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                <title>akhilesh - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Akhilesh Yadav: अखिलेश से मिलने साइकिल से हुआ रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[सपा की नीतियों से प्रभावित है फैजान बुलन्दशहर/ स्याना निवासी फ़ैज़ान कुरैशी समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav से मुलाकात की आस लेकर साइकिल से ही पार्टी मुख्यालय लखनऊ को रवाना हो गया। फैजान के जज्बे से प्रभावित होकर पार्टी के वरिष्ठ नेता हरिश्चंद्र प्रजापति व पूर्व मंत्री राकेश त्यागी ने साइकिल पर सवार फैजान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/left-on-a-bicycle-to-meet-akhilesh/article-45668"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/akhilesh.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">सपा की नीतियों से प्रभावित है फैजान</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>बुलन्दशहर/</strong> स्याना निवासी फ़ैज़ान कुरैशी समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav से मुलाकात की आस लेकर साइकिल से ही पार्टी मुख्यालय लखनऊ को रवाना हो गया। फैजान के जज्बे से प्रभावित होकर पार्टी के वरिष्ठ नेता हरिश्चंद्र प्रजापति व पूर्व मंत्री राकेश त्यागी ने साइकिल पर सवार फैजान को झंडी दिखाकर लखनऊ के लिए रवाना कर दिया। ताहिर सैफी ने 1100 रूपये देकर फैजान का उत्साहवर्धन किया। सपा की युवा विंग से जुड़े फैजान कुरैशी ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एक ऐसे अकेले नेता हैं, जो युवाओं को साथ लेकर चलते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव की नीतियों से प्रेरित होकर फैजान (Akhilesh Yadav) के मन मस्तिष्क में उनसे मिलने की इच्छा जागृत हुई तथा फैजान ने सैकड़ों किलोमीटर की दूरी को सपा के चुनाव चिन्ह साइकिल पर ही सवार होकर पार्टी मुख्यालय पहुंचने का संकल्प ले लिया। जब मीडिया ने फैजान कुरैशी से पूछा कि क्या समाजवादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उनके इस निर्णय को स्वीकार करेंगे ? इस पर फैजान कुरैशी ने बड़े जोश में कहा कि पूर्ण विश्वास है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव उसकी लगन को देखते हुए उससे अवश्य मिलेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">फैजान ने कहा कि आज तक कोई पार्टी कार्यकर्ता ऐसा नहीं है (Akhilesh Yadav) जो समाजवादी पार्टी कार्यालय व अखिलेश यादव के दर से निराश होकर लौटा हो। फैजान कुरैशी ने कहा कि स्याना से लखनऊ तक की सैकड़ों किलोमीटर की दूरी को करीब 4 से 5 दिन में तय कर लेगा और इस बीच रमजान भी रखा जाएगा। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता हरिश्चंद्र प्रजापति ने कहा कि समाजवादी पार्टी का हर कार्यकर्ता फैजान कुरैशी के साथ है और जहां पर भी आवश्यकता पड़ेगी, फैजान कुरैशी की समस्या का समाधान कराया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जगह-जगह पार्टी के कार्यकर्ताओं को अवगत करा दिया गया है, जहां पर (Akhilesh Yadav) पार्टी के कार्यकर्ता फैजान कुरैशी का उत्साह वर्धन करते रहेंगे। ऐसे युवाओं को आगे बढ़कर बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। इस दौरान ताहिर अली सैफी, पूर्व मंत्री राकेश त्यागी, सपा नगराध्यक्ष सफीक चौधरी, सभासद श्रीमती चमनलता, इसरार चौधरी, नाजिम भाई, अबरार चौधरी, उपेंद्र बाल्मीकि, फरमान सलमानी आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Apr 2023 17:58:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>किसका काम बिगाड़ेगी बुआ-भतीजे की जोड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ के एक पंचतारा होटल में जहां तकरीबन दो साल पहले यूपी के