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                <title>Sun - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Sun RSS Feed</description>
                
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                <title>सतरंगी छल्ले में घिरा सूर्य बना चर्चा का विषय</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी। (सच कहूँ न्यूज) करीब दो घंटे तक आसमान में सतरंगी छल्ले (Rainbow) में घिरा सूर्य लोगों में चर्चा का विषय बना रहा। सोशल मीडिया पर इसके फोटो और वीडियो भी खूब वायरल हुए। आसमान में सोमवार की दोपहर 12:35 बजे से करीब दो घंटे तक सूर्य सतरंगी छल्ले में घिरा नजर आया। बहुत दिनों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sun-surrounded-by-rainbow-rings/article-46076"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/sun.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी। (सच कहूँ न्यूज)</strong> करीब दो घंटे तक आसमान में सतरंगी छल्ले (Rainbow) में घिरा सूर्य लोगों में चर्चा का विषय बना रहा। सोशल मीडिया पर इसके फोटो और वीडियो भी खूब वायरल हुए। आसमान में सोमवार की दोपहर 12:35 बजे से करीब दो घंटे तक सूर्य सतरंगी छल्ले में घिरा नजर आया। बहुत दिनों बाद दिखा यह नजारा लोगों में चर्चा का विषय बना रहा। सोशल मीडिया पर इसके फोटो और वीडियो भी खूब वायरल हुए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विज्ञान की भाषा में ‘सोलर हैलो’</h3>
<p style="text-align:justify;">बीएचयू भू भौतिकी विभाग के प्रो. मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि विज्ञान की भाषा में इसे सोलर हैलो बोलते हैं। बादल जब बहुत ऊपर होते हैं तो वो सूर्य की किरणें आसमान की नमी से टकराती हैं। (Varanasi News) इस वजह से सूर्य के चारों ओर रिंग जैसा नजारा देखने को मिलता है। इससे सतरंगी छवि उभरती है। इस तरह का दृश्य ठंडे प्रदेशों में अधिक देखने को मिलता है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Apr 2023 18:44:54 +0530</pubDate>
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                <title>पृथ्वी बुधवार को सूर्य के सबसे निकट पहुंचेगी: पीएसआई</title>
                                    <description><![CDATA[हैदराबाद (एजेंसी)। प्लैनेटरी सोसाइटी आॅफ इंडिया (पीएसआई) ने मंगलवार को कहा कि पृथ्वी बुधवार की रात सूर्य के सबसे निकटतम बिंदु पर पहुंचेगी। पीएसआई के निदेशक एन रघुनंदन कुमार ने एक विज्ञप्ति में कहा कि पृथ्वी बुधवार रात नौ बजकर 44 मिनट पर अपनी वार्षिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में सूर्य के निकटतम बिंदु पर 0.98329एयू यानी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/know-interesting-things-about-earth-and-sun/article-41850"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/earth-sun.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हैदराबाद (एजेंसी)।