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                <title>दिमाग से जुड़े किसी भी लक्षण को नजरअंदाज करना हो सकता है घातक: डॉ. संदीप शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[आधुनिक तकनीक से दिमाग के गंभीर मरीज हो रहे स्वस्थ: डॉ. संदीप शर्मा जाने माने मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ डा. संदीप शर्मा अब ग्रेशियन पार्क अस्पताल में देंगे सेवाएं | Mohali News मोहाली (सच कहूँ/एमके शायना)। दिमाग (Brain) की बीमारियों से जुड़ी बातों को अगर नजरअंदाज किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, समय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/ignoring-any-brain-related-symptoms-can-be-fatal-dr-sandeep-sharma/article-52673"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/mohali-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">आधुनिक तकनीक से दिमाग के गंभीर मरीज हो रहे स्वस्थ: डॉ. संदीप शर्मा</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>जाने माने मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ डा. संदीप शर्मा अब ग्रेशियन पार्क अस्पताल में देंगे सेवाएं | Mohali News</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मोहाली (सच कहूँ/एमके शायना)।</strong> दिमाग (Brain) की बीमारियों से जुड़ी बातों को अगर नजरअंदाज किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, समय पर जांच कराकर बीमारी की वास्तविक स्थिति का पता लगाना जरूरी है, क्योंकि ऐसी स्थिति ब्रेन अटैक का कारण बन सकती है, यह बात जाने माने न्यूरोलॉजिस्ट डा. संदीप शर्मा ने आज यहां स्थानीय ग्रेशियन पार्क अस्पताल में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कही। इस मौके पर उनके साथ न्यूरो विभाग की टीम में शामिल डॉ. गौरव धवन और लोकेश सिंह भी मौजूद रहे। Mohali News</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रेशियन पार्क अस्पताल में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, डा. संदीप शर्मा ने कहा कि भूलने की बीमारी, चेतना की कमी, व्यवहार में अचानक बदलाव, गुस्सा, तनाव आदि मानसिक स्थिति से संबंधित हैं। जिसके इलाज के लिए आधुनिक तकनीकों ने कई उपकरण उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक या लकवा से घबराने की जरूरत नहीं है, इसका इलाज संभव है। डॉ. शर्मा ने कहा कि मस्तिष्क में रक्त के थक्कों (क्लॉट) का फ्लो डायवर्टर और मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी से सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है और स्ट्रोक के 24 घंटों के भीतर मरीज की जान बचाई जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि हाल ही में एक युवा मरीज उनके पास बदली हुई अनुभूति और सिरदर्द की शिकायत लेकर आया था, जिसके मस्तिष्क की नस को बिना किसी चीर-फाड़ के ठीक कर दिया गया। उन्होंने कहा कि एक अन्य मरीज को मस्तिष्क का दौरा पड़ा था, जिसका सफलतापूर्वक इलाज कर उसे छुट्टी दे दी गई। उन्होंने कहा कि ग्रेशियन पार्क अस्पताल ने अपने शुरुआती महीनों के दौरान बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं और कई रोगियों को पूरी तरह तंदरुस्त किया है। Mohali News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="2 दिनों तक गरज़-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी की संभावना" href="http://10.0.0.122:1245/possibility-of-light-drizzle-with-thunder-and-lightning-for-two-days/">2 दिनों तक गरज़-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी की संभावना</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/ignoring-any-brain-related-symptoms-can-be-fatal-dr-sandeep-sharma/article-52673</link>
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                <pubDate>Thu, 21 Sep 2023 17:59:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Parenting Tips: रोज खिलाएँ ये अन्न तो बच्चों का पढ़ाई-लिखाई में लगेगा मन</title>
