<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/hard/tag-6865" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Hard - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/6865/rss</link>
                <description>Hard RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बनवास खत्म, अब ‘वचन’ पूरा करने की चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[2018 ने जाते-जाते कांग्रेस को लाईफ लाईन दे गया है। तीनों राज्यों में कांग्रेस की जीत उसके लिए बहुत अहमियत वाली है इससे देश की राजनीति में लम्बे समय से अपना मुकाम तलाश रहे उसके नेता राहुल गांधी को आखिरकार एक राजनेता के रूप में अपना मुकाम मिल गया है। कांग्रेस के लिये मध्यप्रदेश की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hard-challenge-for-congress/article-7005"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/congress.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">2018 ने जाते-जाते कांग्रेस को लाईफ लाईन दे गया है। तीनों राज्यों में कांग्रेस की जीत उसके लिए बहुत अहमियत वाली है इससे देश की राजनीति में लम्बे समय से अपना मुकाम तलाश रहे उसके नेता राहुल गांधी को आखिरकार एक राजनेता के रूप में अपना मुकाम मिल गया है। कांग्रेस के लिये मध्यप्रदेश की जीत बहुत खास है यह भाजपा का सबसे मजबूत किला माना जाता था यहां शिवराज सिंह चौहान जैसे मजबूत नेता मुख्यमंत्री थे मध्यप्रदेश को भाजपा विकास के मॉडल के तौर पर भी प्रस्तुत करती रही है, मध्यप्रदेश में कांग्रेस पिछले तीन चुनावों से लगातार सत्ता से बाहर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2003 में उमा भारती को दिग्विजय सिंह की सरकार को उखाड़ फेकने का श्रेय दिया जाता है तब उन्होंने कुशासन, बिजली, पानी और सड़क को मुद्दा बना कर चुनाव लड़ा था और भारी बहुमत के साथ जीती थीं। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 58 सीटें मिली थीं, 2008 में कांग्रेस को 71 सीटें मिली थीं जबकि 2003 के चुनाव में कांग्रेस मात्र 38 सीटों पर सिमट कर रह गयी थी। 2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 114 सीटें मिली हैं जोकि बहुमत से दो कम हैं दूसरी तरफ भाजपा को 109 मिली हैं पिछली बार के मुकाबले उसे 56 सीटों का नुकसान हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">वोट प्रतिशत की बात करें तो बीजेपी को 41 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस को 40.9 प्रतिशत। यानी भाजपा को 0.1 प्रतिशत ज्यादा मत मिले हैं। दूसरी पार्टियों की बात करें तो इस बार बहुजन समाज पार्टी को दो सीटें समाजवादी पार्टी को एक और निर्दलियों को 4 सीटों मिली हैं। बसपा-सपा और निर्दलीयों ने कांग्रेस को समर्थन दिया है जिसके बाद कांग्रेस मध्यप्रदेश में 121 सीटों के साथ सरकार बनाने में कामयाब हो गयी है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने बहुत ही थोड़े समय में कांग्रेस ने अपना कायाकल्प करने का चमत्कार किया है और इसका श्रेय निश्चित रूप से राहुल गांधी को दिया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में लम्बे समय से कांग्रेस संगठन में भ्रम, असमंजस और अनिर्णय की स्थिति बनी हुई थी ऐसे में राहुल ने कमलनाथ, सिंधिया और दिग्विजय सिंह की जिम्मेदारी तय करते हुये इन्हें एक साथ काम करने को प्रेरित किया। क्रेडिट कमलनाथ को भी जाता है जिन्होंने बहुत कम समय में लम्बे समय से से सुस्त पड़ चुके संगठन को सक्रिय करके पार्टी को मुकाबले में ला दिया। उन्हें 1 मई 2018 से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी थी। शिवराज के बाद मध्यप्रदेश को कमलनाथ के रूप में नया मुख्यमंत्री मिला है जीत के बाद कांग्रेस के लिये यह फैसला अपेक्षाकृत काफी आसान रहा विधायक दल की बैठक में खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा मुख्यमंत्री पद के लिए कमलनाथ का प्रस्ताव