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                <title>Pope Francis Death: पोप फ्रांसिस का निधन, दुनिया भर में शोक की लहर</title>
                                    <description><![CDATA[वेटिकन सिटी (एजेंसी)। Pope Francis Death: ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरू पोप फ्रांसिस का ईस्टर के पवित्र त्योहार के अगले दिन सोमवार की सुबह कासा सांता मार्टा स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। इस समाचार के साथ दुनिया भर में ईसाई जगत में शोक की लहर छा गयी। वह 88 वर्ष के थे। सुबह पौने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pope-francis-dies/article-69954"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/vatican-city.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वेटिकन सिटी (एजेंसी)। </strong>Pope Francis Death: ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरू पोप फ्रांसिस का ईस्टर के पवित्र त्योहार के अगले दिन सोमवार की सुबह कासा सांता मार्टा स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। इस समाचार के साथ दुनिया भर में ईसाई जगत में शोक की लहर छा गयी। वह 88 वर्ष के थे। सुबह पौने दस बजे अपोस्टोलिक चैंबर के कैमरलेंगो, कार्डिनल केविन फैरेल ने कासा सांता मार्टा से पोप फ्रांसिस की मृत्यु की घोषणा की। अपने वह मूलत: अर्जेंटीना के रहने वाले थे। पोप की पदवी हासिल करने के पहले उनका नाम जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो था। Vatican City</p>
<p style="text-align:justify;">कार्डिनल ने कहा, ह्यप्रिय भाइयों और बहनों, मुझे गहरे दुख के साथ हमारे पवित्र पिता फ्रांसिस के निधन की घोषणा करनी पड़ रही है। आज सुबह 7:35 बजे, रोम के बिशप, फ्रांसिस, परमपिता के घर लौट गए। उनका पूरा जीवन प्रभु और उनके चर्च की सेवा के लिए समर्पित था। उन्होंने हमें निष्ठा, साहस और सार्वभौमिक प्रेम के साथ सुसमाचार के मूल्यों को, विशेष रूप से सबसे गरीब और सबसे हाशिए के लोगों के हित में जीना सिखाया। प्रभु यीशु के एक सच्चे शिष्य के रूप में उन्होंने जो उदाहरण पेश किया, उसके लिए अत्यधिक आभार के साथ, हम उनकी सराहना करते हैं। पोप फ्रांसिस की आत्मा एक और त्रिएक ईश्वर के असीम दयालु प्रेम के प्रति समर्पित है। Vatican City</p>
<p style="text-align:justify;">वेटिकन न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार कई दिनों तक ब्रोंकाइटिस से पीड़ित रहने के बाद पोप को इस वर्ष 14 फरवरी को एगोस्टिनो जेमेली पॉलीक्लिनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पोप फ्रांसिस की सेहत धीरे-धीरे बिगड़ती गई, और उनके डॉक्टरों को 18 फरवरी को निमोनिया से पीड़ित होने का पता लगा। करीब 38 दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद, पोप अपनी रिकवरी जारी रखने के लिए कासा सांता मार्टा स्थित अपने वेटिकन निवास पर लौट आए थे। पोप फ्रांसिस को अक्सर सांस की बीमारियों का सामना करना पड़ा, यहां तक ​​कि इन्फ्लूएंजा और फेफड़ों की सूजन के कारण नवंबर 2023 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की पूर्व नियोजित यात्रा भी रद्द करनी पड़ी थी। ईसाइयों के पवित्र पर्व ईस्टर के अगले दिन उनके निधन से ईसाई जगत शोकाकुल है।</p>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल 2024 में, पोप फ्रांसिस ने पोप के अंतिम संस्कार के लिए धार्मिक पुस्तक आॅर्डो एक्जेक्विअरम रोमानी पोंटिफिसिस के दूसरे एवं अद्यतन संस्करण को मंजूरी दी थी, जो अंतिम संस्कार मास का मार्गदर्शन करेगा जिसकी घोषणा अभी तक नहीं की गई है। इस पुस्तक में अंतिम संस्कार के संबंध में कई नए तत्वों का परिचय दिया गया है जिसमें मृत्यु के बाद पोप के नश्वर अवशेषों को कैसे संभाला जाना है, यह भी शामिल है। मृत्यु का पता उस कमरे के बजाय चैपल में लगाया जाता है जहां उसकी मृत्यु हुई थी, और उसके शरीर को तुरंत ताबूत के अंदर रख दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अपोस्टोलिक समारोहों के मास्टर, आर्कबिशप डिएगो रवेली के अनुसार, पोप फ्रांसिस ने अनुरोध किया था कि अंतिम संस्कार को सरल बनाया जाए और ईसा मसीह के पुनर्जीवित शरीर में चर्च के विश्वास को व्यक्त करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए। आर्कबिशप रवेली ने कहा, ह्यनए संस्कार का उद्देश्य इस बात पर और अधिक जोर देना है कि रोमन पोंटिफ का अंतिम संस्कार ईसा मसीह के एक पादरी और शिष्य का है, न कि इस दुनिया के किसी शक्तिशाली व्यक्ति का।</p>
