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                <title>आज से देश-विदेश में ये बदलाव, आम लोगों को होगा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्‍ली(एजेंसी)। नए साल का आगमन हो गया है। वर्ष 2018 को अलविदा कर वर्ष 2019 का स्वागत करने की खुशी का इजहार लोगों ने अपने-अपने अंदाज में किया। नेताओं से लेकर अभिनेताओं तक नववर्ष की बधाइयां दे रहे हैं। इस साल देश में ही नहीं, विदेशों में भी कई बड़े बदलाव होने जा रहे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/these-changes-in-country-and-abroad-from-today-the-common-people-will-benefit/article-7153"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-01/shoping-mall.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">न<strong>ई दिल्‍ली(एजेंसी)</strong>। नए साल का आगमन हो गया है। वर्ष 2018 को अलविदा कर वर्ष 2019 का स्वागत करने की खुशी का इजहार लोगों ने अपने-अपने अंदाज में किया। नेताओं से लेकर अभिनेताओं तक नववर्ष की बधाइयां दे रहे हैं। इस साल देश में ही नहीं, विदेशों में भी कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। तेलंगाना और आंध्रप्रदेश को आज अलग-अलग हाई कोर्ट मिल रहा है। वहीं ब्राजील को अपना नया राष्‍ट्रपति।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मेट्रो के चौथे फेज का काम आज से होगा शुरू</h2>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली मेट्रो के फेज-4 के काम की शुरुआत आज यानी 1 जनवरी से होने जा रही है। दिल्ली सरकार ने इसकी मंजूरी पहले ही दे दी थी। 104 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट से दिल्ली के कई इलाके आपस में जुड़ जाएंगे। इस प्रोजेक्ट में कुल 46,845 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। इस खर्च को दिल्‍ली और केंद्र सरकार मिलकर वहन करेगी। इस फेस के पूरा होने के बाद दिल्‍ली के लोगों का सफर और आसान हो जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">तेलंगाना और आंध्रप्रदेश का होगा अलग-अलग हाई कोर्ट</h2>
<p style="text-align:justify;">तेलंगाना और आंध्रप्रदेश को आज से अलग-अलग हाई कोर्ट मिल जाएंगे। तेलंगाना बनने के बाद से अबतक दोनों राज्यों का एक ही हाई कोर्ट था। इसकी वजह से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब तेलंगाना और आंध्रप्रदेश का अलग-अलग हाई कोर्ट होने से लोगों की काफी परेशानियां कम हो जाएंगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ब्राजील को मिलेंगे नए राष्ट्रपति</h2>
<p style="text-align:justify;">ब्राजील के लिए नए साल की शुरुआत बेहद सुखद होने जा रही है। नए साल के पहले दिन ब्राजील को अपना नया राष्ट्रपति मिलने जा रहा है। जायर बोल्सनारो मंगलवार को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नए साल में सरकार ने दिया तोहफा, 120 रुपए सस्ता हुआ LPG सिलेंडर</h2>
