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                <title>बिजली इंजीनियरो ने किया किसान आंदोलन का समर्थन</title>
                                    <description><![CDATA[मथुरा। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कृषि कानूनों और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 की वापसी मांग लेकर एक हफ्ते से अधिक समय से दिल्ली में धरना दे रहे किसानेा को समर्थन दिया है। फेडरेशन का मानना है कि किसानों की मांग न केवल जायज है बल्कि सरकार के उस दावे के खिलाफ है जिसमें […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/electricity-engineers-support-the-farmer-movement/article-20323"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/farmers-traveled-to-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मथुरा।</strong> ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कृषि कानूनों और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 की वापसी मांग लेकर एक हफ्ते से अधिक समय से दिल्ली में धरना दे रहे किसानेा को समर्थन दिया है। फेडरेशन का मानना है कि किसानों की मांग न केवल जायज है बल्कि सरकार के उस दावे के खिलाफ है जिसमें वह यह कहती है कि सन 2022 तक वह किसान की आय दो गुनी कर देगी। वर्चुअल कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियन्ता संघ के अध्यक्ष वीपी सिंह एवं सचिव प्रभात सिंह ने संयुक्त रूप से पत्रकारों से कहा कि कड़ाके की ठंड में दिल्ली में खुले आसमान तले धरना दे रहे किसानों की संसद मे पारित किये गए कृषि विरोधी कानूनों की वापसी की मांग जायज है क्योंकि इससे भविष्य में किसानों का अहित होने की आशंका है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि किसान संयुक्त मोर्चा के आवाहन पर चल रहे आंदोलन में कृषि कानूनों की वापसी के साथ किसानों की इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 वापस लेने की भी मांग है। किसानों को इस बात की आशंका है कि सरकार की इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 के जरिए बिजली का निजीकरण करने की योजना है जिससे बिजली निजी घरानों के हाथ में हो जाएगी। चूंकि निजी क्षेत्र मुनाफे के लिए काम करते हैं अतः बिजली की दरें किसानों की पहुंच से दूर हो जाना स्वाभाविक है।</p>
<p style="text-align:justify;">वीपी सिंह ने बताया कि ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने किसान आंदोलन का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि किसानों की आशंका निराधार नहीं है इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के लिए जारी स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के पीछे मंशा बिजली का निजीकरण करना ही है। इसके बाद सब्सिडी समाप्त हो जाएगी तो बिजली की दरें 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट से कम नही होगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Dec 2020 13:34:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>किसान बदलें आंदोलन की रीति-नीति</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब में रेल सेवाएं बहाल हो गई हैं और 30 किसान संगठनों ने रेल ट्रैक भी खाली कर दिए हैं। एक संगठन किसान मजदूर संघर्ष समिति रेल रोकने के लिए अपनी जिद्द पर अड़ी हुई है। रेल रोकना किसी समस्या का हल नहीं, इससे जनता नाहक परेशान होती है। दूसरे राज्यों को जाने वाले लोगों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/farmer-change-policy-of-movement/article-20120"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/farmers-stop-rail-movement-14-trains-canceled.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पंजाब में रेल सेवाएं बहाल हो गई हैं और 30 किसान संगठनों ने रेल ट्रैक भी खाली कर दिए हैं। एक संगठन किसान मजदूर संघर्ष समिति रेल रोकने के लिए अपनी जिद्द पर अड़ी हुई है। रेल रोकना किसी समस्या का हल नहीं, इससे जनता नाहक परेशान होती है। दूसरे राज्यों को जाने वाले लोगों व विद्यार्थियों के कार्य बाधित होते हैं। किसानों के आंदोलन से कई राज्यों के लोग प्रभावित हुए, विशेष रूप से उद्योग व व्यापार को भारी नुक्सान झेलना पड़ा है। पंजाब सरकार के लिए ठप्प रेल सेवाएं चालू करना चुनौती बना रहा जबकि केंद्र सरकार का सस्ते में काम चल गया, उन्हें किसानों को मनाने की जरूरत ही नहीं