लड़के प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे, आज फिर उसी जगह पर दोबारा एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन हुआ। जगह वही थी, मगर प्रेस कांफ्रेंस के किरदार बदले हुये थे। यूपी के लड़कों की जगह पर बुआ-भतीजे की जोड़ी मीडिया से मुखातिब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">लखनऊ के एक पंचतारा होटल में जहां तकरीबन दो साल पहले यूपी के लड़के प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे, आज फिर उसी जगह पर दोबारा एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन हुआ। जगह वही थी, मगर प्रेस कांफ्रेंस के किरदार बदले हुये थे। यूपी के लड़कों की जगह पर बुआ-भतीजे की जोड़ी मीडिया से मुखातिब थी। मौका था गठबंधन की आधिकारिक घोषणा और सीटों के बंटवारे के ऐलान का। करीब 22 मिनट चली प्रेस कांफ्रेंस में बुआ करीब 14 मिनट बोलीं तो भीतजे ने लगभग 8 मिनट माइक थामा। माया-अखिलेश ने मीडिया को अपनी नयी राजनीतिक दोस्ती से तारूफ करवाया। दोनों दलों ने बराबरी का व्यवहार करते हुए 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दो सीटें अन्य दलों और रायबरेली और अमेठी की सीटों को बिना किसी गठबंधन के लिये कांग्रेस के लिये छोड़ा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">माया-अखिलेश की प्रेस वार्ता की सबसे अहम बात यह रही है कि मायावती ने भाजपा के साथ ही साथ कांग्रेस की भी जमकर धुलाई की। सपा-बसपा ने कांग्रेस को एक किनारे करके उसकी सत्ता वापसी के रास्ते में गठबंधन का एक बड़ा-सा पत्थर रख दिया है। वास्तव में मोदी सरकार को सत्ता से उखाड़ने के मकसद से बसपा-सपा की दोस्ती भाजपा से ज्यादा कांग्रेस का काम बिगाड़ेगी, अब यह बात तय हो गयी है। माया-अखिलेश की प्रेस कांफ्रेंस की शुरूआत यूपी की चार बार की मुख्यमंत्री रह चुकी मायावती ने की। पूरी वार्ता की सबसे ज्यादा जरूरी बातें मायावती के मुंह से निकली। मायावती ने कांग्रेस को भाजपा के साथ एक तराजू में तौलने का काम किया। मायावती ने कांग्रेस और भाजपा की सोच, कार्यशैली व नीति को एक ही बताया। मायावती ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहाकि यूपी में हुये उपचुनाव में उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यूपी की राजनीति में कांग्रेस पिछले दो दशकों से निचले पायदान पर खड़ी है। बावजूद इसके यूपी की कई लोकसभा सीटों पर उसकी मजबूत पकड़ और जनाधार को नकारा नहीं जा सकता है। दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले दम पर 71 सीटों के साथ 42.63 फीसदी वोट शेयर हासिल किया था। समाजवादी पार्टी को कुल 22.35 फीसदी वोटों के साथ पांच सीटें मिली थी। बहुजन समाज पार्टी को 19.7 फीसदी वोट तो मिले लेकिन उसका खाता नहीं खुल पाया। इसके उलट कांग्रेस महज 7.53 फीसदी वोट हासिल कर दो सीटें अमेठी व रायबरेली जीतने में कामयाब रही थी। अब चूंकि सपा-बसपा के गठबंधन की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है ऐसे में यूपी की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सपा-बसपा के गठबंधन का सबसे ज्यादा फायदा यूपी में इन दोनों पार्टियों को ही मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसकी वजह है कि अगर सपा-बसपा के वोट शेयर को मिला दिया जाए तो यह करीब 40 फीसदी के आस-पास बैठता है, जो 2014 के मुकाबले में बीजेपी के बराबर है। अब अगर इसी वोट शेयर से सीटों की जीत का अनुमान लगाया जाए तो हो सकता है कि 2019 में सपा-बसपा गठबंधन का आधे से ज्यादा सीटों पर जीत का परचम लहरा सकता है। सपा-बसपा चाहेगी कि पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनीतिक दल जैसे- निषाद पार्टी, अपना दल (कृष्णा पटेल) उसके साथ हो जाए। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस के लिए 2019 की राह और भी मुश्किल हो जाएगी। क्योंकि गठबंधन में ना शामिल किए जाने पर पिछले चुनाव में महज 7.5 फीसदी वोट पाने वाली कांग्रेस के लिए मुश्किलें और बढ़ेंगी और केंद्र की सत्ता में वापसी के सपने बिखर सकते हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में जहां बीजेपी को 39.6 फीसदी वोट शेयर मिला था तो सपा और बीएसपी को 22 फीसदीं दोनों के वोटों को मिला दें तो 44 फीसदी हो जाता है। कांग्रेस को मात्र 6 फीसदी ही वोट मिले थे।</p>