<p style="text-align:justify;">नए साल के आगाज से पहले जनता के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। गैर सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 120.50 रुपए की कटौती की है। इसके अलावा सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत में भी 5.91 रुपए की कटौती की गई है। अब गैर सब्सिडी सिलेंडर 689 रुपए में मिलेगी। पहले इसकी कीमत 809.50 रुपए थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">23 वस्तुएं और सेवाएं आज से हुईं सस्ती</h2>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने आम जनता को नए साल का तोहफा देते हुए पहली जनवरी से 23 वस्तुओं और सेवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) घटा दिया है। सोमवार को इस सिलसिले में अधिसूचना जारी कर दी गई। इनमें टीवी, छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, टायर और सिनेमा टिकट जैसी चीजें शामिल हैं। इनके अलावा मॉनीटर और 32 इंच तक के टीवी, रीट्रेडेड टायर, पावर बैंक, डिजिटल कैमरा, वीडियो कैमरा, वीडियो गेम, दिव्यागों को ले जाने वाले वाहनों के कलपुर्जे और एसेसरीज, प्राकृतिक कॉर्क, वॉकिंग स्टिक, फ्लाई एश ब्लॉक आदि के लिए उपभोक्ताओं को मंगलवार से कम दाम देने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी काउंसिल ने अपनी पिछली बैठक में इन वस्तुओं एवं सेवाओं पर 28 फीसद की दर को कम कर दिया था। कुछ वस्तुओं पर इसे घटाकर 18 फीसद, जबकि कुछ सेवाओं पर 18 फीसद की दर को कम कर 12 फीसद किया गया है। जीएसटी की 28 फीसद की सबसे ऊंची दर अब कुछ लक्जरी वस्तुओं, अहितकर सामान, सीमेंट, बड़े टीवी स्क्रीन व एयरकंडीशनरों पर ही रह गई है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jan 2019 09:50:54 +0530</pubDate>
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                <title>पुस्तकें : बदलावों के प्रामाणिक दस्तावेज</title>
                                    <description><![CDATA[संसार का स्वरूप भले ही जनमानस की आंखों से उतरकर उसके अन्त:करण तक अपनी उपस्थिति का भान कराने में समर्थ हो, मगर इस स्वरूप का विश्लेषणात्मक एवं व्यापक विवेचन विचारों के माध्यम से ही संभव है। विचार सदैव स्मरण के आधार पर स्थायी बने रहे, ऐसा कदाचित संभव नहीं है। विचारों को स्थायित्व प्रदान करने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/books-authentic-documents-of-changes/article-3379"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/books.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">संसार का स्वरूप भले ही जनमानस की आंखों से उतरकर उसके अन्त:करण तक अपनी उपस्थिति का भान कराने में समर्थ हो, मगर इस स्वरूप का विश्लेषणात्मक एवं व्यापक विवेचन विचारों के माध्यम से ही संभव है। विचार सदैव स्मरण के आधार पर स्थायी बने रहे, ऐसा कदाचित संभव नहीं है। विचारों को स्थायित्व प्रदान करने के लिए पहले भाषा का विकास किया गया तदुपरान्त उसकी विशिष्ट अभिव्यक्ति के लिए लिपि का विकास किया गया। लिपि के माध्यम से विचारों को संकलित व संग्रहित किया गया, जिसका सर्वाधिक सशक्त माध्यम पुस्तकें बनीं। इतिहास साक्षी है कि पुस्तकें समाज के स्वरूप को समय-समय पर व्यक्त करती रही हैं। सामाजिक व्यवस्थाएं एवं व्यवस्थाओं में निरन्तर हो रहे बदलावों का प्रामाणिक दस्तावेज पुस्तकें ही सिद्ध होती रही हैं। समाज की गतिशीलता में पुस्तकें ही दिशानायक की सी भूमिका का निर्वाह करती रही हैं, साथ ही जीवन से जुड़े प्रत्येक क्षेत्र में अपनी विशिष्टता का अहसास भी पुस्तकें ही कराती रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुस्तकों की महत्ता का यदि विश्लेषणात्मक ढंग से अध्ययन किया जाए तो स्पष्ट होता है कि चाहे प्रौद्योगिकी का क्षेत्र हो अथवा चिकित्सा का, साहित्य का भावपक्ष हो अथवा कला पक्ष, प्रत्येक क्षेत्र में पुस्तकों ने अपनी महत्ता सिद्ध की है तथा सृष्टि के समूचे ज्ञान की अपने