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                <title>Donation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>MS Dhoni: धोनी ने उड़ीसा ट्रेन हादसे में मदद कर दिखाई महानता, देख कर करोगे सलाम</title>
                                    <description><![CDATA[ओडिशा। MS Dhoni: ओडिशा के बालासोर जिले के बहानागा में हाल ही में हुए (accident odisha victims) विनाशकारी ट्रेन हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस बीच, कई मशहूर हस्तियों और खिलाड़ियों द्वारा ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को भारी मात्रा में धन दान (Donation) करने की खबरें आई हैं। व्हाट्सएप और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/dhoni-showed-greatness-by-helping-in-orissa-train-accident-you-will-salute-after-seeing/article-48500"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/ms-dhoni.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ओडिशा। </strong>MS Dhoni: ओडिशा के बालासोर जिले के बहानागा में हाल ही में हुए (accident odisha victims) विनाशकारी ट्रेन हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस बीच, कई मशहूर हस्तियों और खिलाड़ियों द्वारा ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को भारी मात्रा में धन दान (Donation) करने की खबरें आई हैं। व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्म पर एक संदेश भेजा जा रहा है कि चेन्नई सुपर किंग्स के स्टार और भारत के पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने ओडिशा ट्रेन त्रासदी पीड़ितों के लिए 60 करोड़ रुपये का दान दिया है। MS Dhoni</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, ओटीवी द्वारा एक तथ्य-जांच से पता चला है कि एमएस धोनी ने ओडिशा ट्रेन त्रासदी पीड़ितों के लिए 60 करोड़ रुपये का दान किया है, यह एक धोखा है। एमएस धोनी ने कभी भी ओडिशा ट्रेन त्रासदी पीड़ितों के लिए 60 करोड़ रुपये या इतनी बड़ी राशि दान करने की घोषणा नहीं की। यह एक फर्जी संदेश है जिसे टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाया जा रहा है। Donation</p>
<h3 style="text-align:justify;">अफवाहें फैलाकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश: पुलिस | MS Dhoni</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, कई ट्विटर उपयोगकर्ता भी घातक दुर्घटना को ‘सांप्रदायिक रंग’ देते हैं, जिसमें 275 लोगों की जान चली गई थी। फर्जी ट्वीट्स पर ध्यान देते हुए ओडिशा पुलिस ने चेतावनी दी कि ऐसी पोस्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ‘यह देखने में आया है कि कुछ सोशल मीडिया हैंडल शरारती तरीके से बालासोर में हुए दुखद ट्रेन हादसे को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हम सभी संबंधितों से अपील करते हैं कि वे इस तरह के झूठे और दुर्भावनापूर्ण पोस्ट प्रसारित करने से बचें, ‘ओडिशा पुलिस के एक ट्वीट में कहा गया है। उन्होंने चेतावनी दी, ‘अफवाहें फैलाकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 20:43:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रेरणास्त्रोत : एक डाकू का दान</title>