</strong> प्लैनेटरी सोसाइटी आॅफ इंडिया (पीएसआई) ने मंगलवार को कहा कि पृथ्वी बुधवार की रात सूर्य के सबसे निकटतम बिंदु पर पहुंचेगी। पीएसआई के निदेशक एन रघुनंदन कुमार ने एक विज्ञप्ति में कहा कि पृथ्वी बुधवार रात नौ बजकर 44 मिनट पर अपनी वार्षिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में सूर्य के निकटतम बिंदु पर 0.98329एयू यानी सूर्य से 14,70,98,928 किलोमीटर दूर पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षा में चक्कर लगाती है, जिसके कारण एक वर्ष में एक समय पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है और एक समय सबसे दूर होती है। खगोलीय रूप से इस घटना को ‘उपसौर’ कहा जाता है, जबकि सात जुलाई, 2023 को सुबह 01:16 बजे पृथ्वी सूर्य से 1.016एयू (15,20,93,253 किमी) पर होगी यानी सूर्य से सबसे दूर बिंदु पर, जिसे ‘अपसौर’ कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे शब्दों में, चार जनवरी को उपसौर के कारण, पृथ्वी अपनी कक्षा में सात जुलाई, 2023 की तुलना में सूर्य से 49,94,325 किमी नजदीक होगी। कुमार ने कहा कि आमतौर पर माना जाता है कि पृथ्वी से सूर्य की दूरी के कारण पृथ्वी पर मौसम या तापमान में बदलाव होता है लेकिन यह सच नहीं है। सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हुए पृथ्वी का अक्षीय झुकाव (लगभग 23.5 डिग्री) पृथ्वी पर मौसम और तापमान निर्धारित करता है, जिसमें से एक गोलार्ध सूर्य की ओर और दूसरा उसके विपरित होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जुलाई में जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वर्ष की शुरूआत में जनवरी महीने में उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश देशों में ठंड होती है जबकि पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है। जबकि दक्षिणी गोलार्ध के देशों में गर्मी होती है। साथ ही, जुलाई में जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है तो जनवरी की तुलना में भारत और पड़ोस देशों में बहुत गर्मी पड़ती है। इसलिए यह स्पष्ट होता है कि सूर्य से पृथ्वी की दूरी से मौसम निर्धारित नहीं होता है बल्कि सूर्य के चारों ओर अपनी वार्षिक चक्कर के दौरान इसके झुकाव से मौसम तय होता है। पीएसआई निदेशक ने कहा कि पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 365.25 दिन लगते हैं। पृथ्वी की तुलना में, बृहस्पति ग्रह को सूर्य की एक परिक्रमा पूरा करने में 11.862 वर्ष लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमार ने कहा कि पृथ्वी की तरह ही बृहस्पति का भी सूर्य की परिक्रमा के दौरान उपसौर और अपसौर होता है। इस प्रकार से, 20 जनवरी, 2023 को, बृहस्पति सूर्य के निकटतम बिंदु पर होगा जबकि बृहस्पति 28 दिसंबर, 2028 को सूर्य से सबसे दूरस्थ बिंदु पर होगा। पिछली बार बृहस्पति 17 मार्च, 2011 को सूर्य के निकटतम बिंदु पर था। अन्य ग्रहों की तरह सूर्य के चारों ओर बृहस्पति की कक्षा भी अण्डाकार है लेकिन यह गोलाकार के बहुत करीब है। इसलिए जब बृहस्पति ग्रह उपसौर या अपसौर अवस्था में होता है तो दूरी में लगभग 10.2 प्रतिशत का अंतर होता है। बृहस्पति 20 जनवरी को हालांकि, सूर्य के सबसे निकट होगा लेकिन वह पृथ्वी के निकटतम बिंदु पर नहीं होगा क्योंकि बृहस्पति पृथ्वी के सबसे निकट 27 सितंबर, 2022 को आया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सूर्य के चारों ओर चक्कर</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बृहस्पति प्रत्येक 13 महीने में एक बार पृथ्वी के सबसे करीब पहुंचना है जो कि खगोलीय घटना के कारण होता है जिसे ‘बृहस्पति विपक्ष’ कहते हैं। पीएसआई निदेशक ने कहा कि जनवरी में होने वाले इस दो उपसौर की खगोलीय घटनाओं में आम लोग किसी भी महत्वपूर्ण घटना को नोटिस या निरीक्षण नहीं कर पाएंगे क्योंकि इसके लिए उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक जागरूकता की आवश्यकता होती है। लोग महत्वपूर्ण रूप से यह समझ सकते हैं कि पृथ्वी पर तापमान या मौसम सूर्य से उसकी दूरी पर निर्भर नहीं करता है बल्कि सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने के दौरान उसके अक्षीय झुकाव पर निर्भर करता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 03 Jan 2023 16:12:57 +0530</pubDate>