<p style="text-align:justify;">इटली की प्रधानमंत्री जिओर्जिया मेलोनी ने कहा, ह्लपोप फ्रांसिस परमपिता के घर लौट गये हैं। ऐसी खबर जो हमें बहुत दुखी करती है, क्योंकि एक महान व्यक्ति और एक महान पादरी हमें छोड़कर चले गए। मुझे उनकी मित्रता, उनकी सलाह और उनकी शिक्षाओं का आनंद लेने का सौभाग्य मिला, जो कठिनाई और पीड़ा के क्षणों में भी कभी विफल नहीं हुई। वाया क्रूसिस के ध्यान में, उन्होंने हमें उपहार की शक्ति की याद दिलाई, जो हर चीज को फिर से विकसित करती है और मनुष्य की नजर में जो असंगत है उसे समेटने में सक्षम है। और उन्होंने दुनिया से, एक बार फिर, रास्ता बदलने का साहस मांगा, उस रास्ते पर चलने के लिए जो नष्ट नहीं करता, बल्कि फिर से खड़ा करता है, साहस देता है, सुरक्षा करता है। हम इस दिशा में चलेंगे, शांति का मार्ग तलाशेंगे, सबकी भलाई के लिए प्रयास करेंगे और एक अधिक न्यायसंगत और न्यायसंगत समाज का निर्माण करेंगे। उनकी शिक्षा और उनकी विरासत नष्ट नहीं होगी। हम दुख भरे मन से पवित्र पिता को विदा करते हैं, लेकिन हम जानते हैं कि वह अब प्रभु के सान्निध्य में परमशांति में हैं। Vatican City</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने उच्च न्यायालयों के 7 न्यायाधीशों के तबादले की सिफारिश की" href="http://10.0.0.122:1245/supreme-court-collegium-recommends-transfer-of-seven-high-court-judges/">उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने उच्च न्यायालयों के 7 न्यायाधीशों के तबादले की सिफारिश की</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Mon, 21 Apr 2025 17:51:16 +0530</pubDate>
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                <title>Mpox Virus in Europe: यूरोप में तेजी से एमपॉक्स वायरस के फैलने का खतरा!</title>
                                    <description><![CDATA[Mpox Virus in Europe: हेलसिंकी (एजेंसी)। अफ्रीका में फैल रहे क्लेड आई वायरस के कारण होने वाले एमपॉक्स के तेजी से यूरोप में फैलने का खतरा बढ़ गया है। यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र (ECDC) ने जारी रिपोर्ट में यह आशंका जताई है। स्वीडिश पब्लिक हेल्थ एजेंसी के अधिकारियों ने स्वीडन में एमपॉक्स क्लेड […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/there-is-a-risk-of-rapid-spread-of-the-mpox-virus-in-europe/article-61183"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/mpox-virus.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Mpox Virus in Europe: हेलसिंकी (एजेंसी)। अफ्रीका में फैल रहे क्लेड आई वायरस के कारण होने वाले एमपॉक्स के तेजी से यूरोप में फैलने का खतरा बढ़ गया है। यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र (ECDC) ने जारी रिपोर्ट में यह आशंका जताई है। स्वीडिश पब्लिक हेल्थ एजेंसी के अधिकारियों ने स्वीडन में एमपॉक्स क्लेड आई के पहले मामले की पुष्टि की। फिलहाल, एजेंसी के मुख्य महामारी विज्ञानी मैग्नस गिसलेन ने जनता को आश्वस्त किया है कि मौजूदा एमपॉक्स क्लेड क वैरिएंट कोविड-19 संक्रमण से कम जोखिम है। Mpox Virus</p>
<p style="text-align:justify;">स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट मेडिकल यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोगों एवं टीकाकरण की विशेषज्ञ हेलेना हर्वियस अस्कलिंग ने कहा कि एमपॉक्स क्लेड क कोविड-19 से काफी अलग है। नए कोरोनावायरस के विपरीत, एमपॉक्स क्लेड 1 हवा से नहीं फैलता है। इसे फैलने के लिए संक्रमित व्यक्ति के साथ निकट संपर्क की आवश्यकता होती है। इसके लिए एक प्रभावी टीका भी उपलब्ध है। Mpox Virus</p>