<p style="text-align:justify;">2014 में कांग्रेस ने यूपी में लोकसभा की दो सीटें जीती थीं। 2009 के लोकसभा चुनाव कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए अकेले दम पर 21 सीटें हासिल की थीं। यहां सपा ने 23 और बसपा ने 20 सीटें हासिल की थीं, जबकि बीजेपी को 10 सीटें मिली थीं। वोटिंग प्रतिशत पर गौर करें तो मोदी लहर के बावजूद कांग्रेस ने यूपी की करीब दो दर्जन सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया था। दो सीटें जीतने के अलावा कुल छह सीटों पर कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी। यहां कांग्रेस प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे थे। माना जा रहा है कि अगर कांग्रेस आगामी वक्त में महागठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ती है तो गठबंधन के वोटबैंक पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। वहीं मायावती और अखिलेश के महागठबंधन से बाहर होने की स्थिति में पश्चिम यूपी की सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद और गाजियाबाद जैसी सीटों पर इकट्ठा हो रहे वोटर बंटेगे, जिससे बीजेपी को फायदा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में कांग्रेस में गठबंधन को लेकर प्रारम्भ से ही दो अलग राय थीं। एक राय यह है कि अकेले चुनाव लड़कर सभी सीटों पर पार्टी को मजबूती दी जाए। विधानसभा चुनाव में सपा से गठबंधन करने से सपा सरकार के खिलाफ चल रही लहर का नुकसान कांग्रेस को भी उठाना पड़ा। पड़ोसी तीन राज्यों में अकेले चुनाव लड़ कर सरकार बनने के बाद यूपी में भी पार्टी नेता इसको लेकर मुखर हो गये थे। सपा-बसपा के गठबंधन की घोषणा के बाद अब यह साफ हो गया है कि कांग्रेस अपने दम पर यूपी में मैदान में उतरेगी। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यूपी में कांग्रेस का जनधार लगातार गिरता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पार्टी के पास यूपी में मौजूद सात विधायकों में से दो पश्चिम उत्तर प्रदेश से हैं, लेकिन इन सब के बीच करीब तीन दशक से सत्ता से बाहर कांग्रेस संगठन की दृष्टि से काफी कमजोर दिखने लगी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक, पिछले दिनों हुए फूलपुर, गोरखपुर, कैराना और नूरपुर के उपचुनाव ये साफ दिखाते हैं कि गठबंधन करके उत्तर प्रदेश में बीजेपी को आसानी से पटखनी दी जा सकती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सभी दलों को एक साथ आना, खासकर कांग्रेस का। लेकिन जानकारों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थिति में सपा-बसपा के गठबंधन से विपक्षी मतों का बिखराव होगा और बीजेपी को इसका सीधा फायदा होगा। सपा-बसपा ने कांग्रेस से किनारा करके राजनीतिक समझ-बूझ का परिचय दिया है या बड़ी गलती की है, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलवक्त, सपा-बसपा, कांग्रेस और भाजपा सब अपनी-अपनी राजनीति और रणनीति कामयाब होते देख रहे हैं।</p>
