले मुस्लिम लड़कों के विरुद्ध लव जिहाद से लेकर मी टू अभियान में देश में यौन उत्पीड़न छेड़छाड़ की घटनाओं और राजनेताओं बड़ी हस्तियों, अभिनेताओं, लेखकों विज्ञापन निमार्ताओं, संगीतारों आदि द्वारा यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और हमले के कई प्रकरण सामने आए हैं जो समाज पुरातनपंथी सोच के साथ जी रहा हो वहां पर महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता को अनैतिकता माना जाता है। देश में महिलाओं के प्रति सम्मान का अभाव दर्शाया गया है जिसके चलते वे ऐसे लोगों की शिकार बनती रहती हैं हालांकि महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं। विडंबना देखिए। लोक सभा द्वारा तीन तलाक विधेयक को पारित किया गया और इसमें तीन तलाक की प्रथा को अपराध माना गया है। यह कानून स्थिति में बदलाव लाने वाला है और इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। इससे न केवल 21वीं सदी की मुस्लिम महिलाएं मुस्लिम पर्सनल कानून के शिकंजे से मुक्त होंगी अपितु उन्हें कानून के समक्ष समानता मिलेगी और लिंग के आधार पर उनके साथ हो रहा भेदभाव दूर होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि विपक्ष का कहना है कि इस कानून के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया रहा है। न केवल समाज में बदलाव की आवश्यकता है अपितु हमारी अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने की आवश्यकता है। नोटबंदी के बाद लगता है नमो एंड कंपनी भटक गयी है। वे दिशाहीन बन गए हैं। वे महंगाई, कृषि संकट, बढ़ती बेरोजगारी जैसी मुख्य समस्याओं का निराकरण नहीं कर पाए हैं। क्या इस वर्षान्त तक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.2-7.5 प्रतिशत रहने से लोगों की समस्याएं दूर हो जाएगी या महंगाई पर अंकुश लगेगा? यही नहीं चार वर्ष के अंतराल में रिजर्व बैंक के दो गर्वनरों और सरकार के दो मुख्य आर्थिक सलाहकारों ने त्यागपत्र दिया है। किसानों में निराशा व्याप्त है और किसानों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं। हालांकि अब सरकार ने किसानों को राहत पैकेज देने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की है। गैलप सर्वे में पाया गया है कि 2014 में 1 से 10 के पैमाने पर भारतीय 4.4 पर थे और अब वे 4 पर आ गए हैं। 14 प्रतिशत लोगों का मानना था कि उन्होने प्रगति की है। आज उनकी संख्या केवल 4 प्रतिशत रह गयी है। 2014 में दो वक्त की रोटी जुटाने में दिक्कतों का सामना करने वाले लोगों की संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में 28 प्रतिशत थी जो आज 41 प्रतिशत है और शहरी क्षेत्रों में 18 प्रतिशत थी जो आज 26 प्रतिशत है। आम आदमी का पेट जुमलों से भरा जा रहा है। राजनीतिक क्षितिज पर कोई आशा की किरण नहीं दिखायी दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोग विकल्प कल तलाश कर रहे हैं। भाजपा नीत राजग पतनोन्मुखी है किंतु क्या कांग्रेस या प्रस्तावित महागठबंधन विकल्प उपलब्ध करा पाएगा? यह सच है कि हमें वैसे ही नेता मिले हैं जिनके हम हकदार हैं। किंतु प्रश्न यह भी उठता है कि क्या ये नेता हमारे लायक हैं। हम अपनी आत्मा को ऐसे छोटे लोगों के पास गिरवी रखने जा रहे है। कुल मिलाकर हमारे नेताओं को लोगों का गुस्सा कम करने का प्रयास करना होगां। समय आ गया है कि जब जनता विशेषकर मौन रहने वाली जनता देश की हर कीमत पर सत्ता प्राप्त करने की राजनीति से परे सोंचे और गुंडे बदमाशों को राजनीति से बाहर खदेडें। हमारे राष्ट्रीय जीवन में सत्यनिष्ठा और ईमानदारी लाए जाने की आवश्यकता है। हम नव वर्ष 2019 में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए हमारे नेताओं को इन खामियों को दूर कर जिम्मेदारी लेनी होगी। अपने तौर-तरीके बदलने होंगे और शासन की वास्तविक समस्याओं का निराकरण करना होगा। लोग रोजगार, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहते हैं। हमें ऐसे नेता चाहिए जो साहसी और दृढ़ विश्वासी हों तथा जो नए भारत का निर्माण कर सकें। कठिन समय में कठिन निर्णय लेने की आवश्यकता है किंतु मूल प्रश्न है: कौन विजेता बनेगा? क्या जो विजेता बनेगा वह कठोर कदम लेने में सक्षम होगा? क्या वह अपनी इच्छाशक्ति का उपयोग कर पाएगा? हां। हम आशा करते हैं कि 2019 में भारत में ऐसा देखने को मिलेगा।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>पूनम आई कौशिश</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jan 2019 10:21:16 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अब बैंक खाते और सिम के लिए आधार जरूरी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[कानून में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी नई दिल्ली। सरकार बैंकों और मोबाइल फोन कंपनियों को ग्राहकों के ईकेवाइसी के लिए आधार का विकल्प फिर से देने जा रही है। (No Need For Aadhar Card Bank Account And SIM) हालांकि यह अनिवार्य नहीं होगा। आधार कानून में संशोधन कर सरकार ग्राहकों के लिए इन सेवाओं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/no-need-for-aadhar-card-bank-account-and-sim/article-7034"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/no-need-for-aadhar-card-bank-account-and-sim-now-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1>कानून में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सरकार बैंकों और मोबाइल फोन कंपनियों को ग्राहकों के ईकेवाइसी