रखा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने चार दशक लम्बे राजनीतिक कैरियर में यह पहला मौका है जब कमलनाथ मध्यप्रदेश की राजनीति में इस तरह से सक्रिय भूमिका में हैं। इससे पहले राज्य की राजनीति में वे अपने आप को छिंदवाड़ा तक ही सीमित किये रहे। कमलनाथ के लिये शिवराज जैसे लोकप्रिय, जमीनी और हमेशा जनता के बीच रहने वाले मुख्यमंत्री की जगह भर पाना आसान नहीं होगा। कमलनाथ की दूसरी चुनौती चुनाव अभियान के दौरान किये गये भारी-भरकम वादों पर खरा उतरना होगा चुनाव प्रचार के दौरान कमलनाथ ने ‘कर्ज माफ, बिजली का बिल हाफ और इस बार भाजपा साफ’ का नारा दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस का सबसे बड़ा चुनावी वादा किसानों की कर्जमाफी का है जिसके तहत दो लाख तक के कर्ज को माफ करने का वादा किया गया था कर्जमाफी के इस दायरे में करीब 40 लाख किसान आ रहे हैं। इस कर्जमाफी के लिये तकरीबन 56 हजार रुपए कि जरूरत पड़ेगी लेकिन इस दिशा में सबसे बड़ी परेशानी ये है कि मध्यप्रदेश के सरकारी खजाने की हालत बहुत खस्ता है राज्य पर लगभग पौने दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज पहले से ही था ऊपर से विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से ठीक पहले निवर्तमान सरकार द्वारा 500 करोड़ रुपए के कर्ज लेने की खबरें आयीं थी। दूसरी तरफ केंद्र की भाजपा कि सरकार कभी नहीं चाहेगी कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के खाते में कर्जमाफी की उपलब्धि दर्ज हो ऐसे में मध्यप्रदेश में नवगठित सरकार को इस मामले में केंद्र की तरफ मदद की उम्मीद नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कांग्रेस को अपने किये गये वादों को बायपास करके आगे निकलना उतना आसान भी नहीं है इस बार उसे मजबूत विपक्ष मिला है। इस्तीफा देने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश की जनता ने हमें एक चौकीदार की भूमिका सौंपी है हम एक सशक्त और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। शिवराज सिंह ने प्रदेश की सत्ता संभालने जा रही कांग्रेस को अभी से ही उसका सबसे बड़ा चुनावी वादा याद दिलाते हुये कहा है कि राहुल गांधी ने कहा था कि अगर 10 दिन में किसानों की कर्जमाफी नहीं हुई तो हम मुख्यमंत्री बदल देंगे अब कांग्रेस अपने वादे पूरे करे।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>जावेद अनीस</strong></p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hard-challenge-for-congress/article-7005</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hard-challenge-for-congress/article-7005</guid>
                <pubDate>Sun, 16 Dec 2018 20:33:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-12/congress.jpg"                         length="89521"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मासूम बच्ची पर पंचायत का कठोर फरमान</title>
                                    <description><![CDATA[देवेंद्रराज सुथार     राजस्थान के बूंदी जिले में छह साल की खुशबू से अनजाने में टिटहरी का अंडा फूट गया तो इस पर खाप पंचायत ने मासूम को जाति से बाहर निकालने का फरमान जारी कर दिया। दरअसल, खुशबू दो जुलाई को पहली बार स्कूल गई थी। उसी दिन स्कूलों में बच्चों को दूध पिलाने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hard-decree-of-panchayat-on-innocent-child/article-4808"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/ege.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>देवेंद्रराज सुथार    </strong></div>