<p><strong>आशीष वशिष्ठ</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Jan 2019 08:11:46 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विपक्षी एकता ने भाजपा को करा दिया है अपनी ताकत का एहसास: अखिलेश</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ (एजेंसी)। समाजवादी पार्टी(सपा)अध्यक्ष अखिलेश यादव (SP President Akhilesh Yadav) ने पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के रूझान के बाद महागठबंधन की वकालत करते हुये कहा, ‘एक और एक मिलकर बनते है ग्यारह,, तब बड़े-बड़ो की सत्ता हो जाती है नौ दो ग्यारह। यादव ने लोकसभा चुनाव से पहले बनने वाले महागठबंधन की वकालत की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/opposition-unity-has-made-bjp-to-realize-its-power-sp-president-akhilesh-yadav/article-6910"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/akhilesh.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> समाजवादी पार्टी(सपा)अध्यक्ष अखिलेश यादव (SP President Akhilesh Yadav) ने पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के रूझान के बाद महागठबंधन की वकालत करते हुये कहा, ‘एक और एक मिलकर बनते है ग्यारह,, तब बड़े-बड़ो की सत्ता हो जाती है नौ दो ग्यारह। यादव ने लोकसभा चुनाव से पहले बनने वाले महागठबंधन की वकालत की है। उन्होने मंगलवार को यहां ट्वीट करके कहा, ‘जब एक और एक मिलकर बनते हैं ग्यारह… तब बड़े-बड़ों की सत्ता हो जाती है नौ दो ग्यारह। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के साथ ही तेलंगाना तथा मिजोरम विधानसभा चुनाव के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पिछड़ने के बाद यादव ने कहा कि आ रहे नतीजों ने विपक्षी एकता की ताकत का एहसास करा दिया है।</p>
<h2>लोगों के जीवन में कोई परिवर्तन नहीं आया है | SP President Akhilesh Yadav</h2>
<p>यादव ने कहा कि भाजपा ने देश एवं प्रदेश में विकास को रोक दिया है। देश की जनता नोटबंदी से और व्यापारी जीएसटी से परेशान हैं। देश को तरक्की की जरूरत है। लोगों के जीवन में कोई परिवर्तन नहीं आया है। उन्होने कहा कि भाजपा के खिलाफ जनाक्रोश को देखकर उनके गठबंधन के साथी एक-एक करके अलग हो रहे हैं, उनके सांसद, मंत्री चुनाव न लड़ने की घोषणा कर रहे हैं। उनके सलाहकार तथा सर्वोच्च बैंक के पदाधिकारी अवांछित हस्तक्षेप के कारण पद त्याग रहे हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है कि सरकार खुद अराजकता फैला रही है।</p>
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                <pubDate>Tue, 11 Dec 2018 09:25:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा ने दिल्ली की जनता का किया गुमराह: अखिलेश</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ (एजेंसी)। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh) ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली में ऐसा केन्द्र खोल रखा है जिसमें इस बात पर शोध होता है कि जनता को कैसे गुमराह किया जा सकता है और कौन से लुभावने सब्जबाग दिखाए जा सकते हैं तथा समाज को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/bjp-has-misled-delhi-people-akhilesh/article-5487"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/akhilesh-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव <strong>(Akhilesh)</strong> ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली में ऐसा केन्द्र खोल रखा है जिसमें इस बात पर शोध होता है कि जनता को कैसे गुमराह किया जा सकता है और कौन से लुभावने सब्जबाग दिखाए जा सकते हैं तथा समाज को बांटने की साजिशों को कैसे परवान चढ़ाया जा सकता है।</p>
<p>आजमगढ़ से गोरखपुर तक ‘लोकतंत्र बचाओं, देश बचाओं’ साइकिल यात्रा करके आए 130 नौजवानों ने मंगलवार को खिलेश से यहां भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी गरीबों के पेट की लड़ाई लड़ती हैं जबकि दूसरे दिमाग की लड़ाई लड़ते हैं। भारत में कुछ लोग दिमाग से पेट की लड़ाई को कमजोर करने में लगे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा समाजवादी साइकिल चलाकर समाज को बांटने वाली ताकतों से निबटेंगे। देश के सामने सन् 2019 और 2022 का मौका है। इसमें चूकना नहीं है। यादव <strong>(Akhilesh) </strong>ने कहा कि दिल्ली में भाजपा ने ऐसा केन्द्र खोल रखा है जिसमें इस बात पर शोध होता है कि जनता को कैसे गुमराह किया जा सकता है, कौन से लुभावने सब्जबाग दिखाए जा सकते हैं और समाज को बांटने की साजिशों को कैसे परवान चढ़ाया जा सकता है।</p>