                                    <description><![CDATA[Food For Mental Growth: आपका बच्चा अगर हर रोज पढ़ाई से जी चुराता है, हर समय खेलने में समय बिताता है, पढ़ने के लिए बोल दो तो बहाने बनाता है (Smart Kids) और अगर पढ़ने बिठा दो तो कुछ याद नहीं हो पाता है। आप भी अगर अपने बच्चे की इन आदतों से परेशान हो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/how-to-improve-memory-in-children-by-daily-food/article-49657"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/parenting-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Food For Mental Growth: आपका बच्चा अगर हर रोज पढ़ाई से जी चुराता है, हर समय खेलने में समय बिताता है, पढ़ने के लिए बोल दो तो बहाने बनाता है (Smart Kids) और अगर पढ़ने बिठा दो तो कुछ याद नहीं हो पाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप भी अगर अपने बच्चे की इन आदतों से परेशान हो या उसके दिमाग की मेमोरी (Immunity) को लेकर परेशान हैं तो आज हम आपको इस लेख के द्वारा बच्चों की मेमोरी तेज (Physical And Mental growth) करने लिए कुछ मेमोरी वर्धक भोज्य पदार्थों के बारे में बताएंगे जिससे बच्चे के दिमाग का तो विकास होगा ही साथ ही आपके बच्चे की मेमोरी भी तेज हो जाएगी। How to improve memory in children by daily food</p>
<p style="text-align:justify;">आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बच्चे का दिमाग तो माँ के गर्भ में ही विकसित होने लगता है, इसीलिए स्पेशलिस्ट तभी से ही उस बच्चे के लिए सही और बैलेंस डाइट देने के लिए कहते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा स्मार्ट और इंटेलिजेंट बनें तो उसके खान-पान पर ध्यान जरूर देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास होता है। इसलिए बच्चों को दूध, दही और दूसरे हेल्दी फूड अवश्य खिलाने चाहिएं। आजकल घर में माँ बच्चों को जंक फू़ड और पैक्ड फूड बहुत ज्यादा खिलाने लगे हैं। इसकी वजह बनाने का चक्कर लगा लो या समय का अभाव कुछ भी हो सकती है। बता दें कि जंक फूड से बच्चे के स्वास्थ्य और मानसिक विकास पर असर जरूर पड़ता है। आप अपने बच्चे की इम्यूनिटी बढ़ाने और दिमाग के विकास के लिए बच्चे की भोजन में ये चीजें अवश्य शामिल करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दिमाग को तेज बनाने वाले पौष्टिक भोजन | Parenting Tips</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>दूध:</strong> बच्चे का मुख्य आहार दूध ही होता है। बता दें कि पहले बच्चे 2-3 साल तक सिर्फ दूध ही पीते थे, वो भी सिर्फ माँ का। अगर आप बच्चे के दिमाग को तेज बनाना चाहते हैं तो उसे दूध जरूर दें। दूध में कैल्शियम और विटामिन्स पाए जाते हैं जो विकास में मदद करते हैं। दूध में फास्फोरस और विटामिन डी पाया जाता है, जो हड्डी, नाखूनों और दांत को हेल्दी रखता है। Parenting Tips</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ड्राई फ्रूट्स:</strong> आपको पता होगा कि बच्चा शुरू में कुछ भी नहीं खाता। वो वही चीज खाएगा जो आप उसे खिलाएंगे। इसलिए बच्चों को शुरूआत से ही मेवा खिलाने की आदत डालें। खासतौर से बच्चों को रोजाना भीगे हुए बादाम, अखरोट और किशमिश खिलाएं। इससे बच्चे का दिमाग तो तेज होगा ही और बच्चे के शारीरिक विकास में भी मदद मिलेगी। Parenting Tips</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>केला:</strong> बढ़ते बच्चे, होते हैं अच्छे अगर वो रोजाना जरूर केला खाएं तो। केला एनर्जी से भरपूर होता है। केला खाने से उन्हें तुरंत एनर्जी मिलती है और ये बच्चों का पसंदीता फल होता है. केला खाने से विटामिन बी 6, विटामिन सी, विटामिन ए, मैग्निशियम, पोटैशियम और फाइबर मिलता है, जो बच्चे के विकास में मदद करते हैं। Parenting Tips</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>घी:</strong> घी से आती है शरीर और दिमाग में तंदुरुस्ती। पहले के लोग ऐसे ही नहीं कहते थे कि घी खिलाओ तो दिमाग तेज होगा। बच्चे को घी जरूर खिलाना चाहिए। इससे डीएचए और शरीर को शारीरिक पोषण मिलता है। ये दोनों चीजें बच्चे के दिमाग को विकसित करती हैं। देसी घी में एंटीफंगल, एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीबैक्टिरियल गुण पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/are-these-foods-bad-for-the-heart/">Harmful Food For Heart: क्या दिल के लिए हानिकारक हैं ये फूड? | Dr Shobhit Tomar</a></p>