<p><a title="MUDA Land Scam : राज्यपाल के निर्देश से बढ़ी कर्नाटक सीएम की मुश्किलें!" href="http://10.0.0.122:1245/karnataka-cms-troubles-increased-due-to-governors-instructions/">MUDA Land Scam : राज्यपाल के निर्देश से बढ़ी कर्नाटक सीएम की मुश्किलें!</a></p>
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                <pubDate>Sat, 17 Aug 2024 18:16:50 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>Commonwealth Judo Championships : यूरोप में प्रताप स्कूल के जतिन ने जीता Gold Medal</title>
                                    <description><![CDATA[– Commonwealth Judo Championships – खरखौदा (सच कहूं/ हेमंत कुमार)। कॉमनवेल्थ जूडो चैम्पियनशिप (Commonwealth Judo Championships) जो कि माल्टा, यूरोप में 4 से 7 अप्रैल को आयोजित हुई जिसमें प्रताप स्कूल के जूडो खिलाड़ी जतिन ने सीनियर व जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक व कैडेट वर्ग में रजत पदक जीतकर देश, प्रदेश व स्कूल का […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/commonwealth-judo-championships/article-56207"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/commonwealth-judo-championships.jpeg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Commonwealth Judo Championships –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>खरखौदा (सच कहूं/ हेमंत कुमार)।</strong> कॉमनवेल्थ जूडो चैम्पियनशिप (Commonwealth Judo Championships) जो कि माल्टा, यूरोप में 4 से 7 अप्रैल को आयोजित हुई जिसमें प्रताप स्कूल के जूडो खिलाड़ी जतिन ने सीनियर व जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक व कैडेट वर्ग में रजत पदक जीतकर देश, प्रदेश व स्कूल का नाम रोशन किया। द्रोणाचार्य अवार्डी ओमप्रकाश दहिया ने बताया कि जतिन एक बेहतरीन खिलाड़ी है । 17 साल की आयु में जतिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 3 पदक व राष्ट्रीय स्तर पर 6 पदक प्राप्त कर चुका है। खेलो के उत्थान के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण ने जूडो खेल सहित पाँच खेलों का खेलो इंडिया सैंटर स्थापित किया है। जतिन भविष्य में ओलम्पिक में भी पदक प्राप्त कर भारतवर्ष का नाम रोशन करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जतिन के दादा रामकंवार ने बताया कि 2018 में प्रताप स्कूल की शिक्षा एवं खेल गतिविधियों को देखते हुए स्कूल हॉस्टल में करवाया था। तभी से जतिन ने जूडो खेल का अभ्यास आरंभ किया आज जतिन ने जो भी उपलब्धि प्राप्त की है उसके लिए हम प्रताप स्कूल प्रबंधन समिति के बहुत आभारी हैं। प्रताप स्कूल में मिलने वाली शिक्षा एवं खेलों की अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं को देखते हुए मेरा पूरा विश्वास है प्रताप स्कूल भारतीय खेलों के उत्थान में मील का पत्थर साबित होगा। पदक जीतने पर जतिन को प्रताप स्कूल प्रबंधन समिति की तरफ से 5100 रू का चैक, स्मृति चिह्न व खेल किट देकर व जतिन के पिता, ताउ व दादा को शॉल भेट कर सम्मानित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पदक विजेता खिलाड़ी जतिन ने बताया कि प्रताप स्कूल में मिलने वाली खेल सुविधाओं, कुशल प्रशिक्षण, अपने परिवार के सहयोग से ही वह यह उपलब्धि प्राप्त कर सका है और भविष्य में ओलम्पिक में भी पदक प्राप्त कर देश व प्रदेश का नाम रोशन करेगा। विद्यालय में पहुँचने पर द्रोणाचार्य अवार्डी ओमप्रकाश दहिया, संस्थापक सतप्रकाश नम्बरदार, प्राचार्या दया दहिया, उपप्राचार्य नरेश कुमार, एकेडमिक डायरेक्टर डॉ सुबोध दहिया, जूडो कोच मोहित पंवार, रोहित दहिया, जतिन के पिता जी संदीप दलाल, ताउ जी रणबीर व दादा जी रामकंवार ने फूल माला पहनाकर स्वागत किया। सभी ने जतिन को भारतवर्ष का नाम रोशन करने पर बधाई दी तथा भविष्य में अच्छा प्रदर्शन कर देश व प्रदेश का नाम रोशन करने का आशीर्वाद