पृष्ठों में समेटकर जनमानस के सम्मुख प्रस्तुत किया है। नित्य सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में हो रहे बदलावों के निष्कर्ष पुस्तकों के माध्यम से समाज को दिशा देने का माध्यम सिद्ध हुए हैं। इतिहास एवं परम्पराओं में सुधारात्मक परिवर्तन संभव हुए हैं। समय जिस द्रुतगति से पंख लगाकर उड़ रहा है, उसका मापन भले ही वैज्ञानिक यंत्रों के माध्यम से संभव हुआ हो, मगर मापन का प्रामाणिक आधार पुस्तकें ही बनी हैं। ज्ञान के स्थायी कोष के रूप में विचारों का भंडारण, विश्लेषण, परिभाषीकरण सभी कुछ पुस्तकों के माध्यम से ही संभव हुआ है। सर्वविदित है कि विश्व में जितने भी परिवर्तन हुए हैं, सभी की प्रेरणास्रोत पुस्तकें ही बनी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज कम्प्यूटर युग में भले ही विचारों के संग्रहण में कम्प्यूटर की भूमिका प्रभावी होती जा रही हो, मगर अति विशिष्ट तकनीक के आधार पर भी आधुनिक संयंत्रों में ज्ञान के स्थायी कोष की संभावना संदिग्ध प्रतीत होती है। तकनीकी खराबी के कारण कम्प्यूटर की स्थिति भी कई बार दयनीय प्रतीत होती है, जिससे विचारों के स्थायी संकलन के प्रति कई बार सन्तोषजनक परिणाम नहीं निकलते, इसके विपरीत नई तकनीकों के आधार पर किए जा रहे मुद्रण से पुस्तकों की गुणवत्ता अपनी उत्कृष्टता प्रमाणित करती जा रही है। नि:संदेह पुस्तकें तुलना की परिधि से इतर हैं, इनमें समाहित स्थायी ज्ञान लम्बे समय तक विश्व में संग्रहित एवं संरक्षित रखा जा सकता है, जिनकी उपलब्धता भी सहज होती है। विश्व स्तरीय साहित्य जनमानस को पुस्तकों के रूप में ही उपलब्ध है, जिसके आधार पर मानव मात्र अपनी विशिष्ट प्रतिभा के बल पर विश्व में अपनी सिरमौर स्थिति बना चुका है तथा विश्व मानव की संज्ञा पा चुका है। जितने भी प्रयोग ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे हैं, सभी का आधार पुस्तकें बनी हैं। सहज अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी पुस्तकें ही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">समाज की दिशावाहक पुस्तकों की महिमा का यदि विस्तारपूर्वक विवेचन किया जाए तो अनेक पुस्तकों की रचना की जा सकती है तथापि पुस्तक की महत्ता स्वयं सत्यापित है। जितनी बार पुस्तकों का अध्ययन किया जाता है, उतनी बार ही पुस्तकों में व्यक्त विचारों के नवप्रयोग प्रकाश में आते हैं। जनमानस को दिशा प्रदान करने के साथ- साथ पुस्तकें अपने पाठकों के दृष्टिकोण को तर्कसंगत बनाती हैं। पाठकों को चिन्तन का विस्तृत आकार प्रदान करती हैं। जिससे यही निष्कर्ष निकलता है कि विचारजन्य भौतिक सृष्टि में यदि कहीं गतिशीलता के लक्षण प्रमाणित होते हैं, तो गतिशीलता के प्रत्येक सोपान की अभिव्यक्ति पुस्तकों के माध्यम से ही संभव है।</p>
<p><strong>-डॉ. सुधाकर आशावादी</strong></p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Oct 2017 04:29:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिशन एडमिशन। उच्चतर शिक्षा विभाग ने आॅनलाइन एडमिशन नियमों में किए बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[रि-अपीयर के विद्यार्थी भी कर सकते हैं आवेदन प्रदेशभर के कॉलेजों मेें जोरों पर है दाखिले की दौड़ गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)। स्नातक कक्षाओं में प्रवेश को कट आॅफ ऊंची जाने के कारण वैसे तो 12वीं कक्षा में रि-अपीयर वाले विद्यार्थियों को दाखिला मिलना असंभव सी बात है। फिर भी उनको कोई मलाल न रहे, इसलिए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">रि-अपीयर के विद्यार्थी भी कर सकते हैं आवेदन</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्रदेशभर के कॉलेजों मेें जोरों पर है दाखिले की दौड़</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)।