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                <title>धुंध भी हटेगी और धूप भी खिलेगी</title>
                                    <description><![CDATA[अहंकार से परेशान लोगों की बहुत बड़ी दुनिया है, जहां दूसरों के अहंकार से परेशान लोग कम हैं और खुद के अहंकार से परेशान ज्यादा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें दूसरों का अहं तो दिखता है, लेकिन अपना नहीं। अपने भीतर का अहंकार देखे और अहंकारमुक्त होने का प्रयत्न करें। लेखिका स्पिनेजा कहती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-mist-will-also-disappear-and-the-sun-will-also-blossom/article-12587"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/sun.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">अहंकार से परेशान लोगों की बहुत बड़ी दुनिया है, जहां दूसरों के अहंकार से परेशान लोग कम हैं और खुद के अहंकार से परेशान ज्यादा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें दूसरों का अहं तो दिखता है, लेकिन अपना नहीं। अपने भीतर का अहंकार देखे और अहंकारमुक्त होने का प्रयत्न करें। लेखिका स्पिनेजा कहती हैं, ‘अहंकारी व्यक्ति अपने अच्छे काम की और दूसरों के खराब काम की गिनती ही करता रहता है।’ यह अहंकार ही है जिसके चलते सब चाहते हैं कि उनके आसपास वाले उन्हें सुनें, उनका अनुसरण करें।</h2>
<h3>
<span style="text-decoration:underline;"><strong>ललित गर्ग</strong></span></h3>
<h4 style="text-align:justify;">इस दुनिया में हर व्यक्ति दु:खी है और दुखों से परेशान है, असफल होने के डर में जी रहा है। इस परेशानी से मुक्ति भी चाहता है लेकिन प्रयास अधिक दु:खी एवं असफल होने के ही करता है। हर व्यक्ति का ध्यान अपनी सफलताओं पर कम एवं असफलताओं पर अधिक टिका है। सकारात्मक नजरिया बनाने से ही असफलता की धुंध हट सकती है एवं सफलता की धूप खिल सकती है। ये हम पर ही है कि हम चाहें तो बिखर जाएं या पहले से बेहतर बन जाएं। आप बुरी किस्मत कहकर खुद को दिलासा भी दे देते हैं। लेकिन, सच यही है कि यह भाग्य पर नहीं, आप पर निर्भर करता है। आप वही बन जाते हैं, जो आप चुनते हैं। लेखक स्टीफन कोवे कहते हैं, ‘मैं अपने हालात से नहीं, फैसलों से बना हूं।’ वह व्यक्ति बहुत दु:खी है जो पूर्वाग्रह से ग्रस्त है। यह सही है कि हम सबकी एक सामाजिक जिंदगी है। हमें उसे भी जीना होता है। हम एक-दूसरे से मिलते हैं, आपस की कहते-सुनते हैं। हो सकता है कि आप बहुत समझदार हों। लोग आपकी सलाह को तवज्जो देते हों। पर यह जरूरी नहीं कि आप ही सबकुछ हो, आपको ही सारा ज्ञान हो। इस तरह का ‘हम सब जानते हैं’ का भाव चित्त को शांत नहीं होने देता। अहं से अहं टकराते रहते हैं। शक व संदेहों की कड़ियां बढ़ती जाती हैं। जहां जरूरत ठहरने की होती है, हम दौड़ते चले जाते हैं। संभावनाओं का पूरा आकाश हमारे इंतजार में होता है और हम भटकते रह जाते हैं। यह भटकन ही सारे दु:खों, परेशानियों एवं समस्याओं का कारण है।<br />