के लिए आधार का विकल्प फिर से देने जा रही है। (No Need For Aadhar Card Bank Account And SIM) हालांकि यह अनिवार्य नहीं होगा। आधार कानून में संशोधन कर सरकार ग्राहकों के लिए इन सेवाओं में आधार का इस्तेमाल वैकल्पिक कर रही है। अर्थात यदि ग्राहक चाहे तो वह बैंकों और मोबाइल सिम के ईकेवाइसी के लिए आधार का इस्तेमाल कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इस आशय के एक प्रस्ताव पर सोमवार को मुहर लगा दी। सरकार औपचारिक तौर पर इसकी घोषणा संसद में करेगी। सरकार अब इस आशय का विधेयक संसद के मौजूदा सत्र में ही पेश कर सकती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">यदि ग्राहक चाहे तो वह बैंकों और मोबाइल सिम के ईकेवाइसी के लिए आधार का इस्तेमाल कर सकता है</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रस्ताव के मुताबिक इसके लिए प्रिवेन्शन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) और  टेलीग्राफ एक्ट में भी  संशोधन करेगी।  संशोधन के बाद पीएमएलए के तहत आधार को वैध दस्तावेज की मान्यता मिल जाएगी। दैनिक जागरण ने 29 नवंबर को इस आशय का समाचार प्रकाशित किया था कि सरकार कानून में संशोधन के जरिए यह सुविधा प्रदान करने जा रही है। संसद से कानून बन जाने के बाद लोगों के पास बैंक खातों और मोबाइल सिम खरीदने के लिए आधार के इस्तेमाल का विकल्प भी होगा। इसी साल 26 सितंबर को आधार की अनिवार्यता के मसले पर ऐतिहासिक निर्णय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी से मिलने वाली विभिन्न सब्सिडी और छात्रवृत्तियों को छोड़कर बाकी चीजों के लिए आधार की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने फैसले में अदालत ने आधार अधिनियम की धारा 57 को ही समाप्त कर दिया था जिसके तहत केंद्र व राज्य सरकार और कंपनियों को ईकेवाइसी के लिए आधार मांगने का अधिकार मिला था। फैसले के बाद न केवल वित्त मंत्री अरुण जेटली बल्कि कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा भी था कि बैंक या मोबाइल कंपनियों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन सुनिश्चित कराने के लिए सरकार कानून में बदलाव भी करेगी। सरकार इस संशोधन को शीतकालीन सत्र में ही पारित कराना चाहती है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मौजूदा सरकार के लिए संसद का यही एक पूर्णकालिक सत्र बचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">फरवरी में अंतरिम बजट प्रस्तुत करने के लिए एक लघु सत्र बुलाया जाएगा। उसके बाद मार्च-अप्रैल 2019 में आम चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप नियम बनाने के लिए यह आवश्यक है कि आधार अधिनियम में संशोधन संसद के इसी सत्र में ही करा लिया जाए।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Dec 2018 13:22:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान : गहलोत ने मुख्यमंत्री और पायलट ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली</title>
                                    <description><![CDATA[अशोक गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने जयपुर। अशोक गहलोत ने सोमवार को राजस्थान के 22वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल कल्याण सिंह ने (Rajasthan Gehlot Takes Oath As Chief Minister ) उन्हें शपथ दिलाई। वे तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने हैं। उनके साथ सचिन पायलट ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajasthan-gehlot-takes-oath-as-chief-minister/article-7010"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/rajasthan-gehlot-takes-oath-as-deputy-chief-minister-by-chief-minister-and-pilot.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">अशोक गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर। </strong>अशोक गहलोत ने सोमवार को राजस्थान के 22वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल कल्याण सिंह ने (Rajasthan Gehlot Takes Oath As Chief Minister ) उन्हें शपथ दिलाई। वे तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने हैं। उनके साथ सचिन पायलट ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ के दौरान सचिन लाल पगड़ी बांधे हुए थे। समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मौजूद रहे।</p>
<h2>छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल शाम 5 बजे शपथ लेंगे</h2>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शामिल हुईं। शपथ ग्रहण में संभावित महागठबंधन के 12 दलों के नेता नजर आए। गहलोत-पायलट के शपथ ग्रहण में कांग्रेस से राहुल, मनमोहन के अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे, पुड्डुचेरी (Rajasthan Gehlot Takes Oath As Chief Minister) के सीएम वी नारायणसामी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कुमारी शैलजा, जतिन प्रसाद, नवजोत सिंह सिद्धू मौजूद थे। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी मौजूद नहीं थीं।