                                    <description><![CDATA[बात सन् 1925 की है। न्यूयार्क के यहूदी अस्पताल का खजांची दानदाताओं और अन्य मददों से जमा हुई अस्पताल की रकम लेकर बैंक जा रहा था। जब अस्पताल से थोड़ी दूर निकला तो उसे डाकूओं ने घेर लिया। डाकूओं का सरदार अपने साथियों से बोला, ‘छीन लो इस बदमाश से धन से भरा बैग। ध्यान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/a-robbers-donation/article-12835"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/robbers-donation.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">बात सन् 1925 की है। न्यूयार्क के यहूदी अस्पताल का खजांची दानदाताओं और अन्य मददों से जमा हुई अस्पताल की रकम लेकर बैंक जा रहा था। जब अस्पताल से थोड़ी दूर निकला तो उसे डाकूओं ने घेर लिया। डाकूओं का सरदार अपने साथियों से बोला, ‘छीन लो इस बदमाश से धन से भरा बैग। ध्यान रखो कहीं यह बचकर न जाने पाए।’ खजांची अपने ऊपर हुए इस आक्रमण से घबराया नहीं और उसने धैर्यपूर्वक डाकूओं से कहा, ‘यह पैसा मेरा नहीं है, अस्पताल का है, जिसे दानदाताओं और रोगियों के परिजनों की सहायता से अस्पताल चलाने के लिए इकट्ठा किया गया हैे। यदि आप इसे छीन लेगें, तो अस्पताल के रोगियों की सेवा में कमी आएगी। रोगी और दीन-दुखियों को जब इस बात की खबर लगेगी तो वे आपको बददुआएँ देंगे।’ ‘हमें बहाने पसंद नहीं, लाओ अपना थैला मुझे दे दो,’ डाकूओं का सरदार दहाड़ा। ‘मेरे भाई जो दान देकर अस्पताल चलाते हैं, वे भी आपके ही भाई हैं। अस्पताल के धन में से आपको कुछ हथियाना शोभा नहीं देता, वैसे आपकी मर्जी’-ऐसा कहकर खजांची ने नोटों से भरा थैला डाकू के सरदार की ओर बढ़ा दिया। किन्तु खजांची की बात का असर डाकू सरदार पर ऐसा हुआ कि उसने न केवल उसको थैला वापस कर दिया, बल्कि कुछ रकम अपने पास से भी अस्पताल की सहायता हेतु दान में दे दी।</h4>
<h3 style="text-align:justify;">संत और राजकुमार</h3>
<h4 style="text-align:justify;">महावीर ने अपरिग्रह को जीवन का धर्म माना है। उनका कहना है कि अधिक मिलने पर भी संग्रह नहीं करना चाहिए तथा संग्रह की प्रवृत्ति से अपने को दूर ही रखना चाहिए। लोभ, कलेश और कषाय संग्रह रूपी वृक्ष हैं, जिनकी शाखाएँ चिंता के रूप में निकलती हैं। फारस के एक संत छोटी-सी झोपड़ी में सादगीपूर्ण ढंग से रहते थे। वे दिन-रात खुदा की इबादत में निकाल देते थे और जो भी रूखा-सूखा मिल जाता उससे अपना पेट भर लेते थे। उनकी ख्याति सुनकर फारस का राजकुमार उनसे मिलने आया और उन्हें कुछ कीमती वस्त्र भेंट करने चाहे। इस पर संत ने राजकुमार को समझाया, ‘‘यदि आपके महल में स्वामीभक्त सेवक हों और आप उनसे संतुष्ट हों, ऐसे में यदि कोई और नौकरी माँगने आए, तो क्या आप उस पुराने स्वामीभक्त को नौकरी से अलग कर देंगे?’’ हरगिज नहीं, राजकुमार ने उत्तर दिया। तो जिन वस्त्रों को मैं पिछले अनेक वर्षों से पहन रहा हूँ और ये मेरा साथ दे रहे हैं, उन्हें निकलवाकर ये नए वस्त्र मुझे क्यों दे रहे हैं। यही वस्त्र आप किसी जरूरतमंद को देंगे तो ये उसके काम आ सकेंगे। यह कहकर संत अपनी झोपड़ी में चले गए।</h4>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jan 2020 20:55:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बदलने लगी सोच, रक्तदान के प्रति आई जागरूकता</title>
                                    <description><![CDATA[ थैलेसिमिया से पीड़ित मरीजों के लिए लगाया रक्तदान शिविर शिविर में लगभग 200 लोगों ने किया रक्तदान इन्द्री(सच कहूँ न्यूज)। सिंगला मोर्टस के सौंजन्य से इन्द्री के देवी मंदिर में समाजसेवी गगन सिंगला व कपिल किशोर की ओर से एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें रक्तदानियों ने रक्त दान किया। इस कार्य में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2> थैलेसिमिया से पीड़ित मरीजों के लिए लगाया रक्तदान शिविर</h2>
<ul>
<li>
<h2><strong>शिविर में लगभग 200 लोगों ने किया रक्तदान</strong></h2>
</li>
</ul>
