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                <title>जासूस बनकर बच्चों को खोजेंगे इमरान हाशमी</title>
                                    <description><![CDATA[टॉप डिटेक्टिव सूर्यकांत भांडे पाटिल की लाइफ स्टोरी है फादर्स डे बॉलीवुड डेस्क। देश के विख्यात जासूसों में से एक सूर्यकांत भांडे पाटिल की लाइफ पर गुजराती लेखक प्रफुल्ल शाह किताब लिख चुके हैं। ‘दृश्यम-अदृश्यम’ टाइटल वाली इस किताब पर फिल्म बन रही है ‘फादर्स डे’। फिल्म में इमरान हाशमी सूर्यकांत भांडे का रोल करेंगे। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/imran-hashmi-to-find-children-by-becoming-a-detective/article-5212"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/imran-hashmi-to-find-children-by-becoming-a-detective.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">टॉप डिटेक्टिव सूर्यकांत भांडे पाटिल की लाइफ स्टोरी है फादर्स डे</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बॉलीवुड डेस्क।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">देश के विख्यात जासूसों में से एक सूर्यकांत भांडे पाटिल की लाइफ पर गुजराती लेखक प्रफुल्ल शाह किताब लिख चुके हैं। ‘दृश्यम-अदृश्यम’ टाइटल वाली इस किताब पर फिल्म बन रही है ‘फादर्स डे’। फिल्म में इमरान हाशमी सूर्यकांत भांडे का रोल करेंगे। फिल्म की कहानी 35 की उम्र वाले सूर्यकांत पर आधारित होगी। जब 1998 में उनके बेटे का किडनैप हुआ था। बता दें की फादर्स डे का डायरेक्शन 300 से ज्यादा एड फिल्म्स बना चुके शांतनु बागची कर रहे हैं। फिल्म का प्रोडक्शन मातृम फिल्म्स की प्रिया गुप्ता, कल्पना उदयवार और इमरान हाशमी मिलकर कर रहे हैं। फिल्म की शूटिंग 2019 में शुरू होगी। फिल्म को रितेश शाह ने लिखा है। फिल्म का अनाउंसमेंट इमरान हाशमी, ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श और कोमल नाहटा ने ट्विटर पर भी किया है।</p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Aug 2018 13:02:29 +0530</pubDate>
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                <title>रोडवेज घाटे में क्यों? कारण तलाशने में जुटा महकमा</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज)। प्रदेश की बीजेपी सरकार रोडवेज को घाटे से उबारने के लिए गंभीर हो गई। इसी को लेकर रोडवेज विभाग ने बसों में मुफ्त सफर करने वाली कैटेगरीज का डाटा एकत्रित करना शुरु कर दिया है। विभाग के निर्देशानुसार सभी परिचालकों को एक फॉर्म दिया गया है,जिसमें उन्हें यह बताना होगा कि छात्र-छात्राओं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/why-in-roadways-deficit-find-out/article-4093"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/bus-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)। </strong>प्रदेश की बीजेपी सरकार रोडवेज को घाटे से उबारने के लिए गंभीर हो गई। इसी को लेकर रोडवेज विभाग ने बसों में मुफ्त सफर करने वाली कैटेगरीज का डाटा एकत्रित करना शुरु कर दिया है। विभाग के निर्देशानुसार सभी परिचालकों को एक फॉर्म दिया गया है,जिसमें उन्हें यह बताना होगा कि छात्र-छात्राओं के अलावा ओर कौन-कौन सी कैटेगरीज रोडवेज में फ्री में सफर कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">रोडवेज महाप्रबंधक उक्त आकंड़े 13 जून को चंडीगढ़ में होने वाली बैठक में प्रस्तुत करेंगे। दरअसल रोडवेज विभाग लंबे समय से घाटे में चल रहा है और अब रोडवेज मुख्यालय घाटे की असली वजह तलाशने के लिए जुट गया है। इसको लेकर विभाग ने फैसला लिया है, कि बसों में मुफ्त यात्रा कितने प्रतिशत सवारियां करती हैं। डिपो के अतिरिक्त महाप्रबंधक के मुताबिक विद्यार्थी रोडवेज विभाग से पास जारी करवाते हैं। लेकिन ज्यादातर मुफ्त सफर करने वाली कैटेगरीज का रिकार्ड भी विभाग के पास नहीं होता, तो विभाग सीधे तौर पर अनुमान नहीं लगा सकता कि बसों में कितने लोग रोजाना मुफ्त सफर करते हैं। इसमें सभी डिपार्टमेंट से संबंधित लोग शामिल हैं, लेकिन घाटे का खामियाजा सिर्फ रोडवेज विभाग को भुगतना पड़ता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मुफ्त व रियायती सफर करने वालों से घाटे में हैं रोडवेज: चमनलाल स्वामी</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा रोडवेज सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेश सलाहकार चमनलाल स्वामी ने कहा कि सरकार रोडवेज बसों से घाटे का राग अलापती है, लेकिन यह नहीं देखती कि कितनी कैटेगरीज के लोग रोजाना बसों में मुफ्त सफर करते हैं, क्योंकि यह छूट खुद सरकार ने दे रखी है। जिसका खामियाजा सिर्फ रोडवेज विभाग को भुगतना पड़ता है। यूनियन की मांग है कि सरकार इन कैटेगरीज को मुफ्त सफर सुनिश्चित कराती है, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी तय करते हुए करवाए। उन्होंने कहा कि बसों में 42 से ज्यादा कैटेगरी के लोग मुफ्त व रियायती दर्रों पर सफर करते हैं। बसों में तीसरा हिस्सा सवारी मुफ्त होती हैं। वहीं छात्रों की भीड़ से किराया देकर सफर करने वाली अधिकतर सवारियां बसों में नहीं चढ़ पाती हैं। जिससे बसों की बुकिंग कम आती है, तो अधिकारी संबंधित बस के कंडक्टरों को दोषी मानते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मुफ्त सफर करने वाली सवारियों की कंडक्टरों से मांगी हैं डिटेल</h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्यालय के निर्देशानुसार सभी कंडक्टरों से बसों में मुफ्त व रियायती सफर करने वाली सवारियों की डिटेल मांगी है। इससे मालूम होगा कि रोजाना कितने लोग मुफ्त सफर करते हैं। डिटेल एकत्रित कर विभाग की बसों के घाटे का आकलन होगा। लेकिन आगामी निर्णय विभागीय अधिकारियों ने लेना है।<br />
<strong>– धनराज कुंडू, अतिरिक्त महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो, सरसा।</strong></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Jun 2018 15:25:53 +0530</pubDate>
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