<p style="text-align:justify;">नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता और न ही सच कहूँ इसकी पुष्टि करता है। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2023 15:55:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>60 प्रतिशत चर्बी से बना होता है दिमाग</title>
                                    <description><![CDATA[हंसते समय मनुष्य दिमाग के लगभग 5 हिस्से एक साथ कार्य करते हैं। दिमाग का आकार और वजन दिमागी शक्ति पर कोई प्रभाव नहीं डालता। दिमाग का वजन 1230 ग्राम था जो कि सामान्य मनुष्य के बराबर था। एक जिंदा इंसानी दिमाग बहुत नर्म होता है और इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/the-brain-is-made-up-of-60-percent-fat/article-16952"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/the-brain-is-made-up-of-60-percent-fat.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">हंसते समय मनुष्य दिमाग के लगभग 5 हिस्से एक साथ कार्य करते हैं। दिमाग का आकार और वजन दिमागी शक्ति पर कोई प्रभाव नहीं डालता। दिमाग का वजन 1230 ग्राम था जो कि सामान्य मनुष्य के बराबर था। एक जिंदा इंसानी दिमाग बहुत नर्म होता है और इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है। दिमाग में 1,00,000 मील लंबी रक्त वाहिनियां होती हैं। दिमाग को 4 से 6 मिनट तक ऑक्सीजन न मिलने पर भी यह रह सकता है। पर 5 से 10 मिनट तक न मिलने पर ब्रेन डैमेज पक्की है। मनुष्य के दिमाग का वजन लगभग 1500 ग्राम तक होता है। मनुष्य दिमाग में न्यूरॉन की गिणती 100 अरब (जितने आकाशगंगा में तारे होते है) होते हैं और हर न्यूरॉन में 1,000 से 10,000 होते है। मानव दिमाग के अंदर एक सैकेंड में 1 लाख रासायनिक प्रतिक्रियाएं होती हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">मनुष्य दिमाग के 60% हिस्से में चर्बी होती हैं। इसलिए यह शरीर का सबसे अधिक चर्बी वाला अंग हैं। मस्तिष्क में प्रत्येक वस्तु (सूचना) संग्रहित होते जाती है। तकनीकी रूप से मस्तिष्क के पास अनुभव, अवलोकन, पठन, श्रवण आदि प्रत्येक वस्तु (सूचना) को संग्रह करने की क्षमता होती है। जन्म के बाद से प्रत्येक वस्तु उसमें संग्रहित होते जाती है, कुछ भी नहीं छूटता। यह अलग बात है कि मनुष्य में अपने ही मस्तिष्क में सग्रहित किसी अनेक वस्तुओं (सूचनाओं) तक वापस पहुँचने यानि कि अनेक घटनाओं को स्मरण रख पाने की क्षमता नहीं होती। दिमाग शरीर का लगभग 2% है। परन्तु यह कुल ऑक्सीजन का 20% खपत करता है और खून भी 20% उपयोग करता हैं। दिमाग के बारे में सबसे पहला उल्लेख 6000 साल पहले सुमेर से मिलता है। रिसर्च से पता चला है कि पुरूषों और महिलाओं के दिमाग की बनावट अलग-अलग होती है। अगर मनुष्य चमड़ी और मेहदे की तरह मस्तिष्क के भी बदल जाएं तो हम अपनी याददाशत गंवा सकते हैं। शेष जानकारी अगले अंक में..</h6>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></h6>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2020 22:17:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पानी अमृत है, 75 प्रतिशत से ज्यादा पानी से बना है दिमाग</title>
