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                <title>Shah Satnam ji maharaj - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Shah Satnam ji maharaj RSS Feed</description>
                
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                <title>जिम्मेवारी पर गुरुमंत्र देना&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Maha RehmoKaram Month: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज गुरगद्दी बख्शिश से पहले ही पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज के महान रूहानी हस्ती होने के बारे में इशारे करते रहते। साईं जी के समय गुरुमंत्र के अभिलाषी व्यक्तियों को किसी पुराने सत्संगी द्वारा जिम्मेवारी लेने पर ही गुरुमंत्र दिया जाता था। बेशक पूजनीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/giving-a-guru-mantra-on-responsibility/article-67616"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-02/shah-satnam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Maha RehmoKaram Month: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज गुरगद्दी बख्शिश से पहले ही पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज के महान रूहानी हस्ती होने के बारे में इशारे करते रहते। साईं जी के समय गुरुमंत्र के अभिलाषी व्यक्तियों को किसी पुराने सत्संगी द्वारा जिम्मेवारी लेने पर ही गुरुमंत्र दिया जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">बेशक पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज को अभी गुरुमंत्र की दात प्राप्त नहीं हुई थी फिर भी पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज आपजी के प्रेम को देखते हुए आप जी की जिम्मेवारी पर ही नए व्यक्ति को गुरुमंत्र दे देते। आप जी के अलावा, किसी अन्य व्यक्ति की जिम्मेवारी पर शाह मस्ताना जी महाराज गुरुमंत्र देना मंजूर नहीं करते थे। यदि आप जी किसी भी व्यक्ति की जिम्मेवारी लेते थे तो सार्इं जी उस को तुरंत ही गुरुमंत्र देने की मंजूरी दे देते। Maha RehmoKaram Month</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana Mausam: हरियाणा की ये शानदार फोटो, देखते ही देखते सोशल मीडिया पर हो गई वायरल, जानें हरियाणा के मौसम का हाल" href="http://10.0.0.122:1245/this-amazing-photo-of-haryana-became-viral-on-social-media-in-no-time/">Haryana Mausam: हरियाणा की ये शानदार फोटो, देखते ही देखते सोशल मीडिया पर हो गई वायरल, जानें हरियाणा के मौसम का हाल</a></p>
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                <pubDate>Sat, 22 Feb 2025 17:03:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Shah Satnam Ji Maharaj: सतगुरु की दात का प्यार व सत्कार</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने अपने मुर्शिदे-कामिल को भेंट की जीप Shah Satnam Ji Maharaj: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज व डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही पूज्य परम पिता शाह सतनाम जी महाराज जी के जीवन के साथ जुड़ी अनेक पवित्र निशानियों में एक जीप को पूजनीय परम पिता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/love-and-respect-for-the-gift-of-satguru/article-66809"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/shah-satnam-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने अपने मुर्शिदे-कामिल को भेंट की जीप</h3>
<p style="text-align:justify;">Shah Satnam Ji Maharaj: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज व डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही पूज्य परम पिता शाह सतनाम जी महाराज जी के जीवन के साथ जुड़ी अनेक पवित्र निशानियों में एक जीप को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने गुरूगद्दी पर बिराजमान होने से दो साल पहले अपने प्यारे मुर्शिद बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के लिए सन् 1958 में अमेरिका से मंगवाया था। उन दिनों में विदेश से गाड़ी मंगवाना आसान काम नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;">बुकिंग के बाद ‘विलीज’ कंपनी ने जीप को समुद्री जहाज द्वारा मुम्बई भेजा। डिलीवरी लेने के लिए पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज दिल्ली के एक श्रद्धालु को साथ लेकर मुम्बई पहुंचे व मुम्बई से ट्रक द्वारा जीप को दिल्ली लाया गया। दिल्ली से पूजनीय परम पिता जी खुद जीप चलाकर सरसा पधारे। जब परम पिता जी जीप को लेकर सरसा पहुंचे तो बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज सत्संग करने के लिए नजदीक के गांव लक्कड़ वाली जिला सरसा गए हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी जीप लेकर वहीं पहुंच गए व बेपरवाह जी की हजूरी में गाड़ी को पेश किया। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने जीप को देखा व पूजनीय परम पिता जी व कुछ अन्य श्रद्धालुओं को जीप में बैठाकर डेरा सच्चा सौदा गदराना, श्री जलालआणा साहिब व चोरमार घुमाकर वापिस लक्कड़वाली ले आए। पूजनीय बेपरवाह मस्ताना जी महाराज जहां भी सत्संग करने जाते, इसी जीप का प्रयोग किया करते।</p>
<h3>श्रद्धालु ने दशकों तक अनमोल दात की जान से भी अधिक की संभाल</h3>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय बेपरवाह जी द्वारा चोला बदलने के बाद पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज जी ने भी 5-6 सालों तक इस जीप को अपने पास रखा। एक बार पूजनीय शाह सतनाम जी महाराज ने बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज जी के गुणगान गाने वाले सरसा के एक सेवादार से खुश होकर उसे यह जीप दात के तौर पर दे दी व वचन फरमाया, (‘‘यह जीप जिनकी है वह समय आने पर खुद ही ले जाएंगे।’’)</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद सरसा के प्रेमी गोबिंद मदान ने बेनती करके उस प्रेमी से वह जीप ले ली व अपने मुर्शिद बेपरवाह जी की बतौर निशानी सजा-संवार कर अपने पास रख ली। जीप को मुम्बई भेजकर वहां के मशहूर हंसा बॉडी बिल्डर से उसकी बॉडी बनवाई गई। Shah Satnam Ji Maharaj</p>