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<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Aug 2018 20:19:41 +0530</pubDate>
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                <title>अखिलेश यादव का एलान, कन्नौज से लड़ूंगा 2019 का चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[एजेंसी। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एलान किया है कि वह 2019 में लोकसभा का चुनाव कन्नौज से लड़ेंगे। वहीं, उनके पिता मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे। गुरुवार को लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में कन्नौज के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर उन्होंने ये घोषणा की। इस दौरान अखिलेश यादव के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/akhilesh-yadavs-announcement-will-be-fought-kannauj-2019/article-4164"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kjk-copy-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>एजेंसी। </strong>सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एलान किया है कि वह 2019 में लोकसभा का चुनाव कन्नौज से लड़ेंगे। वहीं, उनके पिता मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे। गुरुवार को लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में कन्नौज के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर उन्होंने ये घोषणा की। इस दौरान अखिलेश यादव के साथ उनकी पत्नी व कन्नौज की सांसद डिंपल यादव भी मौजूद रहीं। अखिलेश यादव ने कहा कि आज कन्नौज लोकसभा सीट के कार्यकर्ताओं की चुनावी समीक्षा बैठक हो रही है, इसके बाद सभी लोकसभा सीट की तैयारियों की समीक्षा मैं खुद करूंगा और गठबंधन में जाने वाली सीटों पर समय रहते ये सुनिश्चित किया जाएगा कि सपा कार्यकर्ता गठबंधन उम्मीदवार को जिताने का काम करें ।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवारवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बीजेपी अपना परिवारवाद खत्म नहीं कर रही है तो मैंने भी तय किया है कि इस बार मैं खुद कन्नौज से लोकसभा चुनाव लड़ूंगा और नेताजी (मुलायम सिंह यादव) को मैनपुरी लोकसभा सीट से जिताने का काम पार्टी कार्यकर्ता करेंगे। अखिलेश यादव ने चुनाव की रणनीति पर कहा कि जब मैं दूसरे दलों की रणनीति को समझने की कोशिश करता हूं तो समझ आता है कि ये मैनेजमेंट का चुनाव है और अब सपा भी इस रणनीति में बीजेपी को हराने का काम करेगी। हम अपनी रणनीति का खुलासा नहीं करेंगे क्योंकि हमने लगातार चार चुनावों में बीजेपी को हराया है और ये लोग अब बहुत गुस्से में बैठे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोग पहले ‘चाय पर चर्चा’ किया करते थे, अब इन्हें ‘सच्चाई पर चर्चा’ करनी चाहिए क्योंकि ‘संपर्क से समर्थन’ नहीं मिलेगा ‘सच्चाई से समर्थन’ मिलेगा। अखिलेश ने तंज कसा कि उनके (बीजेपी) पास बताने के लिए कुछ नहीं है, अभी भी समाजवादियों द्वारा शुरू किए गए कार्य का फीता ही काट रहे है। जनता को ये समझाना समाजवादियों का काम है क्योंकि ना जाने बीजेपी किस बात पर जनता को गुमराह कर दे।</p>
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                <pubDate>Thu, 14 Jun 2018 15:44:55 +0530</pubDate>
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