इस तरह के हठ एवं जड़ कोटि के लोग समझाने पर भी समझ नहीं पाते हैं या समझना नहीं चाहते, जो समझना नहीं चाहता, उसे समझाया नहीं जा सकता। कहावत है कि आप घोड़े को जलाशय तक ले जा सकते हैं, किन्तु उसे पानी पीने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। जो यह धार कर बैठा है कि मुझे समझा नहीं है, उन्हें ब्रह्माजी भी आ जाएं तो भी समझना नहीं सकते। रात-दिन कानों के परदों से हजारों शब्द व ध्वनियां गुजरती हंै। हम कुछ पर ही गौर करते हैं। उनमें भी बहुत कम शब्द होते हैं, जो दिल को छू पाते हैं। दरअसल, हमारे सुनने और समझने के बीच एक दूरी होती है। जरूरी नहीं जो सुना, उसे वैसा ही समझ लिया जाए। रूमी तो कहते हैं, ‘जब कान ध्यान से सुनते हैं तो वे आंख बन जाते हैं। पर शब्द अगर दिल के कानों तक नहीं जाते, तो कुछ नहीं घटता।’ इस बात का पता लगाने की कोशिश करें कि आपको अपने जीवन में किन चीजों से शिकायते हैं, क्यों आप मुस्कराते नहीं हैं, क्यों आप दूसरों के करीब जाने से हिचकिचाते हैं और आपको क्यों लगता है कि सिर्फ आप ही सब कुछ जानते हैं और जो आप सोचते हैं, वही अंतिम सत्य है।<br />
जीवन कभी एक-सा नहीं रहता, इसलिए स्थायी सुरक्षा जैसा कोई पल नहीं होता। इसलिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास कीजिए। आपके जो डर हैं, उनसे मुंह छिपाने के बजाय उनका सामना कीजिए। यह अच्छी बात है कि सकारात्मकता से हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा मिलती है, लेकिन यह भी जरूरी नहीं कि हमेशा सब कुछ खूबसूरत, सहज और सकारात्मक ही हो। इसलिए परेशानियों का सामना भी पूरी ऊर्जा के साथ करें। हमेशा खुद को सुरक्षा के घेरे में न बांधें, चुनौतियां जरूरी है सफल जीवन के लिये, इसलिये चुनौतियों से भागे नहीं, उनका सामना करें। आप भी इंसान हैं और आपसे भी गलती हो सकती है, इसका अर्थ यह नहीं कि आप कर्म करना ही छोड़ दे। गलतियों से न घबराएं, उनमें सुधार करते रहें। गलती एक ऐसा अनुभव है, जो आपको अगली बार सही काम करने के लिए प्रेरित करता है।<br />
अहंकार से परेशान लोगों की बहुत बड़ी दुनिया है, जहां दूसरों के अहंकार से परेशान लोग कम हैं और खुद के अहंकार से परेशान ज्यादा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें दूसरों का अहं तो दिखता है, लेकिन अपना नहीं। अपने भीतर का अहंकार देखे और अहंकारमुक्त होने का प्रयत्न करें। लेखिका स्पिनेजा कहती हैं, ‘अहंकारी व्यक्ति अपने अच्छे काम की और दूसरों के खराब काम की गिनती ही करता रहता है।’ यह अहंकार ही है जिसके चलते सब चाहते हैं कि उनके आसपास वाले उन्हें सुनें, उनका अनुसरण करें। जैसा वह कह रहे हैं, वैसा ही करें। पर क्या ऐसा हो पाता है? ज्यादातर यही कहते हुए मिलते हैं कि डराए-धमकाए बिना काम ही नहीं होता। नतीजा, कहने और सुनने वाले के बीच एक दूरी ही बनी रहती है और नयी-नयी समस्याएं पैदा करती रहती है। मैनेजमेंट गुरु ब्रायन टेज्सी कहते हैं, ‘किसी भी क्षेत्र में प्रबंधन का एक ही अचूक नियम है। दूसरों से उसी तरह काम करवाएं, जिस तरह आप चाहते हैं कि दूसरे आप से काम करवाएं।’<br />
मैनेजमेंट का सिद्धांत है कि कर्मचारी को अधिकारी के संकेत को समझना चाहिए। दूसरे शब्दों में दृष्टांत की भाषा में कहा गया कि कर्मचारी को अपने अधिकारी का महाराणा प्रताप वाला चेतक होना चाहिए। चेतक घोड़े की समझ-बूझ और स्वामीभक्ति प्रसिद्ध है। अगर ऐसे कर्मचारी हों तो कंपनी का बहुत विकास होगा। ऐसे लोगों का जीवन भी सुखी होता है। लेकिन आज यह बात देखने में नहीं आती। यही कारण है कि हर व्यक्ति का अपने काम के प्रति उत्साह कम होता जा रहा है। कितने ही काम ऐसे होते हैं, जो रोज जेहन में आते हैं और उन्हें हम बिना कुछ किए आगे के लिए खिसका देते हैं। हमारे कितने ही सपने और विचार इसी तरह टलते-टलते अतीत बन चुके हैं। और फिर हमें लगता है कि जिंदगी भी खिसकते-खिसकते ही बीत रही है। दरअसल हम जानते ही नहीं कि आखिर हम चाहते क्या हैं? हम जो चाहते हैं और उसे पूरा करने के लिए जो करना है, इस बीच की दूरी को कम करना ही सफलता दिलाता है।<br />