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Dec 2018 13:40:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सबरीमाला : प्रवेश के लिए 18 सीढ़ी चढ़ना, सिर पर पोटली और 41 दिन का व्रत जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[सबरीमाला। भगवान अय्यपा के दर्शन के लिए सबरीमाला मंदिर आने वाले भक्तों के लिए कुछ नियम तय हैं। उन्हें सिर पर इरुमुडी (एक खास पोटली) रखकर मुख्य द्वार की अठारह सीढ़ियां चढ़ना पड़ती हैं। इससे पहले उन्हें 41 दिन व्रत रखना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मंदिर में 10 साल की लड़की से लेकर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sabarimala-18-climbing-stairs-head-bundle-and-41-day-fast-jor-entry/article-6376"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/sabarimala-18-climbing-stairs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सबरीमाला।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भगवान अय्यपा के दर्शन के लिए सबरीमाला मंदिर आने वाले भक्तों के लिए कुछ नियम तय हैं। उन्हें सिर पर इरुमुडी (एक खास पोटली) रखकर मुख्य द्वार की अठारह सीढ़ियां चढ़ना पड़ती हैं। इससे पहले उन्हें 41 दिन व्रत रखना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मंदिर में 10 साल की लड़की से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश की हाल ही में अनुमति दी है। हालांकि, बुधवार को मंदिर के पट खुलने के बाद से अभी तक विरोध की वजह से यहां इस उम्र वर्ग की कोई भी लड़की या महिला प्रवेश नहीं कर पाई है। सबरीमाला मंदिर के मुख्य द्वार की 18 सीढ़ियों से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार पहली पांच सीढ़ियां पांच इंद्रियों का प्रतीक हैं। अगली आठ मनुष्य के आठ भावों के प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद तीन सीढ़ियां तीन गुणों को दर्शाती हैं और आखिरी दो सीढ़ियां विद्या और अविद्या की प्रतीक हैं। इन सीढ़ियों को 18 पुराणों, सबरीमाला के आसपास के 18 पहाड़ों, अयप्पा के 18 शस्त्रों, 18 सिद्ध पुरुषों, 18 देवताओं और 18 गुणों से भी जोड़ा जाता है। इन पर चढ़ने के नियम भी कठिन हैं। 18 सीढ़ियों को पतिनेत्तामपदी कहा जाता है। ये ग्रेनाइट से बनी हैं। 1985 में इन्हें सोना, चांदी, तांबा, लोहा और टिन के मिश्रण से ढंक दिया गया। ये सीढ़ियां सबरीमाला मंदिर को बाकी के स्वामी अयप्पा मंदिरों से अलग बनाती हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Oct 2018 15:45:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फरीदाबाद: 4 भाई-बहनों ने लगाई फांसी</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ/राजेन्द्र दहिया फरीदाबाद। गरीबी में मुफलिसी की जिंदगी जी रहे तीन बहन और एक भाई ने फांसी के फंदे से लटककर की आत्महत्या। जी हां मामला दिल्ली से सटे फरीदाबाद के दयालबाग का है, जहां गरीबी और बीमारी से परेशान होकर तीनों बहनों ने अपने भाई के साथ मौत को गले लगा लिया। परिवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/faridabad-4-brothers-and-sisters-hanged/article-6374"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/faridabad-4-brothers-and-s.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/राजेन्द्र दहिया फरीदाबाद।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">गरीबी में मुफलिसी की जिंदगी जी रहे तीन बहन और एक भाई ने फांसी के फंदे से लटककर की आत्महत्या। जी हां मामला दिल्ली से सटे फरीदाबाद के दयालबाग का है, जहां गरीबी और बीमारी से परेशान होकर तीनों बहनों ने अपने भाई के साथ मौत को गले लगा लिया। परिवार के चारों लोग एक ही मकान में रह रहे थे और सभी की उम्र 30 से 40 साल के बीच बताई जा रही है। मृतकों ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। इसके पीछे कुछ ही दिन पहले मां बाप की मौत, गरीबी और बीमारी को वजह बताया है। दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली इस घटना के पीछे दिल्ली एनसीआर जैसी जगह पर गरीबी की वजह से मौत को गले लगाने के पीछे भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि दयालबाग सूरजकुंड क्षेत्र में दिल्ली से सटा हुआ एरिया है, जहां प्रदीप अपनी बहन मीणा जया और बीना के साथ एक ही मकान में किराए पर रहता था। इनके पिता और मां की मौत भी करीब 1 से 2 महीने पहले ही हुई थी। चारों अविवाहित थे और कोई भी काम धंधा नहीं करते थे। शनिवार सुबह अपार्टमेंट में चौकीदारी करने वाले राजकुमार ने पुलिस को सूचना दी कि एक मकान से बदबू आ रही है और कुछ लोगों के मृत पड़े होने के सूचना है। इस पर मौके पर पहुंची पुलिस ने जाकर देखा तो तीनों बहन और भाई के साथ मकान में अलग-अलग कमरों में फांसी के फंदे पर झूलते दिखाई दिए।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Oct 2018 14:37:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुखों का टूटा पहाड़ व राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[अमृतसर में दशहरा पर्व के दिन घटित रेल हादसा बेहद दर्दनाक था, जिसने 60 से अधिक जिंदगीयों को निगल लिया। हादसे की चीख पुकार इस कारण भी दर्दनाक है कि यह हादसा एक खुशी के पर्व पर हुआ। रावण दहन को देखने पहुंचे दर्जनों लोग कुछ सैकिंड में रेलगाड़ी की चपेट में आ गए। नि:संदेह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/broken-mountains-and-politics-of-sorrow/article-6371"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/broken-mountains-and-politics-of-sorrow.