दिया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 10 Apr 2024 12:27:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जंगल जल रहे हैं&amp;#8230; रनवे पिघला.. पश्चिमी यूरोप में भीषण गर्मी से लोग बेहाल, स्पेन, पुर्तगाल में 1000 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रुसेल्स (एजेंसी)। पश्चिमी यूरोप इन दिनों जबरदस्त गर्मी का सामना कर रहा है। यहां जंगल में लगी आग के कारण पारा बढ़ता ही चला जा रहा है। बीबीसी ने बुधवार को अपी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। ब्रिटेन जहां आमतौर पर मौसम सर्द या सामान्य बना रहता है, वहां पहली बार लोगों ने 40 डिग्री […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/people-suffering-due-to-severe-heat-in-western-europe-1000-killed-in-spain-portugal/article-35692"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/temprature.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्रुसेल्स (एजेंसी)।</strong> पश्चिमी यूरोप इन दिनों जबरदस्त गर्मी का सामना कर रहा है। यहां जंगल में लगी आग के कारण पारा बढ़ता ही चला जा रहा है। बीबीसी ने बुधवार को अपी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। ब्रिटेन जहां आमतौर पर मौसम सर्द या सामान्य बना रहता है, वहां पहली बार लोगों ने 40 डिग्री सेल्सियस तक की ‘प्रचंड’ गर्मी का सामना किया। इस दौरान मंगलवार को जर्मनी में साल का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। स्थानीय मौसम विभाग ने पश्चिमी शहर ड्यूसबर्ग में स्थानीय समयानुसार 16:00 बजे तापमान 39.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। पुर्तगाल में भीषण लू से मरने वालों की संख्या 1,000 को पार कर गई है। फ्रांस के 64 अलग-अलग जगहों में सोमवार को रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">फ्रांस में हालांकि, पारा अभी भी अपनी अधिकतम सीमा तक नहीं पहुंचा है लेकिन देश का दक्षिण-पश्चिमी हिस्सा पिछले लगभग 30 सालों में जंगल में लगी आग की सबसे बड़ी घटना का अनुभव किया है। बारह जुलाई से आग ने वाइन उत्पादित गिरोंडे क्षेत्र के 19,300 हेक्टेयर (47,700 एकड़) से अधिक क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे लगभग 34,000 लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं स्पेन पुर्तगाल में 1 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आने वाले समय में बारिश की संभावना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">‘ली सोइर’अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, बेल्जियम के डी हान में रेत के टीलों में भी आग लग गई है जिसकी चपेट में कई वाहन आ गए हैं। भीषण गर्मी के बीच ही अब यहां तेज बारिश होने के भी आसार हैं। आने वाले समय में यहां के कुछ हिस्सों में 20-30 मिमी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि नीदरलैंड के मास्ट्रिच में मंगलवार को 39.5 डिग्री सेल्सियस के साथ अब तक की सबसे रिकॉर्ड गर्मी दर्ज की गई। हाल के दिनों में यूरोप के कई देशों में जंगलों में भीषण रूप से आग लगी है। इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्लूएमओ) ने चेतावनी दी थी कि आने वाले समय में हालात और भी बुरे हो सकते हैं।</p>
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                <pubDate>Wed, 20 Jul 2022 13:24:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>यूरोप को रूस विरोधी प्रतिबंधों के परिणाम भुगतने होंगे: रूसी मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[मॉस्को (एजेंसी)। रूसी संघ के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर पंकिन ने कहा है कि यूक्रेन में सैन्य अभियान को लेकर रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के परिणाम यूरोप को भुगतने होंगे। समाचार पत्र इजवेस्टिया को दिए अपने साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘आप हम पर लगाए गए प्रतिबंधों के प्रभाव अभी से देख सकते हैं, जो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/europe-will-face-consequences-of-anti-russian-sanctions-russian-minister/article-31393"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/russian.