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                <title>आतंकवाद का विरोध करें फैसल</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू कश्मीर के युवा आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, वह जम्मू कश्मीर (Faisal Should Stand Against Terrorism) के 2010 की आईएएस परीक्षा में अव्वल रहने वाले पहले कश्मीरी हैं। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में दो बिंदुओं पर बहस शुरू हो गई है। पहली बात यह है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">जम्मू कश्मीर के युवा आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, वह जम्मू कश्मीर (Faisal Should Stand Against Terrorism) के 2010 की आईएएस परीक्षा में अव्वल रहने वाले पहले कश्मीरी हैं। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में दो बिंदुओं पर बहस शुरू हो गई है। पहली बात यह है कि शाह फैसल ने सुरक्षा बलों के साथ झड़प दौरान मृतक नागरिकों का मुद्दा उठाया है। इसके अलावा धार्मिक असहनशीलता को इस्तीफे का कारण बताया है, दूसरी तरफ विरोधियों को आपत्ति है कि वह आतंकवाद पर चुप क्यों हैं? नि:संदेह आम नागरिकों की मौत गंभीर विषय है, लेकिन फैसल के फैसले में भी राजनीति की बू आ रही है। फैसल नागरिकों की मौत के संदर्भ में कश्मीर के युवा के तौर पर कम और एक राजनेता के रूप में ज्यादा बोल रहे हैं। यह भी चर्चा है कि वह जल्द ही नेशनल कान्फ्रैंस पार्टी में शामिल हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">फैसल की शब्दावली में केंद्र या भाजपा का विरोध स्पष्ट नजर आ रहा है। दरअसल कश्मीरी राजनीति की (Faisal Should Stand Against Terrorism) एक पहचान बन गई है जिसने राज्य की राजनीति में चमकना है, वह केंद्र सरकार के खिलाफ कोई न कोई धार्मिक व अलगाववादियों से सुहानूभूति का पैंतरा ईस्तेमाल करता है। जहां तक आम नागरिकों की मौत का सवाल है, यह बेहद चिंता व दुख का विषय है। लेकिन फैसल मुद्दों का हल निकालने की बजाय मुद्दे को इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। वास्तव में कश्मीर को ऐसे युवा नेताओं की आवश्यकता है जो केंद्र व आम जनता में एक पुल बनने का काम करें। आम नागरिकों की मौत पर पत्थरबाजी की घटनाएं एक सिक्के के दो पहलू बन गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठन पैसा भेजकर युवाओं से पत्थरबाजी करवा रहे हैं। पुलिस के पास इसके बकायदा प्रमाण है। बेरोजगार युवाओं को गुमराह कर पत्थर मरवाए जाते हैं। आवश्यकता यह थी कि युवाओं को गुमराह करने से बचाने के लिए मुहिम चलाई जाती दूसरी तरफ विदेशी आतंकवाद ही सभी समस्याओं की जड़ है। कश्मीर में आतंकवादियों को नायकों के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि बुरहान वाणी जैसे आतंकवादियों के पारिवारिक सदस्य भी आतंकवाद के खिलाफ हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि फैसल को कश्मीर की नाजुक स्थिति की चिंता है तब वह सेना की कार्यवाईयों पर सवाल उठाने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ भी कोई मुहिम शुरू करें। फैसल को इस बात का भी इल्म होना चाहिए कि राज्य में यदि आम जनता के साथ सैनिक कर्मचारियों ने धक्केशाही की है तो उन्हें अदालत ने सजाएं भी सुनाई गई हैं। फैसल को कलम की ताकत का भी प्रयोग करना चाहिए। वह आम जनता के हक में आने की पहल करें और जनता की आवाज सरकार, मीडिया तक पहुंचाएं, लेकिन यह काम केवल लोगों को समर्पित नेता ही कर सकता है, किसी पार्टी विशेष के साथ जुड़ने का इच्छुक तो अपने मतलब की ही बात करेगा। यह प्रतीत होता है कि फैसल ने कश्मीर मामले में निष्पक्षता व ईमानदारी से फैसला नहीं लिया।