पड़ी। किसानों व केंद्र के बीच फंसी पंजाब सरकार की खूब माथापच्ची हुई। फिर भी यह अच्छा है कि पंजाब सरकार ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और किसानों का रेल आंदोलन समाप्त करवाया जहां तक एक (संगठन) के जारी आंदोलन का सम्बन्ध है उन्हें वक्त का तकाजा समझकर आंदोलन की रीति-नीति बदलनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">टकराव की बजाय बातचीत से ही किसी समस्या का समाधान संभव है। रेल रोको आंदोलन के द्वारा किसान केंद्र पर दबाव बनाने में सफल रहे हैं और आखिर केंद्र सरकार ने किसानों को फिर से वार्ता करने के लिए न्यौता भेजा है। किसानों की मांग के अनुसार केंद्रीय मंत्री पहले भी बातचीत में शामिल हो चुके हैं और बातचीत का एक दौर पूरा हो चुका है। दूसरे दौर की बातचीत के लिए केंद्र ने तीन दिसंबर की मीटिंग बुलाई है, हालांकि बातचीत का दौर शुरू हो गया है और यह बातचीत ही रेल आंदोलन का उद्देश्य था। किसानों का यह आंदोलन केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए था लेकिन इसका नुक्सान आम लोगों के साथ-साथ किसानों को भी हो रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब में खाद की सप्लाई रुकने से किसान यूरिया खाद खरीदने के लिए हरियाणा के चक्कर लगाने लगे हैं। पंजाब के कई किसानों को हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इन परिस्थितियों में किसानों को अपनी ही परेशानी का ध्यान रखना होगा। संघर्ष लोगों का समर्थन जुटाकर ही लड़ा जा सकता है और हर संघर्ष का आधार कोई न कोई विचारधारा होती है। यदि किसी आंदोलन से आमजन को परेशान होने लगे तब संघर्ष को आमजन का समर्थन नहीं मिलता। बेहतर हो यदि अब किसान संगठन हड़ताल का रास्ता त्यागकर बातचीत से समस्या का समाधान निकालें।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 25 Nov 2020 09:55:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आधी रात के बाद किसानों ने खत्म किया आंदोलन, मांगें नहीं हुईं पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ)। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे देश भर के किसानों के प्रति रुख में नरमी लाते हुए केंद्र सरकार ने मंगलवार रात 12.40 बजे किसानों के जत्थे को दिल्ली में किसान घाट जाने की इजाजत दे दी। इसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच किया। इसके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/farmers-stopped-the-movement-demands-were-not-met/article-6103"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/kishan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ)। </strong>स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे देश भर के किसानों के प्रति रुख में नरमी लाते हुए केंद्र सरकार ने मंगलवार रात 12.40 बजे किसानों के जत्थे को दिल्ली में किसान घाट जाने की इजाजत दे दी। इसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच किया। इसके लिए गाजियाबाद एसएसपी ने बसों का इंतजाम भी किया। कुछ मांगों पर सहमति नहीं बनने के बावजूद किसानों ने आंदोलन खत्म कर अपने-अपने घर लौट जाने का फैसला किया।</p>
<h2>हमारा लक्ष्य यात्रा को पूरा करना था: नरेश</h2>
<p style="text-align:justify;">भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि, ‘फिलहाल किसान राजघाट और किसान घाट पहुंचकर लौट जाएंगे। बाकी बची मांगों के लिए सरकार को मांग पत्र दिया गया है, जिसके लिए सरकार ने समय मांगा है। लाठीचार्ज के लिए दिल्ली पुलिस ने माफी मांगी है।’ भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैट ने कहा कि, किसान घाट पर फूल चढ़ाकर हम अपना आंदोलन खत्म कर रहे हैं। 23 सितंबर को शुरू हुई ‘किसान क्रांति पदयात्रा’ को दिल्ली के किसान घाट में समाप्त करना पड़ा। चूंकि दिल्ली पुलिस ने हमें प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी, इसलिए हमने विरोध किया। हमारा लक्ष्य यात्रा को पूरा करना था जो किया गया है। अब किसान अपने गांवों की ओर वापस जा रहे हैं।