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मॉस्को (एजेंसी)।</strong> रूसी संघ के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर पंकिन ने कहा है कि यूक्रेन में सैन्य अभियान को लेकर रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के परिणाम यूरोप को भुगतने होंगे। समाचार पत्र इजवेस्टिया को दिए अपने साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘आप हम पर लगाए गए प्रतिबंधों के प्रभाव अभी से देख सकते हैं, जो पश्चिमी यूरोप पर भी पड़ने वाला है। ये हम पर निर्भरशील हैं । हालांकि ये इसलिए नहीं प्रभावित होंगे कि हम ऊर्जा की आपूर्ति को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं बल्कि इसलिए क्योंकि हम अपने समझौतों और उनमें वर्णित अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी पूरा करते हैं।’</p>
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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 11:04:20 +0530</pubDate>
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                <title>रूस पर लगे प्रतिबन्धों से यूरोप व भारत को भी आफत</title>
                                    <description><![CDATA[रूस-यूक्रेन युद्ध में बेलारूस का कथित तौर पर शामिल होना चौंकाता नहीं है। इस जंग को लेकर आहट पहले से ही सुनी जा रही थी। रूस पिछले कई वर्षों से यही कहता आ रहा था कि नाटो अपने हथियार लेकर मॉस्को के करीब न आए। लेकिन इसके विपरीत नाटो का न केवल विस्तार होता गया, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/europe-and-india-will-also-suffer-due-to-sanctions-on-russia/article-31325"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/european-union1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रूस-यूक्रेन युद्ध में बेलारूस का कथित तौर पर शामिल होना चौंकाता नहीं है। इस जंग को लेकर आहट पहले से ही सुनी जा रही थी। रूस पिछले कई वर्षों से यही कहता आ रहा था कि नाटो अपने हथियार लेकर मॉस्को के करीब न आए। लेकिन इसके विपरीत नाटो का न केवल विस्तार होता गया, बल्कि पूर्व के सोवियत संघ के देशों में लोकतंत्र के समर्थन में हुए सत्ता-विरोधी आंदोलन सफलतापूर्वक संपन्न भी हुए। ऐसे में जब रूस की चिढ़ के करीब नाटो पहुंच गया, तो राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया। जाहिर है, तनाव काफी पहले से था। बेशक, बेलारूस प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से युद्ध का हिस्सा है, लेकिन दबाव रूस पर कहीं ज्यादा है। पश्चिम और पूर्वी यूरोप के देश खुलकर यूक्रेन के समर्थन में आ गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नाटो ने भी एलान किया है कि वह भले अपने सैनिकों को यूक्रेन नहीं भेज रहा, लेकिन उसे सभी सैन्य साजो-सामान जरूर मुहैया करा रहा है। यूक्रेन की सरकार ने भी तकरीबन अपने सभी नागरिकों को हथियार दे दिए हैं और वे सभी दुश्मन सेना के खिलाफ मोर्चा संभाल चुके हैं। अब रूस के पास दो ही रास्ते थे। पहला, आर्थिक प्रतिबंधों को देखते हुए वह अपने साथ अन्य देशों को भी जोड़े, और दूसरा उपाय यह था कि अपनी आक्रामकता बढ़ाए। निस्संदेह, रूस ने यूक्रेन के साथ जो किया है, वह संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के खिलाफ है, लेकिन अमेरिका व उसके सहयोगी देश जो कर रहे थे, वह इन नीतियों के कितनी करीब है, उस पर भी बहस होनी चाहिए, जो शायद ही कभी हो सकेगी। दिक्कत यह भी है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय संघर्ष तभी होते हैं, जब हर पक्ष खुद को सही और विपक्ष को गलत मान बैठता है। इसलिए, दुनिया के तमाम देशों को इससे ऊपर उठना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत फिलहाल इस तनातनी से खुद को अलग रखने में सफल रहा है, लेकिन ऐसा कब तक बना रहेगा, यह कहना मुश्किल है। एक पहल यह