</strong> स्नातक कक्षाओं में प्रवेश को कट आॅफ ऊंची जाने के कारण वैसे तो 12वीं कक्षा में रि-अपीयर वाले विद्यार्थियों को दाखिला मिलना असंभव सी बात है। फिर भी उनको कोई मलाल न रहे, इसलिए उच्चतर शिक्षा विभाग की ओर से इस बार उन्हें भी आवेदन करने का मौका दिया है। यानी अब रि-अपीयर लिए हुए विद्यार्थी भी दाखिले के लिए आॅनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अगर सीटें खाली बची तो उन्हें दाखिला दे दिया जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सीटें खाली बची तो मिलेगा दाखिला</h2>
<p style="text-align:justify;">अभी तक 12वीं कक्षा में रि-अपीयर वाले विद्यार्थियों को स्नातक कक्षाओं में आवेदन ही नहीं करने दिया जाता था। इस बार विभाग की ओर से उन्हें छूट दी गई है। जिन विद्यार्थियों की 12वीं कक्षा में रि-अपीयर है, वे विद्यार्थी भी अब प्रदेशभर के कालेजों में दाखिले को आवेदन कर सकेंंगे। विभाग द्वारा आवेदन फॉर्म में पास प्रतिशत के अलावा रि-अपीयर का आॅप्शन भी दिया गया है। अब रि-अपीयर वाले छात्र अन्य छात्रों की तरह किसी भी कालेज में आवेदन कर सकते हैं। मेरिट लिस्ट के अनुसार सभी पास छात्रों का दाखिला होने के बाद ही कालेजों में खाली सीटों पर रि-अपीयर वाले स्टूडेंट्स का दाखिला हो सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में वेबसाइट पर आॅनलाइन एडमिशन के दौरान रि-अपीयर के छात्रों के आवेदन के लिए कोई प्रावधान नहीं था। इस मामले को लेकर प्रदेश के कई कॉलेजों ने उच्चतर शिक्षा विभाग को ईमेल के माध्यम से मामले को अवगत करवाया था। जिसके बाद विभाग ने आवेदन फार्म में बदलाव करते हुए 12वीं कक्षा पास प्रतिशत के साथ ही रि-अपीयर का कॉलम दिया है। अब ये विद्यार्थी किसी एक विकल्प को चुनकर अपना आवेदन फार्म पूरा कर सकता है। रि-अपीयर छात्रों को कालेजों में सीटें खाली रहने पर ही एडमिशन मिल सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/higher-education-department-changes-in-online-admission-rules/article-1264</link>
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                <pubDate>Thu, 15 Jun 2017 09:01:25 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहजता से स्वीकारें हर बदलाव को</title>
                                    <description><![CDATA[जड़ता, जीवन्तता को खा जाती है और जो इसके सम्पर्क में आता है, जो अंगीकार करता है उसका खात्मा कर दिया करती है। इसलिए जीवन का हर क्षण और प्रत्येक व्यवहार जीवन्त होना चाहिए, तभी यह शाश्वत आनंद और चरम सुख प्रदान कर सकता है। परिवर्तन को सहज भाव से सहर्ष स्वीकार करने की आदत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/accept-all-changes-easily/article-442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/change-plant.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जड़ता, जीवन्तता को खा जाती है और जो इसके सम्पर्क में आता है, जो अंगीकार करता है उसका खात्मा कर दिया करती है। इसलिए जीवन का हर क्षण और प्रत्येक व्यवहार जीवन्त होना चाहिए, तभी यह शाश्वत आनंद और चरम सुख प्रदान कर सकता है। परिवर्तन को सहज भाव से सहर्ष स्वीकार करने की आदत डाल ली जाए, तो फिर हर बदलाव अपने आप में नवीन अनुभवों के साथ सुन्दर और सकारात्मक हो सकता है। हमेशा हर बदलाव अपने पूर्ण अनुकूल हो यह संभव नहीं है, लेकिन यदि परिवर्तन को जीवन की रोजमर्रा की सामान्य क्रियाओं की तरह मान लिया जाए तो यह उतना अनमना भी नहीं लगता जैसा कि औसत इंसान सोचता है।<br />