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jan 2019 19:53:07 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>हम रहें या ना रहें, यह झंडा रहना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय स्वाधीनता का सही नेतृत्व देने वाले एवं जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने वाले मानवता के पुजारी, भारत के महान नेता लाल बहादुर शास्त्री सज्जनता, त्याग, सादगी व ईमानदारी की साक्षात मूर्त थे, जिनके प्रधानमंत्री काल में उनकी सूझबूझ एवं कुशल नेतृत्व से भारत ने पाकिस्तानी फौज को मात दी थी तथा जय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/whether-we-live-or-not-this-flag-should-remain/article-6093"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/whether-we-live-or-not-this-flag-should-remain.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय स्वाधीनता का सही नेतृत्व देने वाले एवं जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने वाले मानवता के पुजारी, भारत के महान नेता लाल बहादुर शास्त्री सज्जनता, त्याग, सादगी व ईमानदारी की साक्षात मूर्त थे, जिनके प्रधानमंत्री काल में उनकी सूझबूझ एवं कुशल नेतृत्व से भारत ने पाकिस्तानी फौज को मात दी थी तथा जय जवान-जय किसान का नारा देकर किसानों एवं सैनिकों के मनोबल को ऊंचा उठाया था। शास्त्री जी के क्रियाकलाप सैद्धांतिक न होकर व्यवहारिक तथा जनता की आवश्यकता के अनुरूप थे। 2 अक्टूबर, 1904 को जन्मे लाल बहादुर की प्रारम्भिक शिक्षा घर में हुई। इन्होंने सन 1925 में स्नातक शास्त्री की डिग्री प्राप्त की, तभी से उनके नाम के आगे शास्त्री शब्द सदा के लिए जुड़ गया। स्नातक होने के पश्चात् उन्होंने देश सेवा का व्रत लेते हुए राजनैतिक जीवन की शुरूआत की।</p>
<p style="text-align:justify;">वे सच्चे गांधीवादी थे तथा सारा जीवन सादगी से बिताते हुए गरीबों की सेवा में लगाया तथा भारत की स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने गांधीजी के 1921 के असहयोग आंदोलन, 1930 के दांडी मार्च तथा 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। गांधीजी ने 8 अगस्त, 1942 को अंग्रेजों को भारत छोड़ो व भारतीयों को करो या मरो का आदेश दिया था। उस नारे को शास्त्री जी ने करो नहीं मारो में बदलकर आजादी की क्रांति को पूरे देश में फैला दिया था। शास्त्री जी ने लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित लोक सेवक समाज के सदस्य बनकर उल्लेखनीय योगदान दिया। इनके प्रथम राजनैतिक गुरू राजर्षि पुरूषोत्तम टंडन थे, जो शास्त्री जी के सरल, ईमानदार व्यवहार के कारण उनको अत्यन्त प्रिय थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
15 अगस्त, 1947 को देश के स्वतंत्र होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में पुलिस तथा परिवहन मंत्रालय का दायित्व बखूबी निभाया। सन 1949 में शास्त्री जी गृह मंत्री के पद पर आसीन थे, तब छात्र-छात्राओं के आंदोलन में भीड़ को तीतर-बित्तर करने के लिए उन्होंने लाठीचार्ज के स्थान पर पानी की बौछार का आदेश दिया था, जिसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा। शास्त्री जी में असाधारण नैतिकता का गुण था। सन 1952 में जब केन्द्रीय मंत्रिमंडल में वे रेलमंत्री थे, तब एक रेल दुर्घटना होने पर उन्होंने नैतिकता के नाते अपने पद से त्याग-पत्र दे दिया था। शास्त्री जी ने केन्द्र सरकार के वाणिज्य, उद्योग, गृह मंत्री के रूप में कार्य करके देश की महान सेवा की तथा राजकीय विभागों में फैली अव्यवस्थाओं को दूर करने का भरसक प्रयास किया।</p>
<p style="text-align:justify;">शास्त्री जी आयुर्वेद चिकित्सा के बड़े प्रबल पक्षधर थे तथा इस पद्धति को एलोपैथिक चिकित्सा से अधिक कारगर मानते थे। उनमें आत्मविश्वास कूट-कूटकर भरा हुआ था तथा उच्च पदों पर रहते हुए, वे विनम्र थे तथा उनमें लोक कल्याण की भावना थी तथा पदलिप्सा उनमें लेशमात्र भी नहीं थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
