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                <title>Natwarlal - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>दुनिया का सबसे बड़ा ठग था नटवर लाल</title>
                                    <description><![CDATA[नटवर लाल एक ऐसा मुहावरा बन गया कि अगर कोई ठगी की कोशिश या मजाक करे तो उसे लोग उसकी तुलना नटवर लाल से करने लगते हैं। नटवर लाल ने वकालत पढ़ रखी थी। लेकिन उसका वकालत में मन नहीं लगा। वो तो कुछ और ही करना चाहता था तो उसने ठगी व चोरी का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/natwarlal-was-the-worlds-biggest-thug/article-18465"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/biggest-thug-natwarlal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नटवर लाल एक ऐसा मुहावरा बन गया कि अगर कोई ठगी की कोशिश या मजाक करे तो उसे लोग उसकी तुलना नटवर लाल से करने लगते हैं। नटवर लाल ने वकालत पढ़ रखी थी। लेकिन उसका वकालत में मन नहीं लगा। वो तो कुछ और ही करना चाहता था तो उसने ठगी व चोरी का रास्ता चुन लिया। उसकी सबसे पहली चोरी 1000 रूपए कि थी। जो कि उसने अपने पड़ोसी के नकली हस्ताक्षर कर उनके बैंक खाते से निकलवाए थे। उसे तब यह ज्ञान हुआ कि वो किसी के भी जाली दस्तखत कर सकता है। बस फिर क्या था उसने इस हुनर का बखूबी उपयोग किया। नटवरलाल को ज्यादा अंग्रेजी नहीं आती थी। लेकिन जितनी आती थी वो उसके लिए काफी थी। अगर और ज्यादा अंग्रेजी आती होती तो शायद भारत ही नहीं विदेशों में भी उसके कारनामों की कहानियां सुनाई जाती।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार उसके पड़ोस के गाँव में उस समय के राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद आये हुए थे। नटवर लाल को उस समय डा. राजेंद्र प्रसाद से मिलने का मौका मिला। नटवर लाल ने उनके सामने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के भी हुबहू हस्ताक्षर करके सबको हैरान कर दिया। डा. राजेंद्र प्रसाद नटवर लाल से काफी प्रभावित हुए। नटवर लाल ने उन्हें कहा कि यदि आप एक बार कहें तो मैं विदेशियों को उनका कर्जा वापिस कर उन्हें भारत का कर्जदार बना सकता हूँ। तब डा. राजेंद्र प्रसाद ने उसे समझाते हुए साथ चलने को कहा और नौकरी दिलवाने का भी आश्वासन दिया। पर नटवर को अब नौकरी कहां सुहाती थी। वो तो बस अपनी मन मर्जी करना चाहता था।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तो उसके हाथ ऐसा जादुई चिराग लग चुका था जिससे वो कुछ ऐसा करने वाला था जो कोई साधारण व्यक्ति सोच भी नहीं सकता। वो जादुई चिराग था राष्ट्रपति के हस्ताक्षर। जिनका प्रयोग कर उसने तीन बार ताजमहल, दो बार लाल किला और एक बार राष्ट्रपति भवन बेच दिया। वो इतने पर ही नहीं रुका, बढ़ता ही चला गया। आज के जमाने में हम एक विषय के बारे में अक्सर चर्चा करते हैं कि फलाना मंत्री बिका हुआ है, फलाना अफसर बिक चुका है। लेकिन क्या कभी कोई सोच सकता था कि कोई मंत्रियों को ही बेच दे। नटवर लाल ने ऐसा कर दिखाया था। उसने संसद भवन को उसके 545 सांसद सहित बेच दिया था।</p>
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                <pubDate>Wed, 16 Sep 2020 10:00:33 +0530</pubDate>
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                <title>कानपुर का नटवरलाल राजस्थान में मिला, हैरत में डालने वाले हैं इसके कारनामे</title>
                                    <description><![CDATA[कानपुर शहर में वीसी के नाम पर व्यापारियों को चूना लगाया और बैंक से होटल खोलने के नाम पर ऋण लेकर चंपत हो गया था। कानपुर, sach kahoon। अब तक सौ करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करके नटवरलाल की पहचान बना चुका ओम जायसवाल उर्फ राजन अहलूवालिया को पुलिस मुर्दा मानने लगी थी लेकिन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/natwarlal-of-kanpur-arrested/article-9647"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-06/crime.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">कानपुर शहर में वीसी के नाम पर व्यापारियों को चूना लगाया और बैंक से होटल खोलने के नाम पर ऋण लेकर चंपत हो गया था।