आज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्ञान का विकास तो बहुत हो रहा है, किन्तु आग्रह को कम करने की साधना नहीं हो रही है। समस्या यह भी है कि चरित्र का पाठ भी नहीं पढ़ाया जाता। केवल पैसा कमाने का पाठ पढ़ाया जाता है। अब कौन समझाए कि गाली के बदले में गाली देना तो गाली देने वाले की श्रेणी में आना है। सफलता सिर पर जल्दी चढ़ती है और असफलता दिल पर। जीत के नशे में झूमते हुए को हार नहीं दिखती और हारे हुए को जीत की कोई उम्मीद नजर नहीं आती। लेकिन, असली जीत उनकी होती है जो सफलता को सिर नहीं चढ़ने देते और हार को दिल से नहीं लगाते। लेखक क्रिस गार्डनर कहते हैं, ‘समस्याओं को हल नहीं कर पाना ठीक है, पर उनसे भागना, बिल्कुल नहीं।’ हार हो या जीत, हमें अपना सौ प्रतिशत देने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। यही है सार्थक एवं सफल जीवन का मार्ग, नये जीवन की शुरूआत।</h4>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jan 2020 20:20:45 +0530</pubDate>
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                <title>&amp;#8230;कभी अस्त नहीं हो सकता ‘सच’ का सूरज</title>
                                    <description><![CDATA[12 महीने, 365 दिन या एक बरस। मुमकिन है, आप सबके लिए इन तीनों ही संज्ञाओं का एक ही रटा-रटाया (The sun of ‘truth)  अर्थ हो यानि महज ‘कलेंडर’ में बदलाव। लेकिन, हर गुजरते पल के साथ एक अनकही-अनसुनी-अंजानी सी ‘पीर’ सहने वाले किसी भी शख्स से चंद पल बतियाएंगे तो बखूबी मालूम चल जाएगा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/can-never-set-not-true-in-the-sun/article-5551"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/can-never-set-not-true-in-the-sun.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;"><strong>12 महीने, 365 दिन या एक बरस। </strong></h1>
<p style="text-align:justify;">मुमकिन है, आप सबके लिए इन तीनों ही संज्ञाओं का एक ही रटा-रटाया<strong> (The sun of ‘truth)</strong>  अर्थ हो यानि महज ‘कलेंडर’ में बदलाव। लेकिन, हर गुजरते पल के साथ एक अनकही-अनसुनी-अंजानी सी ‘पीर’ सहने वाले किसी भी शख्स से चंद पल बतियाएंगे तो बखूबी मालूम चल जाएगा कि, वक्त की ‘धार’ और ‘मार’, दोनों ही कितनी भयावह होती हैं? भारतवर्ष ही नहीं, वरन् समूचे विश्व में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अलौकिक प्रकाश बिखेरने वाली विशाल सेवाशील संस्था ‘डेरा सच्चा सौदा’ से जुड़े हर अनुयायी ने ऐसी परिस्थितियों को झेला है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात और है कि, अपने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अनन्य प्रेरणा और मार्गदर्शन की बदौलत ऐसे किसी भी व्यक्ति के मन में कभी किसी के प्रति द्वेष या निंदा का भाव उत्पन्न नहीं हुआ। हर संकट, हर मुश्किल, हर चुनौती से विचलित हुए बिना वे आज भी पूर्ण मनोयोग से मानवता मात्र की सेवा में जुटे हैं और नित प्रतिदिन ईश्वर से बस यही प्रार्थना करते हैं कि, परमपिता परमेश्वर सर्वजगत का कल्याण करें और राह से भटकने वालों को सदा के लिए सत्यता के प्रकाश से आलोकित कर दें।