<h3>मुम्बई में हंसा बॉडी बिल्डर बहुत ही मशहूर था</h3>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि उस समय मुम्बई में हंसा बॉडी बिल्डर बहुत ही मशहूर था लेकिन बिल्डर के मालिक का कुछ समय पहले ही निधन होने के कारण व्यापार बेहद मंदी के दौर से गुजर रहा था। यह बात सौ फीसदी सच है कि जिस दिन से यह जीप उनकी गैरेज में आई उसी दिन से उनका काम बहुत अच्छा चलने लगा। उसके बाद जीप की नई बॉडी बनवाकर सरसा लाया गया। Shah Satnam Ji Maharaj</p>
<p style="text-align:justify;">मदान ने इस जीप को अपने घर में एक विशेष कमरा बनवाकर इस तरह संभाल कर रखा कि उसके टायर भी जमीन को छूएं नहीं। एक दिन उन्होंने पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां जी को यह अनमोल निशानी सौंपने की अर्ज की। फिर वह दिन भी आया जब 19 अक्तू बर 2006 को पूज्य हजूर पिता जी खुद प्रेमी गोबिंद मदान के घर पधारे व इस जीप को अपने कर कमलों के साथ चलाकर लाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह पूजनीय परम पिता जी के वह वचन पूरे हुए कि ‘‘यह जीप जिनकी है वह समय आने पर खुद ही ले जाएंगे’’ शहनशाह मस्ताना जी लगभग तीन सालों तक गाड़ी में विराजते रहे। लगभग 6 सालों तक पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने अपने पावन कर कमलों से इस गाड़ी को चलाया। अब इस गाड़ी को डेरा सच्चा सौदा में बने रूहानी म्यूजियम में धरोहर के रूप में संभाला हुआ है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–  </strong><a title="Haryana-Punjab Weather: हरियाणा-पंजाब के मौसम में होगा ये बड़ा बदलाव, पढ़ें मौसम विभाग का ताजा अपडेट" href="http://10.0.0.122:1245/there-will-be-a-big-change-in-the-weather-of-haryana-punjab-read-the-latest-update-of-the-meteorological-department/">Haryana-Punjab Weather: हरियाणा-पंजाब के मौसम में होगा ये बड़ा बदलाव, पढ़ें मौसम विभाग का ताजा अपडेट</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
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                <pubDate>Sun, 26 Jan 2025 12:28:02 +0530</pubDate>
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                <title>‘‘बेटा, बहुत भयानक कर्म था, सूली से सूल हो गया। यह साध-संगत की सेवा का ही फल है’’</title>
                                    <description><![CDATA[Source of inspiration : प्रेमी जंगीर सिंह निवासी लोहाखेड़ा, फतेहाबाद सतगुरु की साक्षात रहमत को इस प्रकार बयां करते हैं। ये बात 10 अक्तूबर, 1988 की है। मैं बिजली बोर्ड में लाइनमैन के पद पर नियुक्त था। मुझे मासिक सत्संग पर आश्रम में जाना था, परंतु छुट्टी न मिलने के कारण नहीं जा सका। उसी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/lover-jangir-singh-described-the-true-mercy-of-satguru-in-this-way/article-57246"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/shah-satnam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of inspiration : प्रेमी जंगीर सिंह निवासी लोहाखेड़ा, फतेहाबाद सतगुरु की साक्षात रहमत को इस प्रकार बयां करते हैं। ये बात 10 अक्तूबर, 1988 की है। मैं बिजली बोर्ड में लाइनमैन के पद पर नियुक्त था। मुझे मासिक सत्संग पर आश्रम में जाना था, परंतु छुट्टी न मिलने के कारण नहीं जा सका। उसी शाम को मैं सांगला गाँव में ग्यारह हजार वोल्टेज की बिजली लाइन पर काम कर रहा था। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">अचानक दुर्घटना हुई और बिजली की तार मेरे कन्धे से छू गई और कपड़ों में आग लग गई, जिससे मेरा शरीर बुरी तरह झुलस गया। मैं दो दिन तक अस्पताल में बेहोश रहा। मेरी हालत बेहद गंभीर थी। इस सारी दुर्घटना की जानकारी मेरे रिश्तेदार पुरुषोत्तम लाल के माध्यम से पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज तक पहुँची। पूजनीय परम पिता जी ने पुरुषोत्तम लाल को प्रसाद देते हुए फरमाया, ‘‘यह प्रसाद जंगीर सिंह को जाकर खिला देना।’’ उन्होंने वह प्रसाद लाकर मुझे दे दिया। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">मैंने उस प्रसाद को ग्रहण किया और लगभग 20 दिन में मैं बिल्कुल स्वस्थ हो गया, जबकि डॉक्टरों के अनुसार मुझे ठीक होने में लगभग एक वर्ष लगना था। मैं साध-संगत के सहयोग से मासिक सत्संग में पहुँचा तो पूजनीय परम पिता जी ने वचन फरमाए, ‘‘बेटा, बहुत भयानक कर्म था, सूली से सूल हो गया। यह साध-संगत की सेवा का ही फल है।’’ इस प्रकार पूजनीय परम पिता जी ने मुझे नई जिन्दगी बख़्शी। Shah Satnam Ji</p>
<p><a title="Nasa: नए अंतरिक्ष मिशन को लेकर नासा की बड़ी अपडेट!" href="http://10.0.0.122:1245/astronaut-sunita-williams-new-space-mission-postponed/">Nasa: नए अंतरिक्ष मिशन को लेकर नासा की बड़ी अपडेट!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/lover-jangir-singh-described-the-true-mercy-of-satguru-in-this-way/article-57246</link>
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                <pubDate>Wed, 08 May 2024 11:55:04 +0530</pubDate>