</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर, sach kahoon।</strong> अब तक सौ करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करके नटवरलाल की पहचान बना चुका ओम जायसवाल उर्फ राजन अहलूवालिया को पुलिस मुर्दा मानने लगी थी लेकिन वह राजस्थान की जेल में जिंदा मिल गया है। वह शहर में व्यापारियों को वीसी के नाम पर और फिर बैंक से होटल खोलने के नाम पर लाखों का लोन, नौकरी और प्रापर्टी के नाम पर करोड़ों का चूना लगाने के बाद से फरार था। अब नौबस्ता पुलिस उसकी रिमांड लेने की तैयारी में जुट गई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">रेलवे में था वेलफेयर इंस्पेक्टर, नौकरी जाने पर बना ठग</h2>
<p style="text-align:justify;">पुलिस को उसके घर की कुर्की में मिले शादी के एल्बम से वाराणसी के एक स्टूडियो का नंबर मिला। वहां से पता चला कि वह मुरादाबाद का रहने वाला है। पड़ताल में सामने आया कि वह मुरादाबाद में रेलवे में वेलफेयर इंस्पेक्टर पद पर तैनात था। रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के चलते निकाला गया। आजकल वह हरियाणा में एक रिश्तेदार के घर पर है। पुलिस ने हरियाणा पुलिस से संपर्क किया तो तो सामने आया कि उसे सीकर पुलिस ने 40 लाख रुपये ठगी में गिरफ्तार किया है और उसकी महिला मित्र की तलाश कर रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पहली पत्नी को छोड़ा, अपने से आधी उम्र की लड़की से की शादी</h2>
<p style="text-align:justify;">ओम जायसवाल परिवार के साथ वाराणसी के राजघाट स्थित रेलवे कालोनी में रहता था। उसके पिता आरएस अहलूवालिया रेलवे कर्मी थी। मुरादाबाद में वेलफेयर इंस्पेक्टर पद पर तैनाती के दौरान उसने चंद्र नगर स्थित फ्रेंड्स कालोनी में घर बनवा लिया। देहरादून निवासी शारदा से शादी की। दो बच्चे होने के बाद उसे छोड़ दिया। इसके बाद ठग ने अपने से आधी उम्र की लखीमपुर निवासी युवती से शादी कर ली।</p>
<h2 style="text-align:justify;">महिला कर्मियों के सहारे फंसाता था क्लाइंट</h2>
<p style="text-align:justify;">ओम जायसवाल ठगी के लिए किसी भी हद तक गिर जाता था। उसने आफिस में कई महिला कर्मचारी रखी थीं। जिन्हें बैंक में लोन व निवेश करने वाले क्लाइंट के सामने पेश करता था। उसने लखनऊ की एक करोड़ों की डील के लिए अपनी महिला मित्र का भी इस्तेमाल किया। इसके बाद उसके पहले पति को एक होटल गिफ्ट किया था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मुर्दा बनने के लिए यह सब किया</h2>
<p style="text-align:justify;">अबतक सौ करोड़ से अधिक की ठगी कर चुका ओम जायसवाल उर्फ राजन अहलूवालिया ने पहले व्यापारियों को वीसी के नाम पर करोड़ों का चूना लगाया। इसके बाद बैंक से होटल खोलने के नाम पर लाखों का लोन, नौकरी और प्रापर्टी के नाम पर पब्लिक को चूना लगा फरार हो गया। नौबस्ता पुलिस ने जब घर की कुर्की को तो खुद को मरा साबित करने के लिए हरिद्वार में गंगा किनारे अपने कपड़े रखकर फरार हो गया। इससे पहले मुरादाबाद में ठगी करके फरार होने से पहले गढ़मुक्तेश्वर के पास अपनी कार व कपड़े छोड़ गया था। पुलिस ने अपनी फाइल में उसे मरा हुआ तो नहीं दिखाया लेकिन मुर्दा मानकर जांच लगभग बंद कर दी थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्लासिक क्रिएशन फर्म से चला रहा था ठगी का साम्राज्य</h2>
<p style="text-align:justify;">ओम जायसवाल वर्ष 2002 में शहर आया था। वह क्लासिक क्रिएशन फर्म के नाम से शहर में होटल, फ्लोर मिल और चिटफंड कंपनी संचालित करने लगा। साकेतनगर में खुद और जूही में उसकी लखीमपुर निवासी रखैल होटल से ठगी का धंधा चला रही थी। जिसे साकेतनगर में एक फ्लैट दिला रखा था। ठगी के लिए संचालित की जाने वाली फर्मो के नाम में वह क्लासिक शब्द का प्रयोग जरूर करता था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बैंक से नीलाम होने वाली संपत्ति में करता था खेल</h2>