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Oct 2018 09:46:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मराठा आंदोलन: मुंबई बंद, ठाणे में  तोड़फोड़, प्रदर्शनकारी की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[आरक्षण की मांग को लेकर  किसान  ने  जहर खा लिया मुंबई (एजेंसी)। महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर चल रहा राज्यव्यापी प्रदर्शन हिंसक हो गया है। प्रदर्शनकारियों के पथराव में एक कांस्टेबल की मौत हो गई जबकि नौ अन्य जख्मी हो गए। आज मराठा क्रांति मोर्चा ने मुंबई बंद का आह्वान किया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/maratha-movement-mumbai-closed-sabotage-in-thane/article-5007"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/maratha-movement.jpg" alt=""></a><br /><h2>आरक्षण की मांग को लेकर  किसान  ने  जहर खा लिया</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)। </strong>महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर चल रहा राज्यव्यापी प्रदर्शन हिंसक हो गया है। प्रदर्शनकारियों के पथराव में एक कांस्टेबल की मौत हो गई जबकि नौ अन्य जख्मी हो गए। आज मराठा क्रांति मोर्चा ने मुंबई बंद का आह्वान किया है। इस बीच मुंबई में सुबह कई जगहों पर बेस्ट बसों पर पथराव किया गया। औरंगाबाद में किसान जगन्नाथ सोनावने ने आरक्षण की मांग को लेकर जहर खा लिया।उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई।</p>
<h2>नवी मुंबई में स्कूल-कॉलेज बंद</h2>
<p>नवी मुंबई में स्कूल-कॉलेज बंद रखे गए हैं।ठाणे और जोगेश्वरी में लोकल ट्रेनों को भी रोका गया। इस कारण लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों को भी फूंक दिया था और दो प्रदर्शनकारियों ने खुदकुशी करने की कोशिश की।महाराष्ट्र बंद का सबसे ज्यादा असर औरंगाबाद और आसपास के जिलों में देखने को मिला है। जहां कल आरक्षण के पक्ष में निकाले गए मार्च के दौरान एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी। जहर खाने वाले दूसरे प्रदर्शनकारी की भी अस्पताल में मौत हो गई। इस शख्स का नाम जग्गनाथ सोणानने बताया जा रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">30 फीसदी हैं मराठा समुदाय</h2>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक तौर पर प्रभावशाली मराठा समुदाय के लिए आरक्षण का मामला बेहद विवादास्पद मुद्दा है। राज्य की आबादी में करीब 30 फीसदी मराठा हैं. इसके पहले समुदाय के नेता अपनी मांगों को लेकर विभिन्न जिलों में रैलियां निकाल चुके हैं। पिछले साल मुंबई में मराठा क्रांति मोर्चा ने एक बड़ी रैली का आयोजन किया था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पुलिस कांस्टेबल की मौत</h2>
<p style="text-align:justify;">कल नदी में कूदकर जान देने वाले एक मराठा प्रदर्शनकारी के अंतिम संस्कार स्थल के पास तैनात एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि उसकी मौत के कारणों का अभी पता नहीं है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उनके हाथों और पैरों पर चोट के निशान हैं। उसी स्थल पर तैनात अन्य पुलिसकर्मी पथराव में जख्मी हो गए। पुलिस ने बताया कि भीड़ ने उनके साथ धक्का -मुक्की की। उन्हें स्थान छोड़ना पड़ा। पुलिस ने बताया कि सांसद की गाड़ी पर भी पथराव हुआ था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">लाठी चार्ज और आंसू गैस के गोले दागे</h2>
<p style="text-align:justify;">औरंगाबाद की पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने बताया कि भीड़ को संभालने मौजूद पुलिस कर्मियों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। एक अधिकारी ने बताया कि जलना के घनसांगवी थाने पर प्रदर्शनकारियों के पथराव में आठ पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। उन्होंने बताया कि कायगांव में प्रदर्शनकारियों ने दमकल की एक गाड़ी को भी आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों ने लातूर जिले के निलांगा तहसील में हैदराबाद-लातूर बस पर भी पथराव किया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आरक्षण पर कोर्ट करेगी फैसला</h2>
<p style="text-align:justify;">सांगली में राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने मराठा आरक्षण को लेकर कहा कि राज्य सरकार ने जो भी उसके बस में था किया। अब इस मामले पर अदालत फैसला करेगी। मंत्री ने कहा कि कुछ ‘पेड’लोग मराठा आंदोलन में घुस गए हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Jul 2018 07:28:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान आंदोलन का 7वां दिन : बंद का नहीं दिख रहा असर, किसान नेता कक्काजी मंदसौर में आंदोलन पर करेंगे बात</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर। 