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमृतसर में दशहरा पर्व के दिन घटित रेल हादसा बेहद दर्दनाक था, जिसने 60 से अधिक जिंदगीयों को निगल लिया। हादसे की चीख पुकार इस कारण भी दर्दनाक है कि यह हादसा एक खुशी के पर्व पर हुआ। रावण दहन को देखने पहुंचे दर्जनों लोग कुछ सैकिंड में रेलगाड़ी की चपेट में आ गए। नि:संदेह इस मामले में संबंधित विभागों के अधिकारियों की जिम्मेवारी तय होनी है लेकिन हाल-फिलहाल मृतकों को सांत्वना देना व घायलों का इलाज करवाना जरूरी है। पूरे शहर में शोक की लहर का माहौल है व पूरा देश इस हादसे से दुखी है। बड़ी हैरानी की बात है कि चीख पुकार में राजनेता अपनी सियासी रोटियां सेकने की आदत से बाज नहीं आए। किसी नेता ने घायलों का हालचाल पूछा हो या नहीं, किसी मृतक के परिवार को हौंसला दिया हो या नहीं, लेकिन टीवी पर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप से पीछे नहीं हट रहे। मृतकों के परिवार में मातम पसरा हुआ है, जिन्हें सांत्वना देने की जरूरत थी। दूसरी तरफ अभी मृतक देहों का संस्कार भी नहीं हुआ था कि नेताओं ने अगले दिन ही प्रैस कांफ्रैंस कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">अकाली नेता सुखबीर बादल, बिक्रम मजीठिया, हरसिमरत कौर बादल ने जमकर बयानबाजी की व कांग्रेस के एक मंत्री से इंस्तीफा मांगा। दरअसल राजनेता एक दूसरे की जो गलतियां उछाल रहे हैं यदि यह हादसे से संबंधित कार्यक्रम के प्रबंधों की खामियों की जनता के सामने पहले ही खोल देते तो फिर ही इन लोगों को हमदर्द समझा जा सकता था। अब घड़ियाली आंसू बहाने व मीडिया को सुनाने की बजाए नेता दुखियों के दुख में शामिल हों। मृतकों की चिता की आग को ठंडी नहीं होने दिया। रेलवे पटरी पर बहा खून प्रशासनिक लापरवाहियों को उजागर करता है। प्रशासन बड़े कार्यक्रमों को कैसे न कैसे निपटाने तक सीमित रहता है, सभ्य प्रबंध करने की बजाय, समय निकालने की विचारधारा हावी है। राजनेता सत्ताधारी हों या विरोधी, किसी को लोगों के हितों व कार्यक्रमोंं की सुरक्षा की चिंता नहीं होती। समय के बदलने के साथ-साथ कार्यक्रमों के प्रबंधों में कोई बदलाव नहीं किया जाता। सत्तापक्ष अपना नाम चमकाने व विपक्ष हादसा होने के बाद निंदा का राग अलापते हैं। इस जोर-आजमाइश में आम जनता पिस रही है, एक दुखदाई घटना घट जाती है, जिससे सबक नहीं लिया जाता। फिर एक और घटना घट जाती है। सत्तापक्ष व विपक्ष में निंदा की जंग जारी रहती है। यहां व्यक्ति को केवल आंकड़े माना जाता है, भावना व रिश्तों का कोई मूल्य नहीं।</p>
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                <pubDate>Sun, 21 Oct 2018 12:38:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कराटे में जीते 8 स्वर्ण, 6 रजत व 4 कांस्य पदक</title>
                                    <description><![CDATA[होशियारपुर (सच कहूँ न्यूज)। दि ब्लैक मांबा मार्शल आर्ट्स स्पोर्ट्स क्लब/अकादमी होशियारपुर के खिलाड़ियों द्वारा गत दिवस ताइक्वांडो एसोसिएशन की तरफ से आयोजित हुई कराटे प्रतियोगिता में अलग-अलग भार वर्ग में 8 स्वर्ण, 6 रजत और 4 कांस्य पदक जीतकर अकादमी का नाम रोशन किया था। पदक विजेताओं के साथ-साथ प्रतियोगिता में भाग लेने वाले […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/8-gold-6-silver-and-4-bronze-medals-won-in-karate/article-6326"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/kjkj-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>होशियारपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">दि ब्लैक मांबा मार्शल आर्ट्स स्पोर्ट्स क्लब/अकादमी होशियारपुर के खिलाड़ियों द्वारा गत दिवस ताइक्वांडो एसोसिएशन की तरफ से आयोजित हुई कराटे प्रतियोगिता में अलग-अलग भार वर्ग में 8 स्वर्ण, 6 रजत और 4 कांस्य पदक जीतकर अकादमी का नाम रोशन किया था। पदक विजेताओं के साथ-साथ प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाडि?ों को अकादमी की तरफ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विशेष तौर से पहुंचे अकादमी के चेयरमैन सी.ए. नीरज ओहरी ने अकादमी को भविष्य में भी उमदा प्रदर्शन करने हेतु प्रोत्साहित किया और बच्चों के लिए खेल का सामान आदि खरीदने हेतु 11 हजार रुपये की राशि प्रधान राज कुमार मरवाहा को भेंट की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेने की प्रेरणा दी और कहा कि खेल से अनुशासन एवं आपसी तालमेल की भावना बढ़ती है, जो व्यक्ति के जीवन का आधार हैं। उन्होंने कहा कि अकादमी द्वारा भविष्य में भी खिलाड़ियों को और बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार किया जाएगा। इस अवसर पर साहिल शर्मा, कोच रोहित मरवाहा तथा कोच गौतम मरवाहा भी मौजूद थे और उन्होंने भी खिलाड़ियों को उमदा प्रदर्शन के लिए बधाई दी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Oct 2018 14:17:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आपसी सौहार्द व सद्भावना, चुनावी प्रक्रिया पर हावी</title>
                                    <description><![CDATA[शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थाओं में सभी पदों पर निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार सच कहूँ सरसा। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की शिक्षाओं का असर न केवल करोड़ों जन मानस को प्राप्त है। बल्कि उनका व्यापक प्रभाव युवा वर्ग पर भी खासा है। करीब 22 वर्षों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mutual-goodwill-and-goodwill-dominate-the-electoral-process/article-6323"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/mutual-goodwill-and-goodwill-dominate-the-electoral-process-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थाओं में सभी पदों पर निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार</h1>