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                <title>सतगुरू जी ने जीव का भयानक कर्म कंकर में बदला</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी ओम प्रकाश, बड़ौत शहर, जिला बागपत (यूपी) से पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की अपार दया-मेहर रहमत का प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार ब्यान करता है:- प्यारे सतगुरू जी ने वचन फरमाया, ‘‘घबराओ ना भाई! वह तो 15 दिनों के बाद अपने आप ही दर्शन करने के लिए यूपी दरबार में आ जाएगा।’’ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/charisma-of-shah-satnam-ji-maharaj/article-49467"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/param-pita-shah-satnam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रेमी ओम प्रकाश, बड़ौत शहर, जिला बागपत (यूपी) से पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की अपार दया-मेहर रहमत का प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार ब्यान करता है:-</p>
<p style="text-align:justify;">प्यारे सतगुरू जी ने वचन फरमाया, ‘‘घबराओ ना भाई! वह तो 15 दिनों के बाद अपने आप ही दर्शन करने के लिए यूपी दरबार में आ जाएगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">3 जुलाई 1980 को जब वह बड़ौत शहर से अपना कारोबार करने के बाद शाम को अपने गांव नसौली जा रहा था। जहां कि वह पहले रहता था। रास्ते में एक सुनसान जगह पर कुछ लुटेरों ने उसे घेर लिया व उस पर एकदम चाकुओं से हमला कर दिया। उस समय वह बुरी तरह जख्मी हो गया। लुटेरों ने उसे मरा हुआ जानकर सड़क के किनारे एक गड्ढ़े में फैंक दिया और भाग गए। थोड़ी देर बाद जब उसे होश आया तो उसने अपने आपको संभाला और किसी न किसी तरह गिरते-पड़ते अपने गांव पहुंच गया। गांव वालों ने उसे वहां से वापिस बड़ौत शहर ले जाकर अस्पताल में दाखिल करवा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उस समय उसके शरीर पर बहुत ही गहरे कई जख्म थे और उनमें से खून बह रहा था। शरीर में से अधिक खून निकल जाने की वजह से उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई थी। डॉक्टरों का कहना था कि वह 6-7 महीने से पहले ठीक नहीं हो सकता। परंतु उसके गांव की साध-संगत ने सिरसा दरबार में आकर पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से उपरोक्त सारी घटना का वर्णन किया तो प्यारे सतगुरू जी ने वचन फरमाया, ‘‘घबराओ ना भाई! वह तो 15 दिनों के बाद अपने आप ही दर्शन करने के लिए यूपी दरबार में आ जाएगा।’’ क्योंकि यूपी दरबार में अंग्रेजी महीने के हर पहले सप्ताह (रविवार) को सत्संग होता है और सच्चे पातशाह जी ने 15 दिनों बाद यानि अगस्त महीने के पहले सप्ताह में वहां जाना</p>
<p style="text-align:justify;">था। कुल मालिक के वचनों अनुसार ठीक 15 दिनों बाद जब प्यारे सतगुरु जी डेरा सच्चा सौदा, बरनावा आश्रम में पहुंचे तो प्रेमी ओमप्रकाश भी अपने सतगुरु जी के दर्शन करने के लिए वहां पहुंच गया। प्रेमी के करीब करीब सारे जख्म भर चुके थे, परंतु उसके हाथ का एक जख्म काफी खराब हो चुका था। उस समय भी उस पर पट्टी बंधी हुई थी। दयालु दातार जी ने प्रेमी को अपने पास बुलाकर उसका हाल-चाल पूछा और उसके हाथ को अपने पवित्र हाथों में लेकर बहुत ही गौर से देखा। वह तो सच्चे पातशाह कुल मालिक का एक अनूठा खेल था। उसे स्पष्ट अनुभव हुआ कि वास्तव में पूज्य सतगुरु जी ने अपनी दृष्टि व अपार रहमत से उसके करोड़ों जन्मों के कर्मों को उन कुछ दिनों में ही काट दिया था। उस समय कुल मालिक जी ने वचन फरमाया, ‘‘भाई! उन बदमाशों को कुल मालिक स्वयं ही जल्दी सजा देगा।’’</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जब ‘अंजू इन्सां अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा चंडीगढ़…" href="http://10.0.0.122:1245/body-donation-of-anju-insan-for-medical-research/">जब ‘अंजू इन्सां अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा चंडीगढ़…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/charisma-of-shah-satnam-ji-maharaj/article-49467</link>
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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 21:07:45 +0530</pubDate>
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                <title>‘प्रेम बहुत बड़ी नियामत’</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘साईं जी, आपका प्रेम ही हमें यहां खींचकर ले आया है।’’ सन् 1956, बागड़ क्षेत्र पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज गांव गंगवा, जिला हिसार में पधारे हुए थे। साध-संगत ने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्तना जी महाराज के ठहरने के लिए एक कच्चे कमरे का प्रबंध किया। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/param-pita-shah-satnam-singh-ji-maharaj-4/article-41276"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/shah-satnam-singh-ji-mahara1.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘साईं जी, आपका प्रेम ही हमें यहां खींचकर ले आया है।’’</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>सन् 1956, बागड़ क्षेत्र</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज गांव गंगवा, जिला हिसार में पधारे हुए थे। साध-संगत ने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्तना जी महाराज के ठहरने के लिए एक कच्चे कमरे का प्रबंध किया। वहां श्री जलालआणा साहिब से परम पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज तथा भक्त मक्खन सिंह जी पूजनीय बेपरवाह जी के दर्शनों के लिए पहुुंचे। पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने जब पूजनीय परम पिता जी को देखा तो बहुत ही खुश हुए और पूछा कि आप कैसे आये? पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘साईं जी, आपका प्रेम ही हमें यहां खींचकर ले आया है।’’ इस पर बेपरवाह जी ने फरमाया, ‘‘प्रेम एक बहुत बड़ी नियामत है। फकीर पे्रेम के वश में होता है, प्रेम एक ऐसा जज्बा है, जिसका नमूना लिखने में नहीं आ सकता।’’</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="कीमती है ये समां, इसे लगाता कहाँ….भजन सुन थिरकने पर मजबूर हुई साध-संगत" href="http://10.0.0.122:1245/saint-dr-msg-5/">कीमती है ये समां, इसे लगाता कहाँ….भजन सुन थिरकने पर मजबूर हुई साध-संगत</a></p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज कितनी ही देर तक पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से वचन विलास करते रहे। अगले दिन वहां पर सत्संग था। शहनशाह जी ने सतगुरू प्रेम के विषय पर सत्संग फरमाया। सत्संग में एक भाई ने एक कविता सुनाई। बेपरवाह जी बहुत खुश हुए और वचन फरमाया, ‘‘जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि।’’ इस सत्संग पर शहनशाह जी ने अनेक जीवों को नाम देकर भवसागर से पार किया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Dec 2022 20:56:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>साईं दा हत्थ साडे हत्थां विच&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[‘याद-ए-मुर्शिद’ पर विशेष संत-सतगुरू परमपिता परमात्मा के भेजे हुए अवतार होते हैं। सतगुरु जीवों को जन्म-मरण से रहित करने के लिए आते हैं। उनके चेहरे से रब्बी नूर का समुन्द्र हमेशा बहता है। संत प्रकृति के उसूलों को मानते हुए इस पंचतत्व भौतिक चोले को बदलते हैं, लेकिन उनका नूर जर्रे-जर्रे में झलकता है। पूजनीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj-4/article-40896"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/shah-satnam-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>‘याद-ए-मुर्शिद’ पर विशेष</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">संत-सतगुरू परमपिता परमात्मा के भेजे हुए अवतार होते हैं। सतगुरु जीवों को जन्म-मरण से रहित करने के लिए आते हैं। उनके चेहरे से रब्बी नूर का समुन्द्र हमेशा बहता है। संत प्रकृति के उसूलों को मानते हुए इस पंचतत्व भौतिक चोले को बदलते हैं, लेकिन उनका नूर जर्रे-जर्रे में झलकता है। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने रूहानियत के इतिहास में नया मील पत्थर कायम करते साध-संगत पर महान परोपकार किया। आप जी ने पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को गुरूगद्दी बख्शिश करते ही यह पावन वचन फरमाए, हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पहला दिन: 31वां याद ए मुर्शिद फ्री आई कैंप की झलकियां" href="http://10.0.0.122:1245/glimpses-of-31st-yaad-e-murshid-free-eye-camp-first-day/">पहला दिन: 31वां याद ए मुर्शिद फ्री आई कैंप की झलकियां</a></p>
<p style="text-align:justify;">भाव पहले पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी के रूप में भी और अब पूज्य गुुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के रूप में भी हम ही काम करेंगे। आज करोड़ों साध-संगत सैंट डॉ. एमएसजी के रूप में पूज्य हजूर पिता जी के प्रति अपार श्रद्धा, प्यार और सत्कार प्रकट करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का पूरा जीवन मानवता और इन्सानियत को समर्पित रहा है। आप जी ने लाखों जीवों का नशा और बुराइयां छुड़वाकर उनको नाम-शब्द के साथ जोड़कर उनका उद्धार किया। आप जी के पूजनीय माता-पिता जी के घर सब दुनियावी पदार्थ मौजूद थे, लेकिन संतान प्राप्ति की कामना अक्सर ही उनको सताती रहती थी। आप जी का अवतरण 25 जनवरी 1919 को श्री जलालआणा साहिब, तहसील कालांवाली, जिला सरसा (हरियाणा) में हुआ। आप जी के अवतार धारण करने से घर में एक रब्बी ज्योत आने का अहसास हुआ। आप जी के माता का नाम पूजनीय माता आस कौर जी और पूजनीय पिता जी का नाम सरदार वरियाम सिंह जी था। आप जी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी बचपन से ही गरीबों के लिए दयालुता रखते थे। पूजनीय माता जी ने आप जी का नाम बचपन में सरदार हरबंस सिंह रखा। आप जी ने बचपन में इन्सानियत के भले के ऐसे कार्य किए जो आप जी को दूसरों से समाज में अलग दर्शाते थे, जिनमें गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह करने में आर्थिक सहयोग करना, लोगों के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराना, धार्मिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना। आप जी बचपन से ही अपने माता जी के साथ अक्सर डेरा सच्चा सौदा आते रहते थे और पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज से अपार रहमतें हासिल करते। बेपरवाह सार्इं जी के दर्शन करने के लिए आप जी के अंदर हमेशा एक अलग ही तड़प रहती।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार दिसंबर 1953 में पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज गांव गदराना में सत्संग फरमाने के लिए पधारे हुए थे और उस समय आप जी उस गांव में अपने किसी रिश्तेदार के घर आए हुए थे। पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज जब सुबह के समय गांव की सैर कर रहे थे तो उन्होंने अपनी लाठी से एक पैड़ (पदचिन्ह)के ऊपर गोल दायरा बनाया और अपने साथ के सेवादारों को फरमाने लगे, ‘‘देखो भाई यह रब्ब की पैड़ है, इधर से रब्ब गया है।’’ लेकिन उस समय पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज की यह बात किसी के समझ में नहीं आई। 