1 जून से शुरू हुए किसान आंदोलन का असर 7 दिन बीत जाने के बाद भी दिखाई नहीं दिया है। ये खबर सरकार के साथ ही आम लोगों के लिए राहतभरी है। दूध-फल और सब्जी की अब तक कहीं भी किल्लत की बात सामने नहीं आई है। गुरुवार को भी आम दिनों की तरह ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/7th-day-of-the-kisan-movement/article-4010"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kissan-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इंदौर। </strong>1 जून से शुरू हुए किसान आंदोलन का असर 7 दिन बीत जाने के बाद भी दिखाई नहीं दिया है। ये खबर सरकार के साथ ही आम लोगों के लिए राहतभरी है। दूध-फल और सब्जी की अब तक कहीं भी किल्लत की बात सामने नहीं आई है। गुरुवार को भी आम दिनों की तरह ही इन वस्तुओं की सप्लाई हुई। हालांकि राहुल गांधी के बाद अब किसान नेता कक्का जी मंदसौर पहुंच रहे हैं। वे यहां किसान आंदोलन को लेकर बात करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान आंदोलन को लेकर लगातार बात करने वाले किसान मजदूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’ गुरुवार को मंदसौर पहुंचेंगे। वे यहां मीडिया से किसान आंदोलन को लेकर बात रखेंगे। संभाग अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने बताया कि 8 जून को दलौदा में सभा की परमिशन ली है। इसमें विभिन्न राज्यों से नेता आएंगे। कक्काजी ने शत्रुध्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा, प्रवीण तोगड़िया को भी आमंत्रित किया गया है। ऐसे चलेगा पूरा आंदोलन—1 से 4 जून तक गांवों में युवाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुरानी खेल गतिविधियां होंगी। 5 जून को धिक्कार दिवस मनाएंगे। गांवों में ही चौपालें होंगी, जिसमें किसान विरोधी फैसलों पर चर्चा की जाएगी। 6 जून को पिछले साल मारे गए किसानों को शहीद मानते हुए श्रद्धांजलि सभा होंगी। 8 जून को असहयोग दिवस मनाया जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">10 जून को भारत बंद रहेगा।</h3>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान सरकार की ये रहेगी तैयारी- सुरक्षा व्यवस्था के लिए 11 जोनल आईजी को अतिरिक्त फोर्स दिया गया है। इसमें उज्जैन, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर जैसे बड़े जोन में लगभग 500-500 रंगरूट (नव आरक्षक) और एसएएफ की दो कंपनियां (लगभग एक कंपनी में 100 जवान) दिए गए हैं। इस प्रकार बड़े जोन को लगभग 700 जवान अतिरिक्त दिए गए हैं। जिन जिलों में आंदोलन का असर नहीं होगा, वहां एक-एक कंपनी दी गई है। इसके अतिरिक्त एसएएफ की 89 कंपनियां कानून व्यवस्था के लिए दी गई हैं। आंदोलन को देखते हुए मुख्य केंद्र मंदसौर को पुलिस ने 20 जोन में बांट दिया है। 100 जगह कैमरे लगाए गए हैं। मंदसौर, रतलाम, नीमच को जोड़ने वाले हाईवे को 10 सेक्टर में बांटकर फोर्स तैनात किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदसौर, नीमच, रतलाम सहित प्रदेश के 35 संवेदनशील जिलों में उपद्रवियों से निपटने के लिए पुलिस को 10 हजार अतिरिक्त लाठियां दी गई हैं। इसके अलावा जल्द पहुंचने के लिए 100 अतिरिक्त गाड़िंया भी दी गई हैं। पुलिसकर्मियों को 20 हजार हेलमेट और चेस्ट गार्ड भी दिए गए हैं। इंदौर में 8, राजगढ़ में 8, मुरैना में 7, भोपाल में 6, दतिया में 6, शिवपुरी में 5, गुना में 5 सतना में 5 अतिरिक्त गाड़ियां दी गई हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, रतलाम, नीमच, मंदसौर और खरगोन।</p>
<p style="text-align:justify;">6 जून 2017 को हुआ था गोलीकांड— मंदसौर गोलीकांड 6 जून 2017 को हुआ था। उसके तीन दिन पहले 3 जून से किसानों ने फसल का सही दाम नहीं मिलने सहित कई मुद्दों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया था। 6 जून को भीड़ ने उग्र रूप ले लिया था, जिसका असर प्रदेशभर में देखने को मिला था। भीड़ ने घटना के दिन मंदसौर के पिपलिया मंडी थाने का घेराव और पथराव के साथ लोहे और लाठियों से तोड़फोड़ की थी। भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस ने गोली चलाई थी, जिसमें अाधा दर्जन से ज्यादा लोगों की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस घटना से कई दुकानों और मकानों को भारी क्षति हुई थी। वहीं कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गय था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jun 2018 12:41:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ नहीं मिला किसानों को अतिरिक्त पानी भाजपा नेत्री बैलाण ने सुनी किसानों की पीड़ा अनूपगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। शाखा की पी वितरिका क्षतिग्रस्त होने के कारण पतरोड़ा क्षेत्र के किसानों के लिए चिंता के साथ-साथ परेशानी का कारण बनी हुई है। गत दिनों पानी के तेज बहाव के कारण इस नहर के पटड़े में दो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/farmers-warn-for-movement/article-955"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/hand-raised.