<p><strong>इन्द्री(सच कहूँ न्यूज)।</strong> सिंगला मोर्टस के सौंजन्य से इन्द्री के देवी मंदिर में समाजसेवी गगन सिंगला व कपिल किशोर की ओर से एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें रक्तदानियों ने रक्त दान किया। इस कार्य में करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कालेज के डॉक्टरों का विशेष सहयोग रहा। जानकारी देते हुए समाजसेवी कपिल किशोर व गगन सिंगला ने बताया कि यह रक्तदान शिविर विशेष रूप से थैलेसीमिया रोग से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिये लगाया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि कल्पना चावला मैड़िकल कालेज में लगभग 70 के करीब थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित मरीजों का इलाज हो रहा है। थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों में खून नहीं बनता है। इन मरीजों का खून प्रत्येक बीस दिन के बाद बदला जाता है। इसलिये इनकों खून की कमी ना पड़े इसके लिये ऐसे शिविरों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि अगला रक्तदान शिविर इन्द्री के गांव ब्याना की पंचायत घर में 10 मार्च को लगाया जाएगा।</p>
<p>इस मौके पर अखिल सिंगला, वैभव सिंगला, रवि ड़ंग, राजेश ड़ंग, चिराग मेहता, रोहित, हिंमाशु भाटिया, लवली लूथरा, पुलिकित, हिमाशु जिंदल, सुखबीर शर्मा, अनिल कुमार, राकेश गर्ग, राजन मेहता, मदन मित्तल, मनोज गोयल सहित सैकड़ों की संख्या में लोगों ने रक्तदान किया। इस मौके पर सभी रक्तदानियों को सर्टिफिकेट व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/blood-donation-camp-2/article-7900</link>
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                <pubDate>Sun, 03 Mar 2019 19:32:13 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मैडिकल शोध के लिए किया शरीर दान</title>
                                    <description><![CDATA[अर्थी को कंधा देकर समाज में व्याप्त बेटा बेटी के भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया गौरीवाला/खारियां (सच कहूँ न्यूज)। जीते जी रक्तदान तो मरणोंपरांत नेत्रदान व देहदान कर डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी समाज में मानवता की अनुकरणीय मिसाल पेश कर रहे है। इसी कड़ी में एक और नाम ब्लॉक दारेवाला के गांव मलिकपुरा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/body-donation-for-medical-research/article-4159"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/boday-donet.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">अर्थी को कंधा देकर समाज में व्याप्त बेटा बेटी के भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>गौरीवाला/खारियां (सच कहूँ न्यूज)। </strong>जीते जी रक्तदान तो मरणोंपरांत नेत्रदान व देहदान कर डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी समाज में मानवता की अनुकरणीय मिसाल पेश कर रहे है। इसी कड़ी में एक और नाम ब्लॉक दारेवाला के गांव मलिकपुरा के भंगीदास गुरजीत इन्सां की 85 वर्षिय माताजी सुखचरण कौर इन्सां का शामिल हो गया। पिछले कुछ दिनों से खराब स्वास्थ व वृद्धावस्था के चलते माता सुखचरण कौर इन्सां बुधवार को अपनी संवांसों रूपी पूंजी पूर्ण कर कुल मालिक के चरणों में जा बिराजी।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके पुत्र गुरजीत सिंह इन्सां (भंगीदास) ने बताया की उनकी माता ने अपने जीते जी मरणोपरांत शरीरदान का फार्म भरा था। इसलिए उनकी अंतिम इच्छा को पूर्ण करते तथा पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे 133 मानवता भलाई के कार्यों में से 13वें कार्य अमर सेवा (चिक्तिसा व शोध कार्यों के लिए मरणोंपरांत शरीरदान) के तहत उनका शरीर मैडिकल शोध के लिए आॅल इण्डिया इंस्टीट्यूट आॅफ मैडिकल सांईस ऋषिकेश (उतराखंड) को दान कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर बेटा बेटी एक समान मुहिम को सार्थक करते हुए उनकी सुपौत्रियों सिमरजीत कौर इन्सां, जसविन्द्र कौर इन्सां, पुत्रियां मनप्रीत कौर इन्सां, जसवीर कौर इन्सां व अमनदीप कौर इन्सां ने माता