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरी दुनिया में डेरा सच्चा सौदा की ख्याति और लोकप्रियता की मिसाल यूं ही नहीं दी जाती। यह अपनी ही अनुकरणीय कार्य शैली से जन-जन की सेवा का आदर्श उदाहरण पेश करने वाली ऐसा आदर्श संस्था है, जिसके सेवादारों की संख्या स्वयं किसी विश्व कीर्तिमान से कम नहीं। आप महज क्षण भर के लिए सेवा के किसी भी प्रारूप की परिकल्पना भर करिए, डेरे के अनगिनत अनुयायियों की ओर से पूर्ण नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा के अनेक उदाहरण देखते ही देखते आपकी आँखों के आगे नुमायां हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यकीनन, मानव कल्याण के प्रति सत्त समर्पित इस संस्था के मार्गदर्शक परम पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से हासिल सकारात्मक दृष्टिकोण और आदर्श शिक्षाओं का ही काबिल-ए-तारीफ प्रतिफल है कि, तमाम चुनौतियों के बावजूद आज भी अनुयायियों का यह विशाल समूह पूरी लगन एवं निष्ठाभाव से अपने दायित्व निर्वहन में जुटा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वह भी तब, जब गत वर्ष कमोबेश इन्हीं दिनों में, समाज विरोधियों की पूज्य गुरु जी के खिलाफ रची गई साजिश का घिनौना रूप सामने आया था, ताकि उनके अनगिनत सेवादारों का मनोबल पूरी तरह समाप्त हो जाए और वे ‘व्रजआघात’ सरीखे इस असहनीय कष्ट को सहने योग्य तक न रह सकें।<br />
बाकायदा, गहन ‘रिसर्च’ और सुनियोजित ‘पटकथा’ का सहारा लेते हुए ऐसे तमाम शर्मनाक तथा मनमाने अनर्गल आरोप पूज्य गुरुजी पर लगाए गए, जिनकी रंगत पूरी तरह ‘स्याह’ होने के बावजूद यह कांच की मानिंद बखूबी साफ हो गया कि, इस देश में अब ‘सच’ का साथ देने वालों का कोई खैरख्वाह नहीं। इतना ही नहीं, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाले मीडिया के एक बड़े वर्ग की भूमिका भी इस पूरे प्रकरण से सवालों में घिर गई, जब महज ‘सुर्खियां’ बटोरने या ‘टीआरपी’ में खुद को सबसे आगे बनाए रखने की होड़ में हर किस्म की नैतिकता से लेकर सदाचार, परोपकार, सेवाभाव, जन कल्याण और सत्यता सरीखे समस्त आदर्श मानवीय मूल्यों को सिरे से दरकिनार कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">न कोई ठोस प्रामाणिक तथ्य और न ही किसी प्रकार की मान-मर्यादा। ऐसे हर पहलू को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए मीडिया का एक बड़ा वर्ग बाकायदा किसी तयशुदा ‘टीवी श्रृंखला’ की तर्ज पर समाज में चौतरफा दुष्प्रचार का जहर घोलता रहा। मीडिया के इसी रवैये के कारण न केवल डेरे के अनुयायियों की आस्था बुरी तरह आहत हुई बल्कि, देश के आम जनमानस को गुमराह करने में भी तकरीबन तमाम टीवी चैनलों से लेकर प्रिंट मीडिया तक का एक बड़ा वर्ग कतई पीछे नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जन कल्याण में जुटे डेरा सच्चा सौदा के समूचे सांगठनिक ढांचे को पूरी तरह छिन्न-भिन्न करने की मंशा के साथ इतनी तेजी से इस षड्यंत्र का ताना-बाना बुना गया कि, दिन-रात समाजसेवा में लीन साध-संगत को कानोंकान कोई खबर न हो सकी। बची-खुची कसर, पर्दे के पीछे से ही पूरे खेल को अंजाम तक पहुंचाने में जुटी उन ‘सफेदपोश’ ताकतों ने पूरी कर दी, जो महज अपनी ‘स्वार्थपूर्ति’ की खातिर इतने खतरनाक ढंग से एक-एक चाल चलते चले जा रहे