27 मई, 1964 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के निधन के पश्चात शास्त्रीजी को सर्वसम्मति से देश का प्रधानमंत्री बनाया गया। जिस समय शास्त्री जी ने देश की बागडोर संभाली, उस समय देश में अनेक चुनौतियां थी। देश की गरीबी की समस्या के बारे में शास्त्री जी ने कहा था कि मेरी इच्छा है कि मैं देश की जनता को गरीबी के बोझ से मुक्त कर सकूं। उन्होंने गरीब, शोषित वर्ग सहित प्रत्येक वर्ग के उत्थान के लिए कार्य किया। अनाज के अभाव को दूर करने के लिए शास्त्री जी ने घर-घर खेती का अभियान चलाने तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। सभी भारतवासियों को सोमवार का उपवास रखकर केवल एक समय भोजन करने के लिए बल दिया। उन्होंने कहा था कि भारत के लोग किसी के भरोसे न रहकर आत्मनिर्भर बनें। वे सदा विश्व शांति स्थापित करने का प्रयास करते रहे तथा रूस के साथ मित्रता को बढ़ावा दिया। उनमें सबल इच्छाशक्ति, तीक्ष्ण बुद्धि और तीव्र समर्पण की भावना छिपी थी तथा उन्होंने देश का आत्मसम्मान व आत्मविश्वास पुन: प्रतिष्ठित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">
15 अगस्त, 1965 को स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा था- हम रहें या ना रहें, लेकिन यह झंडा रहना चाहिए और देश रहना चाहिए। मुझे विश्वास है कि यह झंडा रहेगा, भारत का सिर ऊंचा रहेगा तथा संसार के सभी देशों में भारत एक बड़ा देश होगा। 1965 में पाकिस्तान के भारत पर आक्रमण करने पर शास्त्री जी ने पाकिस्तानी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देने का आदेश दिया तथा ओजस्वी स्वर में कहा था कि इस बार युद्ध भारत की धरती पर नहीं, बल्कि पाकिस्तान की धरती पर होगा। उनके जय जवान – जय किसान के नारे ने भारत की जनता का मनोबल बढ़ाया तथा किसानों और सैनिकों के माध्यम से देश में चमत्कारी उत्साह फूंक दिया। भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह हराकर अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर लोहा मनवाया। उनकी नम्रता व सादगी के पीछे उनके अंदर एक परिपक्व मस्तिष्क, दूरदृष्टि और गम्भीर विवेक था। उनके आदर्श व सिद्धांतों को अपनाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देना होगा। <strong><em>मनीराम सेतिया</em></strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 02 Oct 2018 12:54:29 +0530</pubDate>
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                <title>हर मनुष्य को कर्मयोग करना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[इसलिए दु:खी नहीं हैं कि भगवान ने उन्हें सुख नहीं दिया। उनका एकमात्र दु:ख यही है कि और लोग सुखी क्यों हैं। विशेषकर पावन कहे जाने वाले अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों की जबर्दस्त भरमार है। जो बेचारे बहुत दु:खी हैं और उनके दु:ख का निवारण करने का सामर्थ्य किसी में नहीं है। सुख और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/every-person-should-work/article-5170"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/artical.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इसलिए दु:खी नहीं हैं कि भगवान ने उन्हें सुख नहीं दिया। उनका एकमात्र दु:ख यही है कि और लोग सुखी क्यों हैं। विशेषकर पावन कहे जाने वाले अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों की जबर्दस्त भरमार है। जो बेचारे बहुत दु:खी हैं और उनके दु:ख का निवारण करने का सामर्थ्य किसी में नहीं है। सुख और दु:ख की प्राप्ति के पौराणिक मनोविज्ञान से नासमझ ये लोग कभी इस बात का चिंतन नहीं करते कि उनका दु:ख क्या है, इसका कारण क्या है और निवारण का तरीका क्या है। दु:खों के वैचारिक व्योम में सदैव दु:ख प्रकटाने वाले विचारों को लिए हुए ये लोग धीरे-धीरे इतने दु:खी होने लगते हैं कि इनका पूरा आभा मंडल ही दु:खों के कई-कई आवरणों से ढक जाता है और इनका मौलिक सूक्ष्म शरीर भी दिखना बंद हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो जैसा चिंतन करता है वैसा स्थूल जगत उसके लिए तैयार हो जाता है और उन्हीं तरह के विचारों के अनुरूप उसके जीवन की दिशाएं और दशाएं निश्चित होती रहती हैं। जो किसी भी रूप में वर्तमान या भावी अथवा भूतकालीन दु:ख का चिंतन करता है, सूक्ष्म रूप में उसकी वैचारिक धारणाएं और क्रियाएं इन्हीं दु:खों में ढलने लगती हैं और बाद में मौका पाकर स्थूल आकार पा लेती हैं। इसके विपरीत जो लोग ईश्वरीय विधान को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर दु:खों