जो एक जगह बैठने और स्थिर रहकर कुछ फीट की परिधि को ही संसार मान लिया करता है, वह जिन्दगी भर बिना किसी रस्सी से खूंटे की तरह बंधा होकर रह जाता है। जीवन में आज हम जो कुछ हैं, उससे अधिक पा सकते हैं यदि हर परिवर्तन को अंगीकार कर लें।<br />
परिवर्तन के संदर्भ में यह स्पष्ट मान्यता है कि या तो खुद अपने आपको बदलें और सम सामयिक परिस्थितियों के अनुरूप अपने भीतर अनुकूलताएं पैदा करें। और यह नहीं कर पाएं तो हर प्रकार के परिवर्तन को सहजता एवं आनंदपूर्वक स्वीकार करने का माद्दा विकसित कर लें।<br />
सबसे सुन्दर और जीवट वाला इंसान वह है जो हर प्रकार के प्रवाह के अनुकूल होकर बहना सीख जाता है। उसे किसी से कोई शिकायत नहीं होती। किसी वस्तु या व्यक्ति से मोह नहीं होता। जो हो रहा है वह ठीक हो रहा है, यह मानकर ईश्वर की हर इच्छा को सहजतापूर्वक स्वीकार कर लिया करता है। ऐसे व्यक्ति के लिए चाहे कैसी भी परिस्थितियां सामने क्यों न आ जाएं, वह हमेशा मस्त रहता है और उसका जीवन आनंद से भरपूर रहता है।<br />
जो लोग परिवर्तन को सहजतापूर्वक स्वीकार करने के आदी नहीं होते, झिझकते रहते हैं, जब भी बदलाव की बयार आती है, अन्यमनस्क बने रहते हैं उन लोगों को भले ही कुछ समय के लिए परिवर्तन से राहत मिल जाए, लेकिन अन्ततोगत्वा अनचाहे परिवर्तन को भी विवश होकर स्वीकार करना ही पड़ता है। विवशता से स्वीकारा गया हर प्रकार का परिवर्तन दु:खद और अवसादी चरित्र वाला होता है और इससे आनंद पाने की कल्पना नहीं की जा सकती।<br />
कुछ लोग जिन्दगी भर यह चाहते हैं कि हम उन्हीं के होकर बने रहें, उन्हीं की गुलामी करते हुए नौकर-चाकरों और दास की तरह काम करते रहें, इसके सिवाय हमारी कोई जिन्दगी हो ही नहीं। बहुत बड़ी संख्या में हुनरमंद और बौद्धिक सम्पदा के धनी हुए हैं जो इन्हीं चन्द लोगों के मोहपाशों में जकड़े रहकर अपना सब कुछ गँवा बैठे और कइयों के लिए बुढ़ापा अभिशाप हो गया।<br />
बहुत सारे लोग प्रेम और मोह में फंस कर एक-दूजे के लिए जिन्दगी भर जीने के वायदों और दावों की बलि चढ़ गए और खूब सारे एक-दूसरे से किसी न किसी जमीन-जायदाद या तरह-तरह के संबंधों की वजह से जिन्दगी को रसहीन, गंधहीन और तत्वहीन कर बैठे।<br />
व्यक्तियों के घेरे में पड़कर मोहग्रस्त रहने वाले लोगों के सामने भी वर्तमान से अच्छे और श्रेष्ठ लोगों का आवागमन बना रहता है, किन्तु ये लोग पुरानों के मोह में इतने अधिक जकड़े हुए होते हैं कि कुछ नहीं कर पाते। कोई बंधक बना फिरता है और कोई नजरबंद होकर पड़ा रहता है।<br />
दुनिया हमारे देखने और जानने के लिए है और अरबों लोगों में हमारे लायक तथा हमारी मानसिकता वालों की भी कोई कमी नहीं है। एक बार परिवर्तन को स्वीकारने का मानस तो बनाएं। परिवर्तन खुश होकर स्वीकार कर लें तो अच्छी बात है अन्यथा मर-मर के भी इसे स्वीकार करना ही पड़ेगा, और यही हमारे लिए दु:ख का महान कारण बन सकता है।<br />
<em>डॉ. दीपक आचार्य</em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Dec 2016 09:06:50 +0530</pubDate>
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