थे। तकरीबन, समूचे उत्तर भारत की हिंदी पट्टी में आम पाठकों से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग को पूरी तरह भ्रमित करते हुए डेरा सच्चा सौदा और पूज्य गुरु जी पर तमाम किस्म के मिथ्या आरोप लगाने का यह सिलसिला बदस्तूर महीनों तक जारी रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">निष्ठुरता और अमानवीयता की हद तो तब हो गई, जब इस पूरी काली साजिश के कारण अंततोगत्वा पूज्य गुरु जी के सुनारियां जाने के बाद भी मीडिया के तथाकथित मठाधीशों ने एक क्षण के लिए भी उफ न करते हुए झूठे आरोपों और तथ्यों का पुलिंदा अपने-अपने मंचों पर परोसने का क्रम थमने नहीं दिया।<br />
लेकिन, यह भी निस्संदेह, पूज्य गुरु जी से ही हासिल आत्मबल और प्रेरणा का ही सशक्त प्रभाव रहा कि, न जाने कितने ही प्रकार के पूर्वाग्रहों और कुंठित मनोदशाओं से ग्रस्त मीडिया के इस बड़े तबके से मिलने वाली नित नई चुनौती का सामना करने में आपके प्रिय समाचार पत्र ‘सच कहूँ’ ने कहीं कोई कमी नहीं रख छोड़ी। हर रोज पूरी ताकत के साथ, ‘सच कहूँ’ अपने शीर्षक के अनुरूप और यथा नाम तथा गुण की तर्ज पर सत्य की मशाल लगातार रोशन किए रहा। मिथ्या आरोपों का मजबूती से जवाब देते हुए ‘सच कहूँ’ ने अपने मार्गदर्शक की प्रेरणा के सहारे डेरा सच्चा सौदा से जुड़े एक-एक अनुयायी तक बखूबी संदेश पहुंचाया कि, उन्हें मीडिया के एक बड़े वर्ग में दर्शाए गए झूठ से जरा भी घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है बल्कि, वे पूरे आत्मविश्वास के साथ इस संकट का सामना करें और पूज्य गुरु जी से मिली सीख के सहारे जन-जन की सेवा में पहले की भांति स्वयं को क्षण प्रतिक्षण तल्लीन रखें।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक 79 विश्व कीर्तिमान अपने नाम कर चुके डेरे का यह गौरवशाली सफर पूरी आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ सतत् चलायमान है। मुश्किलें चाहें कितनी भी हों, राह में बाधाएं कितनी भी क्यों न आएं, ‘सत्य’ का सूरज कभी अस्त नहीं होगा…! वस्तुत: अपने कर्तव्य पथ से एक पल के लिए विमुख न होने वाले ये तमाम सेवाशील प्राणी हर रोज परमपिता से यही प्रार्थना करते हैं कि, वे अनर्गल और मिथ्या आरोप लगाने वालों को क्षमा करें क्योंकि, वे नहीं जानते कि, वे क्या कह रहे हैं ? वे अज्ञानी हैं, पतित हैं, अंध हैं, अश्रद्ध हैं, अविवेकी हैं, नश्वर हैं, वे धर्म-अधर्म नहीं जानते, दर्शन नहीं जानते, परोपकार नहीं जानते, वे पुण्य नहीं समझते और दान या सेवा की महिमा से पूरी तरह अंजान हैं। उनका केवल इतना उद्देश्य है कि, किसी भी तरह हमारी प्राचीन-अवार्चीन आध्यात्मिक संपन्नता और सेवाशीलता को समर्पित भावना तहस-नहस हो जाए। लेकिन, वे यह नहीं जानते कि, आध्यात्मिक संपन्नता ही तो हमारा वास्तविक बल है। न जाने कब से इसे तोड़ने के कुत्सित प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी आस्थाओं, श्रद्धाओं, सेवाशीलता को अंधश्रद्धा साबित करने की साजिश रची जा रही है। इसी के तहत, हमारे मार्गदर्शकों पर मुकदमे किए गए, उन्हें जेल में डालकर यातनाएं दी जा रही हैं लेकिन, याद रखना चाहिए कि, सांच को आंच नहीं होती। युग कोई भी हो, चुनौतियों का पहाड़ कितना ही विशालकाय क्यों न हो, हमारे आदर्श हमेशा बेदाग साबित होते रहे हैं, क्योंकि चाहे शासन-प्रशासन हो या फिर न्याय व्यवस्था ही क्यों न हो, हर व्यवस्था में आध्यात्मिक तत्व अवश्य विद्यमान रहता है और इस मूल सार्वभौमिक तत्व में विश्वास रखने वाले किसी भी परिस्थिति में अध्यात्म की गहराई में झांककर सत्य खंगालने से एक क्षण के लिए पीछे नहीं हटते। वे अध्यात्म की विराट परिधि से पूरी तरह परिचित होते हैं, साथ ही डेरा सच्चा सौदा सरीखे मानव कल्याण के प्रति सत्त समर्पित आध्यात्मिक केंद्रों तथा उनके साधकों की महिमा भी जानते हैं और हमारी आध्यात्मिक संपन्नता को हर हाल में अक्षुण्ण बनाए रखने का अपना सबसे परम दायित्व भी…! पवन शर्मा</p>