<p style="text-align:justify;">ओम जायसवाल बैंक से नीलाम होने वाली संपत्ति पर नजर रखता था। उसने शहर में ही नहीं उन्नाव बीघापुर, लखीमपुर में गोला गोकर्णनाथ आदि में भी करोड़ों की जमीन खरीदी थी। तत्कालीन बाबूपुरवा सीओ हीरा सिंह ने दो फरवरी 2011 को बाबूपुरवा और गोविंदनगर सर्किल फोर्स के साथ उसके नौबस्ता हंसपुरम स्थित घर में रात करीब 12 बजे दबिश दी, लेकिन तब तक वह घर छोड़कर फरार हो गया था। जबकि पुलिस ने पूरे घर को चारों तरफ से घेर रखा था। पुलिस को उसके घर से करोड़ों की प्रापर्टी के कागजात और कई दस्तावेज मिले थे। दबिश के दौरान तत्कालीन एसएसपी भी मौके पर पहुंचे थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">किदवईनगर थाने के बाहर खड़ी हैं लाखों की लग्जरी गाडिय़ां</h2>
<p style="text-align:justify;">ओम जायसवाल पुलिस की दबिश के बाद घर के पिछले दरवाजे से निकल गया, लेकिन अपनी चार लग्जरी गाडिय़ों को ठिकाने नहीं लगा सका था। उसकी लाखों की लग्जरी गाडिय़ां किदवईनगर थाने के बाहर खड़े-खड़े कबाड़ हो गई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अधिवक्ता अजय निगम की मेहनत लाई रंग, कानपुर पुलिस लेगी रिमांड</h2>
<p style="text-align:justify;">जूही लाल कालोनी निवासी अधिवक्ता अजय निगम ने क्लासिक क्रिएशन फर्म के संचालक ओम जायसवाल व साथियों के खिलाफ किदवईनगर में मामला दर्ज कराया था। उसके बाद वह फरार हो गया। उन्होंने उसके बाद भी हार नहीं मानी और उससे जुड़ी हर खबर पर ध्यान देते रहे। इसी दौरान उन्हें ओम जायसवाल के सीकर कोतवाली में गिरफ्तार होने की जानकारी मिली। इस पर उन्होंने दारोगा अमित कुमार और बीरबल पूनिया से संपर्क कर पुष्टि की। इसके बाद स्थानीय पुलिस को सूचना दी। एसएसपी अनंतदेव तिवारी ने एसपी क्राइम राजेश यादव को ठग के खिलाफ सभी मामलों में कोर्ट में बी वारंट दाखिल कर रिमांड लेने को कहा है।</p>
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                <pubDate>Wed, 19 Jun 2019 10:04:58 +0530</pubDate>
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                <title>अमिताभ के लिये स्पेशल है आठ जून की तारीख</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के लिये आठ जून की तारीख बेहद स्पेशल है। अमिताभ की फिल्म मिस्टर नटवर लाल 08 जून 1979 को प्रदर्शित हुयी थी। इस फ़िल्म के बाद अमिताभ की ज़िंदगी में कई बदलाव आये। इस फ़िल्म के बाद ही अमिताभ बच्चों के बीच भी लोकप्रिय हुए। बच्चों के साथ फ़िल्म में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/eight-june-is-special-for-amitabh-bachan/article-4033"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/amitabh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)। </strong>बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के लिये आठ जून की तारीख बेहद स्पेशल है। अमिताभ की फिल्म मिस्टर नटवर लाल 08 जून 1979 को प्रदर्शित हुयी थी। इस फ़िल्म के बाद अमिताभ की ज़िंदगी में कई बदलाव आये। इस फ़िल्म के बाद ही अमिताभ बच्चों के बीच भी लोकप्रिय हुए। बच्चों के साथ फ़िल्म में गाया उनका एक गीत ‘मेरे पास आओ, मेरे दोस्तों, एक किस्सा सुनो’ बेहद पॉपुलर हुआ। इस गाने के बाद अमिताभ अचानक से बच्चों के फेवरेट बन गए। आज भी टीवी या रेडियो पर बिग बी का यह गाना आता है तो बच्चे बड़े चाव से इसे देखते-सुनते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">‘मेरे पास आओ’ यह ही वो पहला गाना है जिससे अमिताभ ने सिंगर के रूप में डेब्यू किया था। अमिताभ ने कई फ़िल्मों में कई गीत गाये हैं। इनमें से लगभग सारे गीत हिट भी रहे हैं। लेकिन, पहली बार अमिताभ ने ‘मिस्टर नटवरलाल’ फ़िल्म के लिए ही गाया था। इस फ़िल्म के संगीतकार थे- राजेश रोशन जब कि गीत आनंद बख्शी ने लिखे थे। ये गाना रिकॉर्ड करने में अमिताभ के पसीने छूट गए थे। उन्होंने इस बारे में कहा भी है कि ‘मुझे अचानक से ख़बर दी गई कि पहली बार मुझे अपने ही बैकग्राउंड गाने ‘मेरे पास आओ..’ को गाना है और इस प्रस्ताव से डरकर मैंने फ़िल्म के डायरेक्टर और संगीतकार से घंटों बहस की कि मैं ये नहीं करूंगा, क्योंकि मैं यह कर ही नहीं सकता।’ बाद में इस गाने को महबूब स्टूडियो में रिकॉर्ड किया गया।</p>
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                <pubDate>Fri, 08 Jun 2018 13:00:31 +0530</pubDate>
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