भी हो सकती है कि इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल देशों को यह बताया जाए कि रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों से परोक्ष रूप से भारत भी प्रभावित हो रहा है। उनको यह एहसास दिलाना होगा कि रूस से निकलकर कंपनियां अगर भारत का रुख करती हैं, तो बेहतर है, अन्यथा इन कंपनियों का अन्य देशों में जाना हमें फायदा नहीं पहुंचाएगा। दरअसल, रूस पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनसे यूरोप में फार्मा, कृषि उत्पाद, गैस आदि उत्पादों के आयात प्रभावित नहीं होते। ऐसा इसलिए किया गया है, क्योंकि इनका विकल्प यूरोपीय देशों के पास नहीं है। जब तक अमेरिका उनको कोई विकल्प नहीं देता, रूस से इन चीजों की आपूर्ति होती रहेगी। हमें भी कोई उपाय तलाशना चाहिए।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Mar 2022 10:05:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>यूरोप में स्थापित हो स्थिरता और शांति</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिमी मुल्कों की खुफिया एजेंसियां यह चेतावनी निरंतर प्रदान कर रही हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का खतरा बना हुआ है। यूक्रेन और रूस की सरहद पर रूस की तकरीबन एक लाख फौज विगत अनेक हफ्तों से तैनात रही है। प्रबल आशंका है कि आगामी वक्त में रूस की फौज की तादाद में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/stability-and-peace-should-be-established-in-europe/article-30653"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/biden-leads-in-georgia-but-results-are-likely-to-be-change.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिमी मुल्कों की खुफिया एजेंसियां यह चेतावनी निरंतर प्रदान कर रही हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का खतरा बना हुआ है। यूक्रेन और रूस की सरहद पर रूस की तकरीबन एक लाख फौज विगत अनेक हफ्तों से तैनात रही है। प्रबल आशंका है कि आगामी वक्त में रूस की फौज की तादाद में बढ़ौतरी हो सकती है। अमेरिकन राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन को सैन्य इमदाद प्रदान करने का हुक्म जारी कर दिया है। अत: इसी सप्ताह अमेरिकन सैन्य सामग्री की प्रथम खेप यूक्रेन पहुंच चुकी है। ब्रिटिश विदेश मंत्रालय का कहना है ब्रिटिश सरकार यूक्रेन को टैंक रोधी हथियार और बख़्तरबंद गाड़ियां भी मुहैया करा रही है। अमेरिकन राष्ट्रपति जो बाइडन का कहना है कि उनको प्रतीत होता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी फौज को यूक्रेन में सैन्य दखंलदाजी अंजाम देने का हुक्म दे सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति जो बाइडन के मुताबिक रूस की सैन्य दखंलदाजी को भी यूक्रेन पर आक्रमण ही समझा जाएगा। नॉटो सैन्य फ्रंट के यूरोपीयन देशों ने गंभीर आशंका व्यक्त की है कि युद्ध के कगार पर खड़े हुए रूस और यूक्रेन के मध्य एक भी गोली चल गई, तो वह विस्फोटक चिंगारी बनकर, वस्तुत: समस्त यूरोप को युद्ध की भीषण विभीषिका में झोंक सकती है। अंतराष्ट्रीय संबधों के प्रख्यात विश्लेषकों के मुताबिक द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात यह यूरोप में उत्पन्न हुआ सबसे विकट सैन्य तनाव का दौर है। रूस की पुतिन हुकूमत चाहती है कि पूर्वी यूरोप के तमाम पूर्व कम्युनिस्ट मुल्कों में नॉटो सैन्य संगठन को अपनी सैन्य गतिविधियों का तत्काल परित्याग कर देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">रूसी हुकूमत चाहती है कि पूर्वी यूरोप के समस्त पूर्व कम्युनिस्ट देशों को जोकि ऩाटो सैन्य फ्रंट के सदस्य देश बन चुके हैं, उन तमाम देशों की फौज की तादाद और नॉटो से प्राप्त होने वाले हथियारों की तादाद तय कर दी जाए। यूक्रेन सैन्य संकट में अमेरिका वस्तुत: भारत को नॉटो सैन्य फ्रंट के पक्ष में देखना चाहता है। वस्तु स्थिति यह है कि भारत रूस के अधिक निकट रहा है। विगत सत्तर वर्षों से भारत का रूस से सामरिक संबंध है। भारत ने यूएस व रूस के मध्य कूटनीतिक संतुलन को कायम रखा है। भारतीय प्रतिनिधि ने यूरोप में स्थिरता और शांति स्थापित करने की अपील की है। रूस के साथ कायम रहे हैं, ऐसी स्थिति में भारत को यूक्रेन संकट का निदान निकालने की पहल अंजाम देनी चाहिए।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Feb 2022 09:58:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूरोप में छह माह रह सकता है गैस संकट : वुसिक</title>