की अर्थी को कंधा देकर समाज में व्याप्त बेटा बेटी के भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया। उन्होने अपने पूरे परिवार को पूज्य गुरूजी की प्रेरणानुसार इन्सानित की इस राह में लगाया तथा अपने परिवार को मानवता भलाई के हर कार्य में अग्रणी रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी अंतिम यात्रा के समय ब्लॉक भंगीदास केवल कृष्ण इन्सां ने परिजनों व साध संगत के साथ विनती भजन बोलकर व माता सुखचरण कौर इन्सां अमर रहे के नारे लागाकर पूरे सम्मान के साथ गांव के बाहर तक उन्हे विदा किया गया। इस अवसर पर उनके पुत्र गुरजीत सिंह इन्सां, लखवीर सिंह इन्सां, बलविंदर सिंह इन्सां, बलजीत सिंह इन्सां,15 मैम्बर इकबाल इन्सां व महेन्द्र इन्सां, डॉ़ हरमंदर सिंह इन्सां, खेता सिंह इन्सां, बनवारी लाल इन्सां, सुखदेव सिंह इन्सां, बलदेव इन्सां, दर्शन सिंह इन्सां, गुलजार सिंह इन्सां, शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफैयर फोर्स विंग व अन्य सभी समितियों के सदस्य, परिजन, ग्रामिण तथा साथ साध संगत ने उन्हे सल्यूट कर चिक्तिसा शोध हेतू विदा किया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/body-donation-for-medical-research/article-4159</link>
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                <pubDate>Thu, 14 Jun 2018 10:12:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रक्तदान करें और जीवन रक्षक बनें</title>
                                    <description><![CDATA[देवेंद्रराज सुथार रक्तदान जिंदगी से जूझ रहे लोगों को नया जीवन प्रदान करता हैं। इसलिए रक्तदान को महानदान व जीवनदान कहा गया है। रक्तदान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने व रक्त की जरूरत पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए जैसे उद्देश्यों को ध्यान में रखकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/blood-donation-and-become-life-saver/article-4152"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/blood-01.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>देवेंद्रराज सुथार</strong></p>
<p style="text-align:justify;">रक्तदान जिंदगी से जूझ रहे लोगों को नया जीवन प्रदान करता हैं। इसलिए रक्तदान को महानदान व जीवनदान कहा गया है। रक्तदान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने व रक्त की जरूरत पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए जैसे उद्देश्यों को ध्यान में रखकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा 14 जून को विश्व भर में रक्तदान दिवस मनाया जाता हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह दिवस 14 जून को ही क्यों मनाया जाता है? दरअसल इस दिन विख्यात आॅस्ट्रियाई जीवविज्ञानी और भौतिकीविद कार्ल लेण्डस्टाइनर का जन्म हुआ था। जिन्होंने रक्त में अग्गुल्युटिनिन की मौजूदगी के आधार पर रक्त का अलग-अलग रक्त समूहों- ए, बी, ओ में वर्गीकरण कर चिकित्सा विज्ञान में अहम योगदान दिया। जिसके कारण उन्हें वर्ष 1930 में शरीर विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 1997 में 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान की नींव रखी थी। जिसके कारण आज विश्व के 124 देशों में स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहन मिल रहा हैं। ज्ञातव्य है कि तंजानिया में 80 प्रतिशत लोग रक्तदान के लिए पैसे नहीं लेते हैं। वहीं, ब्राजील और आॅस्ट्रेलिया में तो यह कानून है कि कोई भी रक्तदान के लिए पैसों की मांग नहीं कर सकता। लेकिन, इसके विपरीत भारत में रक्तदान के लिए पैसे लेने पर किसी प्रकार की रोक नहीं है। यह शर्मनाक है कि भारत जैसे देश में रक्त का व्यापार हो रहा है। निश्चित ही मशीनी युग ने हमारी सोच को विकृत व संवेदना को निगलने का काम किया है, तभी तो जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे</p>