<p style="text-align:justify;">सच कहूँ सरसा।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की शिक्षाओं का असर न केवल करोड़ों जन मानस को प्राप्त है। बल्कि उनका व्यापक प्रभाव युवा वर्ग पर भी खासा है। करीब 22 वर्षों बाद प्रदेश भर में जहां एक ओर तमाम शैक्षणिक संस्थाओं में नीतियों के आधार पर एक-दूसरे छात्र-संगठनों को नीचा दिखाते हुए छात्र संघ के चुनाव में मतदान की प्रकिया हुई। वहीं सरसा में एक मात्र शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थान (बॉयज एंड गर्ल्ज कॉलेज) ही ऐसे संस्थान के रुप में चर्चित रहे जहां क्लास रिप्रेजेंटेटिव सहित प्रधान, उपप्रधान, सचिव व सदस्य आदि सभी पदों के लिए आवेदन करने वाले छात्र प्रतिनिधियों को निर्विरोध उनके पदों पर चुन लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बीए मास कम्यूनिकेशन तृतीय वर्ष के छात्र कपिल ढाका बने प्रधान:</strong> सर्व सहमति से शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज के बीए मास कम्यूनिकेशन तृतीय वर्ष के छात्र कपिल ढाका को महाविद्यालय प्रधान, एम कॉम द्वितीय वर्ष के मोहित को उप प्रधान, बीपीएड सैकिंड के सुखजिन्द्र सिंह को सचिव व बीएससी फाइनल ईयर के छात्र अमन को संयुक्त सचिव के तौर पर चयनित किया। अजय बीएससी नॉन मेडिकल प्रथम वर्ष, नवदीप कम्बोज बीएससी द्वितीय वर्ष, जगमीत सोनी एमएससी ज्योग्राफी, अमर सिंह डीपीएड प्रथम, बिक्रमजीत सिंह बीए फाइनल को सर्व सम्मति से कार्यकारिणी परिषद सदस्यों के तौर पर चयनित किया गया। इसके अतिरिक्त चुने गए कक्षा प्रतिनिधियों में नरेंद्र बीए प्रथम, मुकेश जयपाल बीएएमसी प्रथम, दिनेश लाम्बा बीएएमसी द्वितीय, आशिष बीसीए प्रथम, अर्जुन बीए द्वितीय, सचिन बीकॉम प्रथम, कशिश बीकॉम द्वितीय, विक्रम बीकॉम तृतीय, संदीप सिंह एमएससी मैथ फर्स्ट, अनिल कुमार एमएसी मैथ सैकिंड, अमरदीप एमएएमसी प्रथम, संदीप कुमार एमएएमसी द्वितीय वर्ष, प्रभजोत सिंह डीपीएड प्रथम व मनीष बीएससी नॉन मेडिकल सैकिंड आदि के नाम शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शाह सतनाम जी गर्ल्ज कॉलेज में ज्योति को चुना गया निर्विरोध प्रधान:</strong> शाह सतनाम जी गर्ल्ज कॉलेज में एमएससी मैथ्स प्रथम वर्ष की ज्योति को कॉलेज का निर्विरोध प्रधान बीएएमसी तृतीय वर्ष की रीना को निर्विरोध ही उपप्रधान चुना गया। बीकॉम द्वितीय वर्ष की गुरप्रीत को सचिव व बीएएमसी प्रथम वर्ष की शिक्षा को सह सचिव चुना गया। इसके अलावा एमएससी मैथ्स द्वितीय वर्ष की शिवानी, बीए तृतीय वर्ष की आदेश, बीएएमसी द्वितीय वर्ष की सोनिका, बीए द्वितीय वर्ष की गरिमा व बीसीए प्रथम की ज्योति को कार्यकारी सदस्य के रुप में चुना गया। इसके अलावा रविना, गगनदीप कौर, नवनीत कैर,ममता, रमनप्रीत, तमना, पूनम, सोनिका, सोनाली, अर्शदीप, रमन, सिमरन, कोमल,अनुराधा,सोनम, कपिस्या पूनिया आदि को क्लास रिप्रेजेंटेटिव चुना गया। शाह सतनाम जी गर्ल्ज कॉलेज में चुनाव कमेटी में डॉ. रिशू सिंह, मोनिका, पूनम धमीजा, तुलसी व रेणू दारा शामिल थी।</p>
<p>शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसबी आनंद इन्सां व गर्ल्ज कॉलेज की प्राचार्या गीता मोंगा इन्सां ने संयुक्त रुप से बताया कि डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से शाह सतनाम जी गर्ल्ज व बॉयज कॉलेज में क्लास रिप्रेजेंटेटिव सहित प्रधान, उपप्रधान, सचिव व सदस्य आदि सभी पदों पर उम्मीदवारों का चयन निर्विरोध किया गया।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Oct 2018 13:59:40 +0530</pubDate>
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                <title>रोडवेज कर्मचारी व सरकार आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[कर्मियों पर कार्रवाई: अनेक गिरफ्तार, निलम्बित और बर्खास्त भिवानी (सच कहूँ)। राज्य परिवहन कर्मचारियों की हड़ताल के दूसरे दिन भिवानी में जहां एक ओर कर्मचारी नारेबाजी करते रहे, वही दूसरी ओर बसें चलती रही। सुबह तय रूटों पर बसें रवाना की गई। भले ही रोड़वेज कर्मचारियों की हड़ताल का कई जिलों में व्यापक असर देखने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/roadways-employees-and-government-face-to-face/article-6322"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/roadways-employees-and-government-face-to-face.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">कर्मियों पर कार्रवाई: अनेक गिरफ्तार, निलम्बित और बर्खास्त</h1>