<div style="text-align:justify;"></div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान के बूंदी जिले में छह साल की खुशबू से अनजाने में टिटहरी का अंडा फूट गया तो इस पर खाप पंचायत ने मासूम को जाति से बाहर निकालने का फरमान जारी कर दिया। दरअसल, खुशबू दो जुलाई को पहली बार स्कूल गई थी। उसी दिन स्कूलों में बच्चों को दूध पिलाने की योजना शुरू हुई थी। दूध के लिए बच्ची लाइन में लगी तो टिटहरी के घोंसले पर पैर चला गया और वह फूट गया। अंडा फूटते ही मानो नन्हीं खुशबू के सिर पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया। बूंदी के हरिपुरा गांव की पंचायत ने खुशबू की न उम्र का ख्याल किया और न ही बालमन की गलती को बड़ा मन रखकर माफ करने की दरियादिली दिखाई। बल्कि जाति से बाहर की गई खुशबू ने घर के बाहर टिनशेड में तेज गर्मी में पूरे दस दिन बिताए। इन दस दिनों में लोगों ने खुशबू के साथ अछूतों जैसा व्यवहार करने में कोई कसर नहीं रखी।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">बेटी को इस हाल में देखकर मां का दिल जरूर पसीजा लेकिन पंचायत के फरमान के डर के कारण वो नजदीक ना जा सकी। मां की ममता बेटी को छूने के लिए तरसती रही। इतना ही नहीं, पंचों ने बच्ची के पिता से जुर्माने के तौर गाय, मछली और कबूतरों के लिए चारा, आटा और ज्वार के साथ खुद के लिए एक किलो नमकीन और अंग्रेजी शराब की बोतलों की मांग भी की। मांग पूरी नहीं करने पर लाचार पिता को धमकाने से भी पंचायत बाज नहीं आयी।</div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल, इस तरह खाप पंचायत के पंचों की तानाशाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से खाप-पंचायतों के इस तरह के तुगलकी फरमान सुर्खियों में रहते है। ऐसा ही थोड़े दिनों पहले एक ओर मामला राजस्थान के ही धौलपुर जिले में बल्दियापुर गांव में देखने को मिला था। जहां के पंच पटेलों ने लड़कियों के जींस व टॉप पहनने तथा मोबाइल रखने पर यह कहकर पाबंदी लगाई कि इससे मान-मयार्दाएं टूट रही हैं व संस्कार खत्म हो रहे हैं।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">मगर वहां की लड़कियों ने इस पाबन्दी को मानने से इंकार कर दिया। वाकई! मुझे इन लड़कियों में वंडर वूमेन दिखी। वह वंडर वूमेन जो निर्भीक होकर समाज की पुरापंथी सोच को खुली चुनौती देकर उसका मर्दन करती है। जो हक के साथ अपनी आजादी का आकाश छीन लेती है। जिनकी आवाज समाज के ठेकेदार चाह कर भी दबा नहीं पाते। इन लड़कियों के असमां को पैरों में झुका देने वाले हौंसले को देखकर फर्क  होता है। दूसरी ओर पंच पटेलों व खाप पंचायत और कट्टरवादी धार्मिक संगठनों के द्वारा बार-बार लड़कियों के मनचाहे कपड़े पहनने पर बंदिशों के फरमान सुनकर बड़ा ही दु:ख होता है। उनकी दकियानूसी सोच क्यों नहीं बदलती। आखिर जींस-टॉप पहनने और मोबाइल रखने में हर्ज ही क्या है?</div>
<div style="text-align:justify;"></div>
<div style="text-align:justify;">पहनावे से मयार्दाएं कभी नहीं टूटती और आज के तकनीकी युग में आप किसी को मोबाईल से भी दूर नहीं कर सकते। इसी तरह आप पुरुषों की खराब नीयत के कारण लड़कियों को घूंघट में नहीं रख सकते। जहां नजर और नजरिया बदलने की जरुरत वहां केवल कपड़े बदलने से क्या काम चल जायेगा। रूढ़िवाद व दकियानूसी मानसिकता से ग्रसित पंच तो चाहेंगे ही कि उनकी सोच के अधीन रहकर नई पीढ़ी जीवन बसर करे। लेकिन, नई पीढ़ी का खोखली एवं पुरानी मान्यताओं के साथ जीवन जीना असंभव है। इन हालातों में पंचों को जमाने के साथ चलना सीखना होगा। उन्हें ये जान लेना होगा कि समाज और देश उनके बनाये गये नियमों पर नहीं, बल्कि संविधान के नक्शे-कदम पर चलेगा। जब तक ऐसी पंचायतें अपने ज्ञान और अनुभव से समाज को दिशा दे तब तक तो ठीक है, लेकिन जब इस तरह बेतुके फैसले देने पर उतारू हो जाए, तो उन्हें भंग कर देना ही बेहतर होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"></div>
<div style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</div>
<div style="text-align:justify;"></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hard-decree-of-panchayat-on-innocent-child/article-4808</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hard-decree-of-panchayat-on-innocent-child/article-4808</guid>