14 मार्च 1954 में आप जी को पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज से पवित्र नाम शब्द की अनमोल दात प्राप्त हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">छ सालों का समय बीतने के बाद पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने सेवादारों के हाथ आप जी को एक संदेश भेजते हुए फरमाया कि वह अपना घर गिराकर सारा सामान लेकर आश्रम में आ जाएं। आप जी ने साईं जी के पावन वचनों को सहर्ष स्वीकार करते हुए ज्यों का त्यों ही किया। बेपरवाह सार्इं जी ने आप जी की कड़ी परीक्षा लेते हुए आप जी के घर का सारा सामान गरीबों में बंटवा दिया। 28 फरवरी 1960 को पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने आप जी को डेरा सच्चा सौदा का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया और पावन वचन फरमाए, ‘‘हमने श्री जलालआणा साहिब वाले जैलदार सरदार हरबंस सिंह को सतनाम सिंह बना दिया है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">पावन वचन फरमाते हुए पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने दोनों जहानों की दौलत आप जी की झोली में डाल दी और आप जी को आत्मा से परमात्मा कर दिया। पावन गुरूगद्दी पर विराजमान होने के उपरांत आप जी ने दिन-रात एक करके गाँवों-शहरों में सत्संग फरमाए और लाखों लोगों को नाम-शब्द की अनमोल दात प्रदान की। सत्संगों के दौरान आप जी ने लोगों को नशा, माँसाहार, चरित्रहीनता, धार्मिक भेदभाव, जातपात, पाखंडों और अंधविश्वास से बचाने के लिए जागरूक किया। आपजी ने संदेश दिया कि परमात्मा एक है और सभी उसकी संतान हैं। प्रभु को प्राप्त करने के लिए पैसे, दान-चढ़ावे की नहीं सिर्फ सच्ची भावना व भक्ति की जरूरत है। आप जी को एक महान समाज सुधारक के तौर पर जाना जाने लगा। आप जी ने अनेक आश्रमों का निर्माण करवाया।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के बागपत (बरनावा) आश्रम का निर्माण भी आप जी ने स्वयं करवाया। आप जी ने सरल भाषा में अनेक ग्रंथों की रचना की। आप जी ने गद्दी पर रहते हुए ही पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को डेरा सच्चा सौदा का उत्तराधिकारी घोषित किया। 23 सितंबर 1990 को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को पावन गुरुगद्दी की बख्शिश करते हुए आप जी ने फरमाया, ‘‘हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे।’’ आप जी ने इशारा किया कि हम पूूज्य गुरु जी के रूप में हमेशा साध-संगत के अंग-संग रहेंगे। उस समय ही आप जी ने रूहानियत की दौलत पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की झोली में डाल दी।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी डेरा सच्चा सौदा रूपी बाग को सजा कर 13 दिसंबर 1991 को अनामी धाम जा समाए। भले ही सतगुरु का बिछोड़ा असहनीय होता है लेकिन पूजनीय परम पिता जी द्वारा फरमाए गए पावन वचन, ‘‘हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे’’ की रहमत के रूप में साध-संगत सैंट डॉ. एमएसजी के दर्शनों, वचनों पर चलते हुए रहमतों के समुंद्र दिन-रात लूट रही है। आप जी के जीवन के बारे में लिखना तो गागर में सागर भरने जैसा है। आप जी के जीवन से संबंधित अनेक ही ऐसी साखियां (वृतांत) हैं, जो कि आप जी के बचपन से ही रब्बी जोत होने का अहसास करवाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां जी के पावन नेतृत्व में आज डेरा सच्चा सौदा दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान बनाकर 147 मानवता भलाई के कार्य कर रहा है। हाल ही में समाज में बुरी तरह फैल चुके चिट्टे के प्रकोप के खिलाफ पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने ऐसी आवाज बुलंद की है कि लोग नशों और बुराईयों से पीछा छुड़वाकर राम-नाम से जुड़ने लगे हैं और समाज में बुराईयों का खात्मा होना शुरू हो गया है। अब वह दिन दूर नहीं, जब पूरा समाज नशों से तौबा कर राम-नाम के साथ जुड़ेगा।                                <strong>रवि गुरमा शेरपुर</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Dec 2022 20:24:20 +0530</pubDate>
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                <title>प्यारे सतगुरू जी ने जीव का मौत जैसा भयानक कर्म कंकर में बदला</title>
                                    <description><![CDATA[यह बात नवम्बर, 1972 की है। हम सत्संग सुनने तथा पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के दर्शन करने के लिए सरसा आश्रम में आए हुए थे। हमारे साथ गांव खुईयां मलकाना की एक बहन राम प्यारी भी आई हुई थी। उसका लगभग डेढ़ वर्ष का लड़का जो काफी समय से बीमार था। इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/shah-satnam-ji-maharaj-dera-sacha-sauda/article-34318"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/shah-satnam-singh-ji-12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह बात नवम्बर, 1972 की है। हम सत्संग सुनने तथा पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के दर्शन करने के लिए सरसा आश्रम में आए हुए थे। हमारे साथ गांव खुईयां मलकाना की एक बहन राम प्यारी भी आई हुई थी। उसका लगभग डेढ़ वर्ष का लड़का जो काफी समय से बीमार था। इस समय वह अचेत अवस्था में था व जिसके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। वह उसे पूजनीय परम पिता जी से आशीर्वाद दिलाने के लिए अपने साथ लेकर आई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी स्टेज पर विराजमान थे। शब्दवाणी चल रही थी। सत्संग समाप्ति के बाद वह बहन अपने बीमार बच्चे के बारे में अर्ज करने के लिए पूजनीय परम पिता जी के पास गई और बच्चे की इस हालत को देखकर फूट-फूट कर रोने लगी। पूजनीय परम पिता जी ने मां की ममता और बच्चे की चिंताजनक हालत को देखते हुए फरमाया, ‘‘बेटा, सुमिरन करो और सतगुरू पर विश्वास रखो।’’</p>