<p style="text-align:justify;">किसी व्यक्ति के प्राण बचाने के लिए हमें पैसे लेने की जरूरत पड़ रही हैं। समय पर रक्त नहीं मिलने व पैसे नहीं जुटा पाने के कारण भारत में प्रतिवर्ष 15 लाख लोगों की मौत रक्त की कमी के कारण हो जाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मापदंड के अनुसार किसी भी देश में किसी भी स्थिति में उसकी जनसंख्या का कम से कम 1 प्रतिशत रक्त आरक्षित होना ही चाहिए। उक्त मानक के अनुसार हमारे देश में कम से कम 1 करोड़ 30 लाख यूनिट रक्त का हर समय आरक्षित भंडार होना चाहिए। लेकिन, पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार हमारे पास प्रतिवर्ष रक्त की औसतन 90 लाख यूनिट ही उपलब्ध हो पाती है। प्रतिवर्ष लगभग 25 से 30 प्रतिशत रक्त की कमी रह जाती है। रक्त की कमी के अलावा दूसरी चिंताजनक बात, रक्त की शुद्धता है। इसलिए संक्रमित रक्त चढ़ाए से होने वाली मौतों को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में रक्तदान करने वाले राज्यों के आंकड़ों की बात करे तो मध्यप्रदेश में वर्ष 2006 में 56.2 प्रतिशत, वर्ष 2007 में 65.17 प्रतिशत, वर्ष 2008 में 68.75 प्रतिशत के लगभग रहा। वहीं, रक्तदान के क्षेत्र में डेरा सच्चा सौदा की बात न की जाए तो लेख लिखना बेमानी सा लगता है। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु जी ने अपने भक्तों में रक्तदान के प्रति ऐसा जज्बा भरा कि चार विश्व रिकॉर्ड डेरा सच्चा सौदा के नाम हो गए। डेरा सच्चा सौदा ने एक दशक में पांच लाख लीटर रक्तदान कर अपना लोहा मनवाया है। यही कारण है कि डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों को चलते फिरते ब्लॅड पंप का नाम दिया गया है। पर चिंताजनक है कि भारत में कुल जनसंख्या के अनुपात में एक प्रतिशत आबादी भी रक्तदान नहीं करती है। जबकि थाईलैण्ड में 95 फीसदी, इण्डोनेशिया में 77 फीसदी और म्यांमार में 60 फीसदी हिस्सा रक्तदान से पूरा होता है। भारत में मात्र 46 लाख लोग स्वैच्छिक रक्तदान करते हैं। इनमें महिलाएं मात्र 06 से 10 प्रतिशत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में रक्तदान को लेकर अभी तक पूरी तरह से जागरूकता आना बाकी है। अधिकांश लोगों में अब भी यह भ्रांति फैली हुई हैं कि रक्तदान करने से शरीर में रक्त की कमी हो जाती है, जो कि बिलकुल गलत है। रक्तदान करने से रक्त बढ़ता है और शरीर में नये रक्त का संचार होता है। रक्तदान करने के बाद तकरीबन 21 दिनों के भीतर ही शरीर पुन: रक्त निर्माण कर लेता है। इसलिए किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान करने से कतई कतराने की आवश्यकता महसूस नहीं होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक द्वारा रक्तदान के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करने हेतु एक नए फीचर जारी करने की पहल स्वागतेय है। लेकिन, सरकारी प्रयासों को भी गति देना होगा। देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी सर्वसुविधायुक्त ब्लड बैंक स्थापित करने होंगे। भारत जैसे भौगोलिक विभिन्नता वाले विशाल देश में जहां कई क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं अक्सर दस्तक देती हैं, उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हमारे जवान कर्तव्य निभाते हुए खून बहाते हैं तथा हमारे अस्थिर पड़ोसी देश हमेशा युद्ध जैसे हालात पैदा करते हैं ऐसे में रक्त का पर्याप्त आरक्षित भंडार होना अत्यंत आवश्यक हो जाता हैं।</p>
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                <pubDate>Thu, 14 Jun 2018 09:01:40 +0530</pubDate>
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