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                <pubDate>Sat, 25 Aug 2018 12:59:42 +0530</pubDate>
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                <title>धूप में माथा हो गया है काला तो इन घरेलू उपायों से कर सकते हैं साफ</title>
                                    <description><![CDATA[हैल्थ डेस्क। गर्मियों में पसीना आना आम बात है। हमारे चेहरे पर पसीने का आना और उसपर ​धूल मिटटी का गिरना ये सब हर किसी के साथ होता है। हर कोई इससे परेशान है। गर्मियों में हमारी स्किन में मेलानिन की क्वांटिटी बढ़ने से स्किन काली हो जाती है। अल्ट्रावायलेट किरणों से प्रोटेक्ट करने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/the-sun-has-become-the-forehead-so-can-these-household-remedies-clean/article-4036"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/jkjk-copy-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हैल्थ डेस्क।</strong> गर्मियों में पसीना आना आम बात है। हमारे चेहरे पर पसीने का आना और उसपर ​धूल मिटटी का गिरना ये सब हर किसी के साथ होता है। हर कोई इससे परेशान है। गर्मियों में हमारी स्किन में मेलानिन की क्वांटिटी बढ़ने से स्किन काली हो जाती है। अल्ट्रावायलेट किरणों से प्रोटेक्ट करने के कारण भी स्किन टैन होती है। गर्मियों में इसका प्रतिशत कई गुना बढ़ जाता है। स्पेशली माथे पर तो टैनिंग सबसे ज्यादा दिखाई देती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार</h3>
<p style="text-align:justify;">सन टैनिंग पूरे चहरे में सबसे ज्यादा माथे पर ही दिखाई देती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि धूप सीधे माथे पर पड़ती है। कई बार टैनिंग इतनी बढ़ जाती है कि माथे का कलर अलग और चेहरे का अलग दिखाई देने लगता है। घर में किए जाने वाले आसान से उपायों से इस टैनिंग को हटाया जा सकता है। आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शहद और पपीता :</strong> फ्रेश पपीता का गूदा निकालकर उसमें एक टीस्पून शहद मिला लें। इसे अच्छी तरह मिलाएं। अब इस पैक को माथे पर लगाकर सूखने दें, फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इस उपाय को आपको हफ्ते में तीन बार करना है। माथे की टैनिंग चली जाएगी। पपीता टैनिंग को हटाकर स्किन को क्लीन करता है और शहद सॉफ्टनेस लाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नींबू का रस और एलोवेरा :</strong> आधे नींबू के रस में एलोवेरा जेल या उसकी पत्ती से थोड़ा सा रस निकालकर मिला लें। इस पैक को माथे और चेहरे पर लगाकर सूखने दें फिर ठंडे पानी से धो लें। इस उपाय को आपको हर दिन करना है। माथे की टैनिंग कुछ ही दिन में चली जाएगी। नींबू में टैनिंग को हटाने वाले तत्व पाए जाते हैं वहीं एलोवेरा स्किन के कलर को लाइट करता है।</p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jun 2018 13:30:05 +0530</pubDate>
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