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;"> नहीं मिला किसानों को अतिरिक्त पानी</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>भाजपा नेत्री बैलाण ने सुनी किसानों की पीड़ा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अनूपगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शाखा की पी वितरिका क्षतिग्रस्त होने के कारण पतरोड़ा क्षेत्र के किसानों के लिए चिंता के साथ-साथ परेशानी का कारण बनी हुई है। गत दिनों पानी के तेज बहाव के कारण इस नहर के पटड़े में दो स्थानों पर कटाव आया था, जिसे किसानों ने अथक प्रयास करके बांध दिया था, लेकिन इस वितरिका की स्थिति कमजोर पटड़ों के कारण दयनीय बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">नहर के 2 बार टूटने के कारण प्रशासन व सिंचाई विभाग द्वारा उक्त वितरिका के किसानों को पानी की बारियां पिटने के कारण 2 बारियां पानी अतिरिक्त दिलवाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक किसानों को नुकसान की भरपाई का पानी नहीं दिया गया। इस वितरिका में वरीयताक्रम का आगामी पानी वीरवार को इस नहर में छोड़ दिया जाएगा। ऐसे में पिछली बारियों के पिटने का नुकसान की भरपाई किसानों को नहीं मिल पाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त नहर की दयनीय स्थिति पर सिंचाई विभाग का ध्यान आकर्षित करने के लिए पी माईनर क्षेत्र के किसानों ने पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि इस नहर की मरम्मत लम्बे समय से नहीं की गई है, जिससे नहर के पटड़े, बैड तथा लाईनिंग आदि काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है। विडम्बना का विषय है कि इस समस्या को लेकर पी वितरिका क्षेत्र के किसानों ने विधायक शिमला बावरी को भी अवगत करवाया था, लेकिन उन्होंने भी किसानों की पुकार को नहीं सुना और किसान अभी भी परेशानी झेलने को मजबूर हैं। इसलिए जर्जर हालत के कारण यह नहर बार-बार टूटती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या बोले किसान</h3>
<p style="text-align:justify;">परेशान किसान नरेन्द्र सिंह, शमशेर सिंह, गुरसेवक सिंह, मंजीत सिंह, दलजीत सिंह, हरजीत सिंह, बलविन्द्र सिंह, गुरशरण मान सहित अन्य किसानों ने भाजपा युवा की प्रदेश मंत्री प्रियंका बैलाण नागपाल को आज मौके पर बुलाया और नहर की स्थिति दिखाई। पीड़ित किसानों ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा एच व पी वितरिका कि सुध बार-बार अवगत करवाए जाने के बावजूद भी नहीं ली जा रही।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अधिकारियों ने दिया आश्वासन</h3>
<p style="text-align:justify;">समस्या को गंभीरता से लेते हुए भाजपा नेत्री बैलाण ने मौके से ही सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता से दूरभाष पर किसानों कि समस्या से अवगत करवाया और समस्या के समाधान हेतु कहा, जिस पर मुख्य अभियंता ने अतिशीघ्र पी वितरिका क्षेत्र का निरीक्षण करके समाधान करवाने का आश्वासन दिया। वहीं बैलाण ने किसानों को आश्वासन दिया कि वे अपने स्तर पर इस समस्या को राज्य सरकार के समक्ष उठाकर समाधान करवाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर पीड़ित किसानों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर शीघ्र ही उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/farmers-warn-for-movement/article-955</link>