<h3><strong>“सतगुरू जी की अनोखी लीला को अपनी आंखों से देखा”</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उस बहन ने फिर रोते हुए अर्ज की, ‘‘हमारे तो केवल आप जी ही हो, हमें आप जी का ही सहारा है।’’ तत्पश्चात पूजनीय परम पिता जी ने कुछ चीनी के दाने मंगवाए और उस बच्चे के मुंह में डाल दिए। उस समय सारी साध-संगत से प्यारे सतगुरू जी की इस अनोखी लीला को अपनी आंखों से देखा। चीनी का तो एक बहाना ही था, वास्तव में यह प्यारे सतगुरू जी की रहमत ही थी। वह बच्चा जो बिल्कुल अचेत पड़ा था, होश में आ गया। यह देखकर सारी साध-संगत खुशी से नाचने लगी।<br />
<strong>संतोष कुमारी, सरसा (हरियाणा)</strong></p>
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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 21:39:12 +0530</pubDate>
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                <title>सतगुरू ने बख्शी नजर</title>
                                    <description><![CDATA[सन् 1975 की बात है। एक बार पूजनीय परम पिता जी शाम की मजलिस समाप्त करके पानी वाली डिग्गी की तरफ इशारा करके सेवादारों को कहने लगे, ‘‘पानी की डिग्गी के पास र्इंट के टुकड़े पड़े हैं, उनको उठाकर काल-बुत के पास वाली जगह पर रख दो।’’ पूजनीय परम पिता जी के हुक्मानुसार मैं भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/gift-of-service-by-shah-satnam-ji-maharaj/article-31198"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/satnam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सन् 1975 की बात है। एक बार पूजनीय परम पिता जी शाम की मजलिस समाप्त करके पानी वाली डिग्गी की तरफ इशारा करके सेवादारों को कहने लगे, ‘‘पानी की डिग्गी के पास र्इंट के टुकड़े पड़े हैं, उनको उठाकर काल-बुत के पास वाली जगह पर रख दो।’’ पूजनीय परम पिता जी के हुक्मानुसार मैं भी ईटों से भरे टोकरे उठाकर ले जाने लगा। इसके पश्चात पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा, जो ये सेवा करेगा, उसकी जायज इच्छा पूरी होगी।’’ पूजनीय परम पिता जी के वचन सुनकर मैं मन ही मन में सोच रहा था कि मेरे पास तो मालिक का दिया सब कुछ है। मैं मालिक से क्या मांगू? सरकारी नौकरी है, गाड़ी है, बड़ा घर है। फिर मैंने सोचा कि अगर मेरा नजर का चश्मा उतर जाए तो अच्छा होगा। मैंने यह बात मन में ही सोची और सेवा करता रहा। सतगुरू जी की रहमत से धीरे-धीरे मुझे बिना चश्में के साफ दिखने लगा। लगभग 14-15 दिन के बाद तो मैंने चश्मा बिल्कुल ही उतार दिया। यही नहीं उसके बाद कभी भी मुझे चश्मा लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ी। यह मालिक की रहमत का प्रत्यक्ष प्रमाण है।</p>
<p style="text-align:justify;">                                                                          –<strong>सचखंड वासी श्री डीडी चावला, जींद (हरियाणा)</strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 05:30:41 +0530</pubDate>
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                <title>कुस्सर में साध-संगत ने मनाया पावन महारहमोकर्म माह</title>
                                    <description><![CDATA[खारियां (सुनील कुमार)। ब्लॉक रामपुरथेड़ी-चक्कां के गांव कुस्सर में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के पावन महारहमोकर्ममाह की खुशी में ब्लॉक स्तर की नामचर्चा का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ ब्लॉक भंगीदास राजाराम इन्सां ने धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा का इलाही नारे के साथ किया। गांव के सेवादारों द्वारा खुशी की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/naamcharcha-held-in-village-kusser-sirsa/article-30954"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/kusser.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>खारियां (सुनील कुमार)।</strong> ब्लॉक रामपुरथेड़ी-चक्कां के गांव कुस्सर में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के पावन महारहमोकर्ममाह की खुशी में ब्लॉक स्तर की नामचर्चा का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ ब्लॉक भंगीदास राजाराम इन्सां ने धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा का इलाही नारे के साथ किया।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव के सेवादारों द्वारा खुशी की इस नामचर्चा के लिए पंडाल को एमएसजी के स्वरूपों, रंग बिरंगी लड़ियों व गुब्बारों से सजाया गया। इस दौरान विभिन्न गावों से आए कविराजों ने भजनों के माध्यम से गुरु महिमा का व्याख्यान कर साध संगत को लाभान्वित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">नामचर्चा के दौरान ब्लॉक भंगीदास राजाराम इन्सां ने डेरा सच्चा सौदा की ओर से पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं से चलाए जा रहे 138 मानवता भलाई के कार्यो को बढ़-चढ़कर करने का आह्वान किया। इसके साथ ही साध संगत को ओबीडी सेवाए भी मुहैया करवाइ गई।</p>
<p style="text-align:justify;">तत्पश्चात पवित्र ग्रंथ के अनमोल वचन पढकर सुनाए गए व कुछ समय सुमिरण कर नामचर्चा का समापन किया गया। इस अवसर पर ब्लॉक के विभिन्न गांवों व पड़ोसी ब्लॉक की साध संगत, समितियों के जिम्मेवार सदस्यों सहित सुजान बहनें मौजूद रही।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Feb 2022 00:15:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चे को बोरी में बांध रहा था बदमाश, परम पिता जी ने खुद प्रकट होकर छुड़ाया</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। मकान नं. 