की बजाय सकारात्मक भावों और सुखों का चिंतन करते हैं उन्हें कालान्तर में सुखों की प्राप्ति होने लगती है। इस सकारात्मक चिंतन से उनका शरीर और आभामण्डल भी दिव्य हो उठता है और सदैव प्रसन्नता की भाव-धारा का प्रवाह बना रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुखों की प्राप्ति के लिए कठोर परिश्रम, ईमानदारी के साथ निरन्तर प्रयास, पुरातन श्रेष्ठ परंपराओं का अनुगमन और उच्च विचारों तथा शुचिता भरी जीवन यात्रा जरूरी है। जो लोग आज श्रेष्ठीजन कहे जाते हैं उन्होंने अपने जीवन में कितनी मेहनत की होती है, इससे इन दु:खी होने वालों को कोई सरोकार नहीं। दूसरों के सुख से दु:खी होने वाले लोगों को मनोरोगी की श्रेणी में रखा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। ये लोग न मेहनत करना चाहते हैं, न कर सकते हैं। ऐसे लोगों के जीवन में न नैतिकता होती है न ईमानदारी और न ही समाज के लिए जीने का जज्बा। इन लोगों का सर्वोपरि गुण होता है हड़प जाना और डकार भी न लेना। जिसे जो प्राप्त हुआ है, हो रहा है और होना है, वह उसके पूर्वजन्मों व वर्तमान की मेहनत का प्रतिफल होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर मनुष्य को कर्मयोग करना चाहिए। इसके लिए पुरुषार्थ चतुष्टय धर्म, अर्थ, कर्म और मोक्ष की प्राप्ति का विधान है। लेकिन इन सभी को दरकिनार कर सिर्फ प्राप्ति ही प्राप्ति के पीछे पड़ जाने वाले लोग आसुरी वृत्तियों का दामन थाम लेते हैं और फिर इनके जीवन से शेष सारी अच्छाइयां और लक्ष्य पलायन कर जाते हैं। इन्हें हर संबंध और हर रास्ता आवक भरा ही लगता है। जो मिल जाए उसी में संतोष नहीं कर पाते, बल्कि ये चाहते हैं जिस तरह भी हो सके, जितनी जल्दी हो सके धन-दौलत का रास्ता उन्हीं के घर आकर समाप्त हो जाए। ऐसे में इन्हें घेर लेती हैं कुण्ठाएं। जहाँ मनोमालिन्य शुरू हो जाता है वहाँ वह सब दिखने लगता है जो अंधकार में ही हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह अंधकार इनमें वे सारे अवगुण भर देता है जिसकी वजह से जीवन में रोशनी आने के तमाम रास्ते बंद हो जाते हैं। तब इन्हें परिवेश में जो कुछ होता दिखता है उसे ये अपने कब्जे में लाने को लालायित रहने लगते हैं। यहीं से शुरू होती है दु:खी होने की यात्रा। औरों का हर सुख इन्हें दु:खी करता है और इनका दिन उगता ही है दु:खों की फेहरिश्त लेकर। रात को इन्हें सपने में भी दु:खी होने की आदत पड़ जाती है। ऐसे दु:खी लोगों को आप कितना ही कुछ समझा लें, इन उल्लूओं को कभी रोशनी का कतरा रास आता ही नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस किस्म के हर दु:खी इंसान का जिस्म भी दुर्गन्ध देने लगता है और बीमारियां घेर लेती हैं। इन आत्म-दुखियारों की पीड़ाओं का निवारण न लुकमान हकीम कर सकते हैं न भगवान या कोई और। इनके शरीर छोड़ने के बाद भी आत्मा दु:खों के पैगाम के साथ यहाँ-वहाँ भटकती रहती है और उन सभी ?से लोगों के इर्द-गिर्द मण्डराने लगती है जो दूसरों के सुख से दु:खी रहते हैं। इन्हें देख कर हम दु:खी न हों, इन पर तरस खाएं और यह मानकर आगे बढ़ चलें कि हमारे यहाँ पिशाचों और प्रेतों का वजूद हर युग में रहा है, और रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>दीपक आचार्य</strong></p>
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</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 06 Aug 2018 10:58:03 +0530</pubDate>
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                <title>क्यों न एडमीशन प्रक्रिया को रोक दिया जाए : हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[एमबीबीएस में कम वार्षिक आय पर दाखिले का मामला  हरियाणा सरकार व मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया से मांगा जवाब चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। प्रदेश में एमबीबीएस एडमिशन प्रक्रिया में पिछड़े वर्ग में तीन लाख से (Why, Admission, Process, Should, Stopped, HighCourt) कम वार्षिक आय वाले परिवार के बच्चों को एडमिशन में प्राथमिकता देने के निर्णय को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/why-the-admission-process-should-be-stopped-high-court/article-4563"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/haryana-1.jpg" alt=""></a><br /><h1>एमबीबीएस में कम वार्षिक आय पर दाखिले का मामला</h1>