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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 09:34:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार को किसान बनकर किसान की पीड़ा जाननी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[जंतर-मंतर, महाराष्ट, मध्यप्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में किसान आन्दोलन कर रहे हैं। देशभर में किसान कर्ज व आत्महत्याओं का सिलसिला दिन-ब-दिन जटिल होता जा रहा है। भारत में अभी भी एक बहुत बड़ी आबादी कृषि क्षेत्र से न केवल जीविकोपार्जन कर रही है, बल्कि उनकी भावी पीढ़ियों का निर्वाह एवं विकास भी कृषि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">जंतर-मंतर, महाराष्ट, मध्यप्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में किसान आन्दोलन कर रहे हैं। देशभर में किसान कर्ज व आत्महत्याओं का सिलसिला दिन-ब-दिन जटिल होता जा रहा है। भारत में अभी भी एक बहुत बड़ी आबादी कृषि क्षेत्र से न केवल जीविकोपार्जन कर रही है, बल्कि उनकी भावी पीढ़ियों का निर्वाह एवं विकास भी कृषि पर टिका हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले बीस वर्षों में करोड़ों एकड़ भूमि सड़कों, पुलों, औद्योगिक क्षेत्रों, शहरी विकास की खातिर केन्द्र व राज्य सरकारों ने अधिगृहित कर किसानों से ले ली है। इतना ही नहीं, धरती के ऊपरी स्तर पर व भूमिगत जल की भी भयंकर कमी खड़ी हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इतनी सब समस्याओं के बावजूद भी करोड़ों किसान बची हुई जमीन व बचे हुए पानी के सहारे न केवल अपना पेट भर रहे हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी कच्चा माल उपलब्ध करवा रहे हैं और पूरी शहरी आबादी के लिए धान, गेहूं, सब्जी, फलों का उत्पादन कर रहे हैं। इस पर यदि वह कर्ज एवं आत्महत्या एवं आन्दोलनों में पिस रहे हैं, तब नि:संदेह सरकार कहीं न कहीं किसानों के साथ बहुत बड़ी हेराफेरी में लिप्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान की मांग यही है कि उसे उसकी फसल का लागत मूल्य देकर 20 से 50 प्रतिशत तक लाभांश दे दिया जाए। जो उपज सरकार खरीद करे, उसका दाम तत्काल या एक-आध हफ्ते में उसे दे दिया जाए। यह कोई ज्यादा बड़ी मांग नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि इस देश में नकली कीटनाशकों, नकली बीजों, नकली दूध, मसालों, चीनी, गुड़ में मिलावट का अरबों रुपए का कारोबार चल रहा है। इसके अलावा देशभर में लोकसेवकों के वेतन भत्ते, यहां तक कि रिटायर कर्मियों की पेंशन तक के लिए सरकार प्रतिवर्ष करोड़ों-अरबों की वेतन वृद्धि कर देती है, लेकिन किसान की उपज के मूल्य बढ़ाने में उसे सालों लग रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उस पर से तुर्रा यह है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश में कृषि एवं कृषकों की कोई प्रधानता नहीं है। यह महज एक भावनात्मक जुमला है, जो वोटों के वक्त अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जाता है। देश में केन्द्रीय एवं राज्य स्तर पर अभी तक जो कृषि नीतियां बनाई या चलाई जा रही हैं, इनमें व्यवहारिकता का अभाव है। सरकार की योजनाएं एवं कृषि नीतियां जमीनी स्तर पर फुस्स हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि से जुड़ी योजनाओं एवं रियायती कर्ज में देश का व्यापारी वर्ग नकली किसान बनकर बहुत बड़ी सेंध लगा रहा है और सरकार यही समझ रही है कि उसने कृषि में हजारों करोड़ रुपए खर्च कर दिए, लिहाजा किसान राजनेताओं या विरोधी दलों के इशारों पर शोर मचा रहे हैं, जोकि एक गलत धारणा है। अफसोस, हर सरकार इन धारणाओं का शिकार होती आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कृषि विकास में देश को विकसित व सम्पन्न बनाने की अपार संभावनाएं हैं। सरकार को स्वयं किसान की तरह सोचना व कार्य करना होगा, अन्यथा किसानों के साथ ठीक ऐसा ही होता रहेगा कि कोई पेड़ काटकर कागज बनाए, फिर उस पर लिखे व दूसरों को समझाए कि पेड़ हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/government-should-know-the-pain-of-the-farmer-as-a-farmer/article-928</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2017 23:20:30 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP: किसानों के आंदोलन में हिंसा</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर: मध्यप्रदेश में किसानों का असहयोग आंदोलन तीसरे दिन हिंसक हो गया। शनिवार दोपहर को इंदौर की चोइथराम मंडी की दुकानों में तोड़फोड़ से शुरू हुए आंदोलन ने रात होते-होते उपद्रव की शक्ल ले ली। शहर के एबी रोड पर चक्काजाम हुआ, बसें फोड़ दी गईं, पांच से ज्यादा गाड़ियों में आग लगा दी गई। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/mp-violence-in-farmers-movement/article-861"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/mp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इंदौर:</strong> मध्यप्रदेश में किसानों का असहयोग आंदोलन तीसरे दिन हिंसक हो गया। शनिवार दोपहर को इंदौर की चोइथराम मंडी की दुकानों में तोड़फोड़ से शुरू हुए आंदोलन ने रात होते-होते उपद्रव की शक्ल ले ली। शहर के एबी रोड पर चक्काजाम हुआ, बसें फोड़ दी गईं, पांच से ज्यादा गाड़ियों में आग लगा दी गई। एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। हालात काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।</p>
