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                <title>पतंग उतारते हुए हाईटेंशन तारों की चपेट में आई बच्ची, 90% झुलसी</title>
                                    <description><![CDATA[90 प्रतिशत झुलस चुकी बच्ची को ट्रामा सेंटर के चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई रेफर कर दिया। हादसा इतना जबरदस्त था कि आसपास के कई घरों में धमाके के साथ बिजली के उपकरण फूंक गए।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/people-said-that-this-accident-occurred-due-to-not-changing-the-wires/article-12855"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/hightenshion-wire.jpg" alt=""></a><br /><h2>लोग बोले-तारें शिफ्ट न करने के चलते हुआ हादसा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>यमुनानगर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> स्कूल से लौटी 13 वर्षीय बच्ची पतंग उतारते हुए हाईटेंशन तारों की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गई। जोरदार धमाके के साथ घर में आग लग गई। इस दौरान कमरे में खेल रही एक अन्य बच्ची आग की चपेट में आ गई। धमाके के साथ ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने आग पर काबू पाया। झुलसी बच्ची को ट्रामा सेंटर पहुंचाया गया। 90 प्रतिशत झुलस चुकी बच्ची को ट्रामा सेंटर के चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई रेफर कर दिया। हादसा इतना जबरदस्त था कि आसपास के कई घरों में धमाके के साथ बिजली के उपकरण फूंक गए। जबकि पिछली तरफ बने एक घर में आग लग गई। जिससे घर का सारा सामान तबाह हो गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दर्दनाक हादसा शुक्रवार दोपहर करीब ढ़ाई बजे शहर की जम्मू कॉलोनी में हुआ।</h3>
<p style="text-align:justify;">सूचना पर पुलिस पहुंची और मामले की जानकारी ली। वहीं फॉयर ब्रिगेड ने पहुंच कर आग पर काबू पाया। हादसे के समय बच्ची अपनी तीन छोटी बहनों के साथ घर पर अकेली थी। मां-बाप फैक्टरी में काम करने गए हुए थे। इस दौरान घर में लगी आग की चपेट में आने से झुलसी बच्ची की छोटी बहन भी चपेट में आग गई। जिसे समय रहते ही लोगों ने बचा लिया। हादसे से जम्मू कॉलोनी निवासियों में बिजली विभाग के प्रति भारी रोष है। लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद भी विभाग ने यहां से तारे शिफ्ट नहीं की। जिस कारण यह हादसा हुआ।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जम्मू कॉलोनी बी निवासी 37 वर्षीय बब्लू यादव और उसकी पत्नी सुनीता यादव दोनों ही फैक्टरी में काम करते हैं।</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">उनके पास चार बेटियां हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">चारों स्कूल में पढ़ती हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">शुक्रवार को बब्लू और सुनीता रोज की तरह काम पर गए हुए थे।</li>
<li style="text-align:justify;">चारों बेटियां स्कूल में थीं।</li>
<li style="text-align:justify;">छुट्टी के बाद बच्चियां घर आकर खाना खाने लगी।</li>
<li style="text-align:justify;">इस दौरान 10 वर्षीय कशिश खेलने छत पर चली गई।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">वहां उसने एक पतंग बिजली की 11 केवी तारों में उलझी देखी तो वह डंडे से उतारने लगी। डंडा तारों में छू गया। जिसके बाद एक जोरदार धमाका हुआ और कशिश सिर से पैर तक झुलस गई। धमाके की अवाज सुनते ही आसपास के लोग उस तरफ भागे। धमाके के साथ ही घर में आग लग। घर में खेल रही कशिश की छोटी बहन 9 वर्षीय तनु की पैंट में आग लग गई।  सूचना पर पहुंची आशा वर्कर रेखा रानी, वार्ड नंबर-13 पार्षद निर्मल चौहान सहित अन्य मौके पर पहुंचे और तनु को आग से बचाया। वहीं बुरी तरह झुलसी कशिश को ट्रामा सेंटर पहुंचाया। सूचना गांधी नगर चौकी पुलिस और फॉयर ब्रिगेड को दी गई। फॉयर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2020 20:27:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जीडीपी का बदलता पैमाना और विश्वसनीयता का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[जीडीपी के संशोधित आँकड़ों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया वर्ष 2007 में पेइचिंग में पदस्थ अमेरिकी राजदूत ने चीन के कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव (मौजूदा