                                    <description><![CDATA[जब आप जाग रहे होते हैं, तब आपका दिमाग 10 से 23 वाट की बिजली उर्जा छोड़ता है, जो एक बिजली के बल्ब को भी चला सकती है। मनुष्य के दिमाग में दर्द की कोई भी नस नहीं होती है, इसलिए वह कोई दर्द महसूस नहीं करता है। हमारा दिमाग 75% से ज्यादा पानी से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/water-is-nectar-the-brain-is-made-up-of-more-than-75-percent-water/article-16924"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/water-is-nectar-the-brain-is-made-up-of-more-than-75-percent-water..gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">जब आप जाग रहे होते हैं, तब आपका दिमाग 10 से 23 वाट की बिजली उर्जा छोड़ता है, जो एक बिजली के बल्ब को भी चला सकती है। मनुष्य के दिमाग में दर्द की कोई भी नस नहीं होती है, इसलिए वह कोई दर्द महसूस नहीं करता है। हमारा दिमाग 75% से ज्यादा पानी से बना होता है। मनुष्य दिमाग 5 साल की उम्र तक 95% बढ़ता है, और 18 तक पहुँचते-पहुँचते 100% विकसित हो जाता है और उसके बाद बढ़ना रूक जाता है। सर्जरी से हमारा आधा दिमाग हटाया जा सकता है, और इससे हमारी यादों पर भी कुछ असर नहीं पडेगा। आप अपने दिमाग में न्युरॉनज की गिणती दिमागी क्रियाएं करके बढ़ा सकते हैं। क्योंकि शरीर के जिस भी भाग का हम ज्यादा उपयोग करते हैं वह और विकसित होता जाता है। पढ़ने और बोलने से बच्चों का दिमागी विकास ज्यादा होता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">जब आप एक आदमी का चेहरा गौर से देखते हैं, तो आप अपने दिमाग का दायां भाग उपयोग करते है। हमारे शरीर के भिन्न हिस्सों से सूचना भिन्न रफतार से और भिन्न न्युरॉन के द्वारा हमारे दिमाग तक पहुँचती हैं। सारे न्युरॉन एक जैसे नहीं होते। कई न्युरॉन ऐसे होते हैं, जो सूचना को 0.5 मीटर प्रति सैकेंड की रफतार से दिमाग तक पहुँचाते हैं, और कई ऐसे भी होते हैं जो सूचना को 120 मीटर प्रति सैकेंड की रफतार से दिमाग तक पहुँचाते हैं। जो बच्चे पाँच साल का होने से पहले दो भाषाएँ सीखते हैं, उनके दिमाग की संरचना थोड़ी सी बदल जाती है। दिमाग में हर दिन औसतन 60,000 विचार आते हैं। अकसर ऐसा कहा जाता है कि हम दिन में 20,000 बार पल्क झपकते हैं और इसके कारण हम दिन में 30 मिनट तक अंधे रहते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। असल में हम दिन में 20,000 बार पलक जरूर झपकते हैं पर 30 मिनट तक अंधे नहीं रहते। क्योंकि हमारा दिमाग इतने कम समय में वस्तु का चित्र अपने आप बनाए रखता है। हमारे पलक झपकने का समय 1 सैकेंड के 16वें हिस्से से कम होता है पर दिमाग किसी भी वस्तु का चित्र सैकेंड के 16वें तक बनाए रख सकता है। शेष जानकारी अगले अंक में..</h6>
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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2020 21:46:14 +0530</pubDate>
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                <title>बढ़ता जा रहा है ब्रेन ट्यूमर का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[बाल मुकुन्द ओझा अगर सुबह तेज सिरदर्द से नींद खुल रही हैं। धीरे-धीरे कान से सुनने की क्षमता या आंखों से भेंगा दिखने की शिकायत अथवा रोशनी घट रही हैं। धीरे-धीरे प्रमुख अंग का सुन्न पड़ना अर्थात लकवे के लक्षण लगें तो आपको तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। ये दिक्कतें ब्रेन ट्यूमर की हो सकती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increases-the-ri-of-brain-tumor/article-4030"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/brain.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अगर सुबह तेज सिरदर्द से नींद खुल रही हैं। धीरे-धीरे कान से सुनने की क्षमता या आंखों से भेंगा दिखने की शिकायत अथवा रोशनी घट रही हैं। धीरे-धीरे प्रमुख अंग का सुन्न पड़ना अर्थात लकवे के लक्षण लगें तो आपको तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। ये दिक्कतें ब्रेन ट्यूमर की हो सकती हैं। जर्मन ब्रेन ट्यूमर एसोसिएशन द्वारा ब्रेन ट्यूमर के रोगियों की समस्याओं की ओर विश्व का ध्यान केंद्रित करने तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए 2000 ई. से प्रतिवर्ष विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस 8 जून को मनाने की शुरूआत हुई। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व भर में हर दिन एक लाख में से दस लोग ब्रेन ट्यूमर के कारण मरते हैं। ब्रेन ट्यूमर जिसे मस्तिष्क कैंसर भी कहा जाता है एक खतरनाक रोग है। यदि समय रहते इसका इलाज नहीं कराया गया तो यह जानलेवा साबित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिमाग की संचालकता को देखकर ही मानव शरीर का अंदाजा हो जाता है लेकिन बिगड़ते लाइफस्टाइल को देखते हुए ब्रेन ट्यूमर का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। ब्रेन ट्यूमर में मष्तिष्क में गांठ बन जाती है जिससे हमारे शरीर का कोई भी हिस्सा प्रभावित हो सकता है। यह गांठ अगर दायीं तरफ स्थित है तो किसी व्यक्ति का बायीं तरफ का हिस्सा या अंग प्रभावित होता है और यह बायीं तरफ है तो यह दायीं तरफ के हिस्से पर असर डालती है।हालांकि अब तक ब्रेन ट्यूमर के कारणों का सही-सही पता नहीं चल पाया है लेकिन अगर कभी-कभी मिरगी के दौरे के समान दौरा पड़ता हो या बेहोशी आती हो, सिर में असहनीय दर्द होता हो, हाथ-पैरों में ऐंठन हो, ज्यादा कमजोरी का अहसास हो, सुबह के समय सिर में अक्सर दर्द होता हो, दृष्टि का अचानक कम होना या कलर ब्लांइडनेस आदि हो तो ब्रेन ट्यूमर हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ मामलों में रेडिएशन और फोन पर लंबे समय तक बात करने से रेडियो फ्रीक्वेंसी के कारण ब्रेन पर असर पड़ता हैं, पुष्टि हुई हैं। दो प्रकार के ट्यूमर होते हैं-पहला कैंसरस और दूसरा नान कैंसरस। हर ट्यूमर कैंसरस नहीं होता है।<br />
विश्व में मस्तिष्क संबंधी रोगों के बढ़ने के साथ ही हर साल 2,500 से भी ज्यादा भारतीय बच्चे मस्तिष्क मेरु-द्रव्य (सीएसएफ) के जरिए फैलने वाले एक घातक मस्तिष्क ट्यूमर से पीड़ित हो जाते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, भारत में हर साल 40,000-50,000 व्यक्तियों में मस्तिष्क कैंसर का मूल्यांकन किया जाता है। इनमें से 20 प्रतिशत बच्चे होते हैं। एक साल पहले यह आंकड़ा पांच प्रतिशत के आसपास था। ब्रेन ट्यूमर फाउंडेशन आॅफ इंडिया के मुताबिक, ल्यूकेमिया के बाद मस्तिष्क ट्यूमर बच्चों में दूसरा सबसे आम कैंसर है।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रेन ट्यूमर की पहचान करना मुश्किल नहीं हैं। ब्रेन में ट्यूमर का आकार, स्थान और प्रकार अर्थात लक्षणों के आधार पर इसे आसानी से पहचाना जा सकता हैं। इसे पुख्ता करने के लिए योग्य न्यूरोसर्जन से परामर्श, सीटी स्केन तथा एमआरआई की मदद ली जा सकती हैं। यहीं नहीं समय पर उचित इलाज से मरीज इस मर्ज से मुक्ति पा सकता हैं, पूरी तरह स्वस्थ भी हो सकता हैं। ब्रेन ट्यूमर के मामले में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरूआती दिनों में आसानी से इसका पता नहीं लगता। आधे मरीज साल भर बाद ही जान पाते हैं कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है। 10 से 15 प्रतिशत मरीजों को पांच साल बाद इसका पता चलता है। लगभग इतने ही मरीज 10 साल बीत जाने के बाद समझ पाते हैं कि वे इस गंभीर बीमारी की चपेट में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार विटामिन-सी मस्तिष्क कैंसर के मरीजों के ट्यूमर को तेजी से खत्म कर सकता है। ब्रेन ट्यूमर से बचाव के बहुत रास्ते ज्ञात नहीं हैं, फिर भी खानपान में रसायनों से जितना बच सकें, बेहतर है। ज्यादा जागने की आदत न बनाएं। नर्वस सिस्टम को परेशानियों से बचाए रखने के लिए भरपूर नींद जरूरी है। विटामिनों और पौष्टिकता से भरपूर आहार लें। विटामिन-सी, विटामिन-के और विटामिन-ई वाले खाद्य पदार्थों पर विशेष ध्यान दें। जंकफूड या डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं। पानी भरपूर पिएं। ये ही बचाव के रास्ते है जिनका अनुसरण कर हम इस भीषण रोग से अपना बचाव कर सकते है।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jun 2018 10:34:58 +0530</pubDate>
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