<h2 style="text-align:justify;">साें पर पत्थर फेंके</h2>
<p style="text-align:justify;">मामले की शुरुआत दोपहर में चोइथराम मंडी की दुकानों में तोड़फोड़ से हुई। उपद्रवियों ने शाम करीब साढ़े सात बजे फिर मंडी के बाहर हंगामा किया। पुलिस ने लाठीचार्ज कर खदेड़ा तो लोग राजेंद्र नगर चौराहे पर पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;">एबी रोड पर पौन घंटे उपद्रव मचाया, चक्काजाम किया। बसाें पर पत्थर फेंके। ग्रीनबेल्ट की जालियां उखाड़ दीं। 45 मिनट से ज्यादा समय तक मुंबई, पुणे और महाराष्ट्र के अन्य शहर जाने वाली कई बसें और वाहन फंसे रहे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ट्रक के बाहर जाने को लेकर शुरू हुआ हंगामा</h2>
<p style="text-align:justify;">हालात पर काबू पाने के लिए आला अफसरों ने 500 से ज्यादा का पुलिस बल भेजा। पूरा हंगामा चोइथराम मंडी के बाहर तरबूज से भरे ट्रक के बाहर जाने को लेकर शुरू हुआ। आंदोलनकारियों ने इसे रोका।</p>
<p style="text-align:justify;">एक पुलिसकर्मी ने उन्हें पहले समझाया। वे नहीं माने तो पुलिसकर्मी ने बंदूक तान दी। इससे किसान भड़क गए और गेट के बाहर रखे कई दोपहिया वाहन फोड़ दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/mp-violence-in-farmers-movement/article-861</link>
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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2017 22:47:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिरकार खत्म हुआ रोडवेज कर्मियों का आंदोलन</title>
                                    <description><![CDATA[हाईकोर्ट ने तकनीकी वेतनमान में दिए जाने वाले वित्तीय लाभ एसीपी की कटौती का दिया स्टे फैसले को कर्मचारियों ने बताया अपनी जीत Hisar, SachKahoon News:  हरियाणा राज्य परिवहन विभाग द्वारा रोडवेज की कर्मशालाआें में कार्यरत कर्मचारियों को तकनीकी वेतनमान में दिए जाने वाले वित्तीय लाभ एसीपी की कटौती पर पंजाब एण्ड हरियाणा हाई कोर्ट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>हाईकोर्ट ने तकनीकी वेतनमान में दिए जाने वाले वित्तीय लाभ एसीपी की कटौती का दिया स्टे</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>फैसले को कर्मचारियों ने बताया अपनी जीत</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Hisar, SachKahoon News:</strong>  हरियाणा राज्य परिवहन विभाग द्वारा रोडवेज की कर्मशालाआें में कार्यरत कर्मचारियों को तकनीकी वेतनमान में दिए जाने वाले वित्तीय लाभ एसीपी की कटौती पर पंजाब एण्ड हरियाणा हाई कोर्ट ने स्टे आॅर्डर जारी कर दिए हैं। हाईकोर्ट से स्टे आॅर्डर मिलने के बाद हरियाणा रोडवेज से जुड़े संयुक्त कर्मचारी संघ ने अपनी जीत बताई है। स्टे आॅर्डर जारी होने के बाद रोडवेज यूनियनों के भविष्य में होने वाले आंदोलन भी फिलहाल स्थगित हो गए हैं। ज्ञात रहे कि 7 दिसंबर को ही राज्य परिवहन विभाग के महानिदेशक ने पत्र क्रमांक 6757-6814/ए 2/ई4 जारी कर परिवहन विभाग में कर्मशाला में कार्यरत कर्मचारियों को तकनीकी वेतनमान में दिए जाने वाले वित्तीय लाभ एसीपी की कटौती कर दी थी। विभाग के महानिदेशक के इस फैसले का रोडवेज से जुड़ी विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के पदाधिकारियों ने प्रदेशभर में विरोध कर दो घंटे के लिए चक्का जाम भी किया था। हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ ने विभाग के इस निर्णय के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सीडब्ल्यूपी नंबर 26209/2016 याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्टे आॅर्डर जारी कर दिए हैं। रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान दलबीर किरमारा व राज्य उपमहासचिव सुभाष ढिल्लो ने बताया कि संगठन द्वारा लगाई गई रिट में हाईकोर्ट ने वित्त विभाग हरियाणा द्वारा जारी पत्र क्रमांक 2/22/2014-3पीआर(एफडी) 27-08-2014 को आधार मान कर परिवहन