926 मोहल्ला धोबियों वाला बंद गेट सरसा शहर से बीबी ईश्वर देवी परम पूजनीय सतगुरु जी की अपार बख्शिश का एक अद्भुत करिश्मा (Ruhani Karishma) इस प्रकार वर्णन करती है : सन् 1975 की बात है। उस दिन भी दरबार में प्रतिदिन की तरह सुबह की मजलिस लगी हुई थी। उस दिन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/the-miscreant-was-tying-the-child-in-a-sack-param-pita-ji-himself-came-and-rescued-him/article-30243"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/parampita-ji.gif-11.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> मकान नं. 926 मोहल्ला धोबियों वाला बंद गेट सरसा शहर से बीबी ईश्वर देवी परम पूजनीय सतगुरु जी की अपार बख्शिश का एक अद्भुत करिश्मा (Ruhani Karishma) इस प्रकार वर्णन करती है : सन् 1975 की बात है। उस दिन भी दरबार में प्रतिदिन की तरह सुबह की मजलिस लगी हुई थी। उस दिन रक्षा बन्धन के कारण काफी गिनती में संगत दरबार में आई हुई थी। मजलिस के बाद मेहरबान दातार जी ने अपने प्यारे सत्ब्रहमचारियों को तेरा वास में बुलाकर उन्हें अपने पवित्र कर-कमलों के द्वारा रखड़िया (राखियां) तथा कृपा दृष्टि का प्रसाद बख्शकर बेशुभार प्रेम प्रदान किया। कुल मालिक की मौज थी एक बहुत ही सुन्दर छोटी सी राखी सच्चे पातशाह जी ने अपने पवित्र कर-कमलों के द्वारा प्रेमी दीवान चन्द सरसा को देते हुए वचन फरमाया, भाई ! शाम होण तो पहला-पहला इह राखी प्रेमी राम चन्द्र पटवारी दे घर पहुंचा देवीं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्यारे परम पिताजी के हुक्म द्वारा जब प्रेमी दिवान चन्द राखी लेकर हमारे घर पहुंचा तब मेरा सारा परिवार अपने परम दयालु दातार जी की पवित्र सौगात प्राप्त करके बहुत खुश हुआ। कुल मालिक की अपार रहमत को राखी रूप में प्राप्त करके मेरे परिवार को विश्वास हो गया कि हमारे घर पर आज ही लड़के का जन्म होगा और वैसा ही हुआ। वाली दो जहान शहनशाह जी ने हमारे विश्वास को बरकरार रखा। उसी दिन मेरे घर सच्चे पातशाह जी ने अत्यन्त खुशी बख्शी। हमारे यहां पौत्र पैदा हुआ। उसका नाम बेपरवाह जी ने कृष्ण रखा। कुल मालिक की उस प्यारी दात (बच्चा प्राप्त करके सारा परिवार फूले नहीं समाया बड़े यत्न तथा लाड-प्यार से कृष्ण का लालन-पा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">करीब सात वर्ष की आयु में शहनशाह जी उसे नाम की दात प्रदान की। उन्हीं दिनों की बात है। एक दिन कृष्ण अपने मोहल्ले में अकेला ही रहा था। उस समय दिन छिप गया था तथा अंधेरा हो गया था। इस प्रकार बच्चे को देखकर किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे पकड़ लिया, वह आदमी शायद बच्चे उठाने वाले किसी गिरोह का ही सदस्य था। अपनी निश्चित योजना के अधीन ही कृष्ण को बोरी में बंद करके अपने निश्चित स्थान पर ले जाना चाहता था, परन्तु वह तो सर्व-सामर्थ्य सतगुरु का जीव था। उसने तुरंत अपने सतगुरु को याद किया और ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ का नारा लगाया। तत्काल ही उसे शहनशाह जी के दर्शन हुए। बेपरवाह जी के हाथ में वही लाठी थी। वाली दो जहान दातार जी ने कड़कती हुई आवाज में उस आदमी को पूछा, ‘ओह बच्चे नूं कित्थे लिजा रिहा है? इह हुण साडा बच्चा है इसनूं इत्थे ही छड़ दे।’ खुद-खुदा की उस प्रभावशाली आवाज को सुनकर तथा लाठी को देखकर वह बदमाश व्यक्ति डर के मारे थर-थर कांपने लगा। उसे अपनी जान की बन गई। वह कृष्ण को वहीं पर छोड़कर ऐसे भागा कि पीछे मुंह करके देखा तक नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">उसके बाद सच्चे पातशाह जी ने कृष्ण से पूछा, ‘बेटा! तूं पटवारी दा पोता हैं?’ बच्चा भी कुछ घबरा सा गया था। उसने हां में सिर हिलाया। इस पर मेहरबान दाता जी ने कृष्ण को अपने घर जाने के लिए कहते हुए फरमाया, ‘जा बेटा ! तू आपणे घर चला जा। असी इत्ये साहमणे ही खड़े हां।’ कृष्ण उसी वक्त दौड़कर अपने घर चला गया और जाते ही उसने मुझे सब कुछ बता दिया और यह भी कहा कि परम पिताजी ने स्वयं मुझे उस बदमाश से छुड़ाया है और आपजी ही मुझे घर तक छोड़ने आए हैं। अपने नन्हें से भतीजे के मुंह से यह बात सुनते ही मैं (ईश्वर देवी) तुरन्त दौड़कर बाहर आई परन्तु तब तक तो मेहरबान सतगुरु जी वहां से अलोप हो चुके। यह बात तत्काल सारे मोहल्ले में फैल गई कि पूज्य परम पिताजी रामचन्द पटवारी के पोते कृष्ण को बदमाश से छुड़ाकर स्वयं घर छोड़कर गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सतगुरु जी की इस रहमत को लेकर सारे परिवार तथा सारे मोहल्ले में कई दिन तक चर्चा होती रही। सभी परिवार जनों ने वाली दो जहान दयालु दाता जी का लाख-लाख शुक्राना किया कि बेपरवाह जी ने अपने मासूम बच्चे की रक्षा करके प्रेमी परिवार की लाज रखी है। कुल मालिक की रहमत के इस प्रत्यक्ष प्रमाण (Ruhani Karishma) से स्पष्ट है कि सतगुरु जी शब्द रूप में अपने हर जीव के सदा अंग-संग हैं और जहां कहीं भी उस पर कोई भीड़ बनती है तो तत्काल ही उसकी सहायता करते हैं। काल को भी अधिकार नहीं कि वह पूरे सतगुरु के जीव के तरफ आंख उठाकर देख सके, क्योंकि मेहरबान सतगुरु पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज हर समय अपने जीवों की स्वयं रक्षा करते हैं तथा हमेशा उनके अंग-संग रहते हैं।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jan 2022 13:32:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>‘सच्चे दाता शाह सतनाम जी महाराज ने राम नाम का पाठ पढ़ाया’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि साध-संगत को मालूम है कि जनवरी महीना सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल शाह सतनाम जी दाता, रहबर का अवतार माह है। साध-संगत देश-विदेश में अपने प्यार-मोहब्बत, सतगुरु पर दृढ़ विश्वास और श्रद्धा के साथ मनाती है। यानि अल्लाह, वाहेगुरु, राम की भक्ति इबादत में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/shah-satnam-ji-maharaj-taught-the-lesson-of-god-name/article-30033"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/anmol-vachan-ok.