<h3> हरियाणा सरकार व मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया से मांगा जवाब</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश में एमबीबीएस एडमिशन प्रक्रिया में पिछड़े वर्ग में तीन लाख से <strong>(Why, Admission, Process, Should, Stopped, HighCourt)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कम वार्षिक आय वाले परिवार के बच्चों को एडमिशन में प्राथमिकता देने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार सहित मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया और एडमिशन कमेटी को तीन जुलाई के नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है, साथ ही पूछा है कि क्यों न इस एडमीशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाए।</p>
<h1 style="text-align:justify;">क्यों न एडमीशन प्रक्रिया…</h1>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अजय तिवारी एवं जस्टिस महाबीर सिंधु की वकेशन बेंच ने यह नोटिस रोहतक निवासी निशा द्वारा एडवोकेट पृथ्वी राज यादव के जरिये दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने हरियाणा सरकार द्वारा 18 अगस्त 2016 को जारी उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी है, जिसके तहत हरियाणा सरकार ने पिछड़े वर्ग को आय के आधार पर दो भागों में विभाजित किये जाने का निर्णय लिया है। इस नोटिफिकेशन के तहत एमबीबीएस कोर्स में एडमीशन में पिछड़े वर्ग के उन आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके परिवार की वार्षिक आय ३ लाख रुपए से कम है। इस नोटिफिकेशन को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए बताया गया है कि यह नोटिफिकेशन सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी के मामले में तय किये गए दिशा-निर्देशों का उलंघन है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ये निर्देश</h1>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी मामले में यह साफ कर दिया था कि आरक्षण के लाभ को सिर्फ आर्थिक आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। आरक्षण में आर्थिक और समाजिक दोनों तरह के पिछड़ेपन को कारक के रूप में शामिल किया जाना जरूरी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमी लेयर को स्वीकार किया था।</p>
<h1 style="text-align:justify;">यह है याचिकाकर्ता का आरोप</h1>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले में सरकार ने क्रीमी लेयर को तो बाहर रखा है, लेकिन 3 लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवार के आवेदकों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है, जो पूरी तरह से गलत है। इस आधार पर पिछड़े वर्ग को दो वर्गों में विभाजित नहीं किया जा सकता है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Jun 2018 22:28:24 +0530</pubDate>
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                <title>अवैध प्रवासियों को बगैर कानूनी प्रक्रिया के वापस भेजा जाना चाहिए: ट्रम्प</title>
                                    <description><![CDATA[अपने देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे सकते वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को कहा कि जो लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका की सीमा में प्रवेश करते हैं उन्हें बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया पूरी किये बिना जहां से वे आए हैं वहां वापस भेजा जाना चाहिए। ट्रम्प ने अपने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/should-be-sent-back-without-legal-process/article-4490"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/tranp.jpg" alt=""></a><br /><h1>अपने देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे सकते</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को कहा कि जो लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका की सीमा में प्रवेश करते हैं उन्हें बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया पूरी किये बिना जहां से वे आए हैं वहां वापस भेजा जाना चाहिए। ट्रम्प ने अपने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ह्लहम इन सभी लोगों को अपने देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे सकते। जब कोई अमेरिका में आता है तो हमें तत्काल न्यायाधीशों या न्यायालय के मामलों में पड़े बिना उन्हें वापस भेज देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमारे देश को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे सभी लोगों को हम स्वीकार नहीं कर सकते हैं। सीमाओं को मजबूत करना कोई अपराध नहीं।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jun 2018 11:39:12 +0530</pubDate>
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                <title>खिलाड़ियों की आय से हिस्सा मांगा जाना नहीं उचित</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">हरियाणा सरकार ने पेशेवर खिलाड़ियों से उनको हुई विज्ञापन व निजी कार्यक्रमों की आय से एक तिहाई हिस्सा मांगा है, हालांकि खिलाड़ियों व मीडिया से इस पर तीखी प्रतिक्रिया आने से फिलहाल अधिसूचना को रोक लिया गया है। परंतु यहां सरकार की नीति पर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। कुछ सवाल खिलाड़ियों की ओर से हैं कुछ आमजन के भी हैं। निश्चित ही राज्य सरकार से भूल हुई है। भारत में क्रिकेट के सिवाय अन्य खेलों के खिलाड़ी कोई बहुत ज्यादा अमीर नहीं हैं। चंद खिलाड़ी हैं जिन्हें अंतराष्टÑीय प्रतिस्पर्धाएं जीतने पर एक आध करोड़ या आमजन से 20-50 लाख रुपये की पुरुस्कार स्वरूप आय हुई है, जो कि बहुत ज्यादा नहीं मानी जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारें व्यापारी वर्ग को जो कर छूट देती हैं, या कच्चे माल पर जो सब्सिडी देती हैं या भूमि आवंटन में दरियादिली दिखाती हैं वह खिलाड़ियों की आय की तुलना में बहुत ज्यादा है। फिर भी अगर सरकार खिलाड़ियों की आय से भी कुछ हिस्सा वसूलती है तब वह कोई अधिक बड़ी राशि नहीं होगी। एक वर्ष में यही कोई 2 या 4 करोड़ रूपये की आय ही सरकार को होगी जबकि इससे अधिक तो राज्य सरकारें अपने सरकारी कार्यक्रमों या चाय-पानी में उद्घाटन समारोहों पर ही खर्च कर डालती हैं। सरकार को सलाह देने वाले अफसरों को निश्चित ही वास्तविकता का कोई अहसास नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारी शायद किसी खिलाड़ी के संघर्ष से वाकिफ नहीं हैं। अन्यथा यह कैसे हो सकता है कि एक तरफ राज्य सरकार खिलाड़ियों की जीत पर उन्हें लाखों-करोंड़ों के पुरस्कार बांट रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी थोड़ी सी कमाई में से खेल परिषदें के लिए हिस्सा मांग रही है। फिर तो सामाजिक कल्याण के लिए राजनीतिकों से भी हिस्सा राशि ली जानी चाहिए, क्योंकि ये भी भारी वेतन, पैंशन लेते हैं, जबकि ये नेता तो चुनावों पर भी करोड़ों खर्च करने की कूव्वत रखते हैं। खेल परिषदें का विकास करना सरकार का दायित्व है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार को पूरा प्रदेश टैक्स चुकाता है, जिनमें ये खिलाड़ी भी हैं जो आमजन की तरह हर तरह से टैक्स चुकाते हैं। हिस्सा राशि मांगने की बजाए सरकार को चैरिटी खेल आयोजनों का कार्यक्रम करवाना चाहिए, जिसमें ये खिलाड़ी भी उत्साह व सर्मपण से भाग लेंगे, ऐसे कार्यक्रमों की पूरी आय नए खिलाड़ी पैदा करने व खेल परिषदें के विकास पर खर्च की जाए। इसके अलावा प्रदेश में बहुत से उद्योगपति, सामाजिक संगठन भी तलाशे जा सकते हैं जो एक-एक खेल की परिषद् को गोद लेकर राज्य सरकार को सहयोग कर सकते हैं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Jun 2018 10:16:05 +0530</pubDate>
                
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