<p style="text-align:justify;">भिवानी (सच कहूँ)।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य परिवहन कर्मचारियों की हड़ताल के दूसरे दिन भिवानी में जहां एक ओर कर्मचारी नारेबाजी करते रहे, वही दूसरी ओर बसें चलती रही। सुबह तय रूटों पर बसें रवाना की गई। भले ही रोड़वेज कर्मचारियों की हड़ताल का कई जिलों में व्यापक असर देखने को मिल रहा हो, मगर भिवानी में इसका असर ना के बराबर है। भिवानी में एसडीएम एवं रोड़वेज महाप्रबंधक सतीश कुमार की अगुवाई में बसों का परिचालन देखा गया। वहीं कर्मचारी नारेबाजी करते रहे। दूसरी ओर रोड़वेज जीएम एवं भिवानी के एसडीएम सतीश कुमार सैनी का कहना था कि मंगलवार भी बसें सुचारू रूप से चली थी व बुधवार को भी उनका परिचालन सुचारू करवाया जा रहा है। उनका कहना था कि एस्मा के तहत कर्मचारियों की ड्यूटियां तय की गई है व छुट्टियां रद्द की गई हैं। इस बीच दो कर्मचारियों के निष्कासन एवं आधा दर्जन का अनुबंध रद्द किए जाने के अलावा एस्मा के तहत कार्रवाई किए जाने की पुष्टि भी उन्होंने की।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बसों के संचालन पर भिड़ते रहे कर्मचारी: </strong>रोहतक में कर्मचारियों ने सुबह पहली बस नहीं निकलने दी। पूरे दिन में 22 बसें ही डिपो से निकल पाईं। सरसा में 179 में से 27 बसें चली तो यमुनानगर की 160 में से केवल पांच बसें ही बस अड्डे से निकलीं। हिसार में सुबह सवा घंटे की देरी से पहली बस निकली, लेकिन बीच रास्ते में चालक-परिचालक बस को छोड़कर चलते बने। पानीपत में रोडवेज बेड़े की 140 में से 120 और जींद में 172 बसें डिपो में ही खड़ी रहीं। कैथल में 20 और अंबाला व कुरुक्षेत्र में 30-30 बसें गंतव्य की ओर रवाना हुई। हालांकि झज्जर में हड़ताल का असर बेहद कम रहा और ज्यादातर बसें निर्धारित रूटों पर चली।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार हठधर्मिता व टकराव की नीति बनाकर निजीकरण की आड़ में बड़ा घोटाला कर रही है। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला कैथल में तालमेल कमेटी लेगी, लेकिन सरकार को झुकाने के लिए हड़ताल जारी रखनी चाहिए। बता दें कि प्रदेश सरकार ने रोड़वेज के बेड़े में 720 निजी बसों को प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान करने पर शामिल करने का निर्णय लिया है। सरकार पहले इन बसों को 16-17 रूपये प्रति किलोमीटर के भुगतान पर ला रही थी और अब 35 से 42 रूपये प्रति किलोमीटर भुगतान करेगी। एक बस रोजाना 300 किलोमीटर चलेगी और उसे रोजाना सरकार पांच हजार रूपये के हिसाब से सालाना करीब 20 लाख रूपये ज्यादा भुगतान कर विभाग को घाटे में लाएगी।<br />
बलदेव घणघस, प्रदेश अध्यक्ष, रोड़वेज यूनियन एटक।</p>
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                <pubDate>Thu, 18 Oct 2018 13:47:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पृथ्वी और रिषभ को आईसीसी बल्लेबाजी रैंकिंग में उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत के युवा स्टार पृथ्वी शॉ और रिषभ पंत ने भारत और वेस्टइंडीज़ के खिलाफ दो टेस्टों की सीरीज़ के बाद सोमवार को जारी आईसीसी की ताज़ा टेस्ट रैंकिंग में जबरदस्त छलांग लगाई है जबकि करियर में पहली बार 10 विकेट की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी करने वाले तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव को भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/prithvi-and-rishabh-bounce-in-icc-batting-rankings/article-6290"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/prithvi-and-rishabh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भारत के युवा स्टार पृथ्वी शॉ और रिषभ पंत ने भारत और वेस्टइंडीज़ के खिलाफ दो टेस्टों की सीरीज़ के बाद सोमवार को जारी आईसीसी की ताज़ा टेस्ट रैंकिंग में जबरदस्त छलांग लगाई है जबकि करियर में पहली बार 10 विकेट की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी करने वाले तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव को भी गेंदबाज़ी रैंकिंग में फायदा मिला है। विंडीज़ के खिलाफ सीरीज़ में मैन आॅफ द् सीरीज़ बने युवा बल्लेबाज़ और अपनी कप्तानी में न्यूजीलैंड में हुए आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप में भारत को जीत दिलाने वाले पृथ्वी का वेस्टइंडीज़ के खिलाफ 2-0 की सीरीज़ जीत में अह्म योगदान रहा था। वह हैदराबाद टेस्ट से पहले 73वीं रैंकिंग पर थे लेकिन दूसरे मैच में 70 और नाबाद 33 रन की पारियों से उन्हें 13 स्थान का सुधार मिला और वह अब बल्लेबाज़ी रैंकिंग में 60वें नंबर पर पहुंच गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पृथ्वी ने राजकोट में अपने पदार्पण टेस्ट में शतक लगाया था। उनके अलावा युवा विकेटकीपर बल्लेबाज़ रिषभ पंत ने भी अपने प्रदर्शन से रैंकिंग में सुधार किया है। उन्होंने दोनों मैचों में 92, 92 रन की बड़ी पारियां खेलीं और 23 स्थान उठकर 62वें नंबर पर पहुंच गए हैं। दिल्ली के बल्लेबाज़ ने सीरीज़ की शुरुआत 111वीं रैंकिंग के साथ की थी। भारतीय टेस्ट उपकप्तान अजिंक्या रहाणे चार स्थान के सुधार के साथ 18वें नंबर पर पहुंच गए हैं। दूसरी ओर टेस्ट गेंदबाज़ी रैंकिंग में उमेश यादव को चार स्थान का फायदा हुआ है और वह भी 25वें नंबर पर पहुंच गए हैं। उमेश भारत के मात्र तीसरे तेज़ गेंदबाज़ हैं जिन्होंने घरेलू मैदान पर टेस्ट मैच में 10 विकेट लिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">टेस्ट आॅलराउंडरों में भी जडेजा अपने दूसरे और अश्विन अपने पांचवें स्थान पर बरकरार हैं। जडेजा ने राजकोट टेस्ट में अपने करियर का पहला टेस्ट शतक बनाया था। विपक्षी टीम वेस्टइंडीज़ के लिए कप्तान जेसन होल्डर को उनके हरफनमौला खेल के लिए रैंकिंग में फायदा हुआ है। उन्होंने दूसरे मैच में 56 रन पर भारत के पांच विकेट लिए थे जिससे वह गेंदबाज़ों में करियर में सर्वश्रेष्ठ नौवीं रैंकिग पर पहुंच गए हैं। उन्हें चार स्थान का फायदा मिला है जबकि अपनी शतकीय पारी से उन्हें बल्लेबाजी और आॅलराउंडर रैंकिंग में भी सुधार मिला है। होल्डर बल्लेबाजी रैंकिंग में 53वें नंबर पर पहुंच गए हैं जबकि आॅलराउंडरों में वह दक्षिण अफ्रीका के वेर्नोन फिलेंडर को पीछे