विभाग में कर्मशाला के सभी कर्मचारियों को वित्तीय लाभ, एसीपी जारी रखते हुए अपना निर्णय सुनाया है। इस स्टे आॅर्डर के बाद परिवहन विभाग के सभी डिपुओं पर समान रूप से रोक जारी रहेगी तथा कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग में दिए गए वेतनमान की वेतन वृद्धि का लाभ तकनीकी वेतनमान के आधार पर ही जारी किया जाएगा। किरमारा ने कहा कि सरकार द्वारा जब मांगों को मान कर लागू कर दिए जाने के बावजूद इस प्रकार के फैसले लेकर कर्मचारियों को कोर्ट में जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार को कोई लाभ नहीं मिलता, लेकिन कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/after-all-personnel-movement-ended-roadways/article-552</link>
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                <pubDate>Sun, 18 Dec 2016 02:19:22 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिमी बॉर्डर पर बढ़ी पाक सेना की आवाजाही</title>
                                    <description><![CDATA[वीरान चौकियों पर पाक रेंजर्स ने बनाया अपना बसेरा JaiPur, SachKahoon News: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में सेना की कमान राहिल शरीफ से बदलते ही पश्चिमी सीमा पर पाक के इरादे बिल्कुल शरीफ नजर नहीं आ रहे है। बाड़मेर जिले से लगती पाक की सीमा पर स्थित अक्सर सूनी रहने वाली पाकिस्तान की चौकियों पर उनकी सेना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajsthan-grew-movement-on-the-western-border-of-pakistan-army/article-435"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/indo-pak-flag.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>वीरान चौकियों पर पाक रेंजर्स ने बनाया अपना बसेरा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>JaiPur, SachKahoon News: </strong>पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में सेना की कमान राहिल शरीफ से बदलते ही पश्चिमी सीमा पर पाक के इरादे बिल्कुल शरीफ नजर नहीं आ रहे है। बाड़मेर जिले से लगती पाक की सीमा पर स्थित अक्सर सूनी रहने वाली पाकिस्तान की चौकियों पर उनकी सेना की आवजाही बढ़ गई है और इन्हीं चौकियों के जरिए पड़ोसी मुल्क हिंदुस्तान की हरकत पर लगातार नजर बनाए हुए बैठा है। वहीं सीमा पार के हालातों को देखते हुए राजस्थान गुजरात से सटे पाकिस्तान बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जल्द ही आॅप्रेशन सर्द हवा शुरू करने की तैयारी में है।<br />
सूत्रों के अनुसार भारत और पाकिस्तान रेतीले टीलों और उबड़-खाबड़ रास्तों में स्थित पाक की चौकियां अक्सर वीरान और सूनसान नजर आती थीं। पश्चिमी सीमा सबसे शांत सीमाओं में से एक है। 1971 के बाद इस सीमा से दोनों देशों के बीच शान्ति ही रही है, लेकिन पड़ोस में सेना की कमान बदलते ही हालात बदल गए हैं। सीमा के उस पार पड़ोसी मुल्क की हरकतें भी बढ़ गई हैं। सूनसान और वीरान चौकियों पर पाक रेंजर्स ने अपना बसेरा बना दिया है और वहां से पाक रेंजर्स लगातार भारत की हर हरकत पर नजर बनाए हुए हैं। पहले उड़ी हमला, फिर सर्जिकल स्ट्राइक और बाद में सीमा पर लगातार तनाव बढ़ने के साथ पाक की सेना की कमान बदलना और शांत पश्चिमी सीमा पर पाक की हरकते बढ़ना शुभ संकेत नहीं दे रहा है। लेकिन भारत की बीएसएफ भी किसी भी चीज को हल्के में नहीं ले रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भारत की तमाम एजेंसियां सतर्क</strong><br />
बीएसएफ डीआईजी प्रफुल गौतम के मुताबिक पाकिस्तान की तरफ बढ़ रही हरकतों को देखते हुए बीएसएफ आॅप्रेशन सर्द हवा शुरू करेगी। जिसमें दुश्मन को हर नापाक हरकत को मुंह तोड़ जवाब देगी। अक्सर शांत रहने वाली सीमा पर पाकिस्तान की हरकते बढ़ने को भारत हल्के में नहीं ले सकता। ऐसे में बीएसएफ सहित तमाम सिस्टर एजेंसी सतर्क हैं और दुश्मन को हर नापाक हरकत का मुंह तोड़ जवाब देने की तैयारी की जा रही है। जनवरी माह में हर साल की तरह बीएसएफ आॅपरेशन सर्द हवा शुरू कर रही है, जिसमें बीएसएफ की कई टुकड़ियां सरहद पर गश्त करती हुई नजर आएंगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajsthan-grew-movement-on-the-western-border-of-pakistan-army/article-435</link>
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                <pubDate>Wed, 07 Dec 2016 23:53:52 +0530</pubDate>
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