                <pubDate>Fri, 13 Jul 2018 02:45:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-07/ege.jpg"                         length="187684"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धूल की चादर में लिपटा उत्&amp;#x200d;तर भारत, मुश्किल भरे आने वाले 48 घंटे</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उत्‍तर भारत में इस समय धूल ही धूल नजर आ रही है। राजस्थान और ब्लूचिस्तान (पाकिस्तान) की ओर से चलीं धूलभरी गर्म हवाओं की वजह से उत्तर भारत के आसमान पर धूल की एक परत-सी बन गई है। धूलभरी हवा से राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित रहे। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/north-india-wrapped-in-dust-sheet-48-hours-coming-to-the-hard/article-4156"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/8888.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>उत्‍तर भारत में इस समय धूल ही धूल नजर आ रही है। राजस्थान और ब्लूचिस्तान (पाकिस्तान) की ओर से चलीं धूलभरी गर्म हवाओं की वजह से उत्तर भारत के आसमान पर धूल की एक परत-सी बन गई है। धूलभरी हवा से राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित रहे। धूलभरी हवाएं चलने का कारण पश्चिमी विक्षोभ माना जा रहा है। ऐसे में लोगों को जहां सांस लेने में दिक्कत हो रही है, वहीं हवाई परिचालन प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ही हालात रहे तो उत्तर भारत के लिए आने वाले 48 घंटे मुश्किलों भरे हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">40 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही है धूल बढ़ते तापमान से परेशान उत्तर भारत के लोगों की मुश्किल तब और बढ़ गई, जब हवाएं चलने से वातावरण में धूल की मात्रा और बढ़ गई। स्काईमेट वेदर के मुख्य मौसम विज्ञानी महेश पलावत का कहना है कि राजस्थान और ब्लूचिस्तान की ओर से चल रही गर्म हवाओं के साथ धूल करीब 40 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली की ओर आ रही है। चूंकि मौसम में नमी नहीं है, इस कारण धूल की इस चादर का असर कई दिन तक बना रहेगा। दिल्ली में कई गुना बढ़ा प्रदूषण का स्तर धूलभरी हवाओं ने दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 बुधवार को दिल्ली में तीन गुना से भी अधिक 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है। इसी तरह पीएम 10 का सामान्य स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है, जबकि बुधवार को यह 981 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया। घर व दफ्तर के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने की सलाह मौसम विशेषज्ञों ने ऐसे हालात में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को घर के भीतर ही रहने की सलाह दी है। घर व दफ्तर की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखने को कहा है। साथ ही कचरा न जलाने की सलाह दी है। इस दौरान निर्माण कार्य भी बंद रखने की भी बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आसमान में धूल के कारण बठिंडा-जम्मू फ्लाइट रद आसमान में धूल होने के कारण बुधवार को बठिंडा से जम्मू और जम्मू से बठिंडा की फ्लाइट को रद कर दिया गया। जम्मू से सुबह 9:10 की फ्लाइट को बठिंडा 10:20 बजे पहुंचना था, लेकिन आसमान में धूल के कारण जम्मू से फ्लाइट उड़ान नहीं भर सकी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/north-india-wrapped-in-dust-sheet-48-hours-coming-to-the-hard/article-4156</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/north-india-wrapped-in-dust-sheet-48-hours-coming-to-the-hard/article-4156</guid>
                <pubDate>Thu, 14 Jun 2018 09:47:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/8888.jpg"                         length="73409"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        