                                    <description><![CDATA[बेलग्रेड (एजेंसी)। सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वूसिक ने कहा कि यूरोप को कम से कम छह महीने गैस के संकट से जूझना पड़ सकता है। वुसिक ने बेलग्रेड में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मेजबानी के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह संकट अगले छह महीनों में और संभवत: लंबे समय तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/gas-crisis-may-last-six-months-in-europe-vucic/article-27545"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/aleksandar-vucic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेलग्रेड (एजेंसी)।</strong> सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वूसिक ने कहा कि यूरोप को कम से कम छह महीने गैस के संकट से जूझना पड़ सकता है। वुसिक ने बेलग्रेड में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मेजबानी के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह संकट अगले छह महीनों में और संभवत: लंबे समय तक अपने आप समाप्त नहीं होगा। इसके समाधान में दो वर्ष लग सकते हैं। उन्होंने गैस की कमी के समाधान के लिए यूरोप को अक्षय ऊर्जा स्रोतों निर्भरता बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि वे दीर्घकालिक समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं करें। रूस को छोड़कर आप किसके साथ दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं और उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया। राजनीतिक कारणों से, आर्थिक कारणों से नहीं।’</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Oct 2021 11:26:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगलादेश ने ब्रिटेन को छोड़ यूरोप जाने वाली सभी उड़ानें स्थगित की</title>
                                    <description><![CDATA[ढाका (एजेंसी)। बंगलादेश ने कोरोना वायरस (कोविड-19) के दो नये मामलों की पुष्टि होने के बाद उससे निपटने के लिये ब्रिटेन को छोड़कर यूरोप जाने वाली सभी उड़ानों को 31 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया है। बंगलादेश के विदेश मंत्री ए के अब्दुल मोमीन ने ढाका में पत्रकारों को संबोधित करते हुए घोषणा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/bangladesh-postponed-all-flights-to-europe/article-13678"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/air-strikes-pakistan-opens-airspace-for-flights-flying-from-india-after-139-days.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका (एजेंसी)।</strong> बंगलादेश ने कोरोना वायरस (कोविड-19) के दो नये मामलों की पुष्टि होने के बाद उससे निपटने के लिये ब्रिटेन को छोड़कर यूरोप जाने वाली सभी उड़ानों को 31 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया है। बंगलादेश के विदेश मंत्री ए के अब्दुल मोमीन ने ढाका में पत्रकारों को संबोधित करते हुए घोषणा की कि यह निलंबन सोमवार से शुरू होकर 31 मार्च तक चलेगा। उन्होंने कहा कि जिन देशों ने बंगलादेश के साथ उड़ानें स्थगित की हैं, उनके यात्रियों को देश में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।</p>
<h3>इटली और जर्मनी से आए दो मरीजों को निगरानी में रखा</h3>