छोड़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भारतीय कप्तान विराट शीर्ष पर बरकरार:</strong> भारतीय कप्तान विराट कोहली का भी सीरीज़ में शानदार प्रदर्शन रहा था और वह टेस्ट बल्लेबाज़ों में अपने शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं। शीर्ष 10 टेस्ट बल्लेबाजों में दूसरे भारतीय चेतेश्वर पुजारा छठे नंबर पर हैं जबकि खराब फार्म में चल रहे ओपनर लोकेश राहुल की रैंकिंग में गिरावट आई है और वह 23वें नंबर पर खिसक गए हैं। टेस्ट गेंदबाजी रैंकिंग में आॅलराउंडर रवींद्र जडेजा अपने चौथे और आॅफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन अपने आठवें स्थान पर बरकरार हैं। वहीं उमेश यादव की रैंकिंग में सुधार हुआ है जो 25वें नंबर पर पहुंच गए हैं। शीर्ष टेस्ट गेंदबाज़ इंग्लैंड के जेम्स एंडरसन अपने स्थान पर बरकरार हैं।</p>
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                <pubDate>Tue, 16 Oct 2018 15:26:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टेस्ट शृंखला में उमेश और भारत का ‘परफेक्ट-10’</title>
                                    <description><![CDATA[आखिरी टेस्ट में विंडीज को 10 विकेट से दी करारी शिकस्त Umesh in the Test series and India’s Perfect-10 हैदराबाद (एजेंसी)। तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव (133 रन पर 10 विकेट) के करियर की शानदार गेंदबाज़ी की बदौलत  भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ दूसरे एवं अंतिम क्रिकेट टेस्ट के तीसरे ही दिन रविवार को 10 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/umesh-in-the-test-series-and-indias-perfect-10/article-6276"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/umesh-in-the-test-series-and-indias-perfect-10-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">आखिरी टेस्ट में विंडीज को 10 विकेट से दी करारी शिकस्त Umesh in the Test series and India’s Perfect-10</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हैदराबाद (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव (133 रन पर 10 विकेट) के करियर की शानदार गेंदबाज़ी की बदौलत  भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ दूसरे एवं अंतिम क्रिकेट टेस्ट के तीसरे ही दिन रविवार को 10 विकेट से एकतरफा जीत अपने नाम करने के साथ सीरीज़ में 2-0 से क्लीन स्वीप कर ली। भारत ने वेस्टइंडीज़ की दूसरी पारी को 46.1 ओवर में 127 रन पर ढेर कर दिया था जिससे उसे 72 रन का मामूली लक्ष्य हासिल हुआ था और उसने तीसरे दिन के खेल की समाप्ति से चंद ओवर पहले बिना कोई विकेट खोए 16.1 ओवर में 75 रन बनाने के साथ जीत अपने नाम कर ली।  युवा बल्लेबाज़ पृथ्वी शॉ ने चौका लगाकर भारत के लिए विजयी रन बटोरा उन्होंने नाबाद 33 रन और लोकेश राहुल ने नाबाद 33 रन की पारियां खेलीं। भारत ने इससे पहले राजकोट टेस्ट को भी तीन दिन में समाप्त कर दिया था जिसमें उसे पारी और 272 रन से करियर की सबसे बड़ी जीत मिली थी। भारत ने इसी के साथ दूसरा मैच 10 विकेट से अपने नाम कर लिया और सीरीज़ को 2-0 से जीता जो उसकी वेस्टइंडीज़ के खिलाफ लगातार सातवीं सीरीज़ जीत है। पहले टेस्ट में शतकीय पारी के साथ पदार्पण करने वाले पृथ्वी ने इस मैच की पहली पारी में 70 रन बनाए थे। भारत को पहली पारी में बढ़त में भी पृथ्वी की अह्म भूमिका रही।</p>
<p style="text-align:justify;">सुबह भारत की पहली पारी लंच तक 367 रन पर सिमट गई थी जिससे उसे 56 रन की बढ़त मिली। भारत की मामूली बढ़त से एक समय वेस्टइंडीज़ मैच में नियंत्रित लग रही थी लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों खासकर 30 वर्षीय अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ उमेश ने अपने प्रदर्शन से मेहमान टीम को उसकी दूसरी पारी में टिकने ही नहीं दिया और ओपनर कार्लाेस ब्रेथवेट को शून्य पर रिषभ पंत के हाथों कैच कराकर दूसरी ही गेंद पर भारत को पहला विकेट दिला दिया। इसके बाद कीरोन पावेल रविचंद्रन अश्विन की गेंद पर अजिंक्या रहाणे को कैच दे बैठे और विंडीज़ के दोनों ओपनर खाता खोले बिना लौट गए। वेस्टइंडीज़ के लिए दूसरी पारी में मध्यक्रम के सुनील अम्ब्ररीस ने 95 गेंदों में चार चौके लगाकर सर्वाधिक 38 रन बनाए और शीर्ष स्कोरर रहे जबकि शाई होप ने 28 रन जोड़े जिन्हें जडेजा ने आउट किया। वेस्टइंडीज़ ने मात्र 68 रन तक अपने पांच विकेट खो दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">रोस्टन चेज़ (06) और शेन डाउरिच (00) पर दोनों बल्लेबाज़ों को बोल्ड किया। कप्तान जेसन होल्डर 19 रन ही बना पाए और रवींद्र जडेजा के हाथों आउट हुए। जेम्स वारिकन (07) को रविचंद्रन अश्विन ने आउट किया और वेस्टइंडीज़ का नौंवा विकेट गिर गया। उमेश अपने 10 विकेट के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से एक विकेट ही दूर थे कि कप्तान विराट कोहली ने उन्हें गेंद देने का फैसला किया और उमेश ने उन्हें निराश नहीं किया और शैनन गैबरिएल (01) को बोल्ड करने के साथ न सिर्फ वेस्टइंडीज़ की पारी समेट दी। इससे पहले भारत की पहली पारी तीसरे दिन लंच तक 106.4 ओवर में 367 रन पर सिमट गई। भारत ने अपने छह विकेट 53 रन के भीतर ही गंवा दिए। भारत ने पारी की शुरुआत कल के चार विकेट पर 308 रन से आगे बढ़ाते हुए की।</p>