प्रधानमंत्री) ली कछयांग से मुलाकात की। ली ने राजदूत से कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)  ( Changing scale of GDP and crisis of credibility) के आंकड़ें विश्वसनीय नहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/changing-scale-of-gdp-and-crisis-of-credibility/article-6815"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/gdp.jpg" alt=""></a><br /><h2>जीडीपी के संशोधित आँकड़ों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया</h2>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2007 में पेइचिंग में पदस्थ अमेरिकी राजदूत ने चीन के कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव (मौजूदा प्रधानमंत्री) ली कछयांग से मुलाकात की। ली ने राजदूत से कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)  <strong>( Changing scale of GDP and crisis of credibility)</strong> के आंकड़ें विश्वसनीय नहीं हैं। उन्होंने अचल संपत्ति के तीन संकेतकों में रेलवे कार्गो वॉल्यूम, बिजली की खपत और बैंकों के ऋण वितरण पर भरोसा करने की बात कही। इकोनॉमिस्ट पत्रिका ने इसी आधार पर ली कछयांग सूचकांक बनाया। बाद के विश्लेषण ने दिखाया कि लगभग हर जिंस और मुद्रा के लिए यह सूचकांक जीडीपी की तुलना में कहीं अधिक प्रासंगिक है। क्या वक्त आ गया है कि ली कछयांग सूचकांक का कोई भारतीय संस्करण तैयार किया जाए?यह सवाल इसलिए उत्पन्न हुआ क्योंकि इस सप्ताह आए जीडीपी के संशोधित आँकड़ों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। जीडीपी किसी भी देश की आर्थिक सेहत को मापने का सबसे जरूरी पैमाना है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जीडीपी किसी खास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल कीमत है</h2>
<p style="text-align:justify;">जीडीपी किसी खास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल कीमत है। भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर होती है। इस वर्ष की शुरूआत में केंद्र सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी पर राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग(एनएससी) की तकनीकी कमेटी के अनुमानों को खारिज कर दिया था,फिर नीति आयोग और केंद्रित सांख्यिकी कार्यालय(सीएसओ) ने वैकल्पिक आंकड़ों को जारी किया। इसके बाद से कई विवाद खुलकर सामने आए। इन आँकड़ों में आर्थिक मोर्चे पर यूपीए सरकार की तुलना में एनडीए सरकार के प्रदर्शन को काफी बेहतर बताया गया। इन अनुमानों के मुताबिक,यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान जीडीपी ने कभी 9% के आँकड़े को नहीं छुआ। हालांकि इसके उलट राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी)की कमेटी ने 2007-08 में 10.23% और 2010-11 में 10.78% जीडीपी का अनुमान दर्शाया था। इस मसले पर वित्त मंत्री अरुण जेटली और उनके पूर्ववर्ती वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बीच राजनीतिक द्वंद्व के अलावा, पूरी प्रक्रिया पर सीएसओ के पूर्व अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों ने भी कई सवाल उठाएं हैं।</p>
<h2>जीडीपी की दर एक “आधार वर्ष”के उत्पादन की कीमत पर तय होती है।</h2>
<p style="text-align:justify;">जीडीपी अर्थात ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडक्ट की दर एक “आधार वर्ष”के उत्पादन की कीमत पर तय होती है। अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलावों के मद्देनजर आधार वर्ष की अवधि में समय-समय पर बदलाव किए जाते है। 2015 में इसी बदलाव के तहत आधार वर्ष को 2004-05 से बदल कर 2011-12 किया गया। इससे जीडीपी के दो अनुमान मिले – 2004-05 के आधार वर्ष के साथ पुरानी सीरीज और 2011-12 के नए आधार वर्ष पर नई सीरिज। जब आधार वर्ष में बदलाव किया गया तो नई सीरीज में प्रणाली संबंधी कई सुधार भी किए गए। लेकिन वहाँ भी एक समस्या थी। पुरानी सीरीज से 1950-51 से 2014-15 तक के जीडीपी अनुमान मिले,जबकि नए जीडीपी सीरीज ने केवल 2011-12 से आगे का ही अनुमान दिया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">2004-05 में जीडीपी सीरीज ने 1950-51  तक की जीडीपी का अनुमान लगाया था।</h2>