<p style="text-align:justify;">यह प्रतिबंध उन देशों के लिए भी प्रभावी होगा जो पहले से ही अपनी सीमाओं में प्रवेश को प्रतिबंधित कर चुके हैं जिनमें भारत, सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे देश शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन बंगलादेश के इंस्टीट्यूट आॅफ एपिडेमियोलॉजी, डिजीज कंट्रोल एंड रिसर्च (आईईडीसीआर) के प्रमुख वैज्ञानिक अधिकारी एएसएम आलमगीर ने कहा कि हाल ही में इटली और जर्मनी से आए दो मरीजों को निगरानी में रखा गया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2020 13:18:38 +0530</pubDate>
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                <title>ईयू के राजनीतिक तूफान में फंसे प्रवासी पहुंचेंगे स्पेन</title>
                                    <description><![CDATA[यूरोप में व्यापक पैमाने पर बहस शुरू वेलेंसिया (Varta): स्पेन के वेलेंसिया बंदरगाह पर रविवार को नावों पर सवार 620 प्रवासियों के साथ नौ सेना का एक काफिला पहुंचेगा। इसके साथ ही प्रवासियों द्वारा समुद्र में बिताये नौ दिनों की भयावह यात्रा का अंत हो जाएगा लेकिन इस घटना को लेकर आप्रवासन को संभलने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/the-debate-started-in-europe-on-a-widespread-scale/article-4241"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/yurop.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">यूरोप में व्यापक पैमाने पर बहस शुरू</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>वेलेंसिया (Varta):</strong></p>
<p style="text-align:justify;">स्पेन के वेलेंसिया बंदरगाह पर रविवार को नावों पर सवार 620 प्रवासियों के साथ नौ सेना का एक काफिला पहुंचेगा। इसके साथ ही प्रवासियों द्वारा समुद्र में बिताये नौ दिनों की भयावह यात्रा का अंत हो जाएगा लेकिन इस घटना को लेकर आप्रवासन को संभलने के तरीके पर यूरोप में व्यापक पैमाने पर बहस शुरू हो गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पेन ने दान से चलने वाले जहाज पर सवार उप सहारा अफ्रीकी समूह के प्रवासियों को गत सप्ताह अपने यहां शरण देने की पेशकश की थी। उस समय जहाज 700 समुद्री मील की दूरी पर था और इटली तथा माल्टा ने इसे अपने बंदरगाहों पर शरण देने से इंकार कर दिया था। इटली की नई सरकार ने जहाज को अपने अप्रवासी विरोधी रवैये पर जोर देने के लिए इस्तेमाल किया। पर इसके तुरंत बाद करीब एक हफ्ते का कार्यकाल पूरा करने वाले स्पेनिश प्रधान मंत्री पेड्रो सांचेज़ को अपना उदार रुख दिखाने का बेहतर अवसर मिला।</p>
<h1 style="text-align:center;">लोग यूरोपीय मूल्यों, एकजुटता और समर्थन की मांग<br />
करने के लिए यूरोप आ रहे हैं</h1>
<p style="text-align:justify;">लेकिन प्रवासियों की दुर्दशा ने गरीबी और संघर्ष से भागने वाले लोगों की बड़ी संख्या के प्रबंधन के तरीके पर सहमत होने के लिए यूरोपीय संघ की विफलता पर प्रकाश डाला है। रेड क्रॉस के महासचिव इल्हाद एज सी ने शनिवार को वेलेंसिया में कहा,“लोग यूरोपीय मूल्यों, एकजुटता और समर्थन की मांग करने के लिए यूरोप आ रहे हैं। इससे कम कुछ भी यूरोप (का) के साथ विश्वासघात है।”</p>
<p style="text-align:justify;">स्वयंसेवकों, अनुवादकों, पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों सहित 2,320 कर्मचारी प्रवासियों और दो इतालवी जहाजों का इंतजार कर रहे हैं, जिन्होंने प्रवासियों की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए अपने जहाज साझा किये। स्पेनिश रेड क्रॉस के अधिकारियों ने कहा कि जैसे ही नावें आती हैं, उनपर सवार सात गर्भवती महिलाओं को तुरंत चेक-अप के लिए जमीन पर लाया जाएगा और 123 नाबालिगों सहित नावों पर सवार हर किसी व्यक्ति का मनोवैज्ञानिक ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इटली में प्रवासी विरोधी भावनायें बढ़ी हैं क्योंकि पिछले पांच वर्षों में 600,000 से अधिक लोग वहां पहुंचे हैं, जो राष्ट्रवादी लीग की गठबंधन सरकार को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। स्पेन में यह संख्या अभी काफी कम है लेकिन इसमें तेजी से वृद्धि हो रही है।</p>
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                <pubDate>Sun, 17 Jun 2018 09:01:46 +0530</pubDate>
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