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                <pubDate>Mon, 15 Oct 2018 12:13:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इतिहास से वर्तमान व भविष्य की ओर बढ़ते संबंध</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के बेहद खास रिश्ते वाले देशों में ‘बांग्लादेश’ का नाम अग्रणी है, वह भी बांग्लादेश के जन्म के समय से ही। रिश्ते की मजबूती का यह क्रम अनवरत बढ़ा है और यह इस बात से ही समझा जा सकता है कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर बांग्लादेशी समकक्ष की आगवानी की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/moving-from-history-to-present-and-future/article-6089"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/moving-from-history-to-present-and-future-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत के बेहद खास रिश्ते वाले देशों में ‘बांग्लादेश’ का नाम अग्रणी है, वह भी बांग्लादेश के जन्म के समय से ही। रिश्ते की मजबूती का यह क्रम अनवरत बढ़ा है और यह इस बात से ही समझा जा सकता है कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर बांग्लादेशी समकक्ष की आगवानी की है। वस्तुत: इंदिरा गांधी ने जिस प्रकार बांग्लादेश को तत्कालीन पश्चिमी पाकिस्तान के अत्याचारों से मुक्त कराया तो एक तरह से यह रिश्ता स्वाभाविक ही था। चूंकि चीन, पाकिस्तान जैसे देश भारत के साथ दूसरे पड़ोसियों के रिश्तों को नुक्सान पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं, ऐसे में बांग्लादेश के साथ भारत का कूटनीतिक संबंध और भी खास हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत लगातार बांग्लादेश से अपना संबंध मजबूत करने में दो कदम आगे बढ़कर पहल करता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">1947 में हुए भारत बंटवारे की कटु यादें भला किसे याद नहीं होंगी। दुनिया में उतना भीषण कत्ल-ए-आम संभवत: दूसरी जगह न हुआ होगा। पर उसका नतीजा क्या निकला, जिस धर्म के नाम पर मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान मांगा था, वह तीन दशक भी संयुक्त रूप में पूरा न कर सका और बिखर गया। आखिर, वह जुड़ा रहता भी तो किस प्रकार? चूंकि, पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान में बांग्लादेश) कहे जाने वाले देश की संस्कृति, भाषा पश्चिमी पाकिस्तान से सर्वथा भिन्न थी। ऊपर से वहां के लोगों के साथ पश्चिमी पाकिस्तान द्वारा किया जाने वाला भेदभाव ताबूत में आखिरी कील साबित हुआ। बांग्लादेशियों के अधिकारों को कुचलने में पाकिस्तान की सेना ने जो जुल्म ढाये, उससे समस्त विश्व की आँखें नम हो उठी थीं। आज के समय में हम सीरिया में गृहयुद्ध की जो हालत देख रहे हैं, उससे कम दुरूह हालात न थे उस समय! अंतत: उस अत्याचार से जब भारत पर दुष्प्रभाव पडऩे लगा तब इंदिरा गाँधी के रूप में भारतीय राजनीतिक नेतृत्व ने कठोरतम निर्णय लिया और फिर उदय हुआ बांग्लादेश का। जाहिर तौर पर बांग्लादेश के जन्म के समय से ही भारत का रिश्ता बेहद करीबी रहा है, जो लगातार आगे बढ़ता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहुत कम लोगों को पता होगा कि शेख हसीना से भारत का बेहद करीबी जुड़ाव रहा है। 15 अगस्त 1975 को जब बांग्लादेश में सेना के गुट ने शेख मुजीबुर रहमान के घर पर हमला किया, तो शेख हसीना के परिवार के अधिकांश सदस्य मौत के घाट उतार दिए गए थे। उनके पिता और बांग्लादेश की आजादी के नायक शेख मुजीबुर रहमान का शरीर गोलियों से छलनी कर दिया गया था। किसी तरह शेख हसीना और उनकी बहन बच गयी थीं, पर उन्हें कहीं और राजनीतिक शरण नहीं मिल सकी। फिर इंदिरा गाँधी ने कई सालों तक शेख हसीना और उनके पति डॉक्टर वाजेद को सुरक्षा और शरण प्रदान की। बाद में स्थिति में सुधार होने के बाद शेख हसीना 17 मई, 1981 को अपने वतन लौट सकी थीं, जहाँ लाखों बांग्लादेशियों ने उनका स्वागत किया और फिर वह अपने पिता का रूतबा हासिल करने में सफल भी रहीं। पिछले दिनों भारत और बांग्लादेश के बीच हुए ‘परमाणु समझौतेझ् को दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">सच कहा जाए तो भारत और दूसरे दक्षिण एशियाई देश ड्रैगन की दोहरी चाल को बखूबी समझते हैं। वह जानते हैं सच्चे मित्र भारत जैसी स्वाभाविक दोस्ती चीन से कभी हो ही नहीं सकती, इसलिए भारत को कूटनीति की बिसात पर सधी चाल से चलना होगा और संतुलन बनाकर चीन की दोस्ती के दांव को दक्षिण एशियाई क्षेत्र में मजबूती से उजागर करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट के सफल होने के बाद समुद्री मामलों के सुलझने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, ये तो एक छोटी सी झलक है, क्योंकि भारत और बांग्लादेश के बीच कई सारे समझौते हो रहे हैं, जिनका प्रारूप और प्रभाव आने वाले समय में और भी बेहतर ढंग से नजऱ आएगा। वैश्विक परिदृश्य में दो देशों के संबंधों की अहमियत बार बार प्रमाणित हुई है। वहीं बात जब बांग्लादेश जैसे महत्वपूर्ण पड़ोसी की हो तो फिर यह अहमियत और भी बढ़ जाती है। निश्चित रूप से दोनों देशों की आने वाली पीढिय़ां पीएम नरेंद्र मोदी और बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना का धन्यवाद करेंगी, जिनके सकारात्मक दृष्टिकोण से दक्षिण एशियाई देशों के विकास का नया और चौड़ा मार्ग प्रशस्त हुआ है। <em><strong>जगजीत शर्मा</strong></em></p>
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                <pubDate>Mon, 01 Oct 2018 12:42:14 +0530</pubDate>
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