<p style="text-align:justify;">पहलत: 2011-12 से पहले के ट्रेंड का कोई सार्थक शोध नहीं किया जा सकता था,यह अकादमिक शोध के साथ ही नीतियाँ बनाने और इसके मूल्यांकन को अंधेरे में रखता है। इस नई सीरीज में ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) में प्राथमिक क्षेत्रों (उत्खनन, विनिर्माण, बिजली, दूरसंचार आदि) की हिस्सेदारी बढ़ा दी गई है,जिस कारण पुराने जीडीपी आँकड़ों में बदलाव आया है। दूसरे आँकड़े जुटाने का तरीका भी इस नई सीरिया में बदल दिया गया है। पहले के दशकों में,आधार वर्ष में जब भी बदलाव किया गया,जैसे कि जब 2004-05 में आधार वर्ष बदला गया,तो जीडीपी सीरीज ने 1950-51  तक की जीडीपी का अनुमान लगाया था। फिर सांख्यिकी विशेषज्ञों वाली राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग अर्थात एनएससी कमेटी ने इस साल अगस्त में एक और बैट सीरीज जारी की।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> मोदी सरकार के पहले चार वर्षों की तुलना में यूपीए के 2004-05 से 2013-14 की अवधि में अर्थव्यवस्था में कहीं तेज वृद्धि हुई थी।</li>
<li style="text-align:justify;">सांख्यिकी मंत्रालय की वेबसाइट पर इसे जारी करने के करीब 15 दिनों के बाद सरकार ने इन अनुमानों को औपचारिक बताते हुए रिपोर्ट को ‘ड्राफ्ट’ कहकर खारिज कर दिया।</li>
<li style="text-align:justify;"> जीडीपी के नए आँकड़ों के तकनीकी तौर पर पुराने अनुमानों से बेहतर होने के चाहे कितने भी दावे किए जा रहे हों लेकिन उनकी विश्वसनीयता के लिए जरुरी है कि उन्हें हकीकत की कसौटी पर कसा जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">इस मोर्चे पर नए आँकड़े नाकाम साबित हो रहे हैं। वर्ष 2007-08 के तेज वृद्धि वाले दौर की वृद्धि को 9.8% से फीसदी से घटाकर 7.7% कर दिया गया है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:right;"><strong>राहुल लाल</strong></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Dec 2018 20:00:58 +0530</pubDate>
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                <title>फिनिशर की भूमिका बदलने के बारे में सोच रहे : धोनी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज़ और आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने माना है कि उम्र बढ़ने के साथ उनके खेल में बदलाव आ रहा है और वह अब टी20 क्रिकेट के बल्लेबाजी क्रम में ऊपरी क्रम पर खेलने पर अधिक विचार कर रहे हैं। धोनी ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/thinking-about-changing-the-role-of-finisher-dhoni/article-4120"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/ms-dhoni.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज़ और आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने माना है कि उम्र बढ़ने के साथ उनके खेल में बदलाव आ रहा है और वह अब टी20 क्रिकेट के बल्लेबाजी क्रम में ऊपरी क्रम पर खेलने पर अधिक विचार कर रहे हैं। धोनी ने माना कि निचले क्रम पर खेलना और टीम के लिए अह्म समय पर बल्लेबाजी क्रम में उतरने के लिए खिलाड़ी में अधिक क्षमता होनी चाहिए और उम्र और समय के साथ निचले क्रम पर उनके खेल का स्तर कुछ कम हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">चेन्नई को आईपीएल-2018 में खिताब दिलवाने में अह्म भूमिका निभाने वाले टीम के कप्तान ने कहा कि मेरे दिमाग में यह साफ था कि मुझे बल्लेबाजी क्रम में ऊपर खेलना है क्योंकि मेरी उम्र हो गई है। 36 साल के खिलाड़ी ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि मुझे मैच जीतने की जिम्मेदारी लेनी थी, लेकिन यदि मैं निचले क्रम पर उतरता तो मेरे पास अधिक रन बनाने का समय नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं यदि निचले क्रम पर खेलता तो जल्दी आउट हो जाता, ऐसे में ऊपरी क्रम पर बल्लेबाजी करना एक विकल्प था ताकि क्रीज पर अधिक देर तक उतर सकता। मेरे लिए ऊपरी क्रम में तीन, चार या पांचवें नंबर पर खेलने से कोई फर्क नहीं पड़ता। धोनी ने आईपीएल के 11वें सत्र में चेन्नई के 16 मैचों में 455 रन बनाए थे और टीम की जीत में अह्म भूमिका निभाई। धोनी अपने सबसे सफल आईपीएल सत्र से मात्र छह रन ही दूर रहे। चेन्नई को इस वर्ष डैथ ओवर की बल्लेबाजी में भी काफी सफलता मिली और बाकी टीमों की तुलना में उसका औसत आखिरी ओवरों में रन बनाने के मामले में सबसे अच्छा रहा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Jun 2018 16:37:34 +0530</pubDate>
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