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि साध-संगत को मालूम है कि जनवरी महीना सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल शाह सतनाम जी दाता, रहबर का अवतार माह है। साध-संगत देश-विदेश में अपने प्यार-मोहब्बत, सतगुरु पर दृढ़ विश्वास और श्रद्धा के साथ मनाती है। यानि अल्लाह, वाहेगुरु, राम की भक्ति इबादत में आप आगे बढ़ते चले जाएं। मतलब खुशी का बढ़ना, रहमतों का बढ़ना। आप अच्छे-नेक कामों में बढ़ोत्तरी करें। अच्छे नेक कामों में तरक्की करें और मालिक की कृपा दृष्टि के काबिल बनते चले जाएं, ये आपको आशीर्वाद कहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी फरमाते हैं कि सच्चे दाता-रहबर शाह सतनाम जी महाराज, बेपरवाह सार्इं, दया के सागर, रहमत के मालिक इस धरा पर 25 जनवरी 1919 को आए। जीवों को राम-नाम का पाठ पढ़ाया और ये सिखाया कि आप कैसे इस मृत्युलोक में रहते हुए सुखी रह सकते हैं? कैसे खुशियों का दामन हमेशा पकड़े रखना है और किस तरह इस मृत्यु लोक में भगवान को देखा जा सकता है? इन्सान की इच्छा तो आदिकाल से ये जानने की है कि वो सुप्रीम पावर कौन है? पहले भी सार्इंसदान मान चुके हैं यानि प्रलय, महाप्रलय से पहले और युग बीतने से पहले भी मान चुके हैं और आज वाले भी मानना शुरू कर चुके हैं कि सुप्रीम पावर कोई तो है। जैसे एक बार आॅस्ट्रेलिया या किसी देश में रिसर्च किया गया कि जो राम-नाम जपते हैं और जो राम नाम नहीं जपते उनमें क्या फर्क है? उनमें सेंसर और कंप्यूटर की चिप लगाए गए और पूरा कंप्यूटराइज सिस्टम बनाया गया कि वहां जरा सी भी कोई तरंग या रेंज, कोई भी कुछ भी अहसास हो, वो सारा मॉनिटर कर रहे थे। कंप्यूटरों में रिकॉर्ड हो रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन रिसर्चकर्ताओं ने ये माना कि मालिक का नाम जपने वाले बहुत स्ट्रॉन्ग होते हैं। जल्दी से वो गमगीन नहीं होते। दुखी नहीं होते। जो सुबह-शाम प्रेयर, सुमिरन करते हैं, उनकी ये रिडिंग आई कि उनमें सुईसाइड की तो नाममात्र ही भावना होती है, क्योंकि सब मालिक के ऊपर छोड़ा होता है। दूसरी बात लड़ाई झगड़ा आम दुनिया के मुकाबले बहुत कम होता है। उनके अंदर बर्दाश्त शक्ति ग़जब की होती है। तो जब सार्इंसदानों ने कंप्यूटरों पर अध्ययन किया तो उसमें यही रिडिंग आई कि ब्रह्माण्ड से कुछ किरणें आती हैं और जब वो प्रेयर करते हैं तो उनके दिलोदिमाग में टकराती हैं यानि वो किरणें सीधी आती हैं और सीधे दिमाग में चली जाती हैं, जिससे उनके अंदर विल पावर आती है, आत्मविश्वास आता है। तो उनका ये मानना था कि ऐसा होने से वो लोग स्ट्रॉन्ग हो जाते हैं, मजबूत हो जाते हैं। इसलिए उनके ऊपर किसी चीज का जल्दी से असर नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">जब ये बातें सामने आर्इं तो उन्होंने माना कि ब्रह्माण्ड में कोई अदृश्य सुप्रीम पावर है। हम उसे भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब कहते हैं। तो सतगुरु मौला ने उसी की चर्चा की, उस सुप्रीम पावर को आप देख सकते हैं। कोई भी इन्सान वचन सुनकर, गुरुमंत्र लेकर उसका जाप करे और तीन वचनों पर पूरा अमल करे, तो ऐसा करके वो अपने घर में बैठे, परिवार में रहकर उस सुप्रीम पावर का, सबसे बड़ी शक्ति का अहसास भी कर सकते हैं और दर्शन भी कर सकते हैं। तो सतगुरु मौला ने ऐसा नाम दिया, ऐसा बड़ा ही आसान तरीका बताया। जिन जीवों ने सुना, माना वो आज तमाम खुशियां हासिल कर रहे हैं, करते रहेंगे, ये खुशियां बढ़ती ही जानी हैं। ये उनके पवित्र वचन हैं।</p>
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                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jan 2022 05:05:09 +0530</pubDate>
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                <title>दिली इच्छा पूरी की सतगुरू ने</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेम हरी राम सरसा से लिखते हैं कि सन् 1987 में एक दिन उसकी पत्नी ने सुबह-सुबह घर में चाय बनाई तो बच्चों ने चाय मांगी। अचानक वह कहने लगी, ‘‘यह चाय तो मैंने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के लिए बनाई है, आपको और बनाकर देती हूं।’’ बच्चों ने हैरान होते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/satguru-fulfilled-his-hearts-desire/article-29802"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/parampita-ji.gif-1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रेम हरी राम सरसा से लिखते हैं कि सन् 1987 में एक दिन उसकी पत्नी ने सुबह-सुबह घर में चाय बनाई तो बच्चों ने चाय मांगी। अचानक वह कहने लगी, ‘‘यह चाय तो मैंने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के लिए बनाई है, आपको और बनाकर देती हूं।’’ बच्चों ने हैरान होते हुए पूछा, ‘‘पिता जी के आने का कोई प्रोग्राम ही नहीं तो चाय कैसे पिलाओगे?’’ लेकिन उसके मन में तड़प थी। वह दृढ़ता के साथ कहने लगी, ‘‘यह चाय तो मैंने परम पिता जी के लिए ही बनाई है। ‘‘इतने में गली में पूजनीय परम पिता जी के आने की खुशी का शोर सुनाई देने लगा। बाहर जाकर देखा तो टायर वाले की दुकान पर पूजनीय परम पिता जी गाड़ी के टायरों में हवा चैक करवाने के लिए रूके हुए थे। पूजनीय परम पिता जी मलोट सत्संग करने के लिए जा रहे थे। वे भी भागकर पूजनीय परम पिता जी के दर्शन करने के लिए चले गए। उसकी पत्नी ने उस समय जाकर पूजनीय परम पिता जी के सामने अर्ज की, पिता जी हमारे घर चाय पीकर जाओ जी। पूजनीय परम पिताजी ने उसकी विनती स्वीकार की व घर आकर चाय पी। इस प्रकार पूजनीय परम पिता जी ने श्रद्धालु के दिल की इच्छा को पूरा किया।</p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jan 2022 14:32:22 +0530</pubDate>
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